samacharsecretary.com

चुनावी मैदान में कौन उतरेगा? अनंत सिंह ने बेटे को लेकर खोले पत्ते

मोकामा मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि अब वो आगे चुनाव नहीं लड़ेंगे। कुछ दिनों पहले अनंत सिंह ने अपने चुनाव ना लड़ने का ऐलान करते वक्त यह भी कहा था कि अब आगे उनके बेटे चुनाव लड़ेंगे। अनंत सिंह के तीन बेटे हैं। तो अब सवाल यह उठ रहे हैं कि अनंत सिंह अपने तीन बेटों में से किसे चुनावी रण में उतारेंगे? जब अनंत सिंह से पूछा गया कि नीतीश कुमार के बेटे राजनिति में आ चुके हैं तो क्या अब वो भी अपने बेटे को चुनाव लड़वाएंगे। तब इसपर अनंत सिंह ने कहा कि जनता की जो सेवा करेगा उसको हम चुनाव लड़वाएंगे। हमको तीन बेटे हैं। तीनों को हम जाचेंगे कि जनता किसे चाहती है और जनता का रुझान क्या है। कौन जनता की सेवा में जाता है। दुकान से लाने की चीज नहीं है ना कि हम लाकर दे देंगे। मेहनत करना पड़ेगा। जनता की सेवा करनी होगी। काम करना होगा। जो बढ़िया करेगा वो मोकामा का विधायक रहेगा। बता दें कि मोकामा बिहार की हॉट सीट मानी जाती है। अनंत सिंह से जब पूछा गया कि नीतीश कुमार तो अब दिल्ली जा रहे हैं? तब इसपर अनंत सिंह ने कहा कि हां, वो तो जा रहे हैं। दिल्ली कोई विदेश थोड़े ना है। दिन भर में चार बार आदमी दिल्ली से आना-जाना करता है। निशांत को लेकर अनंत सिंह ने कहा कि उनका राजनीति में एक्टिव होना जरूरी था। उनको सीएम बनना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या नीतीश कुमार के बाद उनको भी दिल्ली जाने की इच्छा है? तब अनंत सिंह ने इसपर कहा कि वो तो दिल्ली आते-जाते ही रहते हैं। जमानत पर जेल से बाहर आए हैं अनंत सिंह बहरहाल आपको बता दें कि पटना उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष बिहार में विधानसभा चुनाव के दौरान दुलार चंद यादव की हत्या के मामले में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधायक अनंत सिंह को बृहस्पतिवार को जमानत दे दी थी। अनंत सिंह को एक नवंबर को गिरफ्तार किया गया था और उन पर हत्या की साजिश रचने का आरोप है। अनंत सिंह ने मोकामा विधानसभा सीट से जेल में रहते हुए चुनाव जीता था और राष्ट्रीय जनता दल ( राजद) की वीणा सिंह को 28,000 से अधिक मतों से हराया था। न्यायमूर्ति रुद्र प्रकाश मिश्रा की पीठ ने 15,000 रुपये के मुचलके पर सिंह को जमानत प्रदान की। अदालत ने आदेश में कहा, "याचिकाकर्ता मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा और न ही किसी गवाह को प्रभावित या धमकाएगा।" दुलारचंद यादव, चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन कर रहे थे। दुलारचंद यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, हृदय और फेफड़ों में भारी वस्तु से लगी चोट के कारण पहुंचे आघात से कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर के कारण उनकी मौत हुई। मोकामा सीट पर 1990 से है कब्जा मोकामा विधानसभा सीट पर 1990 से अनंत सिंह के परिवार का कब्जा रहा है फिर चाहे सरकारी किसी भी पार्टी की रही हो। अनंत सिंह ने वर्ष 2022 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम से जुड़े एक मामले में दोषसिद्धि के कारण विधानसभा की सदस्यता समाप्त होने पर यह सीट छोड़ दी थी। इस सीट पर हुए उपचुनाव में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने जीत हासिल की थी। उच्च न्यायालय ने हालांकि बाद में उन्हें उस मामले में बरी कर दिया था।

दुलारचंद मर्डर केस: बाहुबली अनंत सिंह को 4 महीने बाद मिली जमानत

 पटना पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार 19 मार्च 2026 को जेडीयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्या मामले में जमानत दे दी है. अनंत सिंह पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हुए इस हत्याकांड के आरोप में पटना की बेऊर जेल में बंद थे। कोर्ट ने बाहुबली विधायक की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया. हत्याकांड से जुड़ा यह मामला अक्टूबर 2025 का है, जब मोकामा में चुनावी प्रचार के दौरान जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पुलिस ने अनंत सिंह को मुख्य आरोपी मानते हुए गिरफ्तार किया था. इससे पहले निचली अदालतों ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं, लेकिन अब हाईकोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद वे जल्द ही जेल से बाहर आएंगे। क्या है पूरा मामला? 30 अक्टूबर 2025 को मोकामा के घोसवरी थाना क्षेत्र के बसावनचक में दुलारचंद यादव की हत्या हुई थी. दुलारचंद यादव आरजेडी नेता रहे थे और मोकामा से जनसुराज के प्रत्याशी के लिए प्रचार कर रहे थे. हत्या का आरोप अनंत सिंह पर लगाया गया था। चुनावी प्रक्रिया के बीच ही 1 नंवबर की रात अनंत सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. इसके बाद, 2 नवंबर को कोर्ट में पेश करने के बाद बेऊर जेल में डाला गया था. करीब साढ़े 4 महीने बाद अनंत सिंह को जमानत मिली है। अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की. अनंत सिंह 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव में वोटिंग के विधानसभा पहुंचे थे और इस दौरान कहा था कि वो जल्द ही जेल से बाहर आएंगे। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद अनंत सिंह ने भी ऐलान कर दिया है कि वे आगे अब चुनाव नहीं लड़ेंगे. मोकामा से आगे उनके बड़े बेटे चुनाव लड़ेंगे।

बिहार के बाहुबली विधायक अनंत सिंह का बड़ा बयान- “अब चुनाव नहीं लड़ूंगा, आगे मेरे बच्चे संभालेंगे राजनीति”

पटना: बिहार में राज्यसभा चुनाव के दौरान बाहुबली नेता अनंत सिंह वोट डालने के लिए पहुंचे.  मतदान करने के बाद वो फिर से जेल लौट गए. इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कई अहम बयान दिए. अनंत सिंह ने  ऐलान किया कि अब वे आगे कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि अब उनके बच्चे ही राजनीति में आगे बढ़ेंगे और चुनाव लड़ेंगे. बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा के बाद ही अनंत सिंह ने यह फैसला लिया है. फिलहाल उनके इस बयान से बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है. अनंत सिंह ने दावा किया कि एनडीए के सभी पांचों उम्मीदवार चुनाव जीतेंगे. उन्होंने कहा कि गठबंधन मजबूत है और सभी प्रत्याशियों की जीत तय मानी जा रही है. मुख्यमंत्री पद को लेकर भी अनंत सिंह ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि निशांत कुमार में मुख्यमंत्री बनने के सभी गुण मौजूद हैं. हालांकि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, यह फैसला बड़े नेता करेंगे. पिछले साल मिली थी धमाकेदार जीत बता दें कि पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह को धमाकेदार जीत मिली थी. उन्होंने मोकामा सीट से 28,206 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी. अनंत सिंह ने आरजेडी की उम्मीदवार वीणा देवी को हराया था. अनंत सिंह को 91,416 वोट मिले, जबकि वीणा देवी को 63,210 वोट मिले. जेल में रहने के बावजूद अनंत सिंह ने ये चुनाव जीता था. 3 फरवरी 2026 को उन्हें जेल से पुलिस की गाड़ी में बिहार विधानसभा लाया गया. जहां उन्होंने विधायक पद की शपथ ली. शपथ लेने के बाद उन्हें फिर से जेल वापस ले जाया गया. अनंत सिंह क्यों हैं जेल में? अनंत सिंह इस समय जेल में हैं. उन पर प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलार चंद यादव की हत्या के मामले में शामिल होने का आरोप है. 1 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें गिरफ्तार किया गया था. ये गिरफ्तारी उनके समर्थकों और यादव के लोगों के बीच हुई झड़प के बाद हुई, जिसमें दुलार चंद यादव की मौत हो गई थी. पटना की एक अदालत ने उन्हें बेऊर जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया. नवंबर 2025 में स्पेशल MP-MLA कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी. अब इस फैसले को पटना हाई कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है. अनंत सिंह का चुनावी सफर अनंत सिंह ने 2005 में जेडीयू (JD(U)) के टिकट पर मोकामा सीट से पहली बार विधायक का चुनाव जीता था. इसके बाद वह कुल 6 बार विधायक चुने जा चुके हैं. उन्होंने 2005, 2010, 2015, 2020 और 2025 में चुनाव जीता. अलग-अलग चुनावों में उन्होंने कभी किसी पार्टी के टिकट पर तो कभी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की.     2005 – पहली बार मोकामा से विधायक बने (JDU के टिकट पर)     2010 – दूसरी बार जीत हासिल की (JDU)     2015 – तीसरी बार जीत (निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में)     2020- चौथी बार जीत (RJD के टिकट पर)     2022-आर्म्स केस में सजा के बाद उनकी सदस्यता चली गई. इस दौरान उनकी पत्नी नीलम देवी ने उपचुनाव जीतकर सीट बरकरार रखी.     2025- छठी बार मोकामा सीट से जीत (JDU). जबकि वे उस समय जेल में थे और RJD की वीणा देवी को करीब 28,206 वोटों से हराया.  

जेल से एंबुलेंस से विधानसभा पहुंचे अनंत सिंह ने ली शपथ

पटना. बाहुबली नेता अनंत सिंह ने मंगलवार को बिहार विधानसभा में विधायक पद की शपथ ली। स्वास्थ्य कारणों से उन्हें बेऊर जेल से एंबुलेंस के जरिए विधानसभा लाया गया। शपथ ग्रहण के दौरान विधानसभा परिसर और उसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पूरे कार्यक्रम पर प्रशासन की कड़ी नजर बनी रही। किसी भी तरह की भीड़ को अनुमति नहीं दी गई। बिना शपथ पत्र पढ़े दिलाई गई शपथ अनंत सिंह ने शपथ पत्र पढ़े बिना ही विधायक पद की शपथ ली। शपथ पूरी होते ही वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उनके माथे पर लगे तिलक के बारे में भी पूछा। इसके बाद अनंत सिंह अपनी निर्धारित सीट पर जाकर बैठ गए। सदन में मौजूद सदस्य यह दृश्य देखते रहे। तबीयत खराब होने का दिया हवाला मीडिया से बातचीत में अनंत सिंह ने कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं होने के कारण शपथ लेने में देरी हुई। उन्होंने बताया कि अदालत की अनुमति मिलने के बाद ही वे विधानसभा पहुंचे हैं। अनंत सिंह ने साफ कहा कि जेल से बाहर आना उनके हाथ में नहीं है। उन्होंने कहा कि जब जज साहब चाहेंगे, तभी वे जेल से बाहर आएंगे। फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं। कोर्ट ने सिर्फ शपथ के लिए दी इजाजत पटना सिविल कोर्ट के आदेश के बाद अनंत सिंह के शपथ ग्रहण का रास्ता साफ हुआ। हालांकि कोर्ट ने उन्हें केवल शपथ लेने की ही अनुमति दी है। दुलारचंद यादव हत्याकांड में उन्हें अब तक जमानत नहीं मिली है। शपथ समारोह के अलावा किसी भी अन्य गतिविधि में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई है। शपथ के बाद उन्हें वापस बेऊर जेल भेजा जाएगा। वे दोबारा न्यायिक हिरासत में रहेंगे। विधानसभा परिसर छावनी में तब्दील अनंत सिंह को जेल से विधानसभा तक लाने और वापस ले जाने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई। एस्कॉर्ट वाहन और क्विक रिस्पॉन्स टीम को तैनात किया गया था। विधानसभा परिसर के अंदर और बाहर अतिरिक्त पुलिस बल मौजूद रहा। सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी गई। समर्थकों के किसी भी तरह के जमावड़े पर पूरी तरह रोक लगाई गई थी। प्रवेश द्वारों पर सघन जांच की गई। हाईकोर्ट में जमानत पर अब भी इंतजार अनंत सिंह पिछले करीब तीन महीनों से बेऊर जेल में बंद हैं। सिविल कोर्ट से उनकी जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने 24 दिसंबर को पटना हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। जिस पीठ में मामले की सुनवाई सूचीबद्ध हुई थी, उस कोर्ट के जज ने सुनवाई से इनकार कर दिया। अब इस मामले को दूसरी पीठ में सूचीबद्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। जमानत पर फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है। संविधान के तहत शपथ लेना था जरूरी संविधान के अनुच्छेद 188 के अनुसार हर विधायक को पदभार संभालने से पहले शपथ लेना अनिवार्य है। शपथ लिए बिना कोई विधायक सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकता। शपथ तक विधायक को वेतन और भत्ते का भी अधिकार नहीं मिलता। अनुच्छेद 193 के तहत बिना शपथ सदन में शामिल होने पर जुर्माने का प्रावधान है। इसी कारण अनंत सिंह के लिए शपथ लेना जरूरी था। शपथ के साथ उनकी सदस्यता औपचारिक रूप से पूरी हो गई। मोकामा से बड़ी जीत के बाद शपथ अनंत सिंह मोकामा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं। उन्होंने 28,206 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। अनंत सिंह को कुल 91,416 वोट मिले थे। राजद की प्रत्याशी वीणा देवी दूसरे स्थान पर रहीं, जिन्हें 63,210 वोट प्राप्त हुए थे। जीत के बाद अनंत सिंह शपथ न ले पाने के कारण सदन से बाहर थे। मंगलवार को शपथ लेने के साथ ही उनकी विधायकी औपचारिक रूप से शुरू हो गई।

दुलारचंद हत्याकांड: कोर्ट का सख्त रुख, अनंत सिंह जेल में ही रहेंगे

पटना बिहार की राजधानी पटना स्थित एक विशेष सत्र अदालत ने बहुचर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में मंगलवार को विधायक अनंत सिंह की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। सांसदों एवं विधायकों के आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष सत्र अदालत के न्यायाधीश धनंजय कुमार मिश्रा की अदालत में जमानत याचिका पर बहस करते हुए अनंत सिंह के अधिवक्ता सुनील कुमार ने अपने मुवक्किल को इस मामले में निर्दोष बताया और नियमित जमानत पर मुक्त किए जाने की प्रार्थना की थी। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत ने अनंत सिंह को नियमित जमानत पर मुक्त करने से इनकार कर दिया। इससे पहले 20 नवंबर 2025 को विशेष निचली अदालत ने विधायक सिंह की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद अनंत सिंह की ओर से सत्र अदालत में उपरोक्त नियमित जमानत याचिका दाखिल की गई थी। क्या है पूरा मामला? गौरतलब है कि पटना जिले के घोसवारी थाना क्षेत्र स्थित बसावनचक गांव में 30 अक्टूबर 2025 को एक राजनीतिक पार्टी के नेता दुलारचंद यादव की उस समय हत्या कर दी गई थी जब वह विधानसभा चुनाव में प्रचार कर रहे थे। इस संबंध में मृतक के पौत्र नीरज कुमार ने गोसवारी थाना में प्राथमिकी संख्या -110/2025 दर्ज करवाई थी है। यह प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) तथा 3(5) एवं शस्त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत दर्ज की गई थी। पुलिस ने इस मामले में अनंत सिंह समेत तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा था। 

कैद में रहते अनंत सिंह का राजनीतिक दबदबा कायम, इतने वोटों से मिली जीत

मोकामा बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के बीच मोकामा विधानसभा सीट ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं। पांच बार के विधायक और JDU (NDA) उम्मीदवार अनंत सिंह ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक ताकत साबित करते हुए 28 हजार से अधिक वोटों से शानदार जीत दर्ज की है। अनंत सिंह ने RJD उम्मीदवार और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को बड़े अंतर से हराया। मोकामा की लड़ाई शुरू से ही हाई-प्रोफाइल और टक्कर वाली मानी जा रही थी, क्योंकि दोनों ओर बाहुबली परिवार थे।  इतने वोटों से जीते अनंत सिंह इलेक्शन डेटा के अनुसार:     अनंत सिंह (JDU) → 91,416 वोट     वीणा देवी (RJD) → 63,210 वोट     प्रियदर्शी पियूष (जन सुराज) → 19,365 वोट इस तरह अनंत सिंह ने 28,206 वोटों की विशाल बढ़त के साथ विजय हासिल की। जेल में रहते हुए भी ‘छोटे सरकार’ का जलवा कायम मोकामा की सबसे बड़ी चर्चा यही रही कि अनंत सिंह इस समय पटना बेऊर जेल में बंद हैं। वे दुलार चाँद यादव मर्डर केस में न्यायिक हिरासत में हैं। इसके बावजूद उनकी लोकप्रियता और संगठन की मजबूती ने चुनावी समीकरण को पूरी तरह उनके पक्ष में कर दिया। मोकामा की ये जंग सिर्फ दो उम्मीदवारों की नहीं थी, बल्कि साख, सत्ता और प्रभाव की लड़ाई मानी जा रही थी। मोकामा सीट—हमेशा से रहा है राजनीतिक हॉटस्पॉट मोकामा विधानसभा को बिहार की सबसे चर्चित सीटों में गिना जाता है। यहां मुकाबला हमेशा हाई-प्रोफाइल रहता है, और इस बार भी दो बाहुबलियों के बीच टक्कर ने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।  

जेल से मैदान तक अनंत सिंह का दबदबा, मोकामा में 28 हजार वोटों की ऐतिहासिक जीत

मोकामा  बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों में मोकामा सीट से एक बार फिर अनंत सिंह ने मैदान मार लिया है. उन्होंने महागठबंधन की प्रत्याशी और सूरजभान की पत्नी वीणा देवी को 28206 वोटों से चुनाव हरा दिया है. अनंत सिंह को कुल 91406 वो मिले जबकि वीणा देवी को 63210 वोटों से संतोष करना पड़ा और वो दूसरे नंबर पर रहीं. मोकामा में 26 राउंड की गिनती खत्म, अनंत सिंह ने 28206 वोटों की बनाई निर्णायक बढ़त, वीणा देवी को मिले 63210 वोट  22वें राउंड की गिनती के बाद मोकामा से अनंत सिंह 22988 वोटों से आगे, अब तक मिले कुल 82787 वोट, सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को अब तक मिले 59799 वोट – मोकामा से अनंत सिंह 19287 वोटों से निकले आगे, 18वें राउंड की गिनती के बाद अब तक मिले 68132 वोट, वीणा देवी को 48845 वोट – मोकामा से अनंत सिंह ने 14480 वोटों से बनाई बढ़त, अब तक मिले 45386 वोट, वीणा देवी को अब तक 30906 वोट – मोकामा से अनंत सिंह ने बनाई 9665 वोटों की बढ़त, वीणा देवी पिछड़ीं, अनंत सिंह को अब तक मिले 32552 वोट – अनंत सिंह के पटना आवास पर जश्न, शुरू हो गई दावत, ढोल नगाड़ों पर नाच रहे समर्थक – अनंत सिंह ने मोकामा से बनाई बड़ी लीड, अब तक 15034 वोट आए, वीणा देवी के खिलाफ 2031 वोटों की बनाई बढ़त – अनंतमय होता दिख रहा मोकामा, 4524 से ज्यादा वोटों से निकले आगे – जेल में बंद अनंत सिंह की मोकामा में लगातार बढ़त जारी – मोकामा सीट पर राजेश कुमार रत्नाकर पिछड़े – मोकामा में शुरुआती रुझानों में अनंत सिंह निकले आगे – मोकामा में वोटों की गिनती शुरू, गिने जा रहे हैं पोस्टल बैलेट्स इस सीट का नतीजा न सिर्फ मोकामा बल्कि पूरे पटना ज़िले की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है. फिलहाल सबकी नज़रें इसी मुकाबले पर है जहां बाहुबल, प्रभाव और जनसमर्थन तीनों की सीधी टक्कर दिख रही है. एक ओर हैं बाहुबली नेता अनंत सिंह हैं जो अपने क्षेत्र में मजबूत जनाधार और दबदबे के लिए जाने जाते हैं, वहीं उनके सामने हैं पूर्व सांसद और बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी, जिन्हें महागठबंधन का समर्थन प्राप्त है. मोकामा की इस सीट पर परंपरागत रूप से बाहुबल और प्रभावशाली व्यक्तित्व राजनीति पर हावी रहे हैं, और इस बार भी मुकाबला उसी अंदाज़ में तेज़ हो चुका है. अनंत सिंह जेल में है लेकिन दोनों उम्मीदवारों ने अपने-अपने गढ़ में पूरी ताक़त झोंक दी है . दोनों ही प्रत्याशी भूमिहार समाज से आते हैं.

बिहार की हॉट सीट मोकामा: बाहुबलियों के गढ़ में दांव पर नीतीश की साख

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक चर्चा मोकामा सीट की हो रही है. पटना जिले के अंदर आने वाला मोकामा इसबार हॉट सीट होगा, ये तभी तय हो गया था जब जेडीयू से चुनाव लड़ रहे बाहुबली अनंत सिंह के खिलाफ इलाके के दूसरे बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को आरजेडी ने मैदान में उतार दिया. दो बाहुबलियों का मोकामा में आमने–सामने आना इस बात का संकेत था कि इस बार का बिहार चुनाव खास होगा. वोटिंग से ठीक 6 दिन पहले दुलारचंद यादव की हत्या हुई तो मोकामा एकबार फिर सुर्खियों में आ गया. दुलारचंद की हत्या का आरोप अनंत सिंह और उनके समर्थकों पर लगा. अब इसी मामले में अनंत सिंह जेल के अंदर हैं. जिस दुलारचंद यादव की हत्या हुई वह जन सुराज पार्टी के समर्थक बताए जा रहे हैं. उनकी हत्या के बाद लगभग 36 घंटे तक मोकामा से लेकर बाढ़ तक के इलाके में बवाल होता रहा. यह बवाल शांत नहीं होता अगर अनंत सिंह की गिरफ्तारी नहीं की जाती. दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद प्रशासन ने मोकामा में चुनावी हिंसा को नियंत्रित करने का प्रयास किया है. राज्य के डीजीपी खुद कह रहे हैं कि इस मामले में दूसरे पक्ष के आरोपियों की भी गिरफ्तारी होगी. मोकामा मानी जाती है भूमिहार बहुल सीट दुलारचंद यादव की हत्या के बाद मोकामा में जो तूफान मचा था उसको नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने भले ही कदम उठाए हों, लेकिन चुनावी हिंसा के बाद मोकामा में जातीय समीकरण नई तस्वीर गढ़ सकता है. मोकामा को भूमिहार बहुल सीट माना जाता है. शायद यही वजह है कि आजादी के बाद से लेकर अब तक हर विधानसभा चुनाव में यहां से जीत का सेहरा भूमिहार जाति से आने वाले किसी न किसी नेता के माथे पर ही बंधा है. मोकामा में कुल मतदाताओं का 30 फीसदी भूमिहार जाति से हैं. इस सीट पर लगभग 82 हजार भूमिहार वोटर्स हैं. यहां जाति के लिहाज से दूसरी सबसे बड़ी संख्या यादवों की है. मोकामा में 20 फीसदी यादव यानी लगभग 61 हजार वोटर्स हैं. यहां निर्णायक भूमिका में हैं धानुक वोटर्स अन्य सवर्ण जातियों में राजपूत और ब्राह्मण वोटर्स की संख्या को मिला दें तो उनकी तादाद लगभग 28 हजार है. मोकामा में तीसरी बड़ी आबादी कुर्मी और उसकी ही उपजाति कहे जाने वाली धानुक वोटर्स की है. कुर्मी और धानुक वोटर्स की तादाद यहां लगभग 47 हजार है. माना जाता है कि धानुक जाति के वोटर्स मोकामा में निर्णायक भूमिका अदा करते हैं. इसके अलावा दलित–महादलित वोटर्स तकरीबन 25 से 28 हजार और मुस्लिम वोटर्स की संख्या लगभग 11 हजार है. पिछले 20 साल से मोकामा विधानसभा सीट पर बाहुबली अनंत सिंह का कब्जा रहा है. दो दशक में अनंत सिंह जेडीयू के टिकट पर चुनाव जीते और निर्दलीय भी. उनकी पत्नी नीलम देवी ने पिछले उपचुनाव में आरजेडी के टिकट से जीत हासिल की थी. अनंत सिंह और वीणा देवी के बीच टक्कर अनंत सिंह एक बार फिर से जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. मोकामा में अनंत सिंह जिस जातीय समीकरण को साधते हुए लगातार जीत हासिल करते रहे हैं उसके पीछे भूमिहार और धानुक जाति के वोटर के गठजोड़ के अलावे अति पिछड़ी जातियों की गोलबंदी बड़ी वजह मानी जाती है. यही वजह है कि अनंत सिंह के खिलाफ भूमिहार जाति से आने वाले दूसरे उम्मीदवारों को हार का मुंह देखना पड़ता है. मोकामा में इस बार अनंत सिंह और सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी के बीच टक्कर है. ये दोनों भूमिहार जाति से आते हैं. दो भूमिहार उम्मीदवारों की टक्कर के बीच जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी की एंट्री ने जातीय समीकरण को ट्वीस्ट दे दिया है. एक तरफ सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी अनंत सिंह को जहां आरजेडी के आधार वोट के जरिए चुनौती दे रही हैं, वहीं दूसरी तरफ धानुक जाति के वोट बैंक में पीयूष प्रियदर्शी भी सेंध लगा सकते हैं. दुलारचंद यादव पीयूष प्रियदर्शी को समर्थन दे रहे थे और अब उनकी हत्या के बाद मोकामा में नए जातीय समीकरण बनने की आशंका है. बिहार का चुनावी इतिहास बताता है कि यादव और धानुक जाति के वोटर कभी जातीय गोलबंदी के साथ एकजुट होकर मतदान नहीं करते हैं. यादवों का समर्थन जिस तरफ होता है, धानुक जाति के वोटर्स उसके खिलाफ ही वोटिंग करते रहे हैं. यही वजह है कि बिहार में नीतीश कुमार गैर यादव पिछड़ा और अति पिछड़ा मतदाताओं की गोलबंदी के सहारे दो दशक से शासन में हैं. नीतीश की सोशल इंजिनियरिंग में धानुक जाति के मतदाताओं की भूमिका बेहद खास रही है. नीतीश के विरोधी भी इस बात को भली भांति समझते हैं और यही वजह रही कि तेजस्वी यादव ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कुछ नए प्रयोग के जरिए नीतीश के इस सोशल इंजीनियरिंग को साधने की कोशिश की थी. लव-कुश समीकरण को तोड़ने की कोशिश नीतीश के लव-कुश समीकरण को तोड़ने के लिए तेजस्वी यादव ने बीते लोकसभा चुनाव में कुशवाहा जाति के कई उम्मीदवार मैदान में उतारे थे. तेजस्वी ने यह प्रयोग इसबार भी जारी रखा है. आरजेडी ने कई कुशवाहा उम्मीदवारों को टिकट दिया है. तेजस्वी की नजर बीते लोकसभा चुनाव में भी धानुक वोटर्स को नीतीश से अलग करने की थी. इसीलिए मुंगेर लोकसभा सीट पर आरजेडी ने धानुक जाति के मतदाताओं को साधने के लिए अशोक महतो की पत्नी को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन ललन सिंह ने नीतीश की सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर चलते हुए तेजस्वी के इस प्रयोग को विफल कर दिया था. धानुक वोटर्स को साधने में तेजस्वी भले ही फेल रहे थे लेकिन इस बार प्रशांत किशोर ने शायद उनका काम आसान कर दिया. जन सुराज पार्टी ने मोकामा जैसी सीट पर धानुक जाति से आने वाले पीयूष प्रियदर्शी को उम्मीदवार बनाकर एनडीए के जातीय समीकरण को तोड़ने की कोशिश की है. हालांकि दुलारचंद यादव की हत्या के बाद अगर धानुक वोटर्स वाकई अनंत सिंह का साथ छोड़ते हैं तो इसका फायदा प्रशांत किशोर के उम्मीदवार से ज्यादा आरजेडी के उम्मीदवार को मिल सकता है. दुलारचंद यादव की हत्या के बाद मोकामा में जातीय गोलबंदी के लिए यह … Read more

11 मामलों का बोझ और चुनाव की जंग: दुलारचंद यादव हत्या केस में नामजद अनंत सिंह

पटना बिहार विधानसभा चुनाव की वोटिंग से पहले मोकामा से जेडीयू के प्रत्याशी एवं बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह मर्डर केस में फंस गए हैं। मोकामा से जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्षी के समर्थन में प्रचार के दौरान दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में अनंत सिंह को नामजद आरोपी बनाया गया है। गुरुवार को मोकामा के टाल इलाके में स्थित हुए इस हत्याकांड के बाद क्षेत्र से मोकामा में विधानसभा का चुनाव खूनी रंजिश में बदल गया। टाल क्षेत्र में तनाव का माहौल है, पुलिस गांवों में कैंप कर रही है।  रात मृतक दुलारचंद यादव के पोते के बयान पर पुलिस ने अनंत सिंह, उनके दो भतीजों रणवीर और कर्मवीर समेत 5 लोगों पर हत्या की नामजद प्राथमिकी दर्ज की। मृतक के परिजनों का आरोप है कि अनंत सिंह के लोगों ने पहले गोली मारी और फिर गाड़ी चढ़ाकर दुलारचंद की हत्या कर दी। हालांकि, अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पटना के एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने बताया कि मोकामा के तारतर गांव के पास दो पक्षों के बीच मारपीट हुई। पुलिस मौके पर पहुंची तो वहां 2 से 3 गाड़ियां खड़ी मिलीं। गाड़ियों के शीशे टूटा हुआ था। इसमें से एक गाड़ी में दुलारचंद यादव का शव पाया गया। दुलारचंद इस क्षेत्र के पूर्व में अपराधी रहे हैं। उन पर हत्या और आर्म्स एक्ट के कई मामले दर्ज हैं। हालांकि, जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह ने हत्या के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि जब वह चुनाव प्रचार कर लौट रहे थे तो आगे निकल गए। पीछे रह गई उनके काफिले की गाड़ियों को जन सुराज पार्टी समर्थकों ने घेर लिया और ईंट पत्थर से हमला कर दिया था। अनंत सिंह ने इसे राजद नेता सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। वहीं, सूरजभान ने अनंत सिंह के आरोप पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। अनंत सिंह ने यह भी कहा कि झगड़े की पहल दुलारचंद यादव ने की थी।  दुलारचंद पर दर्ज हैं हत्या, रंगदारी सहित 11 मामले दुलारचंद पर हत्या, रंगदारी जैसे 11 संगीन मामले दर्ज थे. 80 के दशक में दुलारचंद का टाल इलाके में दहशत का सामराज्य था. वे माओवादी विचार का समर्थक रहे थे. 1990 मे वह कोर्ट से जमानत के बाद राजनीतिक जीवन बीता रहा थे और हाल के दिनों में जनसुराज के प्रत्याशी पीयूष के साथ चुनाव प्रचार कर रहे थे. दुलारचंद व अनंत सिंह के बीच पुरानी अदावत थी. 1990 में अनंत सिंह के भाई दिलीप सिंह के खिलाफ वे चुनाव भी लड़े थे, पर हार गये थे. कई दिनों से दोनों के बीच जुबानी जंग चल रही थी. कोल सप्लाइ के व्यवसाय से आर्थिक मजबूती मिली मूल रूप से मोकामा के घोसवरी निवासी दुलारचंद यादव किसान परिवार से आते थे. पिता रामकृष्ण यादव स्थानीय स्तर पर समाजसेवी माने जाते थे. दुलारचंद ने शुरुआती दिनों में ठेकेदारी और कोल सप्लाई के व्यवसाय के जरिये आर्थिक रूप से खुद को मजबूत किया. दुलारचंद यादव पर हत्या, रंगदारी, अवैध हथियार, भूमि विवाद, और चुनावी हिंसा जैसे आरोप शामिल है. 2009 के मोकामा विधानसभा चुनाव के दौरान गोलाबारी और बूथ कब्जे की घटना मे भी उनका नाम चर्चाओं में रहा. कांग्रेस नेता की हत्या में भी नामजद थे दुलारचंद 1991 में 16 नवंबर को लोकसभा पंडारक स्थित मतदान केंद्र पर कांग्रेस नेता सीताराम सिंह की गोली मारकर हत्या हो गयी थी. इस मामले में दुलारचंद समेत चार को नामजद अभियुक बनाया गया था. हालांकि बाद में दो लोगों को बरी कर दिया गया था. 2015 में बाढ़ अनुमंडल में हुए संजय सिंह हत्या कांड और 2018 में मोकामा थाना कांड संख्या- 152/18 (आर्म्स एक्ट) में भी उनका नाम उभरा था. हालांकि कई मामलों में वे बरी हो गए, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में स्थानीय दबंग नेता के रूप में उनका नाम लंबे समय तक बना रहा. मोकामा में कैसे हुआ बवाल? दुलारचंद यादव का बाढ़ और मोकामा के टाल इलाके में काफी दबदबा था। खुशहाल चक के निकट प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी गुरुवार दोपहर बाद करीब 3:30 बजे अपने समर्थकों के साथ प्रचार कर रहे थे। दुलारचंद यादव भी उनके साथ थे। उसी रास्ते से अनंत सिंह अपने समर्थकों के साथ गुजर रहे थे। बताया जाता है कि दोनों पार्टियों के समर्थकों के बीच गाली गलौज शुरू हो गई। बात बढ़ने पर ईंट-पत्थर चलाना शुरू कर दिया। बाद में गोली भी चली और दुलारचंद यादव की मौत हो गई।

जनसभा में हादसा: अनंत सिंह के गिरने से मचा हड़कंप, मंच अचानक ध्वस्त

पटना चर्चित मोकामा विधानसभा सीट से बाहुबली विधायक अनंत सिंह ताल ठोक रहे हैं। अनंत सिंह बिहार चुनाव में अपनी जीत का दावा भी कर चुके हैंं। इस बीच अनंत सिंह के जमीन पर धड़ाम से गिरने का एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि अनंत सिंह उस वक्त जमीन पर धड़ाम से गिर गए जब वो एक मंच पर अपने समर्थकों से साथ खड़े थे और यह मंच अचानक टूट कर बिखर गया। कुछ मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि शनिवार को पूर्व विधायक अनंत सिंह मोकामा के पूर्वी इलाके में तूफानी जनसंपर्क में व्यस्त थे। डुमरा गांव में अनंत सिंह के लिए विशेष मंच तैयार किया गया था। इस गांव में आने के बाद यहां लोगों ने अनंत सिंह से कहा कि वो मंच पर आकर लोगों को संबोधित करें। बाद में अनंत सिंह मंच पर पहुंचे और उनके समर्थक भी मंच पर पहुंच गए। इस दौरान अनंत सिंह के एक समर्थक ने हाथ में माइक लेकर अपना भाषण शुरू किया। मंच पर खड़े बाहुबली अनंत सिंह के सपोर्टर लगातार 'अनंत सिंह जिंदाबाद' के नारे लगा रहे थे। इस दौरान अचानक मंच टूट गया और अनंत सिंह समेत मंच पर मौजूद अन्य लोग जमीन पर गिर पड़े। अनंत सिंह जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर मोकामा से चुनावी दंगल में हैं। गनीतम यह रही कि मंच टूटने के बाद पूर्व विधायक को ज्यादा चोटें नहीं आईं और सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें तुरंत उठा लिया। वो अनंत सिंह को तुरंत अपनी गाड़ी में लेकर दूसरी जगह के लिए रवाना हो गए।