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आंगनवाड़ी में 6110 पदों के लिए दोबारा खुली आवेदन विंडो

चंडीगढ़. पंजाब सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास निदेशालय (SSWCD Punjab) ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक के 6110 पदों पर भर्ती 2026 के लिए अधिसूचना जारी की है। इस भर्ती के तहत 12वीं और 10वीं पास योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 25 फरवरी 2026 से दोबारा शुरू हो चुकी है और 11 मार्च 2026 तक चलेगी। इच्छुक अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। भर्ती का संक्षिप्त विवरण विवरण     जानकारी पोस्ट नाम     आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (AWW), आंगनवाड़ी सहायक (AWH) पदों की संख्या     1316 AWW, 4794 AWH (कुल 6110) वेतन     पंजाब सरकार के मानदंडों के अनुसार योग्यता     10वीं, 12वीं उत्तीर्ण आयु सीमा     18 से 37 वर्ष (दिनांक 01-07-2025 तक) ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ तिथि     19.11.2025 (सुबह 9:00 बजे) ऑनलाइन आवेदन अंतिम तिथि     10.12.2025 (रात 11:59 बजे) पुनः ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि     11-03-2026 आधिकारिक वेबसाइट      sswcd.punjab.gov.in कौन कर सकता है आवेदन? पंजाब सामाजिक सुरक्षा और महिला एवं बाल विकास द्वारा जारी भर्ती के अनुसार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (AWW) के 1316 पद निर्धारित किए गए हैं, जिनके लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। वहीं आंगनवाड़ी सहायक (AWH) के 4794 पदों के लिए उम्मीदवार का 10वीं पास होना आवश्यक है। इस भर्ती के लिए न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 37 वर्ष तय की गई है। हालांकि, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु में छूट प्रदान की जाएगी। इतना लगेगा आवेदन शुल्क आवेदन शुल्क सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 500 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अतिरिक्त जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 250  रुपये शुल्क तय किया गया है। ऐसे करें आवेदन सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। नए उम्मीदवार पहले रजिस्ट्रेशन करें। लॉगिन करके ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें। आवश्यक दस्तावेज और प्रमाणपत्र पीडीएफ फॉर्मेट में अपलोड करें। यदि लागू हो तो आवेदन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें। सभी भरी गई जानकारी को दोबारा जांच लें। अंतिम तिथि से पहले आवेदन फॉर्म सबमिट करें। भविष्य के लिए आवेदन पत्र का प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।

IAS पुलकित गर्ग का अनोखा कदम: बेटी को आंगनबाड़ी में कराया एडमिशन, फैसले पर हो रही चर्चा

चित्रकूट  चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग इन दिनों एक खास फैसले को लेकर चर्चा में हैं. जहां आमतौर पर सक्षम परिवार अपने बच्चों को महंगे प्राइवेट प्ले स्कूलों में दाखिला दिलाना पसंद करते हैं, वहीं IAS अधिकारी पुलकित गर्ग ने अपनी साढ़े तीन साल की बेटी सिया का एडमिशन सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र में कराकर मिसाल पेश की है. उनके इस कदम को सरकारी शिक्षा और आंगनबाड़ी व्यवस्था पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है. पुलकित गर्ग की बतौर जिलाधिकारी पहली तैनाती चित्रकूट में हुई है. पद संभालने के कुछ समय बाद जब उनकी बेटी के प्ले स्कूल में एडमिशन की बारी आई, तो उन्होंने इसे औपचारिकता की तरह नहीं लिया, बल्कि एक जागरूक अभिभावक की तरह विकल्पों की गंभीरता से पड़ताल की. उन्होंने और उनकी पत्नी ने जिले के कई निजी प्ले स्कूलों के साथ-साथ कई आंगनबाड़ी केंद्रों का भी दौरा किया. सुविधाएं, वातावरण, बच्चों की गतिविधियां और शिक्षण व्यवस्था देखने के बाद उन्होंने जिला मुख्यालय में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र को सबसे उपयुक्त पाया. जिस आंगनबाड़ी केंद्र में बेटी सिया का दाखिला कराया गया है, वहां करीब 35 बच्चे पंजीकृत हैं. सिया भी अन्य बच्चों की तरह उनके साथ बैठकर एक्टिविटीज में भाग लेती है, पढ़ाई करती है और मध्याह्न भोजन के समय सबके साथ जमीन पर बैठकर खाना खाती है. केंद्र में बच्चों के लिए खेल-खेल में सीखने का माहौल तैयार किया गया है. रंगीन दीवारें, तस्वीरें, खिलौने, एजुकेशन किट, एबीसी और नंबर चार्ट जैसे साधन हैं, जो प्राइमरी एजुकेशन को रोचक बनाते हैं. जिलाधिकारी पुलकित गर्ग का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा की मजबूती बड़ी बिल्डिंग्स या हाई फीस से नहीं, बल्कि सही माहौल, देखभाल और एक्टिविटी से आती है. उन्होंने कहा कि प्ले स्कूल या प्री-स्कूल स्तर की शिक्षा बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.  आंगनबाड़ी केंद्रों में सरकार की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षण और शिक्षण सामग्री पर लगातार काम किया जा रहा है. कार्यकर्ताओं को यह तय शेड्यूल दिया जाता है कि बच्चों को रोज क्या और कैसे सिखाना है- जैसे कहानियां, भावगीत, खेल गतिविधियां और बुनियादी सीख. आईएएस पुलकित गर्ग ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियमित ट्रेनिंग भी कराई जा रही है, ताकि बच्चों को बेहतर प्रारंभिक शिक्षा और पोषण मिल सके. छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और मानसिक विकास पर यहां विशेष ध्यान दिया जाता है. उनका कहना है कि अभिभावकों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर भरोसा करना चाहिए और छोटे बच्चों को वहां जरूर भेजना चाहिए. आईएएस अधिकारी के इस फैसले का एक प्रशासनिक संदेश भी माना जा रहा है. यदि व्यवस्थाएं मजबूत हों तो अधिकारी खुद भी उन पर भरोसा दिखा सकते हैं. पुलकित गर्ग ने कहा कि उनका लक्ष्य जिले की सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड करना है. जहां जरूरत होगी वहां मरम्मत, नवीनीकरण और संसाधन बढ़ाने का काम किया जाएगा. स्थानीय लोगों और शिक्षा से जुड़े लोगों ने इस कदम की सराहना की है. उनका कहना है कि जब जिले के शीर्ष अधिकारी खुद अपने बच्चे को आंगनबाड़ी भेजते हैं तो इससे व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है और समाज में सकारात्मक संदेश जाता है.

रायपुर में चिरायु योजना से नित्या राजवाड़े को नया जीवन मिला, मिली जान की राहत

रायपुर कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पतरापाली निवासी नित्या राजवाड़े (उम्र 4 वर्ष 7 माह),  जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थी। नित्या का नाम आंगनबाड़ी केंद्र पतरापानी-1 में दर्ज है। जन्म से ही नित्या को कमजोरी, जल्दी थकान, सांस लेने में तकलीफ तथा बार-बार सर्दी-खांसी की समस्या रहती थी। चिरायु टीम द्वारा किए गए स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चिकित्सक द्वारा जांच कर जिला चिकित्सालय बैकुण्ठपुर रेफर किया गया। जिला चिकित्सालय में शिशु रोग विशेषज्ञ द्वारा जांच उपरांत जन्मजात हृदय रोग की पुष्टि हुई, जिसके बाद उच्च संस्थान एम.एम.आई. नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर के लिए रेफर किया गया। चिरायु योजना के अंतर्गत नित्या को नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर में भर्ती कराया गया। आवश्यक जांचों के पश्चात सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। उपचार के बाद नित्या को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया। चिरायु योजना के अंतर्गत नित्या का संपूर्ण उपचार पूर्णतः निःशुल्क किया गया। वर्तमान में नित्या राजवाड़े पूरी तरह स्वस्थ है। नित्या के माता-पिता अत्यंत प्रसन्न हैं और उन्होंने चिरायु टीम, पटना सहित स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनकी बेटी को नया जीवन दिया है।

मनरेगा के सहयोग से गांव में तैयार हुआ सुरक्षित और आधुनिक भवन, नौनिहालों को मिला नया अवसर

रायपुर : गांव के नौनिहालों को मिली सुरक्षित और आधुनिक शुरुआत, भवन निर्माण में मनरेगा ने निभाई अहम भूमिका रायपुर छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में आंगनबाड़ी सेवाओं का व्यापक सुदृढ़ीकरण ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में बच्चों के समग्र विकास का मजबूत आधार बन रहा है। प्रारंभिक शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य सुरक्षा और अनुशासन की नींव रखने वाले आंगनबाड़ी केंद्र अब आधुनिक सुविधाओं से लैस होकर नौनिहालों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं। पिछले एक दशक में महात्मा गांधी नरेगा और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वित प्रयासों से जिले में 148 नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण पूरा किया गया है। इस मॉडल ने हजारों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोषण और शिक्षा गतिविधियों से जोड़कर उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं। वनांचल क्षेत्र सोनहत में 26 और बैकुण्ठपुर क्षेत्र में 122 नए आंगनबाड़ी भवन तैयार किए गए हैं। सोनहत में 133 लाख रुपये और बैकुण्ठपुर में 9 करोड़ 9 लाख रुपये से अधिक की राशि मनरेगा से स्वीकृत की गई। नए मानक के अनुसार प्रति भवन 11.69 लाख रुपये की लागत निर्धारित है, जिसमें 8 लाख रुपये मनरेगा से उपलब्ध कराए जाते हैं। वर्ष 2024 से पूर्व स्वीकृत भवनों की लागत 6.45 लाख रुपये थी, जिसमें 5 लाख रुपये मनरेगा से प्रदान किए जाते थे। विभागीय मांग के आधार पर जनपद पंचायतों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों पर कलेक्टर एवं जिला कार्यक्रम समन्वयक (मनरेगा) द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जाती है। प्रत्येक भवन का निर्माण ग्राम पंचायतों की देखरेख में गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ कराया जाता है। कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने हाल ही में सोनहत के लिए 2 नए आंगनबाड़ी भवन और बैकुण्ठपुर के लिए 23 नए भवनों के निर्माण की स्वीकृति दी है। सभी निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। कोरिया जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों का यह सुदृढ़ विस्तार बाल विकास के क्षेत्र में एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभर रहा है, जो ग्रामीण नौनिहालों को बेहतर भविष्य की मजबूत नींव प्रदान कर रहा है।

गोविंदपुरा में पोषण माह का भव्य आयोजन, पुरुष बने पोषण चैंपियन

गोविंदपुरा में धूमधाम से मना पोषण माह, पुरुष बने पोषण चैंपियन अन्नप्राशन, जन्मदिन का जश्न और क्विज़ प्रतियोगिता ने बढ़ाया उत्साह भोपाल गोविंदपुरा परियोजना के इंद्रपुरी सेक्टर के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 549 में सोमवार को 8वें पोषण माह की गतिविधियों का रंगारंग आयोजन किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम की थीम रही – “बच्चों की पोषण देखभाल करने वाले पुरुषों को पोषण चैंपियन से सम्मानित करना और उनकी कहानियां साझा करना।” कार्यक्रम का शुभारंभ परियोजना अधिकारी श्रीमती शुभा श्रीवास्तव ने दीप प्रज्वलन और सरस्वती पूजन से किया। इसके बाद माहौल और भी जीवंत हुआ जब सामाजिक संस्थाओं से जुड़ीं श्रीमती किरण शर्मा (सकारात्मक सोच संस्था), श्रीमती रेणु (आरंभ संस्था) और श्रीमती रेखा श्रीधर (मीत संस्था) ने मंच से महिलाओं और पुरुषों को संबोधित किया। उन्होंने परिवार और समाज में पोषण संबंधी जागरूकता पर जोर देते हुए कहा कि “पोषण केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं, पुरुष भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाएं।” सेक्टर सुपरवाइजर श्रीमती अनामिका पटेल ने उपस्थित लोगों को पोषण माह की रूपरेखा और उद्देश्य समझाए। वहीं श्रीमती नीति सक्सेना ने पुरुष प्रतिभागियों के लिए क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन किया। सवालों के जवाब देने में पुरुषों का उत्साह देखते ही बनता था। थीम के अनुरूप कार्यक्रम में अन्नप्राशन और जन्मदिन समारोह भी रखा गया। खास बात यह रही कि बच्चों के जन्मदिन का केक टीएचआर (टेक होम राशन) से तैयार किया गया था, जिसे काटकर पूरे उल्लास के साथ बच्चों का जन्मदिन मनाया गया। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पोषण व्यंजन प्रदर्शनी भी सजाई। प्रतिभागियों ने इन पौष्टिक व्यंजनों का स्वाद लिया और उनकी महत्ता समझी। अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत स्वल्पाहार के साथ किया गया। पूरे कार्यक्रम में माहौल उत्साह और जागरूकता से सराबोर रहा।

संकट में आंगनवाड़ी सेवाएं: कर्मियों की कमी से बच्चों का भविष्य अधर में

चंडीगढ़ हरियाणा के गांवों में आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों और माताओं के लिए पोषण और शिक्षा का अहम केंद्र होते हैं। लेकिन राज्य के हजारों आंगनवाड़ी केंद्रों में कार्यकर्ता ‘दीदी’ महीनों से नदारद हैं। कहीं एक कार्यकर्ता को दो-दो केंद्र देखने पड़ रहे हैं, तो कई जगह सहायिका अकेले ही बच्चों की देखभाल कर रहीं हैं। इसका सीधा असर केंद्रों पर मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता और बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। प्रदेश में कुल 25,962 आंगनवाड़ी केंद्र हैं। इन पर कार्यरत 25,962 कार्यकर्ता और 25,450 सहायिकाओं में से 23,106 कार्यकर्ता और 20,641 सहायिकाओं के पद भरे हैं। इसका मतलब है कि 2,856 कार्यकर्ता और करीब 4,800 सहायिकाएं लंबे समय से रिक्त हैं। जिलावार स्थिति देखें तो सबसे गंभीर हाल सोनीपत का है, जहां 252 कार्यकर्ता और 378 सहायिका पद खाली हैं। झज्जर, जींद, करनाल और नूंह में भी बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं। हिसार में 146 कार्यकर्ता और 287 सहायिकाओं के पद खाली हैं, जबकि रेवाड़ी और सिरसा में 250 से ज्यादा सहायिका पद रिक्त हैं। सात जिले सोनीपत, झज्जर, जींद, हिसार, करनाल, नूंह और रेवाड़ी में ही आधे से अधिक रिक्तियां केंद्रित हैं। इसके उलट पंचकूला और चरखी दादरी जैसे छोटे जिलों में रिक्तियां अपेक्षाकृत कम हैं। चरखी दादरी में 65 कार्यकर्ता और 109 सहायिका, जबकि पंचकूला में 61 कार्यकर्ता और 111 सहायिका पद रिक्त हैं।   आंकड़े एक नजर 25962 हरियाणा में कुल हैं आंगनवाड़ी केंद्र कार्यकर्ता और 4,800 सहायिका के पद खाली सोनीपत, झज्जर, जींद, हिसार, करनाल, नूंह, रेवाड़ी हैं ज्यादा प्रभावित सरकार की दोहरी रणनीति महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रुति चौधरी ने बताया कि इन रिक्तियों को भरने के लिए दोहरी रणनीति बनाई गई है। पहले, आंगनवाड़ी सहायिकाओं को कार्यकर्ता पद पर प्रमोशन दिया जाएगा। अब तक 25 प्रतिशत प्रमोशन कोटा था, जिसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके बाद शेष रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। सरकार का दावा है कि यह कदम रिक्तियां भरने के साथ-साथ लंबे समय से काम कर रही सहायिकाओं को प्रोत्साहन भी देगा। विपक्ष हमलावर- गुणवत्ता पर असर विशेषज्ञों का कहना है कि रिक्तियों के कारण कई कार्यकर्ता तीन-तीन केंद्र संभालने को मजबूर हैं। इससे बच्चों को समय नहीं मिल पाता और पोषण कार्यक्रम भी प्रभावित होते हैं। पूर्व मंत्री और झज्जर विधायक गीता भुक्कल ने सरकार पर निशाना साधा है और कहा कि सरकार बार-बार वादे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर भर्ती की गति बेहद धीमी है। वर्षों से पद खाली हैं और महिलाएं व बच्चे बुनियादी सेवाओं से वंचित हैं।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका के पदों की पूर्ति के लिये जारी की गई ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिल रही

भोपाल महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं आंगनवाड़ी सहायिका के रिक्त पदों की पूर्ति के लिये जारी की गई ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिल रही है। विभाग द्वारा 19 जून को जारी विज्ञापन के तहत कुल 19,504 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जिसमें अब तक 2,70,152 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। भर्ती प्रक्रिया में दस संभागों से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के लिए 55,730 और आंगनवाड़ी सहायिका के लिए 2,14,422 आवेदन प्राप्त हुए हैं। आवेदन प्रक्रिया की अंतिम तिथि 4 जुलाई निर्धारित की गई है, जबकि भरे गए आवेदन में सुधार की अंतिम तिथि 7 जुलाई है। उल्लेखनीय है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के कुल 19 हज़ार 504 पदों की पूर्ति के लिए इंदौर संभाग से सबसे अधिक 47 हज़ार 116 आवेदन प्राप्त हुए हैं जिन में 38 हज़ार 601 सहायिका के पद और 8 हज़ार 515 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पद के लिए आवेदन प्राप्त हुए है। जबलपुर संभाग से कुल 44 हजार 258 आवेदन में से 34 हजार 317 सहायिका के और 9 हजार 941 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के आवेदन प्राप्त हुए है। सागर संभाग से 33 हज़ार 513 में से सहायिकाओं के पद के लिए 27 हज़ार 857 और कार्यकर्ता के लिए 5 हज़ार 656 आवेदन आए है। भोपाल में कुल 28 हज़ार 850 आवेदन प्राप्त हुए है। इनमें सहायिका के पद के लिए 22 हजार 397 और कार्यकर्ता के लिए 6 हज़ार 453 आवेदन प्राप्त हुए है। इसी प्रकार रीवा से 28 हज़ार 519 कुल आवेदन प्राप्त हुए है, जिनमें 23 हज़ार 831 आवेदन सहायिका के और 4 हज़ार 688 आवेदन कार्यकर्ता के लिए प्राप्त हुए है। ग्वालियर संभाग के 28 हज़ार 413 आवेदनों में सहायिका के 22 हज़ार 73 और कार्यकर्ताओं के 6 हज़ार 340 आवेदन प्राप्त हुए है। उज्जैन संभाग से कुल 24 हजार 159 आवेदनों में से सहायिका के 18 हज़ार 711 और कार्यकर्ता के 5 हज़ार 448, चम्बल संभाग के कुल 14 हज़ार 829 आवेदनों में 12 हज़ार 343 सहायिका के और 2 हज़ार 486 आवेदन कार्यकर्ता के पद के लिए प्राप्त हुए है। इसके अतिरिक्त शहडोल संभाग से कुल 10 हज़ार 406 आवेदन प्राप्त हुए है, जिनमें 7 हज़ार 291 सहायिका और 3 हजार 115 कार्यकर्ता के पद के लिए प्राप्त हुए है। नर्मदापुरम से सहायिका के पद के लिए 7,001 और कार्यकर्ता के लिए 3088 कुल 10 हज़ार 89 आवेदन प्राप्त हुए है।