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दमघोंटू दिल्ली: AQI 400+ पहुंचा, दो दिन भारी प्रदूषण का अलर्ट, नजरें बारिश पर

 नई दिल्ली ठंड और कोहरे के साथ मिलकर प्रदूषण और घातक हो गया है। सोमवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर पर पहुंच गई। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से ऊपर है और दिल्ली की हवा में सवा तीन गुने से ज्यादा प्रदूषक कण मौजूद है। वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली का अनुमान है कि अगले दो दिनों के बीच भी वायु गुणवत्ता का स्तर बहुत खराब स्तर पर ही रहेगा। इसके बाद बारिश के आसार बन रहे हैं। सवाल यह कि क्या बारिश देगी राहत? हवा धीमी, पलूशन को मिला कोहरे के साथ विशेषज्ञों की मानें तो हवा की गति इतनी धीमी है कि प्रदूषक कणों का बिखराव बेहद धीमा हो रहा है। पलूशन कोहरे के साथ मिलकर हवा को ज्यादा प्रदूषित कर रहा है। इससे दिल्ली की हवा में स्मॉग देखा जा रहा है। खासतौर पर सुबह और शाम के वक्त इसे साफ देखा जा सकता है। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी, गले और नाक में खराश, आंख से पानी आना जैसी तमाम किस्म की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 401 पर एक्यूआई केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, सोमवार शाम को चार बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 401 अंक रिकॉर्ड किया गया। इस स्तर की हवा को गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। एक दिन पहले रविवार को दिल्ली में एक्यूआई 390 अंक पर था। यानी बीते 24 घंटे में दिल्ली के एक्यूआई में 10 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। इन इलाकों में अति गंभीर श्रेणी में पलूशन दिल्ली के चार इलाकों का सूचकांक सोमवार को अति गंभीर श्रेणी में पहुंच गया। इनमें वजीरपुर, रोहिणी, आनंद विहार और जहांगीरपुरी जैसे इलाके शामिल हैं। वजीरपुर में एक्यूआई 462, रोहिणी में 455, जहांगीरपुरी में 459, आनंद विहार में 455 अंक रिकॉर्ड किया गया। वायु गुणवत्ता के मानकों के मुताबिक, एक्यूआई के 450 से ऊपर होने पर हवा को अति गंभीर श्रेणी माना जाता है। यानी इन इलाकों में हालत ज्यादा खराब हैं। सवा तीन गुना ज्यादा पलूशन सीपीसीबी के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली-एनसीआर की हवा में सोमवार की शाम चार बजे पीएम 10 कणों का स्तर 330.5 और पीएम 2.5 कणों का स्तर 220.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर रहा। बता दें कि हवा में पीएम 10 का स्तर 100 और पीएम 2.5 कणों का स्तर 60 से कम होने पर ही उसे स्वास्थ्यकारी माना जाता है। इसके अनुसार, दिल्ली-एनसीआर की हवा में अभी मानकों से सवा तीन गुना ज्यादा प्रदूषक कण मौजूद हैं। दो दिन नहीं मिलेगी राहत वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली का अनुमान है कि मंगलवार और बुधवार को हवा की रफ्तार ज्यादातर समय में दस किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रहेगी। इतना ही नहीं अधिकतम और न्यूनतम तापमान की स्थिति कमोबेश ऐसी ही रहेगी। मौसम विभाग ने भी मंगलवार और बुधवार को दिल्ली में मध्यम से घने कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया है। इन मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रदूषक कणों का विसर्जन बेहद धीमा रहेगा। इससे पलूशन से राहत नहीं मिलेगी। बारिश और हवा में तेजी देगी राहत मौसम विभाग की मानें तो पहली जनवरी को दिल्ली के साथ ही एनसीआर के अलग-अलग हिस्सों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी देखी जा सकती है। लेकिन यह काफी नहीं होगी। मौसम विज्ञानियों की मानें तो यदि दिल्ली-एनसीआर में बारिश के बाद हवा तेज होती है तो इससे पलूशन से काफी राहत मिलेगी। 2, 3 और 4 जनवरी को दिल्ली में हवा की स्पीड 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती है। ये संकेत अच्छे हैं। इससे पलूशन से राहत मिलने की संभावना है।

सांस लेना हुआ मुश्किल: दिल्ली-NCR में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर, AQI 400+

नई दिल्ली देश की राजधानी में ठंड की दस्तक के साथ ही प्रदूषण का कहर फिर से शुरू हो गया है। दिल्ली और उसके पड़ोसी इलाकों (NCR) में हवा की गुणवत्ता एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 390 दर्ज किया गया है जो बहुत खराब श्रेणी में आता है लेकिन शहर के कई हिस्सों में यह आंकड़ा 400 के पार चला गया है जो सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर (Severe) स्थिति है। प्रदूषण के हॉटस्पॉट: कहां कितनी जहरीली है हवा? दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि वहां सांस लेना मुश्किल हो रहा है। नेहरू नगर इस समय दिल्ली का सबसे प्रदूषित इलाका बना हुआ है। इलाका     AQI स्तर     श्रेणी नेहरू नगर     442     गंभीर (Severe) पटपड़गंज     431     गंभीर (Severe) शादीपुर     429     गंभीर (Severe) आरके पुरम     412     गंभीर (Severe) सीरी फोर्ट     402     गंभीर (Severe) शिवाजी पार्क     400     गंभीर (Severe) सरकार का बड़ा फैसला: GRAP-4 की दो पाबंदियां अब स्थायी दिल्ली की हवा में बढ़ते जहर को देखते हुए दिल्ली सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू होने वाले ग्रैप-4 (GRAP-4) के तहत दो महत्वपूर्ण पाबंदियों को अब स्थायी (Permanent) कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब हवा में सुधार होने के बावजूद भी ये दो नियम लागू रहेंगे ताकि भविष्य में प्रदूषण को बढ़ने से रोका जा सके। क्या होता है AQI का मतलब? वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) हवा में मौजूद प्रदूषकों की मात्रा को दर्शाता है।     0-50: अच्छा     51-100: संतोषजनक     301-400: बहुत खराब     401-500: गंभीर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 400 से ऊपर का AQI स्वस्थ लोगों को भी बीमार कर सकता है और पहले से बीमार लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।  

निजी ऐप्स के हाइपर लोकल AQI मानकों पर भरोसा न करें, जनता से अपील

लखनऊ का AQI (वायु गुणवत्ता इंडेक्स) 174 निजी ऐप्स का हाइपर लोकल मानक अपनाने से फैल रहा भ्रम जनता से अपील: भ्रामक खबरों से रहें सावधान लखनऊ  लखनऊ का AQI (वायु गुणवत्ता इंडेक्स) 174 है जो हवा की मॉडरेट क्वालिटी को प्रमाणित करता है। सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफार्म पर  AQI से संबंधित भ्रामक आंकड़े प्रचारित और प्रसारित किए जा रहे हैं जो वायु गुणवत्ता बताने वाले निजी एप से लिए गए हैं।  अधिकतर विदेशी प्लेटफॉर्म US-EPA मानकों का उपयोग करते हैं, जबकि भारत में National Air Quality Index (NAQI) का पालन किया जाता है। दोनों के मापदंड अलग-अलग हैं। साथ ही सरकारी स्टेशन (जैसे लालबाग, तालकटोरा, अलीगंज) प्रमाणित और कैलिब्रेटेड उपकरणों का उपयोग करते हैं। निजी संस्थाएं अक्सर सैटेलाइट डेटा या अनकैलिब्रेटेड सेंसर का प्रयोग करती हैं, जिनमें त्रुटि की संभावना अधिक होती है। सीपीसीबी का डेटा 24 घंटे के औसत पर आधारित सीपीसीबी द्वारा जारी AQI आंकड़े पिछले 24 घंटों के औसत वैज्ञानिक मूल्यांकन पर आधारित होते हैं, जिससे शहर की वास्तविक और समग्र वायु गुणवत्ता की स्थिति सामने आती है। इसके विपरीत, कई निजी ऐप्स क्षणिक और स्थानीय धूल और कणों को दिखाते हैं, जो किसी एक चौराहे, ट्रैफिक जाम या सीमित गतिविधि के कारण हो सकते हैं और पूरे शहर की स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करते। तकनीकी अंतर से पैदा होता है भ्रम वायु गुणवत्ता मापने की तकनीक और मानकों में अंतर के कारण निजी ऐप्स पर दिखाई देने वाले आंकड़े अक्सर भ्रामक हो जाते हैं। सीपीसीबी का मॉडल भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित किया गया है, जबकि अधिकतर निजी ऐप विदेशी परिस्थितियों पर आधारित होते हैं, जो भारत की भौगोलिक, मौसमी और पर्यावरणीय स्थितियों को सही तरीके से आंकने में सक्षम नहीं हैं। धूल और धुएं में अंतर नहीं कर पाते निजी ऐप्स विशेषज्ञों के अनुसार कई निजी ऐप धूल कण और धुएं के बीच अंतर नहीं कर पाते। भारतीय शहरों में धूल की मात्रा स्वाभाविक रूप से अधिक होती है, लेकिन विदेशी मॉडल इसे सीधे प्रदूषण मान लेते हैं। इसी कारण AQI को वास्तविकता से अधिक दिखाया जाता है और अनावश्यक डर का माहौल बनता है। एक ही शहर के लिए अलग-अलग आंकड़े, भरोसेमंद नहीं निजी डेटा यह भी सामने आया है कि निजी ऐप्स एक ही शहर के अलग अलग इलाकों के लिए अलग अलग AQI दिखाते हैं, जो समग्र शहरी स्थिति नहीं बताते। ऐसे आंकड़े न तो प्रमाणिक होते हैं और न ही किसी आधिकारिक एजेंसी द्वारा सत्यापित, जिससे आमजन में भ्रम और चिंता फैलती है। भ्रामक आंकड़ों से फैलाई जा रही चिंता निराधार निजी ऐप के आधार पर फैलाया जा रहा डर तथ्यहीन और निराधार है। लखनऊ की वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है, स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। नागरिकों से अनुरोध है कि केवल सीपीसीबी और सरकारी स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें।

दिल्ली-NCR जैसे हालात राजस्थान में भी, हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज

जयपुर प्रदेश में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है और हालात अब खतरनाक श्रेणी में पहुंच गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार राज्य के कई शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स गंभीर स्तर पर दर्ज किया गया। भिवाड़ी में AQI 369 दर्ज किया गया, जो हवा में अत्यधिक प्रदूषण का संकेत है। राजधानी जयपुर में भी हवा की गुणवत्ता खतरनाक मोड़ पर पहुंचकर 233 तक दर्ज हुई। वहीं श्रीगंगानगर, नागौर, जालौर और कोटा जैसे शहर भी ‘पुअर’ और ‘वेरी पुअर’ कैटेगरी में रहे। राजस्थान के प्रमुख शहरों का AQI इस प्रकार रहा : टोंक- 227, भिवाड़ी- 369 कोटा- 271 डूंगरपुर- 254 जयपुर- 233 जालौर- 237 नागौर- 222 चुरू- 225 बीकानेर- 226 झुंझुनूं- 221 जोधपुर- 217 राजसमंद- 213 झालावाड़- 205 पाली- 204 उदयपुर- 202 गंगानगर- 191 मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक मौसम शुष्क रहने और हवाओं की रफ्तार कम होने से प्रदूषण फैलने के बजाय नीचे ही जमा हो रहा है। इसलिए फिलहाल राहत की कोई संभावना नहीं दिख रही। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेताया है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो प्रदेश में श्वास संबंधी बीमारियों, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं। राजधानी दिल्ली-एनसीआर जैसी परिस्थिति राजस्थान में भी बनने का खतरा दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें, मास्क का उपयोग करें, बच्चों और बुजुर्गों को प्रदूषित जगहों से दूर रखें, घर में एयर प्यूरीफायर या पौधों का इस्तेमाल करें। राजस्थान में हवा की सेहत बिगड़ती जा रही है और यदि हालात नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

पराली जलाने से प्रदूषण बढ़ा, पंजाब में अब तक 266 FIR और 17 लाख का जुर्माना लगाया गया

तरनतारन  पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिली है. पराली जलाने के कारण पर्यावरण पर इसका असर हो रहा है. पंजाब के कई शहरों में पराली जलाने के कारण AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) भी बढ़ रहा है. ताजा जानकारी के मुताबिक, पराली जलाने वाले किसानों पर अब तक 16 लाख से ज्यादा का जुर्माना तक लगा दिया गया है लेकिन फिर भी इन मामलों में कमी नहीं है. पराली जलाने का मुख्य कारण रबी की फसल के लिए खेत जल्दी तैयार करना माना जाता है. इन मामलों के पीछे पारंपरिक आदतें और जागरूकता की कमी भी है. जुर्माने के बावजूद पराली के मामलों में तेजी  इस सीजन में सबसे अधिक पराली जलाने के मामले सामने आए हैं. रविवार को 122 नए मामलों आए हैं. इन मामलों के साथ पंजाब में इस सीजन पराली जलाने के कुल मामले 743 हो गए हैं. पंजाब के तरनतारन जिले में अब तक 224 मामले सामने आए हैं और ये जिला पराली जलाने में टॉप पर है. इसके बाद अमृतसर में अब तक कुल 154 मामले सामने आ चुके हैं. वहीं, पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ अब तक 16 लाख 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है और 266 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है और 296 मामलों में किसानों की जमीन के रेवेन्यू रिकॉर्ड में रेड एंट्री भी की गई है.  पराली जलाने का AQI पर असर पिछले 6 दिन में ही पराली जलाने के कुल 328 मामले पंजाब में सामने आए हैं. बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में धान की कटाई तेजी से होगी ऐसे में इन मामलों की संख्या और ज्यादा बढ़ सकती है. इन पराली जलाने के मामलों से लगातार पंजाब के कई शहरों का AQI बेहद खराब हो रहा है. रविवार को जालंधर का AQI 439, बठिंडा का 321, लुधियाना का 260, अमृतसर का 257, पटियाला का 195 और मंडी गोबिंदगढ़ का AQI 153 रिकॉर्ड किया गया.

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का प्रकोपः वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंची

नयी दिल्ली  हरियाणा के कुछ हिस्सों में बुधवार को वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि पड़ोसी राज्य पंजाब में यह 'खराब' श्रेणी में रही। वहीं, दिल्ली में हवा की गुणवत्ता जहरीली हो चुकी है। दिल्ली में सुबह नौ बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 335 रहा, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 0 से 50 के बीच AQI को 'अच्छा', 51 से 100 के बीच को 'संतोषजनक', 101 से 200 के बीच को 'मध्यम', 201 से 300 के बीच को 'खराब', 301 से 400 के बीच को 'बहुत खराब' तथा 401 से 500 के बीच को 'गंभीर' माना जाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा के रेवाड़ी जिले के धारूहेड़ा में सुबह नौ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 382 रहा। नारनौल और जींद में भी AQI 367 रहा जो के 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। CPCB के समीर ऐप के अनुसार 'बहुत खराब' वायु गुणवत्ता वाले अन्य स्थानों में चरखी दादरी (362), रोहतक (358), यमुनानगर (347), फतेहाबाद (320) और बल्लभगढ़ (318) शामिल हैं। हरियाणा में 'खराब' एकक्यूआई वाले स्थानों में बहादुरगढ़ (272), गुरुग्राम (290), करनाल (243), भिवानी (298), फ़रीदाबाद (218), कैथल (237), करनाल (243), कुरूक्षेत्र (226) और सोनीपत (285) शामिल हैं। पंजाब के अमृतसर में सुबह नौ बजे AQI 253, जालंधर में 261, पटियाला में 207 और लुधियाना में 234 दर्ज किया गया। वहीं चंडीगढ़ में एकक्यूआई 169 दर्ज किया गया।   कोलकाता, हावड़ा में वायु गुणवत्ता ‘खराब' कोलकाता और हावड़ा शहर में बुधवार सुबह वायु गुणवत्ता ‘‘खराब'' रही। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (डब्ल्यूबीपीसीबी) के एक अधिकारी ने बताया कि जादवपुर स्थित वायु निगरानी स्टेशन पर सुबह नौ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 200 (पीएम 2.5) और बल्लीगंज में 141 (पीएम 2.5) था। सिंथी क्षेत्र में रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय में AQI 142 दर्ज किया गया जबकि कोलकाता के निकट स्थित न्यू टाउन में यह 165 था। उन्होंने बताया कि सुबह नौ बजे फोर्ट विलियम में वायु गुणवत्ता सूचकांक 150 था, जबकि निकटवर्ती हरित क्षेत्र विक्टोरिया में वायु गुणवत्ता सूचकांक 242 रहा। रवींद्र सरोवर वायु निगरानी स्टेशन पर सुबह नौ बजे AQI 128 दर्ज किया गया। मंगलवार को जादवपुर में AQI 207 था जबकि बल्लीगंज में यह 213 था, जो सोमवार आधी रात के क्रमशः 159 और 134 से काफी अधिक है। मंगलवार आधी रात को हावड़ा के बेलूर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 213 था, जबकि हावड़ा के शिबपुर बॉटनिकल गार्डन क्षेत्र के कथित हरित बफर क्षेत्र में भी यह 195 था। हावड़ा के औद्योगिक शहर घुसुरी में सुबह नौ बजे AQI 179 दर्ज किया गया। वायु गुणवत्ता सूचकांक 151 से 200 के बीच ‘खराब', 201 से 300 के बीच ‘बहुत खराब' और 300 से ऊपर ‘गंभीर' श्रेणी में रखा जाता है। पर्यावरणविदों ने दावा किया कि सोमवार और मंगलवार को महानगर में आधी रात तक पटाखे फोड़े जाने के कारण हवा में महीन प्रदूषक कण घुल गए। डब्ल्यूबीपीसीबी के अधिकारी ने कहा, ‘‘AQI के बिगड़ने को सीधे तौर पर पटाखे फोड़ने से नहीं जोड़ा जा सकता। AQI पिछले साल से कम है। इसके अलावा नीरी द्वारा अनुमोदित हरित पटाखों का ज्यादातर इस्तेमाल किया गया।'' अधिकारी ने कहा, ‘‘AQI में किसी भी तरह की गिरावट के लिए मौसम को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, क्योंकि बारिश या दक्षिणी हवाओं के अभाव में गर्म और आर्द्र परिस्थितियों के बीच प्रदूषक हवा में मौजूद रहते हैं…।'' उन्होंने कहा कि वे परिणामों का विश्लेषण कर रहे हैं। पर्यावरणविद् सोमेन्द्र मोहन घोष ने आरोप लगाया कि कोलकाता और हावड़ा में सोमवार और मंगलवार की शाम को आधी रात तक तेज आवाज वाले पटाखे फोड़े गए, जो पीसीबी द्वारा दी गई रात आठ बजे से 10 बजे तक की समय-सीमा से कहीं अधिक था।

भोपाल में हवा हुई ज़हरीली: AQI 39 से बढ़कर 128, एक्सपर्ट बोले- हालात और बिगड़ सकते हैं

भोपाल  सांस और हार्ट के मरीजों के लिए खतरे की घंटी है। शहर की हवा में प्रदूषण बढ़ने लगा है। सात दिन में प्रदूषण तीन गुना बढ़ गया है। हवा में धूल के साथ ओजोन गैस की मात्रा अधिक पाई गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आंकड़ों में यह बात सामने आई है। टीटी नगर में इसका असर सबसे अधिक है। हवा की गुणवत्ता जांचने शहर में सात स्थानों पर जांच हो रही है। इनमें तीन रियल टाइम मॉनिटरिंग हैं। एयर क्वालिटी रिपोर्ट में ये चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को एक्यूआइ औसत 128 मापा गया है, जबकि 6 अक्टूबर को यह 39 था। इसमें पीएम 10 और ओजोन बड़ा कारण रहा। टीटी नगर, अरेरा कॉलोनी और ईदगाह हिल्स क्षेत्र में रियल टाइम जांच में हवा की यह रिपोर्ट सामने आई। ये हैं नुकसान -हवा में धूल-धुएं के बढ़ने से सबसे पहले नाक, गला और आंखों में जलन -फेफड़ों में सूजन की समस्या -कमजोर इम्युनिटी सिस्टम वालों को दिक्कत -हृदय पर तनाव बढ़ेगा ऐसे करें बचाव -सामान्य मास्क की जगह 95 मास्क का इस्तेमाल करें। -सुबह के समय धूल के कण अधिक होते हैं, इसलिए बचें। -इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए ताज़े फल और पानी ज्यादा पीएं। एक्सपर्ट बोले अभी और बिगड़ेगी स्थिति पर्यावरणविद् एसके दुबे के मुताबिक शहर में धूल उड़ है। टूटी सड़कें बड़ा कारण है, वहीं कचरा जलाने के मामले बढ़े हैं। यह ओजोन का स्तर बढऩे का कारण है। सर्दी बढ़ने के साथ हवा का प्रदूषण अभी और बढ़ेगा। एक्यूआर का स्तर बढ़ रहा है। धूल इसका प्रमुख कारण है। मौसम खुलने से धूल और धुंआ का स्तर बढ़ रहा है। रिपोर्ट में पीएम 10 सहित वाहनों का धुआं एक्यूआइ बढ़ा रहा है। सर्दी बढऩे के साथ यह स्तर और बढ़ेगा। ब्रजेश शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

AQI अलर्ट: दिवाली से पहले ग्रेटर नोएडा ने छूई खतरनाक सीमा, देश में सबसे प्रदूषित शहर बना

ग्रेटर नोएडा ठंड बढ़ने के साथ ही सर्दी और वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है, लेकिन इस बार भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तैयारी लगभग न के बराबर है। दोनों विभाग टूटी-फूटी और धूल वाली सड़कों की सफाई के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रहे हैं, जबकि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान लागू करने से पहले ही वायु प्रदूषण के स्रोत समाप्त करने का निर्देश दिया है। शनिवार को ग्रेटर नोएडा देश के सबसे अधिक प्रदूषित शहर के रूप में सामने आया। ग्रेटर नोएडा का एक्यूआई 227 मापा गया है। जैसे ही सर्दियाँ आती हैं, दिल्ली एनसीआर क्षेत्र की हवा प्रदूषित हो जाती है। हर साल यह समस्या दोहराती है, इसलिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ठंड शुरू होने से पहले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है। इसमें सड़कों से धूल हटाना, टूटी हुई सड़कों की मरम्मत करना, ट्रैफिक जाम दूर करना, खुले में कचरा फैलाने और जलाने पर रोक लगाना शामिल है। हालांकि इस बार भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं है। शहर की अधिकांश सड़कें खराब हालत में हैं, जहां धूल बिखरी हुई है और वाहनों की आवागमन से हवा में धूल उठ रही है। फिर भी धूल हटाने की कोई योजना बनाई नहीं गई है। सांस लेना भी मुश्किल ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ट्रैफिक जाम की समस्या बनी हुई है। लोग बताते हैं कि 1 से 15 अक्टूबर के बीच वायु प्रदूषण बहुत बढ़ जाता है। इस बार दिवाली और अन्य त्योहर भी हैं, जिनमें आतिशबाजी के कारण वायु प्रदूषण और गहरा हो जाता है, जिससे सांस लेना कठिन हो जाता है। इसके बावजूद प्राधिकरण और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोई तैयारी नहीं की है, जिससे लोगों को प्रदूषण सहन करना पड़ सकता है। बारिश के बाद मिली तीन दिन की राहत खत्म होते ही ग्रेटर नोएडा में वायु प्रदूषण फिर से बढ़ने लगा है। पिछले 24 घंटों में यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक 123 अंक बढ़कर ऑरेंज जोन में पहुंच गया है। जहां शुक्रवार को एक्यूआई 104 था, वहीं शनिवार को यह 227 तक पहुंच गया। यदि यही स्थिति बनी रही, तो अगले दो दिनों में एक्यूआई 300 से ऊपर चले जाएगा।