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JKविधानसभा में हिंसा, ‘इजरायल मुर्दाबाद’ के नारे, BJP और कांग्रेस के विधायकों के बीच झड़प

श्रीनगर  जम्मू कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार, 27 मार्च को बजट सत्र की शुरुआत में ही बड़ा हंगामा शुरू हो गया. उमर अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेंस (NC) और महबूबा मुफ्ती की पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के विधायकों ने सदन में 'इजरायल मुर्दाबाद' के नारे लगाए. इसी के साथ, ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर खामेनेई के बैनर भी लहराए गए. वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायकों ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के बैनर लहराए।  विधानसभा के वेल में विधायकों ने खामेनेई की तस्वीर लेकर प्रदर्शन किया. दूसरी ओर बीजेपी ने भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे लगाए. हंगामे के बीच में 'अमेरिका हाय-हाय' का शोर भी सुनाई दिया।  काले कपड़े पहनकर आए विधायक नेशनल कांफ्रेंस विधायक तनवीर सादिक ने काले कपड़े पहने हैं और माथे पर कुछ लिखा हुआ है. विधायक ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले के खिलाफ हैं. इसके अलावा, बीजेपी विधायक ने 'जम्मू को इंसाफ दो' के नारे लगाए और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को लेकर मांग रखी।  आधे घंटे के लिए सदन स्थगित, बुलाने पड़े मार्शल सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायक हाथ में पोस्टर लिए नारेबाजी करते नजर आए. स्थिति इतनी बेकाबू हो गई थी कि मजबूरन 20-25 मिनट की कार्यवाही के बाद ही आधे घंटे के लिए सदन स्थगित करना पड़ा. सदन दोबारा से 11.00 बजे शुरू होगा।  हंगामे की शुरुआत इजरायल के खिलाफ नारेबाजी के साथ हुई. सत्ता पक्ष (एनसी, कांग्रेस) के विधायक, पीडीपी और कुछ निर्दलीय विधायकों ने भी इजरायल और अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी की. हंगामा इतना बढ़ गया मार्शल तैनात करने पड़े।  नरेंद्र मोदी-राहुल गांधी के लगे नारे सदन में हंगामे के दौरान बीजेपी और कांग्रेस विधायक आमने सामने आ गए. दोनों दलों के विधायकों की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नारे लगाए जाने लगे. मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया. अगर मार्शल न आते और बीच-बचाव न कराते तो बात हाथापाई तक पहुंच सकती थी। 

बिहार विधानसभा में गेट नंबर 10 से आगे मीडिया की नो एंट्री

पटना. बिहार विधानसभा परिसर में आयोजित कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हैं. प्रशासन की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक मीडिया प्रतिनिधियों की एंट्री केवल गेट संख्या 10 तक ही सीमित है. इसके आगे किसी भी पत्रकार को जाने की अनुमति नहीं दी. सुरक्षा और कार्यक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. गेट नंबर 10 ही होगा मीडिया का एंट्री पॉइंट प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक निर्देश के अनुसार, 5 मार्च को कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों के लिए केवल गेट संख्या 10 ही एकमात्र प्रवेश द्वार है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पत्रकारों को इस गेट से आगे जाने की अनुमति नहीं दी. विधानसभा के अन्य सभी द्वारों से मीडिया का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है. सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट कर दिया है कि कार्यक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए यह ‘नो-गो ज़ोन’ तैयार किया गया है. सुरक्षा का ‘चक्रव्यूह’ या कवरेज पर पहरा? विधानसभा परिसर में अचानक बढ़ी इस सख्ती के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं. कई दिग्गज राजनीतिक हस्तियों और वीवीआईपी (VVIP) मेहमानों का जमावड़ा है। किसी भी तरह की सुरक्षा चूक से बचने के लिए पुलिस बल के साथ-साथ अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है. हालांकि, मीडिया गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या इतनी पाबंदी कवरेज को प्रभावित करेगी? प्रशासन का तर्क है कि यह फैसला केवल व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया है. नियमों का उल्लंघन पड़ा तो होगी कार्रवाई प्रशासन ने न केवल रास्ते सीमित किए हैं, बल्कि सख्त लहजे में चेतावनी भी जारी की है. आदेश में कहा गया है कि जो भी मीडियाकर्मी निर्धारित नियमों या तय सीमा का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. पत्रकारों से अपील की गई है कि वे निर्धारित समय पर गेट संख्या 10 पर पहुंचें और वहीं से अपनी रिपोर्टिंग सुनिश्चित करें. विधानसभा के आसपास सुरक्षा घेरा इतना कड़ा है कि हर आने-जाने वाले की गहन तलाशी ली जा रही है. प्रशासन का कहना है कि यह कदम किसी को असुविधा पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि कार्यक्रम की सुरक्षा और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. मीडिया संगठनों से भी सहयोग की अपील की गई है ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके.

विधानसभा में कांग्रेस विधायक का विरोध, हर्ष फायरिंग पर FIR की कार्रवाई पर किया शीर्षासन, कांग्रेस ने किया वॉकआउट

 भोपाल अपने बयानों और अनोखे अंदाज के लिए चर्चा में रहने वाले श्योपुर विधायक बाबूलाल जंडेल ने आज मध्य प्रदेश विधानसभा परिसर में हलचल मचा दी. खुद पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए जंडेल ने गांधी प्रतिमा के सामने शीर्षासन कर अपना विरोध दर्ज कराया. हाल ही में महाशिवरात्रि के अवसर पर श्योपुर में निकली शिव बारात के दौरान विधायक बाबूलाल जंडेल का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह कथित तौर पर हर्ष फायरिंग करते नजर आ रहे थे. वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने विधायक के खिलाफ FIR दर्ज की थी. कांग्रेस ने इस कार्रवाई को 'षड्यंत्र' करार दिया है. सदन में कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष जानबूझकर विपक्षी विधायकों को निशाना बना रहा है.  शीर्षासन करते हुए बातचीत हैरानी की बात यह रही कि विधायक जंडेल ने शीर्षासन की मुद्रा में रहते हुए ही 'आजतक' से बात की और कहा, "मेरे खिलाफ द्वेषतापूर्वक कार्रवाई की गई है. सिर्फ इसलिए कि मैं विपक्षी दल का विधायक हूँ, मुझे निशाना बनाया जा रहा है. यह लोकतंत्र का अपमान है और मैं अपनी आवाज इसी तरह उठाता रहूंगा." सदन में हंगामा और मांग विधानसभा के अंदर भी कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया. कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि विधायक जंडेल के खिलाफ दर्ज 'झूठी' FIR को तत्काल निरस्त किया जाए. उन्होंने इसे सरकार की दमनकारी नीति बताया. विधायक बोले- भगवान की खुशी में हर्ष फायर किया कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने कहा कि 15 फरवरी को हमारे क्षेत्र में यज्ञ का कार्यक्रम था। हजारों की संख्या में ब्राह्मण और साधु-संत मौजूद थे। मैंने शिवजी का चौतरा बनाकर विधि-विधान से तीन दिन तक हवन कराया, भगवान की स्थापना करवाई और उसके बाद शिव बारात का कार्यक्रम रखा गया। शिव बारात में पालकियों और घोड़ों पर साधु-संत और ब्राह्मण सवार थे, फूल वर्षा हो रही थी और पटाखे चल रहे थे। मैं भी घोड़े पर सवार था। मेरे पास एक “चढ़ीमार” का एक राउंड था, जो दावत का राउंड होता है। भगवान की खुशी में मैंने एक हर्ष फायर किया। वह सिर्फ एक ही राउंड था। मेरे पास कोई एके 47 नहीं थी। मैं कोई उग्रवादी नहीं हूं, बल्कि यज्ञ का यजमान था। बाबू जंडेल ने कहा– मेरे खिलाफ झूठे केस, आंदोलन करूंगा बाबू जंडेल ने कहा- इससे तीन महीने पहले दिसंबर में मैंने गायों के मुद्दे को लेकर आंदोलन किया था और कलेक्टर के नाम ज्ञापन दिया था, तब भी मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। उन्होंने कहा कि मुझ पर अक्सर एफआईआर दर्ज की जाती हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने सात मामलों में मुझे बरी किया है। सभी केस झूठे हैं। अगर सरकार यह केस वापस नहीं लेती है तो मैं गांधी आश्रम में भी आंदोलन करूंगा और सड़क पर उतरकर भी आंदोलन करूंगा। मुझे जेल जाने का कोई डर नहीं है। जयवर्धन सिंह बोले- सीएम के संरक्षण में अवैध कॉलोनियां बन रही कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के संरक्षण में अवैध कॉलोनियां और बिल्डर लगातार अवैध कॉलोनियों का विस्तार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे अवैध निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है। इसे लेकर सीधी विधायक रीति पाठक ने भी सदन में सवाल किया। इसके जवाब में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने के लिए तीन महीने के भीतर कड़ा कानून लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य अवैध कॉलोनियों के निर्माण को रोकना है। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अवैध कॉलोनियां बनाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ध्यानाकर्षण में ये मुख्य मुद्दे उठाएंगे विधायक     डिंडोरी विधायक ओमकार सिंह मरकाम प्रदेश में धान खरीदी के लिए सर्वर न चलने से किसानों के स्लॉट बुक न होने से आ रही परेशानी को सदन में रखेंगे।     खातेगांव विधायक आशीष शर्मा खातेगांव क्षेत्र के फॉरेस्ट एरिया में किसानों के खिलाफ दर्ज किए गए झूठे मुकद्मों का मामला उठाएंगे।     राजगढ़ से बीजेपी विधायक अमर सिंह यादव प्रदेश में राजस्व अधिकारियों द्वारा भूमिहीन और गरीबों के लिए पट्‌टे और धारणाधिकार का काम समय पर न होने का मामला उठाएंगे।     नर्मदापुरम विधायक डॉ सीताशरण शर्मा प्रदेश में अतिथि विद्वानों को मानदेय न मिलने का मुद्दा उठाएंगे।     मुरैना विधायक दिनेश गुर्जर प्रदेश में राजस्व विभाग के अंतर्गत भू संसाधन प्रबंधन विभाग के जूनियर डाटा एंट्री ऑपरेटर्स का जिला मुख्यालयों पर अटैचमेंट किए जाने का मामला उठाएंगे।     जौरा विधायक पंकज उपाध्याय प्रदेश में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) नीति और पीएम ई ड्राइव के क्रियान्वयन में नीति का पालन न करने का मामला उठाएंगे।     नागदा-खाचरोद विधायक डॉ तेज बहादुर सिंह चौहान उज्जैन जावरा रोड पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं से मौतों का मामला उठाएंगे।     भितरवार विधायक मोहन सिंह राठौर प्रदेश भर में राजस्व अभिलेखों का कम्प्यूटराइजेशन और रिकॉर्ड में सुधार की समस्या उठाएंगे।     पोहरी से कांग्रेस विधायक कैलाश कुशवाह प्रदेश में खाद संकट और यूरिया-डीएपी खाद के दामों में बढ़ोत्तरी करने से किसानों पर आए आर्थिक बोझ का मुद्दा उठाएंगे।

निजी विधेयक में 15 लाख तक स्वास्थ्य कवरेज का प्रस्ताव, कांग्रेस विधायक ने सरकार से फ्री इलाज की मांग की

भोपाल  मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस विधायक और पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने 'सार्वभौम निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा' को लेकर एक निजी सदस्य विधेयक (Private Member's Bill) पेश किया है। इस विधेयक के माध्यम से उन्होंने मांग की है कि प्रदेश के हर नागरिक को, चाहे वह किसी भी वर्ग या आय समूह का हो, उसे हर साल 15 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य कवरेज मिलना चाहिए। विधेयक की मुख्य मांगें: इलाज का अधिकार सदन में चर्चा के दौरान डॉ. राजेंद्र सिंह ने तर्क दिया कि वर्तमान में आयुष्मान योजना का दायरा सीमित है और इसकी राशि (5 लाख) गंभीर बीमारियों के लिए नाकाफी है। उनके विधेयक में ये प्रस्ताव हैं:     यूनिवर्सल कवरेज: योजना का लाभ अमीर-गरीब, किसान, व्यापारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों सहित सभी को मिले। केवल उन लोगों को बाहर रखा जाए जिनके पास पहले से ही कोई बेहतर हेल्थ इंश्योरेंस है।     15 लाख का सामान्य बीमा: प्रत्येक परिवार को सालाना 15 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिले।     गंभीर बीमारियों के लिए 25 लाख: किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर सर्जरी के लिए कवरेज को बढ़ाकर 25 लाख रुपए किया जाए। "सबसे बड़ा सुख निरोगी काया, सरकार चाहे तो कर्ज लेकर दे सुविधा" डॉ. सिंह ने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि 'पहला सुख निरोगी काया' है। उन्होंने पंजाब सरकार का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 10 लाख तक का यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज लागू किया गया है। मध्यप्रदेश की बड़ी आबादी के हिसाब से इस पर सालाना 8 से 9 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। उन्होंने सरकार को सुझाव देते हुए कहा, "सरकार लाड़ली बहना योजना के लिए 23 हजार करोड़ खर्च कर रही है, हम उसका विरोध नहीं करते। लेकिन यदि जनता की जान बचाने और मुफ्त इलाज देने के लिए सरकार को कर्ज भी लेना पड़े, तो मैं उसका कभी विरोध नहीं करूंगा। यह जनता का विधेयक है, सरकार इसका पूरा श्रेय ले, लेकिन इसे लागू करे।" आईएएस-आईपीएस की तर्ज पर हो आम जनता का इलाज विधायक ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब आईएएस और आईपीएस अधिकारियों, उनकी पत्नियों और आश्रितों को सेवाकाल और रिटायरमेंट के बाद भी शत-प्रतिशत मुफ्त इलाज मिल सकता है, तो आम जनता के साथ भेदभाव क्यों? उन्होंने 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे की याद दिलाते हुए कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं में समानता होनी चाहिए। क्या है निजी सदस्य विधेयक? विधानसभा में आमतौर पर सरकार (मंत्री) ही विधेयक लाते हैं, लेकिन कोई भी विधायक (निजी सदस्य) अपनी ओर से कानून बनाने का प्रस्ताव रख सकता है। डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश विधानसभा के इतिहास में ऐसे अवसर बहुत कम आए हैं जब किसी सदस्य ने निजी विधेयक प्रस्तुत किया हो। उन्होंने इसे अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी बताते हुए सरकार से इस पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने किया हस्तक्षेप चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि लाड़ली बहनों को मिलने वाली राशि से भी परिवारों को स्वास्थ्य की दृष्टि से सहारा मिलता है। जिस पर डॉ. सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि 1500 रुपये की राशि बड़े ऑपरेशनों के सामने केवल आने-जाने के किराए जितनी ही है। विधायक डॉ. राजेंद्र सिंह ने स्वास्थ्य सुविधाओं को 'राजनीति और वोट के फंडे' से ऊपर उठाकर एक अनिवार्य अधिकार बनाने की वकालत की है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस निजी विधेयक को स्वीकार कर मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य क्रांति की ओर कदम बढ़ाती है।

राजस्थान विधानसभा में गरमाये मुद्दे के बीच हाथापाई की नौबत!

जयपुर. राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को उस वक्त भारी बवाल मच गया जब विपक्ष ने जयपुर की हिंगोनिया गौशाला के पास गाय के बछड़े का कटा सिर मिलने का मुद्दा उठाया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि इस जघन्य अपराध के आरोपी को सत्ता पक्ष के एक विधायक का संरक्षण प्राप्त है। इस बयान ने सदन में ऐसी आग सुलगाई कि भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज आमने-सामने आ गए। बालमुकुंदाचार्य का सवाल: क्या गाय बनेगी 'राज्य पशु'? हंगामा तब शुरू हुआ जब हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य ने सरकार से सवाल किया कि क्या राजस्थान में गाय को 'राज्य पशु' (State Animal) का दर्जा देने का कोई विचार है? इस पर पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है। मंत्री के इस जवाब ने हिंदूवादी राजनीति करने वाले धड़े को असहज कर दिया, लेकिन असली विस्फोट अभी बाकी था। टीकाराम जूली का 'पोस्टर' वार और गंभीर आरोप सदन में माहौल तब गरमाया जब नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने खड़े होकर राजधानी की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। जूली ने कहा, 'जयपुर में हिंगोनिया गौशाला के पास से बछड़े का कटा सिर लाकर लटकाया गया। यह सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश है।' जूली ने दावा किया कि इस मामले में जो आरोपी है, उसे भाजपा का एक विधायक बचा रहा है। जूली ने इशारों-इशारों में सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा की ओर संकेत किया। गोपाल शर्मा का पलटवार: 'इस्तीफा दे दूँगा' अपना नाम घसीटे जाने पर सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा बुरी तरह बिफर गए। उन्होंने सदन में खड़े होकर दहाड़ते हुए कहा, "आप मेरा नाम ले रहे हैं? अगर इस मामले में कोई भी मेरा आदमी शामिल पाया गया, तो मैं इसी वक्त विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दूँगा।" शर्मा के इस तेवर ने सत्ता पक्ष के खेमे में जोश भर दिया, वहीं विपक्ष ने शोर-शराबा और तेज कर दिया। सदन में हाथापाई की नौबत !  राजस्थान के विधानसभा में उस वक्त हाथापाई की नौबत बनती दिखाई दी, जब भाजपा विधायक गोपाल शर्मा सदन की कार्यवाही के बीच ना पक्ष की वेल की तरफ़ आक्रोश के साथ बढ़ने लगे। तभी कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह डोटासरा और अशोक चांदना भी गोपाल शर्मा की तरफ़ आक्रोशित होकर बढ़ गए .इससे माहौल और ज़्यादा गरमा गया। स्पीकर की फटकार, "पहले से तय थी प्लानिंग" हंगामे के बीच कांग्रेस विधायकों ने बछड़े के कटे सिर वाले पोस्टर लहराना शुरू कर दिया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी सख्त नजर आए। उन्होंने पोस्टर लहराने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, "जिस तरह से पोस्टर लहराए जा रहे हैं, उससे साफ लगता है कि आप लोग सदन की कार्यवाही बाधित करने के लिए पहले से प्लानिंग करके आए थे।" स्पीकर ने मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग को निर्देश देकर गोपाल शर्मा को शांत कराया और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। डोटासरा और गोपाल शर्मा के बीच तीखी बहस सदन में उस वक्त मर्यादा की सीमाएं लांघती दिखीं जब पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और गोपाल शर्मा के बीच सीधी बहस शुरू हो गई। दोनों ओर से तीखी टिप्पणियां की गईं। विपक्ष का आरोप था कि सरकार गौवंश की रक्षा के नाम पर केवल राजनीति करती है, जबकि हकीकत में राजधानी में ही गौवंश सुरक्षित नहीं है।

राज्यपाल के अभिभाषण पर जोरदार चर्चा, इंदौर हादसों पर सत्र में हंगामा, मप्र में विधानसभा की कार्यवाही शुरू

भोपाल  मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आज दूसरा दिन है। आज सदन के हंगामेदार होने के आसार है। सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी। इससे पहले वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा अनुपूरक बजट प्रस्तुत करेंगे। यह प्रावधान वित्तीय वर्ष के शेष महीनों के खर्चों की पूर्ति के लिए लाया जा रहा है। 18 फरवरी को वर्ष 2026-27 का मुख्य बजट पेश किया जाएगा। सत्र के आज भी हंगामेदार रहने के आसार हैं। पहले दिन राज्यपाल मंगूभाई पटेल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया था।  कांग्रेस ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौत का मुद्दा उठाया था, आज फिर विपक्ष सरकार को घेर सकता है। मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 6 मार्च तक चलेगा। इस दौरान कुल 12 बैठकें प्रस्तावित हैं। 18 फरवरी को उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे।  नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले को लेकर विधानसभा के बजट सत्र के छठे दिन कांग्रेस ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक गंदा पानी लेकर विधानसभा परिसर के बाहर पहुंचे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। मप्र विधानसभा सत्र की कार्यवाही शुरू, इंदौर में हुई मौतों पर कांग्रेस का प्रदर्शन मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आज दूसरा दिन है। आज सदन के हंगामेदार होने के आसार है। सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी। इससे पहले वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा अनुपूरक बजट प्रस्तुत करेंगे। यह प्रावधान वित्तीय वर्ष के शेष महीनों के खर्चों की पूर्ति के लिए लाया जा रहा है।  तिलहन संघ कर्मचारियों के वेतनमान का मुद्दा भी सदन में उठा विधानसभा में विधायक केशव देसाई ने न्यायालय के आदेश के बाद भी तिलहन संघ के कर्मचारियों को पांचवें वेतनमान का लाभ नहीं दिए जाने का मामला उठाया। इस सवाल का जवाब सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग की बजाय नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दिया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कोर्ट के आदेश जारी हो रहे हैं, वैसे-वैसे सरकार कार्रवाई कर रही है। शासन के विभिन्न विभागों में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ तिलहन संघ के कर्मचारियों के वेतनमान निर्धारण के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग द्वारा निर्देश जारी किए गए हैं। कर्मचारियों को छठा वेतनमान दिए जाने के संबंध में उन्होंने कहा कि यह मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अपील और अवमानना के प्रकरण लंबित हैं, इसलिए कोर्ट का फैसला आने के बाद ही इस मामले में आगे कुछ कहा जा सकेगा। भाजपा को शर्म आनी चाहिए- कांग्रेस विधायक उज्जैन के तराना से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने कहा कि इंदौर प्रशासन और भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पूरे विश्व में शर्मसार किया है। दूषित पानी पीने से लगभग 35 से 40 लोगों की मौत हो गई। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें पदोन्नति देकर ऊपर भेज दिया गया। इन मासूम लोगों की मौत के लिए जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए। बीजेपी को शर्म आना चाहिए। आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर ध्यानाकर्षण कांग्रेस विधायक आतिफ अकील भोपाल में आवारा कुत्तों की लगातार बढ़ती संख्या और नियंत्रण में कमी को लेकर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री का ध्यान आकर्षित करेंगे। वहीं वरिष्ठ भाजपा विधायक जयंत मलैया दमोह जिले के अंतर्गत सीतानगर सिंचाई परियोजना की मूल डीपीआर में किए गए परिवर्तन की जांच को लेकर जल संसाधन मंत्री का ध्यानाकर्षण करेंगे। भाजपा विधायक दल की बैठक आज शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आवास पर भाजपा विधायक दल की बैठक प्रस्तावित है। बैठक में मंत्रियों और विधायकों के साथ आगामी रणनीति पर चर्चा होगी। विपक्ष के सवालों का प्रभावी जवाब देने और मुख्य बजट को लेकर तैयारी पर विशेष जोर रहेगा। दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की अध्यक्षता में कांग्रेस पहले ही अपनी रणनीति तय कर चुकी है। ऐसे में आज सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।   

कमीशन मांगने का मामला गरमाया, तीनों विधायक 6 जनवरी को विधानसभा में होंगे पेश

जयपुर एमएलए फंड में कमीशन मांगने वाले तीनों विधायकों को विधानसभा की सदाचार कमेटी ने एक बार फिर पूछताछ के लिए बुलाया है। सदाचार कमेटी ने तीनों विधायकों को नोटिस जारी कर 6 जनवरी को फिर पूछताछ के लिए पेश होने को कहा है। खींवसर से बीजेपी विधायक रेवंतराम डांगा,हिंडौन से कांग्रेस विधायक अनिता जाटव और बयाना से निर्दलीय ऋतु बनावत को एक ही दिन पूछताछ के लिए बुलाया है।  मई में रिश्वत लेते एसीबी में पकड़े गए बीएपी विधायक जयकृष्ण पटेल को भी सदाचार कमेटी ने नोटिस जारी कर 7 जनवरी को पूछताछ के लिए तलब किया है। पटेल के केस की जांच करने वाले एसीबी के जांच अधिकारी को भी बुलाया है। 19 दिसंबर को भी की थी  पूछताछ   तीनों विधायकों को सदाचार कमेटी ने 19 दिसंबर को भी विधानसभा तलब करके वन टू वन पूछताछ की थी। तीनों विधायकों से कमेटी ने कमीशन मांगने से जुड़े सवाल किए थे। तीनों विधायक उस दिन बेगुनाही के सबूत नहीं दे पाए थे। उस वक्त तीनों ने बेगुनाही के सबूज पेश करने के लिए समय मांगा था। रेवंतराम डांगा ने 15 दिन, अनीता ने 7 दिन और ऋतु ने 10 दिन का समय मांगा था, जिसे कमेटी ने मंजूर कर लिया था।  अब तीनों विधायकों को अलग-अलग दिन पूछताछ के लिए बुलाने की जगह एक ही दिन 6 जनवरी को पूछताछ के लिए तलब किया है। कमेटी के सभापति बोले- स्टिंग का वीडियो एफएसएल जांच के लिए भी भेज सकते हैं सदाचार कमेटी के सभापति कैलाश वर्मा ने कहा कि कमेटी की बैठकें लगातार चल रही है।  इन मामलों में  जितने अच्छे तरीके से अनुसंधान हो सकता है, तथ्यात्मक रिपोर्ट आ सकती है उसके बारे में निरंतर कमेटी काम कर रही है। आज भी बैठक हुई है। कल भी बैठक की थी। कल हमने तीनों विधायकों को नोटिस जारी करने का फैसला किया और तीनों को 6 जनवरी को तलब किया है। वर्मा ने कहा कि  तीनों विधायकों ने अलग अलग समय मांगा था। उसके हिसाब से वक्त देते हुए कमेटी ने नोटिस जारी कर पूरे सबूतों, दस्तावेजों और आॅडियो वीडियो के साथ तैयारी से आने को कहा है। विधायकों के पास जो रिपोर्ट्स और लिखित में जो देना चाहते हों, जो वीडियो या अन्य चीज पेश करना चाहते हैं वे दे सकते हैं। जरूरत पड़ी तो स्टिंग का वीडियो एफएसएल जांच के लिए भी भेज सकते हैं वर्मा ने कहा कि स्टिंग करने वाले पत्रकार से हमें वीडियो मिला है। विधायक अगर यह दावा करते हैं कि वीडियो में उनकी आवाज नहीं है या काट छांट है तो हम जरूरत पड़ने पर स्टिंग के वीडियो को एफएसएल जांच के लिए भी भेज सकते हैं। अभी इस पर निर्णय नहीं हुआ।  तीनों विधायकों  की बची हुई रिपोर्ट आने के बाद समिति सभी तथ्यों का अध्ययन करेगी, इसके बाद ही आगे फैसला करेगी। बजट सत्र से पहले रिपोर्ट तैयार कर सकती है समिति विधानसभा का बजट सत्र जनवरी के आखिर में शुरू होगा। सदाचार कमेटी बजट सत्र तक  कमीशन मांगने वाले विधायकों और बीएपी विधायक रिश्वत मामले में  रिपोर्ट तैयार कर सकती है। 6 जनवरी को तीनों विधायकों से पूछताछ के बाद कमेटी अगर संतुष्ट नहीं होती है तो उन्हें फिर नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। उसके बाद फाइनल रिपोर्ट तैयार होगी।

शीतकालीन सत्र के पहले दिन विधानसभा में कफ सिरप कांड का विरोध, विपक्षी विधायक बच्चों के पुतले लेकर पहुंचे

भोपाल  मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज प्रारंभ हो गया है। पहले दिन विपक्षी विधायकों ने छिंदवाड़ा कफ सीरप कांड को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। विधायक अपने हाथों में बच्चों के पुतले और 'पूतना' को लेकर पहुंचे। विपक्ष ने सरकार को ही पूतना बताया और बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया। विधानसभा में शून्य काल के दौरान कांग्रेस ने हंगामा किया। सत्र की कम अवधि को लेकर उठाए सवाल। कहा जब विधायक जनहित के मुद्दे उठा ही नहीं सकते हैं तो फिर सत्र बुलाने का क्या मतलब। आसंदी के सामने आकर की नारेबाजी। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कार्य मंत्रणा समिति की आज बैठक है, उसमें इस विषय पर चर्चा की जा सकती है। अध्यक्ष की व्यवस्था देने के बाद कांग्रेस के सदस्य अपने स्थान पर लौटे। बता दें सत्र 5 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान 4 दिन ही विधानसभा की बैठकें होंगी। 3 दिसंबर को भोपाल गैस त्रासदी की बरसी पर स्थानीय अवकाश के कारण विधानसभा की भी छुट्‌टी रहेगी। सत्र में विपक्षी विधायक सीहोर की वीआईटी यूनिवर्सिटी में छात्रों को खराब भोजन-पानी मिलने के कारण हुए विवाद का मुद्दा जोर-शोर से उठाएंगे। अतिवृष्टि से नुकसान और मुआवजे का मुद्दा भी गूंजेगा। दिसंबर में सत्र की अधिसूचना जारी होने से अब तक विधानसभा सचिवालय में 751 तारांकित और 746 अतारांकित प्रश्नों को मिलाकर 1497 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। ध्यानाकर्षण की 194, स्थगन प्रस्ताव की 06, अशासकीय संकल्प की 14, शून्यकाल की 52, नियम-139 की 02 सूचनाएं जबकि 15 याचिकाएं मिली हैं। 2 शासकीय विधेयक भी प्राप्त हुए हैं। विधानसभा सत्र में पेश होंगे ये दो विधेयक मध्य प्रदेश सरकार नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव में बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब तक पार्षद ही अध्यक्ष चुनते थे, लेकिन संशोधन के बाद अध्यक्ष को जनता सीधे चुनेगी। इसके साथ ही राइट टू रिकॉल की व्यवस्था भी लागू होगी। यानी जनता यदि अध्यक्ष के काम से नाखुश है तो वोट देकर उन्हें हटा भी सकेगी। मध्यप्रदेश सरकार ने व्यापार और दुकानों से जुड़े महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी है। पिछले हफ्ते हुई कैबिनेट की बैठक में दुकान एवं स्थापना (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 को स्वीकृति दी गई थी। अब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी। साथ ही, दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम में संशोधन के तहत दुकानदारों और कामगारों को सप्ताह में एक दिन अनिवार्य अवकाश देना जरूरी होगा। दुकान खोलने और संचालन के लिए लाइसेंस की प्रक्रिया भी सरल बनाई जाएगी। सरकार का तर्क है कि यह व्यवस्था कामगारों के स्वास्थ्य, बेहतर कार्य वातावरण और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है। नई व्यवस्था में ये होगा     20 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में बिना श्रम आयुक्त की अनुमति के निरीक्षण नहीं हो सकेगा।     इससे सूक्ष्म और लघु व्यापारियों को अनावश्यक कार्रवाई और दबाव से राहत मिलेगी।     सभी प्रक्रियाएं पोर्टल पर ही होंगी। रजिस्ट्रेशन, रिनुअल, संशोधन और बंद होने की सूचना भी डिजिटल हो जाएगी। बदलाव 7 दिन में अपडेट करना अनिवार्य दुकान एवं स्थापना (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 के मुताबिक, अब रजिस्ट्रेशन शुल्क अधिकतम ₹2,500 होगा। कर्मचारियों की संख्या या अन्य प्रमुख बदलाव होने पर 7 दिन के भीतर पोर्टल पर अपडेट करना जरूरी होगा। प्रतिष्ठान बंद होने पर 10 दिन के भीतर पोर्टल पर सूचना देना अनिवार्य होगा। सूचना दर्ज होते ही रजिस्ट्रेशन खुद ही हट जाएगा। श्रम विभाग के अनुसार संशोधन का उद्देश्य     प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाना।     व्यापार-मित्र वातावरण तैयार करना।     छोटे व्यापारियों तक स्व-प्रमाणन की सुविधा पहुंचाना।     निरीक्षण का अनावश्यक दबाव कम करना।     राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करना।  

मध्यप्रदेश विधानसभा में बदलाव की आहट, प्रमुख सचिव पद के लिए अरविंद शर्मा का नाम सबसे आगे

भोपाल  मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रशासनिक बदलाव की आहट तेज हो गई है। मौजूदा प्रमुख सचिव एपी सिंह 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं और उनके कार्यकाल को आगे नहीं बढ़ाने के संकेत पहले ही मिल चुके हैं। ऐसे में विधानसभा सचिव के रूप में कार्यरत अरविंद शर्मा को अगला प्रमुख सचिव बनाए जाने की चर्चा तेज हो गई है। वर्तमान प्रमुख सचिव एपी सिंह के कार्यकाल में विस्तार की संभावना नहीं है। ऐसे में 1 अक्टूबर से नए प्रमुख सचिव की नियुक्ति तय मानी जा रही है। अरविंद शर्मा सबसे मजबूत दावेदार  नरेंद्र सिंह तोमर ने अध्यक्ष बनने के बाद अरविंद शर्मा को लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश पर लाया और  विधानसभा सचिव बनाया था। बाद में उनका संविलियन भी विधानसभा में हो गया। वर्तमान में वे 60 साल की उम्र पार कर चुके हैं और नियमों के मुताबिक 62 साल तक सेवा में रह सकते हैं। यदि उन्हें प्रमुख सचिव नियुक्त किया जाता है, तो वे आगामी दो साल तक इस जिम्मेदारी को निभा पाएंगे। सूत्रों के अनुसार, स्पीकर की पसंद होने के कारण उनकी नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है। एपी सिंह का लंबा कार्यकाल अब होगा समाप्त एपी सिंह पहले ही 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो चुके थे। उसके बाद उन्हें दो साल का सेवा विस्तार और फिर 6 महीने का संविदा कार्यकाल दिया गया। अब वे 64 वर्ष से अधिक हो चुके हैं। ऐसे में उनका कार्यकाल बढ़ाने की कोई संभावना नहीं रह गई है। हालांकि विधानसभा अधिनियम के मुताबिक अध्यक्ष चाहें तो जिला न्यायाधीश स्तर के अधिकारी को भी प्रमुख सचिव नियुक्त कर सकते हैं। फिलहाल इस पर विचार की संभावना कम है क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों में अरविंद शर्मा ही सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। सचिव पद की मौजूदा स्थिति विधानसभा में सचिव के दो पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में एक पद पर अरविंद शर्मा कार्यरत हैं, जबकि दूसरा पद रिक्त है। प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े मामले कोर्ट में लंबित हैं, इसलिए यदि शर्मा प्रमुख सचिव बनते हैं, तो सचिव के दोनों पद अस्थायी तौर पर खाली रह सकते हैं और जिम्मेदारियां प्रभार के आधार पर सौंपी जा सकती हैं।  

NDA का विधानसभा में हंगामा तय, सूर्या हांसदा ‘एनकाउंटर’ मौत पर होगी चर्चा

रांची विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने शुक्रवार को कहा कि वह झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र में राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर सत्तारूढ़ झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन पर हमला तेज करने के साथ आदिवासी नेता सूर्या हंसदा की ‘फर्जी' मुठभेड़ में मौत की सीबीआई जांच की मांग करेगा। भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने विधायक दल की दो घंटे की बैठक के बाद हंसदा की मुठभेड़ को ‘नृशंस हत्या' करार दिया। जायसवाल ने कहा, ‘‘हमारी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी जी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में सात सदस्यीय तथ्यान्वेषी दल का गठन किया था, जिसने सूर्या हंसदा के रिश्तेदारों और ग्रामीणों से मुलाकात की थी। रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष को सौंप दी गई है।'' उन्होंने कहा, ‘‘यह किसी भी तरह से मुठभेड़ नहीं लगती, बल्कि वास्तव में यह एक नृशंस हत्या है। राजग विधानसभा में मांग करेगा कि सरकार इस घटना की सीबीआई जांच का आदेश दे।'' कई आपराधिक मामलों में वांछित हांसदा को 10 अगस्त को देवघर के नावाडीह गांव से गिरफ्तार किया गया था और कथित मुठभेड़ उस समय हुई जब उन्हें छिपे हुए हथियार बरामद करने के लिए राहदबदिया पहाड़ियों पर ले जाया जा रहा था। हंसदा ने कथित तौर पर पुलिस से एक हथियार छीन लिया और मौके से भागने की कोशिश करते हुए पुलिसकर्मियों पर गोली चला दी। जायसवाल ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को सदन में और विधानसभा के बाहर भी प्रमुखता से उठाएगी, जब तक कि सरकार मामले की जांच सीबीआई को नहीं सौंप देती। भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने पर तुली हुई है। झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में राजग के 24 विधायक हैं।