samacharsecretary.com

पराली प्रबंधन पर बाजवा का सुझाव, किसानों को ₹100 प्रति क्विंटल प्रोत्साहन देने की मांग

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने पराली जलाने के मुद्दे पर केंद्र की भाजपा सरकार की प्रस्तावित दंडात्मक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए किसानों के लिए आर्थिक प्रोत्साहन की मांग की है। बाजवा ने कहा कि पराली जलाने की समस्या का समाधान किसानों को केवल अपराधी मानकर जुर्माना लगाने से नहीं होगा। इसके लिए किसानों की आर्थिक मजबूरियों को समझते हुए व्यवहारिक विकल्प उपलब्ध कराने होंगे। बाजवा नहीं करते पराली जलाने का समर्थन बाजवा ने कहा कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के तहत वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पराली जलाने पर किसानों के खिलाफ जुर्माने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित व्यवस्था में खेत के आकार आधार पर प्रत्येक घटना के लिए 5,000, 10,000 और 30,000 रुपये तक जुर्माना लगाने की बात कही गई है। खेतों को रेड कैटेगरी में डाला जाएगा – सरकार ने पराली जलाने की समस्या का समाधान निकाला है। देश की राजधानी दिल्ली से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में किसान पराली जलाते हैं, जिससे प्रदूषण काफी बढ़ सकता है। पर्यावरण मंत्रालय ने इस पराली जलाने की समस्या को रोकने के लिए नए नियम बनाने का प्रस्ताव दिया है। नए नियमों के तहत पराली जलाए जाने वाले खेतों को रेड कैटेगरी में डाला जाएगा। क्या होंगे पराली जलाने को लेकर नया नियम? पर्यावरण मंत्रालय ने पराली जलाने को लेकर ड्राफ्ट नियम बुधवार को जारी किए। ड्राफ्ट नियमों के तहत, जिस खेत में पराली जलाई जाएगी, उसे घटना की तारीख से 15 महीने के लिए 'रेड कैटेगरी' में रखा जाएगा। हालांकि, इस कैटेगरी में डाले जाने के क्या नतीजे होंगे, यह अभी साफ नहीं है। नियमों के तहत, 'अगर उसी जमीन पर बाद में फिर से पराली जलाने की घटना होती है या इन नियमों के तहत लगाया गया पर्यावरण जुर्माना (अगर कोई हो) तय समय में जमा नहीं किया जाता है, तो 'रेड एंट्री' अगले 15 महीनों के लिए भी लागू रहेगी।'

वरिंदर सिंह बाजवा के निधन से SAD में शोक, सुखबीर बादल ने कहा- ‘पार्टी ने सच्चा नेता खो दिया’

होशियारपुर. शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य वरिंदर सिंह बाजवा का शनिवार को निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही अकाली दल के खेमे में शोक की लहर दौड़ गई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बाजवा के निधन को अकाली दल के लिए बड़ी क्षति बताया। वरिंदर सिंह बाजवा लंबे समय से अकाली राजनीति से जुड़े रहे और पार्टी में उन्होंने विभिन्न स्तरों पर अपनी जिम्मेदारी निभाई। वरिष्ठ नेता के तौर पर पार्टी के संगठनात्मक मामलों में उनकी सक्रिय भूमिका रही। राज्यसभा सदस्य के रूप में भी उन्होंने पंजाब और पार्टी से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनके राजनीतिक अनुभव और संगठन के भीतर मजबूत पकड़ के कारण उन्हें अकाली दल के महत्वपूर्ण नेताओं में गिना जाता था। बाजवा के निधन की सूचना मिलने के बाद शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल शनिवार को मॉडल टाउन स्थित उनके आवास पर पहुंचे। सुखबीर बादल ने परिवार के सदस्यों से मुलाकात की और उनके साथ दुख साझा करते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि पार्टी ने अनुभवी स और समर्पित नेता खो दिया है। कार्यकर्ताओं में भी शोक बाजवा के निधन की खबर फैलते ही अकाली दल के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में पार्टी से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर दुख जताया। नेताओं ने कहा कि बाजवा ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में पार्टी को मजबूती देने के लिए लगातार काम किया। उनका सहज व्यवहार और कार्यकर्ताओं के साथ जुड़ाव लंबे समय तक याद रखा जाएगा। राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि बाजवा का निधन ऐसे समय में हुआ है, जब पंजाब की राजनीति में अकाली दल एक बार फिर अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में पार्टी के अनुभवी नेता का निधन संगठन के लिए भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ी क्षति है। परिवार की ओर से अंतिम संस्कार संबंधी कार्यक्रमों की जानकारी बाद में साझा की जाएगी। बाजवा के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी शोक व्यक्त करते हुए परिवार के प्रति संवेदना जताई।