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ई-मेल से मिली बम धमकी: बालोद-बेमेतरा कोर्ट में हाई अलर्ट

बालोद/बेमेतरा छत्तीसगढ़ के हाईकोर्ट और विभिन्न जिला कोर्टों को लगातार बम से उड़ाने की धमकियां मिल रही है। इसी बीच आज बालोद कोर्ट और बेमेतरा जिला न्यायालय परिसर को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली है, जिससे हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि यह धमकी ईमेल के जरिए मिली है। धमकी मिलने के बाद कोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। वहीं पुलिस ने कोर्ट परिसर से सभी मजिस्ट्रेटों को सुरक्षित सर्किट हाउस लेकर पहुंची और सभी अधिवक्ताओं को भी बाहर निकाला गया है। फिलहाल, कोर्ट परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और बम स्क्वॉड की टीम जांच में जुट गई है। बता दें कि 25 फरवरी को छत्तीसगढ़ के हाईकोर्ट को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली थी, जिससे हाईकोर्ट परिसर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। इसके अलावा, इससे पहले प्रदेश के अन्य जिलों जैसे राजनांदगांव, जांजगीर-चांपा और जगदलपुर के न्यायालयों को भी इसी तरह की धमकियां मिल चुकी हैं। हालांकि, जांच में यह बात सिर्फ अफवाह निकली थी।

माहू के प्रकोप से बालोद जिले के खेत बर्बाद, किसान चिंतित

बालोद बालोद जिले के गुण्डरदेही विधानसभा क्षेत्र के किसान इन दिनों एक विकट आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ग्राम परसाडीह में लगभग एक हजार एकड़ में बोई गई धान की फसल में से करीब 500 एकड़ फसल माहू नामक बीमारी के प्रकोप से पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। छोटे-बड़े सभी किसान इस अनपेक्षित आपदा से हताश हैं और अपनी तबाह हुई फसलों को देखकर फूट-फूट कर रो रहे हैं। किसानों की आंखों से आंसू ग्राम परसाडीह के किसान गोपाल साहू ने अपनी कर्ज और बर्बाद हुई फसल की व्यथा सुनाते हुए कहा कि वह छोटे किसान हैं और कर्ज लेकर खेती करते हैं। इस बार माहू बीमारी ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी कमाई का एकमात्र जरिया ही तबाह हो गया है। अपनी बर्बाद फसल के कारण वे सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। एक अन्य किसान, सामंत साहू, जिन्होंने 25 एकड़ में खेती की थी, बताया कि उनकी केवल 10 एकड़ फसल ही सुरक्षित बची है, जबकि 15 एकड़ पूरी तरह से नष्ट हो गई है। उन्होंने अपनी फसलों पर लगभग ₹1,00,000 की दवाइयों का छिड़काव भी किया, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। माहू के प्रकोप से खेत अब पूरी तरह बंजर हो गए हैं और किसानों की उम्मीदें टूट चुकी हैं। इस विपदा से प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन के पास मुआवजे की मांग को लेकर आवेदन जमा किए हैं। किसानों की सरकार से काफी उम्मीदें हैं।

राष्ट्रीय कीर्तिमान: बालोद में पिछले दो वर्षों से नहीं हुआ कोई बाल विवाह

बालोद छत्तीसगढ़ के बालोद जिले ने राष्ट्रीय पटल पर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह देश में पहला बाल विवाह मुक्त जिला बन गया है। ऐसा जिला प्रशासन के प्रयासों और आम जनता के सहयोग से संभव हो पाया है। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 27 अगस्त 2024 को बाल विवाह मुक्त नामक राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की थी जिसके तहत बालोद जिले ने यह उपलब्धि हासिल की। यहां जिले की सभी 436 ग्राम पंचायत और नव नगरीय निकायों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए हैं। पिछले दो वर्षों में बालोद जिले से एक भी बाल विवाह का मामले सामने नहीं आया है। बालोद एक राष्ट्रीय उदाहरण बनकर सामने आया है। विधिक प्रक्रिया और सत्यापन आपको बता दें कि सरकारी आंकड़ों के हिसाब से पिछले दो वर्षों में बालोद जिले से बाल विवाह का एक भी मामला सामने नहीं आया। राष्ट्रीय स्तर पर विधिक प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद पूरे जिले को बाल विवाह मुक्त घोषित किया गया। इस उपलब्धि के साथ बालोद ने पूरे देश के सामने एक मिसाल पेश की है। बालोद एक विकासशील जिला होने के साथ एक बेहतरीन उदाहरण बनता जा रहा है साक्षरता और समझदारी में भी। कलेक्टर ने कही ये बात बालोद जिले की इस उपलब्धि से प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों सहित आम जनता में खुशी है। जिला कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने कहा कि यह सफलता प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और समुदाय की सामूहिक भागीदारी का परिणाम है। उन्होंने सभी पंचायतों व नगरीय निकायों के सहयोग के लिए आभार जताया। वहीं भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सरकार और प्रशासन के बेहतरीन सहयोग और आम जनता की जागरूकता से यह काम संभव हो पाया है सभी जिलेवासी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र में बैठे हमारे प्रधानमंत्री जी ने जिस तरह का सपना बालोद, छत्तीसगढ़ या पूरे देश के लिए देखा है उसी दिशा में हमारा देश आगे बढ़ रहा है। यह गर्व की बात है कि बाल विवाह मुक्त भारत अभियान में बालोद ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है।