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किसानों को चेतावनी: नरवाई जलाई तो लगेगा भारी जुर्माना, गांवों में होगी मुनादी

जबलपुर  धान और अन्य फसलों की कटाई के बाद खेतों में नरवाई जलाने पर जिले में प्रतिबंध लगा दिया गया है। अपर जिला दंडाधिकारी नीता राठौर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 163 (2) के तहत आदेश जारी किया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से 60 दिनों तक लागू रहेगा। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के प्रविधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश में यह स्पष्ट किया है कि फसल कटाई में उपयोग होने वाले कंबाइन हार्वेस्टर के साथ भूसा तैयार करने के लिए सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम या स्ट्रा रीपर अथवा बेलर लगाना अनिवार्य होगा। इन उपकरणों के बिना कटाई करते पाए जाने पर हार्वेस्टर तत्काल जब्त किया जा सकेगा। जमीन के रकबे के अनुसार लगेगा जुर्माना नरवाई जलाने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के प्रावधानों के अनुसार पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि वसूली जाएगी। दो एकड़ से कम जमीन होने पर 2,500 रुपये, दो से पांच एकड़ से कम जमीन पर 5,000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक कृषि भूमि होने पर 15,000 रुपये प्रति घटना के हिसाब से राशि देनी होगी। प्रतिबंध के पालन की जिम्मेदारी उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास को नोडल अधिकारी के रूप में सौंपी गई है। ग्राम पंचायत स्तरीय निगरानी समिति उल्लंघन की जांच कर रिपोर्ट वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के माध्यम से संबंधित तहसीलदार को देगी। मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को नुकसान तहसीलदार संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने के बाद सात दिनों के भीतर जुर्माने पर निर्णय लेंगे। किसानों को जागरूक करने के लिए गांवों में मुनादी कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद सेटेलाइट मैपिंग के जरिए खेतों में आग लगाने की घटनाओं पर निगरानी कर रही है। नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ मिट्टी की उपजाऊ ऊपरी परत, कार्बनिक पदार्थ और केंचुए जैसे मित्र कीट नष्ट होते हैं। इससे आसपास के गांवों, राजमार्गों और जंगलों में आग फैलने का खतरा भी रहता है।

पंजाब को भी पीछे छोड़ने वाले विदिशा में फिर जली पराली, प्रशासन ने की कार्रवाई

 विदिशा  राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों से पराली ( नरवाई) जलाने से पर्यावरण और खेती को हो रहे नुकसान को बताने के लिए गांव – गांव अभियान चला रही हैं। किसान भी इसके खतरे को जानने और समझने लगे है। बावजूद इसके वे मामूली खर्च बचाने के लिए खेतों में फसल के अवशेष मशीनों से हटाने की बजाय आग लगाने से बाज नहीं आ रहे है। पराली जलाने के मामले में पंजाब के जिलों को भी पीछे छोड़ा     प्रदेश ही नहीं पूरे देश में शरबती गेहूं के लिए पहचाने जाने वाले विदिशा जिले में पराली जलाने के मामले में पंजाब के जिलों को भी पूछे छोड़ दिया है। पिछले साल विदिशा जिला पराली जलाने के मामले में देश में पहले स्थान पर था। इस साल फिर खरीफ सीजन की फसल कटते ही पराली जलाने का सिलसिला शुरू हो गया है। केंद्र सरकार के आईसीएआर की सोमवार तक की रिपोर्ट देखे तो पूरे प्रदेश में 521 स्थानों पर पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हुई है। इसमें विदिशा की 14 घटनाएं शामिल है। वर्ष 2020 से अब तक वर्ष 2026 की इस अवधि में पराली जलाने की घटनाओं के आंकड़े देखे तो इसमें कमी दिखाई देती है। वर्ष 2020 में 15 सितम्बर से 19 अक्टूबर के बीच 60 घटनाएं दर्ज हुई थीं। इस लिहाज से वर्तमान के आंकड़ों में गिरावट आई है लेकिन आने वाले दिनों में यह रफ्तार धीमी रहेगी। इसमें संशय है क्योंकि पिछले साल इसी अवधि में काटे 12 घटनाएं दर्ज हुई थी लेकिन दिसंबर तक आते-आते यह आंकड़ा चार हजार के पार पहुंच गया था जो देश में सबसे अधिक था। शुरुआत से ही सख्ती की तैयारी में प्रशासन पिछले साल के अनुभव को देखते हुए इस वर्ष जिला प्रशासन पराली जलाने को लेकर अभी से सख्त और सतर्क हो गया है। चार दिन पहले कृषि विभाग के अधिकारियों ने खेतों में पराली जलाने वाले दो किसानों के खिलाफ पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करा दी। अधिकारियों का कहना है कि खेतों में पराली जलाने वालों में बड़े किसान अधिक है। लेकिन वे समय और पैसा बचाने के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने से नहीं हिचक रहे है। गांव-गांव किसानों को जागरूक कर रहा अमला कृषि विभाग के उप संचालक सचिन जैन का कहना है कि इन दिनों कृषि विभाग का पूरा मैदानी अमला गांव – गांव चौपाल लगाकर किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने में लगा है। इस बार विभाग ने कुछ वीडियो भी बनाये है। जिसके माध्यम से भी किसानों को खेतों में पराली नुकसान के साथ ही पराली प्रबंधन की भी जानकारी दी जा रही है।

MP Crime: सतना में किसान पर जानलेवा हमला, गला रेतकर लूटे जेवर, हमले में पांच लोग गंभीर

सतना. जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत सोनवारी गांव में शनिवार-रविवार की दरम्यानी देर रात नकाबपोश बदमाशों ने एक घर में घुसकर खूनी वारदात को अंजाम दिया। खेत में बने घर के बरामदे में सो रहे 40 वर्षीय किसान रज्जन सिंह पटेल की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई। हमलावरों ने उनकी पत्नी, दो बच्चों और बुजुर्ग दादी पर भी हमला कर घायल कर दिया। वारदात के बाद बदमाश घर से गहने और अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए। एक ही परिवार के पांच सदस्यों पर हमले और किसान की हत्या से गांव में दहशत फैल गई। बरामदे में सो रहे किसान पर हमला प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 12:30 बजे रज्जन सिंह पटेल अपने खेत में बने घर के बरामदे में खाट पर सो रहे थे। परिवार के अन्य सदस्य घर के अंदर सो रहे थे। इसी दौरान करीब आधा दर्जन नकाबपोश बदमाश वहां पहुंचे और रज्जन पर कुल्हाड़ी सहित अन्य धारदार हथियारों से हमला कर दिया। हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। चीख-पुकार सुनकर बाहर निकला परिवार मृतक की पत्नी अंजना सिंह पटेल के मुताबिक, पति पर हमला होने के दौरान चीख-पुकार सुनकर वह अपनी आठ वर्षीय बेटी रागनी सिंह पटेल, 12 वर्षीय बेटे अनिकेत पटेल और बुजुर्ग दादी लल्ली सिंह पटेल के साथ बाहर निकलीं। इस दौरान हमलावरों ने उन पर भी हमला कर दिया। अंजना के सिर और लल्ली सिंह के सिर व आंख में चोट आई है। बेटी रागनी के सिर में भी चोट लगी, जबकि बेटे अनिकेत को मामूली चोट आई है। पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची घटना की सूचना मिलते ही नगर पुलिस अधीक्षक महेंद्र सिंह और कोतवाली थाना प्रभारी अभिषेक सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। डायल 112 की सहायता से सभी घायलों को सिविल अस्पताल मैहर पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटनास्थल पर फोरेंसिक अधिकारी डॉ. महेंद्र पटेल अपनी टीम के साथ पहुंचे और साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने मामले में गांव के कुछ संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। हत्या और लूट की इस वारदात को लेकर पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।

हरियाणा में फसल बीमा क्लेम पर उपभोक्ता आयोग का फैसला, किसान को ₹58 हजार से ज्यादा राहत और 7% ब्याज मिलेगा

 कुरुक्षेत्र  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में गेहूं की फसल का बीमा करवाने के बावजूद क्लेम नहीं मिलने पर गांव बसंतपुर की किसान अमरजीत कौर को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग से राहत मिली है। आयोग ने बीमा कंपनी और बैंक की लापरवाही को सेवा में कमी मानते हुए दोनों को संयुक्त रूप से किसान को 43,870 रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही मानसिक परेशानी के लिए 10 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में पांच हजार रुपये भी देने होंगे। मुआवजे की राशि पर शिकायत दायर करने की तारीख से भुगतान होने तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। आयोग ने सभी निर्धारित राशियों का भुगतान 45 दिन के भीतर करने के निर्देश दिए हैं। तीन एकड़ गेहूं की फसल को हुआ था नुकसान बसंतपुर निवासी अमरजीत कौर ने आयोग में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उनके पास गांव में तीन एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने रबी सीजन 2021-22 में तीन एकड़ में गेहूं की फसल बोई थी और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा करवाया था। इसके लिए उनके बैंक खाते से 1,202.92 रुपये प्रीमियम काटा गया था। मार्च 2022 में भारी बारिश के कारण फसल को नुकसान पहुंचा। इसके बाद कृषि विभाग की टीम ने खेतों का निरीक्षण किया और फसल नुकसान 58.52 प्रतिशत आंका। इसके बावजूद किसान को बीमा क्लेम नहीं मिला। बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी राहत नहीं मिलने पर उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। पोर्टल पर विवरण अपलोड नहीं करने का दिया तर्क मामले में बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बैंक ने किसान के आवेदन के साथ जरूरी यूटीआर नंबर राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया था। इस कारण आवेदन का स्टेटस फ्रेश/अनपेड रहा। कंपनी के अनुसार, 2,63,443.21 रुपये की समेकित प्रीमियम राशि 24 अगस्त 2022 को बैंक को वापस कर दी गई थी। वहीं, बैंक ने दलील दी कि उसने प्रीमियम बीमा कंपनी को भेज दिया था और क्लेम देने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की थी। कृषि विभाग ने भी अपने रिकार्ड में फसल नुकसान का आंकलन किए जाने की पुष्टि की। किसान की गलती नहीं, दोनों की जिम्मेदारी आयोग की अध्यक्ष नीलम कश्यप तथा सदस्य नीलम और सुनील मोहन त्रिखा की पीठ ने 18 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए कहा कि किसान के खाते से प्रीमियम काटने के बाद बैंक की जिम्मेदारी थी कि वह निर्धारित समय में पूरा विवरण पोर्टल पर अपलोड करे। वहीं, बीमा कंपनी को भी तय अवधि में दस्तावेजों का सत्यापन कर किसी कमी की जानकारी संबंधित विभाग को देनी चाहिए थी। आयोग ने माना कि किसान का पोर्टल पर विवरण अपलोड करने की प्रक्रिया में कोई नियंत्रण नहीं था। इसलिए बैंक और बीमा कंपनी की लापरवाही का खामियाजा किसान को नहीं भुगतना पड़ सकता। आयोग ने दोनों पक्षों को संयुक्त एवं अलग-अलग रूप से भुगतान के लिए जिम्मेदार ठहराया। आदेश का पालन नहीं करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 72 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

पंजाब में किसानों का बड़ा प्रदर्शन, बठिंडा-मानसा में प्रशासनिक दफ्तरों पर लगाया ताला

 बठिंडा  पंजाब के विभिन्न जिलों में मांगों को लेकर किसानों की ओर से जिला प्रबंधकीय परिसर के सभी गेटों का बंद कर धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है।किसान सोमवार से यहां धरना-प्रदर्शन करने में जुटे हैं। इस दौरान किसी भी कर्मचारी को अंदर जाने नहीं दिया गया। इस कारण जिला प्रबंधकिय परिसर में बने सभी सरकारी दफ्तरों में काम बंद पड़ा है। मानसा में भी दिखा असर वहीं, मानसा में भी किसान जिला प्रबंधकीय परिसर के गेट पर लगा रहे हैं। इस बीच किसान संगठन उगराहा की ओर से मंगलवार सुबह प्रबंधन के परिसर को जाने वाले दोनों गेट को बंद करते धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। प्रशासन की ओर से किसानों के प्रदर्शन को देखते धरना स्थल के आसपास पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। इस दौरान किसी भी अधिकारी और कर्मचारियों को प्रबंधन के परिसर के अंदर और बाहर जाने की अनुमति नहीं है। नतीजन डीसी, एसएसपी समेत अन्य विभागों के अधिकारी अपने दफ्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं। बेशक सोमवार को जिले में मुख्यमंत्री की लोक मिलनी को लेकर पूरा प्रशासन गांव फत्ता मालोका में व्यस्त होने के कारण बड़े अधिकारी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाए, लेकिन किसानों ने मंगलवार सुबह ही प्रबंधकीय कॉम्प्लेक्स के बाहरी गेट से आगे बढ़ते परिसर के अंदर जाने वाले दोनों दरवाजों को बंद करते सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। किसान नेता राम सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री गांव की चौपाल में लोगों की समस्या हल करने के दावे कर रहे हैं, लेकिन किसानी मांगों को लेकर पिछले महीने डीसी दफ्तरों के आगे दिन रात का धरना देने के बाद भी सरकार उनकी मांगे मानने को मंजूर नहीं है। किसान नेता ने कहा कि संगठन की प्रदेश कमेटी नेताओं कि फैसले अनुसार प्रबंधकीय कांप्लेक्स का। घेराव जारी रहेगा। प्रदर्शन में ही लंगर का प्रबंध प्रबंधकीय कांप्लेक्स में धरने पर बैठे किसानों के लिए लंगर की व्यवस्था भी की गई है ताकि किसान लंगर खाने के लिए इधर-उधर में जा सके।  

पटियाला में किसानों और पुलिस में टकराव, मिनी सचिवालय के सभी गेट किए गए बंद

पटियाला. मांगों को लेकर किसानों ने सोमवार को डीसी दफ्तर के बाहर लगातार धरना शुरू कर दिया। धरने के दौरान किसानों ने मिनी सचिवालय के सभी गेट बंद कर दिए। जिसके बाद पुलिस और किसानों के बीच झड़प का मामला सामने आया है। किसानों ने गेट बंद करने और पुलिस की तरफ से उसे खोलने को लेकर धक्का मुक्की हुई। इस दौरान सचिवालय के अंदर आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। किसानों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। लोग हो रहे परेशान किसानों द्वारा मिनी सचिवालय के मुख्य गेटों को बंद किए जाने के कारण न तो लोगों को अंदर जाने दिया जा रहा है और न ही अंदर मौजूद लोगों को बाहर आने दिया जा रहा है। इससे विभिन्न सरकारी विभागों में अपने काम करवाने के लिए पहुंचे लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कई लोग गेटों के बाहर खड़े होकर स्थिति सामान्य होने का इंतजार करते दिखाई दिए।

MSP पर धान-ज्वार-बाजरा खरीदी के लिए 1 लाख से ज्यादा किसानों ने कराया पंजीयन

समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये एक लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन : मंत्री राजपूत 10 अक्टूबर तक होगा पंजीयन भोपाल खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये पंजीयन प्रक्रिया जारी है। अभी तक एक लाख से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है। किसान 10 अक्टूबर तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीयन करा लें, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। प्रदेश में 1100 से अधिक पंजीयन केन्द्र बनाये गये हैं। जबलपुर संभाग में 5 लाख 40 हजार 79, नर्मदापुरम में 9 हजार 436, भोपाल में 4 हजार 244, रीवा में 26 हजार 730, शहडोल में 9 हजार 710 और सागर संभाग में 4 हजार 766 किसानों ने पंजीयन कराया है। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। प्रति पंजीयन के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। किसान पंजीयन के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज़ एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोटो पहचान पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य होगा। सिकमी/बटाईदार/कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था ‌द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा। उपार्जित फसल के भुगतान के लिये बैंक खाता किसान द्वारा समर्थन मूल्य पर विक्रय उपज का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किसान के आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते में भुगतान करने में किसी कारण से समस्या उत्पन्न होने पर किसान ‌द्वारा पंजीयन में उपलब्ध कराये गए बैंक खाते में भुगतान किया जा सकेगा। किसान पंजीयन के समय किसान को बैंक खाता नंबर और IFSC कोड की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। अक्रियाशील बैंक खाते, संयुक्त बैंक खाते एवं फिनो, एयरटेल, पेटीएम, बैंक खाते पंजीयन में मान्य नहीं होंगे। पंजीयन व्यवस्था में बेहतर सेवा प्राप्त करने के लिए यह जरूरी होगा कि किसान अपने आधार नंबर से बैंक खाता और मोबाईल नंबर को लिंक कराकर उसे अपडेट रखें। सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केन्द्रों को क्रियाशील रखा जाए जिससे किसान वहां जाकर आसानी से अपना मोबाईल नंबर एवं बायोमेट्रिक अपडेट करा सके।  इस कार्य के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय आवश्यक होगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन के लिये पंजीयन के दौरान ही एक रूपये का ट्रांजेक्शन मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/जेआईटी पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा। आधार नंबर का वेरिफिकेशन पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से या बायोमेट्रिक डिवाईस से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि किसान के भू-अभिलेख के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही उक्त पंजीयन मान्य होगा। किसानों को करें एसएमएस विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं। किसान पंजीयन की सभी प्रक्रियाएँ समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं।  

मेरठ में खेती की चुनौतियों पर हुआ मंथन, गन्ने से बासमती तक, कृषि मुद्दों पर चर्चा

गन्ने से बासमती तक, खेती की चुनौतियों पर मेरठ में हुआ मंथन -किसान कारवां 2.0 के दूसरे पड़ाव में कृषिवीरों को किया गया सम्मानित -खेती किसानी की क्विज में 15 किसानों ने जीते एक-एक हजार रुपये मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों से खेती की मौजूदा चुनौतियों, तकनीक और बाजार से जुड़े मुद्दों पर सीधे संवाद के लिए शुरू किया गया किसान कारवां 2.0 गुरुवार को मेरठ पहुंचा। आईआईएमटी विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित क्षेत्रीय किसान महासभा में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। किसान तक और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से हुए आयोजन में गन्ना, बासमती, फसल सुरक्षा, प्राकृतिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीक जैसे विषयों पर विशेषज्ञों और किसानों ने विचार साझा किए।कार्यक्रम की शुरुआत सुबह करीब 10 बजे हुई। कृषि से जुड़े संदेशों को मनोरंजन के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने के लिए जादूगर सलमान ने कृषि विषयों पर आधारित प्रस्तुति दी। जादू के जरिए खेती से जुड़े संदेशों को रोचक अंदाज में पेश किया गया। बासमती को बाजार और निर्यात से जोड़ने पर जोर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बासमती धान की खेती की विशेष पहचान को देखते हुए ‘बासमती के बादशाह-खुशबू से बाजार तक’ विषय पर पैनल चर्चा हुई। किसान तक के संपादक ओमप्रकाश ने इसका संचालन किया। बीईडीएफ के निदेशक डॉ. रितेश शर्मा, प्रगतिशील किसान प्रीतम सिंह और विनोद सैनी ने चर्चा में हिस्सा लिया। डॉ. रितेश शर्मा ने बेहतर बाजार, मजबूत सप्लाई चेन और किसानों को सीधे निर्यात से जोड़ने की संभावनाओं पर जानकारी दी। हापुड़ को बासमती निर्यात और बेहतर मार्केट एक्सेस के संभावित मॉडल हब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। गन्ना भुगतान से फसल रोग तक उठे सवाल पश्चिमी यूपी की कृषि अर्थव्यवस्था में गन्ने की भूमिका को देखते हुए ‘गन्ने का गढ़—मिठास के साथ चुनौतियों का हल’ विषय पर अलग सत्र हुआ। किसान तक के वरिष्ठ संवाददाता जेपी सिंह के संचालन में हुए पैनल में गुड़ उत्पादक किसान केपी सिंह, किसान नेता धर्मेंद्र मलिक, प्रगतिशील गन्ना किसान ओमकार त्यागी और आईसीआर-आईआईएसआर के कृषि वैज्ञानिक रघुवीर सिंह शामिल हुए। चर्चा में गन्ना भुगतान व्यवस्था में सुधार, रेड रॉट जैसी बीमारियों से बचाव, रोग प्रतिरोधी नई किस्मों को किसानों तक पहुंचाने और मशीनों से गन्ने की सूखी पत्तियों के बेहतर प्रबंधन के उपायों पर मंथन किया गया। खेती में बढ़ते जोखिम के बीच ‘खेती की सुरक्षा—बीमा, तकनीक और कुदरत का साथ’ विषय पर भी विशेषज्ञों ने चर्चा की। किसान तक की उप संपादक हिमानी दीवान ने सत्र का संचालन किया। इसमें जैविक किसान अनु त्यागी, हेड-पोटैटो सेंटर मोडीपुरम के डॉ. आर.के. सिंह, केवीके शामली के डॉ. संदीप चौधरी और कृषि निदेशक प्रमोद सिरोही शामिल रहे। फसल बीमा की पहुंच बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा सोलर पंप, ड्रोन और नैनो यूरिया जैसी तकनीकों को किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर विचार हुआ। क्विज में 15 किसानों को मिला नकद पुरस्कार किसान महासभा में किसानों की भागीदारी बढ़ाने के लिए खेती-किसानी पर आधारित क्विज भी कराई गई। किसानों ने क्यूआर कोड स्कैन कर इसमें हिस्सा लिया। तीन क्विज में प्रत्येक से पांच विजेताओं का चयन हुआ। इस तरह कुल 15 किसानों को एक-एक हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया। पश्चिमी यूपी के 10 किसान बने ‘कृषिवीर’ किसान कारवां 2.0 के तहत प्रदेश के नौ कृषि जलवायु क्षेत्रों में क्षेत्रीय किसान महासभाओं का आयोजन किया जा रहा है। मेरठ में आयोजित महासभा में पश्चिमी क्षेत्र के विभिन्न जिलों से चयनित 10 किसानों को ‘कृषिवीर’ सम्मान दिया गया। सम्मानित किसानों में मंजू कश्यप, ओमवीर सिंह, प्रीतम सिंह, विनोद सैनी, नीलम त्यागी, नीरजा शर्मा, श्याम सिंह, ठाकुर धर्मपाल, जुनैद फरीदी अली और विनोद पवार शामिल रहे। सभी को प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी प्रदान की गई। इस दौरान किसानों की समस्याओं और जमीनी जरूरतों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने के लिए 20 सदस्यीय किसान परिषद का गठन भी किया गया। इसमें कृषि अधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों के साथ प्रगतिशील किसानों को शामिल किया गया है। मेरठ में हुए किसान कारवां 2.0 के दूसरे पड़ाव में पश्चिमी यूपी की खेती की चुनौतियों के साथ किसानों की सफलता, नई कृषि तकनीक और बेहतर बाजार से जुड़ने के अवसरों पर चर्चा हुई। गन्ना और बासमती की पारंपरिक ताकत को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ना आयोजन का प्रमुख केंद्र रहा।

किसानों के प्रदर्शन का छठा दिन, पंजाब सरकार को दोपहर तक का अल्टीमेटम; आंदोलन तेज करने की तैयारी

 मोहाली  संयुक्त किसान मोर्चे की ओर से अपनी मांगों को लेकर 1 से 7 सितंबर तक मोहाली-चंडीगढ़ बार्डर पर मोहाली से चंडीगढ़ जाने वाली मुख्य सड़क की एक साइड मोर्चा लगाने का आज 6वां दिन है। इन 6 दिनों के दौरान सरकार की ओर से किसान नेताओं से किसी प्रकार की बातचीत नहीं की गई है जिससे किसान नेता गुस्से में। सरकार और किसान नेताओं के बीच तालमेल बैठाने के लिए चंडीगढ़ की एसएसपी और रोपड़ रेंज के डीआईजी नानक सिंह की ओर से मीटिंग की गई थी। जिसके बाद प्रशासन ने शुक्रवार को एक दिन का समय मांगा था। किसानों की ओर से अमेरिका के साथ ट्रेड डील न करने, पानी के मुद्दे को लेकर सेक्शन 78,79,80 रद्द करने, किसानों का पूरा कर्ज माफ करने, फसलों का दाम स्वामीनाथन रिपोर्ट के हिसाब से तय करने, बिजली बिल 2025 और बीज बिल 25 वापस लेने, गन्ने का दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल करने, लैंड पुलिंग स्कीम रद्द करने सहित कई अन्य मांगों को लेकर मोहाली में पक्का मोर्चा लगाया गया है। रविवार 2 बजे तक करेंगे प्रशासन के जवाब का इंतजार पक्के मोर्चे से रोजाना स्टेज पर किसान नेता अपनी बातों को किसानों के सामने रख रहे है। सुबह 11 से 2 बजे तक स्टेज पर किसान नेता अपनी बात रखने के बाद रोजाना शाम को अपनी मीटिंग कर रहे है और अगली रणनीति तैयार कर रहे है। रविवार को दोपहर 2 बजे तक किसान नेता प्रशासन के जवाब का इंतजार कर रहे है अगर इस दौरान कोई संदेशा प्रशासन की ओर से नहीं आया तो किसान नेता शाम 5 बजे अपनी मीटिंग करने के बाद अगले संघर्ष का ऐलान कर देंगे। किसान नेताओं की ओर से 7 सितंबर तक मोर्चा लगाने की बात कही गई थी लेकिन आज कोई बात नहीं बनी तो हो सकता है किसान इस मोर्चे को और आगे बढ़ा सकते है। वैसे किसान नेताओं की बातों से लगता है कि वे इस मोर्चे से अपनी मांगों को मनवाने के बाद ही यहां से वापसी करेंगे। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि माहिरों की एक रिपोर्ट के अनुसार पंजाब से 2039 में पानी खत्म हो जाएगा ऐसे में लोगों के सामने विकट स्थिति बन जाएगी। इस विकट स्थिति बनने से पहले पंजाब के लोग सरकारों से अपनी मांगों को मांग रहे है। उन्होंने कहा कि पानी के मुद्दे को सुलझाने के लिए पिछले काफी समय से सरकारों को मांग पत्र दिए जा रहे है और अपना विरोध जताया जा रहा है लेकिन सरकारों को पंजाब के किसानों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से एक दिन का समय मांगा गया था अब रविवार को प्रशासन जैसी जानकारी देगा उसके बाद वैसा संघर्ष का ऐलान किया जाएगा। भारी बारिश के बाद भी किसान मोर्चे पर डटे हुए पिछले दिनों हुई बारिश के बाद किसानों पूरी तरह से मोर्चे पर डटे हुए है। शनिवार शाम को बारिश में भीगने के बाद भी एयरपोर्ट रोड के चौकों पर हाथों में झंडे लेकर अपनी बात लोगों के सामने रखी। किसानों का कहना है कि सरकारों को अपनी मांगें मनवाने के लिए मोर्चे में बैठे हुए है।  

पंजाब के किसानों का चंडीगढ़ बॉर्डर पर धरना, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से डेरा; पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

 चंडीगढ़  मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन का आज दूसरा दिन है। पंजाब के 32 किसान संगठनों की ओर से सात दिन के पक्के मोर्चे के ऐलान के बाद किसानों की संख्या में और इजाफा हुआ। बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मोर्चे पर पहुंच रहे हैं।  आईसर इंस्टीट्यूट से जगतपुरा की तरफ आने वाले मार्ग पर पुलिस ने एक तरफ का रास्ता बंद कर दिया है। सड़क के एक हिस्से से ही दोनों ओर का ट्रैफिक निकाला जा रहा है। इसके चलते वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले किसानों ने शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर जाने वाली व्यस्त सड़क के एक किनारे अपने ट्रैक्टर-ट्रेलर खड़े कर दिए और धरने के लिए टेंट लगा लिए, जो 7 सितंबर तक चलेगा. जानकारी के अनुसार जैसे-जैसे शाम होगी, भीड़ बढ़ने की आशंका है क्योंकि सैकड़ों किसानों को राशन के साथ विरोध स्थल तक पहुंचाया जा रहा है।  चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा एसकेएम को सेक्टर 48 में एक विरोध स्थल आवंटित किया गया है, जहां प्रदर्शनकारियों को संबोधित करने के लिए एक विशाल मंच बनाया गया था. इस आंदोलन की वजह से हवाई अड्डे की ओर जाने वाले लोगों को सात दिवसीय आंदोलन की शुरुआत के साथ ही मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि प्रदर्शनकारियों को दो लेन वाले राजमार्ग के एक तरफ अपने वाहन पार्क करने की अनुमति दी गई है।  मोहाली के उपायुक्त कोमल मित्तल ने कहा कि वे सड़क पर दोतरफा यातायात के एक तरफ को खुला रखने की कोशिश करेंगे. एसकेएम में 32 किसान संगठन शामिल हैं, जिनमें भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) राजवाल, कीर्ति किसान यूनियन और पंजाब किसान यूनियन शामिल हैं. हालांकि, एसकेएम की सहयोगी सदस्य बीकेयू उगराहन इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा नहीं है।  एसकेएम अन्य मांगों के साथ-साथ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर पंजाब की नदी के जल से संबंधित सभी पूर्व समझौतों को रद्द करने, भाखरा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में राज्य के प्रतिनिधित्व की बहाली, बांध सुरक्षा अधिनियम को निरस्त करने और 2024 के आपदा प्रबंधन अधिनियम को वापस लेने की मांग कर रहा है।  पंजाब में, बीकेयू (उग्राहन) ने राज्य और केंद्र सरकारों के किसान विरोधी निर्णयों और नीतियों के खिलाफ 30 अगस्त को 17 जिलों में उपायुक्तों के कार्यालयों के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया. बीकेयू (उग्राहन) भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द करने, पंजाब की भूमि पूलिंग नीति को समाप्त करने, किरायेदार किसानों के स्वामित्व अधिकारों को समाप्त करने और किसानों और मजदूरों के लिए कृषि ऋणों की पूर्ण माफी की मांग कर रहा है।  32 किसान संगठनों के किसान पहुंचे मोर्चे पर पंजाब के 32 किसान संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले सात दिन तक चंडीगढ़ बॉर्डर पर आंदोलन करने का ऐलान किया है। मंगलवार बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पहुंचे थे। सेक्टर-48 के पास ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की संख्या बढ़ने के बाद पार्किंग की जगह कम पड़ गई। किसानों के मुताबिक, वे अपने मुद्दों को लेकर पहुंचे हैं। वहीं, पुलिस ने सेक्टर-48 की तरफ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही रोकने के लिए बैरियर लगाए हैं। 20 हजार से ज्यादा किसानों के पहुंचने का दावा किसान नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने दावा किया कि मोर्चे में 20 हजार से ज्यादा किसान पहुंच चुके हैं। फेज-11 स्थित कैंडी होटल में किसान नेताओं की बैठक भी हुई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। फेज-11 से जगतपुरा तक सड़क के एक हिस्से पर बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी हैं। इसके चलते मोहाली से चंडीगढ़ जाने वाले मार्ग पर ट्रैफिक प्रभावित हुआ है। कई बड़े किसान नेता करेंगे संबोधित पक्के मोर्चे के दौरान किसान संगठनों के कई बड़े नेता मंच से किसानों को संबोधित करेंगे। इनमें बीकेयू-राजेवाल के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल, बीकेयू-टोंग के अध्यक्ष हरविंदर सिंह रंधावा, बीकेयू-डकोंदा के अध्यक्ष बूटा सिंह बुर्जगिल, बीकेयू-कादियां के अध्यक्ष हरमीत सिंह कादियां, बीकेयू-मशहूर के अध्यक्ष रेशम सिंह और एसकेएम पंजाब के अध्यक्ष परमजीत सिंह समेत कई नेता शामिल हैं। इसके अलावा राजिंदर सिंह घुमान, कुलवंत सिंह राजेवाल और हरिंदर सिंह लखोवाल समेत अन्य किसान नेता भी मोर्चे में मौजूद हैं। सरकार से मांगों पर जवाब मांग रहे किसान किसान नेताओं ने कहा कि उनकी मांगों को लेकर सरकार को जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दों पर अब एक-एक मीटर का हिसाब देना होगा। आंदोलन में भारत-अमेरिका कृषि समझौते का विरोध, पानी से जुड़े मुद्दों का समाधान, नए कानूनों को लेकर मांगें और 500 रुपए प्रति क्विंटल की मांग प्रमुख रूप से उठाई जा रही है। किसान संगठनों का कहना है कि सात दिन के पक्के मोर्चे के दौरान सरकार पर मांगों को लेकर दबाव बनाया जाएगा।