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जलवायु परिवर्तन से निपटने की नई पहल, धमतरी में वैज्ञानिकों ने किसानों को ग्राफ्टेड सब्जियों की खेती का दिया प्रशिक्षण

​रायपुर : ​जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए वरदान बनेगी ग्राफ्टेड सब्जी: धमतरी में वैज्ञानिक प्रशिक्षण संपन्न केरेमुड़ा में किसानों को दी गई ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की वैज्ञानिक खेती की कमान नगरी विकासखंड में बांटे गए 1 लाख से अधिक पौधे, लागत घटेगी और बढ़ेगी किसानों की आय जिला पंचायत, प्रदान (PRADAN) संस्था और गट्टासिल्ली FPO की अनूठी साझा पहल ​रायपुर,  खरीफ और रबी मौसम में बदलती जलवायु (Climate Change) की चुनौतियों के बीच किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें कम लागत में सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन दिलाने के लिए धमतरी जिले में एक बड़ी पहल की गई है। जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम केरेमुड़ा में ग्राफ्टेड (कलमी) टमाटर और बैंगन की वैज्ञानिक खेती पर एक दिवसीय ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला पंचायत के मार्गदर्शन में आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण का संचालन प्रदान (PRADAN) संस्था द्वारा किया गया।     ​इस प्रशिक्षण में नगरी और मगरलोड विकासखंड की कृषि सखियों, मास्टर ट्रेनर्स सहित बड़ी संख्या में स्थानीय किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को ग्राफ्टेड सब्जी उत्पादन की आधुनिक व वैज्ञानिक तकनीकों से रूबरू कराकर उन्हें जलवायु-अनुकूल, टिकाऊ और अधिक मुनाफे वाली खेती के लिए प्रेरित करना था। ​बांटे गए 1 लाख से अधिक ग्राफ्टेड पौधे      ​अधिकारियों ने बताया कि इस आजीविका मिशन के तहत नगरी विकासखंड में किसानों को कुल 1 लाख 1 हजार 800 ग्राफ्टेड पौधों का वितरण किया गया है। इसमें 51 हजार 800 ग्राफ्टेड टमाटर और 50 हजार ग्राफ्टेड बैंगन के पौधे शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्राफ्टेड पौधे सामान्य पौधों की तुलना में बेहद मजबूत होते हैं। इनकी जड़ प्रणाली (Root System) सशक्त होती है, जिससे इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। ये पौधे विपरीत मौसम में भी तेजी से बढ़ते हैं और बंपर पैदावार देते हैं, जिससे किसानों को बाजार में अपनी फसल की बेहतर कीमत मिलती है। ग्राफ्टेड पौधा में बीमारियां कम और पैदावार दोगुनी होती है ​      ग्राफ्टिंग एक ऐसी वैज्ञानिक तकनीक है जिसमें एक पौधे के मजबूत जड़ वाले हिस्से (रूटस्टॉक) पर दूसरे अधिक उत्पादन देने वाले पौधे के ऊपरी हिस्से (सायन) को जोड़कर एक नया 'सुपर प्लांट' तैयार किया जाता है। इससे बीमारियां कम लगती हैं और पैदावार दोगुनी तक हो जाती है। ​खेत पर ही दिया गया लाइव डिमांस्ट्रेशन       ​प्रशिक्षण की सबसे खास बात रहा खेत पर आयोजित 'लाइव फील्ड डेमोंस्ट्रेशन' (व्यावहारिक प्रदर्शन)। इसमें किसानों को सिर्फ किताबी ज्ञान न देकर सीधे खेत में ले जाकर भूमि की तैयारी, पौधों का उपचार, वैज्ञानिक तरीके से रोपण (Plantation), मल्चिंग, नमी संरक्षण और जैविक कृषि तकनीकों का लाइव प्रदर्शन करके दिखाया गया।     ​इसके साथ ही कृषि विशेषज्ञों ने समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन (IPM), मृदा स्वास्थ्य (Soil Health), जैव उर्वरकों का सही उपयोग और फसल कटाई के बाद के प्रबंधन की बारीकियां सिखाईं। संवाद सत्र में किसानों ने खेती के दौरान होने वाली अपनी रोजमर्रा की समस्याओं को रखा, जिसका विशेषज्ञों ने मौके पर ही वैज्ञानिक समाधान बताया। ​FPO और प्रदान (PRADAN) का मिला मजबूत साथ     ​इस पूरी मुहिम को धरातल पर उतारने में 'गट्टासिल्ली फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी' (FPO) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसके माध्यम से किसानों को उन्नत ग्राफ्टेड पौधे और जरूरी जैविक खाद-सामग्री उपलब्ध कराई गई। वहीं प्रदान संस्था द्वारा कृषि सखियों और किसानों को पूरे फसल चक्र (Crop Cycle) के दौरान लगातार तकनीकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उनका कौशल विकास किया जा रहा है।     ​जिला पंचायत धमतरी के मार्गदर्शन में चल रही यह त्रिकोणीय पहल (प्रशासन, FPO और प्रदान संस्था) नगरी और मगरलोड विकासखंड में आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ खेती का एक नया मॉडल पेश कर रही है। इससे न केवल ग्रामीण आजीविका मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर पोषण सुरक्षा को भी एक नया आयाम मिलेगा।

दलहन-तिलहन की खेती अपनाने पर मिलेगा 15 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन

एल-नीनो की चुनौती को अवसर में बदलें किसान- कृषि विभाग दलहन-तिलहन की खेती अपनाने पर मिलेगा 15 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक फसलें बनेंगी किसानों की आय का आधार रायपुर प्रदेश में इस वर्ष एल-नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम वर्षा की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को मौसम के अनुरूप फसल प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। विभाग ने विशेष रूप से अपलैंड एवं कम जलधारण क्षमता वाली भूमि में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया है।          कृषि विभाग के अनुसार कम वर्षा की संभावित परिस्थितियों में अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी, मूंगफली, तिल, रामतिल, कोदो, कुटकी एवं रागी जैसी फसलें बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। ये फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं तथा प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में किसानों के लिए जोखिम को कम करती हैं। दलहन-तिलहन की खेती पर मिलेगा प्रोत्साहन          राज्य शासन द्वारा किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत अपलैंड क्षेत्रों में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही इन फसलों की खरीदी प्रधानमंत्री आशा योजना के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर की जाती है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो सके। आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से लाभकारी हैं वैकल्पिक फसलें         कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि दलहन एवं तिलहन फसलें कम लागत में बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दलहनी फसलें भूमि में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में सहायक होती हैं, जिससे आगामी फसलों की उत्पादकता में भी वृद्धि होती है। साथ ही इन फसलों का बाजार मूल्य अपेक्षाकृत अच्छा होने से किसानों की आय में वृद्धि की संभावना रहती है। अल्प अवधि की धान किस्मों के चयन की सलाह           कृषि विभाग ने मध्यम भूमि वाले क्षेत्रों के किसानों को भी संभावित कम वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अल्प अवधि में तैयार होने वाली धान किस्मों का चयन करने की सलाह दी है। इससे जल उपलब्धता की अनिश्चितता के बावजूद उत्पादन जोखिम को कम किया जा सकेगा।          कृषि विभाग ने किसानों से वैज्ञानिक सलाह के अनुसार फसल चयन करने, फसल विविधीकरण अपनाने तथा शासन की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया है। विभाग का मानना है कि मौसम आधारित कृषि रणनीति अपनाकर किसान न केवल संभावित सूखे के प्रभाव को कम कर सकते हैं, बल्कि अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

अमेरिका-भारत समझौते के खिलाफ किसानों का ऐलान, पंजाब में कल फूंके जाएंगे मोदी-ट्रंप के पुतले

चंडीगढ़  किसान मजदूर मोर्चा (चैप्टर पंजाब) ने अमेरिका-भारत समझौते के विरोध में केंद्र सरकार के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन ने कहा है कि 24 जून को पूरे पंजाब में भारतीय जनता पार्टी के मुख्य कार्यालयों और प्रमुख नेताओं के आवासों के बाहर प्रदर्शन करेंगे।  इस देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा करते हुए किसान नेता सरवण सिंह पंधेर ने कहा कि अमेरिका-भारत समझौता देश के कृषि क्षेत्र और विभिन्न आर्थिक ढांचों को कॉर्पोरेट हाथों में सौंपने जैसा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों और मजदूरों के हितों से खिलवाड़ बंद नहीं किया, तो यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। कृषि और अर्थव्यवस्था पर गंभीर खतरे का आरोप घोषणा के दौरान किसान नेता सरवण सिंह पंधेर ने कहा कि यह समझौता सीधे तौर पर कृषि क्षेत्र और देश की आर्थिक संप्रभुता पर हमला है। उनके अनुसार, इससे भारतीय किसानों और विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नीति कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने वाली है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके विरोध में कल पूरे पंजाब में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे। प्रदर्शन स्थलों की विस्तृत सूची (21 जिले) किसान मजदूर मोर्चा द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची के अनुसार, पंजाब के सभी प्रमुख जिलों में निम्नलिखित तय स्थानों पर प्रदर्शन और पुतला दहन किया जाएगा पुलिस प्रशासन अलर्ट पर एक ही दिन में पंजाब के 21 जिलों में भाजपा कार्यालयों और वीआईपी नेताओं कैप्टन अमरिंदर सिंह और अश्विनी शर्मा के घरों के घेराव तथा पुतला दहन की घोषणा के बाद पुलिस और खुफिया तंत्र अलर्ट मोड पर आ गया है। सुरक्षा के मद्देनजर सभी प्रदर्शन स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं। किसान मजदूर मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि उनका यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन इसमें बड़ी संख्या में किसान व मजदूर शामिल होंगे, जो सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराएंगे।

किसान कल्याण वर्ष: 4 साल में सब्जी उत्पादन में 21.58 लाख मीट्रिक टन की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

किसान कल्याण वर्ष:चार वर्षों में सब्जी उत्पादन में 21.58 लाख मीट्रिक टन की हुई अभूतपूर्व वृद्धि मध्यप्रदेश, देश में सब्जी उत्पादन में तीसरे स्थान पर भोपाल मध्यप्रदेश आज कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी सशक्त पहचान बना चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, इसका उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, कृषि का विविधीकरण तथा खेती को अधिक लाभकारी बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कहते है कि कृषि को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि के साथ उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण को भी समान महत्व देना आवश्यक है। विगत 4 वर्ष में प्रदेश के सब्जी उत्पादन में लगभग 21.58 लाख मीट्रिक टन की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मध्यप्रदेश देश में सब्जियों के उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा “समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश” की थीम पर सब्जी क्षेत्र विस्तार की व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। प्रदेश की अनुकूल जलवायु, उपजाऊ भूमि, सिंचाई संसाधनों का विस्तार तथा किसानों द्वारा आधुनिक तकनीकों को अपनाने के कारण सब्जी उत्पादन में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है। वर्ष 2022-23 में प्रदेश में सब्जियों का उत्पादन 236.41 लाख मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 257.99 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। यह वृद्धि राज्य के कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र की सुदृढ़ प्रगति को दर्शाती है। राष्ट्रीय स्तर पर सब्जियों का कुल उत्पादन लगभग 2177 लाख मीट्रिक टन है, जिसमें मध्यप्रदेश की भागीदारी लगभग 259 लाख मीट्रिक टन है। इससे स्पष्ट है कि देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में मध्यप्रदेश महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। प्रदेश के लाखों किसान सब्जी उत्पादन से अपनी आय भी बढ़ा रहे हैं और देश की बढ़ती मांग को भी पूरा कर रहे हैं। प्रदेश में किसानों द्वारा प्याज, आलू, टमाटर, बैंगन, फूल-गोभी, पत्ता-गोभी, हरी मटर, भिंडी, पालक, लौकी, अरबी, करेला, ककड़ी, मूली, तुरई (तोरी), गाजर, शकरकंद, शिमला मिर्च, परवल सहित अनेक प्रकार की सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। इनमें प्याज उत्पादन का विशेष स्थान है। प्रदेश में सर्वाधिक क्षेत्र प्याज की खेती के लिए उपयोग किया जाता है। वर्ष 2022-23 में प्याज का रकबा 2.17 लाख हैक्टेयर था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर लगभग 2.30 लाख हैक्टेयर हो गया है। यह वृद्धि किसानों के बढ़ते विश्वास और बाजार में प्याज की मांग को दर्शाती है। प्रदेश में छोटी जोत वाले किसानों को सब्जी फसलों के उत्पादन के लिये ओर प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है। जिनसे कम भूमि में अधिक आय प्राप्त हो सके। सब्जी उत्पादन इस दृष्टि से सबसे प्रभावी विकल्पों में से एक होने से ही किसान कल्याण वर्ष में सब्जी क्षेत्र विस्तार को विशेष प्राथमिकता दी गई है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की कार्य योजना में प्रदेश में 54 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों का विस्तार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें 13 हजार 300 हैक्टेयर में आलू, 9 हजार 800 हैक्टेयर में टमाटर, 16 हजार 500 हैक्टेयर में प्याज, 3 हजार 500 हेक्टेयर में मटर, 3 हजार 500 हेक्टेयर में फूल-गोभी एवं पत्ता-गोभी, 01 हजार 200 हेक्टेयर में उच्च मूल्य वाली सब्जियां तथा 6 हजार 200 हैक्टेयर में कद्दूवर्गीय सब्जियों का विस्तार किया जाएगा। इस योजना से किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा विपणन सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। किसान कल्याण वर्ष का मूल उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। सब्जी उत्पादन में वृद्धि से किसानों को वर्ष भर नियमित आय प्राप्त होती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आता है। साथ ही प्रदेश में पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिलती है। सब्जियों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह क्षेत्र रोजगार सृजन का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादन, परिवहन, भंडारण एवं विपणन से जुड़े हजारों लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह के नेतृत्व में विभाग किसानों को उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। विभागीय योजनाओं का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ अधिक मूल्य वाली सब्जियों का उत्पादन करने के लिए प्रेरित करना है, ताकि वे कम भूमि में अधिक लाभ अर्जित कर सकें। आधुनिक तकनीक, संरक्षित खेती, सूक्ष्म सिंचाई तथा गुणवत्तायुक्त बीजों के उपयोग से उत्पादन और उत्पादकता दोनों में वृद्धि सुनिश्चित की जा रही है। मध्यप्रदेश में कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र में जो सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं, वे मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दूरदर्शी नेतृत्व और किसान हितैषी नीतियों का परिणाम हैं। किसान कल्याण वर्ष में सब्जी क्षेत्र विस्तार की यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी उद्यानिकी राज्य बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। समृद्ध किसान, समृद्ध कृषि और समृद्ध मध्यप्रदेश की अवधारणा को साकार करने में प्रदेश के सब्जी उत्पादक किसानों का योगदान आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।  

पारंपरिक खेती से आगे बढ़ रहे किसान, मालवा-निमाड़ में उद्यानिकी और नवाचार आधारित फसलों पर बढ़ा फोकस

मालवा-निमाड़ लंबे समय तक सोयाबीन और पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहे मालवा-निमाड़ में अब खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। किसान आय बढ़ाने और जोखिम कम करने के लिए फल, सब्जी, औषधीय और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इंदौर संभाग की रबी 2025-26 समीक्षा और खरीफ 2026 की तैयारियों को लेकर आयोजित संभागीय समीक्षा बैठक में सामने आए जिला-वार प्रस्तुतिकरणों से स्पष्ट हुआ कि क्षेत्र में फसल विविधीकरण अब नीति और व्यवहार दोनों स्तरों पर गति पकड़ रहा है। कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम मूल्य वाली फसलों के बजाय अधिक मूल्य वाली फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और इसका रकबा बढ़ाने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किए जाने चाहिए। साथ ही वैज्ञानिक खेती, नई तकनीकों और कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ रहे किसान आलीराजपुर : फलों और सब्जियों के नए क्लस्टर आलीराजपुर में आम, सीताफल और पपीता जैसी फल फसलों का रकबा लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही भिंडी और टमाटर जैसी सब्जियों के उत्पादन को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिले में नए बागवानी क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे अधिक किसानों को उन्नत खेती और बेहतर बाजार से जोड़ा जा सके। झाबुआ : तरबूज से बनी नई पहचान झाबुआ ने तरबूज उत्पादन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित की है। बढ़ते उत्पादन और बेहतर विपणन व्यवस्था के कारण किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। तरबूज अब जिले की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल हो चुका है। बड़वानी : केले से बढ़ रही समृद्धि बड़वानी में केले की खेती किसानों के लिए लाभकारी व्यवसाय बन गई है। यहां उत्पादित केले की मांग देश के साथ-साथ विदेशों तक पहुंच रही है। इसके अलावा किसानों को मिलेट्स उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। खरगोन : सफेद मूसली बना आय का नया आधार खरगोन में सफेद मूसली जैसी औषधीय फसल किसानों की आय का नया स्रोत बनकर उभरी है। वहीं हाईब्रिड मक्का उत्पादन को आधुनिक कृषि नवाचार के रूप में अपनाया जा रहा है, जिससे उत्पादकता और आमदनी दोनों में वृद्धि हो रही है। खंडवा : चिया और कुसुम की बढ़ती खेती खंडवा में चिया, कोदो और कुटकी जैसी फसलों का रकबा बढ़ रहा है। बाजार में अच्छे दाम मिलने से किसानों का इन फसलों की ओर रुझान बढ़ा है। साथ ही कुसुम की खेती को बढ़ावा देकर फसल विविधीकरण को नई दिशा दी जा रही है। धार : ब्लूबेरी के साथ नए प्रयोग धार जिले में ब्लूबेरी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यह फसल क्षेत्र में उच्च मूल्य वाली बागवानी के नए प्रयोग के रूप में उभर रही है और किसानों के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रही है। बुरहानपुर : ड्रिप सिंचाई से बढ़ा मुनाफा बुरहानपुर में ड्रिप सिंचाई तकनीक के माध्यम से केले की खेती को नई दिशा मिली है। पानी की बचत, बेहतर उत्पादन और कम लागत के कारण किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि दर्ज की जा रही है। सोयाबीन के विकल्पों पर बढ़ा जोर बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त ने सोयाबीन के विकल्प के रूप में अरहर पूसा-16 के उत्पादन को बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने खेतों में केवल बीटी कपास पर निर्भर रहने के बजाय कपास की अन्य प्रजातियों को भी बढ़ावा देने के निर्देश दिए, ताकि कीट प्रकोप की समस्या को कम किया जा सके। उन्होंने किसानों को जैविक खाद के उपयोग, मिट्टी परीक्षण और वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता बताई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को समय पर बीज और उर्वरक उपलब्ध कराए जाएं तथा कृषि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए। मालवा-निमाड़ में उभरता यह कृषि परिवर्तन संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में क्षेत्र की पहचान केवल सोयाबीन उत्पादक क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि विविध और उच्च मूल्य वाली फसलों के केंद्र के रूप में भी स्थापित हो सकती है।  

जशपुर की नाशपाती बनी किसानों की कमाई का बड़ा जरिया, 3500 से ज्यादा कृषक जुड़े

जशपुर की नाशपाती से बढ़ रही किसानों की आमदनी, 3,500 से अधिक कृषक जुड़े फल उत्पादन से 3500 हेक्टेयर में हो रही नाशपाती की खेती, देश के कई राज्यों में है जशपुर की नाशपाती की मांग एक एकड़ से किसानों को हो रही 1 लाख से 1.50 लाख रुपए तक की वार्षिक आय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। जशपुर जिले के किसान नाशपाती की खेती के माध्यम से उल्लेखनीय आय अर्जित कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। प्राकृतिक रूप से अनुकूल जलवायु और उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन के कारण जशपुर आज राज्य के प्रमुख नाशपाती उत्पादक जिलों में शामिल हो चुका है। जशपुर जिले में लगभग 3,500 से अधिक किसान करीब 3,500 हेक्टेयर क्षेत्र में नाशपाती की खेती कर रहे हैं। जिले में प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख 75 हजार क्विंटल नाशपाती का उत्पादन हो रहा है। इससे हजारों कृषक परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और जिले की पहचान फल उत्पादन के क्षेत्र में लगातार मजबूत हो रही है। जशपुर की नाशपाती स्वाद, गुणवत्ता और आकर्षक आकार के कारण देश के विभिन्न राज्यों में विशेष रूप से पसंद की जाती है। जिले के सन्ना, पंडरापाठ, कंवई, महुआ, सोनक्यारी, मनोरा, धवईपाई और गीधा जैसे क्षेत्रों से नाशपाती की खेप दिल्ली, उत्तर प्रदेश, ओडिशा सहित अन्य राज्यों में भेजी जाती है। फल को सावधानीपूर्वक कैरेट में पैक कर बाजारों तक पहुंचाया जाता है। नाशपाती की खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। एक एकड़ क्षेत्र से किसानों को औसतन 1 लाख से 1.50 लाख रुपए तक की वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और किसान आधुनिक उद्यानिकी की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। उद्यानिकी विभाग तथा नाबार्ड के सहयोग से किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, पौधरोपण, बागवानी प्रबंधन और विपणन संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत नाशपाती क्षेत्र विस्तार योजना संचालित की जा रही है, जिसके माध्यम से किसानों को अनुदान एवं तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से जशपुर जिले में उद्यानिकी आधारित कृषि को नई दिशा मिली है। नाशपाती की खेती न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि जशपुर को राज्य के एक उभरते हुए फल उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है।

उद्यानिकी की आधुनिक तकनीकों से किसान महेश कश्यप की बदली तकदीर

उद्यानिकी की आधुनिक तकनीकों से किसान महेश कश्यप की बदली तकदीर रायपुर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड अंतर्गत कछार निवासी महेश कश्यप आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा के स्रोत बन गए हैं। कभी पारंपरिक खेती के कारण बढ़ती लागत और घटते लाभ से परेशान रहने वाले महेश ने उद्यानिकी विभाग की सहायता से आधुनिक कृषि को अपनाया और अपनी आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी सुधार किया। परंपरागत खेती से आधुनिकता का सफर           कश्यप पहले परंपरागत फसलों पर निर्भर थे, लेकिन उद्यानिकी विभाग की समेकित उद्यानिकी विकास योजना  ने उनकी सोच और खेती का तरीका बदल दिया। विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने 2.00 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण और फेंसिंग के लिए प्राप्त अनुदान का लाभ उठाकर सब्जी उत्पादन का उन्नत मॉडल तैयार किया। तकनीक का बेजोड़ तालमेल          कश्यप ने अपने खेतों में वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग करते हुए तकनीकों को अपनाया। ड्रिप सिंचाई से न केवल पानी की बचत हुई, बल्कि फसल को सटीक पोषण मिला और खरपतवार की समस्या भी कम हुई। मिट्टी में नमी बनाए रखने और मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए मल्चिंग का प्रभावी उपयोग किया गया। वर्मी कंपोस्ट, जैविक खाद के प्रयोग से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बढ़ी है। आय में दोगुनी वृद्धि और रिकॉर्ड उत्पादन             महेश ने बैंगन के साथ-साथ अंतरवर्ती फसल  के रूप में कद्दू और अन्य मौसमी सब्जियों की खेती की। लगभग 4.5 एकड़ में बैगन कीखेती की है। उन्होंने बताया कि अनुमानित 900 से 1100 क्विंटल उत्पादन होने की संभावना है, जहाँ खेती में लगभग 7 से 8 लाख रुपये की लागत आई, वहीं सब्जियों की बिक्री से उन्हें 14 से 15 लाख रुपये की शुद्ध आर्थिक लाभ  प्राप्त हुई। क्षेत्र के किसानों के लिए रोल मॉडल             महेश कश्यप आज न केवल आत्मनिर्भर हुए हैं, बल्कि वे किसानों को संदेश दे रहे हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कृषि को एक लाभप्रद व्यवसाय बनाया जा सकता है। उद्यानिकी विभाग की यह पहल बिलासपुर के ग्रामीण अंचल में समृद्धि का नया अध्याय लिख रही है।

किसानों को 122.28 करोड़ रुपये की फसल क्षतिपूर्ति, वितरण कार्यक्रम 4 मई को

किसानों को मिलेगी 122.28 करोड़ रुपये की फसल क्षतिपूर्ति, वितरण कार्यक्रम 4 मई को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ और रबी सीजन के नुकसान की भरपाई करेगी सरकार  4 मई को अपराह्न 04 बजे से प्रदेश के समस्त जनपदों में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से क्षतिपूर्ति धनराशि का होगा वितरण   योगी सरकार ने फसल नुकसान से किसानों को सुरक्षा देने और आय स्थिर रखने के लिए उठाया बड़ा कदम  लखनऊ  प्रतिकूल मौसम के कारण प्रभावित होने वाली फसलों से किसानों को सुरक्षा प्रदान करने और उनकी आय स्थिर बनाए रखने के उद्देश्य से योगी सरकार व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। प्रदेश के समस्त जनपदों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और चयनित 60 जनपदों में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना का सफल क्रियान्वयन खरीफ 2016 से बीमा कंपनियों के माध्यम से किया जा रहा है। निदेशक कृषि सांख्यिकी एवं फसल बीमा सुमिता सिंह ने बताया कि इसी क्रम में 4 मई को अपराह्न 04 बजे से प्रदेश के समस्त जनपदों में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से खरीफ 2025 एवं रबी 2025-26 की फसल क्षतिपूर्ति धनराशि का वितरण किया जाएगा। खरीफ 2025 मौसम की कुल देय क्षतिपूर्ति 730.04 करोड़ रुपये में से 624.88 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है और शेष 105.16 करोड़ रुपये का भुगतान 4 मई को किया जाएगा। इसी प्रकार रबी 2025-26 मौसम की शेष 17.11 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का भी भुगतान किया जाएगा। इस प्रकार 04 मई को कुल 122.28 करोड़ रुपये की राशि लाभान्वित किसानों के खातों में अंतरित की जाएगी। बता दें कि 21 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 'वन-क्लिक' के माध्यम से खरीफ 2025 की 285.00 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति 2.51 लाख किसानों को वितरित की गई थी।  किसानों के लिए प्रीमियम की दरें बेहद किफायती  उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017-18 से वर्ष 2025-26 तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत अब तक कुल 67.86 लाख किसानों को 5755.68 करोड़ रुपये की राशि क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान की जा चुकी है। यह योजना ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित है, जिसमें खरीफ की प्रमुख फसलें जैसे धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, उर्द, मूंग, अरहर, मूंगफली, सोयाबीन व तिल तथा रबी की फसलों में गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर, लाही-सरसों, अलसी व आलू को कवर किया गया है। किसानों के लिए प्रीमियम की दरें बेहद किफायती रखी गईं हैं, जिसमें खरीफ फसल हेतु बीमित राशि का 2 प्रतिशत, रबी हेतु 1.5 प्रतिशत और वार्षिक नकदी फसलों के लिए अधिकतम 5 प्रतिशत की दर निर्धारित है। कृषक अंश के अतिरिक्त शेष प्रीमियम की धनराशि का वहन केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा समान रूप से किया जाता है।

कुशवाह बने ऑटोमेशन सिस्टम से फूलों की खेती करने वाले भोपाल के पहले किसान

उद्यानिकी स्टोरी:पारंपरिक खेती से प्रगतिशील बागवानी तक का सफर  कुशवाह बने ऑटोमेशन सिस्टम से फूलों की खेती करने वाले भोपाल के पहले किसान कुशवाह बने भोपाल के पहले किसान, जिन्होंने ऑटोमेशन सिस्टम से फूलों की खेती शुरू की भोपाल  भोपाल जिले के फन्दा क्षेत्र के ग्राम बरखेड़ा बोंदर के  रामसिंह कुशवाह  कभी धान, गेहूं और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहकर सीमित आय अर्जित करने वालेकिसान रहे है। आज वे फूलों और फलों की आधुनिक खेती से प्रतिमाह लाखों रुपये की आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा केवल आर्थिक उन्नति की कहानी नहीं, बल्कि किसान सशक्तिकरण और नवाचार की प्रेरक मिसाल है।  कुशवाह कहते हैं, “मैं प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।सरकार की एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना ने हमें आत्मनिर्भर बनाया है और समाज में एक नई पहचान दी है।”  कुशवाह का परिवार वर्षों से पारंपरिक खेती करता आ रहा था,जिसमें बढ़ती लागत और कम लाभ के कारण आर्थिक चुनौतियाँ बनी रहती थीं। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास योजना की जानकारी मिली। उन्होंने राष्ट्रीय विकास परियोजना के अंतर्गत इस योजना का लाभ लेते हुए एक हजार स्क्यायर फिट में पॉली हाउस बनाकर फूलों (गुलाब और जरबेरा) की खेती प्रारंभ की। राज्य योजना में उद्यानिकी विभाग से एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में उन्होंने एक एकड़ भूमि में पॉली हाउस सरकार के लिए सब्सिड़ी लेते हुए गुलाब, जरबेरा, गेंदा के 30 हजार पौधें रोपे, जिससे  कुशवाह प्रतिदिन 4 हजार कट फ्लावर बेच कर प्रतिदिन 4 से 6 हजार रूपये तक की आमदनी प्राप्त कर रहे है। फूलों का उत्पादन बढ़ाने एवं लागत को कम करने के लिए उन्होंने इस वर्ष एकीकृत बागवानी विकास मिशन अंतर्गत सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम अपने पॉली हाउस में स्टॉल करवाया जिसकी लागत 4 लाख रूपये है। इसमें 2 लाख रूपये की सब्सिड़ी सरकार द्वारा प्राप्त हुई है। ऑटोमेशन सिस्टम से एक एकड़ की खेती में पानी, खाद, दवाइयों की संतुलित मात्रा 24 x 7 बिना किसी मेन्युअल सिस्टम से दी जा रही है। जिससे पानी, खाद के समय एवं लागत की भी बचत हो रही है, वर्तमान में  कुशवाह पारंपरिक खेती से ऑटोमेटिक सिस्टम से बागवानी करने वाले भोपाल के पहले किसान बन गए है। उनके गुलाब, जरबेरा की सप्लाई लखनऊ, दिल्ली, जयपुर तक हो रही है। किसान  कुशवाह ने एक एकड़ में विगत वर्षों में 30 हजार जरबेरा के हाइब्रिड पौधों का रोपण किया तथा ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को अपनाया, जिस पर उन्हें 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिला। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती के परिणामस्वरूप वे मात्र एक वर्ष में ही प्रतिदिन 1500 से 2000 फूलों का उत्पादन कर बाजार में विक्रय कर रहे हैं। वे प्रतिदिन 4 हजार फूल स्पाईक प्राप्त कर प्रतिदिन 4 से 5 हजार रूपये की आमदनी भी प्राप्त कर रहे है। फूलों और फलों की खेती ने  कुशवाह की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना दिया है।  कुशवाह की यह कहानी प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और शासकीय योजनाओं के सहयोग से खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।  

किसानों की खुशहाली को मिला बल, अंतर राशि से शिक्षा और आवास कार्य को सहारा

रायपुर : कृषक उन्नति योजना से सशक्त हो रहे अन्नदाता किसानों की खुशहाली को मिला बल, अंतर राशि से शिक्षा और आवास कार्य को सहारा रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसी प्रभावी नीतियों को अमल में लाया है, जिनसे अन्नदाताओं के जीवन में स्थायी और व्यापक परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। इन पहलों ने न केवल किसानों की आय और आत्मविश्वास को सुदृढ़ किया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति और मजबूती प्रदान की है। सुशासन की प्रतिबद्धता को साकार करते हुए कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान विक्रय करने वाले किसानों को अंतर राशि का एकमुश्त भुगतान किया गया है।     मुख्यमंत्री  साय की मंशा के अनुरूप यह सुनिश्चित किया गया कि होली पर्व से पूर्व किसानों के खातों में राशि अंतरित की जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ त्यौहार हर्षोल्लास और सम्मान के साथ मना सकें। शासन के इस संवेदनशील निर्णय से कोरबा जिले के किसानों में विशेष उत्साह का माहौल है।     कोरबा जिले के ग्राम दादरखुर्द निवासी कृषक श्री शैलेन्द्र कुमार थवाईत ने इस वर्ष लगभग 32 क्विंटल धान का विक्रय किया, जिसके एवज में उन्हें 23 हजार 392 रुपये की अंतर राशि प्राप्त हुई। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय किसानों के हित में है और सही समय पर मिली राशि से उन्हें बड़ी राहत मिली है। वे इस राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा तथा उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने में करेंगे, जिससे उत्पादन क्षमता और आय दोनों में वृद्धि होगी।     इसी प्रकार ग्राम कल्दामार के कृषक जिमी राठिया ने कहा कि होली से पूर्व राशि प्राप्त होना उनके लिए किसी उपहार से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि प्राप्त धनराशि का उपयोग घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति तथा प्रधानमंत्री आवास के निर्माण कार्य में किया जाएगा। शासन द्वारा समयबद्ध भुगतान किए जाने को उन्होंने किसानों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक बताया।     कृषकों ने उन्होंने मुख्यमंत्री  साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के इस संवेदनशील और समयबद्ध निर्णय से किसानों के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा की भावना बढ़ी है।  सरकार का यह प्रयास किसानों की समृद्धि ही प्रदेश की समग्र प्रगति का आधार है।