samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किसानों के खाते में 100 करोड़ किए ट्रांसफर

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज (शनिवार) 2 लाख से अधिक किसानों के खाते में 100 करोड़ रूपए से अधिक की राशि ट्रांसफर की. जानकारी के मुताबिक, कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत साल 2025 में बारिश से आई बाढ़ और मोन्था तूफान की वजह से बर्बाद हुए फसलों की क्षति के लिए किसानों को डीबीटी के जरिए रुपए ट्रांसफर किए हैं. सीएम नीतीश कुमार ने क्या कहा? कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान इस राशि का उपयोग आगामी फसलों के लिए कर सकेंगे. कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत सभी बाढ़ प्रभावित किसानों को अनुदान राशि दी जा रही है. राज्य सरकार सभी बाढ़ पीड़ित किसानों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है. हमलोग किसानों की तरक्की के लिए लगातार काम कर रहे हैं. हमारा मानना है कि राज्य के खजाने पर बाढ़ पीड़ितों का पहला अधिकार है. इन जिलों के किसानों को दिए गए रुपए जानकारी के मुताबिक, साल 2025 में भारी बारिश से आई बाढ़ और मोथा तूफान से राज्य के 13 जिलों (बेगूसराय, भोजपुर, दरभंगा, गयाजी, कैमूर, किशनगंज, मधेपुरा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चम्पारण, शिवहर, सीतामढ़ी और सुपौल) में काफी फसल क्षति हुई थी. इन जिलों के 53 प्रखंड और 493 पंचायत के किसान प्रभावित हुए थे. जिसके लिए कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत प्रभावित किसानों को फसल क्षतिपूर्ति अनुदान दिया जा रहा है. किसानों से मांगे गए थे ऑनलाइन आवेदन कृषि विभाग की तरफ से सभी प्रभावित जिलों के किसानों से ऑनलाइन आवेदन प्राप्त किया गया. इसके बाद जिलों की ओर से इसका सत्यापन किया गया. आज 2 लाख 2 हजार किसानों को 113 करोड़ 16 लाख रूपए सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए. राज्य में किसानों को लेकर कई कार्य सरकार की तरफ से किए जा रहे हैं. इसी क्रम में किसानों की डिजिटल आईडी भी बनाई जा रही है. ताकि हर एक योजना का लाभ उन्हें मिल सके.

किसानों को मिल रही आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी, बढ़ेगी खेती की उत्पादकता

भोपाल राज्य शासन के निर्देशानुसार कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत प्रदेश में कृषि रथों का भ्रमण जारी है। इसी क्रम में नरसिंहपुर जिले के सभी 6 विकासखंडों में कृषि रथ चलाया जा रहा है। जिले के किसानों को ई-विकास प्रणाली (ई-टोकन उर्वरक वितरण), आधुनिक कृषि यंत्रों और उन्नत खेती आदि की जानकारी दी जा रही है। कृषि विभाग द्वारा कृषि रथ के माध्यम से किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। कृषि रथ के माध्यम से किसानों को जैविक खेती एवं प्राकृतिक कृषि क्षेत्रों का विस्तार, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, एकीकृत पोषक तत्व, कीट एवं रोग प्रबंधन, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उपाय, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने, विभागीय कृषि योजनाओं का प्रचार-प्रसार, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, ई-विकास प्रणाली अंतर्गत ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था और पराली प्रबंधन की जानकारी दी गई। किसानों को नरवाई (फसल अवशेष) प्रबंधन के लिए आधुनिक यंत्रों जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, स्ट्रॉ रीपर और रीपर कम बाइंडर की तकनीकी जानकारी दी गई। किसानों को जानकारी दी गई कि सुपर सीडर और हैप्पी सीडर जैसे यंत्र खेत की तैयारी, नरवाई प्रबंधन और बोनी जैसे तीन काम एक साथ करते हैं। इन यंत्रों के उपयोग से न केवल समय और लागत की बचत होती है, बल्कि पैदावार भी अच्छी मिलती है। उन्होंने किसानों को समझाइश दी गई कि नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है और वायु प्रदूषण फैलता है। नरवाई न जलाकर उसे खाद के रूप में उपयोग करना ही श्रेष्ठ है। रतलाम जिले में कृषि रथ के माध्यम से कृषि एवं संबद्ध विषयों जैसे उद्यानिकी, पशुपालन, आत्मा, मत्स्य पालन आदि पर किसानों एवं कृषि वैज्ञानिकों के मध्य सीधा संपर्क कायम कर नवीन एवं वैज्ञानिकी तकनीकी सुधार की जानकारी कृषकों को दी जा रही है। कृषि रथ द्वारा किसानों को जिले के विभिन्न ग्रामों में जैविक खेती एवं प्राकृतिक कृषि क्षेत्रों का विस्तार, पराली न जलाने, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, एकीकृत पोषक तत्व, कीट एवं रोग प्रबंधन, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उपाय, फसल विविधीकरण को बढावा देने, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, ई-विकास प्रणाली अंतर्गत ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था आदि के संबंध में जानकारी दी गई।  

“देश के विभिन्न राज्यों में किसान कर्ज की स्थिति: एमपी में ₹74,420, आंध्र में ₹2.45 लाख

भोपाल देश के किसानों की आर्थिक स्थिति पर संसद में पेश ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश के हर किसान परिवार पर औसत बकाया 74,420 रुपए का कर्ज है। यह राष्ट्रीय औसत 74,121 रुपए के लगभग बराबर है। आंकड़े केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने टीएमसी सांसद कालिपद सरेन खेरवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में दिए। रिपोर्ट बताती है कि दक्षिण भारत के कई राज्यों में किसानों पर कर्ज का बोझ मध्य भारत की तुलना में काफी अधिक है, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में यह सबसे कम है। दरअसल, संसद में पेश की गई ताजा रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के किसानों की मिली-जुली तस्वीर सामने आई है। वहीं आंकड़ों के मुताबिक, भारत में प्रति कृषक परिवार पर औसत बकाया ऋण 74,121 रुपए है। चौंकाने वाली बात यह है कि दक्षिण भारतीय राज्यों के किसान कर्ज के मामले में उत्तर भारत के मुकाबले कहीं आगे हैं। टीएमसी सांसद कालिपद सरेन खेरवाल के सवाल के जवाब में केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह जानकारी दी। एमपी की स्थिति: राष्ट्रीय औसत के करीब, राजस्थान से बेहतर आंकड़ों का विश्लेषण करें तो मध्य प्रदेश में किसानों की स्थिति कर्ज के मामले में कई राज्यों से बेहतर है। जहां पड़ोसी राज्य राजस्थान में प्रति किसान परिवार कर्ज का बोझ ₹1,13,865 है, वहीं मध्य प्रदेश में यह ₹74,420 पर टिका है। हालांकि, छोटे राज्यों जैसे छत्तीसगढ़ (₹21,443) की तुलना में एमपी के किसानों पर कर्ज का दबाव अधिक है। दक्षिण के राज्यों के किसान सबसे ज्यादा कर्जदार आंकड़ों के मुताबिक, भारत में प्रति कृषक परिवार पर औसत बकाया ऋण ₹74,121 है। चौंकाने वाली बात यह है कि दक्षिण भारतीय राज्यों के किसान कर्ज के मामले में उत्तर भारत के मुकाबले कहीं आगे हैं । केसीसी (KCC) का कर्ज ₹10 लाख करोड़ के पार कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन में बताया कि 30 सितंबर 2025 की स्थिति के अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत बकाया धनराशि ₹10.39 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि 1 फरवरी 2026 तक का एकदम सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि पिछला बड़ा सर्वेक्षण (NSS 77वां दौरा) साल 2019 में ही किया गया था। राजस्थान कर्ज के मामले में आगे     राजस्थान: ₹1,13,865     मध्य प्रदेश: ₹74,420     उत्तर प्रदेश: ₹51,107     बिहार: ₹23,534 इन राज्यों में बोझ कम     नागालैंड: सिर्फ ₹1,750     मेघालय: ₹2,237     अरुणाचल प्रदेश: ₹3,581 किसानों की आया बढ़ाने में जुटी राज्य सरकार इधर, मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने बढ़ती लागत और ऋण दबाव को देखते हुए वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है। राज्य में जून 2026 तक शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध रहेगा। समय पर भुगतान करने वाले किसानों को अतिरिक्त ब्याज अनुदान भी दिया जाएगा। सहकारी बैंकों के डिफॉल्टर किसानों को पुनर्वित्त के माध्यम से मुख्यधारा में लाने की योजना लागू है। साथ ही नर्मदा-क्षिप्रा सहित नदी जोड़ो परियोजनाओं से सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रीय औसत के करीब, राजस्थान से बेहतर दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश में किसानों की स्थिति कर्ज के मामले में कई राज्यों से बेहतर है। जहां पड़ोसी राज्य राजस्थान में प्रति किसान परिवार कर्ज का बोझ 1,13,865 रुपए है। वहीं मध्य प्रदेश में यह 74,420 रुपए पर टिका है। हालांकि, छोटे राज्यों जैसे छत्तीसगढ़ (21,443) की तुलना में मध्यप्रदेश के किसानों पर कर्ज का दबाव अधिक है। केसीसी का कर्ज 10 लाख करोड़ के पार शिवराज ने सदन में बताया कि 30 सितंबर 2025 की स्थिति के अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड के तहत बकाया धनराशि 10.39 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि 1 फरवरी 2026 तक का एकदम सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि पिछला बड़ा सर्वेक्षण साल 2019 में ही किया गया था। उत्तरप्रदेश-बिहार में औसत बोझ कम आंध्र प्रदेश प्रति किसान परिवार औसत 2,45,554 के साथ देश में सबसे अधिक कर्जदार राज्य है। इसके बाद केरल (2,42,482), पंजाब (2,03,249), हरियाणा (1,82,922) और तेलंगाना (1,52,113) का स्थान है। इसके विपरीत नागालैंड में औसत कर्ज मात्र 1,750, मेघालय में 2,237 और अरुणाचल प्रदेश में 3,581 दर्ज किया गया। उत्तर और मध्य भारत में राजस्थान (1,13,865) के किसान अपेक्षाकृत अधिक कर्जदार पाए गए, जबकि उत्तर प्रदेश (51,107) और बिहार (23,534) में औसत बोझ कम है। कर्ज में टॉप-5 राज्य राज्य         कर्ज रुपए में आंध्रप्रदेश    2,45,554 केरल          2,42,482 पंजाब         2,03,249 हरियाणा    1,82,922 तेलंगाना    1,52,113 एमपी सरकार की रणनीति: 'किसान कल्याण वर्ष' और जीरो ब्याज योजना बढ़ते कर्ज और खेती की लागत को देखते हुए मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने वर्ष 2026 को 'किसान कल्याण वर्ष' घोषित किया है। सरकार की ओर से किसानों को राहत देने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं।     ब्याज मुक्त ऋण: प्रदेश में किसानों को जून 2026 तक 0% ब्याज पर फसल ऋण (Crop Loan) मिलता रहेगा। समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को 4% अतिरिक्त ब्याज अनुदान भी दिया जाएगा।     डिफॉल्टरों को राहत: सरकार ने सहकारी बैंकों के उन किसानों को फिर से मुख्यधारा में लाने की योजना बनाई है जो कर्ज के कारण डिफॉल्टर हो गए थे।     सिंचाई विस्तार: नर्मदा-क्षिप्रा और अन्य नदी जोड़ो परियोजनाओं के जरिए प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य है, ताकि खेती को लाभकारी बनाया जा सके। एमपी में भी बढ़ रहा किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा आंकड़ों के मुताबिक, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) कर्ज का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरा है। मध्य प्रदेश में भी ग्रामीण बैंकों और सहकारी समितियों के माध्यम से केसीसी का वितरण तेजी से हुआ है। सरकार का कहना है कि यह कर्ज किसानों की निवेश क्षमता बढ़ाता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि फसलों के उचित दाम (MSP) और प्राकृतिक आपदाओं के कारण यह कर्ज किसानों के लिए बोझ बन जाता है।  

कृषि रथ से किसानों को फसलों में संतुलित उर्वरक और नवीन तकनीकों की जानकारी दी गई

“कृषक कल्याण वर्ष-2026” कृषि रथ से किसानों को फसलों में संतुलित उर्वरक एवं नवीन तकनीकों की दी गई जानकारी ई-टोकन के माध्यम से उर्वरक वितरण की नवीन प्रणाली से कराया अवगत भोपाल  कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत झाबुआ जिले के 6 विकासखण्ड में निरंतर कृषि रथ के माध्यम से कृषि विशेषज्ञों के साथ कृषि एवं सम्बद्ध विभागों के अधिकारियों द्वारा प्रति दिन 3 ग्राम पंचायतों का भ्रमण किया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा अभी तक 296 ग्राम पंचायतों का भ्रमण कर लगभग 20250 किसानों से सम्पर्क स्थापित किया गया है। किसानों को उनकी जिज्ञासाओं एवं समस्याओं का निराकरण करने के साथ ही कृषि एवं संबंद्ध विषयों पर नवीन एवं वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी दी गई। जिन किसान भाइयों के पास सिंचाई के पर्याप्त साधन हैं उन्हें जायद के मौसम में तिलहनी फसलों की बुवाई करने की जानकारी से अवगत कराया जा रहा है, साथ ही किसानों को कृषि रथ के माध्यम से किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया जा रहा है। उन्हें मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अंकित अनुशंसा अनुसार संतुलित उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। किसानों को प्राकृतिक खेती, नरवाई प्रबंधन, फसल बीमा तथा शासन द्वारा उर्वरक वितरण की नवीन वितरण प्रणाली अंतर्गत ई-टोकन के माध्यम से पारदर्शी तरीके से उर्वरक वितरण व्यवस्था की जानकारी से अवगत कराया जा रहा है। अब उनके रकबे के आधार पर उर्वरक उपलब्धता की जाएगी, किसानों को उर्वरक लेने के लिए अब लम्बी लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा साथ ही उनके पंजीकृत मोबाईल फोन पर खाद के उपलब्धता की जानकारी प्राप्त हो जायेगी। कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों जायद मौसम की फसलों की जानकारी के साथ ही सूक्ष्म सिंचाई यंत्रो जैसे ड्रीप, स्प्रिंकलर आदि के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। कृषि रथ के माध्यम से किसानों को शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं के साथ ही उद्यामनिकी फसलों तथा पशु पालन विभाग अंतर्गत दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने की जानकारी भी दी जा रही है ताकि किसानों की आय में वृद्धि की जा सके। कृषि रथ द्वारा ग्राम मानिकपुरा में कृषकों को प्राकृतिक और जैविक खेती का समझाया महत्व  टीकमगढ़ ज़िले के सभी विकासखंडों में कृषि रथ एक माह के लिए चलाये जा रहे हैं। कलेक्टर  विवेक श्रोत्रिय के द्वारा कृषि से सम्बद्ध अन्य विभागों को भी निर्देशित किया गया है कि कृषि रथ के माध्यम से विभागों में संचालित योजनाओं का कृषकों के मध्य प्रचार-प्रसार प्रसार करें। इसी तारतम्य में कृषि रथ के माध्यम से ग्राम पंचायत गणेशगंज के ग्राम मानिकपुरा में भ्रमण कर कृषकों को प्राकृतिक खेती/जैविक खेती करने के लिये प्रोत्साहित, नरवाई नहीं जलाने और मृदा परीक्षण कराने का महत्व समझाया गया। कृषि रथ द्वारा किसानों को खाद वितरण के लिए तैयार की गई ई-टोकन व्यवस्था और ई-विकास पोर्टल की जानकारी दी गई। साथ ही कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य और पशुपालन विभाग में संचालित कृषक हितेषी योजनाओं की भी जानकारी दी गई। कृषि रथ के साथ नोडल अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, संबंधित विकासखंडों के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, आत्मा योजना  एवं संबंधित विभागों का मैदानी अमला उपस्थित रहा।  

6720 ग्राम पंचायतों में किया जा चुका किसान पाठशाला का आयोजन

किसान पाठशाला 10 दिन में 4.37 लाख पुरुष व 2.61 लाख महिला किसान हुईं लाभान्वित  लखनऊ योगी सरकार के निर्देश पर किसानों को आधुनिक खेती व खेती में नवाचार के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है। कृषि विभाग के तत्वावधान में इस वर्ष रबी सीजन में भी किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 दिसंबर को बाराबंकी में पद्मश्री किसान रामसरन वर्मा के गांव दौलतपुर से किसान पाठशाला 8.0 रबीः 2025-26 का शुभारंभ किया था। 10 दिन में 6.98 लाख किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह पाठशाला 29 दिसंबर तक चलेगी। 10 दिन में 4.37 लाख पुरुष व 2.61 लाख महिला किसानों को दिया गया प्रशिक्षण  कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि इस कार्यक्रम का आयोजन प्रदेश के 21 हजार ग्राम पंचायतों में कराए जाने के लिए जनपदीय व मंडलीय कार्यालयों को निर्देश दिया गया था। इस क्रम में 12 दिसंबर से 21 दिसंबर (10 दिन) तक 6720 ग्राम पंचायत स्तरीय गोष्ठी/ किसान पाठशाला का आयोजन किया जा चुका है। 10 दिन में 6.98 लाख किसानों को कृषि व सहवर्ती विभागों की योजनाओं एवं कृषि विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों व कृषि विज्ञान केंद्रों में किए जा रहे नवाचारों से प्रशिक्षित किया गया। 6.98 लाख किसानों में 4.37 लाख पुरुष व 2.61 लाख महिला किसान शामिल हैं।  अब तक लगभग दो करोड़ किसानों को किया जा चुका प्रशिक्षित  कृषि विभाग के मुताबिक किसान पाठशाला के अंतर्गत 2017-18 से अब तक लगभग दो करोड़ से अधिक किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। किसान पाठशाला का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती के लिए शिक्षित करना और उनकी आय दोगुनी करना है। योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, प्राकृतिक खेती, फसल प्रबंधन, सरकारी योजनाओं और आय बढ़ाने के तरीकों की व्यावहारिक ट्रेनिंग देना है, जिससे वे कम लागत में बेहतर पैदावार कर सकें और आत्मनिर्भर बनें। इसमें फसल सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य, बागवानी, नई तकनीक समेत विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी जाती है।

माहू के प्रकोप से बालोद जिले के खेत बर्बाद, किसान चिंतित

बालोद बालोद जिले के गुण्डरदेही विधानसभा क्षेत्र के किसान इन दिनों एक विकट आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ग्राम परसाडीह में लगभग एक हजार एकड़ में बोई गई धान की फसल में से करीब 500 एकड़ फसल माहू नामक बीमारी के प्रकोप से पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। छोटे-बड़े सभी किसान इस अनपेक्षित आपदा से हताश हैं और अपनी तबाह हुई फसलों को देखकर फूट-फूट कर रो रहे हैं। किसानों की आंखों से आंसू ग्राम परसाडीह के किसान गोपाल साहू ने अपनी कर्ज और बर्बाद हुई फसल की व्यथा सुनाते हुए कहा कि वह छोटे किसान हैं और कर्ज लेकर खेती करते हैं। इस बार माहू बीमारी ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी कमाई का एकमात्र जरिया ही तबाह हो गया है। अपनी बर्बाद फसल के कारण वे सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। एक अन्य किसान, सामंत साहू, जिन्होंने 25 एकड़ में खेती की थी, बताया कि उनकी केवल 10 एकड़ फसल ही सुरक्षित बची है, जबकि 15 एकड़ पूरी तरह से नष्ट हो गई है। उन्होंने अपनी फसलों पर लगभग ₹1,00,000 की दवाइयों का छिड़काव भी किया, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। माहू के प्रकोप से खेत अब पूरी तरह बंजर हो गए हैं और किसानों की उम्मीदें टूट चुकी हैं। इस विपदा से प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन के पास मुआवजे की मांग को लेकर आवेदन जमा किए हैं। किसानों की सरकार से काफी उम्मीदें हैं।

किसान ने ₹40 हजार के सिक्कों से की स्कूटी की खरीदारी, शोरूम मालिक भी हुआ भावुक

जशपुर छत्तीसगढ़ के जशपुर जिला मुख्यालय में मेहनत की कमाई का एक अद्भुत दृश्य सामने आया, जिसने देवनारायण होंडा शोरूम में मौजूद सभी लोगों को हैरान कर दिया. यहाँ एक किसान अपने परिवार के साथ स्कूटी खरीदने पहुंचा, लेकिन भुगतान का तरीका सबसे हटकर था. किसान ने स्कूटी की कीमत का एक बड़ा हिस्सा सिक्कों में चुकाया. वह बोरे में भरकर 10 और 20 रुपये के सिक्के लेकर आया था, जिनकी कुल कीमत 40 हज़ार रुपये थी. किसान ने बताया कि उसने ये पैसे पिछले 6 महीनों की कड़ी मेहनत से बचाकर इकट्ठे किए थे. खास बात यह रही कि सिक्कों की इस बड़ी राशि को गिनने में शोरूम के कर्मचारियों को घंटों का समय लगा. स्कूटी की बाकी की राशि का भुगतान किसान ने नोटों में किया. किसान की सादगी और उसकी कड़ी मेहनत से प्रभावित होकर, शोरूम के मालिक आनंद गुप्ता ने एक मिसाल पेश की. आनंद गुप्ता ने न सिर्फ खुशी-खुशी इन सिक्कों को स्वीकार किया, बल्कि किसान की मेहनत को सम्मान देते हुए किसान परिवार को स्कूटी के साथ एक खास उपहार भी भेंट किया. यह कहानी न केवल स्कूटी खरीदने के एक अनोखे तरीके को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि मेहनत की कमाई का मूल्य कितना बड़ा होता है.