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भारत की कड़ी नजर बांग्लादेश चुनाव पर, मोहम्मद यूनुस ने भेजा निमंत्रण, ऑब्जर्वर भेजे जाएंगे

ढाका   बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में अब कुछ दिन ही बचे हैं. यह चुनाव शेख हसीना की सरकार के गिरने के बाद हो रहे हैं. हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद 5 अगस्त को उन्हें देश छोड़कर निकलना पड़ा था. इसके बाद से, बांग्लादेश में अंतरिम सरकार चल रही है, जिसके मुखिया मोहम्मद यूनुस हैं. इस चुनाव में शेख हसीना की पार्टी को भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है. हालांकि, इन चुनावों में पारदर्शिता एक बड़ा सवाल है. दुनिया को दिखाने के लिए बांग्लादेश की अंतरिम सरकार, पर्यवेक्षकों को बुला रही है. इसी के मद्देनजर भारत को भी आमंत्रित किया गया है.  बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने रविवार को इस बाबत बयान दिया. उन्होंने कहा, ‘आगामी चुनावों के लिए 330 अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की पुष्टि हो चुकी है. जिन देशों ने अब तक अपने प्रतिनिधियों की पुष्टि नहीं की है, उनमें भारत, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, मिस्र, फ्रांस, कुवैत, मोरक्को, नाइजीरिया और रोमानिया शामिल हैं.’ बयान में आगे कहा गया, ‘इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) सहित छह अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव और जुलाई नेशनल चार्टर पर जनमत संग्रह के लिए कम से कम 63 पर्यवेक्षक तैनात करने पर सहमति जताई है. ये पर्यवेक्षक यूरोपीय संघ, 16 देशों और विभिन्न वैश्विक संस्थाओं से जुड़े 32 व्यक्तियों के मिशनों के साथ जुड़ेंगे. इस प्रकार दोहरे मतदान के लिए अब तक कुल 330 अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की पुष्टि हो चुकी है.’ बयान में यह भी कहा गया कि आगामी चुनावों के लिए पुष्टि किए गए अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की संख्या, 7 जनवरी 2024 को हुए विवादित आम चुनाव की तुलना में दोगुनी से अधिक है. 12वें, 11वें और 10वें आम चुनावों में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की संख्या क्रमशः 158, 125 और केवल चार थी. OIC के चुनाव पर्यवेक्षण इकाई के प्रमुख शाकिर महमूद बंदर दो सदस्यीय OIC पर्यवेक्षक मिशन का नेतृत्व करेंगे.” कई पर्यवेक्षक अमेरिका और यूरोप से हैं. विदेश मंत्रालय और चुनाव आयोग से प्राप्त सूचना के आधार पर मोहम्मद यूनुस ने कहा, ‘इसके अलावा, 28 पर्यवेक्षक एशियन नेटवर्क फॉर फ्री इलेक्शंस (ANFREL) से, 25 कॉमनवेल्थ सचिवालय से, सात अमेरिका स्थित इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट (IRI) से और एक नेशनल डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूट (NDI) से आएंगे. इसके अतिरिक्त, वॉइस फॉर जस्टिस, डेमोक्रेसी इंटरनेशनल, SNAS अफ्रीका, सार्क ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन और पोलिश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स जैसे संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले 32 पर्यवेक्षक व्यक्तिगत क्षमता में चुनाव की निगरानी करेंगे.’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की संख्या और बढ़ेगी, क्योंकि कई आमंत्रित देशों ने अभी तक अपने प्रतिनिधिमंडलों के नामों की पुष्टि नहीं की है.’ इन अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की यात्रा के समन्वय की देखरेख वरिष्ठ सचिव और एसडीजी समन्वयक लामिया मुर्शेद कर रहे हैं. कितनी पार्टियां, उम्मीदवार लड़ रहे चुनाव दक्षिण एशिया के चुनाव प्रबंधन निकायों के मंच (FEMBoSA) द्वारा भी जल्द ही अपने प्रतिनिधियों के नाम घोषित किए जाने की उम्मीद है. बांग्लादेश में लगभग 2,000 उम्मीदवार 300 संसदीय सीटों के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. बांग्लादेश के इस चुनाव में 50 से अधिक राजनीतिक दल और निर्दलीय प्रत्याशी उतर रहे हैं. इस आम चुनाव के दौरान जुलाई नेशनल चार्टर पर भी जनमत संग्रह भी होगा. यह मोहम्मद यूनुस द्वारा पेश किए गए सुधारों की मांग है. अंतरिम सरकार में विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा कि ये चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं और इन्हें शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होना चाहिए.

बांग्लादेश चुनाव प्रचार में विवाद: ‘हिंदुओं को वोट देना जायज नहीं’, कट्टरपंथियों के उकसाने वाले बयान

ढाका  बांग्लादेश पिछले साल 11 दिसंबर को चुनाव का ऐलान होने के बाद से ही हिंसा का एक नया चरण शुरू हो गया है. उस्मान हादी नाम के एक युवा नेता के ऊपर हमले और 18 दिसंबर को उसकी मौत के बाद से यह और भी बढ़ गया. यह 2024 में शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने के बाद नए प्रकार का वायलेंस है, जिसमें अल्पसंख्यक खासकर हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है. बांग्लादेश मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 45 दिनों में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की 15 घटनाएं हो चुकी हैं. शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से यह देश में पहला चुनाव है, जो 12 फरवरी को होगा. इसे लेकर कट्टरपंथी बयान भी सामने आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बांग्लादेश के कुछ मौलवी और सार्वजनिक वक्ता हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ बयान देते हुए दिखाई दे रहे हैं.  देश के आम चुनावों से पहले मतदाताओं से हिंदू या गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों का समर्थन न करने की अपील कर रहे हैं. ऐसे ही एक वीडियो में, कोई मौलवी, किसी टॉक शो के दौरान किसी सवाल का जवाब दे रहा है, जिसमें उससे पूछा जाता है कि क्या हिंदू को वोट दिया जा सकता है. इस पर मौलवी कहता है कि हिंदू को वोट देना जायज नहीं है. किसी भी काफिर को वोट देना इस्लाम में हराम है. ऐसा करना कुफ्र को बढ़ावा देना है.   एक और क्लिप वायरल हो रही है, जिसमें, मौलवियों को हिंदू धार्मिक स्थलों और संस्थानों के खिलाफ खुली धमकियां देते हुए सुना जा सकता है. वह मंच पर खड़े होकर कहता है, “बांग्लादेश में मंदिरों का नष्ट होना तय है, उनकी मूर्तियों का नष्ट होना तय है. कोई भी हिंदू बांग्लादेश में नहीं रह सकता, कोई भी इस्कॉन (ISKCON) नहीं रह सकता. दिल्ली के दलालों को दिल्ली वापस चले जाना चाहिए.” बांग्लादेश में इस्कॉन की बांग्लादेश में अच्छी खासी मौजूदगी है. शेख हसीना की सरकार जाने के बाद, इसके मंदिरों पर हमला किया गया था और पुजारियों को भी निशाना बनाया गया था.  प्रभात खबर इस वीडियो की पहचान या प्रसारण की तारीख की पुष्टि नहीं कर सका कि ये कब के हैं. क्या यह चुनाव के समय के हैं, या पहले के. हालांकि ये वायरल अभी ही हो रहे हैं. ये वीडियो ऐसे समय सामने आए हैं जब हाल के हफ्तों में बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की गई हिंसक घटनाओं की एक श्रृंखला सामने आई है, जिस पर नई दिल्ली और मानवाधिकार संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं. बांग्लादेश में पिछले लगभग 1 महीनें 5 हिंदुओं की मौत बांग्लादेश में चुनावों की घोषणा के बाद से बीते कुछ हफ्तों में कम से कम पांच हिंदू पुरुषों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हत्या हुई है. हालिया घटनाओं में, उत्तर-पश्चिमी बांग्लादेश के नाओगांव जिले में 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार की मौत हो गई, जब वह चोरी का आरोप लगाने वाली भीड़ से बचने के लिए एक नहर में कूद गया. 5 जनवरी को पलाश उपजिला में हत्या किए गए 40 वर्षीय किराना दुकानदार मणि चक्रवर्ती. उसी दिन जेसोर में गोली मारकर हत्या किए गए 38 वर्षीय आइस फैक्ट्री मालिक और दैनिक बीडी खबर के कार्यवाहक संपादक राणा प्रताप बैरागी. अमृत मंडल नाम के एक युवक की हत्या कर दी गई, जिस पर उगाही करने का आरोप लगाया गया था. 50 वर्षीय खोकन चंद्र दास, जिन्हें 31 दिसंबर को काटकर मार डाला गया और आग लगा दी गई थी, बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई. वहीं इससे पहले, 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की बेरहमी से लिंचिंग की गई थी. इन मौतों के अलावा कई घरों को आग भी लगाई गई. भारत ने सख्ती से निपटने की की मांग की भारत ने इन हत्याओं के बाद बांग्लादेश से देश में सांप्रदायिक घटनाओं पर सख्ती से कार्रवाई करने का आग्रह किया है. नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हम अल्पसंख्यकों के साथ-साथ उनके घरों और व्यवसायों पर चरमपंथियों द्वारा किए जा रहे बार-बार के हमलों के एक बेहद चिंताजनक पैटर्न को लगातार देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से तेजी और सख्ती से निपटा जाना चाहिए. जायसवाल ने इस महीने यह भी कहा कि इन मामलों की उपेक्षा केवल अपराधियों को और साहस देती है तथा अल्पसंख्यकों के बीच भय और असुरक्षा की भावना को गहरा करती है. इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है. ब्रिटेन में भी उठी कार्रवाई की मांग ब्रिटेन सरकार ने बांग्लादेश में हो रही हर प्रकार की हिंसा की कड़ी आलोचना करते हुए वहां शांतिपूर्ण, स्वतंत्र और भरोसेमंद चुनाव कराने की अपील की है. बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों की हत्याओं का मुद्दा ब्रिटिश संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स में उठाया गया. विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने गुरुवार को संसद में बयान देते हुए लेबर पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार से आग्रह किया कि वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप करे और यह सुनिश्चित करे कि फरवरी में होने वाले चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हों. ब्रिटिश हिंदुओं के लिए बने सर्वदलीय संसदीय समूह (APPG) के अध्यक्ष ब्लैकमैन ने सांसदों से कहा कि हिंदुओं की हत्याओं और उनके मंदिरों को जलाए जाने की “डरावनी और भयावह स्थिति” ने उन्हें गहरे तौर पर झकझोर दिया है. उन्होंने कहा कि सड़कों पर खुलेआम हिंदुओं की हत्या की जा रही है, उनके घरों को आग के हवाले किया जा रहा है, मंदिरों को जलाया जा रहा है और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार हो रहा है. जनमत संग्रह पर भी उठाए सवाल ब्लैकमैन ने यह भी कहा कि अगले महीने तथाकथित स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए जाने की बात कही जा रही है, जबकि बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी अवामी लीग को इन चुनावों में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है, जबकि जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार उसे लगभग 30 प्रतिशत जनता का समर्थन हासिल है. उन्होंने आगे कहा कि इसी दौरान इस्लामी चरमपंथी समूहों ने एक जनमत संग्रह कराने का आह्वान किया है, जिससे बांग्लादेश के संविधान में स्थायी और … Read more