samacharsecretary.com

इंडस्ट्री को मिलेगी रफ्तार: जापानी कंपनी के साथ समझौते से पंजाब में खुला 400 करोड़ निवेश का रास्ता

चंडीगढ़  पंजाब में औद्योगिक विकास को बड़ा प्रोत्साहन मिला है. जापान की अग्रणी कंपनी टॉपन स्पेशलिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड (टी.एस.एफ.) ने बुधवार को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार के साथ अपनी विस्तार योजना का समझौता किया है. इसके तहत 400 करोड़ रुपए का निवेश करने के लिए औपचारिक समझौता किया गया है. भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह सहयोग वर्तमान और उभरते उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करने पर आधारित होगा. जापान दौरे पर गए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि टी.एस.एफ. और इन्वेस्ट पंजाब ने राज्य में एक स्किल एक्सीलेंस सेंटर स्थापित करने के लिए साझेदारी और सहयोग पर सहमति जताई है. इससे हुनरमंद/अर्ध-हुनरमंद व्यक्तियों, कामगारों और युवाओं को उच् स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके. उन्होंने कहा कि यह पहल उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ पंजाब में नए रोजगार अवसर भी उत्पन्न करेगी. पंजाब और पूरे देश में टी.एस.एफ. सीएम मान ने कहा कि यह समझौता (एमओयू )पंजाब और पूरे भारत में टी.एस.एफ. तथा अन्य बड़े उद्योगों में अप्रेंटिसशिप और रोजगार अवसरों के नए रास्ते खोलेगा. मान ने बताया कि यह परियोजना किसी पॉलिटेक्निक/तकनीकी संस्थान के साथ संयुक्त रूप से प्रशिक्षण और शैक्षणिक सहयोग को भी मजबूत करेगी. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उद्योग की जरूरतों के आधार पर टी.एस.एफ. वित्तीय सहायता, तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण सहयोग और पाठ्यक्रम निर्माण में भी मदद करेगा. इस दौरान अप्रेंटिसशिप की सुविधा भी उपलब्ध होगी और योग्य प्रशिक्षुओं को उपयुक्त रोजगार अवसर मिलेंगे. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के प्रयासों के कारण टी.एस.एफ. ने लगभग 400 करोड़ रुपए के निवेश से पंजाब में अपनी मौजूदा विनिर्माण सुविधा का विस्तार करने की औपचारिक इच्छा व्यक्त की है. नये रोजगार सृजन का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निवेश का उद्देश्य उत्पादन क्षमता बढ़ाना, नये रोजगार सृजन, उन्नत तकनीक को शामिल करना और भारत में कंपनी की दीर्घकालिक उपस्थिति को मजबूत करना है. उन्होंने बताया कि टी.एस.एफ. ने पंजाब के प्रति अपनी लंबी अवधि की प्रतिबद्धता दोहराई है. मान ने कंपनी को राज्य में विस्तार और संचालन से जुड़े सभी कार्यों में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया. इस दौरान टी.एस.एफ. समूह ने पंजाब में काम करने के अपने अनुभव साझा करते हुए इसे मजबूत उद्योग-सरकार साझेदारी, आसान प्रक्रियाएँ, उच्च गुणवत्ता वाले कार्यबल की उपलब्धता, निर्बाध बिजली आपूर्ति और अनुकूल निवेश माहौल का परिणाम बताया. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विस्तार परियोजना के माध्यम से यह साझेदारी और मजबूत होगी. उन्होंने इस परियोजना के लिए आवश्यक स्वीकृतियों और संचालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने में पंजाब सरकार और इन्वेस्ट पंजाब से निरंतर सहयोग की उम्मीद जताई.  

पंजाब में सड़क क्रांति! मान सरकार 44,920 किमी सड़कें बनाएगी, 16,000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट

चंडीगढ़  पंजाब में इस समय गांवगांव में डामर की खुशबू उठती है, JCB की आवाज़ खेतों के पार तक सुनाई देती है, ट्रैक्टरों पर गिट्टी और रोलरों की लय जैसे पंजाब का नया राग बनी हुई है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सड़कों को राजनीति का शो-पीस नहीं, जनता के हक़ का विकास बनाया है. 19,373 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों पर काम पहले से चल रहा था, और अब इस रफ्तार को बढ़ाकर पंजाब को एक ही सांस में 44,920 किलोमीटर सड़क नेटवर्क पर खड़ा करने का लक्ष्य रखा गया है. यह घोषणा नहीं, पूरा रोडमैप है, जो जमीन पर बिछता हुआ दिखाई देता है. पंजाब सरकार ने सिर्फ ठेके नहीं दिए, खेल के नियम बदल दिए. टेंडर के बदले कमीशन की पुरानी राजनीति को एक झटके में हटाकर कहा- सड़क अच्छी बनाओ, पैसा समय पर मिलेगा, लेकिन हेराफेरी की तो पंजाबी में कहावत है, एक भीठ, एक ठोक. और यह चेतावनी डंडा नहीं बनी, व्यवस्था बन गई. फ्लाइंग स्क्वायड बनाया गया, जिसका काम सड़क की गहराई, मोटाई, बिटुमेन की शुद्धता, सब कुछ वहीं पर जांचना है. वीडियो किसी गांव से उठती है, और सरकार के कदम सीधे उस जगह पहुँचते हैं. पहले सिस्टम शिकायत बाद में सुनता था, अब सिस्टम शिकायत आने से पहले सतर्क रहता है. जांच पड़ताल के बाद काम हो रहा कई जगह मटेरियल घटिया निकला, टेंडर रद्द हुए, अधिकारियों को निलंबित किया गया. एक खाला बिना मसाले के दीवार जैसा खड़ा किया जा रहा था, खबर सरकार तक पहुँची तो उसी वक्त काम रुकवा दिया गया. ठेकेदार का कॉन्ट्रैक्ट कैंसल, निर्माण का नया आदेश. यह पहली बार हुआ है कि ठेकेदार दो बार सोचता है, सड़क बनानी है या सजा लेनी है. और जब ज़िम्मेदारी ठेकेदार पर हो, जब जनता निरीक्षक हो, जब मुख्यमंत्री वादा नहीं चेतावनी दे, तब सड़क की उम्र खुद मजबूत हो जाती है. यहां निर्माण के साथ पांच साल की मरम्मत की जिम्मेदारी भी ठेकेदार पर ही है, ताकि सड़क साल दो साल में थक न जाए. गांवों में सरपंच अब सिर्फ पंचायत नहीं, सड़क का गारंटर है. सड़क अच्छी लगी तो वह हस्ताक्षर करेगा, तभी सरकार भुगतान करेगी. जनता वीडियो भेज दे, मटेरियल घटिया निकला तो मान सरकार उसी फुटेज पर कार्रवाई कर देती है. यह विकास का ऐसा मॉडल है जिसमें जनता वही नहीं, वह सुपरीक्षक है, और सरकार उसके साथ है. कोई कागज़ी प्रोजेक्ट नहीं, आंखों के सामने पिघलता डामर, धूप में काली चमकती सड़क और सफ़ेद चूने की लाइनें- यही असली रिपोर्ट कार्ड है. पंजाब को नई दिशा देने का अभियान तरनतारन साहिब में 17 अक्टूबर को 19,000 किलोमीटर सड़कों का उद्घाटन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, यह पंजाब के अगले दशक की दिशा थी. मंडी बोर्ड, PWD, नगर निगम, नगर परिषदें — सब अलगअलग रास्तों पर नहीं, एक बड़े लक्ष्य की ओर चल रही हैं. पंजाब का विकास अब किताबों में नहीं, गूगल मैप पर दिख रहा है. ट्रेडर को माल पहुंचाने में घंटों की बचत होती है, किसान की फसल समय पर मंडी पहुंचती है, गांव का लड़का शहर में नौकरी पर उसी दिन लौट सकता है, एम्बुलेंस अटकती नहीं, गड्ढे नहीं, रफ्तार है. सड़कें पंजाब के आत्मविश्वास की नई परिभाषा बन रही हैं. राजनीति में भाषण बहुत हुए, योजनाएं बहुत आईं, लेकिन जो इस वक्त हो रहा है, वह एक रिकॉर्ड लिख रहा है. यह काम विपक्ष भी देख रहा है, कार्यकर्ता भी, गांव का बुजुर्ग भी और शहर का व्यापारी भी. मगर सबसे ज्यादा यह बात जनता समझ रही है कि यह सिर्फ विकास नहीं, विकास की भाषा का बदलाव है. यहां घोषणा नहीं, ज़मीन पर चलती मशीनें बोल रही हैं. पंजाब के नक्शे पर डामर की ये काली लंबी लकीरें कल की नहीं, आज की गवाही हैं. और कहानी इतनी सी है, सड़कें अब सिर्फ बन नहीं रहीं, टिक भी रही हैं.