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भाई दूज के मौके पर बॉबी देओल का इमोशनल पोस्ट, कहा– बहनों से दूरी आज भी खलती है

मुंबई इसमें कोई दो राय नहीं है कि देओल परिवार में परिवार के प्रति गहरा प्रेम है और त्यौहार अक्सर भावनाओं को उभार देते हैं। भाई दूज के मौके पर एक्टर बॉबी देओल भावुक हो जाते हैं क्योंकि वह अपने भाई-बहनों, खासकर अपनी दो बहनों, विजेता और अजीता के साथ प्यारे बॉन्ड को याद करते हैं। बॉबी देओल ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, 'हम चार भाई-बहन हैं- मेरे भैया अजय (सनी देओल), फिर मेरी बहनें विजेता और अजेता, और मैं सबसे छोटा हूं। हम एक संयुक्त परिवार में पले-बढ़े हैं और सबका साथ बहुत अच्छा लगता था। हर दिन स्कूल के बाद, हम बाहर खेलने निकल पड़ते थे। वो कितने बेफिक्र और खुशनुमा दिन होते थे और मैं अक्सर सोचता हूं कि काश मैं उन्हें दोबारा जी पाता।' बॉबी देओल बहनों पर बोले सबसे छोटा होने के नाते, बॉबी को बेशक सबसे ज्यादा लाड़-प्यार मिला। वह कहते हैं, 'मुझे भी काफी लाड़-प्यार मिला। हमारे बीच भी झगड़े होते थे, जैसे सभी भाई-बहनों के बीच होते हैं, लेकिन हम हमेशा एक-दूसरे का ख्याल रखते थे। खासकर स्कूल में, मेरी बहनें अक्सर मेरा होमवर्क पूरा करने में मेरी मदद करती थीं। मुझे हमेशा उनकी देखभाल का फायदा मिलता था।' अलग जगहों पर रहते हैं भाई-बहन एक्टर आगे कहते हैं, 'अब जब हम सब बड़े हो गए हैं और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं, तो मुझे एहसास हुआ है कि यह रिश्ता कितना अनमोल है, लेकिन हम पहले से कहीं ज्यादा करीब हैं। हम एक-दूसरे के लिए कुछ भी कर सकते हैं, हम एक-दूसरे की बहुत परवाह करते हैं और चाहे कितनी भी दूरी क्यों न हो, हम हमेशा एक-दूसरे के साथ रहते हैं।' वह उदास होकर कहते हैं कि काश उनके और उनकी बहनों के बीच की शारीरिक दूरी कम हो जाती। हालांकि, वह शुक्रगुजार हैं कि इतनी दूरी के बावजूद, उनका रिश्ता अब भी मजबूत है। बहनों से कैसे मिलते हैं बॉबी देओल बॉबी ने कहा, 'काश मैं अपनी बहनों के साथ बचपन की तरह ज्यादा करीब रह पाता, लेकिन यही तो जिंदगी है। शुक्र है कि तकनीक हमें जोड़े रखती है। हम लगभग हर दिन वीडियो कॉल करते हैं। विजेता दिल्ली में रहती है, इसलिए मैं उससे अक्सर मिल पाता हूं। अजीता विदेश में रहती है और जब भी वह मुंबई आती है या मुझे उसके पास जाने का मौका मिलता है, हम मिलते हैं।'

इस साल भाई दूज किस दिन है? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व

भाई दूज का पर्व भाई-बहन के प्यार और स्नेह का प्रतीक है। हर साल हिन्दू पंचांग के अनुसार ये त्योहार मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए तिलक करती है और भाई अपनी बहन को उपहार देता है। भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत बनाता है और परिवार में सौहार्द बढ़ाता है। इस साल में भाई दूज कब मनाया जाएगा, इसके बारे में जानना हर परिवार के लिए खास महत्व रखता है, ताकि वे इस पावन अवसर को सही मुहूर्त पर धूमधाम से मना सकें। तो आइए जानते हैं भाई दूज के शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में- भाई दूज शुभ मुहूर्त कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि की शरुआत 22 अक्टूबर को रात 8 बजकर 16 मिनट पर हो रहा है और इसका समापन 23 अक्टूबर को रात 10 बजकर 46 मिनट पर होगा। ऐस में भाई दूज का पर्व 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा। भाई दूज का महत्व भाई दूज का महत्व केवल पारिवारिक ही नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी है। यह पर्व परिवार में आपसी प्रेम और सहयोग की भावना को बढ़ाता है। इस दिन बहन अपने भाई के लिए मिठाइयां बनाती है, उसके माथे पर तिलक करती है और उसकी खुशियों के लिए प्रार्थना करती है। वहीं भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसे खुश करता है और जीवन में हमेशा उसका सहारा बनने का वचन देता है। यही वजह है कि भाई दूज का पर्व बहुत ही प्यार और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

भाई दूज की परंपरा: तिलक लगाने की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक वजहें

भाई दूज दिवाली के अंतिम त्योहार के रूप में मनाया जाता है. यह त्योहार रक्षाबंधन की तरह बहुत विशेष होता है. यह पर्व भाई और बहन के प्यार का प्रतीक माना जाता है. इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं. उनके लिए व्रत रखती हैं. उन्हें कलावा बांधती हैं. इस दिन बहनें अपने भाई की सुख समृद्धि की कामना करती हैं. भाई दूज को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है. भाई दूज के दिन मृत्यु के देवता यमराज की भी पूजा की जाती है. इस दिन बहनें अपने भाई को रोली और अक्षत से माथे पर टीका करती हैं. फिर उनकी आरती उतारती हैं. वहीं इस दिन भाई बड़े प्रेम से अपनी बहनों को गिप्ट देते हैं. भाई दूज शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर 2025, को रात 08 बजकर 16 मिनट पर शुरू हो रही है. वहीं, इस तिथि का समापन 23 अक्टूबर 2025, को रात 10 बजकर 46 मिनट पर होगा. ऐसे में 23 अक्टूबर को भाई दूज का त्योहार मनाया जाएगा. इस दिन तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 13 मिनट पर शुरू होगा. ये मुहूर्त 03 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. कथाओं के अनुसार… प्राचीन कथाओं के अनुसार, यमराज की बहन यमुना जी लंबे समय के बाद अपने भाई से इसी दिन मिली थीं. यमराज यमुना जी के घर पहुंचे थे. तब यमुना जी ने अपने भाई को आसान पर बैठाया. उनका तिलक किया और उनकी आरती उतारी. इसके बाद उन्होंने अपने हाथों से बना भोजन यमराज को खिलाया. अपनी बहन के आदर सत्कार से यमराज बहुत प्रसन्न हुए. इसलिए बहनें लगाती हैं भाई के माथे पर तिलक उन्होंने यमुना जी से वरदान मांगने को कहा. इस पर यमुना जी ने अपने भाई से ये वरदान मांगा कि आज के दिन जो कोई भी बहन अपने भाई को तिलक करके अपने हाथों से बना भोजन कराएगी, उसे आप प्रताड़ित नहीं करेंगे. इस पर यमराज ने अपनी बहन को ये वरदान दे दिया, इसलिए ये पर्व मनाया जाता है और बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर आरती उतरती हैं. फिर यथाशक्ति भोजन कराती हैं. इस दिन विधि विधान से पूजा करने और भाई के माथे पर तिलक लगाने से भाई की अकाल मृत्यु के संकट से रक्षा होती है.