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भोजशाला सर्वे रिपोर्ट पर याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हाईकोर्ट सुनेगा आपत्तियां, कल से नियमित सुनवाई शुरू

इंदौर /नई दिल्ली मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. शीर्ष अदालत ने मुस्लिम याचिकाकर्ताओं को फिलहाल  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट वापस भेज दिया और अदालत ने एएसआई (ASI) सर्वे की रिपोर्ट और वीडियोग्राफी पर आपत्तियों को लेकर दायर याचिका पर दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि हाईकोर्ट इन सभी पहलुओं पर विचार करेगा. मुस्लिम पक्षकारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के 16 मार्च के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से मना कर दिया, जिसमें 2 अप्रैल से नियमित सुनवाई और स्थल निरीक्षण के निर्देश दिए गए थे. मुस्लिम पक्षकारों का तर्क है कि उन्हें एएसआई की सर्वे रिपोर्ट और वीडियोग्राफी पर अपनी आपत्तियां दर्ज करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट अंतरिम आदेश के तहत अंतिम सुनवाई के समय इन सभी आपत्तियों पर विचार करने के लिए सक्षम है. मुस्लिम पक्ष को सौंपी जाए वीडियोग्राफी की प्रति याचिकाकर्ताओं की पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने अदालत में कहा कि सर्वे के दौरान उनकी आपत्तियों को अनसुना किया गया. उन्होंने मांग की कि मुस्लिम पक्ष को वीडियोग्राफी की प्रति सौंपी जाए, ताकि वो विस्तार से अपनी आपत्ति दर्ज कर सकें. खुर्शीद ने तर्क दिया कि वीडियोग्राफी के वक्त केवल दो लोगों को अनुमति दी गई थी जो हर जगह मौजूद नहीं रह सकते थे. उन्होंने सुनवाई में जल्दबाजी न करने की अपील करते हुए डॉक्यूमेंट्स के अध्ययन के लिए वक्त मांगा. वहीं, पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि हाईकोर्ट ने पहले ही ये सुनिश्चित करने के लिए आदेश पारित किया है कि सभी पक्षों की आपत्तियों पर फैसला लिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एएसआई ने साइट की वीडियोग्राफी की है और अपीलकर्ता ने उस दौरान कुछ आपत्तियां भी उठाई थीं जो रिकॉर्ड में दर्ज हैं. अदालत ने भरोसा जताया कि हाईकोर्ट वीडियो देखने के बाद इन आपत्तियों का निस्तारण करेगा, इसलिए वर्तमान स्तर पर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं बनता है.

2 अप्रैल की सुनवाई से पहले हाईकोर्ट जजों ने भोजशाला की जमीनी हकीकत परखी

धार शहर की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़े प्रकरण में मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शनिवार को दोपहर में आकस्मिक रूप से स्थल का निरीक्षण किया। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच धार पहुंचे और लगभग एक घंटे तक भोजशाला परिसर का बारीकी से अवलोकन किया बाहरी और आंतरिक परिसर का लिया जायजा इस दौरान न्यायमूर्तिगण ने भोजशाला के बाहरी एवं आंतरिक दोनों परिसरों की स्थिति और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सर्वे की सारी प्रक्रिया के बारे में सूक्ष्मता से जानकारी ली। इस दौरान कलेक्टर, एसपी सहित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। आयोजनों और सर्वे की ली जानकारी मिली जानकारी के अनुसार न्यायमूर्तिगण ने परिसर में होने वाले मंगलवार और शुक्रवार के आयोजनों की जानकारी भी ली, कहां और किस प्रकार आयोजन होते हैं, इसकी विस्तृत जानकारी अधिकारियों से प्राप्त की। इंदौर खंडपीठ न्यायमूर्तिगण ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा किए गए सर्वे के संबंध में भी अधिकारियों से स्थानीय जानकारी ली। एएसआइ के अधिकारी ने मौके पर उपस्थित रहकर पूरी स्थिति से अवगत कराया। 16 मार्च को कहा था विवादित स्थल खुद देखेंगे बता दें कि ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की याचिका पर इंदौर हाई कोर्ट में विचाराधीन है। इसमें भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को स्पष्ट किया जाना है। प्रकरण में गत 16 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान इंदौर खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के दौरान विवादित स्थल का स्वयं निरीक्षण करने की बात कही थी। इसी क्रम में करीब 12 दिन बाद न्यायाधीशों ने भोजशाला का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। शनिवार दोपहर लगभग 1:52 बजे न्यायाधीशों का वाहनों का काफिला भोजशाला परिसर पहुंचा और करीब 2:50 बजे तक निरीक्षण जारी रहा। इसके बाद वाहनों का काफिला वापस रवाना हो गया। इस मौके पर कलेक्टर प्रियंक मिश्रा व एसपी मयंक अवस्थी मौजूद रहे। आगे होगी नियमित सुनवाई गौरतलब है कि आगामी 2 अप्रैल से इस मामले में नियमित सुनवाई प्रस्तावित है। ऐसे में न्यायमूर्तिगण का यह स्थल निरीक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मौके का प्रत्यक्ष अवलोकन उन्हें वास्तविक स्थिति समझने में सहायक होगा और आगे की सुनवाई में यह एक मजबूत आधार बन सकता है। पहले क्या हुआ था धार स्थित भोजशाला में 22 मार्च 2024 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर सर्वे कार्य शुरू किया गया। यह सर्वे लगातार 98 दिनों तक चला। जुलाई 2024 में सर्वे रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत कर दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के कारण आगे की कार्रवाई लंबित रही। वर्ष 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उक्त रोक हटाए जाने के बाद अब मामले में आगे की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है।