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ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती, मंत्री भूरिया ने जताई चिंता

भोपाल विश्व पर्यावरण दिवस पर महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने झाबुआ में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधारोपण किया। मंत्री सुश्री भूरिया ने प्रकृति के साथ हो रहे मानवीय हस्तक्षेप पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज संपूर्ण विश्व ग्लोबल वार्मिंग, वर्षा की अनियमितता, प्लास्टिक प्रदूषण और जल संकट जैसी विकराल पर्यावरणीय समस्याओं से जूझ रहा है। हमारे पूर्वज हमें एक बेहद समृद्ध प्राकृतिक विरासत सौंपकर गए हैं, जिसे सहेजना और आगे बढ़ाना हमारा परम कर्तव्य है। बेंगलुरु जैसे महानगरों में वर्षों पुराने वृक्ष आज भी वहां के नागरिकों की जागरूकता के कारण सुरक्षित हैं। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में शुरू हुआ 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान केवल एक दिन का औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और समाज को भावनात्मक रूप से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि आगामी 21 जून तक पूरे झाबुआ जिले में 1 लाख पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि पौधारोपण के साथ पौधों को जीवित रखना और उन्हें वृक्ष के रूप में विकसित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इस पूरे अभियान की पारदर्शिता और मॉनिटरिंग 'मेरी लाइफ' (Meri LiFE) ऐप के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही उन्होंने पूर्व के वर्षों में रोपे गए महुआ के पौधों की विशेष देखरेख और मॉनिटरिंग करने के भी निर्देश दिए।  

विकसित मध्यप्रदेश 2047 का सपना बच्चों के सर्वांगीण विकास से होगा साकार: मंत्री भूरिया

बच्चों का सर्वांगीण विकास ही विकसित मध्यप्रदेश @2047 की आधारशिला: मंत्री  भूरिया “परिणामोन्मुखचाइल्ड बजटिंग कार्यशाला में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और विभागीय समन्वय पर दिया जोर भोपाल  महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि मध्यप्रदेश के बच्चों का सर्वांगीण विकास ही राज्य के सतत और समावेशी विकास की आधारशिला बनेगी। मंत्री सुश्री भूरिया बुधवार को होटल कोर्टयार्ड मैरियट में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'चाइल्ड बजटिंग इन मध्यप्रदेश' विषयक प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं। बजट 2026-27: बच्चों के लिए रिकॉर्ड आवंटन मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि वर्ष 2026-27 के राज्य बजट में बच्चों के सर्वांगीण विकास के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता दिखती है। उन्होंने मुख्य वित्तीय प्रावधानों को साझा करते हुए कहा कि बजट में इस वर्ष 26 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है।स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में 23 हजार 747 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें 'पोषण 2.0' जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। राज्य के कुल व्यय का 13.7 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर व्यय के लिये आवंटित किया गया है। 19 विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता मंत्री सुश्री भूरिया ने स्पष्ट किया कि बच्चों का विकास केवल संबंधित बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा चाइल्ड बजट स्टेटमेंट में अब 19 विभागों को शामिल किया गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य और सामाजिक न्याय जैसे सभी विभागों को एक निर्धारित लक्ष्य अनुसार मिलकर काम करना होगा। विभागों के बीच जब बेहतर समन्वय होगा, तभी बजट का वास्तविक लाभ धरातल पर दिखेगा। जिलों की विशिष्ट आवश्यकताओं पर ध्यान मंत्री सुश्री भूरिया ने प्रदेश के 55 जिलों की विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि हर जिले में बच्चों की आवश्यकताएं अलग हो सकती हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे स्थानीय आवश्यकताओं को समझें और उसी के अनुरूप कार्य योजना बनाएं। 3 करोड़ बच्चे हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी" : आयुक्त सुश्री निधि निवेदिता महिला एवं बाल विकास आयुक्त सुश्री निधि निवेदिता ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कि राज्य की लगभग 40 प्रतिशत आबादी 3 करोड़ बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि चाइल्ड बजट की रिपोर्टिंग को अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाना अनिवार्य है।विभागों को केवल आंकड़ों पर नहीं, बल्कि साक्ष्यों पर ध्यान देना होगा कि उनकी योजनाओं का वास्तविक लाभ बच्चों तक कैसे पहुँच रहा है। 5 वर्षों की सफलता और 'इक्विटी' पर जोर : विलियम हैनलोन जूनियर यूनिसेफ मध्यप्रदेश के चीफ फील्ड स्टॉफ, श्री विलियम हैनलोन ने कहा कि मध्यप्रदेश 'चाइल्ड बजटिंग' के 5 सफल वर्ष पूरे कर चुका है और यह केवल खर्च की रिपोर्टिंग से आगे बढ़कर 'परिणाम-आधारित' बजटिंग की ओर बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश की अधिकांश जनजातीय आबादी को देखते हुए बजट में लिंग और भौगोलिक स्थिति के आधार पर समानता का ध्यान रखा जाना चाहिए। विकसित भारत @2047' के लिए रणनीतिक निवेश : क्रिस्टीना पोपीवानोवा यूनिसेफ की सोशल पॉलिसी चीफ (दिल्ली) सुश्री क्रिस्टीना पोपीवानोवा ने मध्यप्रदेश की इस पहल को संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेंशन के अनुरूप बताया।उन्होंने कहा कि 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब बच्चों में निवेश को 'लाभार्थी' के नजरिए से नहीं बल्कि 'उत्पादकता' के आधार पर देखा जाए । महिला बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक श्री अभिताभ अवस्थी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए बाल बजट के अंतर्गत 75 हजार 587 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह राशि राज्य के कुल बजट का 19.4 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद का 4.1 प्रतिशत है। वर्ष 2022 में बाल बजटिंग की पहल शुरू करने के बाद, मध्यप्रदेश अब इसके पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस प्रक्रिया में विभागों की भागीदारी 17 से बढ़कर 19 हो गई है, जो राज्य की "होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच"को दर्शाती है। कार्यशाला के तकनीकी सत्रों का संचालन यूनिसेफ की सामाजिक नीति विशेषज्ञ सुश्री पूजा सिंह द्वारा किया गया। इसमें शामिल 19 विभागों के प्रतिनिधियों ने बजट प्रक्रिया और क्रियान्वयन के अपने अनुभव साझा किए।  

प्रभारी मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा—नीमच जिले में दो वर्षों में ऐतिहासिक विकास

नीमच जिले ने दो वर्षों में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए : प्रभारी मंत्री सुश्री भूरिया स्वास्थ्य, उद्योग, सौर ऊर्जा, शिक्षा और अधोसंरचना में ऐतिहासिक उपलब्धियां भोपाल  महिला एवं बाल विकास तथा नीमच जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि विगत दो वर्षों में नीमच जिले ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, नगरीय एवं ग्रामीण विकास, कृषि, पर्यटन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में जिले ने उल्लेखनीय प्रगति की है। सुश्री भूरिया पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रही थी। कार्यक्रम के दौरान प्रभारी मंत्री एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा “विकास एवं सेवा के दो वर्ष” पर आधारित उपलब्धियों की पुस्तक का विमोचन भी किया गया।मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से नीमच जिला निरंतर प्रगति की राह पर आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में जिले को विकास के नए शिखर पर पहुँचाया जाएगा।प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि नीमच जिला अब सौर ऊर्जा के हब के रूप में देश और प्रदेश में पहचान बना रहा है। सिंगोली तहसील के ग्राम बड़ी कवई में स्थापित 300 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र से बिजली उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। इसके साथ ही जिले को 350 करोड़ रुपये की लागत से बने मेडिकल कॉलेज भवन की सौगात मिली है, जहाँ एमबीबीएस की 100 सीटों पर अध्ययन प्रारंभ हो चुका है और वर्तमान में 200 विद्यार्थी मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि उद्योग क्षेत्र में भी जिले ने उल्लेखनीय प्रगति की है। नीमच में 150 नए एमएसएमई उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनमें 118 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश हुआ है और 1096 लोगों को रोजगार मिला है। वहीं एमपीआईडीसी के माध्यम से 11 वृहद औद्योगिक इकाइयों की स्थापना प्रस्तावित है, जिनमें 5269 करोड़ रुपये का निवेश होगा और लगभग 4935 लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि नीमच जिले की यह प्रगति शासन, प्रशासन और जनसहयोग का परिणाम है, जो आने वाले वर्षों में जिले को और अधिक सशक्त बनाएगी। सड़क एवं अधोसंरचना के क्षेत्र में भी तेजी से कार्य जारी हैं। भाटखेड़ा–नीमच–डूंगलावदा तक 133 करोड़ रुपये की लागत से डिवाइडर युक्त फोरलेन सीसी सड़क का निर्माण प्रगति पर है। बघाना, हिंगोरिया ओवरब्रिज सहित अन्य सड़क परियोजनाओं पर भी कार्य तेज़ी से चल रहा है। जावद विधायक श्री ओमप्रकाश सखलेचा ने बताया कि जावद क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार हुआ है, जहाँ 1400 विद्यार्थी एआई की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। जावद का सीएम राइज स्कूल आईएसओ प्रमाण पत्र से सम्मानित हुआ है। मनासा विधायक श्री अनिरुद्ध मारू ने बताया कि मनासा में 100 बिस्तरीय सिविल अस्पताल प्रारंभ हो चुका है तथा गांधी सागर से मनासा, जावद और नीमच के लिए उद्वहन सिंचाई योजना का कार्य भी प्रारंभ हो गया है। नीमच विधायक श्री दिलीप सिंह परिहार ने बताया कि नीमच में नवीन मेडिकल कॉलेज, मंडी चंगेरा और पायलट सेंटर प्रारंभ हो चुके हैं तथा कई नई सड़कों के निर्माण कार्य शीघ्र शुरू होने वाले हैं। 

मंत्री सुश्री भूरिया ने उन्नत पशुपालन, पोषण और पशु स्वास्थ्य को लेकर दिए महत्वपूर्ण सुझाव

झाबुआ दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादन को दुगुना करने के विजन को धरातल पर उतारने के लिये ‘दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान’ के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने झाबुआ जिले के ग्राम कमलखेड़ा में पशुपालकों से घर जाकर सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने उन्नत पशुपालन, पोषण और पशु स्वास्थ्य को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। मंत्री सुश्री भूरिया ने पशुपालक श्री चावड़ा से उनके घर पहुँचकर संवाद किया। इस दौरान मंत्री सुश्री भूरिया ने उन्हें उन्नत नस्ल के पशुपालन, हरा चारा, और संतुलित पशु आहार के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और उच्च उत्पादकता वाले पशु ही दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सपना है कि प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जाए और इसी दिशा में यह अभियान एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि 2 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक चल रहे इस राज्यस्तरीय अभियान के अंतर्गत उन पशुपालकों से सीधी भेंट की जा रही है जिनके पास 10 या अधिक मादा पशु हैं। उन्होंने कहा कि दुग्ध समृद्धि केवल पशुपालन नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस पहल है। नोडल अधिकारी डॉ. मगनानी ने पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान, पशु पोषण और उपचार के विषय में तकनीकी जानकारी दी। उप संचालक पशुपालन डॉ. ए.एस. दिवाकर ने सेक्स सॉर्टेड सीमन तकनीक की जानकारी दी, जिससे 90% तक बछिया प्राप्त होने की संभावना होती है। उन्होंने पशुपालकों को संतुलित पशु आहार अपनाने और सांची दुग्ध संघ को दूध प्रदाय करने के लिए प्रेरित किया। ग्राम कमलखेड़ा के अन्य पशुपालक भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे और उन्होंने अभियान से जुड़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।