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बोधगया-राजगीर-नालंदा-वैशाली पहुंचे थाई पर्यटक, बिहार-थाईलैंड पर्यटन सहयोग पर मंथन

पटना  बिहार की समृद्ध बौद्ध विरासत अब थाईलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया के पर्यटकों तक नए अंदाज में पहुंचाने की तैयारी है। बिहार पर्यटन विभाग के तत्वावधान में ‘फैम टूर ऑफ लोटस ट्रायंगल-ट्रैवल टू लैंड ऑफ एनलाइटनमेंट’ के तहत थाईलैंड से आए 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली का भ्रमण किया। बिहार यात्रा के अंतिम चरण में पटना पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल ने बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय पर्यटन हित धारकों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बिहार बौद्ध पर्यटकों के स्वागत के लिए हमेशा तैयार पर्यटन निदेशालय के संयुक्त निदेशक राजेश रौशन ने कहा कि बिहार बौद्ध पर्यटकों के स्वागत के लिए हमेशा तैयार है। बिहार सरकार सीमा-पार पर्यटन को बढ़ावा देना, बेहतरीन ट्रैवल पैकेज बनाना, सीधी कनेक्टिविटी बेहतर करना और बिहार को थाईलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन के तौर पर स्थापित करने की दिशा में कार्यरत है। थाई प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त रूप से कहा कि बिहार पर्यटन द्वारा किया गया यह प्रयास भारत और विशेषकर बिहार की वैश्विक पर्यटन पहुंच को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। थाईलैंड-बिहार टूरिज्म के इस पहल का हिस्सा बनना खुशी की बात है। बैठक में कारोबार और पर्यटन पर चर्चा बैठक में बिहार के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न संगठनों ने थाई प्रतिनिधिमंडल ने अन्य व्यवसायी संस्था से वार्ता की। इस दौरान पर्यटन उत्पादों, ट्रैवल पैकेज, व्यावसायिक अवसर और डेस्टिनेशन प्रमोशन को लेकर दोनों पक्षों ने विचार साझा किए। हित धारकों ने कहा कि इस पहल से बिहार-थाईलैंड के बीच पर्यटन सहयोग, कारोबारी साझेदारी और प्रचार-प्रसार के नए रास्ते खुलेंगे। थाई प्रतिनिधिमंडल ने बिहार पर्यटन की पहल को भारत और विशेषकर बिहार की वैश्विक पर्यटन पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। यात्रा पूरी करने के बाद 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बिहार से रवाना हो गया।

रोहतास का 150 साल पुराना ऐतिहासिक बराज फिर से बनेगा आकर्षण का केंद्र

 रोहतास सोन नदी पर बना 150 साल पुराना ऐतिहासिक एनीकट बराज एकबार फिर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। ब्रिटिश काल में यह प्रमुख पर्यटक स्थल था, जहां लोग नौकायन करने आते थे। सुविधाओं के अभाव में इसकी रौनक फीकी पड़ गई थी। सोन के सतही जल का उपयोग कर डेहरी, सासाराम और औरंगाबाद शहर के लिए 1350 करोड़ की पेयजल आपूर्ति योजना को लेकर एनीकट बराज के पास जल भंडारण के बाद अब जल संसाधन विभाग इसे नए सिरे से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रहा है। जल संसाधान विभाग के अधिकारियों के अनुसार 1874 में निर्मित एनीकट बराज सिंचाई के साथ-साथ इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है। 70 के दशक तक में यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते थे। सोन नदी में नौकायन, बराज के फाटकों से गिरते पानी का नजारा और सूर्यास्त देखने के लिए लोग घंटों बैठते थे। आज भी भारी संख्या में लोग मॉर्निंग वॉक को यहां आते है। बराज में सिल्ट भरने से जल संग्रहण क्षमता काफी कम हो गई थी। जिससे नहरों में पर्याप्त जलापूर्ति में परेशानी उत्पन्न होने पर 1965 में इंद्रपुरी बराज के निर्माण के बाद पर्यटकों ने आना बंद कर दिया। फिर नौकायन का आनंद उठा सकेंगे पर्यटक विभागीय योजना के तहत यहां आधुनिक सुविधाओं के साथ नौकायन फिर शुरू किया जाएगा। बराज परिसर में सेल्फी प्वाइंट, चिल्ड्रेन पार्क, पाथवे, लाइट एंड साउंड शो और फूड कोर्ट बनाए जाएंगे। रात में आकर्षक लाइटिंग से बराज जगमगाएगा। सोन आरती का हो रहा आयोजन सामाजिक संगठन द्वारा प्रत्येक रविवार की शाम यहां सोन आरती का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें भारी संख्या में लोग भाग ले रहे है।  सोन तट के सौंदर्यीकरण का डीपीआर तैयार किया जा रहा है। टेंडर के बाद काम शुरू होगा। प्रयास है कि अगले मानसून सीजन तक बराज को पर्यटकों के लिए खोल दिया जाए अजय कुमार, मुख्य अभियंता जलसंसाधन विभाग डेहरी। बराज के पुनर्विकास से फिर यहां रोजगार बढ़ेगा और डेहरी की पहचान पर्यटन मानचित्र पर बनेगी।  पहले यहां हर दिन मेला सा लगता रहता था। नाविक, दुकानदार और फोटोग्राफर सभी को रोजगार मिलता था। अनुभा सिन्हा, शिक्षाविद

सभी जिलों में पर्यटन और रोजगार की संभावनाएं तलाशकर युवाओं को अवसर देने पर जोर

पटना बिहार पर्यटन विभाग हर साल चार लाख लोगों को रोजगार देगा। इस संबंध में विभाग ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत अगले पांच वर्षों का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। शुक्रवार को विभाग के मंत्री केदार गुप्ता ने अपना कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने विभाग की ओर से पिछली सरकार द्वारा तय की गई योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने को कहा। इसके अलावा लंबित पड़ी योजनाओं पर फिर से जल्द काम शुरू करने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनके कार्यालय कक्ष में मुलाकात कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। विभाग अपनी नयी योजना में पांच वर्षों में 20 लाख लोगों को रोजगार देगा। वर्ष 2030 तक विभाग पूरे प्रदेश में इतने युवाओं को रोजगार से जोड़ेगा। इससे बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार का भी सृजन होगा। राज्य सरकार ने सात निश्चय तीन के तहत एक करोड़ नौकरी और रोजगार देने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसमें सभी विभागों की हिस्सेदारी तय की जा रही है। सबसे बड़ी हिस्सेदारी उद्योग विभाग के साथ पर्यटन विभाग को ही मिला है। सरकार के लक्ष्य का 20 फीसदी केवल पर्यटन विभाग ही पूरा करेगा। ऐसे में रोजगार देने के लिए पर्यटन विभाग आगे आया है। उसने आगामी पांच वर्षों में 20 लाख रोजगार देने के लक्ष्य को हर वर्ष के लिए अलग-अलग निर्धारित किया है। पर्यटन विभाग अगले पांच वर्षों में सभी जिलों में रोजगार की संभावनाओं की तलाश करेगा और फिर युवाओं को उनकी पात्रता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराएगा। युवा जिस कौशल के होंगे, उन्हें उसी में रोजगार मिलेगा। इसके लिए सभी जिलों के अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। उन्हें अपने-अपने जिलों में रोजगार की संभावनाओं के सेक्टर की पहचान करने और फिर उनमें युवाओं के लिए अवसर की उपलब्धता की पूरी जानकारी देने को कहा गया है। सरकार हर संभावनाओं को युवाओं के लिए सुलभ बनाएगी विशेषज्ञों के अनुसार सूबे में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और इसका अबतक ढंग से विकास नहीं हो पाया है। इस समय पर्यटन के क्षेत्र में काफी कम रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। यही नहीं बहुत कम संख्या में लोगों को रोजगार मिला हुआ है। अधिसंख्य रोजगार असंगठित क्षेत्र में है और वे भी अनिश्चितता वाले हैं। इसलिए राज्य सरकार ने पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के हर संभव संभावनाओं की तलाश कर उन्हें युवाओं के लिए सुलभ बनाएगी। धार्मिक पयर्टन का होगा विकास सूबे के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने शुक्रवार को विस पहुंच अपने विभाग का कार्यभार संभाला। उन्होंने विभाग के प्रधान सचिव व अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर विभाग के कामकाज की जानकारी ली। मंत्री ने बताया कि उनका लक्ष्य अगले पांच सालों में प्रदेश के उन पर्यटन क्षेत्रों का विकास करना होगा, जिनकी चर्चा बहुत कम होती है। खासकर धार्मिक पर्यटन को लेकर प्रदेश में अपार संभावनाएं हैं। ऐसे में उनकी प्राथमिकता पर्यटकीय महत्व वाले धार्मिक स्थलों की पहचान करना है, ताकि विभागीय अधिकारियों से विमर्श कर उनके विकास के लिए किए जाने वाले कामों की सूची तैयार की जा सके। इसके लिए वे जल्द ही एक बैठक अधिकारियों संग बुलाकर इस योजना पर काम शुरू करेंगे। इसके अलावा प्रदेश में प्राकृतिक दृश्यों वाले स्थानों की भरमार है। उनको भी विकसित कर पर्यटन के मानचित्र पर स्थान दिलाना उनकी प्राथमिकता सूची में शामिल है।