samacharsecretary.com

पंजाब में बाढ़ के बाद पर्यावरण में बदलाव, वेटलैंड्स में पक्षियों की संख्या घटी, प्रजातियां बढ़ीं

 चंडीगढ़ पंजाब के वेटलैंड्स से इस बार मिले आंकड़े मिश्रित तस्वीर पेश कर रहे हैं। जहां प्रवासी पक्षियों की कुल संख्या में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं प्रजातियों (स्पीशीज) की विविधता बढ़ना पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव का संकेत दे रहा है। जनवरी 2026 में हुए बर्ड सेंसस के अनुसार, 2025 में 77,772 पक्षी दर्ज किए गए थे, जो 2026 में घटकर 71,129 रह गए। वहीं प्रजातियों की संख्या 270 से बढ़कर 304 हो गई। यह सेंसस हरिके वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, नंगल वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, केशोपुर वेटलैंड्स, रंजीत सागर वेटलैंड्स, रोपड़ वेटलैंड्स और कंजली वेटलैंड्स में एशियन वाटरबर्ड सेंसस प्रोटोकॉल के तहत किया गया। सर्वे के दौरान प्रजाति-वार गिनती, फ्लॉक (झुंड) साइज, हैबिटैट उपयोग और डिस्टर्बेंस फैक्टर्स का भी आकलन किया गया। राज्य के सबसे बड़े हरिके वेटलैंड में पक्षियों की संख्या 57,251 से घटकर 52,707 हो गई, लेकिन प्रजातियों की संख्या 80 से बढ़कर 87 दर्ज की गई। केशोपुर वेटलैंड में भी पक्षियों की संख्या 13,675 से घटकर 10,450 रह गई, जबकि प्रजातियां 75 से बढ़कर 78 हो गईं। रोपड़ वेटलैंड में पक्षियों की संख्या में हुआ इजाफा वहीं रोपड़ वेटलैंड में पक्षियों की संख्या 1,486 से बढ़कर 2,313 और प्रजातियां 44 से 46 हो गईं। नंगल वेटलैंड में भी संख्या 2,411 से बढ़कर 3,189 और प्रजातियां 36 से बढ़कर 44 दर्ज की गईं। कंजली वेटलैंड में भी सकारात्मक रुझान रहा, जहां पक्षियों की संख्या 440 से बढ़कर 623 और प्रजातियां 23 से बढ़कर 29 हो गईं। रंजीत सागर वेटलैंड में पक्षियों की संख्या 2,500 से घटकर 1,867 हो गई, हालांकि प्रजातियों की संख्या 20 से बढ़कर 21 हो गई। मुख्य वन्यजीव संरक्षक बसंता राजकुमार के अनुसार, पिछले वर्ष आई भीषण बाढ़ का असर वेटलैंड्स पर पड़ा, जिससे हरिके, केशोपुर और रंजीत सागर जैसे क्षेत्र अधिक प्रभावित हुए। इसके विपरीत रोपड़, नंगल और कंजली अपेक्षाकृत कम प्रभावित रहे, जिससे वहां पक्षियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। नई प्रजातियों के आने से मिले सकारात्मक संकेत इसके बावजूद कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। केशोपुर में 441 कामन क्रेन (सारस) का बड़ा फ्लॉक दर्ज किया गया, जो पंजाब में सीमित क्षेत्र में ही पाया जाता है। नंगल में 11 ब्लैक-नेक्ड ग्रीब्स का देखा जाना भी खास माना जा रहा है, क्योंकि यह प्रजाति उत्तर-पश्चिम भारत में कम ही रिपोर्ट होती है। पंजाब के वेटलैंड्स वैश्विक स्तर पर भी अहम हैं। हरिके, रोपड़, कंजली, केशोपुर और नंगल को रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है। राज्य में 7 प्रतिशत से कम फॉरेस्ट और वाइल्डलाइफ कवर होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय महत्व के वेटलैंड्स की संख्या के मामले में पंजाब देश में तीसरे स्थान पर है। जानें: कैसे हुआ बर्ड सेंसस 2026     जनवरी 2026 में एशियन वाटरबर्ड सेंसस प्रोटोकॉल के तहत सर्वे     वेटलैंड्स को अलग-अलग सर्वे ब्लॉक्स में बांटा गया     डबल काउंटिंग से बचने के लिए वैज्ञानिक तरीका अपनाया गया     स्पीशीज-वार गिनती, फ्लॉक साइज, हैबिटैट उपयोग और डिस्टर्बेंस का आकलन     पंजाब फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के साथ बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस), वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर), डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया, पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू), गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (जीएनडीयू) और पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) की भागीदारी प्रमुख वेटलैंड्स का प्रदर्शन     हरिके: संख्या घटी, स्पीशीज बढ़ीं     केशोपुर: संख्या में गिरावट, स्पीशीज में इजाफा     रोपड़: संख्या और स्पीशीज दोनों बढ़ीं     नंगल: दोनों में मजबूत सुधार     कंजली: सकारात्मक ट्रेंड     रंजीत सागर: संख्या घटी, स्पीशीज में हल्की बढ़ोतरी जानें इस स्थ्डी से क्या अहम संकेत मिले     कुल बर्ड काउंट घटा, लेकिन स्पीशीज डाइवर्सिटी बढ़ी     बाढ़ का असर कई वेटलैंड्स पर साफ दिखा     कुछ वेटलैंड्स में इकोलॉजिकल बैलेंस बेहतर हुआ     रेयर स्पीशीज की मौजूदगी उम्मीद बढ़ाने वाली  

मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड और अतावी बर्ड फाउंडेशन के आयोजित टूर में 45 से अधिक पक्षीप्रेमी हुए शामिल

भोपाल  मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा 14 सितंबर को भोपाल के बिसनखेड़ी और ग्वालियर के महाराजपुर क्षेत्र में बर्ड वॉचिंग टूर का आयोजन किया गया। अतावी बर्ड फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस टूर में 45 से अधिक पक्षीप्रेमी पर्यटकों ने लगभग 50 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों का अवलोकन किया। पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि मध्यप्रदेश पक्षी विविधता और प्राकृतिक धरोहर के लिए पूरे देश में विशेष पहचान रखता है। बर्ड वॉचिंग जैसे आयोजन न केवल प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं, बल्कि यह प्रदेश में सतत पर्यटन को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। ऐसे कार्यक्रमों से स्थानीय समुदायों को रोजगार और नए अवसर मिलते हैं तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता भी बढ़ती है। हमारा प्रयास है कि बर्ड टूरिज्म को मध्यप्रदेश की एक खास पहचान बनाया जाए। अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति, गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश, पक्षी विविधता और प्राकृतिक धरोहर से समृद्ध प्रदेश है। यहां हर मौसम में पक्षीप्रेमियों को एक नया और अनोखा अनुभव मिलता है। बर्ड वॉचिंग जैसे आयोजन न केवल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाते हैं। भोपाल में बड़े तालाब के किनारे बिसनखेड़ी क्षेत्र में बर्ड गाइड अंकित मालवीय ने प्रतिभागियों को वायर टेल्ड स्वैलो, पाइड बुशचैट, स्पॉटेड डव, ग्रे-हेडेड स्वाम्पहेन, ग्रे फ्रैंकोलिन, रॉक पिजन, इंडियन पैराडाइज फ्लाईकैचर सहित कई प्रजातियों का नजदीकी अवलोकन कराया। इसी प्रकार ग्वालियर के महाराजपुरा में बर्ड गाइड विवेक वर्मा ने पर्यटकों को 50 से अधिक प्रजातियों के बारे में जानकारी दी और उनके व्यवहार व पारिस्थितिकी पर प्रकाश डाला। हर माह आयोजित होंगे टूर मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा पक्षी प्रेमियों को आकर्षित करने और प्रदेश में बर्ड टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रत्येक माह बर्ड वॉक आयोजित किए जाएंगे। इसी क्रम में 21 सितम्बर को छिंदवाड़ा एवं भोपाल और 28 सितम्बर को चिड़ीखो, नरसिंहगढ़ में बर्ड वॉचिंंग टूर होंगे। इन आयोजनों की बुकिंग वर्तमान में खुली है और इच्छुक पक्षीप्रेमी इसमें भाग लेकर मध्यप्रदेश की समृद्ध पक्षी विविधता का अनुभव कर सकते हैं।