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ब्राउन शुगर में मिलावट का नया खेल! पटना में पैरासिटामोल नेटवर्क की जांच तेज

पटना ब्राउन शुगर में पैरासिटामोल मिलाने का शक होने पर पुलिस, औषधि और खाद्य संरक्षा विभाग ने जब्त ड्रग्स की जांच तेज कर दी है। नशे के कारोबार की जांच अब सिर्फ ब्राउन शुगर की बरामदगी और तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गई है। नशीले पदार्थों में भी मिलावट का खेल शुरू हो गया है। हाल में फुलवारीशरीफ से गिरफ्तार ड्रग पैडलर आकाश कुमार से मिली जानकारी की पड़ताल भोजपुर से फतुहा की एक फूड सप्लीमेंट कंपनी से होते हुए दिनकर गोलंबर स्थित मेडिकल स्टोर तक पहुंची है। फूड सप्लीमेंट कंपनी में कोई ऐसा संदिग्ध उपकरण या सामग्री नहीं मिली, जिससे यह साबित हो कि वहां नशीली दवा तैयार की जा रही थी। ऐसे में उसके बनाए छह उत्पादों को जांच के लिए प्रयोगशाल भेजा गया है ताकि यह पता चल सके कि कहीं इसमें ड्रग्स का इस्तेमाल तो नहीं किया गया है। वहीं, औषधि विभाग मेडिकल स्टोर से लेकर दवा कंपनी तक से पड़ताल कर रहा है, किस आधार पर इतनी बड़ी मात्रा में पैरासिटामोल ब्राउन शुगर कारोबारियों को बेची गई। ब्राउन शुगर में पैरासिटामोल मिलावट की जांच के लिए पुलिस, औषधि विभाग निरीक्षक सत्यनारायण सरन व इंद्रकांत, खाद्य संरक्षा विभाग अभिहित पदाधिकारी सुदामा चौधरी व डा. सुदिन कुमार सुमन आदि की की टीम बनाई गई है। असली खतरा अज्ञात मिश्रण हेरोइन में एविल-सेट्रेजिन, बेंजोडायजेपाम, बार्बियूरेट्स जैसे पदार्थ तो सफेद ब्राउन शुगर की मात्रा बढ़ाने के लिए उसमें पैरासिटामोल टैबलेट को पीस कर मिलाने की आशंका है। ब्राउन शुगर या हेरोइन जैसे अवैध ड्रग्स में कौन से पदार्थ कितनी मात्रा में है, इसकी कोई जानकारी नहीं होती। यही कारण है इसकी हर खेप का असर व जहरीलापन अलग-अलग होता है। पैरासिटामोल खुद नशीली दवा नहीं है, लेकिन यदि इसे पैडलर मिला रहे हैं तो सिर्फ मात्रा बढ़ती है और नशे कारोबारियों का फायदा बढ़ता है। यदि, इसी पैरासिटामोल को ब्राउन शुगर तैयार करने के क्रम में मिलाया जाता है, तो एक अज्ञात रासायनिक मिश्रण बनता है, जिसकी घातकता अभी अज्ञात है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि ब्राउन शुगर मूल तत्व अफीम में यदि ऐसी दवाएं मिलाई जा रही हैं तो मस्तिष्क व सांस की गतिविधि में दबाव बढ़ने से बेहोशी, सांस धीमा होना, ओवरडोज का खतरा, पैरासिटामोल की अत्यधिक मात्रा अलग से लिवर गंभीर नुकसान हो सकता है। कई बार मस्तिष्क में आक्सीजन की कमी से मौत तक हो सकती है। फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट खोलेगी कई राज जांच तथ्यों के अनुसार, फूड सप्लीमेंट कंपनी के संचालक ने दिनकर गोलंबर स्थित मेडिकल स्टोर से पैरासिटामोल उपलब्ध कराई थी। औषधि विभाग मेडिकल स्टोर को सील कर खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, बिल, स्टाक आदि के आधार पर पूछताछ कर रही है। पुलिस देख रही है कि मेडिकल स्टोर से लिया गया पैरासिटामोल नशे के कारोबारियों तक कैसे पहुंचा, इसका इस्तेमाल ब्राउन शुगर में मिलावट के लिए किया या निर्माण के लिए। वहीं, फोरेंसिक लैब में जब्त ड्रग में मिले विशिष्ट रासायनिक घटकों की प्रोफाइलिंग से अलग-अलग खेपों या आपराधिक मामलों के बीच संबंध तलाशा जाएगा। ब्राउन शुगर में मिलावट के लक्षण ब्राउन शुगर-हेरोइन में कैफीन, पैरासिटामोल, बेंजोडायजेपाम, बार्बियूरेट्स जैसी दवाएं मिलाने से सेवन के बाद व्यक्ति में अचानक अत्यधिक सुस्ती, कमजोरी, संतुलन बिगड़ना, अस्पष्ट बोलना व संज्ञानात्मक गड़बड़ी के लक्षण सामने आते हैं। इन जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं अब निगाहें फूड सप्लीमेंट कंपनी से लिए गए छह नमूनों में कौन-कौन से रासायनिक घटक मिले, कोई औषधीय पदार्थ मौजूद है या नहीं? पैरासिटामोल की खरीद किस मात्रा में और किसके लिए हुई? मेडिकल स्टोर के बिल और स्टाक रजिस्टर में क्या दर्ज है? कंपनी और मेडिकल स्टोर के बीच दवा के लेन-देन का स्वरूप क्या है? पकड़े गए आरोपितों के बयान की इन दस्तावेजों से पुष्टि होती है या नहीं? ब्राउन शुगर के जब्त नमूने और फूड कंपनी के सैंपल में कोई रासायनिक समानता है या नहीं?     औषधि विभाग के साथ पुलिस, खाद्य संरक्षा विभाग व आयुष विभाग की संयुक्त टीम इस मामले की जांच कर रही है। ब्राउन शुगर आदि में कौन से पदार्थ मिलाए गए पुलिस फोरेंसिक लैब में इसकी जांच करा रही है। भारी मात्रा में पैरासिटामोल कैसे किसी व्यक्ति को बेची जा रही थी, इस दिशा में औषधि विभाग की टीम जांच कर रही है। मेडिकल स्टोर से सीएंडएफ व कंपनी तक से इस नेटवर्क की जांच की जा रही है। -नित्यानंद किसलय, राज्य औषधि नियंत्रक     ब्राउन शुगर सफेद रंग का होता है, ऐसे में पैरासिटामोल टैबलेट इसकी मात्रा बढ़ाने के लिए ही मिलाया जाता होगा ताकि उससे अधिक लाभ कमाया जा सके। हेराइन में एविल आदि मिलाते हैं, जिससे घातक लिवर इंजरी की आशंका बढ़ जाती है। -प्रो. हितेष मिश्रा, फार्माकोलाजी विभाग, आइजीआइएमएस     ब्राउन शुगर-हेरोइन जैसे ड्रग्स में एविल, बेंजोडायजापाम, बार्बियूरेट्स व पैरासिटामोल जैसी दवाएं मिलाई जाती हैं। मिलावट के कारण इसकी लत छुड़ाना अपेक्षाकृत शुद्ध ब्राउन शुगर या हेराइन की तुलना में आसान होता है। हालांकि, यदि इस फेर में ओवरडोज होता है तो परिणाम घातक हो सकते हैं। -डॉ. विवेक विशाल, नशा मुक्ति विशेषज्ञ  

नशे का काला कारोबार: इंदौर पुलिस ने महिला के पास से पकड़ी करोड़ों की ब्राउन शुगर

इंदौर   इंदौर शहर में सोमवार को एक महिला को एक करोड़ रुपए की ब्राउन शुगर रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने इस मामले में आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है.  अपराध निवारण शाखा के पुलिस उपायुक्त (DCP) राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस ने अहिरखेड़ी इलाके में आरोपी सीमा नाथ के घर से 516 ग्राम प्रतिबंधित पदार्थ बरामद किया. उन्होंने बताया कि महिला पिछले कई सालों से नशीले पदार्थों का कारोबार कर रही थी.पुलिस ने उसके घर से 48.5 लाख रुपए नकद और इलेक्ट्रॉनिक तराजू भी बरामद किया है.  राजेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि मौके से मिले सबूतों से साफ पता चलता है कि महिला तस्कर ने नशीले पदार्थ बेचकर मोटी रकम कमाई है. उन्होंने बताया कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज (NDPS) अधिनियम के तहत एक FIR दर्ज की गई है.  पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी महिला पर पहले से ही 12 मामले दर्ज हैं. पुलिस अब आगे की विस्तृत जांच में जुटी है.