samacharsecretary.com

बिहार में लाइब्रेरियन पात्रता परीक्षा का ऐलान, 150 सवालों की होगी CBT परीक्षा

 पटना  बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने विद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा, 2026 का नोटिफिकेशन रविवार को जारी कर दिया है। परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 21 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए निर्धारित वेबसाइट  sletregistration.cbrt.co.in पर जाना होगा। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एसएम ने परीक्षा को लेकर जानकारी साझा की है। परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी। इसमें कुल 150 अंकों के बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा की अवधि 150 मिनट यानी ढाई घंटे होगी। प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा और गलत उत्तर के लिए निगेटिव मार्किंग नहीं की जाएगी।   पुस्तकालय विज्ञान से 100 और सामान्य ज्ञान से 50 अंक विद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा में कुल 150 प्रश्न पूछे जाएंगे। इनमें 100 अंक के प्रश्न पुस्तकालय विज्ञान विषय से होंगे, जबकि 50 अंक के प्रश्न सामान्य ज्ञान पर आधारित होंगे। परीक्षा का पाठ्यक्रम राज्य के मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों में पुस्तकालय विज्ञान की स्नातक डिग्री के लिए लागू पाठ्यक्रम के अनुरूप होगा। स्नातक के साथ पुस्तकालय विज्ञान की डिग्री जरूरी पात्रता परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी का बिहार का निवासी होना अनिवार्य है। अभ्यर्थी के पास स्नातक की डिग्री के साथ किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से पुस्तकालय विज्ञान में स्नातक की डिग्री होनी चाहिए। स्नातक में न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक आवश्यक होंगे। निर्धारित श्रेणियों के अभ्यर्थियों को इसमें पांच प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। सभी वर्गों को उम्र सीमा में 10 वर्ष की छूट परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को आयु सीमा में सभी वर्गों के लिए 10 वर्ष की छूट दी जाएगी। पात्रता से जुड़ी अन्य शर्तें बोर्ड की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार लागू होंगी। किस वर्ग के लिए कितने न्यूनतम अंक जरूरी पात्रता परीक्षा में सफल होने के लिए अलग-अलग श्रेणियों के लिए न्यूनतम अर्हतांक निर्धारित किया गया है। श्रेणी                                                  न्यूनतम अर्हतांक सामान्य वर्ग                                       50 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग                                         45.5 प्रतिशत अत्यंत पिछड़ा वर्ग                              42.5 प्रतिशत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति     40 प्रतिशत दिव्यांग                                                 40 प्रतिशत महिला                                                  40 प्रतिशत