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CII की राय: Budget 2026 में ये सुधार आम बजट को बनाएंगे असरदार

मुंबई   भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) एक शानदार खबर लेकर आया है. दरअसल CII  बिजनेस आउटलुक सर्वे के अनुसार, देश में बिजनेस करने वाली कंपनियों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है. लोकल मार्केट में सामान की डिमांड मजबूत है, जिससे कंपनियां भविष्य को लेकर पॉजिटिव हैं. CII के बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स में बड़ा इजाफा देखा गया है. वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में यह इंडेक्स बढ़कर 66.5 हो गया है, जो पिछले 5 तिमाहियों में सबसे ज्यादा है. सर्वे में शामिल 72% कंपनियों का मानना है कि त्योहारी सीजन और जीएसटी (GST) दरों में सुधार की वजह से आने वाले समय में डिमांड और बढ़ेगी. बजट 2026-27 के लिए CII के सुझाव सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि, "बढ़ते आत्मविश्वास से उद्योग की वैश्विक चुनौतियों से निपटने की क्षमता उजागर होती है, जिसे मजबूत घरेलू मांग और घरेलू सुधारों से सपोर्ट मिल रहा है. सरकार को भारत की तेज रफ्तार बनाए रखने के लिए बजट में कुछ कदम उठाने की जरूरत है, जिसमें शामिल हैं-     इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश (NIP 2.0) CII ने सुझाव दिया कि सरकार 150 लाख करोड़ रुपये की संशोधित 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline 2.0) के जरिए बुनियादी ढांचे पर खर्च जारी रखे. इससे ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता मिले जो तुरंत शुरू हो सकें और कमाई कर सकें.     इंडिया डेवलपमेंट एंड स्ट्रैटेजिक फंड घरेलू और विदेशी निवेश जुटाने के लिए एक विशेष फंड बनाने का सुझाव दिया गया है. यह फंड छोटे और मध्यम उद्योगों के साथ, ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स, युवाओं के कौशल विकास पर निवेश को बढ़ाने पर काम आएगा.     बिजनेस करना होगा और आसान कंपनियों पर कागजी कार्रवाई और नियमों का बोझ कम करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का डिजिटलीकरण कोष बनाने का प्रस्ताव है. इसका लक्ष्य डिजिटल रिकॉर्ड और रियल-टाइम कंप्लायंस सिस्टम को लागू करना है.     इनोवेशन और रिसर्च पर फोकस भविष्य की तकनीक के लिए CII ने 10 नए 'उन्नत शिक्षा और अनुसंधान केंद्र' खोलने की सिफारिश की है. हर केंद्र के लिए 1,000 करोड़ रुपये का बजट रखने का सुझाव है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी और बायोटेक्नोलॉजी पर काम करेंगे. भारतीय उद्योग जगत चाहता है कि सरकार बजट में ऐसे कदम उठाए जिससे न केवल व्यापार करना आसान हो, बल्कि भारत नई तकनीकों और मजबूत बुनियादी ढांचे के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहे.

किसानों को राहत की उम्मीद: बजट 2026 में PM-KISAN की राशि बढ़ाने की तैयारी, अब मिल सकते हैं इतने हजार

नई दिल्ली केंद्रीय बजट 2026 अब ज्यादा दूर नहीं है और इसे लेकर देशभर के किसानों की नजर सरकार पर टिकी हुई है। खेती की बढ़ती लागत और महंगाई के बीच किसान उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार बजट में उनके लिए कोई बड़ा एलान हो सकता है। खासतौर पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 6,000 से बढ़कर 10,000 रुपये हो सकती है सालाना मदद फिलहाल पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसानों को साल में 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह रकम तीन किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। लेकिन मौजूदा हालात में किसानों का कहना है कि यह राशि अब जरूरतों के मुकाबले कम पड़ रही है। ऐसे में बजट 2026 में इस मदद को बढ़ाकर 10,000 रुपये सालाना करने की उम्मीद जताई जा रही है। क्यों जरूरी मानी जा रही है बढ़ोतरी पिछले कुछ वर्षों में खेती से जुड़ा खर्च तेजी से बढ़ा है। बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, सिंचाई और कृषि उपकरणों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में किसानों को मिलने वाली सीमित सहायता से खर्च निकालना मुश्किल हो गया है। अगर सरकार पीएम किसान योजना की रकम बढ़ाती है, तो इससे किसानों को खेती में निवेश करने, फसल उत्पादन सुधारने और आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मिल सकता है फायदा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसानों के हाथ में ज्यादा पैसा आता है, तो उनकी खरीदारी की क्षमता बढ़ेगी। इससे गांवों में खर्च बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसका असर कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ेगा। कब शुरू हुई थी पीएम किसान योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत दिसंबर 2018 में की गई थी। इसका मकसद छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहारा देना है। योजना के तहत हर साल 6,000 रुपये की मदद सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए किसानों के खातों में भेजी जाती है। अब सभी की नजरें बजट 2026 पर टिकी हैं। अगर सरकार इस योजना की राशि बढ़ाने का ऐलान करती है, तो यह किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।    

बजट 2026 की तैयारियां: क्या रविवार को खुलेंगे शेयर बाजार? 1 फरवरी को बड़ा अपडेट

नई दिल्ली साल 2017 से केंद्र सरकार एक फरवरी को आम बजट पेश करती आ रही है. लेकिन इस बार हालात कुछ और हैं. वजह है 1 फरवरी को रविवार का दिन होना. हालांकि रिपोर्ट्स की मानें तो चाहे रविवार ही क्‍यों न हो, बजट उसी दिन पेश होने जा रहा है. और अगर देश का आम बजट (Union Budget 2026) 1 फरवरी 2026 को पेश होता है, तो यह दिन खास होने वाला है. वजह सिर्फ बजट नहीं, बल्कि यह सवाल भी है कि क्या उस दिन शेयर बाजार खुलेगा या नहीं? क्योंकि रविवार आमतौर पर शेयर बाजार के लिए छुट्टी का दिन होता है.  संसदीय कार्य समिति (CCPA) बुधवार को होने वाली बैठक में बजट सत्र की तारीखों पर आखिरी फैसला ले सकती है. अधिकारियों के अनुसार, CCPA की बैठक में संसद के बजट सत्र का कार्यक्रम और इस साल केंद्रीय बजट पेश करने की सटीक तारीख दोनों तय की जाएंगी, क्योंकि 1 फरवरी को रविवार पड़ने के कारण अनिश्चितता बनी हुई है.  सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी को संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के संबोधन से हो सकती है. आर्थिक सर्वेक्षण 29 जनवरी को पेश किए जाने की संभावना है. 30 और 31 जनवरी को छुट्टियां रहने की संभावना है, जिससे समिति द्वारा मंजूरी मिलने पर 1 फरवरी (रविवार) को केंद्रीय बजट पेश करने कंफर्म हो पाएगा.  पहले ही शुरू हो चुकी थी तैयारियां  बजट 2026 की तैयारियों का काम पहले ही शुरू हो चुका है. बजट से पहले की परामर्श बैठकें 9 अक्टूबर, 2025 से नवंबर के मध्य तक आयोजित की गईं. 2026-27 के बजट अनुमान और 2025-26 के संशोधित अनुमानों को अस्थायी रूप से अंतिम रूप दे दिया गया है. वित्त मंत्रालय केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय से जीडीपी अनुमान जुटाने की प्रक्रिया में भी है, जिसका उपयोग बजट से पहले आखिरी गणना में किया जाएगा. गौरतलब है कि पिछले साल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना लगातार आठवां केंद्रीय बजट पेश किया, जिससे उन्होंने वित्त मंत्री के रूप में दो कार्यकाल में पेश किए गए दस बजटों के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड की बराबरी की. सरकार की घोषणा के बाद होगा अंतिम फैसला NSE के मुताबिक, बाजार खोलने या न खोलने का निर्णय केंद्र सरकार द्वारा बजट की तारीख को आधिकारिक रूप से घोषित करने के बाद ही लिया जाएगा. फिलहाल यह प्रस्ताव एक्सचेंज के अंदरूनी स्तर पर समीक्षा के दौर से गुजर रहा है. NSE ने साफ किया है कि ऑपरेशनल व्यवहार्यता (operational feasibility), सिस्टम की तैयारियां, बैंकों और ब्रोकर्स की उपलब्धता जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाएगा. रविवार को ट्रेडिंग कोई नई बात नहीं अगर 1 फरवरी 2026 को शेयर बाजार खुलता है, तो यह कोई पहली बार नहीं होगा. इससे पहले भी जब बजट किसी रविवार या सार्वजनिक अवकाश के दिन पेश किया गया, तब शेयर बाजार खोले गए हैं ताकि निवेशक सरकार की घोषणाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकें. ऐसे मौकों पर सरकार और रेगुलेटर्स का मानना रहा है कि बजट जैसे बड़े आर्थिक फैसलों पर रियल-टाइम मार्केट रिस्पॉन्स जरूरी होता है, ताकि अगले ट्रेडिंग डे तक अनावश्यक उतार-चढ़ाव न बने. BSE की ओर से अभी चुप्पी जहां NSE ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, वहीं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. BSE ने यह नहीं बताया है कि वह रविवार को बाजार खोलने पर विचार कर रहा है या नहीं. आमतौर पर NSE और BSE ऐसे मामलों में तालमेल के साथ फैसला लेते हैं, इसलिए माना जा रहा है कि सरकार की घोषणा के बाद दोनों एक्सचेंज एक जैसी रणनीति अपना सकते हैं. 1 फरवरी को ही क्यों पेश होता है बजट? भारत में 2017 से परंपरा बन चुकी है कि केंद्रीय बजट 1 फरवरी को ही पेश किया जाए, चाहे वह दिन कोई भी हो. इसका मकसद यह होता है कि सरकार को पूरे वित्त वर्ष की शुरुआत से पहले नीतियों को लागू करने का पर्याप्त समय मिल सके. बजट से एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) पेश किया जाता है, जिसके बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन और वरिष्ठ अधिकारी मीडिया को जानकारी देते हैं. रविवार को संसद सत्र भी होगा दुर्लभ अगर सरकार 1 फरवरी 2026 को बजट पेश करने की आधिकारिक मंजूरी देती है, तो यह संसद का एक दुर्लभ रविवार सत्र होगा. आमतौर पर संसद की कार्यवाही सप्ताहांत में नहीं होती, लेकिन बजट जैसे अहम मौकों पर अपवाद बनाए गए हैं. शेयर बाजार का सामान्य समय क्या होता है? अगर शेयर बाजार की बात करें तो भारत में इसका प्री-ओपन सेशन सुबह 9:00 से 9:15 बजे तक, नॉर्मल ट्रेडिंग सुबह 9:15 से दोपहर 3:30 बजे तक होता है. केवल सोमवार से शुक्रवार तक ही ट्रेडिंग होती है और शनिवार, रविवार के अलावा घोषित अवकाश पर बाजार बंद रहता है. लेकिन बजट जैसे खास मौकों पर इन नियमों में बदलाव किया जा सकता है. निवेशकों की नजर सरकार के फैसले पर फिलहाल निवेशकों, ब्रोकर्स और फाइनेंशियल मार्केट से जुड़े लोगों की नजर सरकार की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई है. जैसे ही बजट की तारीख को लेकर नोटिफिकेशन आएगा, NSE और BSE दोनों अपने-अपने फैसले सार्वजनिक करेंगे. बजट पेश करने के अनोखे फैक्‍ट्स  भारत में बजट पेश करने की परंपरा 26 नवंबर, 1947 से चली आ रही है, जब आर.के. शनमुखम चेट्टी ने स्वतंत्र भारत का पहला बजट प्रस्तुत किया था. दशकों से मनमोहन सिंह और पी. चिदंबरम जैसे नेताओं ने क्रमिक बजटों के  माध्यम से देश की आर्थिक नीति को आकार दिया है. भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री, सीतारमण के नाम महिलाओं में सबसे अधिक बार बजट पेश करने का विश्‍व रिकॉर्ड है.  रविवार को शेयर बाजार भी खुलेगा?  अगर 1 फरवरी को रविवार के दिन बजट पेश होता है तो उस दिन शेयर बाजार भी खुल सकता है. इस दिन आप ट्रेडिंग भी कर सकेंगे. साथ ही शेयरों की खरीद और बिक्री भी की जा सकेगी. हालांकि अभी तक एक्‍सचेंजों की तरफ से 1 फरवरी को शेयर बाजार खुलने को लेकर कोई अपडेट नहीं आया है.