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दतिया विधानसभा उपचुनाव की तारीखों का ऐलान, 30 जुलाई वोटिंग और 3 अगस्त को मतगणना

दतिया  मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। जारी कार्यक्रम के अनुसार, चुनाव की अधिसूचना छह जुलाई को जारी की जाएगी। नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई निर्धारित की गई है। 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 16 जुलाई तक उम्मीदवार अपने नाम वापस ले सकेंगे। दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान कराया जाएगा। इसके बाद तीन अगस्त को मतगणना होगी। निर्वाचन आयोग के अनुसार, चार अगस्त तक चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के कारण हो रहा उपचुनाव बता दें कि दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस के राजेंद्र भारती विधायक थे। उन्हें एक मामले में दो वर्ष से अधिक की सजा होने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी। इसके बाद यह सीट रिक्त हो गई। अब इस सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा। उपचुनाव में भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों के प्रत्याशी आमने-सामने होंगे। आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू निर्वाचन आयोग के आदेश के अनुसार अब दतिया विधानसभा क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। मतदान सभी केंद्रों पर ईवीएम और वीवीपैट के माध्यम से कराया जाएगा। विजयवर्गीय बोले- बीजेपी ही जीतेगी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा- दतिया उपचुनाव में निश्चित रूप से भाजपा ही जीतेगी।इस सवाल पर कि क्या बीजेपी के उम्मीदवार नरोत्तम मिश्रा ही होंगे, विजयवर्गीय बोले- ये कहना अभी जल्दबाजी होगी। जो उम्मीदवार आएगा, आपको बताया जाएगा। विधायक राजेन्द्र भारती की सदस्यता खत्म हुई थी दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहे हैं क्योंकि कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती को दो वर्ष से अधिक की सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई। इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने सीट खाली घोषित कर दी। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस बनाम भारत संघ फैसले, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 और संविधान के अनुच्छेद 191(1)(e) के तहत की गई। जानें क्या था मामला? दतिया के भूमि विकास सहकारी बैंक से जुड़े 25 साल पुराने घोटाले में अदालत ने राजेंद्र भारती को दोषी पाया गया था। आरोप था कि बैंक अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने 10 लाख रुपए की एफडी में हेरफेर कर अधिक ब्याज का लाभ लिया गया था। कोर्ट ने आईपीसी की धाराओं 120B, 420, 467, 468 और 471 के तहत दोषी ठहराते हुए 3 साल की सजा और जुर्माना भी लगाया था। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की हुई थी हार गौरतलब है कि 2023 में दतिया की विधानसभा सीट हुए चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी ने राजेंद्र भारती ने जीत दर्ज की थी। भाजपा के प्रत्याशी और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराकर वो इस सीट से विधायक चुने गए थे। राजेंद्र भारती को 88977 वोट मिले थे। जबकि नरोत्तम मिश्रा को 81235 वोट ही मिले थे। बैंक एफडी से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला साल 1998 में दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में एक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया। आरोप था कि बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर कर एफडी की अवधि 3 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी गई। इसके आधार पर 1999 से 2011 के बीच ब्याज की राशि निकाली जाती रही। उस समय राजेन्द्र भारती बैंक के अध्यक्ष और संबंधित संस्था के ट्रस्टी भी थे। बाद में मामले की जांच हुई और आरोपपत्र दायर किया गया। 1 अप्रैल को कोर्ट ने राजेन्द्र भारती को दोषी ठहराया 1 अप्रैल 2026 को दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने 28 साल पुराने बैंक धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में राजेन्द्र भारती को दोषी ठहराया। दोषसिद्धि के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। 2 अप्रैल 2026 को अदालत ने उन्हें 3 वर्ष के कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए सजा के क्रियान्वयन पर 60 दिन की मोहलत दी, लेकिन उनकी दोषसिद्धि बरकरार रही। इसी दिन मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर 2 अप्रैल 2026 से प्रभावी उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी। साथ ही दतिया विधानसभा सीट रिक्त घोषित कर इसकी सूचना निर्वाचन आयोग को भेज दी गई। विधानसभा ने तुरंत सीट रिक्त क्यों घोषित की? जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के अनुसार किसी विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर वह अयोग्य हो जाता है। 2013 में सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस फैसले के बाद ऐसी स्थिति में सदस्यता तुरंत समाप्त हो जाती है। केवल अपील दायर करने से सदस्यता बहाल नहीं होती। इसके लिए उच्च अदालत को दोषसिद्धि या अयोग्यता पर रोक लगानी होती है। अब जानिए क्यों हारे नरोत्तम मिश्रा और ढाई साल में राजेंद्र भारती ने क्या किया? पिछला चुनाव: क्यों नहीं दोहराया गया ‘बसई चमत्कार’ 2023 में नरोत्तम मिश्रा की हार में बसई का शहरी क्षेत्र सबसे बड़ी वजह रहा। 13 राउंड में से वे सिर्फ 3 राउंड में बढ़त बना पाए। 10वें राउंड तक राजेंद्र भारती 8 हजार वोटों से आगे थे। बीजेपी को 2018 जैसा 'चमत्कार' दोहराने की उम्मीद थी, जब बसई से मिले वोटों ने मिश्रा को जीत दिलाई थी। 2023 में 11वें और 12वें राउंड में वे क्रमशः 866 और 379 वोटों से पीछे रहे। आखिरी राउंड में 735 वोटों की बढ़त भी नाकाफी रही और नरोत्तम 7,742 वोटों से चौथा चुनाव हार गए। जनता की राय: ओवर कॉन्फिडेंस और भीतरघात बना हार का कारण एडवोकेट इतरत अली जैदी के अनुसार विकास कार्य हुए, लेकिन मिश्रा के करीबी लोगों की कार्यशैली से जनता नाराज थी। वे 2022 के नगर पालिका चुनाव में कथित धांधली और स्थानीय समस्याओं के समाधान में देरी को हार की प्रमुख वजह मानते हैं। उदाहरण के तौर पर ‘लाला का तालाब’ की टूटी दीवार अब तक नहीं बनने का मुद्दा आज भी लोगों में नाराजगी पैदा करता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मिश्रा को संगठन के भीतर ही नुकसान पहुंचा। परसराम श्रीवास्तव और राजू त्यागी के अनुसार कार्यकर्ता जरूरत के मुताबिक जमीन पर सक्रिय नहीं रहे। वे अति आत्मविश्वास में रहे। बीजेपी कार्यालय प्रभारी रोहित दुबे भी मानते हैं कि कार्यकर्ता जीत को लेकर जरूरत … Read more

छत्तीसगढ़ में लोकतंत्र का महापर्व, निकाय और पंचायत उपचुनाव में वोटिंग शुरू

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम अनुसार राज्य में चल रहे नगरीय निकायों और त्रि-स्तरीय पंचायतों के आम-उपचुनाव के लिए आज मतदान किया जा रहा है. नगरीय निकायों में अध्यक्ष के 05 पदों और पार्षद के 71 पदों के निर्वाचन के लिए बनाए गए 96 मतदान केन्द्रों में कुल 31928 मतदाताओं (15720 पुरूष मतदाता, 16207 महिला मतदाता तथा 01 अन्य मतदाता) द्वारा अपने मताधिकार का प्रयोग किया जायेगा. वहीं त्रि-स्तरीय पंचायत में जनपद पंचायत सदस्य के 10, सरपंच के 34 और वार्ड पंच के 107 पदों के निर्वाचन के लिए बनाए गए 274 मतदान केन्द्रों में कुल 102797 मतदाताओं (51465 पुरूष मतदाता, 51331 महिला मतदाता तथा 01 अन्य मतदाता) द्वारा अपने मताधिकार का प्रयोग किया जायेगा. नगरीय निकायों में मतदान समय सुबह 8:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक और त्रि-स्तरीय पंचायतों में मतदान समय सुबह 7 बजे से शाम 3 बजे तक निर्धारित है.

पंचायत उपचुनाव को लेकर सुकमा में हलचल तेज, तीन सरपंच सीटों पर दांव-पेच शुरू

सुकमा. छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग की घोषणा के साथ सुकमा जिले में त्रिस्तरीय पंचायत उप-चुनाव की औपचारिक शुरुआत हो गई है। ग्रामीण राजनीति के इस अहम पड़ाव में अब चुनावी हलचल तेज हो चुकी है और पंचायत स्तर पर नई राजनीतिक समीकरण बनने लगे हैं। जिले में नगरीय निकायों में कोई पद रिक्त नहीं होने के कारण प्रशासन और राजनीतिक गतिविधियों का पूरा फोकस ग्रामीण पंचायत क्षेत्रों पर केंद्रित हो गया है। इस उप-चुनाव में जिले की तीन ग्राम पंचायतों में सरपंच पदों के लिए सीधा मुकाबला होगा। इनमें सुकमा जनपद पंचायत का गोलाबेकूर, छिंदगढ़ जनपद पंचायत का रोकेल और कोंटा जनपद पंचायत का सिलगेर शामिल हैं। इसके अलावा जिले में कुल 21 पंच पदों के लिए भी मतदान कराया जाएगा। इन सीटों पर चुनावी गतिविधियां तेज हो चुकी हैं और संभावित उम्मीदवार स्थानीय मुद्दों के साथ मतदाताओं तक पहुंचना शुरू कर चुके हैं। उप जिला निर्वाचन अधिकारी श्री शबाब खान के अनुसार चुनाव प्रक्रिया निर्धारित समय-सारणी के अनुसार संचालित की जा रही है। चुनाव अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है और नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब सबसे अहम चरण उम्मीदवारों की अंतिम सूची और चुनाव प्रचार का माना जा रहा है। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 21 मई को नाम वापसी की अंतिम तिथि और उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होगी। इसके बाद चुनावी मुकाबला पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा। 1 जून को मतदान होगा और 4 जून को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी तैयारियां की जा रही हैं। दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर यह चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने का नहीं बल्कि गांवों के विकास, नेतृत्व और भविष्य की प्राथमिकताओं को तय करने वाला चुनाव माना जा रहा है। आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल – 1. जिन पंचायतों में उप-चुनाव हो रहे हैं, वहां पूर्व में पद रिक्त होने के वास्तविक कारण क्या रहे और क्या उन कारणों पर कोई सार्वजनिक समीक्षा की गई? 2. क्या प्रशासन ने ऐसे क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत बढ़ाने और मतदाताओं की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कोई अलग रणनीति तैयार की है, खासकर दूरस्थ इलाकों में? 3. पंचायत चुनाव को स्थानीय विकास का आधार बताया जा रहा है, लेकिन क्या निर्वाचित प्रतिनिधियों के कामकाज की बाद में जवाबदेही तय करने के लिए कोई सार्वजनिक मूल्यांकन तंत्र मौजूद है?