रेलवे की कैटरिंग नीति में बड़ा बदलाव, स्टॉल आवंटन में सिफारिश की गुंजाइश होगी कम
अंबाला रेलवे बोर्ड ने नौ वर्ष पुरानी कैटरिंग नीति में बदलाव किया है। स्टेशन पर खाने-पीने का सामान या दूध का स्टाल लगाने वालों को ई-आक्शन से स्टाल लेने होंगे। इसमें किसी की सिफारिश या पुराने तरीके से आवंटन की गुंजाइश कम होगी। रेलवे बोर्ड ने कैटरिंग नीति-2017 में संशोधन करते हुए सभी श्रेणियों के स्टेशनों पर मिल्क स्टाल तथा ए-वन, ए, बी और सी श्रेणी के स्टेशनों पर जनरल माइनर यूनिट्स (जीएमयू) के आवंटन के लिए नई व्यवस्था लागू की है। सबसे बड़ा असर मिल्क स्टाल पर पड़ेगा। जोनल रेलवे को मिल्क स्टाल के लिए अनुबंध की विशेष शर्तें तैयार करनी होंगी। बोर्ड की ओर से 28 मई 2018 को जारी मानक बोली दस्तावेज को आधार बनाया जाएगा। चार श्रेणी के स्टेशनों पर जीएमयू भी ऑनलाइन ए-वन, ए, बी और सी श्रेणी के स्टेशनों की जनरल माइनर यूनिट्स के लिए भी ई-आक्शन जरूरी होगा। इन इकाइयों के लिए पात्रता मानदंड भी नए परिशिष्ट में निर्धारित हैं। इन इकाइयों के अनुबंध की विशेष शर्तें तैयार होंगी। इसके लिए 10 जनवरी 2018 को जारी जीएमयू के मानक बोली दस्तावेज को आधार बनाया जाएगा। यह है जमानत राशि के नियम ई-आक्शन में बोली दाताओं के लिए जमानत राशि के नियम भी स्पष्ट कर दिए हैं। वार्षिक बोली मूल्य का 10 % ईएमडी के रूप में जमा करना होगा। सफल बोलीदाता को कुल लाइसेंस शुल्क का 10 % सुरक्षा जमा के तौर पर देना होगा। ईएमडी को सुरक्षा जमा में समायोजित किया जाएगा। बची राशि ई-आक्शन के दो सप्ताह में ऑनलाइन जमा करनी होगी। यात्रियों के लिए क्यों अहम है बदलाव बदलाव का सीधा संबंध यात्रियों से भी है। रेलवे की मंशा है कि ठेके की प्रक्रिया पारदर्शी हो। इससे छोटे कारोबारियों को भी अवसर मिलेगा। क्रिस करेगा व्यवस्था में बदलाव रेलवे बोर्ड ने सेंटर फार रेलवे इंफार्मेशन सिस्टम्स (क्रिस) को ई-आक्शन माड्यूल में आवश्यक तकनीकी बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था को ऑनलाइन बोली प्रणाली में भी शामिल किया जाएगा।