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मुख्य सचिव बर्णवाल से मिलीं बाल अधिकार आयोग की अध्यक्ष डॉ. शर्मा

भोपाल  मुख्य सचिव  अशोक वर्णवाल से मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने बुधवार को भेंट कर प्रदेश में बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। मुलाकात के दौरान बच्चों के अधिकारों के संरक्षण, उनकी शिकायतों के त्वरित निराकरण और विद्यालयों में बच्चों के लिए बेहतर एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। डॉ. शर्मा ने मुख्य सचिव के समक्ष विद्यालयों में शौचालयों की स्थिति, माहवारी स्वच्छता प्रबंधन, बालिका गरिमा सूचकांक, स्पॉन्सरशिप तथा बाल संरक्षण से संबंधित विषयों को प्रमुखता से रखा। उन्होंने बताया कि बच्चों, विशेषकर बालिकाओं की गरिमा, सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए विभागीय स्तर पर प्रभावी समन्वय जरूरी है। बैठक में आयोग द्वारा प्रदेश स्तर पर बच्चों की शिकायतों के निराकरण के लिए शिविर आयोजित करने के संबंध में भी चर्चा हुई। ऐसे शिविरों के माध्यम से बच्चों और उनके अभिभावकों की समस्याओं को स्थानीय स्तर पर सुनकर उनके त्वरित समाधान की दिशा में कार्रवाई किए जाने पर विचार किया गया। आयोग की अध्यक्ष ने बाल संरक्षण से जुड़े विषयों पर शासन और आयोग के बीच बेहतर समन्वय के महत्व पर भी चर्चा की। बैठक में बच्चों के अधिकारों की रक्षा तथा उनके लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और अनुकूल वातावरण विकसित करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया गया।  

तिजारा सभापति चुनाव से पहले सियासी हलचल, पंचकूला में कांग्रेस पार्षद को रोका

भिवानी. तिजारा नगर परिषद के सभापति चुनाव से एक दिन पहले सियासी घमासान तेज हो गया है। हिमाचल प्रदेश में बाड़ेबंदी के बाद तिजारा लौट रहे कांग्रेस पार्षदों को रविवार रात करीब नौ बजे पंचकूला टोल प्लाजा पर पुलिस ने रोक लिया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पुलिस पार्षदों को अमरावती पुलिस चौकी ले गई और उनके वाहनों को भी थाने में खड़ा करा दिया। घटना की सूचना मिलते ही कांग्रेस नेता इमरान खान के नेतृत्व में नेता और पार्षद पिंजौर पुलिस थाने के बाहर एकत्र हो गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तिजारा विधायक बाबा बालकनाथ के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इमरान खान ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में ठहरे कांग्रेस के नवनिर्वाचित पार्षद रविवार को तिजारा के लिए रवाना हुए थे। पंचकूला जिले में टोल प्लाजा के पास पुलिस ने उनकी गाड़ियों को रोक लिया। कांग्रेस का आरोप है कि हथियारों से लैस पुलिसकर्मियों और बाउंसरों ने पार्षदों को अपने साथ अमरावती पुलिस चौकी पहुंचाया। कांग्रेस ने इसे सोमवार को होने वाले सभापति चुनाव में पार्षदों को मतदान से रोकने की कोशिश बताया है। सोमवार को तिजारा नगर परिषद सभापति पद के लिए मतदान होना है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले पार्षदों को रोके जाने की घटना ने तिजारा की सियासत गरमा दी है। कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए तत्काल पार्षदों को छोड़े जाने की मांग की है।

महिला आयोग का चेयरपर्सन पद खाली, मध्यप्रदेश में 26 हजार मामले पेंडिंग

भोपाल  मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग में करीब 26 हजार मामले पेंडिंग होने के बावजूद आयोग के अध्यक्ष का पद करीब 6 साल से खाली पड़ा है. राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि इस पद से संबंधित मामला अदालत में लंबित है और उन्होंने आश्वासन दिया कि वह जल्द ही इस पद को भरने के लिए कदम उठाएंगी.  मध्य प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर  सरकार ने हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र में कहा कि 1 जनवरी, 2024 से इस वर्ष 20 जून के बीच राज्य में बलात्कार के 10 हजार 840 मामले दर्ज किए गए, जबकि 21 हजार 175 महिलाएं एक महीने से अधिक समय तक लापता रहीं.  आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में हर दिन बलात्कार के लगभग 20 और महिलाओं के लापता होने के 38 मामले दर्ज किए जा रहे हैं. मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग सात सदस्यीय पैनल है, जिसमें छह सदस्य सरकार से बाहर के होते हैं और एक सरकार द्वारा नियुक्त होता है. इसके अध्यक्ष का पद जनवरी 2019 से रिक्त है.सागर की वर्तमान लोकसभा सदस्य लता वानखेड़े 1 जनवरी 2016 से 2019 तक इसकी अध्यक्ष थीं.  इसके बाद यह पद लगभग एक साल तक रिक्त रहा और 16 मार्च 2020 को कमलनाथ के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने कांग्रेस नेता शोभा ओझा को पैनल का अध्यक्ष नियुक्त किया. हालांकि, चार दिन बाद, 20 मार्च 2020 को कमलनाथ सरकार गिर गई. बाद में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली BJP सरकार ने आयोग के अध्यक्ष के रूप में ओझा की नियुक्ति रद्द कर दी. इसके बाद शोभा ने इस फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया. हाई कोर्ट ने 22 मई 2020 को अपने आदेश में पद के मामले में यथास्थिति बनाए रखने को कहा. ओझा ने बाद में जून 2022 में तत्कालीन भाजपा सरकार पर उन्हें काम नहीं करने देने और बाधाएं पैदा करने का आरोप लगाते हुए पद से इस्तीफा दे दिया. न्यूज एजेंसी से बात करते हुए मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा, "राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का पद निश्चित रूप से लंबे समय से खाली है और मैं इसे जल्द से जल्द भरने के लिए आवश्यक कदम उठाऊंगी."  उन्होंने यह भी कहा कि पद से संबंधित मामला अदालत में लंबित है, जो इस कदम में एक बाधा है. भूरिया ने स्वीकार किया कि पद खाली रहने के कारण कई शिकायतें लंबित हैं और फैसलों में देरी हो रही है. ओझा ने राज्य की भाजपा सरकार पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया, "इतने लंबे समय से खाली पड़ा यह महत्वपूर्ण पद दर्शाता है कि यह सरकार महिलाओं के प्रति कितनी असंवेदनशील है." उन्होंने दावा किया, "महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में मध्य प्रदेश शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है. आज भी महिलाएं मेरे पास शिकायत लेकर आती हैं और मैं व्यक्तिगत रूप से उनकी हर संभव मदद करती हूं."