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चैत्र नवरात्र पर मनेन्द्रगढ़ में भक्ति की बयार: प्रभात फेरी में उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर मनेन्द्रगढ़ में इन दिनों गहरा भक्तिमय माहौल देखने को मिल रहा है। जिला मुख्यालय में प्रतिदिन आयोजित हो रही प्रभात फेरी में सैकड़ों श्रद्धालु उत्साहपूर्वक भाग लेकर शहर की गलियों को भजन-कीर्तन से गुंजायमान कर रहे हैं। प्रभात फेरी का शुभारंभ राम मंदिर से होता है, जहां से श्रद्धालु "जय राम" के जयघोष के साथ शहर के विभिन्न मोहल्लों में भ्रमण करते हैं। हर दिन अलग-अलग क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली इस फेरी के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को जुड़ने का अवसर मिल रहा है। जगह-जगह हो रहा भव्य स्वागत प्रभात फेरी के दौरान शहर के अनेक स्थानों पर स्थानीय नागरिक श्रद्धालुओं का फूलों की वर्षा कर स्वागत करते हैं। साथ ही जलपान की भी व्यवस्था की जाती है, जिससे पूरे आयोजन में उत्सव जैसा माहौल बना रहता है। इस धार्मिक आयोजन में युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। प्रभात फेरी का समापन   प्रतिदिन राम मंदिर में होता है, जहां विधिवत पूजा-अर्चना और आरती संपन्न होती है। इसके पश्चात प्रसाद वितरण किया जाता है तथा स्थानीय कलाकारों द्वारा भजन-कीर्तन की आकर्षक प्रस्तुतियां दी जाती हैं। राम मंदिर के सचिव रघुनाथ पोद्दार ने बताया कि आयोजन समिति द्वारा प्रभात फेरी को अनुशासित और सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को भी सुदृढ़ कर रहा।

सप्तमी से नवमी तिथि (25,26 व 27 मार्च) तक प्रदेश भर में वृहद आयोजन कराएगी योगी सरकार

चैत्र नवरात्रि पर देवी मंदिरों-शक्तिपीठों में गूंजेंगे गीत-भजन सप्तमी से नवमी तिथि (25,26 व 27 मार्च) तक प्रदेश भर में वृहद आयोजन कराएगी योगी सरकार  देवी गायन-दुर्गा सप्तशती पाठ, शक्ति आराधना, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का होगा आयोजन, कलाकारों का किया गया चयन  महिला सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए योगी सरकार चला रही ‘मिशन शक्ति’  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चैत्र नवरात्रि की सप्तमी, अष्टमी व नवमी तिथि (25,26 व 27 मार्च) को देवी मंदिरों-शक्तिपीठों में देवीगीत, भजन, दुर्गा सप्तशती पाठ, शक्ति आराधना, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। संस्कृति विभाग इसके भव्य आयोजन की तैयारी में जुट गया है। आयोजन के लिए कलाकारों का चयन कर लिया गया है। जनपदों में स्थानीय प्रशासन के समन्वय से यह आयोजन होगा। बता दें कि प्रदेश में महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन के लिए विशेष अभियान "मिशन शक्ति" चलाया जा रहा है। इसी क्रम में संस्कृति विभाग द्वारा महिलाओं व बालिकाओं की सहभागिता के साथ प्रदेश में अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तावित किए गये हैं। इन शक्तिपीठों- देवी मंदिरों में होंगे आयोजन  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर संस्कृति विभाग की तरफ से प्रदेश के देवी मंदिर व शक्तिपीठों में इसकी तैयारी कर ली गई है। सप्तमी, अष्टमी व नवमी तिथि पर मां विंध्यवासिनी देवी (विंध्याचल मीरजापुर), ज्वाला देवी सोनभद्र, सीता समाहित स्थल भदोही, अलोपी देवी प्रयागराज, कड़ावासिनी कौशांबी, पाटेश्वरी देवी (देवीपाटन-बलरामपुर), ललिता देवी (नैमिषारण्य-सीतापुर), शाकुम्भरी देवी सहारनपुर, कात्यायनी देवी मथुरा, मां शीतला चौकिया धाम जौनपुर, बेल्हा देवी प्रतापगढ़, चंडिका देवी उन्नाव, विशालाक्षी देवी वाराणसी, देवकाली मंदिर औरैया, मां तरकुलहा देवी धाम गोरखपुर, मां शीतला स्थल मऊ, ललिता देवी प्रयागराज, मां शिवानी देवी चित्रकूट, गायत्री शक्तिपीठ हमीरपुर, बैरागढ़ माता जालौन, कुष्मांडा देवी घाटमपुर कानपुर देहात, शीतला माता मंदिर मैनपुरी, चामुंडा माता मंदिर फिरोजाबाद, बीहड़ माता मंदिर फिरोजाबाद, चंद्रिका देवी मंदिर व संकटा देवी मंदिर लखनऊ समेत अन्य देवी मंदिरों- शक्तिपीठों में आयोजन होंगे।  जनसहभागिता से होंगे आयोजन, प्रशासन के सहयोग से तय समय पर पूरी कर ली जाएं व्यवस्थाएं   योगी सरकार ने निर्देश दिया है कि इस आध्यात्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम में आमजन की सहभागिता विशेष रूप से सुनिश्चित हो। इससे जुड़ी व्यवस्थाएं स्थानीय स्तर पर प्रशासन, पुलिस, नगर निगम आदि के माध्यम से ससमय पूरी कर ली जाएं। प्रदेश में महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान "मिशन शक्ति" से भी इसे जोड़ा जाए। देवी मंदिरों, शक्तिपीठों में लोक कलाकारों, भजन मंडलियों, कीर्तन मंडलियों का चयन भी किया जा चुका है।   साफ-सफाई व श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष जोर  देवीपाटन मंदिर बलरामपुर, शाकम्भरी देवी मंदिर सहारनपुर, विंध्यवासिनी देवी धाम मीरजापुर समेत सभी देवी मंदिरों व शक्तिपीठों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित होने चाहिए। कतारबद्ध श्रद्धालुओं को तेज धूप में खड़े होने में समस्या न हो। सभी देवालयों में पेयजल व छाजन की भी पुख्ता व्यवस्था हो। रही। योगी सरकार ने संस्कृति विभाग को निर्देश दिया है कि जनपदों में स्थानीय प्रशासन के सहयोग से सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी कर ली जाएं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रत्येक आयोजन स्थल पर साफ-सफाई, पेयजल, सुरक्षा, ध्वनि, प्रकाश एवं दरी-बिछावन आदि की व्यवस्था सुनिश्चित करा ली जाए। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सफाई कर्मी भी लगाकर स्वच्छता रखी जाए।

चैत्र नवरात्रि की शुरुआत: घटस्थापना का मुहूर्त कल सुबह, समय नोट कर लें

इंदौर हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र बहुत ही पवित्र त्योहार माना जाता है. यह नौ दिनों तक चलने वाला पर्व मां दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित होता है. इसी दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी होती है. यह त्योहार हमें अच्छाई की बुराई पर जीत का संदेश भी देता है. इन 9 दिनों में भक्त मां दुर्गा के लिए व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और मां दुर्गा को भोग लगाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।  द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होगी और 27 मार्च, राम नवमी के दिन समाप्त होगी. इन 9 दिनों में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है और हर दिन का अपना एक खास रंग और भोग भी होता है. तो आइए अब पंडित प्रवीण मिश्र से जानते हैं कि चैत्र नवरात्र पर कल कितने बजे से घटस्थापना का मुहूर्त शुरू होगा और किस विधि के साथ कलश को स्थापित किया जाएगा. इन दोनों बातों के अलावा, चैत्र नवरात्र की पूजा की पूजन सामग्री भी जानेंगे।  चैत्र नवरात्र 2026 घटस्थापना का मुहूर्त  चैत्र माह की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च यानी कल सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 52 मिनट पर होगा। इसी तिथि के चलते चैत्र नवरात्र की कलशस्थापना का पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. दूसरा मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त रहेगा, जो दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। नवरात्र पर कैसे होगी कलश स्थापना? नवरात्र की पूजा शुरू करने से पहले स्नान करें. फिर, मां दुर्गा के स्वागत के लिए घर व पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें. इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और पास में पानी से भरा कलश रखकर उसके ऊपर नारियल रखें. शुभ मुहूर्त में घट स्थापना या कलश स्थापना करें. फिर मां दुर्गा के आगे देसी घी का दीपक जलाएं, मां को फूलों की माला चढ़ाएं और फल, सूखे मेवे, मीठा पान, सुपारी, लौंग व इलायची का भोग लगाएं। इसके बाद, मां दुर्गा को कम से कम सात श्रृंगार की चीजें अर्पित करें और उनके मंत्रों का जाप करके आह्वान करें. फिर, दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें. शाम के समय भी रोजाना मां की पूजा करें और भोग लगाएं. भोग अर्पित करने के बाद भक्त सात्विक भोजन करके अपना व्रत खोल सकते हैं। घटस्थापना की विशेष सामग्री (Chaitra Navratri 2026 Pujan Samagri)  चैत्र नवरात्र की घटस्थापना कुछ आवश्यक सामग्री के बिना अधूरी मानी जाती है. जिसमें लकड़ी की चौकी, मिट्टी का एक बर्तन, मिट्टी का कलश, पवित्र स्थान की मिट्टी, 7 प्रकार के अनाज, गंगाजल, कलावा या मौली, सुपारी, आम या अशोक के पत्ते, अक्षत (साबुत चावल), जटा वाला नारियल, लाल कपड़ा, पुष्प और पुष्पमाला। चैत्र नवरात्र के 9 दिन पहनें ये सभी शुभ रंग पहला दिन 19 मार्च 2026 पीला मां शैलपुत्री दूसरा दिन 20 मार्च 2026 हरा मां ब्रह्मचारिणी तीसरा दिन 21 मार्च 2026 ग्रे (धूसर) मां चंद्रघंटा चौथा दिन 22 मार्च 2026 नारंगी मां कूष्मांडा पांचवा दिन 23 मार्च 2026 सफेद मां स्कंदमाता छठा दिन 24 मार्च 2026 लाल मां कात्यायनी सातवां दिन 25 मार्च 2026 रॉयल ब्लू मां कालरात्रि आठवां दिन 26 मार्च 2026 गुलाबी मां महागौरी नौवां दिन 27 मार्च 2026 बैंगनी मां सिद्धिदात्री

Chaitra Navratri 2026: अमावस्या के असर में होगा चैत्र नवरात्र, जानें कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त

 इस साल चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार के दिन से हो रही है. शक्ति की उपासना के यह दिन बहुत ही शुभ माने जाते हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार, नवरात्र की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है और यह पर्व लगातार नौ दिनों तक मां दुर्गा की भक्ति और साधना के लिए समर्पित रहता है. इस साल का चैत्र नवरात्र कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय बाद एक अनोखा संयोग बन रहा है. दरअसल, इस दिन चैत्र नवरात्र के घटस्थापना वाले दिन पर अमावस्या का संयोग भी बन रहा है। चैत्र नवरात्र पर अमावस्या का संयोग चैत्र नवरात्र पर चैत्र अमावस्या का संयोग करीब 72 साल बाद बन रहा है. इसलिए इस बार का पर्व धार्मिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि प्रतिपदा तिथि थोड़ी देर से शुरू होगी, फिर भी नवरात्र पूरे नौ दिनों तक ही मनाए जाएंगे। द्रिक पंचांग के मुताबिक, इस बार चैत्र अमावस्या की तिथि 18 मार्च की सुबह 8 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 19 मार्च की सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी. इसके बाद प्रतिपदा तिथि का आरंभ होगा, जिससे नवरात्र की शुरुआत मानी जाएगी. खास बात यह है कि अमावस्या और प्रतिपदा दोनों तिथियां सूर्योदय से मान्य होती हैं. इसी कारण इस बार अमावस्या के स्नान-दान और नवरात्र की घटस्थापना एक ही दिन यानी 19 मार्च को की जाएगी। चैत्र अमावस्या पर स्नान-दान का मुहूर्त  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र अमावस्या के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है. 19 मार्च को स्नान-दान के लिए सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा. परंपरा के अनुसार, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी या घर पर स्नान कर दान-पुण्य करने की परंपरा है। चैत्र नवरात्र 2026 घटस्थापना का मुहूर्त नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का भी विशेष महत्व होता है. 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक कलश स्थापना का शुभ समय रहेगा. यदि इस समय में स्थापना न हो पाए तो दोपहर में अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक भी कलश स्थापना की जा सकती है। इन दुर्लभ संयोगों में मनाई जाएगी नवरात्र इस साल नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च (गुरुवार) से होगी और इसका समापन 27 मार्च को होगा. पहले दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति भी काफी शुभ मानी जा रही है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस दिन शुक्ल योग, ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्धि योग एक साथ बन रहे हैं. इन तीनों योगों को अत्यंत शुभ माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि इस समय मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।  

नवरात्रि से पहले कर लें ये जरूरी सफाई: इन 5 चीजों को घर में रखने से रूठ जाती हैं मां दुर्गा

चैत्र नवरात्रि केवल उपवास और पूजा-पाठ का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने अंतर्मन और परिवेश को शुद्ध करने का एक पावन अवसर भी है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति मां दुर्गा स्वयं धरती पर पधारती हैं और अपने भक्तों के घर में वास करती हैं। माता रानी के स्वागत के लिए केवल मन की शुद्धि ही काफी नहीं है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारे घर में रखी कुछ चीजें नकारात्मक ऊर्जा का संचय करती हैं, जो सुख-समृद्धि के मार्ग में अदृश्य बाधाएं उत्पन्न कर सकती हैं। यदि घर में वास्तु दोष हो या भारी मात्रा में नकारात्मक ऊर्जा जमा हो, तो कठिन पूजा-अर्चना के बाद भी वह शुभ फल प्राप्त नहीं हो पाता जिसकी हम कामना करते हैं। 19 मार्च 2026 से शुरू हो रहे नव-संवत्सर और चैत्र नवरात्रि से पहले यह अत्यंत आवश्यक है कि हम अपने आशियाने को उन वस्तुओं से मुक्त करें जो दरिद्रता और अशांति को निमंत्रण देती हैं। घर के कोनों में छिपा कबाड़ या टूटी-फूटी वस्तुएं न केवल धन के प्रवाह को रोकती हैं, बल्कि परिवार के सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालती हैं। तो आइए जानते हैं, वास्तु के उन 5 खास नियमों के बारे में जिन्हें अपनाकर आप नवरात्रि से पहले अपने घर का कायाकल्प कर सकते हैं। खंडित मूर्तियां या फटे हुए धार्मिक चित्र अक्सर हम अनजाने में घर के मंदिर में ऐसी मूर्तियां रखे रहते हैं जो कहीं से खंडित होती हैं या देवी-देवताओं के चित्र फटे हुए होते हैं। वास्तु के अनुसार, ऐसी मूर्तियां घर में दुख और अशांति का कारण बनती हैं। नवरात्रि शुरू होने से पहले इन्हें पूरे सम्मान के साथ किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें या पीपल के पेड़ के नीचे रख आएं। खराब या बंद पड़ी घड़ियां वास्तु में रुकी हुई घड़ी को 'ठहरे हुए भाग्य' का प्रतीक माना जाता है। बंद पड़ी घड़ियां घर की प्रगति को रोकती हैं और नकारात्मक ऊर्जा पैदा करती हैं। यदि आपके घर में कोई ऐसी घड़ी है जो काफी समय से बंद है या टूटी हुई है, तो उसे तुरंत ठीक कराएं या घर से बाहर निकाल दें। टूटे हुए कांच और बर्तन टूटे हुए शीशे या चटके हुए बर्तन घर में दरिद्रता (गरीबी) को न्योता देते हैं। नवरात्रि के दौरान माता का भोग लगाने के लिए साफ और अखंडित बर्तनों का ही उपयोग होना चाहिए। इसलिए, रसोईघर या श्रृंगार दान में रखे टूटे हुए कांच के सामान को हटाना ही श्रेयस्कर है। फटे-पुराने जूते और चप्पल वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार या अलमारी के नीचे रखे फटे-पुराने जूते-चप्पल नकारात्मकता का सबसे बड़ा स्रोत होते हैं। यह शनि दोष का भी कारण बन सकते हैं। नवरात्रि से पहले घर के कोनों की सफाई करें और जो जूते उपयोग में नहीं हैं, उन्हें हटा दें ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे। कबाड़ और बेकार का सामान घर की छत या स्टोर रूम में रखा पुराना कबाड़, जंग लगा लोहा या रद्दी कागज मानसिक तनाव का कारण बनते हैं। माता अंबे की कृपा पाने के लिए घर के वातावरण को हल्का और खुला रखना जरूरी है। कबाड़ हटाने से घर में 'प्राण ऊर्जा' का संचार बढ़ता है और आर्थिक तंगी दूर होती है।