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चारधाम यात्रा अपडेट: यात्रियों से रजिस्ट्रेशन शुल्क लेने पर कमेटी की सिफारिश

देहरादून उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चार धाम यात्रा (Char Dham Yatra) से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. राज्य सरकार चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से रजिस्ट्रेशन शुल्क लेने पर विचार कर रही है. इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसले से पहले डिटेल्‍ड अध्ययन के लिए कमेटी गठित कर दी गई है. गढ़वाल मंडल के कमिश्नर विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में बनी यह कमेटी अलग-अलग पक्षों से राय लेकर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी. कमेटी यह तय करेगी कि शुल्क लिया जाए या नहीं और अगर लिया जाए तो उसकी रकम कितनी हो. आखिरी फैसला राज्य सरकार द्वारा लिया जाएगा. स्टेकहोल्डर्स से हुई विस्तृत बातचीत दरअसल, पिछले कुछ दिनों से इस विषय पर मंथन चल रहा था. चारधाम यात्रा से जुड़े विभिन्न स्टेकहोल्डर्स जैसे होटल व्यवसायी, तीर्थ पुरोहित, स्थानीय व्यापारी और अन्य संबंधित पक्षों से अलग-अलग चरणों में बातचीत की गई. इन्हीं चर्चाओं के बाद रजिस्ट्रेशन शुल्क के प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से हरी झंडी मिली है. क्या है शुल्क लगाने के पीछे तर्क? सरकार की ओर से जो तर्क सामने आया है उसके मुताबिक, यात्रा के दौरान अवांछित तत्वों पर निगरानी मजबूत की जा सके. केवल गंभीर और वास्तविक श्रद्धालु ही यात्रा के लिए पंजीकरण कराएं. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को ज्‍यादा सुव्यवस्थित और जिम्मेदार बनाया जा सके. भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी किया जा सके. इस मकसद के साथ शुल्‍क लगाने के बारे में विचार किया जा रहा है. हर वर्ष लाखों श्रद्धालु चारधाम यात्रा में शामिल होते हैं. अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी होने के बाद प्रशासन यात्रा प्रबंधन को और बेहतर बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. कमेटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेगी. इसके बाद ही यह तय होगा कि रजिस्ट्रेशन शुल्क लागू किया जाएगा या नहीं और उसकी दर क्या होगी?

Gangotri और Yamunotri बंद होने वाली हैं, जानें आखिर कब समाप्त होगी चारधाम यात्रा

उत्तराखंड  उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अब अपने अंतिम चरण में है। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के शीतकाल के लिए कपाट बंद होने की तिथियां पंचांग के अनुसार निर्धारित कर दी गई हैं। गंगोत्री धाम: 22 अक्तूबर को बंद होंगे कपाट गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए 22 अक्तूबर को बंद किए जाएंगे। कपाट अन्नकूट पर्व पर, सुबह 11 बजकर 36 मिनट पर अभिजीत मुहूर्त में विधिविधान के साथ बंद होंगे।  कपाट बंद होने के बाद, मां गंगा की भोगमूर्ति को विग्रह डोली में आर्मी बैंड और स्थानीय वाद्य यंत्रों के साथ उनके शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव के लिए रवाना किया जाएगा। डोली 22 अक्तूबर की रात्रि में मार्कडेंय मंदिर में विश्राम करेगी और अगले दिन, 23 अक्तूबर को दोपहर में मुखबा गांव पहुंचेगी, जहां गंगा मंदिर में मूर्ति स्थापित की जाएगी।  गंगोत्री धाम मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि कपाट बंद करने की तिथि और मूहूर्त नवरात्र के शुभ अवसर पर पंचांग के अनुसार निकाले गए हैं। यमुनोत्री धाम: भैयादूज पर 23 अक्तूबर को बंद होंगे कपाट यमुनोत्री धाम के कपाट भैयादूज के शुभ अवसर पर 23 अक्तूबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। यमुनोत्री धाम मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरूषोत्तम उनियाल ने बताया कि कपाट बंद करने का मूहूर्त दो अक्तूबर को विजयदशमी के पर्व पर पंचांग के अनुसार निकाला जाएगा। इन तिथियों की घोषणा के साथ ही, प्रशासन और मंदिर समितियों ने यात्रा के अंतिम चरण की तैयारियों को तेज कर दिया है। लाखों तीर्थयात्रियों की आस्था के केंद्र दोनों धामों के कपाट बंद होने के बाद, अगले छह माह तक श्रद्धालु मां गंगा और मां यमुना के दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास स्थलों पर कर सकेंगे।