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कूनो में चीतों की बढ़ती संख्या, गांधीसागर और नौरादेही के जंगल बने नए घर, आठ बाड़े तैयार, जल्द शिफ्ट होंगे चीते

श्योपुर  श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क से चीतों को अब नौरादेही अभयारण्य में भी बसाने की तैयारी है। फिलहाल वहां बाड़ा निर्माण चल रहा है। दो माह में काम पूरा होने की संभावना है। यही वजह है कि जुलाई में चार चीते शिफ्ट किए जा सकते हैं। दूसरी ओर प्रदेश में चीतों का दूसरा घर गांधीसागर अभयारण्य (मंदसौर) में भी दो और चीते भेजने का प्लान है। शिफ्टिंग जून में संभव है। गांधीसागर में शिफ्ट चीतों को सड़क मार्ग से ले जाया गया था। बोत्सवाना और भारतीय चीतों में से जाएंगे कूनो में कुल 54 चीते हैं। इनमें 37 भारतीय हैं। बताया जा रहा है कि जिन चीतों को शिफ्ट किया जाना है, उनमें बोत्सवाना के नौ में से 4 और 2 भारतीय चीते होंगे। इनमें आशा के दोनों शावक केएपी-2 और केएपी-3 हो सकते हैं। ये वर्तमान में राजस्थान की सीमा में घूम रहे हैं। 440 हेक्टेयर में आठ बाड़े तैयार सागर जिले के नौरादेही अभयारण्य (वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व) में चीतों के लिए मुहली, सिंगपुर और झापन रेंज के लगभग 440 हेक्टेयर में आठ विशेष बाड़े बनाए जा रहे हैं। 8-10 फीट ऊंची फेंसिंग की जा रही है, जिसमें सोलर इलेिट्रक फेंसिंग का उपयोग किया जा रहा है। चीतों को पहले चार अलग-अलग छोटे बाड़ों में क्वारंटीन रखा जाएगा, उसके बाद जंगल में छोड़ा जाएगा। गांधीसागर में 64 वर्ग किमी का बाड़ा गांधीसागर अभयारण्य में 64 वर्ग किमी (लगभग 6400 हेक्टेयर) का बाड़ा है। तीन चीते 2025 में शिफ्ट किए गए थे। कब जाएंगे कितने जाएंगे यह तय होना बाकी कितने चीते कब जाएंगे ये तय होना बाकी है। नौरादेही में बाड़ा निर्माण चल रहा है। -उत्तम कुमार शर्मा, डायरेक्टर, चीता प्रोजेक्ट, कूनो नेशनल पार्क

कूनो में चीतों का सफल प्रजनन, 4 मादा चीतों ने 3 महीने में दी संतान, जंगल में प्रजनन को बताया टास्क

श्योपुर मध्यप्रदेश का कूनो नेशनल पार्क अब चीतों का केवल आश्रय स्थल नहीं रहा, बल्कि एक सफल चीता प्रजनन केन्द्र के रूप में दुनिया भर में अलग पहचान बना चुका है। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते यहां की जलवायु और पारिस्थितिकी तंत्र में पूरी तरह से रच बस गये हैं। कूनो की धरती अब आये दिन नन्हे शावकों की किलकारियों से गूंज रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का लुप्त हो चुके चीतों के देश में फिर से बसाने का सपना ‘प्रोजेक्ट चीता’ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में केन्द्र-राज्य के विभागों के समन्वय और प्रबंधन से वन्य-जीव संरक्षण के क्षेत्र में नये इतिहास लिखे जाने के साथ साकार हो रहा है। चुनौतियों पर विजय के बाद मिली ऐतिहासिक सफलता प्रोजेक्ट चीता का प्रारंभिक चरण शुरुआती चुनौतियों से भरा हुआ था, लेकिन कूनो की आबोहवा और विभाग के विशेषज्ञों के कुशल प्रबंधन ने सभी चुनौतियों से पार पाते हुए वन्य-जीव संरक्षण की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लुप्त प्रजाति की पुनर्स्थापना का सफलतम पर्याय बना दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां की भौगोलिक परिस्थितियां और पर्याप्त शिकार चीतों के प्रजनन के लिए बेहद अनुकूल सिद्ध हुए हैं। मादा चीतों द्वारा लगातार शावकों को जन्म देना इस बात का प्रमाण है कि वे तनावमुक्त हैं और कूनो को अपना प्राकृतिक आवास मान चुकी हैं। क्यों बढ़ा कूनो पर दबाव?  कूनो में लगातार बढ़ रही चीतों की आबादी के कारण संसाधनों पर असर पड़ रहा है। वन क्षेत्र की सीमित क्षमता के चलते सभी चीतों को एक ही स्थान पर रखना चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा संख्या होने पर भोजन और क्षेत्र को लेकर संघर्ष बढ़ सकता है। इसके अलावा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी जरूरी होता है। इन्हीं कारणों से चीतों को दूसरे उपयुक्त स्थानों पर स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा रही है। वन विभाग इस दिशा में वैज्ञानिक तरीके से निर्णय ले रहा है। ताकि चीतों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।   गांधी सागर बन रहा नया ठिकाना  गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के नए आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह क्षेत्र भौगोलिक और पर्यावरणीय दृष्टि से चीतों के लिए उपयुक्त माना गया है। फिलहाल यहां तीन चीतों को पहले ही बसाया जा चुका है। आने वाले समय में और चीतों को यहां शिफ्ट करने की योजना है। इससे कूनो पर दबाव कम होगा और चीतों को नया क्षेत्र मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग स्थानों पर आबादी फैलाने से उनकी संख्या सुरक्षित रूप से बढ़ेगी। यह रणनीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनाई जाती है। गांधी सागर को चीता हब के रूप में तैयार किया जा रहा है। भारत बना वन्यजीव संरक्षण का उदाहरण  ‘प्रोजेक्ट चीता’ की सफलता ने भारत को दुनिया के सामने एक उदाहरण के रूप में स्थापित किया है। यह पहल दिखाती है कि सही योजना और दृढ़ इच्छाशक्ति से विलुप्त प्रजातियों को फिर से बसाया जा सकता है। कूनो अब केवल एक राष्ट्रीय पार्क नहीं, बल्कि एक ग्लोबल ब्रीडिंग सेंटर के रूप में उभर रहा है। दुनियाभर के वन्यजीव विशेषज्ञ इस परियोजना पर नजर बनाए हुए हैं। यह उपलब्धि भारत के संरक्षण प्रयासों की बड़ी जीत मानी जा रही है। साथ ही यह अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।   बढ़ता कुनबा : प्रोजेक्ट चीता की नई उड़ान              नए शावकों का जन्म: अप्रैल 2026 में मादा चीता गामिनी ने 3 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इससे पहले फरवरी-मार्च 2026 में ज्वाला, निर्वा और आशा भी शावकों को जन्म दे चुकी हैं।              कुल संख्या: कूनो में चीतों की संख्या अब 57 हो चुकी है।              भारत में जन्मे शावक: 27 से अधिक शावकों का जन्म भारत में ही हुआ है, जो इस परियोजना की सबसे बड़ी सफलता है।              विदेशी सहयोग: फरवरी 2026 में बोत्सवाना से 8-9 नए चीते लाए गए, जिससे परियोजना को और मजबूती मिली। पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट कूनो का ब्रीडिंग सेंटर बनना केवल पर्यावरणीय उपलब्धि नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। चीतों की बढ़ती संख्या के साथ यहां वाइल्डलाइफ टूरिज्म की संभावनाएं कई गुना बढ़ गई हैं। इससे श्योपुर और आसपास के जिलों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और स्थानीय युवाओं के लिए नई संभावनाएं खुल रही हैं। प्रोजेक्ट चीता-एक ऐतिहासिक यात्रा              17 सितंबर 2022: प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नामीबिया से आए 8 चीतों को कूनो में छोड़ा— यह दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय बिग प्रेडेटर स्थानांतरण पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट था।              फरवरी 2023: दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते आए।              मार्च 2023: ज्वाला ने 70 वर्षों बाद भारत में पहले शावकों को जन्म दिया।              2024: आशा और गामिनी जैसी मादा चीतों ने नई पीढ़ी को जन्म दिया, जिसमें गामिनी ने एक साथ 5 शावकों का रिकॉर्ड बनाया।              2025-26: नई खेप के साथ प्रोजेक्ट का विस्तार और शावकों की संख्या में निरंतर वृद्धि होती गई। नई पीढ़ी और भविष्य की दिशा कूनो में अब दूसरी पीढ़ी के चीते भी विकसित हो रहे हैं। मुखी जैसी भारत में जन्मी मादा चीता का शावकों को जन्म देना पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट में जैनेटिक ब्रीडिंग के रूप में मील का पत्थर माना जा रहा है। वन विभाग अब शावकों की पहचान नामों के बजाय कोड (जैसे KP-1, KP-2) से कर रहा है, ताकि उनकी वंशावली को वैज्ञानिक तरीके से ट्रैक किया जा सके। आगे की योजना-दूसरा घर तैयार कूनो पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अब प्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के दूसरे घर के रूप में विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इससे प्रोजेक्ट चीता को और विस्तार मिलेगा और भारत में चीतों की स्थायी वापसी सुनिश्चित होगी। कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बढ़ती संख्या और सफल प्रजनन ने यह साबित कर दिया है कि भारत में चीतों की वापसी का सपना अब साकार हो रहा है। यह … Read more

चीता संरक्षण के लिए मंदसौर में ऐतिहासिक कदम, प्रभास और पावक ने हासिल किया बड़ा मील का पत्थर

मंदसौर भारत के महत्त्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट चीता' की सफलता की कहानी में एक और ऐतिहासिक पन्ना जुड़ गया है। दक्षिण अफ्रीका की धरती से आए दो चीता भाई प्रभास और पावक ने मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में अपना एक साल यानी 365 दिन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। तारीखों की नजर से देखें 3 साल का गौरवशाली सफर ​इन दोनों भाइयों का भारत में अब तक का सफर किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं रहा है: -​18 फरवरी 2023: दक्षिण अफ्रीका से उड़ान भरकर भारत की मिट्टी पर कदम रखा। -​2 साल (कूनो नेशनल पार्क): भारत की जलवायु, शिकार और वातावरण को समझने के लिए कूनो में लंबा समय बिताया। -​1 साल (गांधीसागर): आज गांधीसागर में इनका एक साल पूरा होना इस बात पर मुहर लगाता है कि यह अभयारण्य चीतों के लिए एक आदर्श और सुरक्षित घर है। भाईचारे और शिकार का अनूठा तालमेल ​​इनकी साझेदारी ही गांधीसागर में इनकी सफलता का सबसे बड़ा राज है। फील्ड टीम की निगरानी में इनके गठबंधन की कुछ ऐसी बारीकियाँ सामने आई हैं जो हैरान कर देने वाली हैं। -​शिकार की रणनीति: जब ये शिकार पर निकलते हैं तो दोनों के बीच एक मूक संवाद होता है। एक भाई शिकार का पीछा कर उसे थकाता है तो दूसरा सटीक घात लगाकर उसे दबोच लेता है। -​सुरक्षा का पहरा: भोजन करते समय ये कभी लापरवाह नहीं होते। जब एक शिकार खाता है, तो दूसरा मुस्तैद होकर चारों तरफ पहरा देता है। आराम करते समय भी दोनों अपनी पीठ जोड़कर विपरीत दिशाओं में मुँह करके बैठते हैं, ताकि 360-डिग्री सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। -संकट में साथ: टीम ने देखा है कि अगर एक भाई सुस्त महसूस करता है, तो दूसरा उसे छोड़कर ओझल नहीं होता। वह उसके इर्द-गिर्द ही रहता है, मानो उसे हिम्मत दे रहा हो। एलोग्रूमिंग (सामाजिक साफ़-सफ़ाई) उद्देश्य: यह सामाजिक संबंधों को मज़बूत करता है, विशेष रूप से नर चीतों के समूहों (भाई या करीबी नर साथी) और कभी-कभी माँ और शावकों के बीच। संदर्भ: यह अक्सर भोजन के बाद देखा जाता है, जिससे चेहरे जैसे कठिन स्थानों से खून और गंदगी को हटाने में मदद मिलती है। व्यवहार: इसमें दूसरे चीते को चाटना, कुतरना और रगड़ना शामिल है, जो एक आरामदायक और जुड़ाव भरा अनुभव हो सकता है। जुड़ी हुई आवाज़े: इन ग्रूमिंग सत्रों के दौरान अक्सर उनके 'पुर्राने' (Purring) की आवाज़ सुनी जा सकती है। ऑटोग्रूमिंग (स्वयं की साफ़-सफ़ाई) उद्देश्य: चीते अपने शरीर को साफ़ करने के लिए अपनी जीभ का उपयोग करते हैं, जो गंदगी और परजीवियों को हटाने और उनके फर (रौएं) के रखरखाव के लिए महत्वपूर्ण है। प्रक्रिया: उनकी जीभ पर विशेष 'केराटिनाइज्ड पैपिला' (छोटी, खुरदरी, कंघी जैसी संरचनाएं) होती हैं, जो एक स्क्रबर की तरह काम करती हैं और गंदगी व ढीले बालों को हटाने में मदद करती हैं। बेहद जरूरी: यह ग्रूमिंग व्यवहार चीतों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और उनके समूहों में आपसी एकता बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक हैं।

कूनो में बोत्सवाना के चीते हुए फिट, 6 का क्वारंटाइन समाप्त, बड़े बाड़ों में पहली छलांग

 श्योपुर मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट के तीसरे चरण में बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों में से 6 चीतों का क्वारंटाइन समय पूरा होगया. जिसके बाद उन्हें बड़े बाड़ों में शिफ्ट कर दिया गया है. कूनो प्रबंधन ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि एक महीने बाद सभी चीते फिट है और कूनो के नए माहौल में रच बस रहे है।  पिछले दिनों 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से कुल 9 चीते कूनो पहुंचे थे, जिनमें 6 मादा और तीन नर शामिल थे. नियम के मुताबिक, इन सभी को अलग रखा गया था. अब सेहत की जांच और अफसरों की मंजूरी के बाद,चार मादा और दो नर चीतों को बड़े बाड़ों में छोड़ दिया गया है।  वन विभाग के अफसरों के मुताबिक बचे हुए तीन चीतों को भी बहुत जल्द बड़े बाड़ों में शिफ्ट कर दिया जाएगा. इसकी तैयारी चल रही है और यह काम भी जल्द ही पूरा हो जाएगा।  अधिकारियों के अनुसार,बोत्सवाना से आए सभी नौ चीते एकदम फिट हैं और उन्हें कूनो का वातावरण रास आ रहा है. भारत से बरसों पहले गायब हो चुके चीतों को वापस लाने की दिशा में इस प्रोजेक्ट को बहुत अहम माना जा रहा है।  चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने 'आजतक' को फोन कॉल पर बताया कि इन सभी की सेहत और रहने-सहने के ढंग पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है, ताकि आगे चलकर इन्हें सुरक्षित तरीके से खुले जंगल में छोड़ा जा सके।  यहां बता दें कि वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में कुल 50 चीते हो गए हैं, जिनमें से 12 चीते खुले जंगल में घूम रहे हैं।  अलग-अलग क्वारंटाइन बाड़ों में रखा गया था बता दें कि बीते 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से विशेष विमान फिर सेना के हेलीकॉप्टर के जरिए कूनो पहुंचे थे। नौ चीतों के इस जत्थे में 6 मादा और 3 नर शामिल थे। बायो-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत इन्हें अलग-अलग क्वारंटाइन बाड़ों में रखा गया था। विशेषज्ञों की निगरानी के बाद अब 4 मादा और 2 नर चीतों को बड़े शिकार वाले बाड़ों में शिफ्ट कर दिया गया है। अधिकारियों ने दी हरी झंडी वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बाकी बचे 3 चीते भी पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें भी अगले कुछ दिनों में बड़े बाड़ों में भेज दिया जाएगा। कूनो प्रबंधन के अनुसार सभी चीते कूनो के वातावरण में बहुत तेजी से ढल रहे हैं। उनकी सेहत और व्यवहार पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। चीता प्रोजेक्ट के तहत वर्तमान में स्थिति     देश में वर्तमान में चीतों की कुल संख्या 53     कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या 50     गांधी सागर पार्क में चीतों की संख्या 3     कूनों के खुले जंगल में चीते 12     एनक्लोजर में मौजूद चीतों की संख्या 38 कूनो में चीतों का 'अर्धशतक', देश में कुल 53 चीते कूनों की धरती पर इन चीतों की शिफ्टिंग के बाद नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या अब 50 पहुंच गई है। वहीं गांधी सागर नेशनल पार्क में 3 चीतों को मिलाकर देश में चीतों की कुल संख्या 53 हो गई है।  चीतों का तीसरा घर, ढाई महीने बाद होगी शिफ्टिंग देश के महत्वकांक्षी चीता पुनर्स्थापन प्रोजेक्ट के तहत मध्य प्रदेश में वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) को चीतों का तीसरा घर बनाया जाएगा। यहां ग्राउंड पर तेजी से काम चल रहा है। बुंदेलखंड की धरती पर जल्द ही प्रदेश के सबसे बड़े वन्य प्राणियों के घर में चीते दौड़ लगाते नजर आएंगे। करीब 2339 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभयारण्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जहां अब चीता, तेंदुआ और बाघ एक साथ नजर आने की तैयारी है। मोहली रेंज में बनाया जा रहा एनक्लोजर बोमा चीता प्रोजेक्ट व वन विभाग अधिकारियों के अनुसार संभव है, बोत्सवाना से कूनो लाए गए 9 चीतों में से 4 चीतों को नौरादेही शिफ्ट किया जाएगा। इनमें 1 नर और 3 मादा शामिल हो सकते हैं। आगामी मई-जून तक शिफ्टिंग का टारगेट रखा है। नौरादेही में चीतों के लिए सबसे उपयुक्त मोहली रेंज को चुना गया है। यहां घास के विशाल मैदान, छायादार पेड़ और पर्याप्त संख्या में शाकाहारी वन्यजीव मौजूद हैं, जो चीतों के लिए आदर्श परिस्थितियां तैयार करते हैं। इसके अलावा सिंगपुर और झापन रेंज भी चयनित की गई हैं।

मिशन चीता: बोत्सवाना से 9 चीते कूनो पहुंचे, भारत में कुल संख्या 48

श्योपुर  श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में शनिवार एक और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। बोत्सवाना से अफ्रीकी महाद्वीप के 9 नए चीते विशेष विमान से भारत पहुंचे हैं। यह चीतों का तीसरा बड़ा जत्था है, जो 'प्रोजेक्ट चीता' के तहत भारत लाया गया है। भारतीय वायुसेना के विमान से रात में ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के बाद सुबह भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से इन्हें कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया। केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इन चीतों को क्वारंटाइन बाड़ों में रिलीज किया। इनके आने से भारत में चीतों की कुल संख्या 48 हो गई है। कूनो में पहले से मौजूद चीतों की सफल प्रजनन दर और शावकों का जन्म इस प्रोजेक्ट की मजबूती दिखाता है। यह कदम न सिर्फ चीता संरक्षण की दिशा में बड़ा है, बल्कि भारत में विलुप्त हो चुके इस राजसी जानवर को वापस लाने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। पार्क में विशेष तैयारियां की गई, जहां चीतों को एक महीने तक क्वारंटाइन में रखकर स्वास्थ्य जांच और अनुकूलन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद इन्हें मुख्य बाड़े में छोड़ दिया जाएगा। बोत्सवाना से लाये चीते कूनो में किए रिलीज बता दें कि, बोत्सवाना से कूनो लाए गए सभी 9 चीतों में से 6 मादा हैं, जबकि 3 नर चीते। इस तरह अब कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या 45 हो चुकी है। खास बात ये है कि, इनमें से 28 चीते भारत में पैदा हुए हैं। इसके अलावा 3 चीते कूनो से ही गांधीसागर वन्य क्षेत्र में छोड़े गए हैं। इस तरह देशभर में इनकी संख्या बढ़कर कुल 48 हो गई है। फिलहाल, बोत्सवाना से लाए गए सभी 9 चीतों को एक महीने के लिए पहले क्वारंटीन किया जाएगा। इके बाद ही इन्हें मुख्य क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। वयस्क चीतों में बदला समीकरण कूनो में 12 महीने से अधिक उम्र के चीतों का गणित अब साफ तौर पर बदल गया है। पहले यहां 26 वयस्क चीते थे 14 नर और 12 मादा। अब 9 नए चीतों के जुड़ने से वयस्कों की संख्या 35 हो गई है। मादा: 18 नर: 17 यानी अब मादाओं का पलड़ा थोड़ा आगे है। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे बेहद अहम मान रहे हैं। उनका कहना है कि मादाओं की संख्या बढ़ने से क्षेत्रीय टकराव कम होगा और शावकों के जन्म की संभावना बढ़ेगी। एक माह का क्वारंटीन, फिर खुले जंगल का टिकट आए हुए सभी 9 चीतों को एक महीने तक क्वारंटीन बाड़ों में रखा जाएगा। इस दौरान उनकी सेहत, व्यवहार और अनुकूलन क्षमता पर लगातार नजर रहेगी। इसके बाद चीता स्टीयरिंग समिति तय करेगी कि किन चीतों को खुले जंगल में छोड़ा जाए और किन्हें निगरानी में रखा जाए। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, हर चीते को जंगल में उतारने से पहले उसके मूवमेंट, शिकार प्रवृत्ति और इंसानी दखल से दूरी जैसे पहलुओं की बारीकी से जांच की जाती है। मजबूत हुई जेनेटिक ताकत अब कूनो एक पार्क नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जेनेटिक प्रयोगशाला बन चुका है। यहां नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना तीन अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के चीते मौजूद हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अलग-अलग मूल के चीतों के मेल से इनब्रीडिंग का खतरा घटता है और शावकों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। यही वजह है कि भारत में चीता पुनर्वास को लंबे समय तक टिकाऊ माना जा रहा है। भारत में चीतों की मौजूदा तस्वीर कुल चीते: 48 कूनो नेशनल पार्क: 36 गांधी सागर अभयारण्य: 3 नामीबियाई मूल (स्थापित + शावक): 20 दक्षिण अफ्रीकी मूल (स्थापित + शावक): 19 भारत में जन्मे शावक: 28 आज आए (बोत्सवाना): 9

कूनो नेशनल पार्क में 8 चीते होंगे शामिल, आज शनिवार सुबह CM मोहन यादव करेंगे स्वागत और रिलीज

 श्योपुर/ग्वालियर MP के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी महाद्वीप से चीतों का तीसरा बड़ा जत्था भारत आ रहा है. बोत्सवाना से एयरलिफ्ट किए गए इन 8 चीतों (6 मादा और 2 नर) का स्वागत खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव करेंगे. चीता प्रोजेक्ट डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने बताया कि बोत्सवाना से छह मादा और दो नर चीतों का बैच शुक्रवार रात 9 बजे से 10 बजे के बीच इंडियन एयर फोर्स (IAF) के एयरक्राफ्ट से ग्वालियर के लिए उड़ान भरी।  ग्वालियर से, दो IAF हेलीकॉप्टर चीतों को कुनो नेशनल पार्क ले जाएंगे, जहां उनके शनिवार सुबह 9 बजे से 10 बजे के बीच पहुंचने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि बोत्सवाना से ग्वालियर तक की उड़ान का समय लगभग नौ से 10 घंटे का रहा . उन्होंने कहा कि यह अफ्रीका से आने वाला चीतों का तीसरा बैच होगा, इससे पहले नामीबिया और साउथ अफ्रीका से चीते लाए गए थे. इसके साथ ही, भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 46 हो जाएगी. क्वारंटाइन और सुरक्षा के कड़े इंतजाम चीता प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कहा कि पार्क में बाड़े तैयार किए गए हैं, जहां चीते लगभग एक महीने तक क्वारंटाइन में रहेंगे. उनकी सुरक्षित लैंडिंग के लिए पार्क में 5 हेलीपैड हैं. पिछली बार की तरह, IAF चीतों को अफ्रीका से लाकर उन्हें फिर से बसाने के प्रोग्राम में मदद करेगी, ठीक वैसे ही जैसे उसने फरवरी 2023 में SA से चीते को लाते समय किया था. आबादी को 50 तक बढ़ाना लक्ष्य प्रोजेक्ट डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने कहा कि इससे पहले, सितंबर 2022 में एक प्राइवेट जेट से 8 चीतों को नामीबिया से ग्वालियर लाया गया था, जिसके बाद IAF के हेलीकॉप्टरों ने उन्हें पार्क पहुंचाया था. और चीतों के आने से भारत का चीता रिवाइवल प्रोग्राम और मजबूत होगा. केंद्र सरकार के सपोर्ट से, हमारा मकसद जल्द से जल्द आबादी को 50 तक बढ़ाना है. पिछले साल, भारत में 12 शावकों का जन्म हुआ, हालांकि तीन शावकों समेत छह जिंदा नहीं बचे. इस साल, 7 फरवरी से 18 फरवरी के बीच, दो बार में 8 शावक पैदा हुए. KNP में 39 शावक पैदा हो चुके 2023 से KNP में कुल 39 शावक पैदा हुए हैं, जिनमें से 27 जिंदा हैं. नामीबिया में जन्मी ज्वाला और आशा, साउथ अफ्रीका में जन्मी गामिनी, वीरा और निरवा, और भारत में जन्मी मुखी, सभी ने KNP में बच्चे दिए हैं. तीन चीतों को मंदसौर जिले के गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में भेज दिया गया है, जबकि 35 अभी भी KNP में हैं. बता दें कि दुनिया का सबसे तेज जमीन पर रहने वाला जानवर चीता, भारत में लगभग सात दशक पहले खत्म हो गया था. दोबारा उसे बसाए जाने का प्रोजेक्ट चल रहा है. इसकी शुरुआत साल 2022 में कर दी गई थी. यह अफ्रीका से आने वाला चीतों का तीसरा बैच है. इससे पहले नामीबिया (2022) और दक्षिण अफ्रीका (2023) से चीते लाए गए थे.

मध्य प्रदेश में फिर बढ़ेगी चीतों की संख्या: बोत्सवाना से आठ चीते लाने की तैयारी

भोपाल मध्य प्रदेश में चीतों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। चीतों की संख्या में वृद्धि के लिए 28 फरवरी को बोत्सवाना से आठ और चीते लाए जाएंगे। राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष-2032 तक लगभग 17 हजार वर्ग किलो मीटर क्षेत्र में 60–70 चीतों की आत्मनिर्भर आबादी स्थापित करना है। इसके लिए गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में संरक्षण प्रजनन केंद्र स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्य प्रदेश में चीता पुनर्स्थापन प्रोजेक्ट विश्व का सबसे सफल अभियान है। यह परियोजना ‘प्रकृति से प्रगति’ का संदेश है। सितंबर 2022 में शुरू हुई वन्य जीव संरक्षण की इस यात्रा ने सफलता के तीन साल पूरे कर लिए। 2023 से 2026 के बीच 39 शावकों का जन्म 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को प्रधानमंत्री मोदी ने कूनो अभयारण्य के संरक्षित बाड़ों में छोड़ कर पुनर्स्थापना परियोजना का शुभारंभ किया। 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़े गए। वर्ष 2023 से 2026 के बीच यहां 39 शावकों का जन्म हुआ, जिनमें से 27 शावक कूनो में स्वस्थ और जीवित हैं। राष्ट्रपति के साथ बोत्सवाना के राष्ट्राध्यक्ष मौजूद रह सकते हैं बताया जा रहा है कि इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु के साथ बोत्सवाना के राष्ट्राध्यक्ष डुमा बोका भी मौजूद रह सकते हैं। कार्यक्रम केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में होगा। अति विशिष्ट अतिथियों के संभावित आगमन को लेकर कूनो पार्क में पांच हेलीपैड बनाए गए हैं। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए जा चुके हैं चीते एयरफोर्स के अधिकारियों की देखरेख में यहां हेलीकॉप्टर उतारने का ट्रायल भी किया गया है। बता दें कि भारत में चीता संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आठ और 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए जाने के बाद अब बोत्सवाना से दो वयस्क मादा चीते और उनके छह शावक लाए जा रहे हैं।  

चीता सफारी का आनंद लें कूनो नेशनल पार्क में, ऑनलाइन बुकिंग के लिए जानें तरीका

श्योपुर  श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में आज एक अक्टूबर पर्यटक चीतों का रोमांच देख सकेंगे। इसी दिन से नेशनल पार्क में चीता सफारी की शुरुआत हो जाएगी। कूनो पार्क में बाड़ों के अतिरिक्त खुले जंगल में 16 चीते विचरण कर रहे हैं। कूनो और मंदसौर जिले के गांधीसागर अभयारण्य में कुल 27 चीते हैं। जिनमें भारत में जन्मे शावक भी शामिल हैं। बता दें कि चीता पुनर्वास परियोजना के तहत 17 सितंबर 2022 को अपने जन्म दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। इसके बाद फरवरी 2023 में 12 चीते दक्षिण अफ्रीका से लाकर यहां छोड़े गए थे। वर्तमान में कूनो पार्क में 24 चीते हैं, जिसमें से आठ चीते और शावक बाड़े में हैं। शेष खुले जंगल में हैं जिनका दीदार पर्यटक कर सकेंगे। प्रदेश में चीतों के दूसरे रहवास मंदसौर जिले के गांधीसागर अभयारण्य यहां से भेजे गए तीन चीते बाड़ों में हैं। पर्यटन विभाग पार्क खुलने के बाद यहां कूनो रिट्रीट के आयोजन की भी तैयारी कर रहा है, जिसमें पर्यटकों के लिए रहने व खान-पान सहित कई अतिरिक्त सुविधाएं होंगी। एक अक्टूबर से पर्यटक यहां पहुंचेंगे, इसलिए वन विभाग की ओर से कूनो नेशनल पार्क की वेबसाइट पर भी कूनो सफारी को हाइलाइट किया गया है। हेल्पडेस्क भी बनाई गई है, जिस पर चीतों को लेकर पर्यटकों की जिज्ञासा आ रही है। ऐसे कर सकते हैं बुकिंग कूनो नेशनल पार्क में चीतों समेत अन्य वन्य जीव भी देखने को मिलेंगे। इसके लिए कूनो नेशनल पार्क की वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा। छह लोगों के लिए कूनो में सफारी का शुल्क जिप्सी सहित 4,500 रुपये हैं, वहीं अगर आप अपने वाहन से जा रहे हैं तो 1,200 रुपये ही लगेंगे। पार्क के अहेरा गेट और पीपलवाड़ी गेट से कूनो सफारी के लिए जा सकते हैं। इसी क्षेत्र में चीतों को छोड़ा गया है। उत्तम कुमार शर्मा (सीसीएफ व फील्ड डायरेक्टर कूनो पार्क) के अनुसार, वर्जन कूनो में चीतों को देखने के लिए पर्यटक एक अक्टूबर से आ सकते हैं। प्रबंधन की ओर से तैयारियां की गई हैं। शुल्क कितना होगा? पर्यटन विभाग सफारी के शुभारंभ के साथ ही पर्यटकों के लिए कुनो रिट्रीट का भी आयोजन कर रहा है, जहां आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी. सफारी का एक निश्चित शुल्क भी है छह लोगों के लिए जिप्सी की सवारी का शुल्क ₹4,500 है, जबकि निजी वाहन से सफारी का शुल्क केवल ₹1,200 होगा. ऐसे करें ऑनलाइन बुकिंग पर्यटक वेबसाइट पर बुकिंग के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. इसके लिए कूनो राष्ट्रीय उद्यान की वेबसाइट पर जाना होगा. वन विभाग ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान की वेबसाइट पर कूनो सफारी को भी प्रदर्शित किया है. एक हेल्पडेस्क भी बनाया गया है. आप वहां से अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.  सतपुड़ा के लिए इंतजार कोर जोन 10 अक्र्टूबर तक बंद रहेगा। तेज बारिश से मढ़ई, चूरना की सड़कें खराब हो गई हैं। फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने निरीक्षण के बाद यह निर्णय लिया। ऐसे पहुंचें टाइगर रिजर्व/नेशनल पार्क (Tiger reserve in MP) पहुंचने नजदीकी एयरपोर्ट भोपाल, जबलपुर, बनारस, प्रयागराज, नागपुर हैं। रेलवे स्टेशन नर्मदापुरम, शहडोल, सिवनी, दमोह, मंडला फोर्ट, त्यौहारी, मड़वास, नागपुर हैं। ये जानवर देख सकते हैं बाघ, चीते (कूनो में), तेंदुआ, हाथी, बायसन, चीतल, हिरण, बारहसिंघा, गौर, भालू, सांभर, चौसिंगा, चिंकारा के साथ ही विलुप्त प्रजाति के पक्षी भी। 10 टाइगर रिजर्व – संजय दुबरी, सीधी – पन्ना, पन्ना, छतरपुर – सतपुड़ा, नर्मदापुरम – कान्हा, मंडला-बालाघाट – बांधवगढ़, शहडोल – पेंच, सिवनी-छिंदवाड़ा – वीरांगना दुर्गावती, दमोह – डॉ. विष्णु वाकणकर (रातापानी), भोपाल सीहोर, रायसेन – माधव- शिवपुरी – नौरादेही- सागर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व उमरिया जिले के लगभग 1536 वर्ग किमी में फैला है। पार्क प्रबंधन ने सफारी टिकट दर में 10% और गाइड चार्ज में 65% की बढ़ोत्तरी की है। नजदीकी एयरपोर्ट जबलपुर है। निजी वाहन से पहुंच सकते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन उमरिया है। कान्हा टाइगर रिजर्व मंडला-बालाघाट जिले में लगभग 2,051.74 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। नजदीकी एयरपोर्ट जबलपुर और निकटतम रेलवे स्टेशन चिरईडोंगरी है। पेंच टाइगर रिजर्व कुछ हिस्सा महाराष्ट्र और कुछ मध्यप्रदेश के सिवनी, छिंदवाड़ा जिले से लगा है। यहां ब्लैक पैंथर आकर्षण का केंद्र होता है। हालांकि ये कभी-कभार ही दिखते हैं। प्रदेश के नेशनल पार्क -1- वन विहार, भोपाल -2- कूनो पालपुर, श्योपुर -3- माधव- शिवपुरी -4- कान्हा- मंडला से बालाघाट -5- बांधवगढ़ – उमरिया -6- सतपुड़ा – भोपाल -7- पेंच – सिवनी-छिंदवाड़ा -8- पन्ना – पन्ना -9- डायनासोर जीवाश्म पार्क – धार -10- रानी दुर्गावती- दमोह -11- संजय दुबरी- सीधी-सिंगरौली जंगल या टाइगर सफारी के लिए कैसे करें एडवांस बुकिंग इसके लिए आपको मध्य प्रदेश के वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://forest.mponline.gov.in/ पर जाना होगा या फिर आप अपने पसंदीदा टाइगर रिजर्व या नेशनल पार्क को चुनकर उसकी वेबसाइट पर एडवांस बुकिंग के लिए एप्लाई कर सकते हैं। 

सबलगढ़ में चीते की दहशत, जंगल से निकलकर सड़क पर चलता नजर आया ‘राजा’

मुरैना  सबलगढ़ क्षेत्र में एक बार फिर चीते की मौजूदगी से लोगों में दहशत फैल गई है। घाटी नीचे के इलाके सालई गांव में सुबह अचानक सड़क पर एक चीता टहलता हुआ नजर आया। इस नजारे को देखकर ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोगों ने चीते को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। शावक के होने की आशंका जानकारी के मुताबिक यह वही मादा चीता ‘केपी-1’ का शावक होने की आशंका है, जो कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकलकर लंबे समय से मुरैना जिले के सबलगढ़ क्षेत्र में घूम रहा है। वन विभाग का मानना है कि यह चीता अपने सुरक्षित क्षेत्र से भटक कर घाटी नीचे के इलाके में पहुंच गया है। यह रामपुर कला और सालई गांव के पास देखा गया। ग्रामीणों ने जैसे ही सड़क पर चीते को देखा, आसपास के लोगों को सतर्क कर दिया। कुछ देर के लिए गांव में दहशत का माहौल बन गया। वन विभाग की टीम रख रही है नजर वन विभाग और चीता मित्रों की टीम लगातार इस इलाके पर नजर बनाए हुए है। टीम ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अकेले खेतों में न जाएं, बच्चों को भी खुले में न छोड़ें। चीते के पास जाने या उसे परेशान करने की कोशिश बिल्कुल न करें। साथ ही ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि किसी भी तरह की गतिविधि या चीते के मूवमेंट की सूचना तुरंत वन विभाग को दें, ताकि उसकी सुरक्षित ट्रैकिंग की जा सके। कई बार पार्क की सीमा से निकल जाते हैं बाहर कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते पिछले कुछ महीनों में कई बार पार्क की सीमाओं से बाहर निकलकर आसपास के गांवों में देखे गए हैं। हालांकि अब तक किसी तरह की जनहानि या नुकसान की खबर नहीं आई है। वन विभाग के मुताबिक चीते आमतौर पर इंसानों से दूरी बनाए रखते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा और ग्रामीणों की सावधानी बेहद जरूरी है। लोगों में है उत्सुकता सबलगढ़ क्षेत्र में चीते के आने से जहां दहशत का माहौल है, वहीं लोग इसे नजदीक से देखने के लिए उत्सुक भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वन विभाग की गाइडलाइन का पालन किया जाए तो किसी भी तरह के खतरे से बचा जा सकता है। ग्रामीणों से लगातार शांति और सतर्कता बनाए रखने की अपील की जा रही है।

एक और झटका! कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता नभा की मौत, चोटों के निशान ने बढ़ाई चिंता

श्योपुर  मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से दुखद खबर सामने आ रही है. नामीबिया से लाई गई मादा चीता नभा की मौत हो गई है. जिसकी जानकारी कूनो के द्वारा दी गई है. कूनो प्रबंधन ने बताया कि नामीबिया की 8 वर्षीय मादा चीता नभा की आज शनिवार को मौत हो गई. वह एक हफ्ते पहले अपने सॉफ्ट रिलीज बोमा के अंदर घायल अवस्था में पायी गई थी. क्या शिकार के दौरान घायल हुई चीता नभा संभवतः वह शिकार के प्रयास के दौरान घायल हुई थी. अन्य चोटों के साथ उसके दोनों बाएं आगे एवं पिछले पैरों (Ulna and Fibula) में फ्रैक्चर पाया गया है. एक हफ्ते से उसका इलाज चल रहा था, लेकिन इलाज के दौरान उसकी उसकी मृत्यु हो गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद चीते की मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा. 31 से 30 रह गई चीतों की संख्या कूनो नेशनल पार्क में अब 28 चीते मौजूद हैं. जिनमें 9 व्यस्क (6 मादा और 3 नर) और 17 भारतीय जन्में शावक हैं, सभी स्वस्थ हैं और अच्छे से विचरण कर रहे हैं. इसके अलावा, गांधीसागर अभ्यारण में दो नर चीते शिफ्ट हुए हैं. कूनो राष्ट्रीय उ‌द्यान में 26 चीतों में से 16 चीते खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं. भारत में कुल चीतों की संख्या 30 रह गई है. वे कूनो नेशनल पार्क के वातावरण से पूर्णतः अनुकूलित हो गए हैं. साथ ही उन्होंने सह-शिकारियों के साथ रहना सीख लिया है और नियमित रूप से शिकार कर रहे हैं. हाल ही में सभी चीतों की एंटी एक्टो-परजीवी दवा सफलतापूर्वक लगायी गई है. दो माताएं, वीरा और नीरवा अपने नन्हे शावकों के साथ स्वस्थ हैं. 2022 में 70 साल बाद भारत आए थे चीते बता दें कि भारत से कई सालों पहले विलुप्त हो गए थे. करीब 70 साल के बाद चीतों की पुनरुत्थान योजना के तहत 17 सितंबर 2022 को 8 चीते नामीबिया से मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे. 18 फरवरी 2023 को 12 और चीतों को दक्षिण अफ्रीका से भारत लाया गया. इन 20 चीतों के साथ धीरे-धीरे इन चीतों का कुनबा तो बढ़ा लेकिन कई चीतों की मौत भी हुई. 11 मार्च 2023 को चीता प्रोजेक्ट के तहत एक नर और एक मादा चीता को खुले जंगल में छोड़ा गया. इस बीच कूनो में खुशियों की किलकारी गूंजी, मादा चीता ज्वाला ने 4 शावकों को जन्म दिया. ये देश में चीतों की विलुप्ति के बाद भारत की धरती पर जन्मे पहले चीता शावक थे.