samacharsecretary.com

नॉर्वे चेस में आर प्रज्ञानंद का शानदार प्रदर्शन जारी, कार्लसन को लगातार दूसरी बार दी मात

 नई दिल्ली नॉर्वे चेस 2026 के आठवें दौर में आर प्रज्ञानंद ने एक बार फिर वर्ल्ड नंबर 1 मैग्नस कार्लसन के खिलाफ दमदार खेल दिखाया है। 20 साल के चेन्नई के इस ग्रैंडमास्टर ने 3 जून को कार्लसन को फिर से हराकर इतिहस रचा। प्रज्ञानंद ने इसी टूर्नामेंट के राउंड 3 में भी नॉर्वे के कार्लसन को हराया था। इस तरह 19 साल में ये पहली बार देखने को मिला है जब नॉर्वे के वर्ल्ड नंबर 1 को एक ही क्लासिकल टूर्नामेंट में एक ही खिलाड़ी ने दो बार हराया है। इससे पहले साल 2007 में लिनारेस टूर्नामेंट में भारतीय दिग्गज विश्वनाथन आनंद ने कार्लसन को दो बार हराया था। इतना ही नहीं, खास बात ये भी है कि प्रज्ञानानंदा ने 2024 के नॉर्वे चेस में भी कार्लसन को मात दी थी। R Praggnanandhaa ने कार्लसन पर दर्ज की दूसरी जीत दरअसल, आर प्रज्ञानंद के हाथों मिली हार के बाद कार्लसन काफी परेशान नजर आए। उन्होंने अपना सिर हिलाया और इस युवा भारतीय से एक बार फिर हारने के बाद तुरंत खेल की जगह से बाहर चले गए। इस हार से नॉर्वे के कार्लसन का खिताब बचाना मुश्किल हो गया। वहीं, इस जीत के साथ प्रज्ञानंद के 12 अंक हो गए हैं और वो टेबल में तीसरे नंबर पर आ गए हैं। अभी दो राउंड बाकी हैं और वो खिताब की रेस में बने हुए हैं। वहीं वेस्ले सो 14 प्वाइंट के साथ टॉप पर हैं। अलीरेजा फिरोजा 13 पॉइंट के साथ दूसरे नंबर पर हैं। डी गुकेश की खिताब की उम्मीदें लगभग खत्म फिरोजा ने वर्ल्ड चैंपियन डी. गुकेश को हराकर उनकी खिताब की उम्मीदें लगभग खत्म कर दी हैं। लेकिन प्रज्ञानंद के लिए ये सही समय पर बनी लय है। कार्लसन के खिलाफ लगातार जीत से वो इस टूर्नामेंट के सबसे बड़े स्टार बन गए हैं। इतनी बड़ी कामयाबी के बाद भी 20 साल के प्रज्ञानंद शांत रहे और मैच के बाद उन्होंने कहा, "मैग्नस को हराने से ज्यादा जरूरी है कि इस टूर्नामेंट में मैच जीता जाए। इस समय यही अहम है। मैं खुश हूं कि मैं ये कर पाया। उन्होंने मैच के दौरान कार्लसन के जज्बे की भी तारीफ की और माना कि उसे हराना कितना मुश्किल था। प्रज्ञानंद ने कहा, "नहीं, वो सच में बहुत अच्छा खेल रहे थे और बेहतरीन डिफेंस कर रहे थे। मुझे लगता है कि कई दूसरे खिलाड़ी यहां-वहां छोटी पोजिशनल गलतियां कर देते, लेकिन वो लगातार सही चालें चल रहे थे। एक समय तो मुझे सच में लगा कि ये गेम ड्रॉ हो जाएगा। ये हैरानी की बात थी कि उन्होंने ऐसी गलती की, क्योंकि उससे पहले तक उन्होंने बहुत अच्छा बचाव किया था। कुल मिलाकर मुझे लगता है कि मैं अच्छा खेल रहा हूं। बस टाइम स्क्रैम्बल मेरे हिसाब से नहीं रहे। तो मैं कोशिश करूंगा कि घड़ी में ज्यादा समय रखूं और पिछले कुछ मैचों की तरह ही खेलता रहूं। मैं कल आराम करने की कोशिश करूंगा और फिर आखिरी राउंड्स के लिए पूरे जोश के साथ वापसी करूंगा।"

जटिल मुकाबले में प्रगनानंद और फिरोजा के बीच कड़ा संघर्ष, 60 चालों में ड्रॉ

 बुकारेस्ट  भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रगनानंद ने शुरुआती दौर में थोड़ी मुश्किलों का सामना करने के बाद फ्रांस के अलीरेजा फिरोजा के विरुद्ध ड्रॉ खेला। यह मुकाबला यहां आयोजित सुपर चेस क्लासिक्स के पहले राउंड में खेला गया, जो ग्रैंड चेस टूर का पहला क्लासिकल इवेंट है। फिरोजा ने काले मोहरों से क्वीन गैंबिट डिक्लाइंड ओपनिंग अपनाई, जिससे मुकाबला शुरुआत में काफी शांत नजर आया। शुरुआती चरण में तीन छोटे मोहरों की अदला-बदली हुई और ऐसा लग रहा था कि मुकाबला आसानी से ड्रॉ की ओर बढ़ रहा है। प्रगनानंद ने किया कड़ा मुकाबला हालांकि, प्रगनानंद ने जटिल स्थिति बनाने का फैसला किया और मजबूत सेंटर के बदले क्वींस साइड पर काले मोहरों को जुड़े हुए पास्ड प्यादे लेने दिए। ईरानी मूल के फ्रांसीसी खिलाड़ी फिरोजा ने मिडिल गेम में शानदार चालें चलीं और भारतीय खिलाड़ी के किंग साइड पर दबाव बना दिया। स्थिति इतनी पेचीदा हो गई थी कि इंसानी दिमाग के लिए हर बेहतरीन चाल ढूंढ पाना लगभग असंभव था। 35वीं चाल में हुई एक गलती के बाद मुकाबला बराबरी के रुख और प्यादों वाले एंडगेम में पहुंच गया। हालांकि प्रगनानंद एक प्यादा पीछे थे, लेकिन अंतत: मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ। यह दिन का सबसे लंबा मुकाबला रहा, जो 60 चालों तक चला। वाशिए और अनीश गिरी के बीच भी रोमांचक मुकाबला वहीं, फ्रांस के मैक्सिम वाशिए-लग्रेव और नीदरलैंड्स के अनीश गिरी के बीच भी रोमांचक मुकाबला ड्ऱॉ रहा। सफेद मोहरों से खेले गए कैटलन ओपनिंग में फ्रांसीसी खिलाड़ी को ज्यादा बढ़त नहीं मिली और कुछ अदला-बदली के बाद मुकाबला संतुलित स्थिति में पहुंच गया। गिरी के पास कुछ मौके थे, लेकिन उन्होंने सुरक्षित खेलते हुए 32 चालों में ड्रॉ स्वीकार कर लिया।  

Chess Rising Stars: नक्सलगढ़ के मयंक और अयांश ने अंडर-15 और अंडर-11 में मारी बाजी

बस्तर. जगदलपुर के निर्मल विद्यालय में आयोजित द चेस नेशन शतरंज चैम्पियनशिप 2026 का भव्य समापन हुआ, जहां प्रदेशभर से खिलाड़ियों ने हिस्सा लेकर बस्तर की बदलती तस्वीर को नई पहचान दी। ओपन वर्ग में रायपुर के सालिक नवाज मणिहार ने पहला स्थान हासिल कर ₹11 हजार जीते। बिलासपुर के रूपेश कुमार मिश्रा दूसरे और दुर्ग के यशद बंबेश्वर तीसरे स्थान पर रहे। महिला वर्ग में अलंक्रुता मोहराना ने सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनकर बाजी मारी। अंडर-15 वर्ग में कोंडागांव के मयंक श्रीवास्तव विजेता रहे, जबकि जगदलपुर के एजीकियल सर्विन एक्का दूसरे और अथर्व मेश्राम तीसरे स्थान पर रहे। बालिका वर्ग में आयुषी राठी सर्वश्रेष्ठ रहीं। अंडर-11 वर्ग में जगदलपुर के अयांश दीक्षित ने पहला स्थान पाया। वेदांत शुक्ला दूसरे और सिद्धार्थ राव तीसरे स्थान पर रहे। बालिका वर्ग में बृष्टि साहा ने शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में बस्तर एसपी शलभ कुमार सिन्हा मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि बस्तर अब हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। यह आयोजन साबित करता है कि बस्तर की नई पीढ़ी अब बंदूक नहीं, बुद्धि की ताकत से पहचान बना रही है।

शतरंज का महाकुंभ लौट आया भारत: 23 साल बाद होगी विश्व कप की मेजबानी

नई दिल्ली  भारत में शतरंज विश्वकप होगा. शीर्ष स्टार खिलाड़ी अपना दमखम दिखाएंगे. 23 साल बाद फिर से भारत में विश्वकप होगा. शतरंज की सर्वोच्च संस्था फिडे ने घोषणा की.  30 अक्टूबर से 27 नवंबर तक भारत टूर्नामेंट की मेजबानी करेगा.  आयोजन स्थल की जल्द घोषणा की जाएगी. शीर्ष खिलाड़ी डी.गुकेश, आर प्रग्गनानंदा, अर्जुन एरिगेसी समेत 206 खिलाड़ी शतरंज विश्वकप में हिस्सा लेंगे.  नॉकआउट प्रारूप में सभी मुकाबले खेले जाएंगे. प्रत्येक राउंड तीन दिन तक चलेगा. 2002 में अंतिम बार भारत ने टूर्नामेंट की मेजबानी की थी. विश्वनाथन आनंद ने 2002 में विश्वकप जीता था. शतरंज की वैश्विक संस्था फिडे (FIDE) ने 21 जुलाई को इस बात की पुष्टि की कि 2025 का वर्ल्ड कप भारत में आयोजित होगा। इस टूर्नामेंट में 206 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे जो वर्ल्ड कप खिताब के साथ-साथ 2026 फिडे कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में क्वालीफाई करने के लिए मुकाबला करेंगे। आखिरी बार 2002 में हुआ था आयोजन भारत ने इससे पहले 2002 में हैदराबाद में इस प्रतियोगिता की मेजबानी की थी, जिसमें भारत के दिग्गज ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद ने खिताब अपने नाम किया था। अब 23 साल बाद यह टूर्नामेंट फिर से भारतीय धरती पर आयोजित हो रहा है। वर्ल्ड कप 2025 का आयोजन नॉकआउट फॉर्मेट में किया जाएगा, जिसमें हर राउंड में हारने वाला खिलाड़ी टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगा। फिडे के मुताबिक, शीर्ष तीन खिलाड़ी सीधे 2026 कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में जगह बनाएंगे, जो भविष्य के वर्ल्ड चैंपियन के लिए चयन प्रक्रिया का हिस्सा होता है। स्टार खिलाड़ी होंगे आकर्षण का केंद्र इस मेगा इवेंट में भारत के कई शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। इनमें मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन डी. गुकेश, वर्ल्ड कप 2023 के उपविजेता आर. प्रज्ञानानंद, दुनिया के टॉप-5 खिलाड़ियों में शुमार अर्जुन एरिगैसी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों की मौजूदगी इस टूर्नामेंट को भारतीय दर्शकों के लिए और भी रोमांचक बना देगी। फिडे के सीईओ एमिल सुतोव्स्की ने वर्ल्ड कप को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि हम भारत में वर्ल्ड कप 2025 के आयोजन को लेकर बेहद उत्साहित हैं। भारत वह देश है जहां शतरंज केवल खेल नहीं, बल्कि एक जुनून है।