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बिहार चुनाव परिणाम पर बघेल का वार: NDA नहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त जीते

रायपुर बिहार चुनाव में NDA की जीत तय मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तंज कसा है। उन्होंने कहा, गिनती पूरी नहीं हुई है। जो रिजल्ट है उसमें और ग्राउंड रिपोर्ट में कही मेल नहीं है, इसका श्रेय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जाता है, ऐसा करिश्मा केवल निर्वाचन आयोग कर सकता है। ग्राउंड रिपोर्ट बदलाव का था। अमित शाह के सभाओं में भी कुर्सियां खाली थी। साफ संकेत है कि हरियाणा, महाराष्ट्र में हुआ वही बिहार में हुआ है। जो महाराष्ट्र का स्ट्राइक था वहीं यहां भी दिख रहा है। बिना मैकेनिज्म के ये संभव नहीं है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस SIR का विरोध करेगी। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, समय बढ़ाने की बात है। हम SIR का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि आपको प्रूफ करना है कि आप मतदाता हैं। गरीब आदमी फोटो खिंचवाने और अन्य तरह के खर्चे कैसे करेगा। SIR के विरोध में छत्तीसगढ़ में क्या करना है ये पार्टी तय करेगी। यहां गरीब आदिवासियों के नाम कटेंगे। प्रदेश में अब तक नहीं खुले एक भी गौ अभ्यारण्य मामले में भूपेश बघेल ने कहा, विधानसभा में हर बार घोषणा करते हैं, 2 साल से सुन रहे हैं। बघेल ने कहा – गृहमंत्री के खिलाफ बोलते ही जब्त हो गई संपत्ति ED ने की चैतन्य बघेल की संपत्ति जब्त की है। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवाल खड़े किया है। बघेल ने कहा, एजेंसी स्वतंत्र नहीं है। बीजेपी एफिडेविट जमा करने कैसे कह सकती है? पैतृक संपत्ति को जब्त कर लिया है। अमित शाह के खिलाफ बोला, आतंकी घटना है ये मानने के लिए 48 घंटे लग गए। गृह मंत्री की लापरवाही है, ऐसा कहते ही संपत्ति जब्त हो गई। छत्तीसगढ़ का सब कुछ जब्त हो रहा है। हम आवाज उठाते हैं तो हमारी संपत्ति जब्त होती है। हजार साल पुराना नाट्य शाला है उस धरोवर को भी सुरक्षित नहीं रख पा रही है। मंत्री नेताम के बयान पर बघेल ने किया पलटवार कोचिया चलाते हैं कांग्रेस पार्टी। मंत्री रामविचार नेताम के बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पटलवार किया है। उन्होंने कहा, रामविचार नेताम के जिले में धान कोचियाई का काम होता है। नकली होलोग्राम से शराब बिक्री इनके सरकार में हो रही है। हमारे बहाने मुख्यमंत्री पर रामविचार नेताम आरोप लगा रहे हैं।

22 नवंबर से पहले ही होंगे बिहार के चुनाव, नए वोटर कार्ड धारकों को मतदान का मौका

पटना बिहार विधानसभा चुनाव से पहले हुए मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद आम मतदाताओं के मन में बड़ा सवाल था कि वोटर कार्ड बदल दिए जाएंगे? पहले वाले वोटर कार्ड बेकार हो जाएंगे? ऐसा सवाल इसलिए भी था क्योंकि विशेष गहन पुनपरीक्षण में 2003 के बाद मतदाता सूची में शामिल वोटरों को अपने कागज और तस्वीर भी देनी थी। कहा भी गया था कि उनका डाटा उसी हिसाब से अपडेट किया जाएगा। अब देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ किया है कि जिन मतदाताओं की जानकारी में किसी तरह का अपडेट या बदलाव हुआ है, उन्हें नया वोटर कार्ड जारी किया जाएगा। बाकी को इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने बताया कि प्रावधान के तहत 22 नवंबर से पहले नई सरकार के लिए चुनाव हो जाना है और इसी हिसाब से आयोग काम कर रहा है। बाकी दस्तावेजों के आधार भी डाल सकते हैं बिहार चुनाव में वोट दो दिवसीय दौरे के बाद पटना से लौटने के पहले मीडिया से बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त ने साफ कहा- "जिनके वोटर कार्ड के डाटा में कोई परिवर्तन होगा, उन्हें 15 दिनों के अंदर ईपिक, यानी वोटर कार्ड मिल जाएगा। जिनके पास पुराने वोटर कार्ड हैं और डाटा में कोई बदलाव नहीं है, वह उसी को सही मानेंगे। मतदान करने के लिए बाकी जिन दस्तावेजों को पहले से मान्य रखा गया था, वह आगे भी कायम रहेंगे।" मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि अयोग्य वोटरों को हटाने और योग्य वोटरों को शामिल करने के लिए चलाए गए गहन विशेष पुनरीक्षण का परिणाम बहुत स्पष्ट और संतोषजनक रहा है। अब भी कोई अयोग्य जुड़ा हुआ है या योग्य छूटा हुआ है तो उसका नाम हटाने-जोड़ने की प्रकिया चलती रहेगी। चुनाव के बाद यह प्रक्रिया अगले आदेश तक के लिए बंद हो जाएगी। आधार कार्ड की मान्यता पर भी मुख्य चुनाव आयोग ने खुलकर की बात मुख्य चुनाव आयुक्त ने वोटर पुनरीक्षण की प्रक्रिया में आधार को रखने और नहीं रखने को लेकर विवाद पर भी स्पष्ट जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने मतदाता सूची के लिए नामांकन भरा होगा, वह आधार देने के लिए बाध्य नहीं थे और न हैं। चुनाव आयोग या आधार अथॉरिटी के नियम और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत आधार न जन्मतिथि और न नागरिकता का प्रमाणपत्र है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया तो आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण में आधार कार्ड लेने की व्यवस्था दी। उन्होंने नागरिकता को लेकर पूछे गए सवाल पर भी सीधा जवाब देते हुए कहा- संविधान के तहत भारत का मतदाता बनने के लिए भारत का नागरिक होना जरूरी है। वोटर जहां रहता है, उसके आसपास के बूथ का मतदाता हो सकता है। उन्होंने कहा कि सभी चिह्नित अयोग्य मतदाताओं का नाम हटाया गया है। उसका कारण भी बताया गया है।