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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत का किया आत्मीय स्वागत

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के छत्तीसगढ़ आगमन पर पुष्प गुच्छ भेंटकर उनका आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने माननीय मुख्य न्यायाधीश को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के प्रतीक स्वरूप राजकीय गमछा, विश्वविख्यात बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक तथा बेल मेटल से निर्मित भगवान श्रीराम एवं माता शबरी की आकर्षक प्रतिकृति भेंट की। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. नरसिम्हा एवं न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उल्लेखनीय है कि भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (Hidayatullah National Law University) के दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होने हेतु छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए हैं।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कुसुम सिन्हा को दी श्रद्धांजलि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर. मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश  रमेश सिन्हा की पूज्य माता स्वर्गीय  कुसुम सिन्हा को श्रद्धांजलि अर्पित की।  मुख्यमंत्री  साय ने  बिलासपुर के बोदरी स्थित मुख्य न्यायाधीश निवास में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पहुंचकर कुसुम सिन्हा के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित किए और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होंने शोक संतप्त परिवारजनों  से मुलाकात कर उन्हें ढाढ़स बंधाया और कहा कि माता जी का स्नेह, संस्कार और त्याग जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। मती कुसुम सिन्हा का सरल, स्नेहमयी और अनुपम स्वभाव सदैव स्मरणीय रहेगा।  इस अवसर पर केंद्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री एवं सांसद  तोखन साहू, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव, पूर्व राज्यपाल  रमेश बैस, विधायक  सुशांत शुक्ला ने भी श्रद्धांजलि अर्पित कर शोक संवेदना व्यक्त की। कार्यक्रम में उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशगण, अधिवक्तागण, महाधिवक्ता कार्यालय के अधिकारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

आध्यात्मिक मुलाकात: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वामी कैलाशानंद गिरी से की विचार-विमर्श

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वर्ण भूमि स्थित पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल के निवास पहुँचकर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया. मुख्यमंत्री के साथ मंत्रिमंडल के कई सदस्य, सांसद और विधायक भी इस आध्यात्मिक समागम का हिस्सा बने. मुख्यमंत्री साय शाम साढ़े सात बजे से रात करीब साढ़े ग्यारह बजे तक स्वामी जी के सानिध्य में रहे और विभिन्न विषयों पर चर्चा की. स्वामी जी का 50वां जन्मदिन और स्वर्ण जयंती वैवाहिक वर्षगांठ यह अवसर बेहद खास रहा क्योंकि कल महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी का 50वां जन्म दिवस था. साथ ही, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल और श्रीमती अंगूरी देवी अग्रवाल की 50वीं वैवाहिक वर्षगांठ भी थी. मुख्यमंत्री सहित सभी उपस्थित अतिथियों ने स्वामी जी को जन्मदिन की बधाई दी और अग्रवाल दंपत्ति को उनकी वैवाहिक स्वर्ण जयंती पर शुभकामनाएं प्रेषित कीं. “माता कौशल्या की पवित्र धरा पर आना सौभाग्य” : स्वामी कैलाशानंद भक्ति और अध्यात्म के रस में डूबी स्वर्ण भूमि में अपने अनमोल वचनों में स्वामी जी ने कहा कि छत्तीसगढ़ वासियों का यह परम सौभाग्य है कि उनका जन्म मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी के ननिहाल और माता कौशल्या की पावन धरा पर हुआ है. उन्होंने आगे कहा कि नितिन अग्रवाल के आग्रह पर इस पवित्र भूमि पर आने और प्रभु श्री राम के दर्शन करने का अवसर मिलना उनके लिए भी सौभाग्य की बात है. दिग्गज नेताओं की रही मौजूदगी स्वामी जी के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने वालों में केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, क्षेत्रीय सांसद बृजमोहन अग्रवाल सहित अनेक सांसद, विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल रहे. पूरे कार्यक्रम के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा.

खेल से शांति की ओर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर ओलंपिक

रायपुर नक्सलवाद, हिंसा और पिछड़ेपन की पहचान बन चुका था छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल, आज वहां खेल, विश्वास और उम्मीद के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं। यह परिवर्तन राज्य के साय सरकार की एक सुदृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, संवेदनशील प्रशासन और दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित ‘बस्तर ओलंपिक’ इस ऐतिहासिक बदलाव का सबसे सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है। यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि बस्तर के सामाजिक पुनर्जागरण, सांस्कृतिक गौरव और अंचल में शांति स्थापना का व्यापक अभियान है। ऐतिहासिक सहभागिता आया नजर जब पूरा बस्तर मैदान में उतर गया बस्तर ओलंपिक 2025 के प्रति जनता में अभूतपूर्व उत्साह दिखाई दिया।बस्तर संभाग के सातों जिलों बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर से 3,91,289 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया जिसमें पुरुष खिलाड़ी 1,63,668 और महिला खिलाड़ी 2,27,621 रहे। यह एक आंकड़ा नही बल्कि एक सामाजिक क्रांति का संकेत है। वो बस्तर जहाँ कभी भय और अविश्वास का माहौल था वहीं आज महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी यह दर्शाती है कि बस्तर की बेटियों ने भी राज्य सरकार के प्रति भरोसा जताया है और अब आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री साय ने क्रीड़ा को बनाया सामाजिक परिवर्तन का माध्यम मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह स्पष्ट मानना है कि “नक्सलवाद का स्थायी समाधान सिर्फ़ सुरक्षा बलों से नहीं बल्कि आम बस्तरिया को अवसर, विश्वास और सकारात्मक मंच देने से होगा।” इसी सोच के साथ राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर ओलंपिक को गृह (पुलिस) विभागखेल एवं युवा कल्याण विभाग के संयुक्त प्रयास से आकार दिया और यह आयोजन छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष में बस्तर की नई पहचान बन गया है। खेलों की विविधता : परंपरा और आधुनिकता का संगम बस्तर ओलंपिक 2025 में शामिल खेलों की सूची यह दर्शाती है कि यह आयोजन समावेशी और संतुलित दृष्टिकोण पर आधारित है, खेलों की लिस्ट में शामिल थे एथलेटिक्स, तीरंदाजी, फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, बैडमिंटन, वॉलीबॉल,कराते और वेटलिफ्टिंग लेकिन इन खेलों के साथ ही स्थानीय प्रतिभा को उतना ही सम्मान दिया गया।बस्तर ओलंपिक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मानवीय और संवेदनशील सोच रही। इस आयोजन में विशेष रूप से सम्मिलित हुए आत्मसमर्पित नक्सली (नुवा बाट), माओवादी हिंसा से प्रभावित दिव्यांग खिलाड़ी, जूनियर वर्ग (14–17 वर्ष), सीनियर वर्ग। 300 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सलियों और 18 से अधिक दिव्यांग खिलाड़ियों की भागीदारी यह सिद्ध करती है कि छत्तीसगढ़ का बस्तर अब बहिष्कार नहीं, पुनर्वास और पुनर्जन्म की भूमि बन रहा है। तीन स्तरीय प्रतियोगिता बनी पारदर्शिता और अवसरों का खजाना प्रतियोगिताएँ तीन चरणों में आयोजित की गईं— विकासखंड स्तर – 25 अक्टूबर से, जिला स्तर – 5 नवम्बर से और संभाग स्तर – 24 नवम्बर से। विजेताओं को नगद पुरस्कार,मेडल, ट्रॉफी और शील्ड प्रदान किए गए जिनमे नगद पुरस्कार DBT के माध्यम से राशि सीधे खातों में भेजी गई। संभागीय विजेताओं को “बस्तर यूथ आइकॉन” के रूप में प्रचारित किया गया। “बस्तर यूथ आइकॉन” बस्तर के युवाओं के लिए एक नई पहचान बन गई है। ‘स्पोर्ट्स फॉर पीस’ मॉडल बनी देश के लिए मिसाल देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ में कहा कि “बस्तर ओलंपिक केवल खेल आयोजन नहीं बल्कि विकास और खेल का संगम है।”आज बस्तर ओलंपिक पूरे देश में‘खेल के माध्यम से शांति और विश्वास’ के एक सफल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। बस्तर ओलंपिक का शुभंकर वन भैंसा और पहाड़ी मैना बस्तर की आत्मा के प्रतीक बने जिसमे वन भैंसा, सामूहिक शक्ति और साहस और पहाड़ी मैना, संवाद, संस्कृति और जीवंतता का प्रतीक बना। ये शुभंकर बताते हैं कि बस्तर की पहचान उसकी संस्कृति और सामूहिक चेतना ही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे बताया ‘भविष्य की नींव’ समापन समारोह में अमित शाह का वक्तव्य बस्तर के भविष्य का रोडमैप साबित हो रहा है उन्होंने स्पष्ट कहा कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूर्ण अंत होगा। बस्तर को पर्यटन और उद्योग का केंद्र बनाया जाएगा और कश्मीर से अधिक पर्यटक बस्तर में लाने का लक्ष्य सफ़ल होगा। केंद्रीय गृह मंत्री का यह विश्वास कि बस्तर का कोई बच्चा अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक में गोल्ड लाएगा, पूरे देश के लिए प्रेरणा है। बस्तर ओलंपिक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का भावनात्मक नेतृत्व प्रदेश के मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “यह आयोजन केवल खेल नहीं अपितु बस्तर की संस्कृति, उत्साह और प्रतिभा का उत्सव है।” उन्होंने माना कि इतनी बड़ी सहभागिता का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण था।सातों जिलों की टीम ने ऐतिहासिक कार्य किया उनके शब्दों में संवेदना, आत्मीयता और आत्मविश्वास झलक थी। आज बस्तर- सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और खेल जैसे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।बस्तर ओलंपिक इसी परिवर्तन का एक और जीवंत प्रमाण है।बस्तर की मिट्टी में साहस है, बस्तर के युवाओं में क्षमता है और प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में दिशा भी। बस्तर ओलंपिक केवल एक आयोजन नहीं बल्कि यह उस बस्तर का जय घोष है जो आज हिंसा नहीं, विकास से पहचाना जा रहा है, जो अब डर नहीं, गर्व का विषय बना हुआ है। जो अतीत नहीं, भविष्य की ओर देख रहा है। वह बस्तर जो आज स्थायी तौर पर बदल चुका है।

मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर. मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से कल यहां उनके निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार द्वारा जमीन की गाइडलाइन का पुनर्मूल्यांकन कर उसमें रियायत प्रदान करने के निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।  मुख्यमंत्री को गजमाला पहनाकर प्रतिनिधिमंडल ने उनका सम्मान किया। एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि इस निर्णय से रियल एस्टेट क्षेत्र को नई गति मिलेगी तथा आम नागरिकों को भी राहत प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार जनता के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। भूमि गाइडलाइन दरों में संशोधन करते हुए इस बात का ध्यान रखा गया है कि इससे आम नागरिकों, किसानों, व्यवसायियों सहित सभी वर्ग के लोगों को सहूलियत मिले। उन्होंने कहा कि नई गाडलाइन दरों से आर्थिक विकास को गति मिलेगी।  इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री महेंद्र आहूजा, श्री दीपक रहेजा, श्री राजीव अग्रवाल, श्री विजय पिंजानी, श्री अजय अग्रवाल, श्री प्रतीक अग्रवाल, श्री मुलकराज शर्मा, श्री रजत चाबड़ा, श्री विलास सुतार, श्री विनोद छितिजा, श्री विजय मोटवानी, श्री सनी सेवलानी तथा श्री गौरव खेतपाल सहित अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।

साययुवाओं के लिए रोजगार का नया रास्ता बने पर्यटन और एडवेंचर स्पोर्ट्स : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर. मुख्यमंत्री ने 10 रूपए की टिकट कटाकर मयाली नेचर कैंप में लिया एडवेंचर स्पोर्ट्स का आनंद मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज अलग अंदाज़ में नजर आए और उन्होंने 10 रूपए का टिकट कटाकर जिले के लोकप्रिय पर्यटन स्थल मयाली नेचर कैंप में साहसिक खेल गतिविधियों का आनंद लिया और कई नए एडवेंचर स्पोर्ट्स की औपचारिक शुरुआत भी की। मुख्यमंत्री ने प्रवेश शुल्क अदा कर नेचर कैंप में प्रवेश करते हुए आम नागरिकों को नियमों के पालन और समानता का एक सशक्त संदेश दिया।  मुख्यमंत्री ने 10 रूपए की टिकट कटाकर मयाली नेचर कैंप में लिया एडवेंचर स्पोर्ट्स का आनंद इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी मती कौशल्या साय, विधायक मती गोमती साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी एवं खेल प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।     मुख्यमंत्री ने 10 रूपए की टिकट कटाकर मयाली नेचर कैंप में लिया एडवेंचर स्पोर्ट्स का आनंद  मुख्यमंत्री  साय ने इस दौरान नेचर कैंप में विकसित अधोसंरचनाओं, सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं तथा स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के पहल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रकृति-आधारित पर्यटन एवं साहसिक गतिविधियां न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती हैं, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित करती हैं।  मुख्यमंत्री ने 4 नए एडवेंचर स्पोर्ट्स का किया शुभारंभ    मुख्यमंत्री  साय ने मयाली नेचर कैंप में संचालित स्पोर्ट्स मोटर बाइक (एटीवी) को स्वयं चलाकर साहसिक पर्यटन का आनंद लिया। इसके साथ ही उन्होंने बंदूक से सटीक निशाना साधते हुए बैलून शूटिंग का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने आर्चरी शूटिंग में तीर चलाकर निशाना साधा और इस खेल की भी शुरुआत की। साथ ही उन्होंने माउंटेन साइक्लिंग का शुभारंभ करते हुए स्वयं साइकिल चलाकर स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया। नेचर कैंप में वॉल क्लाइंबिंग बोर्ड का उद्घाटन भी मुख्यमंत्री के द्वारा किया गया।     इस दौरान वॉल क्लाइंबर तेज सिंह एवं तेजल भगत ने मुख्यमंत्री के समक्ष वॉल क्लाइंबिंग कर अपने कौशल का प्रदर्शन किया, जिसकी मुख्यमंत्री ने सराहना की। मुख्यमंत्री  साय बॉक्स क्रिकेट में भी हाथ आजमाते हुए नजर आए और स्टेट ड्राइव व ऑफ साइड पर आकर्षक शॉट लगाए। मुख्यमंत्री ने मयाली नेचर कैंप स्थित कैक्टस गार्डन का अवलोकन किया, जहां विभिन्न प्रजातियों के कैक्टस लगाए गए हैं वनमंडलाधिकारी  शशि कुमार ने कैक्टस के औषधीय महत्व की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री साय ने भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया, छत्तीसगढ़ की धरोहर को मिलेगा नया जीवन

रायपुर : भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन वर्ष 2026 की शुभ शुरुआत: छत्तीसगढ़ की प्राचीन धरोहर को मिलेगी नई पहचान – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय   रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कबीरधाम ज़िले के भोरमदेव धाम में आयोजित कार्यक्रम में भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने नववर्ष 2026 की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि नए वर्ष की शुरुआत ऐसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कार्य से होना छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना राज्य की प्राचीन धरोहर को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का प्रतीक है। कबीरधाम जिले के इस भोरमदेव धाम में महादेव शिव की आराधना, अतुलनीय प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एक साथ  दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे बेहतर शुरुआत नए वर्ष की नहीं हो सकती थी और इस परियोजना के लिए उन्होंने समस्त छत्तीसगढ़वासियों को बधाई दी।  मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भोरमदेव की महत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया। भोरमदेव मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरे-भरे वनांचल के बीच स्थित इस मंदिर को “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” कहा जाता है। यह केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि हजार वर्षों की साधना, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। यहाँ भगवान शिव की पूजा भोरमदेव के रूप में की जाती है, जहाँ शैव दर्शन, लोक आस्था और आदिवासी परंपराएँ एक साथ मिलकर भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि सावन के महीने में निकलने वाली कांवड़ यात्रा यहाँ की एक महत्वपूर्ण परंपरा है और उन्हें स्वयं कांवड़ियों का स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य के मध्य स्थित भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल और छेरकी महल ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। मंदिर की दीवारों पर उत्कीर्ण भव्य शिल्पाकृतियाँ खजुराहो की कला से तुलना योग्य हैं। नागवंशी शासनकाल में निर्मित नागर शैली की यह अद्वितीय वास्तुकला अपने आप में अद्भुत है। यह स्थल न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्रीय इतिहास, कला और सामाजिक जीवन का सशक्त साक्ष्य भी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महाशिवरात्रि पर यह स्थान प्रमुख तीर्थ के रूप में हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जहाँ आदिवासी परंपराओं और शैव प्रथाओं का अनोखा संगम दिखाई देता है। मड़वा महल, जिसका संबंध विवाह मंडप से माना जाता है, तथा छेरकी महल की दीवारों पर अंकित वन और नदी से जुड़ी आकृतियाँ प्रकृति-निष्ठ जीवनदर्शन को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि भोरमदेव का यह संपूर्ण क्षेत्र धर्म और अध्यात्म के साथ-साथ पर्यटन का भी बड़ा केंद्र है, जिसे वर्तमान सरकार व्यापक रूप से विकसित करने जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया है, जिससे पर्यटन क्षेत्र को संरचनात्मक मजबूती मिली है। नई पर्यटन नीति एवं होम-स्टे पॉलिसी के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा सहित छत्तीसगढ़ के अनेक स्थानीय उत्सवों ने प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। हमारी सांस्कृतिक परंपराएँ केवल मंदिरों और स्थापत्य तक सीमित नहीं हैं; बल्कि नाचा परंपरा, 13 पारंपरिक वाद्ययंत्र, लोकनृत्य और गीत हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के दर्पण हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि धार्मिक आस्थाओं में यहाँ भगवान राम को ‘भाँचा राम’ या ‘वनवासी राम’ के रूप में पूजा जाता है क्योंकि उनके वनवास के लगभग 10 वर्ष दंडकारण्य क्षेत्र में व्यतीत हुए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पूरे छत्तीसगढ़ में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है तथा रेल और हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचना सरल होगा और पर्यटन को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मज़बूत होगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 7.83 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों को नई दिशा मिलेगी। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोरमदेव महोत्सव स्थल पर काॅरिडोर के भूमिपूजन के बाद सभा को संबोधित करते हुए कबीरधाम जिले सहित पूरे प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा थी, जिसे समाप्त करने का बीड़ा राज्य सरकार ने उठाया है और आज प्रदेश नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत को कमजोर करने वाली किसी भी ताकत या षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध लिए गए कठोर निर्णयों ने देश की सुरक्षा नीति को नई मजबूती प्रदान की है। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि सुशासन का प्रभाव आज देश-दुनिया में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारत तेजी से विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर है। सड़कों, पुल-पुलियों एवं अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल, बिजली, बैंक खाता और रोजगार जैसी सुविधाएं गरीबों के घर-घर तक पहुंच रही हैं।  केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा … Read more

रायपुर: नववर्ष पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय मंत्री ने भोरमदेव मंदिर में की पूजा

रायपुर : नववर्ष पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय व केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने भोरमदेव मंदिर में की पूजा-अर्चना प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए की कामना रायपुर नववर्ष के प्रथम दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कबीरधाम जिले के ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की । उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण की कामना की। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव एवं विजय शर्मा, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, विधायक श्रीमती भावना बोहरा सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

बाल विवाह बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, इसे रोकना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी: सीएम विष्णुदेव साय

रायपुर : बाल विवाह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, इसे रोकना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को करेगा जागरूक रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  फरसाबहार स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर से बाल विवाह मुक्त जशपुर अभियान रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह जागरूकता रथ जिले के शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में भ्रमण कर लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और इसे रोकना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आमजन से अपील की कि यदि कहीं भी बाल विवाह की आशंका हो तो बिना झिझक 1098 पर सूचना दें और इस सामाजिक बुराई के रोकथाम में सहभागी बनें।  इस अभियान रथ के माध्यम से नागरिकों को बाल विवाह से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान, विवाह की वैधानिक न्यूनतम आयु तथा बाल विवाह निषेध अधिनियम के अंतर्गत कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य समाज में सकारात्मक सोच विकसित कर बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से समाप्त करना है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कमिश्नर नरेन्द्र कुमार दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी. एस. जात्रा सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे। रथ पर 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है, ताकि कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिलने पर नागरिक तत्काल इस हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दे सकें। सूचना प्राप्त होते ही  बाल विवाह प्रतिषेध की संयुक्त टीम  के द्वारा त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। गौरतलब है कि 1098 हेल्पलाइन के माध्यम से बच्चों से जुड़ी अन्य समस्याओं का समाधान भी किया जाता है।

जशपुर को मिला ऐतिहासिक तोहफा: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी बड़ी सिंचाई सौगात

किसानों के हित में 11 परियोजनाओं के लिए लगभग 199 करोड़ 50 लाख रुपये की स्वीकृति रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने सुशासन के दो वर्षों के दौरान जशपुर जिले के कृषि एवं ग्रामीण विकास को नई दिशा देने की दिशा में एक और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। जिले में किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 11 महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं के लिए कुल 199 करोड़ 49 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन से कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आय को स्थायी मजबूती मिलेगी। प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप जशपुर जिले में बैराज, एनीकट, तालाब एवं व्यपवर्तन योजनाओं के निर्माण, मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्यों को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं से जिले के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और वर्षा पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी। जशपुर जिले को स्वीकृत प्रमुख सिंचाई योजनाओं में मैनी नदी, बगिया स्थित बैराज उद्वहन सिंचाई योजना के लिए 79 करोड़ 37 लाख रुपये, कुनकुरी ईब व्यपवर्तन योजना के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य हेतु 37 करोड़ 9 लाख रुपये, सहसपुर तालाब योजना के लिए 4 करोड़ 27 लाख रुपये तथा डुमरजोर (डुमरिया) व्यपवर्तन योजना हेतु 10 करोड़ 36 लाख रुपये की स्वीकृति शामिल है। इसी क्रम में तुबा एनीकट योजना के लिए 2 करोड़ 67 लाख रुपये, बारो एनीकट योजना हेतु 7 करोड़ 6 लाख रुपये, मेडरबहार तालाब योजना के लिए 5 करोड़ रुपये, पमशाला एनीकट योजना हेतु 28 करोड़ 2 लाख रुपये, कोनपारा तालाब (दलटोली डेम) के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार के लिए 3 करोड़ 47 लाख रुपये, अंकिरा तालाब योजना के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार हेतु 3 करोड़ 47 लाख रुपये तथा कोकिया व्यपवर्तन योजना के लिए 16 करोड़ 17 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इन सिंचाई परियोजनाओं के पूर्ण होने से जिले के अनेक ग्रामों में खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे किसानों को खेती के लिए नियमित पानी मिलेगा, फसल उत्पादन बढ़ेगा और कृषि को स्थायी आजीविका का मजबूत आधार प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए सिंचाई, कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। जशपुर जिले को मिली ये सिंचाई सौगातें सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनकल्याणकारी नीतियों का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इन योजनाओं से जिले के किसानों के जीवन में खुशहाली आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।