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औद्योगिक कानूनों के डी-क्रिमिनलाइजेशन पर उद्योग जगत ने जताया संतोष, आगे और सुधारों की अपेक्षा

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपर मुख्य सचिवों और प्रमुख सचिवों की उपस्थिति में हुई उद्योग संगठनों और उद्यमियों के साथ विशेष के दौरान मुख्यमंत्री ने बजट 2026-27 के संदर्भ में उद्योग जगत से सुझाव आमंत्रित किए और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को और प्रभावी बनाने के लिए उद्यमियों तथा उद्योग संगठनों से व्यावहारिक सुझाव देने का आह्वान किया।  सीआईआई के वाइस चेयरमैन अभिषेक सराफ ने डिफेंस कॉरिडोर के लखनऊ नोड में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के लिए भूमि आवंटन की आवश्यकता बताई और इस दिशा में शीघ्र निर्णय की अपेक्षा जताई। फिक्की के चेयरमैन मनोज गुप्ता ने औद्योगिक भूमि को फ्रीहोल्ड किए जाने की मांग रखते हुए कहा कि इससे निवेशकों का विश्वास और दीर्घकालिक निवेश दोनों बढ़ेंगे। इंडिया पेस्टीसाइड लिमिटेड  के प्रतिनिधि ने विभिन्न कानूनों के डी-क्रिमिनलाइजेशन के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए इसे उद्योगों के लिए बड़ा और सकारात्मक सुधार बताया। एसोचैम के को-चेयरमैन ने हसन याकूब 'वन कंपनी- वन रजिस्टर-वन लेटर' जैसी व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया, जिससे अनुपालन प्रक्रिया सरल हो सके। उन्होंने कहा उत्तर प्रदेश के ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ की तर्ज पर फिलीपींस में भी एक कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है, जो प्रदेश की नीति की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। वहीं एसोचैम उत्तर प्रदेश द्वारा युवाओं के प्लेसमेंट के लिए किए जा रहे नियोजित प्रयासों की जानकारी भी साझा की गई। बैठक में औद्योगिक कौशल और वित्तीय बाजार से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने आईटीआई संस्थानों को और विकसित करने, वहां रिसर्च और इनोवेशन को प्रोत्साहित करने तथा इक्विटी मार्केट के विकास की आवश्यकता पर बल दिया। इसे भविष्य की मजबूत औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत उपयोगी बताया गया। उद्योग संगठनों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े मामलों में ओटीएस योजना लाए जाने की मांग भी रखी गई। साथ ही यह सुझाव दिया गया कि देश के विभिन्न एक्सपोर्ट काउंसिल्स के साथ उत्तर प्रदेश की एमएसएमई इकाइयों का नियमित संवाद कराया जाए, जिससे निर्यात को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिल सके। नैस्कॉम के लखनऊ चैप्टर के चेयरमैन रमीश जैदी ने छोटी आईटी कंपनियों के लिए प्लग-एंड-प्ले फैसिलिटी की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे स्टार्ट-अप्स और उभरती टेक कंपनियों को तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। क्रेडाई के यूपी के प्रेसीडेंट शोभित मोहन दास ने रियल एस्टेट सेक्टर की समस्याओं के समाधान के लिए उद्योग बंधु की तर्ज पर नियमित अंतराल पर “आवास बंधु” बैठक आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के स्टेट प्रेसिडेंट मनीष वर्मा से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जनपद में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कम से कम 10 युवा उद्यमियों को तैयार करने के लिए ठोस और योजनाबद्ध प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि समावेशी औद्योगिक विकास को गति मिल सके।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आंगनवाड़ी केंद्र भवनों के निर्माण में आई तेज़ी

प्रदेश में 2775 में से 2581 आंगनवाड़ी केंद्र भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण शेष 194 केंद्रों का निर्माण कार्य शीघ्र होगा पूरा प्रारम्भिक शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आंगनवाड़ी केंद्र किए जा रहे सुदृढ़ लखनऊ, उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आंगनवाड़ी केंद्र भवनों के निर्माण, सुदृढ़ीकरण और सुविधाओं के विस्तार की दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश में प्रस्तावित 2775 आंगनवाड़ी केंद्र भवनों में से 2581 का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जबकि शेष 194 केंद्रों का निर्माण कार्य भी शीघ्र पूरा किया जा रहा है। निर्माण, मरम्मत और आधुनिकीकरण का कार्य तेज राज्य सरकार द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधायुक्त बनाने के उद्देश्य से निर्माण, मरम्मत और आधुनिकीकरण का कार्य तेज़ी से कराया जा रहा है, जिससे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को पोषण, स्वास्थ्य और प्रारम्भिक शिक्षा से जुड़ी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें। महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल महिला एवं बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव, महिला कल्याण लीना जोहरी ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है। नए भवनों में अनिवार्य सुविधाएं उपलब्ध उन्होंने बताया कि नए आंगनवाड़ी भवनों में बच्चों के अनुकूल कक्ष, पोषण कक्ष, बैठक स्थल, शौचालय तथा सुरक्षित पेयजल जैसी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। किराये के भवनों से पक्के भवनों में हो रहा स्थानांतरण किराये के भवनों में संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से नए पक्के भवनों में स्थानांतरित किया जा रहा है। इन भवनों में साफ-सुथरे कमरे, रसोईघर, शौचालय, पेयजल, खेल सामग्री और बच्चों के बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। कुपोषण से लड़ाई को मिलेगी मजबूती योगी सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव और शहरी वार्ड स्तर पर सुरक्षित, आधुनिक और सुसज्जित आंगनवाड़ी केंद्र उपलब्ध हों, जिससे कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई को मजबूती मिले और बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास को बढ़ावा मिल सके। डिजिटल निगरानी व्यवस्था को भी किया जा रहा सुदृढ़ इसके साथ ही पोषण ट्रैकर और डिजिटल पंजीकरण जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं, ताकि लाभार्थियों की निगरानी अधिक प्रभावी और पारदर्शी ढंग से की जा सके। बुनियादी ढांचे से बढ़ा भरोसा और सहभागिता नए आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण से बच्चों की नियमित उपस्थिति में वृद्धि हुई है और अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत हुआ है। साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बेहतर और सुरक्षित वातावरण में कार्य करने की सुविधा मिल रही है।

86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष का संबोधन

लोकसभा अध्यक्ष बोले, यूपी ने सुशासन, सामाजिक कल्याण, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की लोकतांत्रिक संस्थाओं को जवाबदेह, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने के संकल्प पर दिया जोर लोकसभा अध्यक्ष ने बैठकों और सकारात्मक बहस पर दिया जोर, डिजिटलाइजेशन, एआई और रिसर्च से बढ़ेगी क्षमता लखनऊ, 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी, जवाबदेह, पारदर्शी तथा जन-आकांक्षाओं के अनुरूप बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पीठासीन अधिकारी सम्मेलनों के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता की आशाओं और आकांक्षाओं से जोड़ने हेतु व्यापक विचार-विमर्श हुआ है और इन चर्चाओं से ठोस परिणाम भी सामने आए हैं। अब समय है कि नवाचार, संवाद और प्रौद्योगिकी के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता के और नजदीक लाया जाए। समारोह में अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देशभर से आए सम्मानित सदस्यों का हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक मूल्य सशक्त हुए हैं। राज्य ने सुशासन, सामाजिक कल्याण, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। ओम बिरला ने कहा कि सम्मेलन के दौरान सभी पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने लोकतंत्र को सार्थक चर्चा के माध्यम से और मजबूत बनाने तथा विधायी संस्थाओं को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए अपने-अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन चर्चाओं का उद्देश्य केवल संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि इनके ठोस और सकारात्मक परिणाम सामने आएं तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में नवाचार को अपनाया जाए। “विकसित भारत” की संकल्पना के अनुरूप आगे बढ़ने का आह्वान” लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस सम्मेलन में यह संकल्प लिया गया है कि सभी विधायी संस्थाएं “विकसित भारत” की संकल्पना के अनुरूप अपने-अपने राज्यों को विकसित राज्य बनाने की दिशा में संवाद और चर्चा को आगे बढ़ाएं। इसके लिए सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर निरंतर संवाद आवश्यक है। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यहां विजन-2047 समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर 36 घंटे तक लगातार चर्चा हुई, जिसमें विधायकों ने अपने विचार रखे। यह एक अनुकरणीय पहल है, जो यह दर्शाती है कि किस प्रकार सार्थक बहस और संवाद से दीर्घकालिक विकास की दिशा तय की जा सकती है। अब और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता ओम बिरला ने विधायी संस्थाओं में बैठकों की संख्या में आ रही कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में कई निर्णय लिए गए और उनके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए, लेकिन अब और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राज्य विधानमंडलों में न्यूनतम 30 दिन सदन की बैठकें हों, सकारात्मक चर्चा हो और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राज्य के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बने। उन्होंने कहा कि विधानसभाएं वह मंच हैं जहां अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज सदन के माध्यम से सरकार तक पहुंचती है। मतदाता यह अपेक्षा करता है कि उसका प्रतिनिधि उसकी समस्याओं और चुनौतियों को सदन में उठाएगा तथा समाधान की दिशा में पहल करेगा। न्यायपालिका का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे लोगों को न्यायालय पर विश्वास होता है, वैसे ही यदि विधायक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सदन में अपनी बात रखें तो विधानसभाओं के माध्यम से भी सार्थक परिणाम सामने आएंगे। प्रौद्योगिकी और एआई से विधायी संस्थाओं की क्षमता वृद्धि लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग आवश्यक है। आज सभी राज्य विधानसभाएं पेपरलेस हो चुकी हैं और पुरानी बहसों, बजट तथा विधायी कार्यवाहियों का डिजिटलीकरण किया गया है। इससे विधायकों की क्षमता-वृद्धि होगी और शोध-आधारित चर्चा को बल मिलेगा। इसी उद्देश्य से विधानसभाओं में रिसर्च विंग का गठन भी किया गया है। संसद और राज्यों की विधानसभाएं मिलकर कर रही हैं काम ओम बिरला ने कहा कि डिजिटलीकरण से कानून निर्माण के समय सार्थक बहस के लिए आवश्यक संदर्भ आसानी से उपलब्ध होंगे। मिलकर कार्य करने से जन प्रतिनिधियों में क्षमता निर्माण होगा और विधायिकाएं अधिक जवाबदेह बनेंगी। इससे शासन-प्रशासन पर निगरानी भी प्रभावी होगी। गतिरोध लोकतंत्र के लिए उचित नहीं सदनों में बार-बार होने वाले गतिरोध पर चिंता व्यक्त करते हुए ओम बिरला ने कहा कि सदन का प्रत्येक क्षण बहुमूल्य होता है। सदन चर्चा, संवाद और समिति कार्यों के लिए होते हैं, न कि गतिरोध के लिए। विरोध राजनीतिक रूप से हो सकता है, लेकिन शब्दों और तर्कों का मंच सदन होना चाहिए, ताकि सार्थक परिणाम निकलें और जनता का विश्वास बना रहे। ‘लेजिसलेटिव इंडेक्स’ पर जोर लोकसभा अध्यक्ष ने ‘लेजिसलेटिव इंडेक्स’ की अवधारणा पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे विधानसभाओं की उत्पादकता, कार्यप्रणाली और उपयोगिता का आकलन होगा। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से नई प्रक्रियाएं, नियम और नवाचार सामने आएंगे, जिससे विधायी संस्थाएं अधिक प्रभावी बनेंगी। अपने संबोधन के अंत में ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारी संविधान के अंतर्गत कार्य करते हैं और उन पर बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्हें निष्पक्ष और न्यायसंगत रहते हुए संस्थाओं को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन में हुई चर्चाओं से निकले संकल्पों को सभी प्रतिनिधि अपने-अपने राज्यों में आगे बढ़ाएंगे। यूपी परिवर्तन की धरती है, यहां से प्राप्त ऊर्जा को सभी प्रतिनिधि अपने-अपने राज्यों में लेकर जाएंगे लोकसभा अध्यक्ष ने सम्मेलन को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन नई दिशा, नए संकल्प और नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की ऊर्जा देता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और सभी सम्मानित अतिथियों का भी धन्यवाद किया और कहा कि उत्तर प्रदेश की यह भूमि सामाजिक, आध्यात्मिक और परिवर्तन की धरती है, जहां से प्राप्त ऊर्जा को सभी प्रतिनिधि अपने-अपने राज्यों में लेकर जाएंगे।

सबसे पहले सीएम योगी ने महायोगी गोरखनाथ जी को चढ़ाई आस्था की पवित्र खिचड़ी

गोरखपुर, मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार ब्रह्म मुहूर्त में चार बजे शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ को नाथपंथ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार आस्था की पवित्र खिचड़ी चढ़ाई और लोकमंगल की कामना की। सीएम योगी के बाद नाथ योगियों, साधु संतों ने भी बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाकर पूजा अर्चना की। इसके साथ मंदिर के गर्भगृह कपाट को आमजन के लिए खोल दिया गया। खिचड़ी चढ़ाने के लिए मंदिर में आस्था का सैलाब नजर आया। गोरखनाथ मंदिर में लाखों की संख्या में श्रद्धालु महायोगी गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के लिए पहुंचे। लोक मान्यता के अनुसार त्रेतायुग से बाबा गोरखनाथ का खप्पर भरने की परंपरा का अनुसरण करते हुए श्रद्धा की अंजुरी में आस्था की खिचड़ी लेकर श्रद्धालु नतमस्तक रहे। महायोगी गोरखनाथ को नेपाल राजपरिवार की तरफ से भेजी गई खिचड़ी भी श्रद्धापूर्वक अर्पित की गई। खिचड़ी चढ़ाने के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में लगे विशाल मेले का भ्रमण कर आनंद उठाया। मनोरंजन के साथ जरूरी वस्तुओं की जमकर खरीदारी की। मकर संक्रांति पर गुरुवार को भोर में गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने नाथपंथ की परंपरा के अनुसार  गोरखनाथ मंदिर के गर्भगृह में जमीन पर बैठ कर, सीटी बजाकर गुरु गोरखनाथ को प्रणाम कर आदेश लिया। फिर विधिविधान से पूजन कर गोरक्षपीठ की ओर से श्रीनाथ जी को खिचड़ी (चावल, दाल, तिल, सब्जी, हल्दी, नमक आदि) चढ़ाई। इसके बाद उन्होंने मुख्य मंदिर में स्थापित अन्य देव विग्रहों की पूजा की। फिर योगिराज बाबा गंभीरनाथ, अपने दादागुरु महंत दिग्विजयनाथ, गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ, नौमीनाथ व अन्य नाथ योगियों की प्रतिमाओं समक्ष शीश नवाकर खिचड़ी भोग अर्पित किया। सीएम योगी द्वारा बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी भोग अर्पित करने के बाद सुख समृद्धि की मंगलकामना लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली समेत अन्य राज्यों और पड़ोसी देश नेपाल से आए श्रद्धालुओं ने भी कतारबद्ध होकर महायोगी गोरखनाथ को श्रद्धा की खिचड़ी चढ़ाई। लगातार चलता रहा खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला महायोगी गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला लगातार चलता रहा। पूरे दिन भक्तों की कतार नहीं टूटी। दोपहर बाद तक गोरखनाथ मंदिर आने वाले सभी रास्तों पर श्रद्धालुओं का रेला दिख रहा था। खिचड़ी चढ़ाने के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में स्थित सभी देवी देवताओं के विग्रहों का पूजन कर ब्रह्मलीन महंत बाबा गंभीरनाथ, ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ एवं ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि पर माथा टेक आशीर्वाद भी लिया। पूरा दिन मंदिर परिसर गुरु गोरखनाथ की जय जयकार से गूंजता रहा। इस दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा को लेकर मंदिर व जिला प्रशासन की ओर से समुचित प्रबंध किए गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद सभी व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए थे। भोर में तीन बजे ही लग गई थी लंबी कतार गोरखनाथ मंदिर का खिचड़ी मेला लोक श्रद्धाभाव के साथ सामाजिक समरसता का भी मेला है। हर वर्ग के लोग नंगे पांव कतारबद्ध होकर बारी बारी भगवान गोरखनाथ को आस्था की पवित्र खिचड़ी चढ़ा रहे थे। कोई मुठ्ठी भर श्रद्धा का चावल लेकर आ रहा था तो कोई झोली भर। पर, महायोगी के प्रति भाव सभी का एक समान था। न जाति का बंधन था, न धर्म का। बुधवार को भी लाखों श्रद्धालुओं ने खिचड़ी चढ़ाई थी। गुरुवार को यह संख्या और बढ़ गई। भोर में तीन बजे ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार मंदिर परिसर से बाहर सड़क तक लग गई थी। अलग-अलग गेट और बैरिकेडिंग से श्रद्धालुओं की भीड़ को संभाला जा रहा था। मंदिर में हुआ खिचड़ी सहभोज का आयोजन मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गुरुवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर में श्रद्धा के साथ सभी श्रद्धालुओं को खिचड़ी का प्रसाद वितरित करने के लिए सहभोज का आयोजन किया गया। अमीर-गरीब, जाति, वर्ग का भेदभाव भुलाकर सबने खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर परिसर में आमंत्रित अतिथियों के लिए भी सहभोज का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारियों, उद्यमियों, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों एवं गण्यमान्य लोगों की सहभागिता रही। नेपाल में राजगुरु माने जाते हैं महायोगी गोरखनाथ : डॉ. प्रदीप राव नाथपंथ के अध्येता डॉ. प्रदीप कुमार राव बताते हैं कि महायोगी गुरु गोरखनाथ का नेपाल से भी गहरा संबंध है। मकर संक्रांति पर गुरु गोरखनाथ को गोरक्षपीठाधीश्वर द्वारा खिचड़ी चढ़ाए जाने के बाद नेपाल राजपरिवार की तरफ से आई खिचड़ी चढ़ाई जाती है। गुरु गोरखनाथ जी नेपाल के राजगुरु माने जाते हैं। त्रेतायुगीन मानी जाती है गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा त्रेतायुगीन मानी जाती है। मान्यता है कि तत्समय आदियोगी गुरु गोरखनाथ एक बार हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित मां ज्वाला देवी के दरबार में पहुंचे। मां ने उनके भोजन का प्रबंध किया। कई प्रकार के व्यंजन देख बाबा ने कहा कि वह तो योगी हैं और भिक्षा में प्राप्त चीजों को ही भोजन रूप में ग्रहण करते हैं। उन्होंने मां ज्वाला देवी से पानी गर्म करने का अनुरोध किया और स्वयं भिक्षाटन को निकल गए। भिक्षा मांगते हुए वह गोरखपुर आ पहुंचे और राप्ती और रोहिन के तट पर जंगलों में बसे इस स्थान पर धूनी रमाकर साधनालीन हो गए। उनका तेज देख लोग उनके खप्पर में अन्न (चावल, दाल आदि) दान करते रहे। इस दौरान मकर संक्रांति का पर्व आने पर यह परंपरा खिचड़ी पर्व के रूप में परिवर्तित हो गई। तब से बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने का क्रम हर मकर संक्रांति पर अहर्निश जारी है। कहा जाता है कि उधर मां ज्वाला देवी के दरबार में बाबा की खिचड़ी पकाने के लिए आज भी पानी उबल रहा है।

नए भारत की रफ्तार का प्रतीक ‘प्रगति’, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में यूपी सबसे आगे: योगी आदित्यनाथ

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच नहीं, बल्कि नए भारत की नई कार्यसंस्कृति और परिणामोन्मुख शासन का सशक्त उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी के समन्वय से शासन में ठोस और समयबद्ध परिणाम सुनिश्चित हो रहे हैं। मंगलवार को आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रगति उस प्रशासनिक मॉडल का विस्तार है, जिसकी नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए रखी थी और वर्ष 2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती दी गई। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को सशक्त बनाते हुए प्रगति ने जटिल परियोजनाओं और प्रशासनिक अड़चनों के समाधान को सरल और तेज बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति केवल एक रिव्यू मैकेनिज्म नहीं, बल्कि एक व्यापक गवर्नेंस रिफॉर्म है, जिसने शासन को फाइल-केंद्रित संस्कृति से निकालकर फील्ड-आधारित परिणामों की दिशा में अग्रसर किया है। इसके माध्यम से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आई है, समय और लागत की बर्बादी रुकी है और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय के साथ स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित हुई है। उन्होंने बताया कि प्रगति मॉडल की अवधारणा वर्ष 2003 में गुजरात में ‘स्वागत’ (स्टेट वाइड अटेंशन ऑन गवर्नेंस बाई एप्लिकेशन) के रूप में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के त्वरित निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। यही मॉडल आगे चलकर प्रगति के राष्ट्रीय स्वरूप के रूप में विकसित हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के प्रभाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके माध्यम से अब तक 86 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली है। इनमें 377 प्रमुख परियोजनाओं की प्रत्यक्ष समीक्षा प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, जबकि 3162 में से 2958 मुद्दों का समाधान किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल राज्य के लिए एक गेम-चेंजर साबित हुआ है। आज उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, सर्वाधिक शहरों में मेट्रो सेवाएं, एयर कनेक्टिविटी, देश की पहली रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने में प्रगति की अहम भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के पास 10.48 लाख करोड़ रुपये की लागत की 330 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का पोर्टफोलियो है, जो देश में सबसे बड़ा है। इनमें से 2.37 लाख करोड़ रुपये की 128 परियोजनाएं (करीब 39 प्रतिशत) पूरी होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि 8.11 लाख करोड़ रुपये की 202 परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रगति पर हैं। सरकार की प्राथमिकता गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए सभी प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों का समाधान करना है, ताकि परियोजनाएं तय समय में धरातल पर उतर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रदेश में इंटर-एजेंसी बाधाओं का प्रभावी समाधान हुआ है। राजस्व, वन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर विकास, पंचायती राज सहित सभी संबंधित विभाग एक ही मंच पर समन्वय के साथ निर्णय ले रहे हैं, जिससे हाईवे, रेलवे, पावर और टेलीकॉम जैसी परियोजनाओं में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्रगति के तहत 515 मुद्दों में से 494 का समाधान किया जा चुका है, जो लगभग 96 प्रतिशत है। वहीं, 287 परियोजनाओं में से 278 परियोजनाओं का समाधान सुनिश्चित किया गया है, जिसकी समाधान दर 97 प्रतिशत है। प्रगति जैसे तकनीक-आधारित प्लेटफॉर्म के कारण उत्तर प्रदेश आज बॉटलनेक स्टेट से निकलकर ब्रेकथ्रू स्टेट में परिवर्तित हो चुका है। अब राज्य सरकार केवल फैसिलिटेटर नहीं, बल्कि एक्सेलेरेटर की भूमिका में विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है। समयबद्ध परियोजनाएं रोजगार सृजन के साथ-साथ राज्य की आर्थिक गति को भी तेज करती हैं और इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ पर किया शिलान्यास

सुल्तानपुर, कासगंज व फतेहपुर को मिली ग्रामीण स्टेडियम की सौगात खेलो इंडिया योजना के अंतर्गत 21 करोड़ रुपये से निर्मित पांच (लखनऊ में दो, हरदोई, कन्नौज व सहारनपुर) मल्टीपर्पज हॉल का किया लोकार्पण लखनऊ, मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय युवा दिवस पर सोमवार को सुल्तानपुर, कासगंज व फतेहपुर में ग्रामीण स्टेडियम का शिलान्यास किया। यह स्टेडियम 26 करोड़ से तैयार होंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने खेलो इंडिया योजना के अंतर्गत 21 करोड़ रुपये से बने पांच मल्टीपर्पज हॉल का भी लोकार्पण किया। योजना के तहत लखनऊ में दो, हरदोई, कन्नौज व सहारनपुर में एक-एक हॉल का शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य स्तर पर विवेकानंद युवा पुरस्कार भी प्रदान किए। यह पुरस्कार व्यक्तिगत श्रेणी के साथ ही युवक व महिला मंगल दल को भी दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों इन्हें मिला पुरस्कार विवेकानंद यूथ अवार्ड- व्यक्तिगत श्रेणी (50 हजार का चेक, प्रशस्ति पत्र व स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा) 1-    अभिनीत कुमार मौर्य- हरदोई 2-    महिका खन्ना- शाहजहांपुर 3    प्रणव द्विवेदी- गोरखपुर 4-    शिखा सहलोत – गाजियाबाद 5-    अभिषेक पांडेय- मऊ 6-    सचिन गौरी वर्मा- गोरखपुर 7-    संजना सिंह- बरेली 8 –    मार्तंड राम त्रिपाठी-गोरखपुर 9-    साक्षी झा- गाजियाबाद 10-    दिव्यांश टंडन-मेरठ युवक मंगल दल 1-    संतकबीर नगर- विकास खंड व ग्राम पंचायत सेमरियावां – रिजवान मुनीर 2-    बिजनौर- विकास खंड नूरपुर व ग्राम पंचायत शहदपुरगुलाल- घनश्याम सिंह 3-    शाहजहांपुर- विकास खंड भावलखेड़ा व ग्राम पंचायत चौधेरा- इंद्रजीत लोधी-आशीष महिला मंगल दल 1-    बिजनौर- नहटौर विकास खंड- बसेड़ाखुर्द ग्राम पंचायत- दामिनी   2-    फिरोजाबाद- अरांव विकास खंड- अकबरपुर सराय ग्राम पंचायत- शिवानी चंदेल- अंजली चंदेल 3-    संतकबीर नगर- सांथा विकास खंड- पसाई ग्राम पंचायत- सुमन कुमारी-राधिका प्रथम पुरस्कार- एक-एक लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार- 50-50 हजार रुपये व तृतीय पुरस्कार- 25-25 हजार रुपये व प्रमाण पत्र, अंगवस्त्र, ट्रॉफी व स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोले – ‘यूपी दिवस’ केवल उत्सव नहीं, प्रदेश की पहचान और सामर्थ्य का वैश्विक मंच बनेगा

  हर जिले में होंगे आयोजन, उत्कृष्ट नागरिक होंगे सम्मानित, जनपद की विकास यात्रा पर विशेष फिल्में प्रदर्शित होंगी गांव-कस्बों की प्रतिभा को मिलेगा राज्य मंच, जनपद से राजधानी तक सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं उद्यमी, किसान, खिलाड़ी, वैज्ञानिक और महिलाएं होंगे सम्मानित, यूपी गौरव' बनेगा प्रेरणा का प्रतीक लखनऊ, उत्तर प्रदेश की स्थापना की स्मृति में आयोजित होने वाला उत्तर प्रदेश दिवस-2026 इस वर्ष और अधिक व्यापक, भव्य एवं वैश्विक स्वरूप में मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि 24 से 26 जनवरी, 2026 तक प्रस्तावित तीन दिवसीय समारोह के अंतर्गत राजधानी लखनऊ में मुख्य आयोजन के साथ-साथ प्रदेश के सभी जनपद मुख्यालयों, देश के सभी राजभवनों तथा विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों में भी यूपी दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। गुरुवार को तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के नागरिक आज देश-दुनिया के अनेक हिस्सों में अपनी पहचान बना चुके हैं। यूपी दिवस ऐसा अवसर बने, जो प्रवासी उत्तर प्रदेशवासियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े। इसके लिए सभी राजभवनों में संवाद स्थापित कर आयोजन सुनिश्चित किए जाएं। इन आयोजनों में प्रदेश सरकार के माननीय मंत्रीगण उपस्थित रहकर प्रवासी यूपीवासियों से संवाद करेंगे। मुख्यमंत्री ने विदेशों में भारतीय दूतावासों के माध्यम से भी यूपी दिवस आयोजन के लिए संवाद बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'यूपी दिवस' केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक चेतना, आर्थिक शक्ति और विकास यात्रा को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का माध्यम है। आयोजन गरिमामय, सुव्यवस्थित, नवाचारयुक्त और व्यापक जनभागीदारी से युक्त हों। मुख्यमंत्री ने जनपद, मंडल और राज्य स्तर पर गायन, नृत्य, वादन और नाट्य प्रतियोगिताओं के आयोजन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनपद स्तरीय समारोहों में जिले की विकास यात्रा पर केंद्रित विशेष फ़िल्म भी प्रदर्शित की जाये।यूपी दिवस के अवसर पर 'उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान', 'विश्वकर्मा श्रम सम्मान' और 'माटी कला बोर्ड सम्मान' प्रदान किए जाएंगे। उद्यमियों, खिलाड़ियों, महिलाओं, चिकित्सकों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को सम्मानित कर प्रदेश की प्रतिभा और परिश्रम को सम्मान दिया जाएगा। इसके साथ ही, प्रदेश की ऐतिहासिक और वैचारिक विरासत को जनमानस से जोड़ने के लिए धरती आबा बिरसा मुंडा, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी, सरदार वल्लभभाई पटेल, वंदे मातरम्-आनंद मठ और पुण्य श्लोका अहिल्याबाई होल्कर से जुड़े नाट्य मंचनों का आयोजन किया जाएगा। भारतेंदु नाट्य अकादमी द्वारा वंदे मातरम् रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने पर आनंद मठ आधारित विशेष प्रस्तुति होगी। युवाओं और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के छात्र वंदे मातरम्' तथा विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' थीम पर नृत्य-नाटिकाएं प्रस्तुत करेंगे। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि इस वर्ष आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदेश की संस्कृति को प्रस्तुत करते हुए 3-डी और फाइबर मॉडल, वर्चुअल रियलिटी, 360 डिग्री टूर, लघु फिल्में, क्विज प्रतियोगिताएं और छायाचित्र प्रदर्शनी आयोजित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'यूपी दिवस' को जनउत्सव का स्वरूप देने के लिए ओपन माइक, नुक्कड़ नाटक, कठपुतली थियेटर, रंगोली, पारंपरिक परिधान प्रतियोगिता, पाक-कला प्रतियोगिता और कला ग्राम जैसे आयोजन होंगे। आगरा, किराना, बनारस, हरिहरपुर, लखनऊ और रामपुर, हरिहरपुर और बदायूं जैसे प्रतिष्ठित संगीत घरानों की विशेष प्रस्तुतियां भी होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी दिवस-2026 प्रदेश की पहचान, आत्मगौरव और विकास यात्रा का प्रभावशाली प्रतीक बने। सभी कार्यक्रम समयबद्ध, समन्वित और उच्च गुणवत्ता के हों, ताकि यह आयोजन स्मरणीय और प्रेरणादायी जनउत्सव के रूप में स्थापित हो सके।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ग्लोबल आईटी हब बनने की ओर अग्रसर

निर्यात आधारित आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से युवाओं के लिए लगातार बढ़ रहे हैं रोजगार के अवसर बेहतर होते इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश अनुकूल वातावरण से उत्तर प्रदेश आधुनिक प्रौद्योगिकी विकास की ओर लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ग्लोबल आईटी हब बनने की ओर अग्रसर है। लगातार बेहतर होते इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश अनुकूल वातावरण से प्रदेश आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात के क्षेत्र में भी तेजी से उभरते हुए, देश के अग्रणी राज्यों में सम्मिलित हो चुका है। वर्ष 2017 के बाद से प्रदेश ने आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। यह क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक देश के कुल आईटी निर्यात में प्रदेश की मौजूदा हिस्सेदारी को 05 से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक के स्तर पर ले जाया जाए। आईटी सेवाओं और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग के संयुक्त विकास ने उत्तर प्रदेश के निर्यात आधार को व्यापक बनाया है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र और लखनऊ जैसे शहर अब आईटी सेवाओं, मोबाइल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और डेटा आधारित उद्योगों के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। प्रदेश में स्थापित हो रही असेम्बली यूनिट्स, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और आईटी सर्विस कंपनियों ने निर्यात क्षमता को नई मजबूती दी है। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्यात लगभग 3,862 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 44,744 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी प्रकार से आईटी आधारित सेवाओं का निर्यात भी 55,711 करोड़ रुपये से बढ़कर 82,055 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह प्रदेश में विकसित हो रहे प्रौद्योगिकी आधारित औद्योगिक ढांचे और वैश्विक कंपनियों के बढ़ते भरोसे को भी दर्शाती है। इस विकास का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिल रहा है। आईटी और इलेक्ट्रॉनिक निर्यात आधारित उद्योगों से बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। तकनीकी प्रशिक्षण कौशल, विकास कार्यक्रम और स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार से युवा अब केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं बल्कि नवाचार और उद्यमिता के वाहक बन रहे हैं। योगी सरकार द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों ने निवेश प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया है। सिंगल विंडो सिस्टम, बेहतर कानून व्यवस्था, मजबूत लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक इन्फ्रास्ट्रक्चर ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बना दिया है।

राप्तीनगर में सीएम ग्रिड योजना के तहत बनी स्मार्ट सड़क का मुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण

गोरखपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राप्तीनगर में सीएम ग्रिड (चीफ मिनिस्टर ग्रीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट) योजना के तहत राप्तीनगर में बनी स्मार्ट सड़क का निरीक्षण किया। निर्माण कार्य पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि बेहतरीन यूटिलिटी डक्ट से युक्त यह स्मार्ट सड़क नगर निगम की निश्चित आय का जरिया भी बनेगी। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने नगर आयुक्त से इसके सभी पहलुओं, पार्किंग, बेंच, यूटिलिटी डक्ट, ग्रीनरी, बनाने की तकनीकी आदि की विस्तार से जानकारी ली। नगर आयुक्त ने बताया कि पहले चरण में यह स्मार्ट सड़क पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बनी है। निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत में सीएम योगी ने कहा कि स्मार्ट सड़क में स्टॉर्म वाटर मैनेजमेंट के साथ ही यूटिलिटी डक्ट भी बनाया गया है। इससे पाइपलाइन डालने के लिए बार बार सड़क की खोदाई नहीं करनी पड़ेगी। यह स्मार्ट सड़क इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यूटिलिटी डक्ट नगर निगम के लिए निश्चित आय का आधार भी बनेगा। यूटिलिटी डक्ट का उपयोग जिन संस्थाओं द्वारा अपने कार्य के लिए पाइपलाइन (बिजली, गैस) आदि डालने के लिए किया जाएगा, वे नगर निगम को इसके लिए किराया देंगी। सीएम ग्रिड की स्मार्ट सड़क नगर निगम को सालाना दो करोड़ रुपये का आय कराने में सफल होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा यह स्मार्ट सड़क मॉडल रोड है। इससे नगर निकायों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। सीएम योगी ने कहा कि सामूहिक प्रयास के अच्छे परिणाम सामने आते हैं। जब सबका सहयोग मिलता है तो महानगर, जनपद और प्रदेश विकास की बुलंदियों को छूता है। गोरखपुर में विकास इसी रूप में देखने को मिल रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 12 बजे करेंगे वर्चुअली उद्घाटन, 11 जनवरी तक चलेगा मुकाबला

उद्घाटन साराह में उत्तर प्रदेश वॉलीबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक  भी रहेंगे मौजूद चैम्पियनशिप में स्विट्जरलैंड से अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल महासंघ के आब्जर्वर भी रहेंगे मौजूद   वाराणसी 72 वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का उद्घाटन 4 जनवरी को काशी के सिगरा स्टेडियम में होगा। वाराणसी के सांसद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअली इस प्रतियोगिता का उद्घाटन 12 बजे करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्टेडियम में मौजूद रहकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाएंगे। उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश वॉलीबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक  भी मौजूद रहेंगे। सिगरा स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में यह प्रतियोगिता 11 जनवरी तक चलेगी। इसमें देश भर से 58 टीमें (पुरुष एवं महिला ) भाग ले रही है । चैम्पियनशिप में स्विट्जरलैंड से अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल महासंघ के आब्जर्वर भी मौजूद रहेंगे।  उत्तर प्रदेश वॉलीबॉल संघ के सचिव सुनील कुमार तिवारी ने बताया कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पहली बार सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप हो रही है। इसमें 30 पुरुष और 28 महिला टीमें भाग लेंगीं। जिला वॉलीबॉल संघ के अध्यक्ष अभिमन्यु सिंह ने बताया कि रेलवे के अलावा सेना के तीनों अंगों (जल,थल, नभ ) को मिलाकर बनी टीम भी प्रतिभाग करेगी। प्रतियोगिता 11 जनवरी को समाप्त होगी। उन्होंने जानकारीदी कि उत्तर प्रदेश में कई वर्षो (1984 ) के बाद ये चैंपियनशिप होनी जा रहा है। पूर्वांचल के खेल प्रेमियों के लिए ये चैम्पियनशिप बहुत बड़ा आयोजन है। इसमें से सेलेक्ट किये हुए खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। आयोजन समिति के अध्यक्ष और वाराणसी के मेयर अशोक तिवारी ने बताया कि साई और खेल विभाग उत्तर प्रदेश के बीच सिगरा स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स सेण्टर ऑफ़ एक्ससिलेन्स के बीच एमओयू होना है। आयोजन समिति की ओर से खेल का शुभांकर (नंदी और डॉलफिन ) भी जारी किया जा चूका है 72 वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में देश भर के लगभग 1044 से अधिक  खिलाड़ी भाग लेंगे,जिसमें 540 पुरुष खिलाड़ी और 504 महिला ख़िलाड़ी हैं। राष्ट्रीय स्तर के इस उद्घाटन समारोह में सभी खेलो के राष्ट्रीय और अन्तर्रष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ ही पद्मश्री सम्मान से सम्मानित और गणमान्य लोगो को भी आमंत्रित किया गया है। आयोजन समिति के अध्यक्ष और महापौर अशोक तिवारी ने कहा कि यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि काशी को ‘स्पोर्ट्स टूरिज्म हब’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि काशी की यह मेजबानी आने वाले वर्षों में और बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का मार्ग प्रशस्त करेगी।