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सदन में तकरार: भाषणबाजी पर नाराज हुए ओम बिरला, मंत्री को लगाई फटकार

नई दिल्ली लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल में सदस्यों से संक्षिप्त प्रश्न पूछने और मंत्रियों से छोटे जवाब देने का अपना आग्रह दोहराते हुए मंगलवार को कहा कि क्या मंत्री 'संक्षिप्त जवाब देने की कोशिश नहीं कर सकते।' प्रश्नकाल में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा तेलुगुदेशम पार्टी (तेदेपा) के सदस्य जीएम हरीश बालयोगी के पूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। इस दौरान बिरला ने उन्हें टोकते हुए कहा, 'आप भाषण क्यों दे रहे हैं। आप तो जवाब दो।' इसके बाद जब वर्मा दूसरे पूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे तो अध्यक्ष ने कहा, 'आप लोग संक्षिप्त जवाब देने की कोशिश नहीं कर सकते। मैंने कितनी बार सदन में यह आग्रह किया है। हर बार विस्तृत जवाब देते हो आप। जितना (सदस्य) पूछें आप उतना जवाब दे दो।' इससे पहले प्रश्नकाल शुरू होने के दौरान भी बिरला ने सदस्यों से संक्षिप्त प्रश्न पूछने और मंत्रियों से उनके संक्षिप्त जवाब देने का अपना आग्रह दोहराया। उन्होंने कहा, 'मेरा प्रयास है कि प्रश्नकाल में सूचीबद्ध सभी 20 पूरक प्रश्न आ जाएं।' उन्होंने दोपहर 12 बजे प्रश्नकाल समाप्त होने से पहले एक सदस्य को आज का अंतिम पूरक प्रश्न पूछने का निर्देश देते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा, 'समय कम है, मत्रीजी को लंबा जवाब देना है।' विपक्ष के आठ लोकसभा सदस्यों का निलंबन रद्द लोकसभा ने मंगलवार को उन आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन रद्द कर दिया जिन्हें संसद के बजट सत्र के पहले चरण में सदन की अवमानना के मामले में निलंबित किया गया था। बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी थी। सदन में कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश ने आसन से निलंबन रद्द करने का अनुरोध किया और विपक्षी सदस्यों के आचरण पर खेद भी जताया। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने निलंबन खत्म करने का प्रस्ताव सदन में रखा जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दी। क्यों हुआ था निलंबन बजट सत्र के पहले चरण के दौरान तीन फरवरी को आसन की ओर कागज फेंकने के बाद, सदन की अवमानना के मामले में विपक्ष के आठ सांसदों को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया था। निलंबित सांसदों में कांग्रेस के मणिकम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, प्रशांत पडोले, किरण कुमार रेड्डी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एस. वेंकटेशन शामिल हैं। निलंबन के बाद से ये सांसद कार्यवाही वाले दिन संसद के मकर द्वार पर धरना दे रहे थे।  

ओम बिरला पर विपक्ष का तंज: शेरो-शायरी के जरिए साधा निशाना

नई दिल्ली संसद में बजट सत्र के दूसरे चरण की कार्यवाही के दौरान बुधवार को लोकसभा में जबरदस्त हंगामा होने के पूरे आसार है। सदन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा जारी है। आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चर्चा में हिस्सा लेंगे। इससे पहले मंगलवार को दोनों ओर से आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी रहा। विपक्ष ने जहां ओम बिरला पर सरकार की आवाज बनने जैसे गंभीर आरोप लगा दिए, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने कहा है कि ओम बिरला ने कभी पक्षपातपूर्ण व्यवहार नहीं किया। हंगामे के बाद दोनों सदनों की कार्रवाई बुधवार तक के लिए स्थापित कर दी गई थी। ओम बिरला को पद से हटाने पर तुला विपक्ष, चाहिए होंगे कितने वोट? बता दें कि ओम बिरला के खिलाफ यह अविश्वास प्रस्ताव बीते फरवरी माह में ही लाया गया था जिस पर लगभग 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। इस प्रस्ताव पर बहस के लिए 10 घंटे का समय तय किया गया है, जिसके बाद इस पर सांसदों के मत लिए जाएंगे। प्रस्ताव पास कराने के लिए विपक्ष को सिंपल मेजोरिटी यानि साधारण बहुमत की आवश्यकता है। तू लाख बेवफा है मगर सर उठा के चल… TMC सांसद का शायराना अंदाज टीएमसी संसद सयानी घोष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि सरकार सदन में बेरोजगारी, एपस्टीन फाइल्स, SIR जैसे मुद्दों पर चर्चा नहीं होने देती है। वहीं ओम बिरला के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें खेद हैं कि वह पहली बार सांसद बनी हैं लेकिन उन्हें ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करता पड़ा है। इस दौरान उनका शायराना अंदाज देखने भी को मिला। उन्होंने अपना वक्तव्य खत्म करते हुए कहा, "तू लाख बेवफा है मगर सर उठा के चल, दिल रो पड़ेगा तुझको पशेमां देखकर।" किसी नेता के अहंकार की संतुष्टि के लिए लाया गया है प्रस्ताव- रविशंकर प्रसाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाया गया प्रस्ताव उनके खिलाफ अविश्वास के लिए नहीं, बल्कि 'किसी' के अहंकार की संतुष्टि के लिए लाया गया है। विपक्ष द्वारा बिरला के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए प्रसाद ने कहा, ''लोकसभा अध्यक्ष के पद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को किसी के अहंकार की संतुष्टि का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।'' प्रसाद ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा, ''यह प्रस्ताव बिरला के खिलाफ अविश्वास के लिए नहीं, बल्कि किसी के अहं की संतुष्टि के लिए लाया गया है।'' कांग्रेस ने ओम मोदी की गैरमौजूदगी पर उठाए सवाल कांग्रेस सांसद के सी वेणुगोपाल ने लोकसभा में पीएम मोदी की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए हैं। अपना नाम लिए जाने पर भड़के राहुल गांधी लोकसभा में चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष द्वारा बार बार अपना नाम लिए जाने पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भड़क उठे। उन्होंने कहा है कि देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब नेता प्रतिपक्ष को सदन में बोलने नहीं दिया गया। और बार बार मेरा नाम लिया जा रहा है।

AI वीडियो विवाद: स्पीकर ने कांग्रेस मीडिया सेल को नोटिस भेजा, 8 पदाधिकारियों से जवाब तलब

 नई दिल्ली लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के AI वीडियो प्रकाशित करने के आरोप में लोकसभा विशेषाधिकार विभाग ने कांग्रेस मीडिया सेल को नोटिस जारी किया है. नोटिस में तीन दिनों के अंदर सभी नेताओं के अपना जवाब देने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा सदन की अवमानना और विशेषाधिकार उल्लंघन के मामले में कार्रवाई करने की बात कही गई है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीजेपी सांसद विष्णु दत्त शर्मा की शिकायत के आधार पर लोकसभा के विशेषाधिकार विभाग ने कांग्रेस सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत और एआईसीसी के आठ अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का नोटिस जारी किया है. सचिवालय ने ये कदम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ एक अपमानजनक कैरिकेचर और एआई वीडियो प्रकाशित करने के बाद उठाया गया है. लोकसभा सचिवालय के निदेशक बाला गुरु जी ने 11 फरवरी को ये आधिकारिक पत्र भेजकर सभी आरोपियों से स्पष्टीकरण मांगा है. लोकसभा सचिवालय द्वारा भेजे गए इस पत्र में सुप्रिया श्रीनेत और अन्य पदाधिकारियों को अपनी सफाई पेश करने के लिए तीन दिनों का वक्त दिया गया है. नोटिस में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि इस संचार की प्राप्ति के तीन दिनों के अंदर अपना जवाब प्रस्तुत करें. ये जवाब लोकसभा अध्यक्ष के विचारार्थ पेश किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी. सचिवालय ने प्राप्तकर्ता से पत्र की प्राप्ती (Receipt) भी तुरंत भेजने का अनुरोध किया है, ताकि कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके. क्या मामला आपको बता दें कि ये पूरा विवाद सोशल मीडिया पर साझा की गई एक सामग्री से जुड़ा है, जिसे लोकसभा अध्यक्ष की गरिमा के खिलाफ माना गया है. शिकायतकर्ता विष्णु दत्त शर्मा का आरोप है कि कांग्रेस के मीडिया विभाग ने जानबूझकर भ्रामक एआई वीडियो और अपमानजनक तस्वीरों का सहारा लिया. इस मामले को सदन की अवमानना की श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि ये सीधे तौर पर संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के सम्मान से जुड़ा है. जाने क्या हैं मामला  पीएम मोदी-स्पीकर की AI जेनरेटेड वीडियो को लेकर कांग्रेस के 9 नेताओं को नोटिस पीएम मोदी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की AI जेनरेटेड वीडियो को लेकर लोकसभा सचिवालय ने कांग्रेस संचार विभाग के 9 नेताओं को विशेषाधिकार हनन और कंटेम्प ऑफ हाउस का नोटिस दिया है. जिन नेताओं को नोटिस दिया गया है, उनमें जयराम रमेश, पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत, संजीव सिंह समेत नौ नेता शामिल हैं. इनलोगों से तीन दिन में जवाब मांगा गया है. कांग्रेस के इन नेताओं पर पीएम मोदी और स्पीकर ओम बिरला का एक AI जेनरेटेड वीडियो साझा करने का आरोप है. जयराम रमेश, पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत और संजीव सिंह सहित नौ नेताओं से 3 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है. दरअसल, सितंबर 2025 में बिहार कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल से एक 36 सेकंड का AI वीडियो पोस्ट किया गया था. इसमें पीएम मोदी की दिवंगत माताजी को उनकी राजनीति की आलोचना करते हुए दिखाया गया था. वहीं, पिछले साल दिसंबर में लोकसभा स्पीकर का एक डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्हें ‘आर्थिक सहायता स्वावलंबन’ योजना के तहत गरीब परिवारों को 12,000 रुपये देने की घोषणा करते हुए दिखाया गया था. जांच में फर्जी पाया गया वीडियो पीआईबी फैक्ट चेक और अन्य जांच में पाया गया कि यह वीडियो पूरी तरह फर्जी था. ओरिजिनल वीडियो 1 दिसंबर 2025 का था, जिसमें स्पीकर दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि दे रहे थे, लेकिन AI के जरिए उनकी आवाज और ऑडियो बदल दिया गया था. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत FIR दर्ज की थी. पटना हाई कोर्ट ने कांग्रेस को यह वीडियो सोशल मीडिया से तुरंत हटाने का निर्देश दिया था.

कांग्रेस सांसदों का विवादित कदम: ओम बिरला के साथ गाली-गलौज, रिजिजू ने जताया विरोध

नई दिल्ली संसद के बजट सत्र में लगातार जारी हंगामे के बीच बुधवार को केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने कांग्रेस सांसदों पर बड़ा आरोप लगाया है। संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि कम से कम 20-25 कांग्रेस सांसद लोकसभा स्पीकर के चेंबर में घुस गए और उन्हें गालियां दीं। उन्होंने यह आरोप लगाए हैं कि इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल समेत कई सीनियर कांग्रेस नेता भी वहां मौजूद थे। बुधवार को संसद परिसर में पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए किरन रिजिजू ने कहा, “स्पीकर साहब बहुत आहत हैं। मैंने उनसे बात की है। स्पीकर साहब के चेंबर में जाकर गाली गलौज किया, बुरा भला कहा। फिर स्पीकर साहब ने जो फैसला सुनाया उसको नहीं माने, और फिर राहुल गांधी कहते हैं कि उन्हें सदन में बोलने के लिए किसी की परमिशन नहीं चाहिए, वो मर्जी से बोलेंगे। ये सब रिकॉर्ड पर है। लेकिन सदन में चेयर की अनुमति के बिना नहीं बोल सकते।” केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, “स्पीकर के चेंबर में 20,25 कांग्रेस के MPs जब घुसे, तो मैं भी वहां गया। उन्होंने जो गाली गलौज किया स्पीकर के साथ, वह मैं आपको बता नहीं सकता। स्पीकर बहुत नरम आदमी हैं। नहीं तो और कठोर कदम उठाया जा सकता था। यह कोई तरीका नहीं होता।” रिजिजू ने कहा, “जब स्पीकर को गाली दी जा रही थी तब वहां प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं, वेणुगोपाल भी मौजूद थे, कांग्रेस के सीनियर नेता वहां मौजूद थे और इसे बढ़ावा दे रहे थे।” विपक्ष ने पेश किया है अविश्वास प्रस्ताव इससे पहले विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार को लोकसभा महासचिव को सौंपा है। ओम बिरला पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन संचालित करने, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे इल्जाम लगाने और अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया है कि विपक्ष की ओर से नोटिस सौंपे जाने के बाद लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने फैसला किया है कि वह मामले का निपटारा होने तक आसन पर नहीं बैठेंगे और उन्होंने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया कि नोटिस की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। सूत्रों ने यह भी कहा कि नोटिस पर विचार किया जाएगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सौ से ज्यादा सांसदों ने किए हस्ताक्षर जानकारी के मुताबिक निचले सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को ओम बिरला को पद से हटाने से संबंधित नोटिस सौंपा। नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कई अन्य विपक्षी दलों के करीब 120 सांसदों से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। ओम बिरला पर क्या आरोप? यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) के तहत सौंपा गया है। विपक्ष ने नोटिस में कहा, ''बीते दो फरवरी को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते समय अपना भाषण पूरा नहीं करने दिया गया। यह कोई अकेली घटना नहीं है। करीब-करीब हमेशा ही ऐसा होता है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जाता।'' उन्होंने दावा किया कि गत 3 फ़रवरी को, विपक्ष के आठ सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए ''मनमाने ढंग से'' निलंबित कर दिया गया और उन्हें केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए दंडित किया जा रहा है। विपक्ष ने ओम बिरला द्वारा सदन में पांच फरवरी को दिए गए उस वक्तव्य का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि चार फरवरी को कांग्रेस के कई सदस्य सदन के नेता (प्रधानमंत्री) की सीट के पास पहुंचकर किसी अप्रत्याशित घटना को अंजाम देना चाहते थे, इसलिए उनके अनुरोध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में नहीं आए।

न सरकार सुनी, न स्पीकर ने रोका! थरूर का बड़ा आरोप—ओम बिरला और निर्मला सीतारमण पर साधा निशाना

नई दिल्ली लोकसभा में सदन चलाने के लिए सुलह की बातचीत के बाद भी विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच सोमवार को जमकर नोकझोंक हुई जिसके कारण सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। इस बीच, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर संसद चलाने में रुचि नहीं लेने का आरोप लगाया और कहा कि लोकसभा में बार-बार व्यवधान के कारण वह केंद्रीय बजट 2026-27 पर बोलने में असमर्थ रहे। सदन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए थरूर ने कहा कि वह बजट चर्चा में भाग लेने के लिए तैयार होकर आए थे लेकिन उन्हें ऐसा करने की बहुत कम गुंजाइश मिली। उन्होंने कहा,''ऐसा लगता है कि सरकार और लोकसभा अध्यक्ष को सदन चलाने में कोई दिलचस्पी नहीं है।''   थरूर ने सदन की कार्यवाही के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए और कहा कि इसका मतलब साफ है कि सदन में स्थगन पहले से ही तय था। उन्होंने कहा, "वित्त मंत्री सदन में बैठी ही नहीं थी।" उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि उन्हें पता था कि सदन स्थगित कर दिया जाएगा।" संसद के दोनों सदनों में सोमवार को केंद्रीय बजट 2026-27 पर चर्चा होने वाली थी क्योंकि सीतारमण ने 1 फरवरी को बजट पेश किया था लेकिन यह चर्चा नहीं हो सकी। 2 बजे से पहले भी दो बार स्थगन लोकसभा में दो बार के स्थगन के बाद दोपहर 2 बजे जैसे ही फिर सदन की कार्यवाही शुरु हुई और पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने बजट पर चर्चा की शुरुआत कराने के लिए कांग्रेस के शशि थरूर का नाम लिया। उन्होंने थरूर का नाम लेते हुए उन्हें बजट पर बोलने के लिए कहा लेकिन थरूर ने कहा कि विपक्ष के नेता सदन में बोलना चाहते हैं। यह उनका अधिकार है, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है। इस पर पीठासीन संध्या राय ने कहा कि सबको बोलने का अधिकार है लेकिन इस समय सिर्फ बजट पर ही बोलना है। सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा: राहुल गांधी इसी बीच सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि करीब एक घंटा पहले वह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिले थे और उन्होंने कहा था कि वह उन्हें सदन में कुछ मुद्दों पर बोलने की अनुमति देंगे लेकिन सदन की कार्यवाही शुरु होते ही सरकार अपनी बात से पीछे हट गई है। राहुल ने आरोप लगाया कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा है। इस पर पीठासीन अधिकारी ने व्यवस्था दी कि सदन में सिर्फ बजट पर ही बोलना है। इसके अलावा आपको अन्य किसी विषय पर नहीं बोल सकते क्योंकि किसी अन्य विषय पर बोलने के लिए आपकी तरफ से कोई नोटिस नहीं है इसलिए आप सिर्फ बजट पर अपनी बात कह सकते हैं। उनका कहना था कि बजट के अलावा किसी और विषय पर सदन में बोलना है तो पहले नोटिस देना पड़ेगा। सदन को गुनराह कर रहे राहुल: किरेन रिजिजू इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने हस्तक्षेप करते हुए कहा "जिस मुलाकात की बात विपक्ष के नेता कर रहे हैं उस दौरान वह भी अध्यक्ष के कमरे में थे। राहुल गांधी के साथ उनकी पार्टी के नेता के सी वेणुगोपाल भी थे लेकिन उस समय अध्यक्ष ने कहा था कि यदि शांतिपूर्ण तरीके से सदन चलाने पर सहमति बनती है तो बोलने दिया जाएगा। आप जो बोलना चाहते हैं उस पर बोलने की बात नहीं हुई थी।" रिजिजू ने कहा, “राहुल गांधी सदन में इस मुलाकात में हुई बात को लेकर जो कुछ कह रहे हैं ऐसी कोई बात अध्यक्ष के कमरे में नहीं हुई थी। अध्यक्ष ने कहा कि यदि सबकी सहमति बनती है और सदन शांति से चलता है तो देखेंगे। यह बात हुई थी।” थरूर ने अपना नाम आने के बाद भी नहीं बोला इतना के बाद राय ने फिर से डॉ थरूर को बजट पर बोलने के लिए कहा लेकिन उन्होंने बजट पर कुछ नहीं बोला। इसी बीच, दोनों तरफ से तकरार तेज हो गयी तो पीठासीन अधिकारी ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले 11 बजे अध्यक्ष ओम बिरला ने जैसे ही प्रश्नकाल शुरु किया तो विपक्षी दलों के सदस्यों ने हंगामा शुरु कर दिया जिसके कारण उन्हें 12 बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। फिर 12 बजे सदन शुरु हुआ तो विपक्ष के तेवरों में कोई बदलाव नहीं आया जिसके कारण सदन को दो बजे तक स्थगित किया गया था।

ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल, जानिए वजह

नई दिल्ली संसद का बजट सत्र 2026 अब तक काफी हंगामेदार रहा है. हर दिन सदन की कार्यवाही विपक्षी सांसदों के चलते स्थगित करनी पड़ रही है. आज सोमवार को भी लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई. वहीं, सूत्रों से जानकारी मिली है कि विपक्षी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई है. सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष इसे बजट सेशन 2026 के दूसरे फेज में पेश करेगा, क्योंकि इसके लिए उसे 20 दिन का नोटिस देना होता है. वहीं, इस फैसले के लिए जो वजहें बताई गई हैं, उनमें सबसे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की इजाजत नहीं देना; दूसरा चेयर पर बैठे पीठासीन अधिकारी द्वारा महिला सांसदों का नाम लिया जाना; तीसरा कुछ ट्रेजरी बेंच सांसदों को हमेशा सदन में प्रिविलेज दिया जाना; और आखिरी जिस तरह से 8 विपक्षी सांसदों को पूरे सेशन के लिए सस्पेंड किया गया शामिल है. लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला तब हुआ जब विपक्ष ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में बोलने नहीं दिया गया. बता दें, पिछले हफ्ते, संसद के निचले सदन में उस समय नारेबाजी और हंगामा हुआ जब राहुल गांधी ने चीन के साथ 2020 के गतिरोध पर चर्चा करने के लिए पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की 'अनपब्लिश्ड' यादों का जिक्र किया. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने एक आदेश पारित किया था, जिसमें राहुल गांधी से 'अनपब्लिश्ड' लिटरेचर का हवाला न देने को कहा गया था और पढ़ने की अनुमति देने से मना कर दिया था. वहीं, 5 फरवरी को स्पीकर बिरला ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का आग्रह किया था, ताकि कोई भी अप्रिय घटना न हो, क्योंकि उन्हें जानकारी मिली थी कि कुछ कांग्रेसी सांसद सदन में पीएम मोदी की सीट तक आ सकते हैं और 'ऐसी घटना कर सकते हैं जो पहले कभी नहीं हुई.' आज सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही में कोई कानूनी काम नहीं हुआ, क्योंकि स्पीकर बिरला ने विपक्ष के भारत-US अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क पर चर्चा की मांग को लेकर नारेबाजी के बीच सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया, जिससे प्रश्नकाल में रुकावट आई. आज सदन की कार्यवाही शुरू होने के करीब सात मिनट बाद ही स्थगित कर दी गई. जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्षी बेंचों से नारेबाज़ी जारी रही, सांसदों ने मांग की कि उनके मुद्दों पर ध्यान दिया जाए. हालांकि, स्पीकर बिरला ने सांसदों से अपील की कि वे मर्यादा बनाए रखें, क्योंकि किसी भी सांसद को सदन में बोलने पर कोई रोक नहीं होगी. सदन में रुकावट डालने के लिए विपक्षी सांसदों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि क्या आप सदन को स्थगित करना चाहते हैं? क्या आप काम नहीं करना चाहते? सदन बहस और चर्चा के लिए है, कृपया मुद्दों पर बात करें और उन्हें उठाएं. सभी को बोलने का मौका मिलेगा; किसी को भी बोलने से नहीं रोका जाएगा. लगातार नारेबाजी जारी रहने से स्पीकर बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी. संसद के दोनों सदनों में सोमवार को यूनियन बजट 2026-27 पर चर्चा जारी रहने वाली थी, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश किया था. सीतारमण ने लगातार नौवीं बार लोकसभा में यूनियन बजट 2026-27 पेश किया.

‘पीएम मोदी के साथ कुछ भी हो सकता था’, स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा में किया बड़ा खुलासा

नई दिल्ली  संसद के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है जब लोकसभा अध्यक्ष ने खुद यह स्वीकार किया है कि देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा और सम्मान को सदन के भीतर ही खतरा था. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने ही कल (बुधवार) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में आने से रोका था. बिरला ने आशंका जताई कि अगर पीएम मोदी कल सदन में आते, तो उनके साथ कोई “अप्रत्याशित और अप्रिय घटना” घट सकती थी. स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि उन्हें खुफिया जानकारी और सदन के भीतर के हालात से यह इनपुट मिला था कि कांग्रेस के सांसद प्रधानमंत्री के आसन (कुर्सी) तक जाकर हंगामा करने और किसी अनहोनी को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने कहा, “मेरे पास जानकारी आई कि कांग्रेस के सांसद पीएम के आसन पर जाकर अप्रत्याशित घटना कर सकते थे. मुझे डर था कि प्रधानमंत्री के साथ कुछ भी हो सकता है. अगर वह घटना हो जाती, तो वह बेहद अप्रिय होती और लोकतंत्र के लिए काला दिन साबित होती.” ‘मैंने पीएम से आग्रह किया: आप मत आइए’ ओम बिरला ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया. उन्होंने कहा, “इस संभावित खतरे और टकराव को टालने के लिए मैंने खुद पीएम से आग्रह किया कि वो सदन में न आएं.” बता दें क‍ि बुधवार शाम को विपक्ष की महिला सांसदों ने पीएम मोदी की खाली कुर्सी को घेर लिया था, जिसके बाद बीजेपी ने आरोप लगाया था कि विपक्ष पीएम पर ‘हमला’ करना चाहता था. अब स्पीकर के इस बयान ने बीजेपी के उन आरोपों की पुष्टि कर दी है कि कल सदन के भीतर का माहौल प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिहाज से सामान्य नहीं था. बीजेपी ने पूछा- क्‍या पीएम पर हमला करने का इरादा था ? बीजेपी सांसद मनोज तिवारी और बृजमोहन अग्रवाल ने विपक्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में सेंध लगाने और उन पर ‘हमला’ करने की साजिश का बेहद गंभीर आरोप लगाया था. मनोज तिवारी ने तीखा सवाल किया कि विपक्षी सांसद हार की बौखलाहट में पीएम की कुर्सी तक क्यों आए? क्या इनका इरादा पीएम पर हमला करना था? वहीं, बृजमोहन अग्रवाल ने इसे कांग्रेस की ‘प्री-प्लान’ साजिश करार दिया. उन्होंने कहा कि महिला सांसदों को ढाल बनाकर पीएम को घेरना और भाषण से रोकना न केवल सुरक्षा से खिलवाड़ है, बल्कि पूरे सदन की अवमानना है, जिस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.

सदन में हंगामा पड़ा भारी, स्पीकर ओम बिरला का अल्टीमेटम— बात करनी है तो बाहर जाएं

नई दिल्ली लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को सदन में बातचीत कर रहे कुछ सदस्यों को टोकते हुए कहा कि उन्हें यदि लंबी वार्ता करनी है तो सदन से बाहर जाकर करनी चाहिए। प्रश्नकाल के दौरान बिरला ने कहा कि वह देख रहे हैं कि कुछ सदस्य लगातार एक दूसरे से बातचीत कर रहे हैं और व्यवधान पैदा कर रहे हैं। पीटीआई भाषा के अनुसार, उन्होंने कहा, 'इस तरह का व्यवहार सदन की मर्यादा और गरिमा के विरुद्ध है। जो सदस्य लंबी बातचीत करना चाहते हैं वह लोकसभा कक्ष से बाहर जाकर बातचीत कर सकते हैं।' अध्यक्ष ने कहा कि सदन में संक्षिप्त बातचीत तो की जा सकती है, लेकिन लंबी-लंबी वार्ताओं की अनुमति नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आगे से वह बातचीत करने वाले सदस्यों के नाम आसन से पुकारेंगे। बिरला ने कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल का नाम पुकारते हुए कहा कि वह अपने साथी सांसदों से बातचीत नहीं करें। इससे पहले प्रश्नकाल शुरू होने पर बिरला ने यह भी कहा कि अब से वह प्रयास करेंगे कि सदन में प्रश्नकाल में सूचीबद्ध सभी 20 प्रश्न पूछे जा सकें। जब कुछ सदस्यों ने पूरक प्रश्न पूछने की मांग की तो बिरला ने कहा कि इस तरह वह सभी सदस्यों को पूरक प्रश्न पूछने की अनुमति देंगे तो जिन सदस्यों के प्रश्न सूचीबद्ध हैं, उनके साथ अन्याय होगा। प्रश्नकाल के बाद बिरला ने इस बात का उल्लेख किया कि सदस्यों को आर्थिक समीक्षा की डिजिटल प्रति उनके व्हाट्एसप पर भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से कई परिवर्तन किए गए हैं जो आने वाले समय में नजर आएंगे। जेब में हाथ डालकर बात करने पर भी भड़के बिरला ने जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके को जेब में हाथ डालकर बोलने पर टोका को सांसद कांग्रेस सांसद के सी वेणुगोपाल को साथी सांसदों से बात करने से भी रोका। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान जब एक सवाल का जबाब देने के लिए जनजातीय राज्यमंत्री दुर्गादास उइके खड़े हुए तो वह जेब में हाथ डाले हुए थे। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि मंत्रीजी जेब में हाथ डालकर मत बोलिए। मंत्री ने इसे स्वीकार किया और जेब से हाथ निकाल कर अपना जबाब पूरा किया।  

86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष का संबोधन

लोकसभा अध्यक्ष बोले, यूपी ने सुशासन, सामाजिक कल्याण, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की लोकतांत्रिक संस्थाओं को जवाबदेह, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने के संकल्प पर दिया जोर लोकसभा अध्यक्ष ने बैठकों और सकारात्मक बहस पर दिया जोर, डिजिटलाइजेशन, एआई और रिसर्च से बढ़ेगी क्षमता लखनऊ, 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी, जवाबदेह, पारदर्शी तथा जन-आकांक्षाओं के अनुरूप बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पीठासीन अधिकारी सम्मेलनों के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता की आशाओं और आकांक्षाओं से जोड़ने हेतु व्यापक विचार-विमर्श हुआ है और इन चर्चाओं से ठोस परिणाम भी सामने आए हैं। अब समय है कि नवाचार, संवाद और प्रौद्योगिकी के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता के और नजदीक लाया जाए। समारोह में अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देशभर से आए सम्मानित सदस्यों का हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक मूल्य सशक्त हुए हैं। राज्य ने सुशासन, सामाजिक कल्याण, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। ओम बिरला ने कहा कि सम्मेलन के दौरान सभी पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने लोकतंत्र को सार्थक चर्चा के माध्यम से और मजबूत बनाने तथा विधायी संस्थाओं को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए अपने-अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन चर्चाओं का उद्देश्य केवल संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि इनके ठोस और सकारात्मक परिणाम सामने आएं तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में नवाचार को अपनाया जाए। “विकसित भारत” की संकल्पना के अनुरूप आगे बढ़ने का आह्वान” लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस सम्मेलन में यह संकल्प लिया गया है कि सभी विधायी संस्थाएं “विकसित भारत” की संकल्पना के अनुरूप अपने-अपने राज्यों को विकसित राज्य बनाने की दिशा में संवाद और चर्चा को आगे बढ़ाएं। इसके लिए सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर निरंतर संवाद आवश्यक है। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यहां विजन-2047 समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर 36 घंटे तक लगातार चर्चा हुई, जिसमें विधायकों ने अपने विचार रखे। यह एक अनुकरणीय पहल है, जो यह दर्शाती है कि किस प्रकार सार्थक बहस और संवाद से दीर्घकालिक विकास की दिशा तय की जा सकती है। अब और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता ओम बिरला ने विधायी संस्थाओं में बैठकों की संख्या में आ रही कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में कई निर्णय लिए गए और उनके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए, लेकिन अब और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राज्य विधानमंडलों में न्यूनतम 30 दिन सदन की बैठकें हों, सकारात्मक चर्चा हो और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राज्य के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बने। उन्होंने कहा कि विधानसभाएं वह मंच हैं जहां अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज सदन के माध्यम से सरकार तक पहुंचती है। मतदाता यह अपेक्षा करता है कि उसका प्रतिनिधि उसकी समस्याओं और चुनौतियों को सदन में उठाएगा तथा समाधान की दिशा में पहल करेगा। न्यायपालिका का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे लोगों को न्यायालय पर विश्वास होता है, वैसे ही यदि विधायक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सदन में अपनी बात रखें तो विधानसभाओं के माध्यम से भी सार्थक परिणाम सामने आएंगे। प्रौद्योगिकी और एआई से विधायी संस्थाओं की क्षमता वृद्धि लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग आवश्यक है। आज सभी राज्य विधानसभाएं पेपरलेस हो चुकी हैं और पुरानी बहसों, बजट तथा विधायी कार्यवाहियों का डिजिटलीकरण किया गया है। इससे विधायकों की क्षमता-वृद्धि होगी और शोध-आधारित चर्चा को बल मिलेगा। इसी उद्देश्य से विधानसभाओं में रिसर्च विंग का गठन भी किया गया है। संसद और राज्यों की विधानसभाएं मिलकर कर रही हैं काम ओम बिरला ने कहा कि डिजिटलीकरण से कानून निर्माण के समय सार्थक बहस के लिए आवश्यक संदर्भ आसानी से उपलब्ध होंगे। मिलकर कार्य करने से जन प्रतिनिधियों में क्षमता निर्माण होगा और विधायिकाएं अधिक जवाबदेह बनेंगी। इससे शासन-प्रशासन पर निगरानी भी प्रभावी होगी। गतिरोध लोकतंत्र के लिए उचित नहीं सदनों में बार-बार होने वाले गतिरोध पर चिंता व्यक्त करते हुए ओम बिरला ने कहा कि सदन का प्रत्येक क्षण बहुमूल्य होता है। सदन चर्चा, संवाद और समिति कार्यों के लिए होते हैं, न कि गतिरोध के लिए। विरोध राजनीतिक रूप से हो सकता है, लेकिन शब्दों और तर्कों का मंच सदन होना चाहिए, ताकि सार्थक परिणाम निकलें और जनता का विश्वास बना रहे। ‘लेजिसलेटिव इंडेक्स’ पर जोर लोकसभा अध्यक्ष ने ‘लेजिसलेटिव इंडेक्स’ की अवधारणा पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे विधानसभाओं की उत्पादकता, कार्यप्रणाली और उपयोगिता का आकलन होगा। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से नई प्रक्रियाएं, नियम और नवाचार सामने आएंगे, जिससे विधायी संस्थाएं अधिक प्रभावी बनेंगी। अपने संबोधन के अंत में ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारी संविधान के अंतर्गत कार्य करते हैं और उन पर बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्हें निष्पक्ष और न्यायसंगत रहते हुए संस्थाओं को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन में हुई चर्चाओं से निकले संकल्पों को सभी प्रतिनिधि अपने-अपने राज्यों में आगे बढ़ाएंगे। यूपी परिवर्तन की धरती है, यहां से प्राप्त ऊर्जा को सभी प्रतिनिधि अपने-अपने राज्यों में लेकर जाएंगे लोकसभा अध्यक्ष ने सम्मेलन को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन नई दिशा, नए संकल्प और नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की ऊर्जा देता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और सभी सम्मानित अतिथियों का भी धन्यवाद किया और कहा कि उत्तर प्रदेश की यह भूमि सामाजिक, आध्यात्मिक और परिवर्तन की धरती है, जहां से प्राप्त ऊर्जा को सभी प्रतिनिधि अपने-अपने राज्यों में लेकर जाएंगे।

नई पीढ़ी के संस्कारों पर सवाल: स्पीकर बिरला ने कांग्रेस सांसद को लिया निशाने पर

नई दिल्ली लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को सदन में हंगामा करने के लिए कांग्रेस सदस्यों को आड़े-हाथों लिया और कहा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी के संस्कार सदन में नारेबाजी करने, तख्तियां लाने और मेजें ठोंकने के लिए नहीं रहे हैं, लेकिन इस दल के मौजूदा सांसदों का आचरण पूरा देश देख रहा है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के सदस्यों ने सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही बिहार में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विषय पर हंगामा किया जिससे कार्यवाही बाधित हुई। बिरला ने कहा, 'आपसे पहले भी कहा गया है कि प्रश्नकाल महत्वपूर्ण समय होता है। इसमें जनता के महत्वपूर्ण सवाल होते हैं और सरकार की जवाबदेही होती है…कई सांसदों ने कहा कि उनका प्रश्नकाल के दौरान मुश्किल से प्रश्न आता है, लेकिन आप लोगों का जिस तरह का व्यवहार होता है, वो संसद की गरिमा के अनुकूल नहीं है।' उन्होंने कांग्रेस का नाम लिए बगैर कहा, 'आप लोग इतने पुराने राजनीतिक दल के संसद सदस्य हो, जिसका इस सदन के अंदर गरिमा और मर्यादा का बहुत बड़ा योगदान रहा है। लेकिन लोग देखेंगे कि आप किस तरह से सदन में व्यवहार करते हैं, तख्तियां लेकर आते हैं और मेजें ठोकते हैं।' लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों का आह्वान किया कि वे संसद की गरिमा और मर्यादा को बनाए रखें। उनका कहना था, 'यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। लोकतंत्र के अंदर हमारी पारदर्शिता और जवाबदेही को दुनिया जानती है। आप इस तरह का आचरण करेंगे तो इसका लोकतांत्रिक संस्थाओं में क्या संदेश जाएगा।' बिरला ने कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से कहा, 'वेणुगोपाल जी, क्या आप अपने सांसदों को यही सिखाते हो। नारेबाजी करना, तख्तियां लाना, मेज थपथपाना आपकी पार्टी के संस्कार नहीं रहे हैं, लेकिन नई पीढ़ी जिस तरह का संस्कार पेश कर रही है वो पूरा देश देख रहा है।' उन्होंने कहा, 'आप लोग माननीय हैं, लाखों लोगों ने आपको चुनकर भेजा है…तख्तियां लेकर मेजें तोड़ने के लिए नहीं भेजा है।' बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि तख्तियां लेकर आने पर सदन नहीं चलेगा। लोकसभा अध्यक्ष ने इस बात का उल्लेख किया कि संसद पर जनता के करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल के बाद नियमों के तहत हर मुद्दे पर चर्चा का अवसर दिया जाएगा। हंगामा नहीं थमने पर उन्होंने कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक स्थगित कर दी। इससे पहले 21 जुलाई से शुरू हुए मॉनसून सत्र के पहले तीन दिन भी सदन में विपक्ष के हंगामे के कारण कामकाज बाधित रहा।