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सीएम योगी आदित्यनाथ का विजन होगा साकार, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेगा यूपी के रेशम उद्योग की पहचान

 लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सॉइल टू सिल्क के विजन को साकार करने के उद्देश्य से रेशम निदेशालय, यूपी में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का निर्माण कर रहा है। 75 लाख रुपये की लागत से रेशम निदेशालय के ऑफिस परिसर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है, जो इस माह के अंत तक पूरा हो जाएगा। रेशम निदेशालय का ये अनूठा प्रयास प्रदेश के पारंपरिक सिल्क उत्पाद को वैश्विक पहचान दिलाएगा, साथ ही रोजगार के नये अवसर भी पैदा करेगा। रेशम निदेशालय में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जो उत्तर प्रदेश के रेशम उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। यह सेंटर रेशम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया 'सॉइल टू सिल्क' को जीवंत रूप से प्रदर्शित करेगा, जहां किसानों से कारीगर तक की यात्रा को दर्शाया जाएगा। किस प्रकार मलबरी और टसर सिल्क के लिए रेशम के कीड़े शहतूत और अर्जुन के पेड़ों पर पाले जाते हैं।‌ उनके कोकून से रेशम निकाल कर धागा बनाना और धागों से हथकरघा और पॉवरलूम पर रेशम की कताई का काम किया जाता है। साथ ही सेंटर पर प्रदेश के उत्कृष्ट रेशम उत्पादों की बिक्री भी की जाएगी, जो अभी तक एक्सपोर्ट के माध्यम से अधिकतर विदेशों में भेजा जाता था। रेशम निदेशालय के असिस्टेंट डायरेक्टर नीरेंद्र कुमार और आशुतोष ने बताया कि यहां प्रदेश के उत्कृष्ट सिल्क उत्पाद, जैसे वाराणसी की साड़ी और भदोही का ब्रोकेड, मिर्जापुर का टसर सिल्क उत्पाद और अन्य जिलों के हैंडलूम वस्त्रों का आकर्षक डिस्प्ले किया जाएगा। इसके साथ एक बिक्री केंद्र भी स्थापित किया जाएगा, जहां पर्यटक और खरीदार सीधे स्थानीय कारीगरों के उत्पाद खरीद सकेंगे। एक चेंजिंग रूम का भी निर्माण किया जा रहा है, जो जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगा। इससे न केवल रेशम उद्योग को आर्थिक मजबूती मिलेगी, साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति प्राप्त होगी। यह सेंटर आधुनिक तकनीक से लैस होगा, जिसमें इंटरएक्टिव डिस्प्ले, वर्कशॉप और ट्रेनिंग सेंटर शामिल होंगे। किसानों को रेशम कीट पालन से लेकर प्रोसेसिंग तक की वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध होगी। उत्तर प्रदेश रेशम उत्पादन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है,  लेकिन स्थानीय चुनौतियों,  मार्केटिंग की कमी और जागरूकता के अभाव के कारण कारीगरों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता। सीएम योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से इन समस्याओं का समाधान किया जाएगा। यहां  पर्यटकों के लिए गाइडेड टूर और वर्कशॉप भी आयोजित की जाएंगी, जो युवाओं को इस क्षेत्र में रुचि जगाएंगे। इस पहल से न केवल रोजगार सृजन होगा, साथ ही प्रदेश के परंपरागत उद्यम और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

12 से 29 दिसंबर तक पूरे प्रदेश में होगा किसान पाठशाला का आयोजन

शुक्रवार को बाराबंकी में पद्मश्री रामशरण वर्मा के गांव से होगा शुभारंभ  किसानों के लिए मॉडल बन चुके हैं पद्मश्री रामशरण वर्मा  लखनऊ योगी सरकार 12 से 29 दिसंबर तक उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में किसान पाठशाला का आयोजन करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को रबी मौसम की किसान पाठशाला का शुभारंभ पद्मश्री किसान रामशरण वर्मा के गांव दौलतपुर के खेत से करेंगे। मुख्यमंत्री प्रगति किसान सम्मेलन के जरिए किसानों से संवाद करेंगे। साथ ही प्रगतिशील किसानों का सम्मान और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थी किसानों को चेक व स्वीकृति पत्र वितरित करेंगे। कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख भी रहेंगे। सरकार “किसान की बात किसान के द्वार” की संकल्पना पर किसानों को प्रोत्साहित करेगी। 1.90 करोड़ किसानों को किया जा चुका प्रशिक्षित  कृषि विभाग ने किसानों ने अनुरोध किया है कि अपने जनपद की किसान पाठशाला में प्रतिभाग कर योगी सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजना (60 प्रतिशत अनुदान पर सोलर पम्प, 40 से 50 प्रतिशत पर कृषि यंत्र आदि) के जरिए खेती की नई तकनीक, नवीन प्रजाति, पशुपालन, बागवानी, रेशम पालन एवं मधुमक्खी पालन की जानकारी प्राप्त कर कृषि उत्पादन एवं आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं। किसान पाठशाला के माध्यम से प्रदेश के सभी जनपदों में अब तक लगभग 1.90 करोड़ किसानों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।  किसानों के उत्पादन व लाभ में वृद्धि के लिए प्रयासरत है योगी सरकार     गठन के साथ ही योगी सरकार किसानों के प्रति अपना संकल्प निभाती आ रही है। सरकार द्वारा प्रदेश के किसानों को 25423 करोड़ का ऋण मोचन, 90669 करोड़ का पी0एम0 किसान सम्मान निधि का लाभ प्रत्यक्ष तौर पर उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके साथ ही मृदा सुधार, मृदा परीक्षण, कृषि यंत्र, उर्वरक, कृषि रक्षा रसायन सहित कृषि उत्पादन के प्रसंस्करण एवं विपणन आदि के लिए योगी सरकार प्रत्येक स्तर पर किसानों को सहयोग कर उनके कृषि उत्पादन एवं लाभ में वृद्धि एवं आत्मसम्मान दिलाने के लिए प्रयासरत है।  किसानों के लिए मॉडल बन चुके हैं पद्मश्री रामशरण वर्मा  कृषि क्षेत्र में धरातल पर दिख रहे परिवर्तन का सबसे बड़ा उदाहरण बाराबंकी के पद्मश्री रामशरण वर्मा जैसे प्रगतिशील किसान बने हैं। उन्होंने योगी सरकार की नीतियों को किसानों के उत्थान की असली धुरी बताया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की कृषि नीतियों ने किसानों की आय बढ़ाने के नए रास्तों का निर्माण किया है। किसानों की सुविधा, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर साढ़े आठ वर्षों में राज्य सरकार ने कई योजनाएं लागू कीं। इनके जरिए खेती अब लाभकारी तथा तकनीकी रूप से उन्नत होने की दिशा में बढ़ चुकी है। किसान सम्मान निधि से लेकर टिश्यू कल्चर आधारित उन्नत खेती के प्रोत्साहन, बीज छूट, कृषि यंत्रों पर रियायत और फसलों के मूल्य का डीबीटी के माध्यम से त्वरित भुगतान आदि कदमों ने प्रदेश में नई कृषि क्रांति की शुरुआत की है।  नवाचार आधारित खेती से बढ़ी किसानों की आय पद्मश्री रामशरण वर्मा द्वारा 32 वर्ष पहले 6 एकड़ से शुरू हुई खेती आज सहकारिता आधारित बटाई मॉडल पर 275 एकड़ तक पहुंच चुकी है। केला, टमाटर, आलू, मेंथा, तरबूज, खरबूजा और गेहूं जैसी विविध फसलों के चक्र पर आधारित खेती से उत्पादन और लाभ में बढ़ोतरी हुई है। वर्मा के मुताबिक योगी सरकार के प्रोत्साहन से टिश्यू कल्चर केले के उत्पादन ने किसानों को नई दिशा दी है। वे बताते हैं कि टमाटर में 60 हजार रुपये की लागत पर दो से ढाई लाख रुपये तक का लाभ संभव हो रहा है। टमाटर उत्पादन को मिले सरकारी प्रोत्साहन ने 50 प्रतिशत की वृद्धि सुनिश्चित की है। छोटे किसान जो पहले 20-25 हजार कमाते थे, वे अब डेढ़ से दो लाख रुपये वार्षिक आय कर रहे हैं।  रामशरण वर्मा ने हजारों किसानों को उन्नत खेती से जोड़ा  रामशरण वर्मा ने बताया कि 32 वर्षों से खेती करते हैं। साथ ही उन्होंने हजारों किसानों को उन्नत खेती से जोड़ा है। योगी सरकार किसानों की तरक्की के लिए दिनरात प्रयास कर रही है। उनकी नीतियां किसानों की उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। विकसित होने की ओर बढ़ते उत्तर प्रदेश के विकास की यह गति किसानों के उत्थान से और तेज हुई है। श्री वर्मा के मुताबिक वे 30 हजार से अधिक लोगों को साल में रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। अपने गांव व आसपास के लोगों को रोजगार देने में सक्षम हैं तो इसका सबसे बड़ा श्रेय योगी सरकार को जाता है। बीज और बाजार उपलब्ध कराने का जो कार्य योगी सरकार ने किया है, वह प्रदेश की कृषि उन्नति और किसानों की खुशहाली का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

यूपी परिवहन विभाग और यातायात निदेशालय की कई योजनाओं को मिली स्वीकृति

प्रदेश में सड़क परिवहन होगा और सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट डिवाइस, सीसीटीवी नेटवर्क के जरिए पुख्ता होगी सुरक्षा इंटरसेप्टर वाहनों की होगी खरीद, यातायात जागरूकता पर रहेगा विशेष जोर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ने सड़क सुरक्षा, आधुनिक परिवहन ढांचे और तकनीकी सुदृढ़ीकरण को गति देने के लिए कई जरूरी कदम उठाए हैं। यूपी परिवहन विभाग और यातायात निदेशालय ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए की कई महत्त्वपूर्ण पूंजीगत एवं राजस्व योजनाओं के प्रस्ताव को मुख्य सचिव की बैठक में स्वीकृति मिली है। इन योजनाओं के तहत अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट डिवाइसेस, सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार, बीटीटीई इकाइयों के लिए उपकरण, के-इन-मोशन सेंसर, इंटरसेप्टर वाहनों की खरीद और यातायात जागरूकता को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया गया है। लखनऊ और मुरादाबाद में चौराहों पर सीसीटीवी इंस्टालेशन के लिए राशि स्वीकृत यूपी परिवहन विभाग और यातायात निदेशालय की ओर से सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने और दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से वर्ष 2025-26 के लिए मुख्य सचिव की बैठक में जरूरी प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके तहत राजधानी, लखनऊ के प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरों की स्थापना के लिए 4.96 करोड़ रुपये की राशि को स्वीकृति दी गई है। साथ ही मुरादाबाद और बलिया जनपद में प्रमुख चौराहों पर इंटीग्रेटेड सीसीटीवी इंस्टालेशन के लिए लगभग 3.10 करोड़ रुपये की राशि को स्वीकृत की गई है। इसके साथ ही बीटीटीई ईकाइयों के लिए ट्रक सिमुलेटर और अन्य तकनीकी उपकरणों की खरीद के लिए 1.28 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं। इसके अलावा बीटीटीई हांसी इकाई के लिए वाहन खरीद को भी मंजूरी मिली है। हाई-रिस्क वाले 20 जिलों में लगेंगी इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट डिवाइस मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में सड़क दुर्घटना में कमी लाने के उद्देश्य से राज्य के 25 हाई-रिस्क वाले जिलों में डीआरएससी  के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट डिवाइस लगाने की योजना तेजगति से आगे बढ़ाई जा रही है। परिवहन विभाग और यातायात निदेशालय की ओर से हाई-रिस्क वाले जिलों में 1करोड़ प्रति जनपद की दर से 25 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। साथ ही शेष जनपदों के लिए 50 लाख रुपये प्रति जिले की दर से अतिरिक्त 25 करोड़ रुपये की राशि को भी मंजूरी दी गई है। समीक्षा बैठक में परिवहन विभाग के संबंधित अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2024-25 में इंटरसेप्टर वाहनों एवं अन्य उपकरणों के लिए 19.95 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से लगभग 17.15 करोड़ रुपये से 70 इंटरसेप्टर वाहनों की खरीद की जा चुकी है। साथ ही उन्होंने बताया कि 18 के-इन-मोशन सेंसरों के लिए 14.05 करोड़ रुपये स्वीकृत किये जा चुके हैं। विभाग ने सेंसरों को अधिक प्रभावी बनाने हेतु प्लेटफार्म और अतिरिक्त संरचना निर्माण के लिए भी नए प्रस्ताव भेजे हैं। सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के लिए कई योजनाएं स्वीकृत प्रदेश में सड़क सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए यातायात नियमों के प्रचार-प्रसार, ई-चालान प्रणाली, साइनेज बोर्ड, इंटरनेट सेवाएं, उपकरणों की मरम्मत, मोबाइल रिचार्ज और अभियानों के संचालन के लिए 2.10 करोड़ से अधिक की राजस्व योजनओं को मंजूरी मिली है। इसके साथ ही यातायात निदेशालय द्वारा 25 करोड़ रुपये की लागत से 4,500 आयरन बैरियर, 4,525 फोल्डिंग बैरियर, 7,200 सेफ्टी हेलमेट, 8,000 फ्लोरोसेन्ट जैकेट, 270 ब्रेथ एनालाइजर, 85 स्पीड लेजर गन, 15 चार-पहिया एवं 62 दो-पहिया इंटरसेप्टर वाहनों की खरीद भी की जाएगी। इसमें सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाले अन्य जरूरी आधुनिक उपकरणों की खरीद भी शामिल हैं। यूपी परिवहन विभाग और यातायात निदेशालय प्रदेश में सड़क सुरक्षा में आधुनिक तकनीक का उपयोग और यातायात प्रबंधन को अत्याधुनिक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जो प्रदेश में सड़क दुर्घटना के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाने के साथ, लोगों को सुरक्षित परिवहन की सुविधा भी उपलब्ध करवाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंच प्रण को बताया शाश्वत मंत्र

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 के शुभारंभ अवसर पर आत्मनिर्भर व विकसित भारत का भी जिक्र किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए पंच प्रण को शाश्वत मंत्र बताया। सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी ने आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान देशवासियों के सामने लक्ष्य रखा कि 2047 में देश जब आजादी का शताब्दी महोत्सव मना रहा होगा, तब हमें आत्मनिर्भऱ, विकसित भारत चाहिए। जहां हर व्यक्ति खुशहाल और परस्पर सौहार्द के साथ मिलकर दुनिया की महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहा हो। वहां जाति, भाषा, क्षेत्र का विवाद और अभाव न हो। कोई नागरिक आपदा का शिकार न हो। हर व्यक्ति आत्मनिर्भर व स्वावलंबन का जीवन व्यतीत करते हुए राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन कर सके। सीएम ने कहा कि भारत विकसित तब हो सकता है, जब हर व्यक्ति पंच प्रण पर ध्यान दे।  एसडीआरएफ के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 का शुभारंभ किया।  सीएम ने पंच प्रण को बताया शाश्वत मंत्र  सीएम ने पंच प्रण को शाश्वत मंत्र बताया और कहा कि यह हर नागरिक पर समान रूप में लागू होते हैं।  पहला प्रणः विरासत पर गौरव की अनुभूति यानी पूर्वजों की थाती। हर भारतवासी को पूर्वजों, संस्कृति, महापुरुषों पर गौरव की अनुभूति करनी चाहिए। महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह महाराज, छत्रपति शिवाजी महाराज, रानी लक्ष्मीबाई, पं. रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह उसी परंपरा के नायक हैं, जिसे हर भारतवासी विरासत कहता है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण व धर्मध्वजा का आरोहण विरासत की श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी है।  दूसरा प्रणः गुलामी के अंशों को पूरी तरह समाप्त करना- सीएम ने कहा कि बीच के कालखंड में हर देशवासी भूल गया कि जब दुनिया अंधकार में थी, तब भारत बड़ी ताकत था। दो हजार वर्ष पहले दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का हिस्सा 46 फीसदी और चार सौ वर्ष पहले भारत की भागीदारी का हिस्सा 26 फीसदी था। देश जब आजाद हुआ, तब दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का हिस्सा महज डेढ़ फीसदी रह गया था। अंग्रेज व विदेशी आक्रांता जब भारत को लूटकर ले गए थे, उसकी कीमत उस समय लगभग 32-35 ट्रिलियन डॉलर के बराबर थी। आज भारत की अर्थव्यवस्था मात्र चार ट्रिलियन डॉलर की है। अब भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित हुआ है। हाल के सर्वे के मुताबिक दुनिया ने माना है कि भारत सबसे तेज गति के साथ बढ़ने वाला राष्ट्र बन गया है। भारत की यात्रा शानदार इसलिए है, क्योंकि हमने विरासत पर गौरव की अनुभूति की और गुलामी के अंशों को समाप्त किया।  तीसरा प्रणः सैन्य बलों का सम्मानः सैनिक, यूनिफॉर्म धारी फोर्स (सेना, अर्धसेना, पुलिस बल) का सम्मान करना है। उनके बलिदान व सेवाओं के प्रति सम्मान व कृतज्ञता होनी चाहिए।  चौथे प्रण की चर्चा कर सीएम योगी ने कहा कि विदेशी आक्रांता इसलिए सफल हुए, क्योंकि हम विभाजित थे, जाति-क्षेत्र, भाषा के नाम पर बंटे थे। पड़ोस में आग लगी है और हम निश्चिंत बैठे हैं तो देर-सवेर आग आप तक भी पहुंचेगी। सामाजिक विद्वेष की खाई को चौड़ा होने से रोकना होगा। हमारी पहचान राष्ट्रीयता के आधार पर होनी चाहिए। सामाजिक भेदभाव की खाई को दूर करना, राष्ट्रीय एकता के लिए प्राण प्रण से जुड़ना होगा।  पांचवें प्रण के रूप में नागरिकों कर्तव्यों का निर्वहन का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि दूसरों के ऊपर कानून लागू होगा और हमारे ऊपर नहीं होगा। यही प्रवृत्ति ही सारी समस्याओं की जड़ है। कानून दूसरों के लिए है तो मेरे लिए भी होना चाहिए। सीएम ने कहा कि छात्र, शिक्षक, व्यापारी, जनप्रतिनिधि समेत हर नागरिक अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करता है तो पंच प्रण आत्मनिर्भर व विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने में सहायक बनेगा। यदि देश एक दिशा में कार्य करने लग जाएगा तो 2047 आते-आते भारत विकसित होगा।  समारोह में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, कुलपति प्रो. पूनम टंडन, प्रो. जेपी सैनी, प्रो. रविशंकर सिंह, डॉ. सुरेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेंद्र पाल सिंह, इंजी. सरवन निषाद, प्रदीप शुक्ला, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, रतनपाल सिंह, पूर्व महापौर अंजू चौधरी आदि मौजूद रहे।

सरकारी नौकरी प्राप्त करने वाले खिलाड़ी को अभ्यास के लिए भी मिलेगा पूरा अवसरः मुख्यमंत्री

  गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नौजवानों का आह्वान किया और कहा कि पीएम मोदी ने देश के हर नौजवान से अपेक्षा की है कि वह किसी न किसी खेल के साथ अवश्य जुड़े, क्योंकि खेलोगे तो खिलोगे। सीएम ने कबड्डी का जिक्र करते हुए कहा कि इस खेल में स्फूर्ति और व्यक्ति के मन में टीम भावना के साथ कार्य करने का जज्बा भी है। हर खेल व खेल संस्कृति टीम वर्क के रूप में कार्य करने की प्रेरणा देती है। भारत के अंदर प्राचीन काल से ही खेल व खेलकूद की प्रतियोगिताओं के प्रति व्यापक जागरूकता रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रीजनल स्टेडियम में ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज सप्तम् अखिल भारतीय प्राइजमनी पुरुष कबड्डी प्रतियोगिता-2025 के विजेताओं को पुरस्कृत किया। जब व्यक्ति शारीरिक फिटनेस पर ध्यान देगा तो काया निरोगी होगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धर्म के जितने भी साधन हैं, उन सभी की पूर्ति स्वस्थ शरीर से ही संभव है। स्वस्थ शरीर, निरोगी काया तभी प्राप्त हो सकती है, जब व्यक्ति शारीरिक फिटनेस पर ध्यान दे। उन्होंने कहा कि 11 वर्ष में सभी ने बदलते हुए भारत और पीएम मोदी की प्रेरणा से खेल व खेल संस्कृति के प्रति आम भारतीयों के मन में जो भाव पैदा हुए हैं, उसे मूर्त रूप लेते हुए देखा है। इसके कारण भारत की प्रतिभाएं ओलंपियन, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ, विश्व चैंपियनशिप में अच्छा पुरस्कार ले रही हैं। खेल व प्रतियोगिताओं के प्रति नई जागरूकता पैदा हुई है। सांसद-विधायक खेलकूद प्रतियोगिताएं हो रही हैं। खेलो इंडिया खेलो के माध्यम से हर स्तर पर केंद्र स्थापित हो रहे हैं। प्रदेश में बढ़ती दिखाई दे रहीं खेलकूद की गतिविधियां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी के अंदर पहले से तीन स्पोट्रस कॉलेज हैं। हमारी सरकार ने तय किया है कि हर कमिश्नरी मुख्यालय पर स्पोट्रस कॉलेज होना चाहिए। हर जिला मुख्यालय पर स्टेडियम और ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम का निर्माण होना चाहिए। इन सुविधाओं को सरकार बढ़ा रही है। गांव-गांव में खेल मैदान, ओपन जिम का निर्माण हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार का जो पैसा वित्त आयोग के माध्यम से पंचायतों को जाता है, उसकी प्राथमिकता में खेल मैदान, ओपन जिम, खेलकूद की गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में खेलकूद की गतिविधियां प्रत्येक स्तर पर बढ़ती दिखाई दी हैं। मेरठ में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर खेल विश्वविद्यालय बन रहा है। इस वर्ष से पहला सत्र प्रारंभ भी हो चुका है। स्टेडियम, इनडोर स्टेडियम, विश्वविद्यालय भवन समेत अन्य बुनियादी सुविधाएं ओलंपिक, एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स के स्टैंडर्ड को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही हैं। 2030 का कॉमनवेल्थ गेम्स भारत के अहमदाबाद में होने जा रहा है। 12 टीमों के 168 खिलाड़ियों ने किया प्रतिभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सात वर्ष से लगातार इस प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है। इस बार 12 टीमों के 168 खिलाड़ी व 24 कोच-मैनेजर ने प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया है। इस बार राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, विदर्भ, मध्य प्रदेश, पूर्वोत्तर रेलवे, भारतीय सेना, जेबी एकेडमी व यूपी की टीम शामिल हैं। सीएम ने विजेता उत्तर प्रदेश की टीम को दी बधाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजेता उत्तर प्रदेश व उपविजेता पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यूपी की टीम इसलिए विजयी हुई, क्योंकि हमने गारंटी दे दी है कि जो भी खिलाड़ी ओलंपिक, एशियन, कॉमनवेल्थ, विश्व चैंपियन में मेडल लेकर आएगा, उसे सीधे सरकारी नौकरी उपलब्ध कराएंगे। खिलाड़ियों को डिप्टी एसपी, तहसीलदार व अलग-अलग विभागों में अन्य महत्वपूर्ण स्थान भी दिए गए हैं। हमारी सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि कोई खिलाड़ी प्रतियोगिता में जाता है तो उस दौरान उसे सर्विस का पार्ट माना जाएगा। सरकारी नौकरी प्राप्त करने वाले खिलाड़ी को अभ्यास के लिए पूरा अवसर भी मिलेगा। अब तक 500 से अधिक खिलाड़ियों को यूपी सरकार के विभिन्न पदों पर सरकारी नौकरी में समायोजित कर लिया गया है। खिलाड़ियों के लिए प्रदेश में प्रोत्साहन के अच्छे कार्यक्रम भी चल रहे हैं। ओलंपिक, एशियन, कॉमनवेल्थ, विश्व चैंपियनशिप में खिलाड़ी, टीम, प्रतिभाग व मेडल पर भी पुरस्कार की अलग-अलग राशि घोषित की गई है। खेल से विकसित होता है सहयोग, अनुशासन व जिम्मेदारी का भाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब कबड्डी लीग भी हो रहे हैं। लोगों ने इसे काफी लोकप्रिय माना है। खेलकूद से पूरी टीम जुड़ती है। कबड्डी में हर खिलाड़ी के रेड, टेकल व बोनस प्वाइंट केवल खेल नहीं, बल्कि नए भारत की ऊर्जा का प्रतीक होता है। वह देश की जिस टीम का प्रतिनिधित्व करता है, उसकी ऊर्जा का प्रतीक होता है। हर खेल युवाओं की स्फूर्ति, अटेंशन, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता व आत्मविश्वास को भी विकसित करता है। खेल बताता है कि सफलता सामूहिक प्रयास से मिलती है। खेल से खिलाड़ियों में सहयोग, अनुशासन व जिम्मेदारी का भाव विकसित होता है। इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, महेंद्र पाल सिंह, प्रदीप शुक्ला, भाजपा जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, डॉ. विभ्राट चंद कौशिक, पूर्व महापौर डॉ. सत्या पांडेय, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार, खेल निदेशक डॉ. आरपी सिंह आदि मौजूद रहे।

सीएम योगी ने बच्चों को देखकर किया औचक मुलाकात का फैसला

गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बालप्रेम जगजाहिर है। जब भी वह बच्चों को अपने आसपास देखते हैं, उन पर स्नेह और प्यार लुटाते हैं। बुधवार को गोरखपुर सर्किट हाउस परिसर में हेलिपैड से उतरते ही उनकी नजर जब समीप के पार्क के गेट पर बच्चों के समूह पर गई तो वह खुद उनसे मिलने उनके पास पहुंच गए। उन्होंने बच्चों से आत्मीयता से बात की और चॉकलेट दिया।  गोला के मदरिया सिद्धपीठ से होकर मुख्यमंत्री जब हेलीकॉप्टर से सर्किट हाउस परिसर के  हेलिपैड पर उतरे तो उस समय बगल के अंबेडकर पार्क में बच्चे ताइक्वांडो की प्रैक्टिस कर रहे थे। हेलीकाप्टर की गड़गड़ाहट सुनकर बच्चे गेट के पास आकर देखने लगे। सीएम योगी को देखते ही बच्चों ने जयकारा लगाकर उनका अभिवादन किया। बच्चों को देखकर सीएम खुद को रोक नहीं पाए और पहले पार्क के पिछले गेट की ओर गए। गेट के दूसरी ओर खड़े बच्चों से दुलारा। उनसे बात की। सीएम ने पूछा कि क्या कर रहे हो तो बच्चों ने कहा कि ताइक्वांडो की प्रैक्टिस। सीएम ने उन्हें चाकलेट भी दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की गन्ना मूल्य और भुगतान नीतियों से बढ़ा किसानों का आत्मविश्वास

किसानों की सहभागिता से गांवों तक पहुंच रही पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था एथेनॉल उत्पादन, मिल विस्तार और निवेश से चीनी उद्योग में आया ऐतिहासिक बदलाव बागपत, उत्तर प्रदेश में किसानों की समृद्धि और सीधी सहभागिता पर केंद्रित योगी आदित्यनाथ सरकार की नीति अब जमीन पर अपना प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखा रही है। सोमवार को मीतली गांव में हुई पहली चौपाल के बाद बुधवार को बागपत के हिसावदा गांव में आयोजित कृषि चौपाल किसानों की सक्रिय भागीदारी और आत्मविश्वास का नया प्रमाण बनी। चौपाल में करीब साढ़े तीन सौ किसानों ने हिस्सा लिया। किसान खुले तौर पर अपने अनुभव और सुझाव साझा करते दिखे और यह भरोसा प्रकट किया कि उनकी बात सीधे सरकार तक पहुंच रही है। चीनी उद्योग और गन्ना विकास विभाग की उपलब्धियों का सकारात्मक असर अब गांवों के आर्थिक माहौल में देखने को मिल रहा है। कभी मिलों के बंद होने और भुगतान में देरी से परेशान रहने वाले किसान अब समय पर भुगतान पाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। सरकार द्वारा गन्ना मूल्य में निरंतर वृद्धि किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनी है। 2017 से अब तक गन्ना मूल्य क्रमिक रूप से बढ़ाया गया जिससे उत्पादन उत्साह और किसानों का लाभ दोनों बढ़े। पहली चौपाल में किसानों ने जहां सरकार के प्रयासों की सराहना की थी वहीं हिसावदा की चौपाल में किसान अधिक सुझावोन्मुख होकर साझेदारी का भाव प्रदर्शित करते दिखे। किसानों ने गन्ना कटाई की समयबद्धता और पर्ची जारी करने की व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ठोस फीडबैक दिया। इस आयोजन की सबसे विशेष बात यह रही कि चौपाल पूरी तरह से  किसानों द्वारा संचालित रही। यह परिवर्तन सरकार और किसानों के बीच भरोसे की नई कड़ी का संकेत देता है जहां किसान सिर्फ लाभार्थी नहीं बल्कि नीति निर्धारण के सहभागी बन रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत, हापुर, शामली और मुजफ्फरनगर के गांवों में हो रही इन चौपालों का परिणाम यह है कि सरकार किसानों की हर बात को सुन रही है और उसके आधार पर अगले कदम निर्धारित कर रही है। चीनी मिलों की क्षमता विस्तार, सीबीजी संयंत्रों की स्थापना और गन्ना आधारित एथेनॉल उत्पादन में उत्तर प्रदेश उदाहरण बन चुका है। वर्ष 2017 में एथेनॉल आसवनी की संख्या 61 थी जो 2025 में बढ़कर 97 हो गई है, जबकि चार नई आसवनियां पाइपलाइन में प्रस्तावित हैं। एथेनॉल उत्पादन 41.28 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर तक पहुंचा है जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष मजबूती मिली है। किसानों के हितों में भुगतान व्यवस्था में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 2007 से 2017 के बीच गन्ना भुगतान 147346 करोड़ रहा जबकि 2017 से अब तक यह बढ़कर 290225 करोड़ हो गया है। यह 142879 करोड़ की अतिरिक्त भुगतान वृद्धि दर्शाता है जो सीधे किसानों के खातों में पहुंची। वर्ष 2016-17 में गन्ना क्षेत्रफल 20 लाख हेक्टेयर था जो वर्तमान में बढ़कर 29.51 लाख हेक्टेयर हो गया है। गन्ना मूल्य अब अगेती किस्म के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल प्रस्तावित है जिससे किसानों को 3000 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान लाभ प्राप्त होगा। आज उत्तर प्रदेश का यह ग्रामीण विकास मॉडल किसानों की साझेदारी और सीधी संवाद प्रणाली पर आधारित है। बागपत से उठती यह आवाज साबित करती है कि किसान अब बिचौलियों के भरोसे नहीं बल्कि स्वयं सरकारी नीति निर्धारण में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं और योगी सरकार की पहल से गांव-गांव में बदलावों की यह बयार वास्तविक विकास का आधार बन रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व दिव्यांग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भारत की ऋषि परंपरा का किया उल्लेख

शारीरिक बनावट नहीं करती है क्षमता का निर्धारण: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व दिव्यांग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भारत की ऋषि परंपरा का किया उल्लेख भारतीय मनीषा का मानना है कि वास्तविक शक्ति मन, संकल्प और आत्मबल में है, हर व्यक्ति है ईश्वरीय कृति: मुख्यमंत्री लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में दिव्यांग प्रतिभाओं तथा दिव्यांगों के कल्याण हेतु कार्यरत कर्मचारियों व संस्थाओं को किया सम्मानित लखनऊ  उत्तर प्रदेश में विश्व दिव्यांग दिवस 2025 के अंतर्गत आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बात पर बल दिया कि शारीरिक बनावट क्षमता के निर्धारण और लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा नहीं बनती है। बुधवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दिव्यांगजन सशक्तिकरण, छात्रवृत्ति वितरण, सहायक उपकरण प्रदान करने तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के सम्मान के लिए आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा ने हमेशा हमें इस बात के लिए प्रेरित किया है कि व्यक्ति की शारीरिक बनावट उसकी क्षमता का निर्धारण नहीं करती है। भारतीय मनीषा का मानना है कि वास्तविक शक्ति मन, संकल्प और आत्मबल में है। भारत ही नहीं, पूरी दुनिया ने उस संकल्प शक्ति को, आत्मबल को वास्तविक और व्यावहारिक जीवन में दिव्यांगजन के सामर्थ्य से उद्घाटित होते हुए देखा है। अष्टावक्र गीता का दिया उदाहरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व दिव्यांग दिवस पर सभी की मंगलकामना करते हुए कहा कि आज देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की भी पावन जयंती है। उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उन्होंने कहा कि हमारे यहां एक ग्रंथ है अष्टावक्र गीता जिसे ऋषि अष्टावक्र ने रचा था। उनके बारे में अनेक धारणाएं हैं, और कहते हैं कि विदेह जनक को भी आत्मज्ञान की प्रेरणा उन्होंने दी। मध्यकाल में संत सूरदास इसके उदाहरण हैं। दुनिया में भी अनेक ऐसे उदाहरण हैं जहां दिव्यांगजनों को थोड़ा भी संबल मिला तो उन्होंने अपने सामर्थ्य और अपनी शक्ति से समाज के लिए वह सब कुछ कर दिखाया जिस पर सामान्य जन को सहज विश्वास भी नहीं होता है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन के कल्याण के लिए केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा जो कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, वे एक प्लेटफॉर्म के रूप में आपके लिए अत्यंत उपयोगी हो सकते हैं। उपेक्षा से कुंठित होता है मन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर किसी के परिवार में जाने-अनजाने या किसी गलती के कारण कोई बच्चा दिव्यांगता का शिकार होता है तो स्वाभाविक रूप से परिवार और समाज उसे उपेक्षित कर देता है। परिणाम यह होता है कि बचपन में ध्यान न दिए जाने तथा संबल न मिलने के कारण उपेक्षा जीवन भर उसके मन को कुंठित करती है। वह स्वयं को लाचार स्थिति में देखता है, जबकि यदि हम थोड़ा सा संबल दें तो बहुत अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव और चित्रकूट के मंडलायुक्त का दिया उदाहरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार में हमारे खेल और युवा कल्याण विभाग के सचिव स्वयं पैरालंपिक मेडलिस्ट हैं तथा उस टीम का हिस्सा रहे हैं जिसने पैरा ओलंपिक में सर्वाधिक मेडल जीते। चित्रकूट के मंडलायुक्त दृष्टिबाधित हैं, लेकिन मंडलायुक्त के रूप में वहां अपनी पूरी क्षमता से कार्य कर रहे हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि हमारी संकल्प शक्ति और आत्मबल ही हमारे सामर्थ्य का वास्तविक पैमाना है। इसी कारण भारत की मनीषा और ऋषि परंपरा ने कभी भी शारीरिक बनावट को व्यक्ति की क्षमता का आधार नहीं माना। हर व्यक्ति है ईश्वरीय कृति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर व्यक्ति ईश्वरीय कृति है और मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में से एक है। यदि हम हर मनुष्य के भीतर ईश्वर का वास मानकर उसके प्रति सद्भाव और सहानुभूति रखें तथा थोड़ा सा संबल दें तो उपेक्षा के भाव से उसे बाहर निकालकर समाज और राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। दिव्यांगजन की सामर्थ्य और उनकी प्रतिभा से समाज को लाभान्वित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने दिव्यांगजनों के प्रति समाज की दृष्टि बदली है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि शारीरिक रूप से कोई अंग कमजोर हो, लेकिन मानसिक रूप से वह अत्यंत परिपक्व हो। यदि संबल दिया जाए तो वह अपनी क्षमता, शक्ति और आत्मबल के आधार पर समाज और राष्ट्र के लिए अत्यंत उपयोगी बन सकता है। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश सरकार ने पेंशन की राशि को 300 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया है। लाभार्थियों की संख्या भी 8 लाख से बढ़ाकर 11 लाख से अधिक कर दी गई है और तकनीक के उपयोग से पारदर्शी व सरल प्रक्रिया के जरिए उन्हें लाभान्वित किया जा रहा है। दिव्यांगजन के लिए अच्छे संस्थान स्थापित किए गए हैं और सहायक उपकरण वितरण की प्रक्रिया को भी व्यापक रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकारी सेवाओं में 4 प्रतिशत तथा शिक्षण संस्थानों में 5 प्रतिशत आरक्षण लागू मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार उत्तर प्रदेश में दिव्यांगजन कल्याण को 2014 के बाद नई गति मिली है। पहले व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, ब्लाइंड स्टिक और हियरिंग एड प्राप्त करना अत्यंत कठिन था, परंतु एलिम्को, कानपुर और डी.डी.आर.सी. को सक्रिय कर स्थिति में सुधार किया गया। प्रदेश के सभी डी.डी.आर.सी. को पुनर्जीवित किया जा रहा है तथा प्रत्येक कमिश्नरी मुख्यालय पर नए केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए शब्द दिव्यांग ने सम्मान की नई भाषा और नई सोच को देश में स्थापित किया है। सरकारी भवनों, परिवहन और सार्वजनिक स्थलों को बैरियर फ्री बनाया जा रहा है तथा विद्यालयों को सुलभ बनाने का अभियान जारी है। ब्रेल लिपि, साइन लैंग्वेज, रैम्प, छात्रवृत्ति, निःशुल्क प्रशिक्षण, कौशल विकास और रोजगार के साथ ही सरकारी सेवाओं में 4 प्रतिशत तथा शिक्षण संस्थानों में 5 प्रतिशत आरक्षण लागू है। आधुनिक सहायक सामग्रियों के लिए उपलब्ध कराया गया धन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रदेश में यूडीआईडी कार्ड के 16,23,000 से अधिक कार्ड निर्गत किए गए हैं और 19,74,000 से अधिक पंजीकृत हैं। कुष्ठावस्था पेंशन को 2,500 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये किया गया है तथा कृत्रिम अंगों हेतु अनुदान 10,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया … Read more

उत्तर–दक्षिण की सांस्कृतिक धरोहर को जोड़ने वाला एक अभिनव सेतु बन रहा तमिल संगमम

काशी तमिल संगमम् के चौथे संस्करण में शामिल होंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर–दक्षिण की सांस्कृतिक धरोहर को जोड़ने वाला एक अभिनव सेतु बन रहा तमिल संगमम वाराणसी के नमो घाट पर होगा कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि सहित अनेक विशिष्ट अतिथि होंगे उपस्थित “तमिल करकलाम” (तमिल सीखें) थीम पर आधारित है इस वर्ष का आयोजन वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काशी तमिल संगमम् के चौथे संस्करण के उद्घाटन समारोह में शामिल होने हेतु 2 दिसंबर को वाराणसी पहुंचेंगे। उत्तर और दक्षिण भारत को सांस्कृतिक रूप से जोड़ने वाला यह महत्त्वपूर्ण आयोजन अब अपने चौथे संस्करण में प्रवेश कर चुका है। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मंगलवार को नमो घाट पर होगा। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान, तमिलनाडु के राज्यपाल श्री आर. एन. रवि, पुडुचेरी के उपराज्यपाल श्री के. कैलाश नाथ सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थिति दर्ज कराएंगे। “तमिल करकलाम” यानी “तमिल सीखें” की थीम पर आधारित इस आयोजन में तमिलनाडु से 1400 से अधिक प्रतिनिधि काशी पहुंच रहे हैं। काशी और तमिलनाडु के पारंपरिक कलाकार संयुक्त प्रस्तुति देते हुए भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उद्घाटन समारोह के अलावा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तथा काल भैरव मंदिर में दर्शन-पूजन करने भी जा सकते हैं। कन्याकुमारी से रवाना हुआ छात्रों का दल, 2 दिसंबर को पहुंचेगा काशी काशी तमिल संगमम् में शामिल होने हेतु छात्रों का पहला दल शनिवार सुबह कन्याकुमारी से विशेष ट्रेन द्वारा रवाना हुआ। कन्याकुमारी से 43, तिरुचिरापल्ली से 86 तथा चेन्नई से 87 छात्र इस यात्रा में सम्मिलित हुए हैं। यह दल मंगलवार को काशी पहुंचकर भ्रमण के बाद शाम को नमो घाट पर आयोजित उद्घाटन समारोह में प्रतिभाग करेगा। डेलीगेट्स का काशी भ्रमण कार्यक्रम तमिल संगमम् 4.0 के डेलीगेट्स सर्वप्रथम हनुमान घाट पहुंचेंगे, जहाँ वे गंगा स्नान, दक्षिण भारतीय परंपरा से जुड़े मंदिरों में दर्शन-पूजन तथा इतिहास से संबंधित जानकारी प्राप्त करेंगे। इसके उपरांत प्रतिनिधि श्री काशी विश्वनाथ धाम में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करेंगे और मां अन्नपूर्णा रसोई में प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके बाद सभी प्रतिनिधियों को बीएचयू ले जाया जाएगा, जहाँ वे एकेडमिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे और विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण करेंगे।

यूपी में स्किल इंडिया और डीडीयू ग्रामीण कौशल्य विकास अभियान के तहत 5.66 लाख से अधिक युवाओं को मिला प्रशिक्षण

डिजिटल, एआई और ग्रीन जॉब्स पर फोकस, उत्तर प्रदेश को स्किल हब बनाने का लक्ष्य लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार की युवा-केंद्रित नीतियों ने न केवल राज्य के युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के नए द्वार खोले हैं, बल्कि उनमें स्वरोजगार, उद्यमिता और इनोवेशन का भी विकास किया है। एक ओर राज्य सरकार स्किल इंडिया मिशन और दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना के तहत युवाओं को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधुनिक तकनीकि में प्रशिक्षित कर रही है, वहीं दूसरी ओर रोजगार मेलों और इंक्युबेशन सेंटरों के माध्यम से रोजगार के अवसर भी प्रदान कर रही है। वर्ष 2017 के बाद से प्रदेश में आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों तक किया गया है, तो वहीं उच्च तकनिकी के इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सीएम योगी आदित्यनाथ की ये युवा केंद्रित पहलें विकसित यूपी, विकसित भारत- 2047 के विजन को सफल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही हैं।   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में वर्ष 2017 से अबतक स्किल इंडिया मिशन और दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना के तहत 5 लाख 66 हजार से अधिक आईटीआई और पॉलिटेक्निक प्रशिक्षित युवाओं को मिशन रोजगार के माध्यम से नौकरियां प्राप्त हुई हैं। इसके साथ ही अप्रैल 2025 तक 2,800 से अधिक प्रशिक्षण केंद्रों के जरिए युवाओं को उद्योग उन्मुख कौशल प्रदान किया गया है, जिससे बेरोजगारी की दर में उल्लेखनीय कमी आई है। साथ ही सीएम युवा उद्यमी योजना के तहत युवाओं को स्व रोजगार और स्टार्ट अप भी विकसित करने के लिए हर संभव मदद की जाती है।  उत्तर प्रदेश में युवाओं के कौशल विकास व गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए 1,747 सक्रिय ट्रेनिंग पार्टनर्स का चयन किया गया है। जिनके माधयम से युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल प्रदान किया जाता है। साथ ही इनक्युबेशन सेंटरों के माधयम से उन्हें अत्याधुनिक तकनीकों जैसे डिजिटल मार्केटिंग, ईवी मैन्युफैक्चरिंग और एआई के साथ व्यवसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। यही नहीं समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा कौशल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, जिसमें युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलता है। कौशल प्रशिक्षण अभियानों और प्रतियोगिताओं में रिकॉर्ड संख्या में प्रदेश के युवाओं की भागीदारी ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया है, साथ ही उन्हें प्रगति की नई राह भी दिखाई है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ के प्रयासों से प्रदेश में मेडिकल और इंजीनियरिंग संस्थानों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहां वर्ष 2016-17 में यूपी में मात्र 42 मेडिकल कॉलेज थे, वर्तमान में ये संख्या बढ़कर, निजी व सरकारी को मिलाकर 80 हो चुकी है। इससे न केवल प्रदेश में एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आया है। इसी तरह उच्च तकनीकि प्रशिक्षण के लिए इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी सीटों की संख्या में बढ़ोत्तरी की गई है। साथ ही इन संस्थानों में बनाये गये स्टार्टअप इंक्यूबेटर्स के जरिए युवा उद्यमिता को बढ़ावा मिला। ये पहलें न केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंची हैं, बल्कि महिलाओं, ओबीसी और एससी/एसटी समुदायों के लिए आरक्षण सुनिश्चित कर समावेशी विकास को भी सुनिश्चित कर रहीं हैं। रोजगार सृजन की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ का सबसे प्रभावी कदम हैं नियमित रोजगार मेलों का आयोजन है। इसी क्रम में अगस्त 2025 में लखनऊ के तीन दिवसीय 'रोजगार महाकुंभ' में 100 कंपनियों ने 50,000 से अधिक नौकरियों के अवसर प्रदेश के युवाओं को प्रदान किये। इन रोजगार मेलों में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों जैसे- एसबीआई, एचडीएफसी, स्विगी, जोमैटो, अमेजन और महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल होती है। आने वाले दिनों में लखनऊ, गोरखपुर, झांसी, वाराणसी और मुजफ्फरनगर में रोजगार मेलों का आयोजन होने जा रहा है। जिसमें 100 से अधिक कंपनियों की भागीदारी व 15,000 रोजगार के अवसरों के सृजन की संभावना है।साथ ही प्रत्येक जिले में मासिक प्लेसमेंट ड्राइव अभियान भी चलाया जाता है, जो युवाओं को सीधे नियोक्ताओं से जोड़ता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के मुताबिक आने वाले वर्षों में डिजिटल, एआई और ग्रीन जॉब्स पर फोकस के साथ उत्तर प्रदेश को स्किल हब बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।