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मंत्री बैंस ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र, कहा—शिक्षक हैं ज्ञान और मूल्यों के स्तंभ

चंडीगढ़ पंजाब में अब कोई भी शिक्षक पढ़ाने के सिवाय गैर शैक्षिक कार्य नहीं करेगा। शिक्षामंत्री हरजोत बैंस ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत प्रभाव से इस संदर्भ में सभी विभागों को सख्त हिदायत जारी करें। शिक्षामंत्री ने साफ कहा कि शिक्षकों के लिए कक्षाएं सबसे ज्यादा जरूरी कार्य हैं न कि अन्य कार्य। कई जिलों में शिक्षकों को कक्षाओं से हटाकर रुटीन प्रशासनिक कामों में लगाने की रिपोर्टों पर शिक्षामंत्री ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इस रिवायत को शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के साथ घोर अन्याय करार दिया। उन्होंने शिक्षण ड्यूटी को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि शिक्षक अपनी मुख्य जिम्मेदारी पर ही ध्यान केंद्रित करें। मुख्य सचिव को लिखे पत्र में मंत्री बैंस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षक केवल साधारण सरकारी कर्मचारी नहीं हैं – वे ज्ञान और मूल्यों के ध्वजवाहक हैं, जिन्हें पंजाब के भविष्य को दिशा देने की पवित्र जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें कक्षाओं की जगह विभिन्न प्रशासनिक कामों में लगाना न केवल उनके साथ बल्कि हमारे बच्चों के साथ भी अन्याय है। ऐसा करने से बच्चों की शिक्षा का अधिकार प्रभावित होता है। बताते चलें कि इस संदर्भ में सूबे के शिक्षक भी मांग कर रहे थे, जिस पर अब शिक्षा मंत्री संज्ञान ले लिया है। मंत्री ने आरटीई एक्ट का दिया हवाला मंत्री ने बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम-2009 की धारा 27 का हवाला देते हुए कहा कि यह धारा गैर-शैक्षिक उद्देश्यों के लिए शिक्षकों की तैनाती पर रोक लगाती है। यह मनाही केवल कुछ विशेष मौकों जैसे दस वर्षीय जनगणना, आपदा राहत कार्य और स्थानीय संस्थाओं, राज्य विधानसभाओं या संसदीय चुनावों में ड्यूटी पर लागू नहीं होती। शिक्षा मंत्री बैंस ने बताया कि यह व्यवस्था बहुत सोच-समझकर लागू की गई थी ताकि शिक्षकों का समय और ऊर्जा क्लासरूम शिक्षण पर केंद्रित रह सके, जो हमारे समाज की प्रगति का आधार है। उन्होंने कहा कि कई बार जरूरी सरकारी काम हो सकते हैं, लेकिन ऐसे कार्यों के लिए शिक्षक को पहला विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। कक्षाओं में उनकी मौजूदगी के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए। लिखित अनुमति लेना अनिवार्य पत्र में मुख्य सचिव को निर्देश देते हुए मंत्री बैंस ने कहा कि सभी प्रशासनिक विभागों और जिला अधिकारियों को स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं कि आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 27 में बताई गई ड्यूटी के अलावा शिक्षकों की कोई भी गैर-शैक्षिक ड्यूटी न लगाई जाए। ऐसी कोई भी स्थिति, जहां शिक्षकों की तैनाती आवश्यक हो, ऐसी किसी भी तैनाती से पहले स्कूल शिक्षा विभाग से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य किया जाए।

झारखंड प्रशासन में बड़ा बदलाव: अविनाश कुमार को मिली मुख्य सचिव की जिम्मेदारी

रांची झारखंड सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी अविनाश कुमार को राज्य का नया मुख्य सचिव बनाया है। बता दें कि झारखंड की मुख्य सचिव अलका तिवारी बीते मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गईं। अलका तिवारी के स्थान पर विकास आयुक्त और ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार को राज्य का नया मुख्य सचिव बनाया गया है। इसके साथ ही अविनाश कुमार को अपर स्थानिक आयुक्त नई दिल्ली और मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव का भी अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। राज्य के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के अवर सचिव विनोद कुमार ने इस आशय की अधिसूचना जारी की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के नए मुख्य सचिव अविनाश कुमार को पदभार ग्रहण करने पर शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अविनाश कुमार की कार्यकुशलता व अनुभव से राज्य प्रशासन को और अधिक मजबूती मिलेगी। सीएम ने उम्मीद जताई कि इससे सरकार के जनसेवा के संकल्प को भी मजबूती मिलेगी। वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त अलका तिवारी को भावभीनी विदाई दी। सीएम ने कहा कि निवर्तमान मुख्य सचिव ने अपने कार्यकाल के दौरान बेहतर प्रशासनिक क्षमता का परिचय देते हुए सरकार की नीतियों के क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। अनुभव और योगदान को देखते हुए अलका तिवारी को राज्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में नामित किया गया है। मुख्यमंत्री ने उनके सेवा काल की सराहना करते हुए कहा कि तिवारी ने सदैव ईमानदारी, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता के साथ कार्य किया। उन्होंने राज्य प्रशासन को एक नई दिशा दी और प्रशासनिक परंपराओं को मजबूती दी। उल्लेखनीय है कि अविनाश कुमार 1993 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव के रूप में भी कार्यरत हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह को विकास आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। ज्ञातव्य है कि अलका तिवारी ने एक नवंबर 2024 को झारखंड के मुख्य सचिव के रूप में कार्यभार संभाला था। उनके पति डी के तिवारी भी झारखंड के मुख्य सचिव रह चुके हैं।  

विकासशील बने छत्तीसगढ़ के 13वें मुख्य सचिव, वरिष्ठ IAS अधिकारियों को पछाड़ते हुए संभाली कमान

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने सीनियर आईएएस अधिकारी विकासशील को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है. वे छत्तीसगढ़ के 13वें मुख्य सचिव होंगे और मुख्य सचिव अमिताभ जैन की जगह लेंगे. विकासशील 30 सितंबर को पदभार ग्रहण करेंगे. शासन ने उनका आदेश जारी कर दिया है. वर्तमान मुख्य सचिव अमिताभ जैन 30 सितंबर को रिटायर होंगे.  सीनियर अधिकारियों को किया सुपरसीड आईएएस विकासशील की नियुक्ति में 4 सीनियर अधिकारियों को सुपरसीड किया गया है. इन अफसरों में रेणु पिल्ले, सुब्रत साहू, अमित अग्रवाल और मनोज कुमार पिंगुआ शामिल हैं. पदभार ग्रहण करने के बाद वे करीब पौने चार साल तक मुख्य सचिव रहेंगे. बतां दे कि मध्यप्रदेश से अलग होकर बने छत्तीसगढ़ में अब तक 12 मुख्य सचिव रह चुके हैं. विकासशील 13वें मुख्य सचिव होंगे.  30 सितंबर को लेंगे पदभार वर्तमान मुख्य सचिव अमिताभ जैन 30 सितंबर को रिटायर हो रहे हैं. इसी दिन शाम को वे विकास शील को औपचारिक रूप से पदभार सौंपेंगे. पदभार के बाद विकासशील मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे. परंपरा के अनुसार, जिस दिन नया मुख्य सचिव पदभार ग्रहण करता है, उस दिन कोई बड़ी मीटिंग नहीं होती, सिर्फ सीएम से मुलाकात होती है. अगले दिन मंत्रालय में अफसरों की बैठक आयोजित की जाएगी.  जानिए कौन है IAS विकासशील विकासशील का जन्म 10 जून 1969 को उत्तरप्रदेश में हुआ था. उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीई, बाद में एमई किया. 4 सितंबर को 1994 में IAS सर्विस जॉइन की. उस समय मध्यप्रदेश कैडर के अफसर थे. बाद में छत्तीसगढ़ के गठन के बाद उन्होंने कैडर छत्तीसगढ़ चुन लिया. वे बिलासपुर और रायपुर के कलेक्टर भी रह चुके हैं. इसके अलावा छत्तीसगढ़ में कई अहम पदों पर काम भी कर चुके हैं. 2018 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. स्वास्थ्य कल्याण विभाग में अतिरिक्त सचिव रहे. जल शक्ति मंत्रालय में पेयजल और स्वच्छता विभाग में जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक रहें. जनवरी 2024 से एशियन डेवलपमेंट बैंक में कार्यकारी निदेशक के सलाहकार पद पर पोस्टेड थे.  पौने चार साल का होगा कार्यकाल नए मुख्य सचिव विकास शील का जन्म जून 1969 में हुआ था। इस हिसाब से जून 2029 में वे 60 साल के होंगे। यानी 30 सितंबर को पदभार ग्रहण करने के बाद वे करीब 3 साल 9 महीने तक मुख्य सचिव रहेंगे। लंबे कार्यकाल की दृष्टि से वे छत्तीसगढ़ के तीसरे मुख्य सचिव होंगे। सबसे लंबा कार्यकाल अमिताभ जैन का रहा है, जिन्होंने चार साल 10 महीने तक यह जिम्मेदारी संभाली। उनके बाद विवेक ढांड ने 3 साल 11 महीने तक पद पर काम किया था। विकासशील की नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबा कार्यकाल मिलने के कारण उनसे शासन की योजनाओं और नीतियों को निरंतरता और स्थायित्व मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सीएस की रेस में शामिल रहे इन 4 अफसरों को पछाड़ा- CS पद के लिए क्या होती है योग्यता ? मुख्य सचिव बनने के लिए 30 से 33 साल की प्रशासनिक सेवा की आवश्यकता होती है। आमतौर पर मुख्यमंत्री राज्य के सबसे सीनियर आईएएस अधिकारी को मुख्य सचिव के पद पर नियुक्त करते हैं। इस पद के लिए कोई निश्चित कार्यकाल नहीं होता है। इस दौरान कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है। मुख्य सचिव की नियुक्ति के लिए राज्य के मुख्यमंत्री की मंजूरी की आवश्यकता होती है।

मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ने नक्सल प्रभावित जिलों में विकास कार्यों की समीक्षा की

विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर:गांव-गांव तक योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के निर्देश रायपुर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के नक्सल प्रभावित जिलों में विकास कार्यों की समीक्षा की। बैठक में बस्तर, सुकमा, दक्षिण बस्तर, दंतेवाड़ा, उत्तर बस्तर कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बीजापुर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और गरियाबंद जिलों में हितग्राही मूलक कार्यक्रमों और योजनाओं की समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह ने नक्सल प्रभावित जिलों में मनरेगा, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, उज्ज्वला योजना, जनधन खाता, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, आधार कार्ड सहित अन्य हितग्राही मूलक कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि एलडब्ल्यूई प्रभावित जिलों में लगभग 99 प्रतिशत से अधिक लोगों का आधार पंजीकरण पूरा कर लिया गया है। इसी प्रकार लगभग 28 लाख 18 हजार 616 किसानों का प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत पंजीकरण कर उन्हें योजना का लाभ दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 26 लाख 21 हजार 491 हितग्राहियों के बैंक खाते खोले गए हैं। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 35 लाख 66 हजार 409 हितग्राहियों को गंभीर बीमारियों के उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। ग्रामीण इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए मोबाइल टावर स्थापित किए जा रहे हैं। क्षेत्र में लोगों को अधिक से अधिक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु विभिन्न बैंकों और डाकघरों की शाखाएं खोली जा रही हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सभी पात्र हितग्राहियों को नियमित रूप से खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए राशन कार्ड बनाए गए हैं। बैठक में प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह ने निर्देशित किया कि क्षेत्र के सभी पात्र मनरेगा हितग्राहियों को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु उनका जॉब कार्ड अवश्य प्रदान किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत सभी आवासों का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाए तथा सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने निर्देश दिया कि महतारी वंदन योजना के अंतर्गत शेष हितग्राहियों का शीघ्र सर्वे कर उन्हें लाभान्वित किया जाए। आत्मसमर्पित नक्सलियों को कौशल विकास योजना के तहत क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाए। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की भवन-विहीन शालाओं के भवन शीघ्र निर्मित किए जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय एक ही परिसर में हों। वीडियो कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, वित्त विभाग के सचिव श्री मुकेश बंसल, शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, उच्च शिक्षा, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, श्रम विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव डॉ. रवि मित्तल, आयुक्त बस्तर संभाग तथा पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सहित बस्तर, सुकमा, दक्षिण बस्तर, दंतेवाड़ा, उत्तर बस्तर कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बीजापुर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और गरियाबंद जिलों के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक शामिल थे।

MP में 31 अगस्त को रिटायर होंगे मुख्य सचिव अनुराग जैन, नए CS के नामों पर मंथन

भोपाल  मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन 31 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में वल्लभ भवन में यह सवाल तैरने लगा है कि अगला मुख्य सचिव कौन होगा। अनुराग जैन को एक्सटेंशन मिलेगा या फिर नए चेहरे को मौकान मिलेगा। इनसे पहले रहे दो मुख्य सचिव को एक्सटेंशन मिल चुका है। वहीं, कुछ सीनियर आईएएस अधिकारियों के नाम भी इस रेस में आगे हैं।वर्तमान मुख्य सचिव अनुराग जैन(Anurag Jain) 31 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में अगले मुख्य सचिव के लिए कई नामों की चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल मध्यप्रदेश के अगले सीएस को लेकर संस्पेंस बरकरार है। बता दें कि, प्रदेश सरकार ने अनुराग जैन के एक्सटेंशन का प्रस्ताव अब तक केंद्र सरकार को नहीं भेजा है। यदि सीएस अनुराग जैन को एक्सटेंशन नहीं मिलता है तो प्रशासनिक मुखिया के इस पद के लिए तीन अफसरों के नाम सबसे आगे है। इनमें 1990 बैच के आईएएस अफसर डॉ. राजेश राजौरा, 1991 बैच के आईएएस अफसर अशोक बर्णवाल और 1990 बैच की आईएएस अफसर अलका उपाध्याय का नाम शामिल है। इन कारणों से मिल सकता है एक्सटेंशन मुख्य सचिव को लेकर दो संभावनाएं हैं। पहली, अनुराग जैन को एक्सटेंशन मिल जाए। दूसरी, उन्हें एक्सटेंशन न मिले। अगर उन्हें एक्सटेंशन मिलता है, तो इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हो सकते हैं। पहला, केंद्र में बैठे अफसरों और नीति निर्धारकों से उनके अच्छे संबंध हैं। दूसरा, उन्हें वित्त प्रबंधन का अच्छा जानकार माना जाता है। तीसरा, उन्होंने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और नई पॉलिसी बनाने में अहम भूमिका निभाई है। सेवा विस्तार या मप्र को मिलेगा नया सीएस मुख्य सचिव (सीएस) अनुराग जैन का सेवा विस्तार होगा या फिर प्रदेश को नया सीएस मिलेगा, यह लगभग पहले से तय है। केवल खुलासा होना बाकी है। 13 दिन बाद यानी 31 अगस्त को या उसके एक-दो दिन पहले होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि सीएस जैन का इस दिन कार्यकाल समाप्त हो रहा है। यदि सेवा विस्तार मिलता है या प्रदेश को नए सीएस देने की बारी आई दोनों ही परिस्थितियों में दोपहर से शाम तक आदेश उसी दिन आ सकते हैं। ये लोग हैं प्रबल दावेदार वहीं, अगर अनुराग जैन को एक्सटेंशन नहीं मिलता है, तो वरिष्ठता के हिसाब से अपर मुख्य सचिव जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा इस पद के प्रबल दावेदार होंगे। लेकिन अपर मुख्य सचिव वन व पर्यावरण अशोक बर्णवाल और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में पदस्थ अलका उपाध्याय भी इस रेस में शामिल हैं। राजेश राजौरा हैं सबसे वरिष्ठ इसके साथ ही अनुराग जैन के रिटायर होने के बाद डॉ. राजेश राजौरा सबसे वरिष्ठ आईएएस अफसर होंगे। डॉ. राजौरा मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव रह चुके हैं। वह मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र उज्जैन संभाग के प्रभारी भी हैं।अशोक बर्णवाल भले ही डॉ. राजौरा से एक बैच जूनियर हैं, लेकिन उन्हें मुख्य सचिव बनाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। बर्णवाल भी निर्विवादित हैं। उनकी छवि तेजतर्रार अधिकारी की है। महिला आईएएस अफसर भी रेस में अलका उपाध्याय भी मुख्य सचिव पद की दौड़ में हैं। वे 1990 बैच में डॉ. राजौरा के बाद वरिष्ठता में दूसरे नंबर पर हैं। पिछले दो महीने में जिस तरह से उन्होंने मध्य प्रदेश के दौरों को लेकर दिलचस्पी दिखाई है, इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वे सीएस पद के लिए सक्रिय हैं। अगर अनुराग जैन को एक्सटेंशन नहीं मिलता है, तो वे विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष बन सकते हैं। हालांकि पिछले कुछ सालों से मध्य प्रदेश में मुख्य सचिव को एक्सटेंशन मिलता रहा है। ऐसे में इस बार भी संभावना है कि अनुराग जैन को एक्सटेंशन मिल सकता है। सेवा विस्तार संभावना के ये भी कारण पूर्व सीएस इकबाल सिंह बैंस हो या फिर वीरा राणा, इन्हें सेवा विस्तार मिलता रहा है। इनसे पहले के सीएस ने न्यूनतम दो-दो वर्ष तक सेवाएं दी हैं। अनुभव, प्रशासनिक पकड़, केंद्र से कई मामलों में समन्वय में जैन किसी से पीछे नहीं है। हालांकि उनके काम का आकलन किन आधारों पर होता है, यह सबसे अहम होगा। 1. दिल्ली की चली तो अनुराग जैन को सेवा विस्तार तय: माना जा रहा है कि यदि केंद्र ने ठान लिया तो मुख्य सचिव अनुराग जैन को सेवा विस्तार मिलना तय है। इसकी वजह उनके पास बेहतर प्रशासनिक अनुभव, केंद्र व पीएमओ में रही अहम जिमेदारियां और उन्हें ठीक ढंग से पूरा करना बताया जा है। 2. प्रदेश की चली तो मिल सकता है नया मुख्य सचिव: सूत्रों की मानें तो यदि मप्र के टॉप लीडर की बात मानी जाती है तो मध्यप्रदेश को नया मुख्य सचिव मिल सकता है। जिसकी वजह उज्जैन में 2028 के सिंहस्थ की तैयारी के अलावा अगला विधानसभा चुनाव समेत कई वजह बताई जा रही है। डॉ. राजेश राजौरा प्रबल दावेदार जानकारी के मुताबिक, अगर सीएस अनुराग जैन को एक्सटेंशन नहीं मिलता है तो 1990 बैच के आईएएस अफसर डॉ. राजेश राजौरा(Dr Rajesh Rajoura) इस पद के प्रबल दावेदार होंगे। डॉ. राजेश राजौरा मुख्यमंत्री के अपर सचिव रह चुके हैं। साथ ही ये सीएम मोहन के गृह क्षेत्र उज्जैन संभाग के प्रभारी भी रह चुके हैं। डॉ. राजौरा कृषि, गृह, उद्योग, उद्यानिकी और परिवहन विभाग संभाल चुके हैं। साथ ही ये झाबुआ में एडिशनल कलेक्टर और धार, बालाघाट उज्जैन और इंदौर में कलेक्टर रह चुके हैं। रेस में अशोक बर्णवाल मध्यप्रदेश के अगले मुख्य सचिव(Next Chief Secretary of MP) के रेस में अशोक बर्णवाल का नाम भी शामिल है। अशोक बर्णवाल(Ashok Barnwal) की छवि एक तेजतर्रार अधिकारी की है। बर्णवाल वन, मुख्यमंत्री कार्यालय, खाद्य प्रसंस्करण विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग संभाल चुके हैं। अशोक बर्णवाल गुना, देवास और शहडोल में कलेक्टर भी रहे हैं। बर्णवाल शिवराज सरकार के कार्यकाल में सीएमओ संभाल चुके हैं। दावेदारों की लिस्ट में अलका उपाध्याय ग्रामीण विकास मंत्रालय में अपर सचिव, राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी में महानिदेशक, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में सीईओ और जन क्रिया एवं ग्रामीण प्रौद्योगिकी उन्नति परिषद की महानिदेशक रह चुकी अलका उपाध्याय(Alka Upadhyay) भी मध्यप्रदेश के अगले मुख्य सचिव पद की दावेदारों की लिस्ट में शामिल हैं। अलका उपाध्याय शाजापुर में एडिशनल कलेक्टर का पदभार संभाल चुकी हैं। साथ ही दतिया, शाजापुर और खरगोन जिले की … Read more