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इंदौर में बाल विवाह पर कार्रवाई: 17 साल की दुल्हन और 13 साल के दूल्हे की शादी रोकी, प्रशासन ने दी दबिश

इंदौर  दौर के अहिल्या पलटन इलाके में शुक्रवार को एक घर में शादी की पूरी तैयारी हो चुकी थी। मंडप सज चुका था। दुल्हन को हल्दी लग रही थी। महिलाएं गीत गा रही थीं, तभी महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम पहुंच गई और नाबालिग बेटी की शादी रुकवा दी। लड़की के पिता ने टीम को बताया कि उनके समाज में 16 साल की उम्र में विवाह की छूट है। जब अधिकारियों ने इस दावे से जुड़ा कोई सरकारी नियम या आदेश दिखाने को कहा तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। 18 साल होने में 6 महीने बाकी जांच में सामने आया कि लड़की की उम्र 18 साल होने में करीब 6 महीने बाकी हैं। इसके बाद अधिकारियों ने परिजनों और लड़के पक्ष को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधान, सजा और कम उम्र में शादी के नुकसान समझाए। महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी चित्रा यादव, उड़नदस्ता प्रभारी महेंद्र पाठक सदस्य संगीता सिंह चाइल्ड लाइन के फूल सिंह कारपेंटर और टीम के अन्य सदस्यों ने दोनों परिवारों को समझाया। काफी देर तक चली चर्चा के बाद दोनों पक्ष शादी टालने पर राजी हो गए। मेहमानों को भोजन की अनुमति दी गई परिजनों ने बताया कि शादी की तैयारी में खर्च हो चुका है। निमंत्रण भी बंट चुके हैं। ऐसे में मेहमानों को खाली नहीं लौटाया जा सकता। इस पर प्रशासन ने उन्हें केवल भोजन कराने की अनुमति दी। टीम ने साफ किया है कि 19 अप्रैल को शादी के दिन दोनों परिवारों पर नजर रखी जाएगी। शपथ पत्र देने के बावजूद यदि बाल विवाह करने की कोशिश हुई तो संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिले में चल रहा विशेष अभियान जिले में बाल विवाह रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शिकायत मिलते ही टीम मौके पर पहुंचकर उम्र का सत्यापन करती है। जरूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई भी की जाती है। मामले में कलेक्टर ने शुक्रवार को प्रतिबंधात्मक आदेश भी जारी किया है। दूसरा मामला: दुल्हन 18 की, दूल्हा 13 साल का इंदौर के राऊ थाना क्षेत्र के संजय नगर में भी बाल विवाह रुकवाने का मामला सामने आया है। यहां दुल्हन की उम्र 18 वर्ष पूरी हो चुकी थी, लेकिन दूल्हा सिर्फ 13 वर्ष का था। शिकायत मिलते ही दल मौके पर पहुंचा और दस्तावेजों की जांच के बाद विवाह रुकवाया। पूछताछ में पहले परिजनों ने विवाह से इनकार कर दिया था। मौके पर विवाह की तैयारियां स्पष्ट दिख रही थीं। 19 अप्रैल को विवाह प्रस्तावित था। फ्लाइंग स्क्वॉड प्रभारी महेंद्र पाठक ने बताया कि हमें बाल विवाह की सूचना मिली थी। शुक्रवार को हल्दी का कार्यक्रम था। मौके पर पहुंचे और परिजन को समझाया। समझाइश पर वे मान गए, लेकिन उनका कहना था कि शादी के कार्ड बंट चुके हैं। ऐसे में हमने अक्षय तृतीया के दिन मेहमानों को भोजन कराने की अनुमति दी है। साथ ही जब तक लड़की बालिग नहीं हो जाती है, वह हर रोज आंगनबाड़ी में जाकर हाजिरी दर्ज कराएगी। कन्यादान योजना के तहत होगा विवाह जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिंह ने बताया कि जिन बालक-बालिकाओं के विवाह कम उम्र के कारण निरस्त कराए गए हैं, बालिग होने पर परिवार की इच्छा अनुसार शासन की कन्यादान योजना के तहत उनके विवाह कराए जाएंगे। इस योजना में परिवार को आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।

कानून का कड़ा शिकंजा: बस्तर में बाल विवाह मामले में 5 आरोपी, दोनों पक्षों पर FIR

बस्तर. बस्तर जिले में बाल विवाह के खिलाफ प्रशासन ने पहली बार कड़ा रुख अपनाया है. नगर कोतवाली में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई. मामला जगदलपुर ब्लॉक के 21 मार्च 2026 को हुए विवाह समारोह से जुड़ा है. शुरुआत में यह सामान्य शादी लगी, लेकिन शिकायत के बाद जांच शुरू हुई. जांच में सामने आया कि वधु की उम्र 18 वर्ष से कम थी. सत्यापन के बाद बाल संरक्षण विभाग ने तत्काल कानूनी कार्रवाई की. वर और वधु पक्ष के कुल 5 लोगों को आरोपी बनाया गया है. जिले में चार वर्षों में 15 मामले सामने आने की जानकारी मिली है. पहले ऐसे मामलों में समझाइश देकर छोड़ने की परंपरा रही. अब प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून से समझौता नहीं होगा. 18 से कम लड़की और 21 से कम लड़के की शादी अपराध है. दोषियों को 2 साल सजा या 1 लाख जुर्माना हो सकता है. यह कार्रवाई सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.

मध्य प्रदेश में बाल विवाह का मामला, 9 साल के दूल्हे और 8 साल की दुल्हन पर ऐक्शन, पंडित और टेंट संचालक गिरफ्तार

राजगढ़  मध्य प्रदेश के राजगढ़ में बाल विवाह का मामला सामने आया है। यहां 8 साल की बच्ची की शादी 9 साल के लड़के के साथ की गई। शादी से पहले सारी रस्में पूरी की गईं। इसमें दूल्हा-दुल्हन को मेहंदी लगी, हल्दी लगी और घोड़ी चढ़ने की भी रस्में पूी की गईं। शादी का वीडियो रिकॉर्ड कर किसी ने सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत ऐक्शन लिया और राजगढ़ के भोजपुर थाने में केस दर्ज कर लिया गया। प्रशासन से बोला झूठ मामला राजगढ़ के भोजपुर पुलिस थाना क्षेत्र का है। बाल विवाह की जानकारी पुलिस को एक दिन पहले ही लग गई थी। जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जानकारी लेनी चाही तो परिवार ने झूठ बोल दिया। परिजनों ने बताया कि बच्चों की शादी नहीं हो रही है बल्कि बालिग लड़के-लड़कियों की शादी हो रही है। इसके लिए बकायदा परिजनों ने दूसरे बालिग लड़के-लडकी को पेश कर दिया। इसके बाद प्रशासन की टीम चली गई और विधि-विधान से नाबालिग बच्चों की शादी कर दी गई। घटना की जानकारी मिलने पर खिलचीपुर के एसडीओपी धर्मराज नागर थाना के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे और महिला एवं बाल विकास अधिकारी की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया। इस कार्रवाई में पुलिस ने बच्चों के माता-पिता, टेंट संचालक, पंडित के साथ ही घोड़ी वाले का नाम भी शामिल है। 9 साल की बच्ची की भी हुई सगाई इसी तरह का मामला रागजगढ़ के करनवास में भी सामने आया है। करनवास में 9 साल की बच्ची की सगाई एक सामूहिक विवाह में कर दी गई। आगामी 26 अप्रैल को बच्ची की शादी भी तय की गई थी। मिली जानकारी के अनुसार, सगाई की जानकारी बच्ची के परिजनों को भी नहीं दी गई थी। इस दौरान शादी का समय करीब आते ही किसी बात को लेकर विवाद हो गया तो मामला पुलिस तक पहुंचा। अब पुलिस ने एक्शन शुरू कर दिया है।

बाल विवाह पर सख्ती: अक्षय तृतीया से पहले सभी जिलों में कंट्रोल रूम और उड़न दस्ते बनाने के आदेश

बाल विवाह पर सख्ती: अक्षय तृतीया से पहले सभी जिलों में कंट्रोल रूम और उड़न दस्ते बनाने के निर्देश भोपाल अक्षय तृतीया के अवसर पर होने वाले सामूहिक विवाह में बाल विवाहों को रोकने के लिए राज्य सरकार ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। सचिव महिला एवं बाल विकास श्रीमती जी वी रश्मि ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर बाल विवाह रोकथाम के लिए व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत प्रदेश में बाल विवाह की घटनाओं को शून्य करने और किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे(NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में बाल विवाह के मामलों में कमी आई है, लेकिन कुछ जिलों में अभी भी यह समस्या बनी हुई है। अक्षय तृतीया इस वर्ष 20 अप्रैल 2026 को है और इस दिन प्रदेश में बड़ी संख्या में सामूहिक विवाह आयोजित होते हैं। ऐसे आयोजनों में बाल विवाह होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन को विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। निर्देशानुसार स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाएगा। 20 अप्रैल को ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में पंच, सरपंच, सचिव और पार्षद बाल विवाह नहीं होने देने की शपथ लेंगे तथा पंचायत और वार्ड कार्यालयों में इसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके अलावा स्कूलों और आंगनबाड़ी के बच्चों की जागरूकता रैलियां भी निकाली जाएंगी।       गांवों में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा समूह चर्चा आयोजित कर परिवारों को बाल विवाह न करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, ग्राम कोटवार और पंचायत सचिव की मदद से 18 वर्ष से कम उम्र की किशोरियों की सूची तैयार कर संबंधित परिवारों को समझाइश दी जाएगी तथा उन पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। बाल विवाह की सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर 181, 1098 और 112 का व्यापक प्रचार करने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त बाल विवाह मुक़्त भारत पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। बाल विवाह रोकने के लिए प्रत्येक ग्राम और वार्ड में सूचना दल बनाए जाएंगे, जिनमें शिक्षक, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्व- सहायता समूह की महिलाएं और पंचायत प्रतिनिधि शामिल होंगे। सचिव श्रीमती रश्मि ने स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और दीवार लेखन के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए हैं, जिससे समाज में सही उम्र में विवाह के महत्व और कम उम्र में विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके।  

एक कदम जागरूकता का, सागर में बाल विवाह पर सख्त रोक, ज्योति तिवारी बनीं बेटियों की ढाल

एक कदम जागरूकता का, सौ कदम प्रगति की ओर सागर में बाल विवाह पर सख्त कार्रवाई, ज्योति तिवारी बनीं बेटियों की ढाल सफलता की कहानी समाचार भोपाल जब कानून संवेदनशील बनता है, तब इंसाफ़ केवल अदालत में नहीं, समाज के दिलों में उतरता है। सागर जिले के बण्डा क्षेत्र के ग्राम छापरी की तपती दोपहर में गाँव की चौपाल पर शादी की चर्चा जोरों पर थी “आज गोपाल ठाकुर के बेटे रामू की शादी है,” पर कोई नहीं जानता था कि उस दिन यह गाँव एक नई सोच की ओर कदम बढ़ाने वाला है। 17 वर्षीय रामू, जो कक्षा 11वीं में पढ़ता था और चिकित्सक बनने का सपना देखता था, की शादी 14 वर्षीय कुसुम से तय कर दी गई थी। समाज का दबाव था “अब लड़का बड़ा हो गया है, शादी कर दो,” लेकिन रामू का दिल पढ़ाई में था। वह यह नहीं चाहता था कि उसका बचपन यूँ ही समाप्त हो जाए। उसके दोस्त सोहन ने तब हिम्मत दिखाई और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर फोन कर दिया। कुछ ही देर में विशेष किशोर पुलिस इकाई की प्रभारी अधिकारी सु ज्योति तिवारी अपनी टीम और स्थानीय पुलिस के साथ गाँव पहुँचीं। ढोल-नगाड़े बज रहे थे, बारात की तैयारी हो रही थी, लेकिन पुलिस जीप और सायरन की आवाज़ से सब ठहर गया। परिवार के लोग पहले अनजान बने रहे, पर जब ज्योति तिवारी ने शांत और दृढ़ स्वर में कहा कि यह विवाह बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत अपराध है। लड़के की उम्र 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष से कम है, इसलिए यह विवाह नहीं हो सकता। गाँव में पहले विरोध हुआ, कुछ ने इसे परंपरा बताया। पुलिस अधिकारी ज्योति तिवारी ने कानून की धाराएँ समझाने के साथ मानवीय दृष्टिकोण से भी बात की। उन्होंने कहा बाल विवाह केवल एक परंपरा नहीं, यह एक ऐसा बंधन है जो बच्चों के भविष्य को बाँध देता है।” धीरे-धीरे माहौल बदला, सरपंच देवीसिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम और स्थानीय शिक्षकों की मदद से परिवार को समझाया गया। परिवार ने अंततः लिखित प्रतिज्ञा ली कि बच्चों की शादी केवल वयस्कता के बाद ही करेंगे। रामू और कुसुम की आँखों में राहत थी, जैसे किसी ने उनकी उम्र को फिर से लौटा दिया हो। गौरझामर की राधा ने दिखाई हिम्मत सागर जिले के ही गौरझामर गाँव में 16 वर्षीय राधा की कहानी ने भी सबका दिल जीत लिया। राधा का सपना पुलिस अधिकारी बनना था। जब पता लगा कि माता-पिता उसकी शादी तय कर चुके हैं, तो उसके सपने डगमगाने लगे, लेकिन उसने हार नहीं मानी। स्कूल में सुनी हुई बात उसे याद आई बाल विवाह अपराध है, मदद के लिए 1098 पर कॉल करें। उसने कॉल किया और पुलिस अधिकारी ज्योति तिवारी पुलिस टीम के साथ गाँव पहुँचीं। बारात जब गाँव की सीमा पर पहुँची, पुलिस सायरन की आवाज़ से सब ठहर गया। राधा की माँ ने कहा “दादी बीमार हैं, बस उसकी आख़िरी इच्छा है कि पोती की शादी देख लें।” यह सुनकर माहौल भावनात्मक हो गया, ज्योति तिवारी ने बड़ी संवेदनशीलता से समझाया माँ, आज अगर आप बेटी को पढ़ने देंगी, तो कल वही बेटी आपके नाम का मान बढ़ाएगी। पुलिस अधिकारी ज्योति तिवारी की समझाईश से धीरे-धीरे परिवार मान गया, और विवाह रोक दिया गया। राधा ने स्कूल लौटते हुए मुस्कुराकर कहा जब समाज और पुलिस साथ खड़े हों, तब कोई भी परंपरा किसी बालिका का भविष्य नहीं छीन सकती।” जागरूकता से परिवर्तन तक – ज्योति तिवारी की पहल इन दोनों घटनाओं के बाद पुलिस अधिकारी ज्योति तिवारी ने महिला एवं बाल विकास विभाग और शिक्षा विभाग के साथ मिलकर ग्राम पंचायतों व स्कूलों में “बाल विवाह रोकथाम एवं शिक्षा प्रोत्साहन अभियान” शुरू किया। अब सागर जिले के कई स्कूलों में हर महीने सत्र होते हैं। जहाँ बच्चे और अभिभावक सीखते हैं कि शादी तब ही, जब शिक्षा पूरी हो। गाँवों में ज्योति तिवारी का नाम अब “बेटियों की प्रहरी” के रूप में जाना जाता है। उनकी पहल ने यह साबित कर दिया कि कानून की सख्ती अगर संवेदनशीलता से जोड़ी जाए, तो बदलाव निश्चित है। हर उस विवाह को रोकना, जो उम्र से पहले हो रहा था किसी बच्चे के भविष्य को जीतने जैसा है।  

बाल विवाह मिटाने की दिशा में MP अग्रणी, जस्ट राइट्स संस्था का 2030 का लक्ष्य

भोपाल जस्ट राइट्स फार चिल्ड्रेन संस्था ने भारत को वर्ष 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य तय किया है। संस्था के संस्थापक भुवन ऋभु ने सोमवार को आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश इस दिशा में अग्रिम मोर्चे पर है। संस्था की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 41 जिलों में अब तक 36,838 बाल विवाह रोके गए, 4,777 बच्चों को बाल तस्करी से मुक्त कराया गया, और 1200 से अधिक यौन शोषण पीड़ित बच्चों की मदद की गई। मध्य प्रदेश अव्वल भुवन ऋभु ने कहा कि मध्य प्रदेश की सात करोड़ तीस लाख की आबादी में लगभग 40 प्रतिशत बच्चे हैं। इतनी बड़ी आबादी में बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है, लेकिन राज्य ने इस दिशा में निर्णायक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह, बाल तस्करी और यौन हिंसा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार और नागरिक समाज ने मिलकर तेजी से कार्य किया है। संस्था ने 2023 से अगस्त 2025 तक के आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। भुवन ऋभु ने यह भी याद दिलाया कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य था, जिसने बच्चियों के साथ दुष्कर्म पर मौत की सजा का प्रावधान किया था। अब वही सख्ती बाल विवाह के मामलों पर भी दिखाई जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA) एक धर्मनिरपेक्ष कानून है, जो बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसे धार्मिक विश्वासों या पर्सनल लॉ से कमतर मानना बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ होगा।