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सीएम हेल्पलाइन में ‘सेटिंग’ की कीमत 10 हजार! रिश्वत लेते पकड़ा गया छिंदवाड़ा बीएसी

छिंदवाड़ा जिले में लगातार भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं ।मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने शिक्षा विभाग के एक अधिकारी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। अमरवाड़ा विकासखंड में पदस्थ ब्लाक एकेडमिक कोआर्डिनेटर(बीएसी) सत्येंद्र जैन को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। जानकारी के अनुसार, यूनिक पब्लिक स्कूल के संचालक ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी कि सत्येंद्र जैन उनके स्कूल से जुड़ी एक सीएम हेल्पलाइन की शिकायत को बंद कराने (नस्तीबद्ध करने) के बदले में पैसों की मांग कर रहे हैं। शिकायत की पुष्टि होने के बाद जबलपुर लोकायुक्त टीम ने मंगलवार शाम को जाल बिछाया। जैसे ही सत्येंद्र जैन ने छिंदवाड़ा के चक्कर रोड स्थित आई.सी.एच. के पास शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये लिए, पहले से तैनात लोकायुक्त की टीम ने उन्हें दबोच लिया। आरोपी के हाथ धुलाने पर वे गुलाबी हो गए, जो रिश्वत लेने का पुख्ता प्रमाण है। लोकायुक्त पुलिस ने आरोपित के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इस कार्रवाई से जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है ।

मैहर में हेल्पलाइन ग्रेडिंग बढ़ाने के लिए फर्जी शिकायतें, SP ने दो पुलिसकर्मियों को किया निलंबित

मैहर प्रदेशभर में जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन 181 अब कुछ जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की ही फर्जीवाड़े का शिकार हो गई है. मामला मैहर जिले के अमरपाटन थाना क्षेत्र का है, जहां पदस्थ प्रधान आरक्षक रवि सिंह और आरक्षक संतोष राय पर हेल्पलाइन में झूठी शिकायत दर्ज करवाने का गंभीर आरोप लगा है. बताया जा रहा है कि दोनों पुलिसकर्मियों ने थाना ग्रेडिंग में नम्बर एक पर आने की लालसा में यह पूरा फर्जीवाड़ा किया. ये है मामला  जानकारी के अनुसार दीपावली के दौरान अमरपाटन के लंका मैदान में पटाखा दुकानों की जांच के दौरान दोनों आरक्षक वहां पहुंचे और दुकानदारों से मोबाइल लेकर खुद ही सीएम हेल्पलाइन 181 पर कॉल कर दी. कॉल सेंटर पर उन्होंने खुद को दुकानदार बताकर पुलिस पर ही गाली-गलौज और मारपीट की झूठी शिकायत दर्ज करवा दी. इतना ही नहीं शिकायत बंद करवाने के लिए इन पुलिसकर्मियों ने अपने दूसरे मोबाइल नंबर को संपर्क नंबर के रूप में दर्ज करवा दिया ताकि ओटीपी प्राप्त कर शिकायत निपटान दिखाकर ग्रेडिंग बढ़ाई जा सके. यह फर्जी खेल करीब पांच दुकानदारों अहमद रजा, मोहम्मद फिरोज, इरफान, मोहम्मद वसीम अकरम और अब्दुल मजीद के मोबाइल से किया गया. दुकानदारों ने दिया ये बयान  दुकानदारों ने बताया कि उनके द्वारा कोई शिकायत नहीं की गई थी, बल्कि पुलिसकर्मियों ने मोबाइल लेकर खुद ही कॉल कर दी. अब इस पूरे मामले का एक ऑडियो भी सामने आया है, जिससे दोनों आरक्षकों की करतूत उजागर हो गई है. मामले को संज्ञान में लेते हुए मैहर एसपी अवधेश प्रताप सिंह ने दोनों आरक्षक रवि सिंह और संतोष राय को लाइन हाजिर किया है. बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही निर्देश दे चुके हैं कि सीएम हेल्पलाइन में फर्जी शिकायत करने वालों पर एफआईआर दर्ज की जाए. अब देखना यह होगा कि क्या अमरपाटन थाने में पदस्थ इन पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई होती है या मामला दबा दिया जाता है. ग्रेडिंग में फर्स्ट आने की झूठी शिकायत आरोप है कि अमरपाटन थाने में पदस्थ इन दोनों पुलिसकर्मियों ने सीएम हेल्पलाइन की ग्रेडिंग में नंबर एक पर आने के लिए 181 सीएम हेल्पलाइन पर झूठी शिकायतें दर्ज करई थीं। उन्होंने पटाखा दुकानदारों के मोबाइल फोन लेकर स्वयं को फर्जी कॉलर बताते हुए गाली-गलौज और मारपीट की शिकायतें दर्ज कराईं। यहां तक कि कॉल सेंटर पर मौजूद एग्जीक्यूटिव से यह भी कहा कि पुलिस उनकी शिकायत दर्ज नहीं कर रही है। पटाखा दुकानदारों के मोबाइल से की शिकायत इन पुलिसकर्मियों ने लगभग पांच पटाखा दुकानदारों के मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर ऐसी शिकायतें दर्ज कराई थीं। साथ ही, प्रधान आरक्षक रवि सिंह और आरक्षक संतोष राय ने इन सभी सीएम हेल्पलाइन शिकायतों पर अपना दूसरा संपर्क नंबर भी दर्ज कराया, ताकि वे शिकायतें बंद कराने के लिए ओटीपी प्राप्त कर सकें और अमरपाटन थाना मैहर जिले में सीएम हेल्पलाइन बंद कराने की ग्रेडिंग में शीर्ष पर आ सके। ऑडियो भी आया सामने इस मामले में फर्जी शिकायत करने वाले आरक्षक का एक ऑडियो भी सामने आया है। इसके अलावा, शिकायत नंबर भी सार्वजनिक हुए हैं और दुकानदारों ने स्पष्ट रूप से बताया है कि उन्होंने कोई सीएम हेल्पलाइन शिकायत दर्ज नहीं की थी, बल्कि दो पुलिसकर्मी आए और मोबाइल मांगकर शिकायत दर्ज कर दी।

मध्य प्रदेश में बदलेगा शिकायत निवारण का सिस्टम, अब मुख्य सचिव देखेंगे लंबित मामलों को

 भोपाल  मुख्यमंत्री (सीएम) हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों का शीघ्र समाधान हो, इसके लिए अब संबंधित विभाग के अधिकारी के अलावा लंबित शिकायतें मुख्य सचिव तक पहुंचेंगी। मध्य प्रदेश सरकार एल-4 के बाद अब एल-5 स्तर को भी जोड़ने जा रही है। यहां मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव की निगरानी में लंबित शिकायतों का समाधान होगा। एल-1 यानी पहले स्तर के अधिकारी को जवाबदेह बनाने के लिए कार्रवाई विवरण भरने के कालम में संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। इसके अलावा अन्य स्तर पर भी अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षर करने का नियम लागू किया जाएगा। सीएम हेल्पलाइन-181 में दर्ज समस्याओं के समाधान में लगातार देरी के बीच राज्य सरकार इसमें यह महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रही है। फोर्स क्लोज करने से पहले शिकायतकर्ता को बताना होगा कारण शिकायतों के निराकरण के लिए एल-1, एल-2, एल-3 व एल-4 हैं। एल-1 से एल-3 तक निराकरण नहीं होता है तो वह एल-4 पर जाती हैं। यहां फिर भी लंबित रहती हैं या उसे फोर्स क्लोज कर दिया जाता है। अब ऐसा करने से पहले एल-5 लेबल पर मुख्य सचिव या अपर मुख्य सचिव भी शिकायतों का समाधान करेंगे। इसके अलावा शिकायतकर्ता को यह भी बताना होगा कि उसकी शिकायत को फोर्स क्लोज क्यों किया जा रहा है। गुजरात मॉडल पर होगा काम यह पूरी व्यवस्था गुजरात मॉडल पर होगी। इसके लिए मप्र सरकार के अधिकारियों का एक दल गुजरात भेजा गया था। यहां दल ने गुजरात की सीएम हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली और निराकरण करने के तरीके व मानीटरिंग सिस्टम को समझा। गुजरात से आए दल ने मध्य प्रदेश की सीएम हेल्पलाइन की विशेषताओं और खामियों का अध्ययन कर रिपोर्ट पेश की थी। इसमें बताया गया कि एल-1 स्तर पर उचित जिम्मेदारी नहीं होने से शिकायतों के समाधान में देरी होती है। अधिकांश कार्रवाई का विवरण कंप्यूटर आपरेटरों के भरोसे चलता है, जिसमें शिकायत का केवल प्रारंभिक ब्यौरा ही दिया जाता है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही नई व्यवस्था की जा रही है। यह कार्रवाई अभी प्रस्तावित है     गुजरात मॉडल की तर्ज पर मध्य प्रदेश में सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतें के निराकरण के लिए एल-5 स्तर को जोड़ा जा रहा है, इसमें मुख्य सचिव तक शिकायतें भेजी जाएगी। यह कार्रवाई अभी प्रस्तावित है, शासन से अनुमति मिलने पर लागू करेंगे। – संदीप आष्ठाना, अवर सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय  

सीएम हेल्पलाइन में फर्जीवाड़ा! दमोह में 29 फर्जी शिकायतकर्ता पकड़े गए, सूची प्रशासन को सौंप‍ी

दमोह दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लाक अंतर्गत सीएम हेल्पलाइन पर फर्जी शिकायत करने वाले 29 शिकायतकर्ताओं को जनपद सीईओ ने चिह्नित किया है। जिसकी सूची बनाकर कलेक्टर के पास भेजी गई है। अब इन लोगों की शिकायत का सत्यापन कराया जाएगा और यदि शिकायत गलत पाई गई तो आगे कार्रवाई की जाएगी। बता दें पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा यह योजन इसलिए शुरू की गई थी, ताकि आम लोगों को शासन की उस योजना का लाभ मिल सके, जिससे वह वंचित हैं। यदि अधिकारी उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं कर पा रहे हैं तो वह हितग्राही अपनी समस्याओं की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर कर सकता है। यह योजना सार्थक हुई लोगों को न्याय मिलना शुरू हो गया, लेकिन लोग इसका गलत इस्तेमाल करने लगे। जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंभीरता से लिया और झूठी शिकायत करने वाले लोगों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। कलेक्टर ने मांगी जानकारी दमोह कलेक्टर ने ब्लाक स्तर के अधिकारियों से जानकारी मांगनी शुरू कर दी है। तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने 29 लोगो की सूची बनाकर दमोह कलेक्टर सुधीर कोचर को भेजी है। यह वे लोग हैं जो लगातार शिकायत करते हैं। जबकि उस योजना से उनका दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं है। 26 सितम्बर को दमोह कलेक्टर ने जिले के सभी विभाग प्रमुखों को एक पत्र जारी किया था। जिसमें पूछा था आपके यहां सीएम हेल्पलाइन में यदि कोई ऐसे व्यक्ति हैं, जो बार बार शिकायत करते हैं या फिर शिकायत दर्ज करना उन्होंने अपनी आदत बना ली है तो उनका नाम, फोन नंबर शिकायत के विवरण की जानकारी सहित दर्ज करे और उनकी सूची भेजे। जिसके बाद तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने लोगों की एक सूची तैयार की है, जिनका काम ही सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करना है। उनके नाम ओर शिकायत की दर्ज संख्या सहित पूरी जानकारी भेजी गई है। ऐसी होती है ज्यादा शिकायत तेंदूखेड़ा ब्लाक में जो शिकायत दर्ज हैं उनमें अधिकाश लोग जिले या दूसरी जनपद से है। जिनकी शिकायतें जांच में गलत पाई गई है तो कुछ शिकायतो में लेनदेन करके मामलों का निराकरण हुआ है। शिकायत का जनहित या समाज हित से कोई वास्ता नहीं है। बल्कि निर्माण कार्य और पंचायत बंद या फिर सचिव, सरपंच की झूठी शिकायतों का हवाला दिया गया था। जांच में यह तथ्य सामने आने के बाद उनकी जानकारी एकत्रित की गई और सूची दमोह कलेक्टर के पास भेजी जा चुकी है। तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने बताया कलेक्ट्रेट से पत्र प्राप्त हुआ था। उसके बाद अप्रैल माह से सितम्बर तक की जानकारी एकत्रित की गई थी और 29 ऐसे शिकायतकर्ताओं की सूची तैयार की है जो लगातार सी एम हेल्पलाइन पर शिकायत करते है। इनकी शिकायतों में फर्जी मजदूर और निर्माण कार्य में गुणवत्ता की कमी का हवाला दिया जाता है। पत्र के माध्यम से जानकारी भेजी गई है आगे जो कार्रवाई होगी दमोह कलेक्टर करेंगे। 

CM हेल्पलाइन का दुरुपयोग पड़ा महंगा, फर्जी शिकायतकर्ताओं पर अब होगा तगड़ा एक्शन

ग्वालियर  सीएम हेल्पलाइन में बार-बार और झूठी शिकायत दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ताओं को ग्वालियर में भी चिह्नित किया जा रहा है। ऐसे कुछ आदतन शिकायत करने वालों के कुछ नाम मिल भी गए हैं जो जन सुनवाई से लेकर सीएम हेल्पलाइन में लगातार अलग-अलग शिकायतों से लेकर एक ही शिकायत बार-बार कर रहे हैं। सीएम हेल्पलाइन के लेवल वन स्तर पर आने वाली शिकायतों को डील करने वाले अधिकारियों से जानकारी मांगी गई है, शासन ने सभी जिलों से ऐसे लोगों के नाम व पूरी जानकारी कलेक्टरों से मांगी है। इसी क्रम में ग्वालियर के अधिकारी भी जानकारी तैयार कर रहे हैं। प्रदेश के सभी कलेक्टरों को भेजा पत्र बता दें कि शासन की ओर से कुछ दिनों पहले ही प्रदेश के सभी कलेक्टरों को पत्र भेजा गया है। इसमें लिखा गया कि सीएम हेल्पलाइन पोर्टल के तहत झूठी व आदतन शिकायतकर्ता के संबंध में जानकारी प्रदान करने व उक्त शिकायतकर्ताओं पर कार्रवाई किए जाने के लिए निर्देशित किया गया है। इसके अतिरिक्त जन प्रतिनिधियों एवं विभागों द्वारा भी समय-समय पर इस संबंध में कार्रवाई का आग्रह किया गया है। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर ऐसे शिकायतकर्ताओं के बारे में जानकारी व टीप दर्ज करने की सुविधा अधिकारियों की लाग इन आईडी में उपलब्ध है। ऐसे शिकायतकर्ताओं की पूरी जानकारी के साथ अधिकारियों से रिमार्क भी मांगा गया है। ब्लैकमेलिंग का जरिया बन रही सीएम हेल्पलाइन हकीकत में सीएम हेल्पलाइन का प्रभाव वर्तमान में कम हो गया है, हजारों शिकायतें हर माह आती हैं जिनमें बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें मिलती हैं जो बार-बार या ब्लैकमेल करने की नीयत से लगाई गई है। वहीं यह भी सच ही है कि अधिकारी अब सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को लेकर उतने संवेदनशील नहीं है जितने पहले थे।

फर्जी शिकायत कर ब्लैकमेल करने वालों की खैर नहीं, सीएम हेल्पलाइन में बनेगी निगरानी फाइल

भोपाल  सीएम हेल्पलाइन में शिकायत करने वाले लोगों में फेक शिकायतर्ताओं की बढ़ रही तादाद को देखते हुए भोपाल कलेक्टर ने ऐसे झूठे और भ्रामक शिकायतकर्ताओं पर लगाम कसने के लिए एक्शन लिया है. एक पत्र जारी कर कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन पर आने वाले सभी फेक कॉलर्स के बारे में जानकारी मांगी है. भोपाल कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन पर आदतन झूठी शिकायत करने वाले और ब्लैकमेलिंग करने वाले लोगों पर लगाम कसने के लिए प्रदेश के सभी जिला कलेक्टर से ऐसे फेक कॉलर्स के बारे में जानकारी मांगी है और उनकी पहचान करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. अधिकारी अपनी टिप्पणी के साथ भेजेंगे जानकारी इसके लिए शासन ने एक फार्मेट भी जारी किया है, जिसमें शिकायतकर्ता का नाम, मोबाइल नंबर, अब तक की गई कुल शिकायतों की संख्या और उसके बारे में अधिकारियों की टिप्पणी दर्ज की जाएगी। यह जानकारी लेवल अधिकारियों की लॉगिन आईडी के जरिए पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। गौरतलब है कि सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा बैठकों में बार-बार यह तथ्य सामने आया है कि कुछ लोग फर्जी शिकायतें कर अफसरों-कर्मचारियों को परेशान करते हैं। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव पहले ही ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दे चुके हैं। अब पहली बार सरकार ने बाकायदा आदेश जारी कर कलेक्टरों से रिपोर्ट तलब की है। सीएम हेल्पलाइन पर लगातार आ रहे हैं फेक कॉल रिपोर्ट के मुताबिक सीएम हेल्पलाइन पर लगातार फेक कॉल आ रहे हैं, जिससे जरूरतमंद की उचित समय में मदद मिलना मुश्किल हो जाता है, जबकि आदतन झूठी शिकायत दर्ज कराने और ब्लैकमेल करने बेवजह कॉल कर सरकारी साधनों का दुरुपयोग कर रहे हैं, जिससे परेशान होकर कलेक्टर ने यह आदेश जारी किया है. वहीं मुख्यमंत्री हेल्पलाइन कार्यालय से साफ कहा गया है कि अब ऐसे फर्जी और ब्लैकमेलिंग करने वाले शिकायतकर्ताओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. सभी जिलों के कलेक्टरों को कहा गया है कि वे अपने इलाके में ऐसे लोगों की पहचान करें, जो झूठी शिकायतें दर्ज करवा रहे हैं. हर जिले से ऐसे शिकायतकर्ताओं की लिस्ट तैयार कर सरकार को भेजनी होगी. ताकि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके. सरकार का कहना है कि ये कदम शिकायत प्रणाली को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए जरूरी है.  झूठे व ब्लैकमेलर शिकायकर्ता पर होगी कार्रवाई  सीएम हेल्पलाइन कार्यालय ने सभी जिला कलेक्टर को जारी एक पत्र में कहा कि वो सीएम हेल्पलाइन पर आदतन झूठी शिकायत करने वाले और ब्लैकमेलिंग करने वालों की लिस्ट तैयार करें और जानकारी मुहैया कराएं. माना जा रहा है कि कलेक्टर ने उक्त पत्र फर्जी और ब्लैकमेलिंग वाली शिकायतों से परेशान होकर जारी किया है. फर्जी कॉलर्स के मोबाइल की मांगी गई जानकारी  जिलाधिकारियों से कहा गया है कि वो सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज झूठी एवं आदतन शिकायतकर्ताओं की जानकारी नियमित रूप से उपलब्ध कराएं.निर्देश दिया गया है कि पोर्टल पर पंजीकृत झूठी/आदतन शिकायतकर्ताओं की सूची तैयार की जाए, जिसमें  नाम,मोबाइल नंबर,कुल शिकायतों की संख्या व संबंधित टिप्पणियाँ शामिल हों. शिकायतों की संख्या बढ़ी बीते कुछ महीनों से हेल्पलाइन में शिकायतों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन इनमें कई मामले फर्जी भी निकल रहे हैं. कुछ लोग अपनी निजी मांगों को पूरा करवाने के लिए अफसरों को धमकाते हैं. इससे न सिर्फ प्रशासनिक कामकाज में रुकावट आ रही है बल्कि असली शिकायतों पर ध्यान देना भी मुश्किल हो गया है. अब सरकार ने तय किया है कि ऐसी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा. इससे सिस्टम मजबूत होगा सरकार के नए निर्देशों के मुताबिक, कलेक्टरों को हर शिकायत की गहराई से जांच करनी होगी और यह भी देखना होगा कि शिकायत कितनी सही है. साथ ही हेल्पलाइन पर आने वाली हर शिकायत की गुणवत्ता पर नजर रखनी होगी. उम्मीद है कि इस कदम से जनता को भरोसा मिलेगा कि उनकी बात सही तरीके से सुनी जाएगी और झूठे शिकायतकर्ता अब कानून के शिकंजे में आएंगे. इससे सिस्टम और मजबूत होगा और असली जरूरतमंदों को जल्दी राहत मिल सकेगी.