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राजनीति में हलचल: Bhagwant Mann करेंगे राष्ट्रपति से भेंट, राज्यसभा में दल बदल पर नजर

चंडीगढ़. आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्यों के भाजपा में शामिल होने का मामला अब मामला राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए समय मांगा है। माना जा रहा है कि वह हाल ही में भाजपा में शामिल हुए 7 राज्यसभा सदस्यों के मुद्दे को लेकर अपना पक्ष रखेंगे और इस पूरे घटनाक्रम पर संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग करेंगे। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री राष्ट्रपति से यह अनुरोध कर सकते हैं कि संबंधित राज्यसभा सदस्यों को बुलाकर उनका पक्ष सुना जाए और उसके बाद नियमों के तहत उचित फैसला लिया जाए। इसके साथ ही दलबदल कानून के तहत इन सदस्यों की सदस्यता रद्द करने की मांग भी उठाई जा सकती है।सरकार का मानना है कि यह मामला लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक नैतिकता से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पर स्पष्ट निर्णय जरूरी है। सीएम मान ने आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर तीखा हमला करते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने 7 राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे और बीजेपी में शामिल होने पर तंज कसते हुए कहा कि अलग-अलग ये नेता ज्यादा महत्व नहीं रखते। उन्होंने एक्स पर पंजाबी में लिखा, 'अदरक, लहसुन, जीरा, मेथी पाउडर, लाल मिर्च, काली मिर्च और धनिया – ये सात चीजें मिलकर किसी खाने का स्वाद बढ़ा देती हैं, लेकिन अकेले इनमें से कोई भी पूरी डिश नहीं बन सकती।' किन 7 नेताओं ने छोड़ा AAP का साथ यह बयान उस घटना के एक दिन बाद आया जब राघव चड्ढा और संदीप पाठक समेत 7 राज्यसभा सांसदों ने AAP छोड़कर बीजेपी में शामिल होने का ऐलान किया है। इनके साथ अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, स्वाति मालीवाल और विक्रमजीत साहनी के नाम भी शामिल बताए गए हैं। राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और मूल्यों से भटक गई है, इसलिए उन्होंने बीजेपी का दामन थामा। उन्होंने यह भी कहा कि सातों सांसद एक गुट के रूप में बीजेपी में शामिल हुए हैं। इस घटनाक्रम के बाद भगवंत मान ने इन नेताओं को गद्दार करार दिया और बीजेपी पर AAP को तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बेअदबी (धार्मिक अपमान) के खिलाफ सख्त कानून बनने के बाद से बीजेपी असहज हो गई है। मान ने यह भी कहा कि इन सातों में से कोई भी बड़ा जनाधार वाला नेता नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया, 'एक सरपंच के पास भी वोट बैंक होता है, क्या इनके पास कोई वोट बैंक है?' उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में बार-बार चुनावी हार झेलने वाली बीजेपी अब दबाव, प्रलोभन और दल-बदल के जरिए AAP सरकार को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू उधर आम आदमी पार्टी के लिए यह घटनाक्रम बड़ा झटका माना जा रहा है। पंजाब से पार्टी के छह राज्यसभा सदस्यों का एक साथ भाजपा में शामिल होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस घटनाक्रम से भाजपा की राज्यसभा में स्थिति मजबूत हुई है। खास बात यह है कि पंजाब में केवल दो विधायक होने के बावजूद भाजपा अब राज्यसभा में सात सदस्यों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। सीएम की मुलाकात पर टिकी नजरें वहीं दूसरी ओर आप के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने पहले ही पार्टी का रुख साफ कर दिया है। उनका कहना है कि जब दो-तिहाई सदस्य एक साथ दल बदलते हैं तो दलबदल कानून लागू नहीं होता। इस बयान के बाद कानूनी बहस भी तेज हो गई है और विशेषज्ञ अलग-अलग राय दे रहे हैं। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री भगवंत मान की संभावित राष्ट्रपति से मुलाकात पर टिकी हैं। अगर यह मुलाकात होती है तो आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर कोई बड़ा संवैधानिक फैसला सामने आ सकता है, जो पंजाब की सियासत की दिशा तय करेगा।

सीएम मान का फिनलैंड दौरा, 300 शिक्षकों को ट्रेन-द-ट्रेनर मॉडल से मिला प्रशिक्षण, शिक्षा में आएगा बड़ा बदलाव

चंडीगढ़  पंजाब सरकार और फिनलैंड की टुर्कू यूनिवर्सिटी के बीच स्थापित शैक्षणिक सहयोग ने राज्य के स्कूलों में सकारात्मक बदलाव की नई शुरुआत कर दी है। मुख्यमंत्री ने अपने फिनलैंड दौरे के दौरान टुर्कू स्थित कुकुलो-मोइकोइनेन अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन एंड केयर सेंटर का दौरा किया और वहां अपनाई जा रही शिक्षण पद्धतियों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस साझेदारी के जरिए वैश्विक शिक्षण तकनीकों को पंजाब के क्लासरूम तक सफलतापूर्वक पहुंचाया जा रहा है, जिससे शिक्षा प्रणाली अधिक प्रभावी, आधुनिक और छात्र-केंद्रित बन रही है। उन्होंने बताया कि यह पहल ‘शिक्षा क्रांति’ को नई दिशा देने के साथ-साथ विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सीएम मान ने कहा कि फिनलैंड के साथ सहयोग के रचनात्मक परिणाम अब पंजाब के स्कूलों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। पारंपरिक रट्टा आधारित शिक्षा प्रणाली से हटकर अब बच्चों को अधिक आनंदमय, सहभागितापूर्ण और व्यावहारिक तरीके से पढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे सीखने का माहौल अधिक रोचक और प्रभावी बन रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि इस पहल के तहत ‘ट्रेन-द-ट्रेनर’ मॉडल अपनाया गया है, जिसके माध्यम से लगभग 300 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पंजाब के स्कूल शिक्षा विभाग और स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कोई अल्पकालिक प्रयास नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संस्थागत सुधार की दिशा में उठाया गया कदम है, जिसका उद्देश्य प्रारंभिक और बुनियादी शिक्षा को मजबूत करना है। उन्होंने आगे कहा कि प्रशिक्षण सत्र चंडीगढ़ के साथ-साथ फिनलैंड के टुर्कू और राउमा शहरों में भी आयोजित किए गए हैं। इन सत्रों के दौरान शिक्षकों को कार्यशालाओं, स्कूल विजिट और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के जरिए आधुनिक शिक्षण तकनीकों से अवगत कराया जा रहा है। मई 2026 तक चार चरणों में लगभग 300 शिक्षक इस प्रशिक्षण को पूरा कर लेंगे, जिससे राज्य भर के लाखों विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि शिक्षा को अधिक रोचक और जीवंत बनाने के लिए शिक्षकों को नए-नए प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब शिक्षकों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे विद्यार्थियों की अलग-अलग जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम को ढालने में सक्षम हो रहे हैं। इस पहल की खास बात यह है कि विदेशी मॉडल को सीधे लागू करने के बजाय उसे स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों के अनुरूप ढाला जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार इस कार्यक्रम को और व्यापक बनाने के लिए 'मास्टर ट्रेनर्स' तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि राज्य के हर कोने तक इन नई शिक्षण पद्धतियों को पहुंचाया जा सके। इसके साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म और मिश्रित प्रशिक्षण मॉडल भी विकसित किए जा रहे हैं, जिससे शिक्षकों का निरंतर पेशेवर विकास सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह सहयोग पंजाब के शिक्षा सुधारों की मजबूत नींव साबित होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह की पहलों से राज्य के विद्यार्थी भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार होंगे, और पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करेगा।  

पंथक मुद्दों पर सीएम मान की घेराबंदी, शिअद और सुखबीर बादल बने निशाने पर

अमृतसर  पंजाब की सियासत में इन दिनों एक पंथक मुद्दे पर खूब सियासत गरमाई हुई है। इस बार निशाने पर है शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष एवं पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल।  सुखबीर के एक बयान से शुरू हुए इस विवाद पर पंथक नेताओं के साथ-साथ अब मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी आक्रामक दिख रहे हैं जबकि सुखबीर बादल इसे अपने और अपनी पार्टी के खिलाफ साजिश बता रहे हैं। बादल का दावा है कि शिअद पंथ और गुरुघर की सेवा करने वाली पार्टी है। दरअसल, यह सियासत 2 दिसंबर 2024 के उस हुक्मनामे से जुड़ी है जिसे श्री अकाल तख्त ने सुखबीर बादल के खिलाफ जारी किया था। बेअदबी के एक मामले में बादल और शिअद की समूची लीडरशिप श्री अकाल तख्त के समक्ष पेश हुई थी और तत्कालीन जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने बादल को तनखाहिया घोषित उन्हें धार्मिक सजा दी थी। 13 अप्रैल को विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान भी सीएम ने इस मसले का जिक्र किया। विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे ज्ञानी रघुबीर सिंह ने भी बादल के इस बयान पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी। सीएम अब रैलियों के दौरान इस मुद्दे को खूब उछाल रहे हैं। सुखबीर बादल का दावा, उन्हें खत्म करने की साजिश सुखबीर बादल ने दावा किया था कि जिस दिन बहिबलकलां और बरगाड़ी की घटनाएं हुई थीं वे पंजाब से बाहर थे मगर यह विवाद खत्म करने के लिए उन्होंने सब कुछ अपनी झोली में पड़वा लिया था। बादल ने कहा था कि उन पर कई सियासी हमले हुए। कुछ लोग जो खुद को धार्मिक नेता कहते थे, वे उनकी सियासत को खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने यहां तक साजिश कर दी थी कि सजा के दौरान उन्हें श्री हरिमंदिर साहिब के बाहर बिना सुरक्षा बैठने का हुक्म दिया गया। उन पर जानलेवा हमला हुआ मगर परमात्मा का हाथ उनके सिर पर था। फैसला साजिश थी, साबित करें बादल : ज्ञानी रघुबीर बादल के बयान पर श्री अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने कहा कि बादल का यह बयान श्री तख्त साहिब की पवित्रता का अपमान है। सजा किसी साजिश के तहत नहीं बल्कि बयानों पर आधारित थी। अकाली लीडरशिप ने अपने कामों को माना था। अपने कामों का इकबाल किया था और उन्हें रिवायती धार्मिक सेवा करने का मौका दिया गया था। सेवा करने के बावजूद सुखबीर बादल ने अपने कामों से इन्कार कर दिया है। बादल यदि श्री अकाल तख्त साहिब आकर यह साबित कर दें कि उस वक्त दिया फैसला एक साजिश का हिस्सा था तो वे सिख परंपराओं के अनुसार किसी भी धार्मिक सजा को स्वीकार करने को तैयार हैं। 2 दिसंबर 2024 का फैसला पंथक रिवायतों और कबूल किए हुए गुनाहों के मुताबिक था। अकाली दल बेअदबी के लिए दोषी है : मान इसी विवाद पर सीएम मान हमलावर हैं। उन्होंने कहा कि शिअद श्री गुरु साहिब जी की बेअदबी के लिए दोषी है। इन नेताओं के पाप माफ नहीं किए जा सकते। ये अवसरवादी नेता हैं जो अपनी सुविधा और निजी सियासी हितों के अनुसार गिरगिट की तरह अपने रंग और रुख बदलते रहते हैं। जो लोग बेअदबी के लिए जिम्मेदार हैं वे श्री अकाल तख्त साहिब के सामने पेश हुए और पूरी जनता के सामने अपना अपराध कबूल किया। हालांकि यह उनकी राजनीतिक इच्छाओं के अनुसार नहीं था इसलिए उन्होंने कुछ समय बाद यू-टर्न ले लिया और कहने लगे कि कुछ लोग केंद्रीय एजेंसियों के हाथों की कठपुतली बनकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे थे। अब पूरे प्रदेशवासी इन नेताओं का असली चेहरा जान गए हैं।  

सीएम मान का सवाल: परिसीमन के बाद पंजाब में लोकसभा सीटें 13 से बढ़कर 19 हो सकती हैं

चंडीगढ़  केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन कानून के लागू होने पर पंजाब की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नई व्यवस्था के तहत लोकसभा और विधानसभा सीटों में बढ़ोतरी के साथ राजनीतिक समीकरण भी बदलेंगे और दलों को नई रणनीति बनानी पड़ेगी।  अनुमान है कि परिसीमन के बाद पंजाब में लोकसभा सीटों की संख्या 13 से बढ़कर 19 हो सकती है जबकि विधानसभा सीटें 117 से बढ़कर करीब 140 तक पहुंच सकती हैं। इसके चलते नए हलकों का गठन होगा और कई शहर व गांव अपने पुराने क्षेत्रों से बदल जाएंगे जिससे चुनावी गणित पर सीधा असर पड़ेगा। सियासत भी गरमाई इस मुद्दे पर प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि परिसीमन किसी एक पार्टी के फायदे के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि या तो महिला आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर लागू किया जाए या सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में बढ़ाई जाएं। मान ने आरोप लगाया कि जहां भाजपा मजबूत है वहां सीटें बढ़ाने और जहां कमजोर है वहां संख्या कम रखने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि परिसीमन निष्पक्ष होना चाहिए और इसके लिए आगामी जनगणना के आंकड़ों का उपयोग किया जाना चाहिए। आप नेता मनीष सिसोदिया ने भी आरोप लगाया कि विधेयक की आड़ में सीटों की संरचना से छेड़छाड़ की जा रही है जो देश की जनसांख्यिकी के खिलाफ है। वहीं शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा कि इस कदम से सत्ता संतुलन हिंदी भाषी राज्यों की ओर झुक सकता है जिससे संघीय ढांचा कमजोर होगा। उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन की कड़ी आलोचना की है।  इन बिलों से पंजाब में लोकसभा की करीब 6-7 सीटें बढ़ेंगी और इतनी ही सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाएंगी। हालांकि महिलाओं के लिए रिजर्व सीटों की हर साल रोटेशन भी होगी। परिसीमन क्या है? परिसीमन का अर्थ है लोकसभा या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा तय करने की प्रक्रिया. ये काम जनसंख्या के आधार पर किया जाता है. इसके लिए अलग से एक आयोग बनता है. इसका नोटिफिकेशन भारत राष्ट्रपति की ओर से जारी किया जाता है. परिसीमन आयोग के आदेशों को किसी कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती है. इसके आदेशों की कॉपी लोकसभा और विधानसभा में रखी जाती है, लेकिन उन्हें इसमें संशोधन करने की परमिशन नहीं होती।  लोकसभा सीटों में होगा 50% का इजाफा गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में भरोसा दिया कि महिला आरक्षण के लागू होने से न तो पुरुषों को और न ही किसी राज्य को कोई नुकसान होगा. इसके तहत लोकसभा की मौजूदा संख्या में 50% का इजाफा होगा. अगर नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 बना रहता है, तो 2029 में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण संभव नहीं होगा, क्योंकि यह अगली जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होगा. अब जानिए, किन राज्यों में कितनी बढ़ जाएंगी सीटें? अकेले यूपी-बिहार में होंगी 180 सीटें परिसीमन का सबसे बड़ा फायदा उत्तर प्रदेश और बिहार को होगा. 2011 में यूपी की आबादी देश की कुल आबादी का 16% थी. इस लिहाज से अगर लोकसभा में राज्यों के लिए लोकसभा की सीटें 815 होंगी, तो जनसंख्या के लिहाज से यूपी की 80 सीटों में 40 सीटों का इजाफा होगा. यानी कुल 120 सीटें हो जाएंगी. इसी तरह बिहार में अभी 40 सीटें हैं. परिसीमन के बाद इसमें 20 सीटों का इजाफा होगा और कुल 60 सीटें हो जाएंगी।  गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड और दिल्ली गुजरात में अभी लोकसभा की 26 सीटें हैं, जो बढ़कर 39 हो जाएंगी. राजस्थान में 25 सीटें हैं, जो 38 हो जाएंगी. उत्तराखंड में 5 सीटें हैं, जो 8 हो जाएंगी. दिल्ली में 7 लोकसभा सीटें हैं, ये बढ़कर 11 हो सकती हैं. इसके अलावा विधानसभा की सीटों में भी 50% की बढ़ोतरी की जाएगी. इससे विधानसभा की कुल सीटें 4123 से बढ़कर 6186 हो जाएंगी।   

CM मान ने कहा- बेअदबी बिल गवर्नर को भेजा, कैबिनेट बैठक की शुरुआत

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में आज पंजाब कैबिनेट की अहम बैठक हुई। बता दें कि, इस बैठक को उद्योग जगत और सामाजिक योजनाओं के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। बैठक को लेकर मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की ओर से अधिसूचना जारी की है वहीं विस्तृत एजेंडा बाद में सार्वजनिक किया गया है। उद्योगपतियों को मिली राहत जानकारी के अनुसार, पंजाब सरकार ने उद्योगपतियों को राहत देने के लिए कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए। इससे पहले सरकार नई औद्योगिक नीति लागू कर चुकी है, जिसका उद्देश्य राज्य में निवेश को बढ़ावा देना और विभिन्न क्षेत्रों के उद्योगों को सहूलियत प्रदान करना है। माना जा रहा है कि आज की बैठक में इन प्रयासों को और मजबूती देने के लिए नई घोषणाएं हो सकती हैं।  इससे पहले कल पठानकोट में राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा था कि बिल अभी तक उनके पास नहीं पहुंचा है और जैसे ही बिल आएगा, उस पर विचार किया जाएगा। आज की बैठक में बारिश के कारण फसलों को हुए नुकसान पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। इसके साथ ही विभिन्न विभागों में चल रही भर्तियों और अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर भी मंथन किया जाएगा। दोपहर 12 बजे वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा प्रेस कांफ्रंस करेंगे। एक महीने में यह दूसरी बैठक इससे पहले बड़ी कैबिनेट बैठक 11 अप्रैल 2026 को हुई थी, जिसमें ग्रामीण विकास और धार्मिक संरक्षण से जुड़े अहम फैसले लिए गए थे। इसमें 11,500 से अधिक गांवों में करीब 3 लाख स्ट्रीट लाइट्स लगाने को मंजूरी दी गई थी, जिसकी लागत ₹550 करोड़ तय की गई थी। साथ ही ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार बिल-2026’ को मंजूरी मिली थी, जिसमें बेअदबी मामलों में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। इससे पहले मार्च 2026 में हुई बैठकों में बजट से जुड़े फैसले, खिलाड़ियों के लिए 3% आरक्षण, स्वास्थ्य विभाग में भर्ती से जुड़ी अनुमति और शहीद होम गार्ड के परिवार को ₹1 करोड़ मुआवजा देने जैसे निर्णय शामिल रहे थे। सामाजिक योजनाओं पर भी फोकस बैठक में मावां-धीयां सत्कार योजना सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा भी की। इसके अलावा मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना की प्रगति पर चर्चा की गई, जिसका उद्देश्य पंजाब के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

CM मान का बड़ा ऐलान: पंजाब की महिलाओं को ₹1500 मासिक, जालंधर से आज रजिस्ट्रेशन की शुरुआत

चंडीगढ़. पंजाब सरकार आज मंगलवार से अपनी प्रस्तावित 'मावां धियां सत्कार योजना' के लिए महिला लाभार्थियों का रजिस्ट्रेशन शुरू करेगा, जिसकी शुरुआत मुख्यमंत्री भगवंत मान जालंधर से करेंगे। इसके 1 जुलाई से शुरू होने की उम्मीद है। इस दिन से जनरल श्रेणी की महिलाओं को सीधे 1,000 और अनुसूचित जाति श्रेणी की महिलाओं 1,500 रुपये का मानदेय मिलना शुरू हो जाएगा। आप के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को बताया कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू में 15 अप्रैल से नौ विधानसभा क्षेत्रों जैसे आदमपुर, मलोट, श्री आनंदपुर साहिब, दिड़बा, सुनाम, मोगा, कोटकपूरा, बटाला और पटियाला ग्रामीण में पायलट आधार पर चलाई जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि 15 मई से इस प्रक्रिया का विस्तार बाकी 108 विधानसभा क्षेत्रों में भी कर दिया जाएगा। रजिस्ट्रेशन के समय आवेदकों को पंजाब आधार कार्ड, वोटर पहचान पत्र और बैंक पासबुक जमा करना होगा। इन दस्तावेज़ों का इस्तेमाल पात्रता की जांच करने और लाभार्थियों के खातों में सीधे लाभ ट्रांसफर करने में मदद के लिए किया जाएगा। यह योजना आम आदमी पार्टी (AAP) के 2022 के विधानसभा चुनावों के उस वादे को पूरा करने की दिशा में एक कदम है, जिसमें महिलाओं को वित्तीय सहायता देने की बात कही गई थी। हालांकि, पार्टी ने उस समय 18 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये देने की बात कही थी, लेकिन सरकार ने अब संकेत दिया है कि योजना के लागू होने के साथ-साथ इसके अंतिम स्वरूप, जिसमें लाभार्थी के लिए पात्रता के मानदंड और 1,000 से 1,500 रुपये की सीमा के भीतर मिलने वाली सटीक राशि शामिल है को भी अधिसूचित कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस योजना के लिए पिछले कई महीनों से तैयारियां चल रही हैं, जिसमें लाभार्थियों का डेटाबेस तैयार करना और बैंकों के साथ समन्वय स्थापित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि चरणबद्ध तरीके से किए जा रहे इस रजिस्ट्रेशन का उद्देश्य पूरे राज्य में योजना को लागू करने से पहले छोटे पैमाने पर इसके सिस्टम की जांच करना है। महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता योजना शुरू करने वाला पंजाब अकेला राज्य नहीं है। पड़ोसी राज्यों—हरियाणा और हिमाचल प्रदेश—ने भी ऐसी योजनाओं की घोषणा की है। दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने भी हाल के वर्षों में इसी तरह के कार्यक्रम लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य घरेलू कल्याण और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इसके साथ ही, इस योजना से राज्य के खजाने पर सालाना 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बोझ पड़ने की संभावना है। राज्यों में पंजाब का GSDP के मुकाबले कर्ज़ का अनुपात सबसे ज़्यादा है, और नीति-निर्धारक हलकों में बार-बार होने वाले कल्याणकारी भुगतानों के लिए उपलब्ध वित्तीय गुंजाइश को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालाँकि, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने से इसका बेहतर क्रियान्वयन हो पाएगा। इस तरह इकट्ठा किया गया डेटाबेस लाभार्थियों की अंतिम संख्या तय करने में मदद करेगा।

त्रासदी पर संवेदना: पंजाब CM मान ने योगी से की बात, रेस्क्यू ऑपरेशन पर लिया अपडेट

लुधियाना. उत्तर प्रदेश के वृंदावन में यमुना नदी में हुए दर्दनाक नाव हादसे के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए हर संभव सहायता का भरोसा दिया है। उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि सरकार पूरी तरह से प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री मान ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे बातचीत कर हालात की जानकारी ली है। राहत व बचाव कार्यों में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार लगातार उत्तर प्रदेश प्रशासन के संपर्क में है और घटनास्थल पर चल रहे अभियान पर नजर बनाए हुए है। 11 की जा चुकी जान इस हादसे में अब तक 11 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है, जबकि 22 लोग घायल हैं और पांच अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। मृतकों में लुधियाना और जगराओं क्षेत्र के लोग अधिक हैं, जिससे पूरे इलाके में शोक का माहौल है। जानकारी के अनुसार, जगराओं से करीब 120 श्रद्धालु दो बसों में सवार होकर 9 अप्रैल को चार दिन की धार्मिक यात्रा पर वृंदावन गए थे। शुक्रवार दोपहर के समय केसी घाट के पास श्रद्धालुओं से भरी नाव गहरे पानी में पहुंच गई और नदी में मौजूद लोहे के ढांचे से टकराने के बाद पलट गई। यह बेहद दुखद घटना मुख्यमंत्री मान ने अपने संदेश में कहा कि “यह बेहद दुखद घटना है। कुछ श्रद्धालुओं की जान चली गई है, जिससे पूरा प्रदेश शोक में है। हम हर पीड़ित परिवार के साथ हैं और उन्हें हर संभव मदद दी जाएगी।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि घायलों के इलाज और प्रभावित परिवारों की सहायता में किसी प्रकार की कमी न रहने दी जाए। इसके साथ ही लुधियाना प्रशासन द्वारा नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं, जहां से लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है। यूपी में बचाव कार्य लगातार जारी घटना के बाद पुलिस, आपदा राहत बल, सेना और स्थानीय गोताखोरों की टीमों द्वारा बचाव अभियान लगातार जारी है। लापता लोगों की तलाश के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इस हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। मुख्यमंत्री की सक्रियता से पीड़ितों को राहत की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन पूरे प्रदेश में इस घटना को लेकर गहरा दुख और संवेदना का माहौल बना हुआ है। 

सीएम मान ने केंद्रीय कृषि मंत्री से मुलाकात की, पंजाब के गेहूं खरीद और मुआवजा मुद्दों पर की चर्चा

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन पहुंचे, जहां उन्होंने केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ अहम बैठक की। इस बैठक में गेहूं की खरीद व्यवस्था, किसानों को मुआवजा, लंबित राशि और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में खाद्य सुरक्षा और पेट्रोलियम से जुड़े विषयों पर विचार किया गया था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पुराने गेहूं के भंडार को तेजी से उठाने के लिए अतिरिक्त विशेष रेलगाड़ियों की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है, जिससे भंडारण की समस्या कम होगी। आज पंजाब का दौरा कर सकती है केंद्रीय टीम बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की और केंद्र से अपील की कि फसल नुकसान का आकलन करने के लिए तुरंत एक टीम पंजाब भेजी जाए। संभावना जताई जा रही है कि केंद्र की टीम आज ही राज्य का दौरा कर सकती है। ऋण सीमा पर ब्याज दर में बढ़ोतरी से राज्य पर बोझ वित्तीय मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नकद ऋण सीमा पर ब्याज दर में मामूली बढ़ोतरी भी राज्य पर भारी बोझ डालती है। उन्होंने बताया कि केवल 0.005 प्रतिशत की वृद्धि से ही लगभग 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ता है। इसके अलावा उन्होंने ग्रामीण विकास कोष की लगभग 9000 करोड़ रुपये की लंबित राशि का मुद्दा उठाया और इसे किस्तों में जारी करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में विचाराधीन है, लेकिन राज्य सरकार इसे वापस लेने पर भी विचार कर सकती है। इन दोनों मुद्दों पर केंद्र की तरफ से आश्वासन दिया गया है। आढ़तियों के कमीशन में बढ़ोतरी की मांग का समर्थन मुख्यमंत्री ने आढ़तियों के कमीशन में बढ़ोतरी की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि वे किसानों और मंडियों के संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं। मंडियों में काम करने वाले मजदूरों, विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से आने वाले श्रमिकों से जुड़े मुद्दों और भविष्य निधि से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की गई, जिसे केंद्रीय मंत्री ने जायज बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने की बात दोहराई और स्पष्ट किया कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।

पनबस और पीआरटीसी के बेड़े में वृद्धि, मुख्यमंत्री मान ने 100 बसों को किया फ्लैग ऑफ

पटियाला. पंजाब में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन की 100 नई बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह कार्यक्रम पटियाला में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग और अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने रैली स्थल पर पहुंचने से पहले पीआरटीसी मुख्यालय जाकर इन बसों को रवाना किया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य के लोगों को बेहतर, सस्ती और सुलभ परिवहन सुविधा प्रदान करना है। नई बसों के शामिल होने से यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी और दूरदराज के क्षेत्रों में भी आवाजाही आसान होगी। बिजली आपूर्ति को लेकर भी आश्वासन दिया मुख्यमंत्री ने इस मौके पर बिजली आपूर्ति को लेकर भी आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के थर्मल प्लांटों में कोयले का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आने वाली गर्मियों में बिजली की आपूर्ति निर्बाध जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने राजनीतिक बयान देते हुए विरोधी दलों के नेताओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भले ही कुछ लोग बड़े स्कूलों में पढ़े हों, लेकिन असली पंजाबी संस्कृति गांवों से ही सीखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं गांव से जुड़े हैं और वहीं से उन्होंने अपनी संस्कृति और मूल्यों को सीखा है। जल्द और बसें भी होंगी शामिल सरकार की योजना के अनुसार पनबस के बेड़े में कुल 606 बसें शामिल की जाएंगी। इनमें 387 नई बसें सीधे तौर पर जोड़ी जाएंगी। इसके अलावा किलोमीटर योजना के तहत 19 वोल्वो बसें, 100 वातानुकूलित बसें और 100 साधारण बसें भी शामिल की जाएंगी। परिवहन मंत्री ने कहा कि पीआरटीसी और पनबस के बेड़े में एक हजार से अधिक नई और किलोमीटर योजना वाली बसों को शामिल कर राज्य की परिवहन व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि राज्य में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और निजी वाहनों पर निर्भरता भी कम होगी।

फरीदकोट और जुलाना में आढ़तियों की हड़ताल जारी, कमीशन की मांग; CM भगवंत मान से 6 अप्रैल को बैठक

फरीदकोट / जुलाना  रीदकोट में आढ़ती एसोसिएशन पंजाब के आह्वान पर नई अनाज मंडी के समूह आढ़तियों की हड़ताल लगातार चौथे दिन भी जारी है। आढ़तियों की तरफ गेहूं व धान की फसल पर ढाई प्रतिशत कमीशन की मांग को लेकर संघर्ष किया जा रहा है।  इस मौके आढ़ती एसोसिएशन ने कहा कि जब तक उन्हें उनका बनता कमीशन नहीं दिया जाता, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी। वह गेहूं की फसल की खरीद के कार्य में सहयोग नहीं करेंगे। हालांकि अभी तक मंडियों में गेहूं नहीं पहुंची है। बैठक में आढ़ती नेताओं ने कहा कि उनके द्वारा पंजाब सरकार और केंद्र सरकार से कोई अतिरिक्त मांग नहीं की जा रही है। अभी तक पूरा नहीं किया वादा उनकी सिर्फ यही मांग है कि लॉकडाउन के समय फ्रीज की गई कमीशन को बहाल कर ढाई प्रतिशत का भुगतान किया जाए। उन्होंने कहा कि पिछले सीजन के समय पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने भरोसा दिलाया था कि अगर केंद्र सरकार कमीशन नहीं बढ़ाती तो राज्य सरकार अपने स्तर पर हरियाणा की तर्ज पर कमीशन के अंतर का भुगतान करेगी, लेकिन यह वादा अब तक पूरा नहीं हुआ। गेहूं पर 50 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन तय उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में आढ़तियों को गेहूं पर करीब 50 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन तय किया गया है जबकि एमएसपी पर ढाई प्रतिशत के हिसाब से उन्हें 65 रुपये प्रति क्विंटल मिलना चाहिए। हरियाणा में इस अंतर का भुगतान राज्य सरकार करती है। ऐसे में पंजाब सरकार को फैसला लेना चाहिए। जुलाना में आढ़तियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी कस्बे की नई अनाज मंडी में आढ़तियों और किसानों द्वारा सरकार के नए नियमों के विरोध में शुरू की गई अनिश्चितकालीन हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। मंडी में कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा और आढ़तियों के साथ-साथ किसानों ने भी धरने में भाग लेकर अपना रोष प्रकट किया। धरने की अध्यक्षता आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान पवन लाठर ने की। धरने को संबोधित करते हुए पवन लाठर ने कहा कि सरकार लगातार ऐसे फैसले ले रही है, जो किसानों और आढ़तियों के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना जमीनी हकीकत को समझे नए-नए नियम थोपे जा रहे हैं, जिससे मंडी व्यवस्था चरमरा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों के ट्रैक्टर पर नंबर प्लेट अनिवार्य करना और बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करना पूरी तरह अव्यवहारिक है। इससे किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि मंडी का समय सुबह 6 बजे से शाम 8 बजे तक सीमित करना भी गलत फैसला है। अधिकांश किसान रात के समय कंबाइन से फसल कटवाते हैं और उसी अनुसार मंडी में फसल लेकर आते हैं। ऐसे में समय सीमा तय करने से उन्हें भारी दिक्कतें आएंगी। आढ़तियों ने इन फैसलों को तुगलकी फरमान बताते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की। धरने के दौरान किसान नेता और ढांडा खाप के पूर्व प्रधान नरेश ढांडा ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि यदि दो दिनों के भीतर बायोमेट्रिक नियम वापस नहीं लिया गया तो वह अपना अंगूठा काटकर मुख्यमंत्री को भेजेंगे। मांग को केंद्र तक पहुंचाने को सीएम सैनी से मिले: एसोसिएशन आढ़ती नेता बंटी गुप्ता व गिरीश छाबड़ा ने बताया कि उनके पंजाब प्रधान ने आढ़तियों की मांग को केंद्र सरकार तक पहुंचाने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी मुलाकात की है। मंडियों में आढ़तियों के खर्चे बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार उनका बनता कमीशन नहीं दे रही। उन्होंने बताया कि 6 अप्रैल को आढ़तियों की मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ बैठक तय है, जिसके बाद ही आगे की रणनीति और निर्णय लिया जाएगा।