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मुख्यमंत्री साय ने शहीद जवानों को दी अंतिम सलामी, कहा– हमारे जवान नक्सलवाद के खिलाफ मजबूती से डटे हैं

 रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बिलासपुर के अटल बिहारी बाजपेई विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह में शमिल होने के लिए रायपुर से रवाना हो गए हैं। रवानगी से पहले एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है कि दीक्षांत समारोह में देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि हैं और राज्यपाल भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री साय ने बीजापुर में हुई नक्सली मुठभेड़ में जवानों की शहादत और ऑपरेशन में मिली सफलता पर कहा कि लगातार ऑपरेशन हो रहे हैं, हमारे जवान मजबूती के साथ नक्सलवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं। कल ऑपरेशन में DRG के तीन जवान शहीद हुए हैं। हम उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, उनके साहस को नमन करते हैं और उनके परिवार को इस शोक को सहने की भगवान शक्ति प्रदान करें ऐसी प्रार्थना करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस मुठभेड़ में बड़ी सफलता मिली है, बड़ी संख्या में नक्सली न्यूट्रलाइज हुए हैं। वहीं उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि बीजापुर में ऑपरेशन के दौरान 16 नक्सली मारे गए हैं। बहादुर जवानों ने ऑपरेशन को अंजाम दिया। हमने तीन जवानों को खोया, नक्सलियों की यह कायराना हरकत है। जवानों की शहादत को जाया जाने नहीं देंगे।

श्रम मंत्री के घर विवाह उत्सव में राजनीतिक हस्तियों की चहल-पहल, सीएम और सांसद ज्योत्सना महंत भी पहुँचे

कोरबा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और वित्त मंत्री ओपी चौधरी आज एक कार्यक्रम में शामिल होने कोरबा पहुँचे। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और वित्त मंत्री ओ पी चौधरी उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के कोहड़िया स्थित निवास पहुंचे। यहां उन्होंने मंत्री देवांगन के भाई कौशल देवांगन के सुपुत्र विश्वेश देवांगन और मेघा देवांगन के वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्हें आर्शीवाद देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। वहीं शादी समारोह में कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ लखन लाल देवांगन के घर पहुंचे उन्होंने भी शादी समारोह में आशीर्वाद देते हुए उज्जवल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री के कोरबा आगमन को लेकर जिला प्रशासन के द्वारा पहले से ही तैयारी की जा रही थी जहां रूमगरा हेलीपैड में पुलिस बल तैनात किए गए थे वह जिस मार्ग से आना था उसे मार्ग के आवाज चाहिए पर कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था इसके अलावा श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के घर के बाहर भी पुलिस बल तैनात किए गए थे। मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन की परिवार वालों के साथ सामूहिक रूप से फोटो खिंचवाये वही उनके निवास स्थान पर उनके रिश्तेदारों से मुलाकात का हाल-चाल जाना।

संविधान दिवस पर CM विष्णुदेव साय ने बाबासाहेब अंबेडकर को किया नमन

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित अंबेडकर चौक में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें सादर नमन किया। डॉ. अंबेडकर के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे केवल भारतीय संविधान के शिल्पकार ही नहीं, बल्कि समानता, न्याय और सामाजिक समरसता के अटूट स्तंभ भी रहे हैं। इस अवसर पर विधायक राजेश मूणत, विधायक पुरंदर मिश्रा, महापौर मीनल चौबे सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण और बड़ी संख्या में उपस्थित आमजन ने संविधान दिवस पर डॉ. अंबेडकर के अप्रतिम योगदान को याद किया तथा संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। मुख्यमंत्री  साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारा संविधान देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों का मूल आधार है। डॉ. अंबेडकर ने दूरदर्शिता और गहन अध्ययन के साथ संविधान के प्रारूप निर्माण में योगदान दिया है। भारत का संविधान न केवल हमारे अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि नागरिक कर्तव्यों के प्रति हमें जागरूक भी करता है।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनसमूह ने भी विविधता में एकता की भारतीय परंपरा को आगे बढ़ाने तथा संवैधानिक मूल्यों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

छत्तीसगढ़ में फूड प्रोसेसिंग को नई गति मिलेगी, सीएम साय ने चिराग पासवान से की रणनीतिक बातचीत

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री चिराग पासवान से उनके कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान छत्तीसगढ़ से जुड़े अनेक जनहित विषयों पर रचनात्मक और सार्थक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने विशेष रूप से राज्य में खाद्य सुरक्षा, कृषि-आधारित उद्योगों और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (NIFTEM) संस्थान की स्थापना छत्तीसगढ़ में की जाए, ताकि राज्य के युवाओं को आधुनिक खाद्य तकनीक, उद्यमिता तथा नए रोजगारों से संबंधित उच्चस्तरीय प्रशिक्षण का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि कृषि दृष्टि से छत्तीसगढ़ एक मजबूत राज्य है और यहां ऐसे संस्थान से हजारों छात्रों, किसानों तथा खाद्य-आधारित उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस प्रस्ताव को अत्यंत सकारात्मक रूप से लेते हुए कहा कि वे इस विषय पर हर संभव सहयोग देंगे और इसे गंभीरता से विचार में लेंगे। रायपुर में वर्ल्ड फूड इंडिया का रीजनल समिट कराने का किया आग्रह मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह भी अनुरोध किया कि वर्ल्ड फूड इंडिया के रीजनल समिट का आयोजन रायपुर में किया जाए। उन्होंने कहा कि रायपुर की समृद्ध खाद्य परंपरा, उत्कृष्ट कनेक्टिविटी और विविधता ऐसे आयोजन के लिए आदर्श गंतव्य बनाती है। यह फेस्टिवल क्षेत्रीय पाक-परंपराओं को वैश्विक पहचान देगा और नए खाद्य-आधारित उद्यमों के लिए बड़े अवसर उत्पन्न करेगा। सीएम साय ने कहा कि यह आयोजन दिल्ली के वर्ल्ड फूड इंडिया अथवा गुवाहाटी के नॉर्थ ईस्ट फूड फेस्ट की तर्ज पर हर दो वर्ष में आयोजित किया जाए। प्रदेश में फूड इर्रेडिएशन यूनिट के लिए केंद्र से मांगा सहयोग मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में खाद्य वस्तुओं की जांच के लिए फूड टेस्टिंग लैब तथा खाद्य उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए फूड इर्रेडिएशन यूनिट स्थापित की जानी है, जिनके लिए राज्य केंद्र से सहयोग चाहता है। उन्होंने कहा कि धान तथा फल–सब्जी आधारित उद्योगों में बड़े निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को व्यापक गति मिलेगी। साय ने जानकारी दी कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को विशेष महत्व दिया गया है और निवेशकों को अनेक अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। इसी के अंतर्गत Drools कंपनी द्वारा छत्तीसगढ़ में ₹1,000 करोड़ का निवेश किया जा रहा है, जिससे लगभग 3,000 लोगों को रोजगार मिलेगा और इसका लाभ ग्रामीण व आदिवासी समुदायों तक पहुंचेगा। राइस ब्रान ऑयल हब के रूप में विकसित होगा छत्तीसगढ़ सीएम ने यह भी कहा कि राज्य का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को राइस ब्रान ऑयल हब के रूप में विकसित करना है, जिससे तेल आयात पर निर्भरता कम होगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को सुदृढ़ समर्थन मिलेगा। आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ और विकसित भारत 2047 का सपना इन्हीं प्रयासों के माध्यम से साकार होगा। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत एवं इन्वेस्टमेंट कमिश्नर रितु सेन उपस्थित थीं।

CM साय का संदेश: लघु वनोपज से वनवासियों के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित के नवनियुक्त अध्यक्ष रूप साय सलाम और उपाध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा के पदभार ग्रहण कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने नए दायित्वों के लिए अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अध्यक्ष के रूप में रूप साय सलाम को एक अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे वे अपनी संवेदनशीलता, अनुभव और दक्षता के साथ उत्कृष्ट रूप से निभाएंगे। उन्होंने उल्लेख किया कि रूप साय सलाम स्वयं जनजातीय समुदाय से आते हैं और समुदाय की समस्याओं, अपेक्षाओं एवं आवश्यकताओं को भली-भांति समझते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनवासियों की आय बढ़ाने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रदेश में निवासरत जनजातीय समाज के उत्थान को दृष्टिगत रखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया। साथ ही केंद्र में अलग जनजातीय मंत्रालय की स्थापना से समुदाय के विकास को नई गति मिली। उन्होंने कहा कि हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसी भावना और संकल्प को आगे बढ़ाते हुए ‘धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना’ तथा ‘पीएम जनमन योजना’ लागू की, जिनके माध्यम से जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्राहकों को देश में सर्वाधिक मूल्य दिया जा रहा है। वनोपजों के वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि वनवासी समुदाय की आय में वृद्धि हो और उन्हें वास्तविक आर्थिक मजबूती प्राप्त हो। वनमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यह प्रदेश का सौभाग्य है कि छत्तीसगढ़ के मुखिया विष्णु देव साय स्वयं जनजातीय समुदाय से आते हैं और वनवासी भाई-बहनों की पीड़ा, कठिनाइयों और आकांक्षाओं को गहराई से समझते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की 32% आबादी जनजातीय है तथा 44% क्षेत्र वनाच्छादित है, इसलिए वनोपज ही वनवासियों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता को ‘हरा सोना’ कहा जाता है और उसके अनुरूप मूल्य देने का कार्य मुख्यमंत्री साय ने किया है। तेंदूपत्ता का प्रति मानक बोरा मूल्य 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है। वनमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने न केवल चरण पादुका योजना को पुनः प्रारंभ किया है, बल्कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वनोपज संग्राहक परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रभावी कदम लगातार उठाए जा रहे हैं। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, नान के चेयरमैन संजय श्रीवास्तव, योग आयोग के अध्यक्ष रूप नारायण सिन्हा, छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डॉ. सलीम राज, वनबल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव सहित लघु वनोपज संघ के सदस्य तथा प्रदेशभर से बड़ी संख्या में पहुंचे वनोपज संग्राहक उपस्थित थे।

सरेंडर्ड नक्सलियों को मिली फूड ट्रेनिंग, बस्तर में चलेंगे कैफे; CM साय ने पहले दिन किया फूड ऑर्डर

बस्तर  नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पुनर्वास और मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में आज बस्तर एक नया इतिहास रचा है। पुलिस लाइन स्थित त्रिवेणी परिसर के सामने पंडुम कैफे अपनी तरह का पहला ऐसा कैफेटेरिया होगा, जहां नक्सल पीड़ित परिवारों और समर्पित नक्सलियों को रोजगार देते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।इस संवेदनशील पहल का उद्घाटन मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने किया। पंडुम कैफे का संचालन दुर्ग की प्रसिद्ध नुक्कड़ संस्था करेगी, जो वर्षों से मूक-बधिर और दिव्यांग बच्चों की देखरेख और सामाजिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में पंडुम कैफे की शुरुआत की गई है जिसका संचालन सरेंडर्ड नक्सली और नक्सल हिंसा पीड़ित परिवार के लोग करेंगे। इसके लिए बकायदा उन्हें खाना बनाने, सर्व करने, ऑर्डर लेने की ट्रेनिंग दी गई। शुरुआत में 13 लोग मिलकर इस कैफे को चलाएंगे।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जगदलपुर के पुलिस लाइन परिसर में बने इस कैफे का उद्घाटन किया। इस दौरान सीएम ने खुद फूड ऑर्डर किया। सरेंडर किए नक्सलियों ने CM को फूड परोसा। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने डिजिटल रूप से बिल भी पेय किया। पुलिस लाइन परिसर में बना पंडुम कैफे दरअसल, सरकार की पुनर्वास नीति के तहत बस्तर पुलिस और प्रशासन के सहयोग से जगदलपुर पुलिस लाइन परिसर में पंडुम कैफे बनाया गया है। इसके स्ट्रक्चर निर्माण के लिए शासन-प्रशासन ने पैसे खर्च किए हैं। नक्सल हिंसा पीड़ित परिवार और हथियार छोड़कर मुख्य धारा में लौटे नक्सलियों को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से इस कैफे का शुभारंभ किया गया है। अभी कुल 13 लोगों को कैफे की चाबी थमाई गई है। 13 लोगों को मिला रोजगार कैफे के माध्यम से कुल 13 लोगों को रोजगार मिला है। जिसमें 8 नक्सल हिंसा पीड़ित हैं, 5 लोग सरेंडर नक्सली हैं। इनमें 8 महिलाएं भी शामिल हैं। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत तैयार किया गया यह कैफे नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्म समर्पित माओवादी कैडरों के लिए आजीविका प्रदान करने वाला एक मॉडल है। पहले दी ट्रेनिंग, फिर काम में लगाया इन 13 लोगों को पहले जगदलपुर में ही ट्रेनिंग दी गई। इन्हें अलग-अलग तरह के फूड्स को बनाने से लेकर परोसने तक के गुर सिखाए गए। साथ ही कस्टमर से कैसे बर्ताव करना है, कैसे ऑर्डर लेना है इसके बारे में भी बताया गया। करीब 1 महीने से ज्यादा इन्हें ट्रेनिंग दी गई। जब ये इसमें माहिर हुए तो 13 लोगों को कैफे की चाबी थमा दी गई। पर्यटकों को बस्तर दिखाने हो रहे तैयार सरकार के पुनर्वास नीति के तहत बस्तर के पूर्व नक्सलियों को अलग-अलग काम में पारंगत बनाया जा रहा है। पुनर्वास केन्द्रों में उनके जीवन को बदलने की पहल हो रही है। आड़ावाल के केन्द्र में करीब 30 सरेंडर नक्सली होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रहे हैं साथ ही कई अन्य पूर्व नक्सलियों को टूरिस्ट गाइड बनाने की भी तैयारी हो रही है। CM बोले- बस्तर के लिए नया अध्याय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पंडुम कैफे को स्पष्ट सामाजिक और विकासात्मक उद्देश्यों के साथ स्थापित किया गया है। ये बस्तर के लिए एक नया अध्याय है। पंडुम कैफे की यह पहल राज्य की शांति, विकास और मानव-केंद्रित पुनर्वास के प्रति प्रतिबद्धता को दृढ़ता से रेखांकित करती है। IG बोले- अलग-अलग स्किल्स की ट्रेनिंग दी गई बस्तर के IG सुंदरराज पी ने कहा कि, जो कभी संघर्ष, हिंसा या माओवादी गतिविधियों से प्रभावित हुए थे उनको हॉस्पिटैलिटी, कैफे संचालन, स्वच्छता मानक, खाद्य सुरक्षा, ग्राहक सेवा और उद्यमिता में प्रशिक्षित किया गया है। यह उन्हें दीर्घकालिक करियर और आत्मनिर्भरता के लिए तैयार करता है। उन्होंने कहा कि, पंडुम नाम बस्तर की सांस्कृतिक जड़ों से प्रेरित है। ये टैग लाइन 'Where every cup tells a story' क्षेत्र की दृढ़ता, उपचार और आशा की भावना को दर्शाती है। ये शांति निर्माण का स्केलेबल मॉडल है।

धान खरीदी सीजन शुरू: मुख्यमंत्री साय बोले—किसानों का विश्वास हमारी सबसे बड़ी ताकत

रायपुर प्रदेश में तयशुदा कार्यक्रम के हिसाब से आज से धान खरीदी शुरू हुई. इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया के जरिए धान खरीदी केंद्रों में की गई व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्धि का यह सफर आज फिर एक नई उम्मीद और किसानों के अटूट विश्वास की रोशनी के साथ आगे बढ़ रहा है.     आज भोर की सुनहरी किरणों के साथ छत्तीसगढ़ की धरती पर फिर शुरुआत हुई है छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की । यह धान खरीदी किसान भाइयों की मेहनत और सरकार पर उनके विश्वास का उत्सव है। छत्तीसगढ़ सरकार 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक धान की खरीदी करेगी. किसान सोमवार से शुक्रवार तक केंद्र में धान बेच सकेंगे. धान खरीदी के लिए किसानों को पिछली बार की तरह इस बार भी प्रति क्विंटल 3100 रुपये के दाम मिलेंगे. धान खरीदी के लिए प्रदेश भर में 2739 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं. सरकार ने इस बार समर्थन मूल्य पर 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है. धान अवैध बिक्री पर रोक प्रदेश में धान के अवैध परिवहन को रोकने के लिए सरकार ने निर्देश दिए हैं. अन्य राज्यों की सीमा में चेक पोस्ट बनाकर कड़ी निगरानी की जा रही है. धान की सुरक्षा के लिए खरीदी केन्द्रों में ड्रेनेज और तारपोलिन आदि की व्यवस्था की गई है. सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं. सरकार के निर्देश के अनुसार अगर कोई अवैध परिवहन या बिक्री करते पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. किसानों को लेना पड़ेगा टोकन रजिस्टर्ड किसानों को धान बेचने के लिए तुंहर एप से टोकन लेना पड़ता है. टोकन के लिए एप लॉन्च किया गया है. जिसकी मदद से हर किसान को निर्धारित तिथि पर संबंधित खरीदी केंद्र में धान बेचने के लिए टोकन ले सकते हैं. किसान घर बैठे टोकन ले सकते हैं. जो किसान ऑनलाइन टोकन नहीं ले पा रहे हैं उसने लिए मंडी में टोकन की व्यवस्था की गई है. मंडी में किसानों के लिए भी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं. कितने टोकन पर कितनी धान बिकेगी तुंहर टोकन मोबाइल ऐप के जरिए किसान हर दिन सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक ऑनलाइन टोकन ले सकते हैं. 2 एकड़ या उससे कम जमीन वाले किसानों को अधिकतम एक टोकन मिलेगा. 2 से 10 एकड़ जमीन वाले छोटे किसानों को दो टोकन और 10 एकड़ से ज़्यादा जमीन वाले बड़े किसानों को अधिकतम तीन टोकन दिए जाएंगे.

छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता: सुरक्षाबलों ने 6 नक्सलियों को किया ढेर, एक पर था 8 लाख का इनाम

रायपुर बीजापुर जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला रिज़र्व गार्ड (DRG) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त कार्रवाई में मुठभेड़ के दौरान छह नक्सली न्यूट्रलाइज किए गए। इसमें ₹8 लाख का इनामी कन्ना ऊर्फ बुचन्ना भी शामिल है, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में हिंसा, भय और नक्सल गतिविधियों को संचालित कर रहा था। सुरक्षाबलों को मिली बड़ी सफलता पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गहरी सराहना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुरक्षाबलों की इस सफलता की सराहना करते हुए एक्स पर लिखा – बीजापुर जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में छत्तीसगढ़ पुलिस, डीआरजी और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई के दौरान छह माओवादी न्यूट्रलाइज हुए हैं। इसमें आठ लाख रुपये का इनामी कन्ना ऊर्फ बुचन्ना भी शामिल है। जिसके न्यूट्रलाइज होने से इस क्षेत्र में फैले माओवादी आतंक के एक लंबे अध्याय का अंत हुआ है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुरक्षाबलों की इस सफलता की सराहना करते हुए एक्स पर लिखा – यह उपलब्धि पुलिस बलों के उत्कृष्ट समन्वय, साहस और सटीक रणनीति का परिणाम है। लाल आतंक के समूल नाश की दिशा में यह कार्रवाई एक निर्णायक पड़ाव है। उन्होंने कहा- छत्तीसगढ़ सरकार, यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में, 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन के संकल्प के साथ इस मिशन को पूरे समर्पण और प्रतिबद्धता से आगे बढ़ा रही है। राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियां एकजुट होकर इस लड़ाई को निर्णायक अंत तक ले जाएंगी।

छत्तीसगढ़िया स्वाद और संस्कृति की गूंज से भर गया एकता नगर, पर्यटन मंडल के स्टॉल का CM साय ने लिया जायजा

रायपुर   गुजरात के केवड़िया स्थित एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित भारत पर्व में छत्तीसगढ़ की झलक हर आगंतुक के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भारत पर्व का अवलोकन किया तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा लगाए गए स्टॉल का निरीक्षण किया। उन्होंने पर्यटन मंडल के अधिकारियों से राज्य के प्रमुख पर्यटक स्थलों और योजनाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, परंपराएं और लोककला पूरे भारत में अपनी अनोखी पहचान रखती हैं। छत्तीसगढ़ अब तेजी से भारत के उभरते हुए पर्यटन केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है।” छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजन खींच रहे हैं आगंतुकों का ध्यान, CM ने भी लिया व्यंजनों का स्वाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्टूडियो किचन में पर्यटन मंडल छत्तीसगढ़ द्वारा संचालित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, रायपुर की छात्राओं द्वारा तैयार पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया। अमारी का शरबत, करील के कबाब, चौसेला रोटी, बफौरी और फरा जैसे व्यंजनों ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध पाक-कला और संस्कृति की झलक पेश की। मुख्यमंत्री  साय ने आईएचएम रायपुर की छात्राओं की सराहना करते हुए कहा कि “ये छात्राएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर की संवाहक हैं, जो अपनी प्रतिभा से राज्य का गौरव बढ़ा रही हैं।” इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य एवं जीएम वेदव्रत सिरमौर भी उपस्थित थे। हस्तकला और लोकसंस्कृति पर गर्व मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंबिकापुर के बुनकरों द्वारा तैयार कोसा वस्त्रों की खरीदारी की और शिल्पियों से बातचीत की। उन्होंने भारत पर्व में प्रस्तुति देने आए छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक दल से भी मुलाकात कर उन्हें प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि “छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति, वेशभूषा और लोकनृत्य हमारी पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं। हमारा उद्देश्य है कि इन परंपराओं को राष्ट्रीय मंच पर और सशक्त रूप से प्रस्तुत किया जाए।” भारत पर्व में छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य, हस्तशिल्प, पारंपरिक खानपान और समृद्ध पर्यटन स्थलों की झलक देखने के लिए बड़ी संख्या में आगंतुक पहुंच रहे हैं और राज्य की सजीव संस्कृति से अभिभूत हो रहे हैं।

IPS डॉ. संतोष की पुस्तक का विमोचन: संयुक्त राष्ट्र के शांति प्रयासों पर आधारित रचना सीएम साय व डॉ. रमन सिंह को भेंट

रायपुर पुलिस मुख्यालय में डीआईजी सीसीटीएनएस/एससीआरबी के रूप में पदस्थ आईपीएस डॉ. संतोष सिंह के संयुक्त राष्ट्र के शांति सुदृढ़ीकरण से जुड़े शोध विषय पर लिखित किताब का प्रकाशन दिल्ली के प्रतिष्ठित मानक पब्लिकेशन ने किया। आईपीएस डॉ. संतोष ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और डीजीपी अरुण देव गौतम को किताब की प्रति भेंट की। शीत युद्ध के बाद इक्कीसवीं सदी में दुनिया में हिंसाग्रस्त राष्ट्रों में शांति को चिरस्थाई बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के शांति-रक्षा (पीस कीपिंग) और शांति-स्थापना (पीस मेकिंग) प्रयासों से आगे बढ़कर अपेक्षाकृत नए कार्य जैसे शांति-निर्माण या सुदृढ़ीकरण (पीस बिल्डिंग) कार्यों पर जोर देने की आवश्यकता हो गई है। इस सदी में संयुक्त राष्ट्र के यूएन पीसबिल्डिंग कमीशन के पर्यवेक्षण में किए जा रहे गृह युद्ध से जूझ रहे देशों और युद्धग्रस्त क्षेत्रों में पीस-बिल्डिंग मिशन काम कर दुनिया में शांति प्रयासों को बहुत मजबूत कर रहे हैं। यह किताब दुनियाभर में चल रहे इन शांति प्रयासों के सिद्धांत और वास्तव में धरातल पर हो रहे कार्यों की समालोचना करती है। संतोष सिंह की यह किताब विदेश नीति के नीति-निर्धाताओं, प्रैक्टीसनर्स व छात्रों के लिए विशेष उपयोगी सिद्ध होगा। देश के अंदर के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में भी स्थायी शांति स्थापित करने के लिए आवश्यक तत्वों की समझ बढ़ाने में मदद करेगा। उल्लेखनीय है कि भारत अंतर्राष्‍ट्रीय शांति व सुरक्षा बनाए रखने में संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ की सहायता करने में दृढ़ता के साथ प्रतिबद्ध है और विभिन्न देशों में कार्यरत शांति सेनाओं में दुनिया में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से तीसरे नंबर पर है। 1950 से अब तक हमारे देश ने 49 शांति मिशनों में भाग लिया है और लगभग 2 लाख शांति सैनिकों का योगदान किया है। वरिष्ठ भारतीय पुलिस और सैन्य अधिकारी शांति मिशनों में भाग लेते हैं। आईपीएस संतोष सिंह ने हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग से डॉक्टरेट की डिग्री और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) नई दिल्ली से अंतर्राष्ट्रीय संबंध विषय में एमफिल और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) वाराणसी से राजनीतिशास्त्र में एमए किया है। एम फिल के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों की भागीदारी पर उन्होंने शोध-प्रबंध लिखा था। उनके विभिन्न राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय शोध जर्नल में उनके अनेकों शोध-पत्र प्रकाशित हुए हैं।