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सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान, 100 प्रोफेसरों को ऑक्सफोर्ड समेत विदेशी विश्वविद्यालयों में मिलेगी ट्रेनिंग

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा ऐलान किया है। सीएम सम्राट चौधऱी ने कहा है कि राज्य के सहायक प्रोफेसर ऑक्सफोर्ड समेत विदेशों के अन्य मशहूर विश्विद्यालयों में ट्रेनिंग लेंगे। मुख्यमंत्री रविवार को बापू सभागार में 211 नये डिग्री कॉलेजों में नवनियुक्त शिक्षकों के उन्मुखीकरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि जबतक कॉलेज में आकर बच्चे पढ़ेंगे नहीं, तबतक इस संस्थान का महत्व नहीं होगा। कॉलेज में पढ़ने विद्यार्थी जरूर आयें, इसे सुनिश्चित करायें। 75 प्रतिशत न्यूनतम हाजिरी हो1ानी ही चाहिए। नहीं तो सरकार की बड़ी तैयारी सफल नहीं होगी। इसको लेकर हमारी टीम भी काम करेगी। उन्होंने कहा कि लाइव क्लासेज की भी व्यवस्था शुरू करें। यह भी कहा कि राज्य के डिग्री कॉलेजों में भी खुला विश्वविद्यालय की मान्यता सरकार देगी। इस मौके पर बिहार की शिक्षा व्यवस्था को वर्ल्ड क्लास बनाने को लेकर सीएम सम्राट चौधऱी ने बड़ा ऐलान किया। सीएम ने कहा कि 100 प्रोफेसरोों को ऑक्सफोर्ड समेत दुनिया के बड़े विश्वविद्यालयों में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। सबका खर्ज राज्य सराकर वहन करेगी। यह ट्रेनिंग एक महीने की होगी। सीएम सम्राट चौधऱी ने कहा कि बेहतर शिक्षा का सपना तब ही पूरा होगा जब हम अपनी तमाम चीजों को स्थापित करने का काम करेंगे। उसमें यह भी एक व्यवस्था है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की चीजों को हम कैसे इसमें जोड़ें। मैं जरूर कहूंगा कि 100 लोगों को चिन्हित करें जिनको ऑक्सफोर्ड में भेजकर वहां से भी कोर्स कराने का काम करें। तब तो हम दुनिया के मानक पर आ पाएंगे। सीएम ने आगे कहा कि दुनिया में जहां कहीं भी अच्छे संस्थान हैं वहां से जोड़ना हमारे बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन देगा। एक जमाना था जब हमने क्वालिटी के साथ क्वांटिटी को लेकर समझौता किया। बड़ी संख्या में लोग पढ़ने लगे। अब क्वालिटी औऱ क्वांटिटी दोनों ही साथ चलाना होगा। इसलिए दुनिया में जहां भी अच्छे यूनिवर्सिटी हैं। मैं शिक्षकों से आग्रह करूंगा कि अगर आप लोगों को लगता है कि दुनिया में कहीं कोई अच्छा संस्थान है तो उसका सुझाव विभाग को दें। वैसे 10 संस्थानों को हम चिन्हित करेंगे जिनसे सीधा संवाद कराने का काम बिहार सरकार अपने खर्च पर करेगी।

जाम के बीच मोबाइल चलाते मिले 3 ट्रैफिक पुलिसकर्मी, वेतन रोका; 2 महिला पुलिसकर्मियों पर भी एक्शन

 पटना  मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान ड्यूटी में लापरवाही व अनुशासनहीनता बरतना एक महिला पुलिसकर्मी और महिला गृहरक्षक को महंगा पड़ गया। यातायात पुलिस अधीक्षक ने ड्यूटी से बिना सूचना गायब मिली महिला सिपाही निशा कुमारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। वहीं, महिला गृहरक्षक रुचि कुमारी के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी जा रही है। मामला दो सितंबर का है। मुख्यमंत्री के चैंबर आफ काॅमर्स में कार्यक्रम के मद्देनजर यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए रूट लाइन की जांच की जा रही थी। बाटा मोड़ से गायब मिली थीं दोनों पुलिसकर्मी इसी दौरान बाटा मोड़ पर यातायात संचालन के लिए महिला पुलिसकर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई थी। जांच के क्रम निशा कुमारी और रूचि कुमारी अपने निर्धारित पोस्ट से अनुपस्थित पाई गई। बिना पूर्व सूचना या अनुमति के अपने ड्यूटी स्थल से वापस चली गई थी। मुख्यमंत्री के वीआईपी कार्यक्रम जैसे अति महत्वपूर्ण अवसर पर ड्यूटी से इस तरह गायब रहना गंभीर लापरवाही, अनुशासनहीनता और आदेशों के उल्लंघन माना गया। मामले में निशा कुमारी को तत्काल प्रभाव से जीवनयापन भत्ता पर निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय यातायात संचालन निर्धारित किया गया है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का भी निर्देश दिया गया है। जाम के बीच केबिन में मोबाइल चलाते मिले तीन यातायात पुलिसकर्मी, वेतन रोका शहर में यातायात पुलिसकर्मियों की तैनाती के बावजूद कई इलाकों में जाम की समस्या बनी रहती है। इसकी एक वजह ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों की लापरवाही भी सामने आ रही है। यातायात एसपी के औचक निरीक्षण में बाकरगंज पोस्ट पर इस तरह का मामला उजागर हुआ है। सड़क पर यातायात का दबाव बढ़ा था, बावजूद यातायात व्यवस्था संभालने की बजाय तीन यातायात पुलिसकर्मी केबिन के अंदर मोबाइल चलाते मिले। तीनों पुलिसकर्मियों का वेतन रोक इनसे सात दिनों में स्पष्टीकरण मांगा गया है। पांच सितंबर की शाम करीब 6:45 बजे बाकरगंज यातायात पोस्ट का औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान एएसआई रविन्द्र कुमार मंडल, महिला सिपाही गीता कुमारी और गृहरक्षक सूरज कुमार केबिन में बैठकर मोबाइल का इस्तेमाल करते पाए गए। निरीक्षण के समय सड़क पर जाम की स्थिति बनी हुई थी। जबकि शाम पांच से रात आठ बजे तक पिक आवर में कर्मियों को केबिन से बाहर रहकर यातायात संचालन कराने का निर्देश है। इसके बावजूद तीनों ने निर्देश की अनदेखी की। रविन्द्र कुमार मंडल और गीता कुमारी का वेतन तत्काल प्रभाव से धारित कर दिया गया है। गृहरक्षक सूरज कुमार के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के लिए अलग से प्रतिवेदन भेजा जा रहा है। इसी तरह कारगिल यातायात पोस्ट पर दो महिला पुलिसकर्मियों को मोबाइल चलाते हुए मिली। इनके खिलाफ भी कार्रवाई की गई।  

Major relief for villagers in Bihar: The decision to levy holding tax on pucca and semi-pucca houses will be reversed.

पटना बिहार के लोगों को सम्राट चौधरी सरकार बड़ी राहत देने जा रही है। बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में अब सिर्फ व्यावसायिक कर ही लगेगा। गांवों और कस्बों में कच्चा मकान को छोड़ पक्का और अर्धपक्का मकान से होल्डिंग टैक्स (मकान कर) वसूलने के फैसले को सरकार वापस लेने जा रही है। इससे ग्रामीण इलाकों के लगभग 8 करोड़ से अधिक लोगों को राहत मिलेगी। पंचायती राज विभाग ग्रामीणों से शुल्क वसूली के प्रावधानों में संशोधन कर रहा है। संशोधन के बाद यह नया प्रावधान लागू होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक तरह के टैक्स लेने के प्रस्ताव पर 15 जुलाई को राज्य कैबिनेट की मुहर लगी थी। लेकिन अभी तक गजट प्रकाशित नहीं किया गया है। पंचायती राज विभाग ने इसकी अधिसूचना भी जारी नहीं की है। आवासीय मकानों से शुल्क वसूली संबंधी संशोधन से गांवों के किसान, मजदूर और गरीबों को राहत मिलेगी। सरकार के फैसले से लोगों में चौतरफा नाराजगी थी। विपक्ष भी इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रहा था। इसलिए राज्य सरकार त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थानों से जुड़े ग्रामीण इलाकों में नया कर वसूली के प्रावधानों को संशोधन के बाद ही लागू करने की तैयारी कर रही है। पीएम आवास योजना के तहत बने गरीबों के घरों के लिए सालाना होल्डिंग टैक्स सबंधित विभाग (ग्रामीण विकास विभाग) से लेना था, पर इस प्रावधान को भी हटाने की तैयारी है। पंचायत क्षेत्रों में व्यावसायिक मकान निर्माण कार्य के लिए आवश्यकतानुसार पंचायतों को कर वसूलने का हक होगा। पंचायतों का राजस्व बढ़ेगा व्यावसायिक, औद्योगिक व संस्थागत उपयोग वाले भवन पर 100 रुपये से 5 हजार रुपये तक सालाना कर लगना है। पेशा शुल्क भी लगेगा। व्यावसायी द्वारा स्थापित चावल मिल जिसकी क्षमता 2 टन प्रति घंटा से अधिक है, उस पर कर का प्रावधान है। सिनेमा हॉल, विवाह भवन, होटल, पेट्रोल पंप और रसोई गैस एजेंसी पर सालाना 5 हजार रुपये शुल्क वसूलने का प्रावधान किया गया था। हालांकि संशोधन के बाद इस शुल्क में भी कमी की जा सकती है। मेले में बिक्री होने पर पशु के लिए भी शुल्क लगेगा। सरकार ने क्यों लिया था फैसला पंचायतों की आय बढ़ा कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों से कर वसूलने का निर्णय लिया गया था। 16 वीं केंद्रीय वित्त आयोग ने देश भर की पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कर लगाने की अनुशंसा की है। वित्त आयोग की अनुशंसा है कि ग्रामीण इलाकों में प्रत्येक घरों से सालाना औसतन 1200 रुपये वसूल कर पंचायत अपनी आय बढ़ाने का प्रयास करे। पहले यह कर की दर तय थी आवास के प्रकार कर की दर(प्रतिवर्ष) पक्का मकान 100 रुपए अर्द्ध पक्का मकान 50 रुपये कच्चा मकान कर नहीं पीएम आवास के मकान 25 रुपये (ग्रमाीण विभाग देगा) सफाई शुल्क 30 रुपये (प्रति घर मासिक) पेट्रोल पंप 5 हजार रुपये रसोई गैस एजेंसी 5 हजार रुपये ईंट चिमनी 5 हजार रुपये सिनेमा हॉल 5 हजार रुपये जलापूर्ति शुल्क 30 रुपये (प्रतिमाह)

फसल नुकसान झेल रहे किसानों को सरकार का तोहफा, 13 जिलों में कृषि इनपुट अनुदान जारी

पटना खेतों में लगी फसल की क्षति के बाद मुआवजे के इंतजार कर रहे बिहार के किसानों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री मंत्री सम्राट चौधरी ने इन किसानों को फसल क्षति की राशि सीधे उनके खाते में भेज दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को 13 जिलों के 3.96 लाख किसानों के खाते में 200 करोड़ की अनुदान राशि हस्तांतरित की है। यह राशि फसल क्षति के लिए कृषि इनपुट अनुदान के रूप में दी गई है। लोक सेवक आवास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि है आगे भी जिन किसानों के आवेदन आए हैं, उन्हें कृष इनपुट अनुदान की राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है की डबल इंजन की सरकार बिहार के किसानों के लाभ के लिए काम कर रही है। आपको बता दें कि हाल ही में बिहार समेत देश भर के करोड़ों किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त आई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 जून को करीब साढ़े नौ लाख किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपये ट्रांसफर किए थे। अब आज बिहार के किसानों को फसल क्षति अनुदान सीएम सम्राट चौधरी ने ट्रांसफर किया है। दरअसल 2025-26 के दौरान जिन किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा था। उन्हीं किसानों को सरकार द्वारा यह जरूरी मदद दी जा रही है। मार्च के तीसरे और चौथे हफ्ते में अचानक आंधी-तूफान और बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्टि से रबी की फसल को बिहार में काफी नुकसान पहुंचा था। जिन किसानों के फसल का नुकसान हुआ है सीएम ने उनके खाते में मुआवजे की राशि भेजी है। आपको बता दें कि कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत सरकार आंधी, बारिश या सूखाड़ समेत अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसानों के फसल का नुकसान होने पर उन्हें मुआवजा देती है। यह योजना करीब 2 हेक्टेयर भूमि में हुए फसल के नुकसान तक के लिए मान्य है। कृषि इनपुट अनुदान योजना में कितनी राशि मिलती है आपको यहां बता दें कि इस योजना के तहत सरकार ने न्यूनतम सहायता राशि भी तय कर दी है। इसके तहत असिंचित क्षेत्र के लिए कम से कम 1,000 रुपये, सिंचित क्षेत्र के लिए 2,000 रुपये और बहुवर्षीय फसलों के लिए न्यूनतम 2,500 रुपये का अनुदान दिया जाता है। इसकी एक खास बात यह भी है कि इस योजना का लाभ सिर्फ भू-स्वामी किसान ही नहीं बल्कि रैयत और गैर रैयत (बटाईदार या पट्टे पर खेती करने वाले) किसान भी ले सकते हैं।

भोजपुर मुठभेड़ मामले में रिटायर्ड जज करेंगे जांच, कई पुलिसकर्मी निलंबित

 भोजपुर बिहार के भोजपुर में भरत तिवारी पुलिस एनकाउंटर की न्यायिक जांच का आदेश दिया गया है। सीएम सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया के जरिए यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि घटना के सभी पहलुओं को निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ सामने लाना जरुरी है। इस मामले में इंस्पेक्टर, दारोगा समेत कई पुलिस कर्मियों पर गाज गिरी है। बिहार सरकार के मंत्री मिथिलेश तिवारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने भरत के एनकाउंटर पर सवाल उठाया है। भरत तिवारी की मौत को पुलिस द्वारा की हत्या का आरोप लगाकर इलाके के लोगों ने गुरुवार को जबरदस्त बवाल काटा। सड़क जाम हटाने और आक्रोशित लोगों को शांत कराने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा। बीजेपी के मीडिया पैनलिस्ट नीरज कुमार ने बयान जारी कर सीएम के फैसले की सराहना की है। सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करके बताया है कि भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में दिनांक 17.06.2026 को हुई पुलिस मुठभेड़ की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हेतु उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है। न्यायिक जांच का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ जांच सुनिश्चित करना है। उन्होंने पहले भी कहा था कि बिहार की जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है। सरकार के फैसले पर बीजेपी के मीडिया पैनलिस्ट नीरज कुमार ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि सम्राट चौधरी जी की पारदर्शी एवं न्यायोचित कार्यशैली का स्वागत करते हैं। हाई कोर्ट के सेवानिवृत जज के नेतृत्व नेतृत्व में आरा, भरत तिवारी एनकाउंटर की जांच करवाना यह दर्शाता है कि एनडीए की सरकार कानून व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के प्रति प्रतिबद्ध है। हम अपराधियों को बख्शते नहीं और निर्दोष अधिकारों की रक्षा भी करते हैं। न्यायिक जांच से सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा। अगर पुलिस वाले दोषी हैं तो उन पर भी वैसे ही कार्रवाई होगी जैसे किसी अपराधी पर होती है। बुधवार को भरत तिवारी को पुलिस ने एनकाउंटर में गोली मार दी थी जिससे उसकी मौत हो गई। आरोप लगाया गया कि पुलिस ने सरेंडर के बाद उसे गोली घुटने ऊपर चार गोलियां मारी। दावा किया गया कि पुलिस के कहने पर भरत तिवारी ने अपना हथियार फेंक दिया था। उसके बाद फेक एनकाउंटर किया गया। अगले दिन गुरुवार को इसके विरोध में भयंकर बवाल हुआ। सोशल मीडिया भरत तिवारी एनकाउंटर की खबरों से पटा हुआ है। इस मामले में थानेदार समेत दारोगा कई पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया। उसके बाद इस एनकाउंटर पर सवाल उठने लगे।

शिक्षकों को पोस्टिंग में बड़ी राहत, सम्राट चौधरी बोले- अब पढ़ाई पर कोई समझौता नहीं

 पटना बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग और स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर चल रही तमाम चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का एक बेहद सख्त बयान सामने आया है। कैमूर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने साफ लहजे में शिक्षकों को चेतावनी दी है कि सरकार उनकी सुविधाओं का पूरा ख्याल रख रही है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों की पढ़ाई से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। शिक्षकों के ट्रांसफर नीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि "ट्रांसफर जहां कराना है, करा लीजिए, लेकिन पढ़ाना तो पड़ेगा। कोई बहाना नहीं चलेगा।" मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख से साफ है कि सरकार अब राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पूरी तरह से एक्शन मोड में है और लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों पर गाज गिरना तय है। शिक्षकों को पोस्टिंग की बड़ी राहत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंच से घोषणा करते हुए कहा कि सरकार ने शिक्षकों की सहूलियत के लिए ट्रांसफर के नियमों को काफी आसान बनाया है। उन्होंने कहा, "शिक्षकों के लिए हम लोगों ने तय किया है कि आप अपने गांव के बिल्कुल बगल में चले जाइए, इसमें सरकार को कोई दिक्कत नहीं है।" उन्होंने महिला शिक्षिकाओं के लिए कहा कि जो हमारी बहनें शिक्षिका हैं, उन्हें उनके घर या गांव के ठीक बगल वाले पंचायत में ही पढ़ाने के लिए पोस्टिंग दी जाएगी। वहीं, जो हमारे भाई शिक्षक हैं, उन्हें भी ज्यादा दूर न भेजकर उनके बगल वाले प्रखंड में ही काम करने का अवसर दिया जाएगा। सम्राट चौधरी बोले- 'पढ़ाने के लिए अब कोई एक्सक्यूज नहीं मिलेगा' शिक्षकों को बड़ी राहत देने के साथ ही मुख्यमंत्री ने अपनी दूसरी शर्त भी बेहद कड़े शब्दों में सामने रख दी। उन्होंने मंच से हुंकार भरते हुए कहा, "बगल के पंचायत और प्रखंड में पोस्टिंग तो मैं दे दूंगा, लेकिन पढ़ाना तो आपको हर हाल में पड़ेगा। अब पढ़ाने के लिए किसी भी तरह का कोई एक्सक्यूज नहीं मिलेगा।" उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे पूरी निष्ठा से स्कूल जाएं, बच्चों को पढ़ाएं और बिहार के भविष्य को आगे बढ़ाने का काम करें। मुख्यमंत्री ने राज्य में हुए ढांचागत बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि आज बिहार की पूरी स्कूल व्यवस्था बदल चुकी है और लगभग 75 हजार सरकारी स्कूलों को खोला व सुधारा जा चुका है। अब सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और किसान के बच्चों को देश की सबसे बेहतरीन शिक्षा मिल सके।

शराबबंदी पर सरकार सख्त: 100 से ज्यादा शराब माफियाओं की अवैध संपत्ति होगी जब्त

पटना बिहार में शराबबंदी और शराब माफिया दोनों ही अहम मुद्दा है। सरकार यह दावा करती रही है कि राज्य में कई सालों से लागू शराबबंदी को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए वो कटिबद्ध है। दूसरी तरफ शराब माफिया राज्य में शराबबंदी का माखौल बनाने में जुटे रहते हैं। पुलिस-प्रशासन समय-समय पर इन माफियााओं पर नकेल कसती है और माफियाओं को उनके अंजाम तक पहुंचाती है। अब सम्राट चौधरी सरकार ने शराब माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई का प्लान तैयार कर लिया है। जिसके तहत 100 से ज्यादा माफियाओं की संपत्ति जब्त कर ली जााएगी। बिहार में शराब से अवैध संपत्तियां बनाने वाले 127 माफिया को चिह्नित कर लिया गया है। मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो ने इन शराब माफिया की संपत्तियां जब्त करने को लेकर बीएनएसएस की धारा 107 के तहत न्यायालय को प्रस्ताव भेजा है। प्रत्येक माह औसतन 3,50,677 लीटर शराब बरामद की मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के डीआईजी अजय कुमार पांडेय ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर बताया कि बिहार की विभिन्न जिलों की पुलिस ने 2026 में प्रत्येक माह औसतन 3,50,677 लीटर शराब बरामद की है, जो वर्ष 2025 के मासिक औसत (3,14,610 लीटर) से 11 फीसदी अधिक है। इसी तरह, मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो ने वर्ष 2026 में औसत प्रतिमाह 1,06,237 लीटर शराब बरामद की, जो वर्ष 2025 के मासिक औसत (85,645 लीटर) से 24 फीसदी अधिक है। 2026 में माह मई तक राज्य पुलिस द्वारा कुल 38,474 लीटर स्पिरिट जब्त की गयी है। मई महीने तक कुल छह ऑपरेशन चलाए गए मद्य निषेध डीआईजी ने यह भी बताया है कि शराब माफिया के खिलाफ 2026 में मई तक कुल छह ऑपरेशन चलाए गए। इनमें पांच ऑपरेशन यूपी में जबकि एक झारखंड में चला। इन ऑपरेशन में पांच करोड़ रुपये से अधिक की शराब और वाहन जब्त हुए। 57 हजार व्यक्तियों की मद्य निशेष अधिनियम के तहत गिरफ्तारी हुई डीआईजी ने इसके साथ ही यह भी जानकारी दी है कि इस साल अब तक 50 हजार से ज्यादा लोगों को अरेस्ट किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि बिहार पुलिस ने इस साल मई तक 19,877 कारोबारी समेत कुल 57 हजार व्यक्तियों की मद्य निशेष अधिनियम के तहत गिरफ्तारी हुई है। इनमें 37,027 पीने वाले रहे। इस दौरान राज्य के अंदर से 569 कारोबारी जबकि अन्य राज्यों से पांच बड़े कारोबारी गिरफ्तार किए गए। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2016 से मई 2026 तक कुल बरामद शराब का 97 फीसदी हिस्सा नष्ट किया जा चुका है।

राजगीर क्रिकेट स्टेडियम की डेडलाइन तय, खेल ढांचे को मिलेगा बड़ा विस्तार

पटना बिहार में खेलों के विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खेल विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य में अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए ओलंपिक स्तर की सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि बिहार के खिलाड़ी राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें। लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में आयोजित बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने खेल अवसंरचना, खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों को खेल परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का निर्देश दिया गया। राजगीर क्रिकेट स्टेडियम के लिए तय हुई डेडलाइन मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राजगीर में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण 31 दिसंबर 2026 तक हर हाल में पूरा किया जाए। इसके साथ ही पटना के डुमरी खेल परिसर में विभिन्न खेलों के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम विकसित करने की योजना को भी तेजी से आगे बढ़ाने को कहा। गांवों तक पहुंचेगी खेल सुविधाएं बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य की 8053 ग्राम पंचायतों में से 4700 पंचायतों में 5266 खेल मैदानों का निर्माण पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने शेष खेल मैदानों के निर्माण कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए पंचायत स्तर पर खेल सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। मुख्यमंत्री ने VB-G RAM G (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन, ग्रामीण) के माध्यम से पंचायतों में खेल मैदानों के निर्माण पर भी जोर दिया। खिलाड़ियों को मिलेगा हर संभव सहयोग मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत प्रोत्साहित कर रही है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करने के साथ-साथ उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, खेल उपकरण, कोचिंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी माहौल देने के लिए खेल प्रशिक्षण केंद्रों को और मजबूत किया जाए तथा ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। मोइनुल हक स्टेडियम के पुनर्विकास पर जोर बैठक में मुख्यमंत्री ने पटना स्थित मोइनुल हक स्टेडियम के पुनर्विकास कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर परियोजना को गति दी जाए। इसके अलावा स्टेडियम तक बेहतर सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया, ताकि बड़े खेल आयोजनों के दौरान यातायात और भीड़ प्रबंधन में किसी तरह की समस्या न हो। पंचायतों में खेल संस्कृति विकसित करने की तैयारी मुख्यमंत्री ने पंचायत स्तर पर नियमित खेल उत्सव और प्रतियोगिताएं आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत खेल क्लबों के माध्यम से पूर्व खिलाड़ियों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों को जोड़कर खेल संस्कृति को मजबूत किया जाए। साथ ही जिला और प्रखंड स्तर पर खेल भवन-सह-व्यायामशालाओं तथा आउटडोर स्टेडियमों के निर्माण कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, खेल विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

पहली मुलाकात में दिखी गर्मजोशी: सम्राट और नीतीश साथ आए नजर

पटना. बिहार की राजनीति में हलचल के बीच पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को देशरत्न मार्ग स्थित सरकारी आवास पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। यह मुलाकात करीब 20 मिनट तक चली, जिसमें देश और राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और सरकार के कामकाज पर चर्चा हुई। दोनों ड‍िप्‍टी सीएम से भी मुलाकात  15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद यह पहली बार है जब सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार आमने-सामने मिले। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव से भी बातचीत हुई। मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस मुलाकात की तस्वीरें सम्राट चौधरी ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर साझा कीं। तस्वीरों में नीतीश कुमार सहज और प्रसन्न नजर आए। यहां तक कि उन्होंने सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर आत्मीयता भी दिखाई। सम्राट चौधरी ने पोस्ट में लिखा कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री से मार्गदर्शन प्राप्त किया। शराबबंदी पर सरकार का सख्त रुख बरकरार मुलाकात के बीच राज्य की शराबबंदी नीति भी चर्चा के केंद्र में रही। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि बिहार में शराबबंदी कानून सख्ती से जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सोच का हिस्सा है और प्रधानमंत्री Narendra Modi भी इस पहल की सराहना कर चुके हैं। अनंत सिंह समेत कई नेताओं ने उठाए सवाल इधर, मोकामा से जदयू विधायक Anant Singh लगातार शराबबंदी खत्म करने की मांग उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि प्रतिबंध के बावजूद लोग शराब का सेवन कर रहे हैं। और इसके स्थान पर अन्य खतरनाक नशे की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे समाज पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। कई अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं, जिससे राज्य में शराबबंदी को लेकर बहस तेज हो गई है। संदेश साफ: फिलहाल नहीं बदलेगी नीति इन तमाम चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री का बयान यह संकेत देता है कि बिहार में फिलहाल शराबबंदी कानून में किसी तरह की ढील या बदलाव की संभावना नहीं है। सरकार इस नीति को जारी रखने के पक्ष में मजबूती से खड़ी नजर आ रही है।