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उन्नाव और कानपुर में विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे मुख्यमंत्री योगी

 कानपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को उन्नाव और कानपुर के दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री पहले उन्नाव में जनसभा को संबोधित करेंगे, इसके बाद कानपुर पहुंचकर विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री कानपुर में सबसे पहले चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में आयोजित प्राकृतिक खेती सम्मेलन में प्रतिभाग करेंगे। सम्मेलन में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और रसायन मुक्त कृषि को लेकर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री किसानों से संवाद भी कर सकते हैं। कृषि विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पीडब्ल्यूडी में करेंगे समीक्षा बैठक इसके बाद मुख्यमंत्री लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की समीक्षा बैठक करेंगे। बैठक में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही सड़क, पुल और अन्य आधारभूत ढांचे से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली जाएगी। मुख्यमंत्री अधिकारियों को विकास कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दे सकते हैं। गोविंद नगर और कल्याणपुर क्षेत्र की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास मुख्यमंत्री गोविंद नगर और कल्याणपुर क्षेत्र की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे। इन परियोजनाओं से यातायात व्यवस्था, जल निकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय अधिकारियों की मौजूदगी रहेगी। डीएम ने की तैयारियों की समीक्षा मुख्यमंत्री का कार्यक्रम अचानक तय होने से प्रशासनिक अमले में हलचल बढ़ गई है। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने देर शाम विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, कार्यक्रम स्थलों की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मुख्यमंत्री के दौरे से जुड़े सभी इंतजाम समय से पूरे कर लिए जाएं।  

एफएलएन और एनसीईआरटी आधारित शिक्षण होगा मजबूत, यूपी के 232 शैक्षणिक संदर्भदाता लेंगे विशेष ट्रेनिंग

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार निपुण भारत मिशन को विद्यालय स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) तथा एनसीईआरटी आधारित पाठ्यपुस्तकों पर आधारित शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश के 58 जनपदों से 232 शैक्षणिक संदर्भदाताओं को राज्य स्तरीय आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीन चरणों में 22 जून से 10 जुलाई तक राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान (एसआईएचएफडब्ल्यू), लखनऊ में आयोजित होने वाले इस प्रशिक्षण के माध्यम से एआरपी और डायट मेंटरों की ऐसी प्रशिक्षित टीम तैयार की जाएगी, जो आगे चलकर ब्लॉक स्तर पर हजारों शिक्षकों को प्रशिक्षित कर निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को कक्षा-कक्ष तक प्रभावी ढंग से पहुंचाएगी। योगी सरकार की यह पहल बुनियादी शिक्षा में गुणवत्ता, सीखने के परिणामों और निपुण लक्ष्यों की प्राप्ति को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। योगी सरकार का फोकस केवल विद्यालयों में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि कक्षा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करने पर भी है। इसी उद्देश्य से शैक्षणिक सत्र 2026-27 में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत एफएलएन और एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों पर आधारित प्राथमिक विद्यालयों के सभी शिक्षकों एवं शिक्षामित्रों के लिए प्रस्तावित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रभावी बनाने हेतु जिला स्तरीय संदर्भदाताओं का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। तीन चरणों में होगा प्रशिक्षण, 232 प्रतिभागी होंगे शामिल राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन एसआईएचएफडब्ल्यू, सेक्टर-18, इंदिरा नगर, लखनऊ में तीन चरणों में किया जाएगा। प्रथम चरण 22 जून से 26 जून, द्वितीय चरण 29 जून से 3 जुलाई तथा तृतीय चरण 6 जुलाई से 10 जुलाई 2026 तक आयोजित होगा। इन तीनों चरणों में कुल 58 जनपदों से 232 प्रतिभागी प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। प्रत्येक जनपद से चार संदर्भदाता नामित किए जाएंगे, जिनमें दो एआरपी और दो डायट मेंटर शामिल होंगे। हिंदी, गणित और अंग्रेजी शिक्षण पर विशेष फोकस प्रशिक्षण के लिए चयनित चार संदर्भदाताओं में कम से कम एक-एक प्रतिभागी हिंदी, गणित और अंग्रेजी विषय से संबंधित होना अनिवार्य किया गया है। जिन जनपदों में एआरपी की संख्या दो से कम होगी, वहां अतिरिक्त डायट मेंटरों को नामित किया जाएगा। विषय की गहरी समझ और प्रशिक्षण संचालन की क्षमता रखने वाले एआरपी एवं डायट मेंटरों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। प्रशिक्षित संदर्भदाता बनेंगे परिवर्तन के वाहक राज्य स्तर पर प्रशिक्षित किए जाने वाले ये संदर्भदाता आगे ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मास्टर ट्रेनर की भूमिका निभाएंगे। इनके माध्यम से प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षा मित्रों तक एफएलएन आधारित शिक्षण पद्धति, एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों की अवधारणाएं और निपुण लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाएगा। इससे प्रदेशभर में शिक्षण की गुणवत्ता और एकरूपता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। सीखने के परिणामों में सुधार को मिलेगी नई गति निपुण भारत मिशन का मूल उद्देश्य बच्चों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करना है। योगी सरकार द्वारा लगातार शिक्षक प्रशिक्षण, अकादमिक अनुश्रवण, निपुण मूल्यांकन और गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। संदर्भदाताओं का यह विशेष प्रशिक्षण उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके माध्यम से बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार, कक्षा-कक्ष शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाना और निपुण लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करना लक्ष्य है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों के साथ-साथ शैक्षणिक गुणवत्ता संवर्धन पर लगातार कार्य किया जा रहा है। निपुण भारत मिशन के अंतर्गत आयोजित यह राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों की क्षमता वृद्धि, अकादमिक नेतृत्व को मजबूत बनाने और विद्यार्थियों को बेहतर अधिगम अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रशिक्षित संदर्भदाताओं के माध्यम से प्रदेशभर में निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा, जिससे बुनियादी शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी।

डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ में योगी सरकार के नौ साल पर एक्सपर्ट्स ने की चर्चा

लखनऊ.  लखनऊ स्थित एक होटल में तीन दिवसीय डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग 'त्रिवेणी' में दूसरे दिन रविवार को उत्तर प्रदेश के सुशासन, संस्कृति और समृद्धि पर गहन चर्चा हुई। इस दौरान विभिन्न अतिथियों ने योगी सरकार की तरीफ करते हुए उनके विकास मॉडल की बात की। उन्होंने बताया कि किस तरह यूपी बीमारू राज्य से प्रगति की तरफ अग्रसर हुआ। इस आयोजन में कई राज्यों के 100 से अधिक डिजिटल क्रिएटर्स, नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। रविवार को आयोजन के दूसरे दिन परिचर्चा सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने सरकार की नौ वर्षों की उपलब्धियों को गिनाया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले करीब तीन दशकों में यूपी सरकार और केंद्र सरकार के बीच समन्वय नहीं था, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ जनता को नहीं मिल पाता था। 2014 में केंद्र में मोदी सरकार और 2017 में यूपी में योगी सरकार बनने के बाद हालात सुधरे। इस डबल इंजन सरकार के जरिए पीएम आवास योजना, शिक्षा से जुड़ी योजना, स्वच्छ भारत मिशन समेत हर योजना लागू हुई और इनका जनता तक फायदा भी पहुंचा। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने सबसे पहले कानून—व्यवस्था को सुधारा और अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई। यूपी पुलिस में काफी संख्या में भर्तियां हुईं। महिलाओं के लिए पुलिस भर्ती में आरक्षण लागू किया गया। पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर बजट में व्यवस्था की गई, ताकि तकनीकी में भी सुधार हो। योगी सरकार में माफियाओं पर कार्रवाई अवनीश अवस्थी ने कहा कि योगी सरकार में ही प्रदेश के सभी माफियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई। साथ ही उनके सभी मुकदमों में सजा भी कोर्ट से तय हुई। कुछ माफियाओं ने सरकारी जमीनों पर कब्जा किया था, जिनको खाली कराकर गरीबों के लिए आवास बनाए गए। वहीं गैंगस्टर एक्ट को भी सख्ती से प्रदेश में लागू किया गया। उन्होंने बताया कि हर रोज सीएम योगी खुद कानून-व्यवस्था की मॉनिटरिंग के लिए अधिकारियों के साथ बैठक करते हैं। योगी सरकार का हर प्रोजेक्ट समय पर पूरा अवनीश अवस्थी ने बताया कि प्रदेश में कई आसान पॉलिसी के जरिए निवेश आ रहा है। यूपी में ब्रह्मोस मिसाइल के निर्माण से लेकर डिफेंस कॉरिडोर सरकार की बड़ी उपलब्धि का प्रमाण है। आज देशभर के एक्सप्रेसवे का 60 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे समेत हर प्रोजेक्ट समय पर पूरा किया गया। उन्होंने बताया कि जेवर एयरपोर्ट का निर्माण 1997 में ही होना था, लेकिन उसके लिए जमीन नहीं दी गई। वहीं योगी सरकार ने इसे मिशन मोड में पूरा किया और सोमवार (15 जून) से यहां उड़ान शुरू होने जा रही है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों का भी खूब विकास किया है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है। साथ ही यूपी बीमारू राज्य से रेवेन्यू सरप्लस वाला राज्य बन गया है। योगी सरकार एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी जल्द ही पूरा करेगी। उद्योग क्षेत्र में आया बदलाव दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डिक्की) के संस्थापक-अध्यक्ष मिलिंद कांबले ने चर्चा के दौरान कहा कि मैंने यूपी को देश का ग्रोथ इंजन बनते हुए देखा है। पहले इसकी छवि केवल कृषि तक सीमित थी और बीमारू राज्य माना जाता था। यहां उद्योग नहीं थे और स्थानीय लोग नौकरी के लिए दूसरे राज्यों की तरफ देखते थे। बतौर निवेशक मैंने देखा कि 2017 के बाद यूपी के उद्योग क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया। कानून-व्यवस्था, सड़क, रेल मार्ग में सुधार, उद्योग लगाने में आसान व्यवस्थाओं से राहत मिली है। यूपी से शुरू हुई एक जिला एक उत्पाद स्कीम को केंद्र सरकार ने भी अपनाया। इसके जरिए लोग अपने ही उद्योग के मालिक बन रहे हैं। आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (डीईएस प्लानिंग) की निदेशक अलका बहुगुणा ढौंडियाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश की चर्चा अब ग्लोबल स्तर पर होने लगी है। एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल के लिए हर विभाग की मॉनिटरिंग हो रही है। विकास से जुड़ी योजनाओं पर काम जारी है। वहीं यूपी में प्रति व्यक्ति आय 1.09 लाख रुपये तक पहुंच गई है। योगी सरकार में सुधार जमीनी स्तर पर दिखाई पड़ रहा है। यूपी से पलायन पर लगी लगाम विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) साकेत मिश्रा ने कहा कि योगी सरकार आने के बाद यूपी से पलायन काफी कम हो हुआ है। सरकार ने शिक्षा, रोजगार समेत अन्य मामलों पर बेहतर काम किया। बदलाव छोटी-छोटी चीजों से आता है, जिस पर योगी सरकार ने पूरा ध्यान दिया। उदाहरण के तौर पर आज किसानों को आसानी से खाद मिल रही है। गरीबों का विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गुंडा राज खत्म हुआ, जिससे विकास कार्यों और निवेश की राह आसान हुई है। इस आयोजन के दौरान अन्य अतिथियों ने भी योगी सरकार के कार्यों और विकास मॉडल पर अपनी प्रतिक्रिया दी। साथ ही कार्यक्रम में मौजूद कंटेंट क्रिएटर्स के सवालों का जवाब भी दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर व आजमगढ़ मंडल में लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा की

​गोरखपुर.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को एनेक्सी भवन में गोरखपुर व आजमगढ़ मंडल में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने शासन तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से दोनों मंडलों में संचालित पुरानी व गतिमान परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि युद्धस्तर पर अभियान चलाकर सड़क निर्माण के कार्यों में तेजी लाई जाए और हर काम गुणवत्ता के साथ समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने मानसून (बरसात) से पहले की परियोजनाओं पर विशेष ध्यान देने और उन्हें समय से पूरा कराने का निर्देश दिया। बैठक में लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव ने पिछले वर्ष के कार्यों का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत किया। ​जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों पर प्राथमिकता के आधार पर शुरू कराएं कार्य मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जनप्रतिनिधियों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर प्राथमिकता तय कर सड़कों का काम तत्काल शुरू कराया जाए, जिससे आम नागरिकों को इसका सीधा लाभ मिल सके। जून के अंत तक सभी आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त कर ली जाएं और इसके तुरंत बाद शिलान्यास कराया जाए। सभी जरूरी संसाधनों की व्यवस्था करने के बाद ही कार्य प्रारंभ किया जाए, ताकि काम बीच में न रुके और समय से पूरा हो। ​आयुक्त व जिलाधिकारी भी समय-समय पर करें समीक्षा मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना के मद्देनजर पीडब्ल्यूडी के अधिकारी गोरखपुर व आजमगढ़ मंडल के सभी विधानसभा क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर सड़कों का निर्माण कराएं। इसकी कार्ययोजना तत्काल उपलब्ध कराई जाए, ताकि समय से धनराशि स्वीकृत हो सके। साथ ही टेंडर प्रक्रिया भी समय से पूरी की जाए। कार्यों में गति लाने के लिए संबंधित कमिश्नर व जिलाधिकारी अपने-अपने स्तर पर नियमित बैठकें कर समीक्षा करें, जिससे निर्माण कार्यों की प्रगति हर हाल में सुनिश्चित हो सके। ​श्रमिकों की सुरक्षा के हों पुख्ता इंतजाम मुख्यमंत्री ने कार्यों की प्रभावी निगरानी पर जोर देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मौके का मुआयना करें और तकनीक के माध्यम से ऑनलाइन मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने सेतु निगम के कार्यों में सुरक्षा मानकों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और उनके लिए सुरक्षा किट का पूरा इंतजाम रहे। सभी विभाग आपस में बेहतर समन्वय के साथ काम करें। ​मुख्यमंत्री ने मोहन सेतु की प्रगति की भी ली जानकारी मुख्यमंत्री ने देवरिया में निर्माणाधीन 'मोहन सेतु' के कार्यों की प्रगति की भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को कार्यस्थल का निरीक्षण करने और सेतु निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जो भी ठेकेदार 'बिलो टेंडर' ले रहे हैं, उन पर पैनी नजर रखी जाए और ऐसे लोगों को चिह्नित किया जाए। ​बैठक में केंद्रीय मंत्री व बांसगांव के सांसद कमलेश पासवान, गोरखपुर के सांसद रवि किशन, कुशीनगर के सांसद विजय दुबे, प्रदेश सरकार के मंत्री सूर्य प्रताप शाही, दयाशंकर सिंह, विजयलक्ष्मी गौतम, राज्यसभा सांसद आरपीएन सिंह, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, रतनपाल सिंह, विधायक श्रीराम चौहान, विपिन सिंह, फतेह बहादुर सिंह, महेंद्र पाल सिंह, प्रदीप शुक्ल, राजेश त्रिपाठी, विमलेश पासवान, सरवन निषाद, शलभ मणि त्रिपाठी, ऋषि त्रिपाठी, ज्ञानेंद्र सिंह, जयप्रकाश निषाद, पीएन पाठक, विवेकानंद पांडेय समेत गोरखपुर व आजमगढ़ मंडल के विधानसभा क्षेत्रों के विधायक मौजूद रहे।

सीएम योगी ने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति व्यक्त की संवेदना

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कई जिलों में बारिश और आकाशीय बिजली गिरने से हुई जनहानि के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनहानि, पशुहानि का आकलन कर पीड़ित परिवारों को 24 घंटे में मुआवजा उपलब्ध कराएं। किसी भी आवश्यकता पर शासन को तत्काल अवगत कराएं।  शनिवार को कासगंज, चंदौली, मीरजापुर, बाराबंकी जिले में वर्षा व आकाशीय बिजली गिरने से जनहानि व पशुहानि हुई। इसकी जानकारी होने पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रशासन के आलाधिकारी प्रभावित परिवारों से संवाद बनाकर उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाएं। मुख्यमंत्री ने आंधी, पानी, ओलावृष्टि आदि के मद्देनजर वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड में रहकर आमजन से संवाद करने और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने को कहा।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घायलों के सम्बंध में भी जानकारी ली। आपदा पीड़ित मंडलों के आयुक्त, जनपदों के जिलाधिकारी व मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उन्होंने निर्देश दिया कि घायलों का उचित इलाज हो, उन्हें दवाएं व स्वास्थ्य सुविधाएं समय से उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री ने घायलों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।  मुख्यमंत्री ने आमजन से भी अपील की कि विपरीत मौसम में बचाव का विशेष ध्यान रखें। आंधी में होर्डिंग, ग्लोसाइन बोर्ड, बिजली के तार आदि के पास न खड़ें हों। घर के बच्चों, बुजुर्गों के साथ ही पशुओं का भी विशेष ध्यान रखें।

सीएम योगी का बयान: कृषि और विज्ञान भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत रहे हैं

लखनऊ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि कृषि प्रधान देश भारत का किसान हमेशा से नवाचारी रहा है और खेती किसानी में नए प्रयोग कर कृषि योग्य भूमि की उत्पादक क्षमता बढ़ाने और उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर करने में दिलचस्पी जाहिर करता रहा है। यही कारण है कि भारत में कृषि क्षेत्र कभी घाटे का सौदा नहीं रहा है। योगी ने अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन शनिवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय में विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कहा, पहले किसान केवल किसान नहीं था, बल्कि वह इनोवेटर था। कृषि कभी घाटे का सौदा नहीं था। उस समय का किसान स्वयं नवाचार करता था। हमारा व्यापारी केवल व्यापारी नहीं था, बल्कि वह देश को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी था। हमारी अर्थव्यवस्था खेती-बाड़ी से जुड़ी हुई थी, जो अपने उत्पादों को दुनिया भर में पहुंचाने का काम करती थी। भारत एक कृषि प्रधान देश माना जाता है। हमारी सबसे बड़ी ताकत एमएसएमई और कृषि क्षेत्र था। विज्ञान का मतलब ही लोक कल्याण सीएम योगी विज्ञान का मतलब ही लोक कल्याण है। दुनिया के अंदर जिस भी देश ने प्रगति की है, उसके पास विज्ञान का यही भाव था। आधुनिक विज्ञान का कुल समय चार से पांच सौ साल का रहा है। भारत की प्राचीन गौरवशाली परंपरा का अध्ययन करें तो पता चलता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 से 45 प्रतिशत थी। चार सौ साल पहले भी लगभग 24-25 प्रतिशत हिस्सेदारी हमारी थी, लेकिन स्वतंत्रता के समय हम डेढ़ से दो प्रतिशत पर आ गए थे। हमें यह देखना होगा कि ऐसा क्यों हुआ। मुख्यमंत्री ने जगदीश चंद्र बसु की दो पौधों वाली कहानी का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवों में ही नहीं, जड़-पौधों में भी चेतना होती है। उन्होंने बचपन में अपनी मां द्वारा पौधे लगाए जाने का जिक्र किया और कहा कि ज्ञान जहां से भी आए, उसका स्वागत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले कारीगरों को बदहाल बना दिया गया था, उनके बनाए उत्पादों को बेकार बताया गया था, परिणामस्वरूप वे बाजारों से बाहर हो गए थे। 2017 के बाद एक जिला एक उत्पाद दिया जोर सीएम योगी ने कहा, 2017 के बाद हमने 'एक जिला एक उत्पाद' शुरू करके डिजाइन और पैकेजिंग पर जोर दिया। बाजार से कारीगरों को जोड़ने का काम किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में विशेषकर बुजुर्गों की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिये लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 200 बिस्तरों वाले सात मंजिला अत्याधुनिक 'नेशनल सेंटर फॉर एजिंग' का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद कार्यदायी संस्था के अभियंताओं को युद्धस्तर पर कार्य कर प्राथमिकता के आधार पर समय से पहले निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए।

गोरखपुर में 295 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण, योगी ने गिनाए सरकार के काम

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल जोरशोर से तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी एक तरह से चुनावी शंखनाद कर दिया है। सीएम योगी पश्चिम से लेकर पूरब तक यूपी के धुआंधार दौरे कर रहे हैं। इन दौरों के दौरान सैकड़ों करोड़ की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण-शिलान्यास के साथ ही वह लोगों को अपनी सरकार के कामों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं साथ ही विपक्ष पर जमकर हमला भी बोल रहे हैं। शनिवार को सीएम योगी वाराणसी, आजमगढ़ से होते हुए अपने गृह जनपद गोरखपुर पहुंचे। यहां चिल्लूपार की जनसभा में उन्होंने राम मंदिर निर्माण, रोजगार, कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों पर विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। सीएम योगी ने जनता से आह्वान किया जो दल आस्था का सम्मान, युवाओं को रोजगार और क्षेत्र का विकास नहीं कर सकते, उन्हें न चुनें। सीएम योगी शनिवार को गांधी इंटर कालेज महुआपार बड़हलगंज में 295 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 152.21 करोड़ रुपये की 122 पूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और 143.25 करोड़ रुपये की 197 नई परियोजनाओं का शिलान्यास किया। सीएम योगी ने कहा कि चिल्लूपार क्षेत्र के लोग सरयू मैया के प्रति गहरी आस्था रखते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से सरयू में स्नान करते हैं और पर्व-त्योहारों पर काशी तथा अयोध्या धाम की यात्रा करते हैं। अनुमान कीजिए आपका एक वोट कैसे पीढ़ियों को तार देता है। 500 वर्ष पहले जिस अयोध्या धाम में हम सब अपमानित हुए थे। पांच सौ वर्षो तक संघर्ष चलता रहा। पीढ़ी दर पीढ़ी, साल दर साल संघर्ष का सिलसिला थमा नहीं। फिर डबल इंजन की सरकार आई। आज अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर का निर्माण हो गया। सीएम ने सभा में लोगों से पूछा कि क्या ये काम कांग्रेस कर पाती? कांग्रेस के वश का था? क्या समाजवादी पार्टी कर पाती? उन्होंने कहा कि आप सोचें कि जब ये आपकी आस्था को सम्मान नहीं दे सकते, महापुरुषों को सम्मान नहीं दे सकते, विकास की योजनाएं नहीं ला सकते, नौजवान को रोजगार नहीं दे सकते, उद्योग धंधे नहीं ला सकते, बेटी बहन को सुरक्षा नहीं दे सकते, बाढ़ की समस्या का समाधान नहीं दे सकते, सड़कों का निर्माण नहीं कर सकते है, बब इन्हें चुनकर भेजते क्यों हैं? इन्हें चुनकर भेजने का मतलब स्वयं पर एक बोझ और कलंक का ठप्पा लगा लेना है। सपा पर साधा निशाना सीएम योगी ने नाम लिए बगैर सपा पर जमकर निशाना साधा। सीएम योगी ने कहा कि जब गलत लोग चुन कर जाते थे, तब जनता का पैसा चंद लोगों के परिवारों के विकास में लगता था। नौकरियों में सेंध लगती, यूपी के नौजवानों को नौकरी नहीं लगती। विकास की योजना में ठेके पट्टे के लिए पहले ही मार होने लगती थी। विधायक स्वयं ठेका करेगा तो हो चुका काम। यही होता था। लेकिन अब विकास भी हो रहा, नौजवानों को नौकरी भी मिल रही है। पुलिस भर्ती में चिल्लूपार और गोरखपुर के नौजवान भर्ती हुए। हर सरकारी भर्ती में नियुक्ति पत्र वितरित करता हूं तो गोरखपुर के सभी विधानसभा क्षेत्र से नौजवान मंच पर दिखते हैं। प्रसन्नता होती है। सीएम ने एक बार फिर लोगों से पूछा कि क्या ये 2017 के पहले संभव था? उन्होंने कहा कि तब चाचा-भतीजे की जोड़ी आपके हक पर डकैती डालती थी। नौजवानों का सलेक्शन नहीं होता था बल्कि वे नौकरी रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पहचान के संकट से जूझता था। मै मानता हूं कि चिल्लूपार, आजमगढ़, मऊ और यूपी के नाम पर रोजगार नहीं मिलता था। हक विकास भी करेंगे, सुरक्षा और सम्मान भी देंगे सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में दंगा, कर्फ्यू, अव्यवस्था, गुंडागर्दी, माफियागिरी यही सब था यूपी में। न बेटी सुरक्षित न व्यापारी। आज ऐसा नहीं है। एक नई पहचान बनी है यूपी की। यह नई पहचान आपके विकास की इस यात्रा की पहचान है। हम विकास भी करेंगे, सुरक्षा भी देंगे, आस्था का सम्मान भी करेंगे और समृद्धि की नई उंचाई की ओर आप सब को भी लेकर जाएंगे। सीएम योगी ने कहा कि सरकार यहां लगने वाले उद्योगों के लिए ऐसे प्रशिक्षण केंद्र भी खोलेगी जहां तकनीशियन पैदा होंगे। उद्योगों में प्रशिक्षित बेटे और बेटियों को नौकरी मिलेगी, उन्हें पलायन नहीं करना होगा। लेकिन इन प्रक्रियाओं को गति तब मिलेगी जब अच्छी सरकारें होंगी, सुशासन होगा, सुरक्षा होगी।

योगी आदित्यनाथ ने गिनाईं मोदी सरकार की उपलब्धियां, 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का दावा

लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के मौके पर शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों ने भारत की विकास यात्रा की सराहना की है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने अपनी शक्ति और सामर्थ्य का परिचय पूरे विश्व को दिया है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज का भारत बिना रुके, बिना डिगे और बिना थके आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक देश में लोगों को जाति, धर्म, भाषा और संप्रदाय के नाम पर बांटने की राजनीति हुई, लेकिन मोदी सरकार ने सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की भावना के साथ काम किया है। मोदी सरकार ने 25 करोड़ आबादी को गरीबी रेखा से निकाला उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता संभालने के समय देश की आबादी लगभग 120 करोड़ थी। इन 12 वर्षों में सरकार की योजनाओं के माध्यम से 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकालने में सफलता मिली है। योगी ने कहा कि दुनिया में बहुत कम ऐसे देश हैं जिनकी आबादी 25 करोड़ से अधिक है और भारत ने इतनी बड़ी आबादी को गरीबी से बाहर निकालकर ऐतिहासिक कार्य किया है। सीएम योगी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री की जनकल्याणकारी योजनाओं का सबसे अधिक लाभ उत्तर प्रदेश को मिला है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 65 लाख गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर मिले हैं। यूपी के 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन का लाभ वहीं देशभर में बने 12 करोड़ शौचालयों में से करीब 3 करोड़ शौचालय उत्तर प्रदेश में बनाए गए हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत देश में जारी 60 करोड़ कार्डों में से 15 करोड़ लाभार्थी उत्तर प्रदेश के हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन योजना का लाभ मिल रहा है। जनधन खाते, उज्ज्वला योजना, स्वास्थ्य बीमा और अन्य योजनाओं ने गरीबों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। योगी ने कहा कि सरकार ने कभी वोट बैंक की राजनीति नहीं की, बल्कि गरीबों के उत्थान को प्राथमिकता दी। बेटियों को जन्म से स्नातक तक शिक्षा सहायता योजना का लाभ महिलाओं के सशक्तिकरण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बेटियों को जन्म से लेकर स्नातक तक शिक्षा सहायता की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। सेना, अंतरिक्ष और उद्योग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं को अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों में ड्रॉपआउट दर कम हुई है और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके सफल नेतृत्व और 12 वर्षों के कार्यकाल के लिए बधाई भी दी। 2027 में 2017 से बड़ी जीत होगी- पंकज चौधरी वहीं इस मौके पर यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा एक बार फिर सरकार बनाएगी और जीत की हैट्रिक लगाएगी। उन्होंने कहा कि 2027 में पार्टी को 2017 से भी बड़ी जीत हासिल होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जो विकास यात्रा शुरू हुई थी, वह अब विकसित भारत के संकल्प में बदल चुकी है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य किया गया है, जिससे जनता का भरोसा भाजपा के प्रति लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि जनता ने बीते वर्षों में बदलते भारत को देखा है। देश ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल की हैं।

उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी रफ्तार, योगी ने UPEIDA की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली

लखनऊ  ये बात तो पक्‍की है कि उत्तर प्रदेश में पिछले एक दशक के दौरान अगर किसी सरकारी एजेंसी ने राज्य की तस्वीर बदलने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है तो वह है UPEIDA (Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority). आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे मेगा प्रोजेक्ट इसी ने जमीन पर उतारे हैं. अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने UPEIDA की कमान सीधे अपने हाथ में ले ली है. सीएम ने साफ संकेत दिया है कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे और औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं की गति और तेज की जाएगी. राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के फोकस के रूप में देखा जा रहा है।  क्या है UPEIDA? दरअसल, UPEIDA यानी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण की स्थापना राज्य में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स हब और उनसे जुड़े विकास काममों के लिए की गई थी. इसका मुख्य मकसद केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि सड़क के किनारे उद्योग, निवेश, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क और रोजगार के मौके भी विकसित करना भी है. यही वजह है कि यूपी में एक्सप्रेसवे को केवल परिवहन परियोजना नहीं बल्कि आर्थिक विकास के मॉडल के रूप में देखा जाता है. ऐसे में यह भी जान लेना जरूरी है कि UPEIDA ने प्रदेश में कौन से सबसे बड़े प्रोजेक्ट डिलीवर किए हैं.. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे लंबाई: लगभग 302 किमी उद्घाटन: 2016 इससे यात्रा समय में भारी कमी आई. पश्चिमी यूपी और राजधानी लखनऊ के बीच सीधी कनेक्टिविटी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लंबाई: लगभग 341 किमी लखनऊ से गाजीपुर तक बनाया गया है. लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये आई. पूर्वी यूपी को राजधानी क्षेत्र से जोड़ा. बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे लंबाई: लगभग 296 किमी चित्रकूट से इटावा क्षेत्र तक कनेक्टिविटी अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये बुंदेलखंड क्षेत्र को NCR नेटवर्क से जोड़ने वाला अहम मार्ग है. गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे लंबाई: लगभग 91 किमी गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ता है. इससे पूर्वी यूपी की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आया. गंगा एक्सप्रेसवे लंबाई: 594 किमी मेरठ से प्रयागराज तक लागत लगभग 36,000 करोड़ से अधिक. यह राज्य का सबसे महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट है. यूपीडा अभी किन परियोजनाओं पर काम कर रहा है?     गंगा एक्सप्रेसवे विस्तार और उससे जुड़े लिंक     आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे     अलीगढ़-आगरा एक्सप्रेसवे     अलीगढ़-पलवल एक्सप्रेसवे     अवध एक्सप्रेसवे     चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे     कई औद्योगिक कॉरिडोर और ई-वे हब परियोजनाएं     इसके अलावा पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे ई-वे हब, लॉजिस्टिक्स पार्क और औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिन पर सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।      पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में एक्सप्रेसवे के बाद औद्योगिक निवेश और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।  सीएम योगी के कमान संभालने से क्या बदलेगा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले भी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की रेगुलर समीक्षा करते रहे हैं. हाल के महीनों में उन्होंने गंगा एक्सप्रेसवे समेत कई परियोजनाओं की वीकली मॉनिटरिंग और तय समयसीमा में काम पूरा करने पर जोर दिया है. वह कई बार मौकों पर निरीक्षण भी करने पहुंचे थे और मकसद साफ था कि ये इन अहम प्रोजेक्‍ट्स में भी किसी भी तरह का डिले नहीं चाहते. सीएम के UPEIDA की सीधी निगरानी में आने से भूमि अधिग्रहण में आने वाली दिक्‍कतें पहली बात तो तेजी से दूर हो सकती हैं. साथ ही विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा. खास बात ये भी है कि इसकी वित्तीय मंजूरियों में भी तेजी आएगी. परियोजनाओं की समयसीमा पर सख्ती बढ़ेगी और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कई बड़े प्रोजेक्ट धरातल पर दिखाई दे सकते हैं।  2027 चुनाव से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर होगा सबसे बड़ा मुद्दा? देखा जाए तो यूपी की राजनीति में एक्सप्रेसवे अब सिर्फ सड़क नहीं बल्कि विकास का भी हैं. भाजपा सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गंगा एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और नए लिंक एक्सप्रेसवे को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करना चाहेगी. यही वजह है कि UPEIDA की कमान पर मुख्यमंत्री की सीधी नजर को केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि विकास और राजनीति दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 

रामकथा मंच से सीएम योगी का संदेश, लव जिहाद और लैंड जिहाद पर समाज को किया आगाह

 लखनऊ  मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने दो-टूक कहा कि जिनके मन में भारत के प्रति आस्था, निष्ठा नहीं है और जो संस्कारों का सम्मान नहीं कर सकते, ऐसे लोगों के लिए भारत की धरती धर्मशाला नहीं हो सकती। प्रभु श्रीराम से द्रोह करने वालों को धरती पर जगह नहीं मिली। लव व लैंड जिहाद के प्रति आगाह करते हुए सीएम ने कहा कि इसके विरुद्ध समाज को एकजुटता के साथ खड़ा होना होगा। तोड़ने वाली ताकतें जाति, भाषा, क्षेत्र के नाम पर विभाजित करने की चेष्टा करेंगी, लेकिन भारत की संत शक्ति समाज को एकजुट कर देश को आगे ले जाना चाहती हैं। व्यासपीठ द्वारा जिस मर्म को समझाने का प्रयास किया गया, हमें उसे आत्मसात करना होगा। कथा केवल सुनने की नहीं, बल्कि अंगीकार करने की महत्वपूर्ण कड़ी का हिस्सा है। मुख्यमंत्री मंगलवार को राजधानी में 9 दिवसीय रामकथा महोत्सव के समापन समारोह में रामभक्तों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने रामकथा का श्रवण भी किया। कथा का वाचन तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा किया गया। सीएम योगी ने श्रद्धालुओं से कहा कि जो भी प्रभु के सान्निध्य में आया, वह दैवीय आपदा से मुक्त रहता है। उन्होंने कामना की कि हर श्रद्धालु का जीवन सुख व समृद्ध के साथ बढ़ता रहे। राम नाम में हर समस्या का समाधान मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों ने श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन को जन्म-मरण का प्रश्न बनाया था। संत इसका श्रेय नहीं चाहते थे, वे सिर्फ इसलिए अभियान से जुड़े क्योंकि भारतीय परंपरा, विरासत में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम सभी के आदर्श हैं और राम नाम में जीवन की हर समस्या का समाधान है। राजनीति व पूर्वाग्रह से ग्रसित कुछ चुनिंदा नामों को छोड़ दें तो हर भारतवासी, जिसके अंदर भारत का डीएनए है, उसने भगवान राम के आदर्शों को जीवन का हिस्सा बनाया है। मर्यादा पुरुषोत्तम का नाम उत्तर से दक्षिण व पूरब से पश्चिम तक हर भारतीय को जोड़ने का सामर्थ्य रखता है। अदालत ने भी माना- सैकड़ों वर्षों से अन्याय सीएम ने कहा कि 491 वर्ष तक श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन चलता रहा। 2019 में सर्वोच्च न्यायालय की फुल बेंच के न्यायमूर्तियों ने अपने फैसले में कहा कि जहां रामलला विराजमान हैं, वहीं रामजन्मभूमि है। इसे लेकर साक्ष्य-प्रमाण और विद्वानों के वक्तव्य भी दिए गए थे। सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायमूर्ति ने स्वामी रामभद्राचार्य जी के बारे में कहा कि जब मैंने उनके वक्तव्य को सुना तो लगा कि सनातन धर्मावलंबियों के साथ सैकड़ों वर्षों से अन्याय हो रहा था। संतों की साधना राष्ट्र कल्याण व लोकमंगल के लिए गोरक्षपीठाधीश्वर ने कहा कि संतों की साधना राष्ट्र कल्याण व लोकमंगल के लिए है। जगद्गुरु श्रीरामभद्राचार्य जी द्वारा स्थापित भारत का पहला दिव्यांग विश्वविद्यालय चित्रकूट में है और वह उसके कुलाधिपति हैं। इस उम्र में वह आराम कर सकते थे, लेकिन राष्ट्रमंगल की कामना के साथ प्रभु की कथा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। देश-दुनिया में कोई भी भक्त बुलाता है तो प्रभु की कृपा को जन-जन तक पहुंचाते हैं। इसके पीछे उनका उद्देश्य है कि भगवान राम के विराट आदर्शों से भक्त थोड़ा भी अंश जीवन में अंगीकार कर लें तो उनका, समाज व देश का कल्याण हो सकता है। नकारात्मक ताकतें आएंगी तो तहस-नहस करेंगी मुख्यमंत्री ने कहा कि रावण और उसके राक्षसों की आर्याव्रत में घुसपैठ थी। खर-दूषण के आतंक से दंडकारण्य त्रस्त था। ताड़का, मारीच व सुबाहु ने बस्तर के वनों, नगरों को उजाड़ दिया था। जब भी नकारात्मक ताकतें वर्चस्व में आएंगी तो तहस-नहस करेंगी। शिक्षण संस्थानों व शोध केंद्रों को वैसे ही बंजर करेंगी, जैसे खर-दूषण व ताड़का द्वारा किया जाता था। सीएम ने मारीच व शकुनि पर किया कटाक्ष सीएम ने कहा कि महर्षि विश्वामित्र प्रभु श्रीराम को अपनी कथा की रक्षा के बहाने ले गए और उनकी ताकत को देखना चाहा। उनका सबसे पहला मुकाबला ताड़का से हुआ। मारीच व सुबाहु का भी अंत हुआ। पहले मारीच ने रावण को समझाने का प्रयास किया था, लेकिन रावण ने उसे मारने की धमकी दी, तब मारीच ने कहा कि यदि मरना ही है तो रावण के हाथों नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के हाथों मरूंगा ताकि उद्धार हो जाए। सीएम ने कटाक्ष किया कि मारीच रिश्ते में रावण का मामा लगता था। मामा व चाचा अनुचित व्यवस्था में पड़ते हैं तो कुसंग की तरफ ले जाते हैं, सन्मार्ग की तरफ नहीं। दुर्योधन के मामा शकुनि ने महाभारत करा दिया। लव जिहाद रोकने पर दिया बल सीएम ने कहा कि रावण ने मां जानकी का अपहरण किया। भगवान राम ने यत्न कर उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ा। नारी गरिमा की रक्षा लव जिहाद को रोकने के लिए आदर्श उदाहरण हो सकता है। केरल उच्च न्यायालय ने 2009 व 2011 में रिलीजियस डेमोग्राफी को चेंज करने की साजिश पर चिंता व्यक्त की, लेकिन उस समय भी ध्यान नहीं दिया गया। उत्तर प्रदेश में हमने 2020 में सख्त कानून बताया, फिर भी इस पर व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता है। लैंड जिहाद से जुड़े थे खऱ-दूषण सीएम ने कहा कि हर कालखंड में नकारात्मक ताकतें आएंगी, लेकिन इसके मुकाबले के लिए समाज की सज्जन शक्ति को मिलकर तैयार रहना होगा। मारीच, खर-दूषण, सुबाहु भी लैंड जिहाद से जुड़े थे। जबरन जमीन पर कब्जा कर रहे थे। हमें लैंड जिहाद से जुड़े लोगों से मुकाबले को भी तैयार रहना होगा। खाली जमीन पर तंबू गाड़ने की प्रथा बंद होनी चाहिए। रामद्रोहियों को धरती पर जगह नहीं मिली सीएम ने कहा कि शिव हों या राम, हम जिसे भी मानते हैं, उनके आदर्शों को जीवन का हिस्सा बनाएं। उनके अनुरूप जीवन जीने और बनने का प्रयास करें और परिवार के सदस्यों को उन आदर्शों से प्रेरणा लेने को प्रेरित करें। जिसने भी राम को जीवन का आदर्श बनाया, उसका कल्याण हुआ। जिसने राम का द्रोह किया, उसे धरती पर जगह नहीं मिली। मारीच, रावण समेत रामायण काल के अनेक उदाहरण हैं, जो उच्च कुल व श्रेष्ठ व्यवस्था में जन्म लेने के बाद भी पशुवत मारे जाते हैं, क्योंकि उन्होंने राम के साथ द्रोह किया। राम की संगति में पूज्य हो गए हनुमान व विभीषण सीएम ने कहा कि पवनसुत हनुमान या विभीषण भगवान राम की संगति में आने के बाद पूज्य हो गए। गांव के … Read more