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ईएमसी पार्क और सेमीकंडक्टर यूनिट से यूपी में रोजगार की बड़ी छलांग, हजारों युवाओं को मिलेगा फायदा

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े औद्योगिक और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास को अभूतपूर्व गति मिली है। यहां अपैरल पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क, टॉय पार्क, एमएसएमई पार्क, हैंडीक्राफ्ट पार्क, ओडीओपी पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये का निवेश आने के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। बनेगा 206 एकड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-10 में 206.40 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित होने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी पार्क) को 24 जून 2025 को मंजूरी प्रदान की है। इस परियोजना का उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली औद्योगिक अवसंरचना विकसित कर इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए विश्वस्तरीय इकोसिस्टम तैयार करना है। इसके लिए यीडा ने 28 मार्च 2024 को परियोजना प्रबंधन एजेंसी एसटीपीआई लिमिटेड के माध्यम से प्रस्ताव भेजा था। स्वीकृति मिलने के बाद 3 जुलाई 2025 को यीडा और एसटीपीआई के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। परियोजना के अनुसार ईएमसी पार्क का निर्माण कार्य 31 दिसंबर 2027 तक पूरा किया जाएगा। इसके लिए अवसंरचना निर्माण हेतु ईपीसी मोड पर टेंडर जारी किया गया, जिसके बाद मैसर्स जेएसपी प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को कार्य आवंटित किया गया है। समस्त आधारभूत संरचना का कार्य सितंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ईएमसी पार्क पर 417 करोड़ का निवेश, विकसित होगा विश्वस्तरीय इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम 206.40 एकड़ क्षेत्र में बनने वाले इस ईएमसी पार्क पर लगभग 417 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें केंद्र सरकार लगभग 144.48 करोड़ रुपये का योगदान देगी, जबकि यमुना प्राधिकरण द्वारा लगभग 272.52 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। यह पार्क उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलेगा। सोलर उद्योग में 8,253 करोड़ का बड़ा निवेश, 5,000 युवाओं को मिलेगा रोजगार यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-8 में सात्विक सोलर प्रा. लि. की अत्याधुनिक इकाई स्थापित की जा रही है। कंपनी को 200 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जहां सोलर सेल एवं सोलर मॉड्यूल का निर्माण होगा। इस परियोजना में 8,253 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जिससे लगभग 5,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। परियोजना का भूमिपूजन 14 नवंबर 2025 को किया गया था और वर्तमान में निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 3,250 करोड़ का निवेश यीडा के सेक्टर-10 स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर में एसेंड सर्किट्स प्रा. लि. को 16 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। कंपनी यहां फ्लेक्सिबल पीसीबी, हाई डेंसिटी इंटरकनेक्ट (एचडीआई) पीसीबी तथा सेमीकंडक्टर सब्सट्रेट्स का निर्माण करेगी। इस परियोजना में 3,250 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जिससे लगभग 1,500 लोगों को रोजगार मिलेगा। कंपनी को भूमि आवंटन 16 जनवरी 2026 को किया गया तथा 28 अप्रैल 2026 को लीज डीड निष्पादित की गई। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण में 3,532 करोड़ का निवेश यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-8 में अंबर एंटरप्राइजेज इंडिया लि. को 100 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। यहां कंपनी कॉपर क्लैड लैमिनेट्स (सीसीएल), असेम्बली, कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक्स एप्लायंसेज तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का निर्माण करेगी। इस परियोजना में 3,532 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसके माध्यम से लगभग 2,000 लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। कंपनी को भूमि आवंटन 16 जनवरी 2026 को किया गया। क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास से बदल रही प्रदेश की अर्थव्यवस्था यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में विकसित किए जा रहे अपैरल पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क, टॉय पार्क, एमएसएमई पार्क, ओडीओपी पार्क, हैंडीक्राफ्ट पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर उत्तर प्रदेश को नई औद्योगिक पहचान दे रहे हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश, आधुनिक तकनीक, निर्यात क्षमता और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल रहा है। योगी सरकार की औद्योगिक नीति का दिख रहा असर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निवेशक-हितैषी नीतियों, बेहतर कानून व्यवस्था, आधुनिक अवसंरचना और त्वरित स्वीकृति प्रणाली का परिणाम है कि देश और विदेश की बड़ी कंपनियां उत्तर प्रदेश में निवेश कर रही हैं। विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, सोलर ऊर्जा और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में हो रहे निवेश उत्तर प्रदेश को भारत के सबसे बड़े औद्योगिक और विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहे हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश के युवाओं के लिए हजारों नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और राज्य की एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को मजबूत आधार मिलेगा।

नोएडा में विकास की रफ्तार तेज, सीएम योगी बोले— अब ‘शापित’ नहीं, देश का सबसे बड़ा निवेश गंतव्य बना यूपी

गौतमबुद्ध मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर शापित नहीं है बल्कि आज नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी मिलकर देश का सर्वश्रेष्ठ निवेश गंतव्य बन रहे हैं। तीनों अथॉरिटी तेजी से कार्य कर रही हैं। वर्षों की जकड़न टूटी है, कार्य संस्कृति बदली है और नागरिकों व उद्यमियों की समस्याओं के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ है। मुझे विश्वास है कि यह नया कार्यालय विकास की नई पहचान बनेगा। मैं यहां के नागरिकों, किसानों, उद्यमियों, जनप्रतिनिधियों और अथॉरिटी को शुभकामनाएं देता हूं। 50 वर्ष के बाद नोएडा अथॉरिटी के पास अपना भव्य कार्यालय स्थापित होना किसी उपलब्धि से कम नहीं है। अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गौतमबुद्ध नगर में नोएडा और दादरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत 2479 करोड़ से सेक्टर- 96 स्थित नोएडा प्राधिकरण के मुख्य प्रशासनिक भवन समेत 70 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। इसके साथ ही यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चतुर्थ संस्करण की कर्टेन रेजर सेरेमनी, ओडीओपी एवं विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को टूल किट, एमएसएमई इकाइयों एवं तकनीकी उन्नयन योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी चेक, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के लाभार्थियों को चेक तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले बैंकर्स को प्रशस्ति पत्र वितरित किए। 2017 से पहले गौतमबुद्ध नगर को शापित मानते थे तत्कालीन मुख्यमंत्री सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्रियों के लिए गौतमबुद्ध नगर शापित माना जाता था। वे यहां आने से बचते थे। 2017 में मेरे मुख्यमंत्री बनने के बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेट्रो के उद्घाटन के लिए यहां आने वाले थे, तब प्रधानमंत्री कार्यालय से संदेश आया कि किसी मंत्री को कार्यक्रम में भेज सकते हैं, क्योंकि नोएडा के बारे में मान्यता थी कि मुख्यमंत्री वहां नहीं जाते। सीएम योगी ने बताया कि मैंने स्पष्ट कहा कि मैं स्वयं नोएडा आऊंगा। मैं इन बातों को नहीं मानता। सरकार का काम जनता की समस्याओं का समाधान निकालना है। बिल्डर-बायर्स विवाद का समाधान कर लाखों लोगों को दिलाया घर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिल्डर-बायर्स विवाद की थी। हमारी सरकार ने एक वर्ष के भीतर सवा लाख बायर्स को आवास उपलब्ध कराया। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो नीति आयोग के सीईओ के नेतृत्व में हाई लेवल कमेटी बनाई गई। आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराकर तीन लाख से अधिक बायर्स को उनका आवास दिलाने में सफलता मिली। अब नोएडा अथॉरिटी का अपना भवन होने से नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। अन्नदाता किसान, उद्यमी, एसोसिएशन और आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान अब एक ही छत के नीचे होगा। अथॉरिटी यदि सभी सेवाएं ऑनलाइन कर दे तो व्यवस्था और प्रभावी होगी। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से प्रत्येक कार्य की निगरानी की जा सकेगी। जमीन लेकर निवेश नहीं करने वालों को नोटिस जारी करें मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन लोगों ने अथॉरिटी से जमीन लेकर निवेश नहीं किया है, उन्हें समयसीमा निर्धारित कर नोटिस जारी किया जाए। फिर भी यदि निवेश नहीं किया जाता है तो नए निवेशकों को आमंत्रित किया जाए और नया लैंड बैंक तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में बनी नोएडा अथॉरिटी और आज के समय में बहुत अंतर है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने होंगे। आज उत्तर प्रदेश में कहीं भी जाइए, चारों ओर परिवर्तन दिखाई देता है। मैं 390 करोड़ रुपये की लागत से बने नोएडा अथॉरिटी के भव्य भवन के लिए बधाई देता हूं। आज लोग बदले हुए उत्तर प्रदेश को नजदीक से महसूस कर रहे हैं। नौ वर्ष पहले का उत्तर प्रदेश क्या था और आज क्या है, यह अंतर हर व्यक्ति देख सकता है। जेवर एयरपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर मैन्युफैक्चरिंग बदल रहे हैं तस्वीर मुख्यमंत्री ने कहा कि आज परिवर्तन स्पष्ट दिखाई दे रहा है। मैं जेवर एयरपोर्ट पर उतरा हूं। वहां से घरेलू कमर्शियल उड़ानें शुरू हो चुकी हैं और जल्द ही अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी शुरू हो जाएंगी। लगभग 7000 करोड़ रुपये के निवेश से इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट निर्माण की आधारशिला रखी गई है। वहीं 8200 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की भी आधारशिला रखी गई है। इससे गौतमबुद्ध नगर इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनेगा। एक समय यह प्रदेश का सबसे खतरनाक क्षेत्र माना जाता था। लोग शाम के बाद यहां आने से डरते थे। आज वहीं फिल्म सिटी, अपैरल पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क और बड़े-बड़े औद्योगिक निवेश हो रहे हैं। यह सब इसलिए संभव हुआ क्योंकि डबल इंजन सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिना रुके, बिना डिगे, बिना थके, बिना डरे और बिना झुके निर्णय लेने की क्षमता विकसित की। एमएसएमई ही विकसित भारत की मजबूत नींव मुख्यमंत्री ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम किसी भी बड़े उद्योग की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब खुशहाल किसान, विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग पावर साथ-साथ आगे बढ़ेंगे। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कारीगर और हस्तशिल्पी हतोत्साहित थे। न बाजार था, न डिजाइन, न तकनीक और न ही कोई सहायता। सरकार ने हाई लेवल कमेटी बनाकर ब्रांडिंग, नई डिजाइन, नई तकनीक और बाजार से जोड़ने की रणनीति बनाई। ओडीओपी आज भारत की पहचान बन चुका है मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ भारत का ब्रांड बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला मानते हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां कार्य कर रही हैं, जिनमें सवा तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। कोविड काल में जब पूरी दुनिया ठहर गई थी, तब उत्तर प्रदेश का एमएसएमई सेक्टर चलता रहा। 40 लाख से अधिक श्रमिक वापस लौटे लेकिन सरकार ने उनके भोजन, राशन और रोजगार की जिम्मेदारी ली। एमएसएमई इकाइयों से अपील की गई कि वे एक-दो लोगों को रोजगार दें। परिणामस्वरूप 90 प्रतिशत से अधिक श्रमिक प्रदेश में ही रुक गए और आज विकास में योगदान दे रहे हैं। यूपी आज 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात कर रहा मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने एमएसएमई को तकनीक, डिजाइन और कॉमन फैसिलिटी सेंटर उपलब्ध कराए। आज उत्तर प्रदेश दो लाख करोड़ रुपये से … Read more

मुरादाबाद में 63 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुरादाबाद  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 29 जून को मुरादाबाद शहर आएंगे। इस दौरान वह जिले को 365.50 करोड़ रुपये की लागत वाली  की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री 26 परियोजनाओं का लोकार्पण और 37 परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। उनके आगमन को लेकर प्रशासन और पुलिस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सर्किट हाउस के पीछे प्रस्तावित जनसभा स्थल पर पंडाल निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर शुरू हो गया है। प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक मुख्यमंत्री का दोपहर करीब 1:30 बजे मुरादाबाद पहुंचने का कार्यक्रम है। दौरे के दौरान वह मुरादाबाद-ठाकुरद्वारा रोड स्थित रामगंगा नदी के निकट हरदासपुर गांव में निर्माणाधीन गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय परिसर का निरीक्षण भी करेंगे। जिले में 63 परियोजनाओं का करेंगे लोकार्पण-शिलान्यास इसके अलावा हरथला में तैयार हुए सीनियर सिटीजन केयर सेंटर का लोकार्पण करेंगे। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) और नगर निगम की विभिन्न विकास योजनाएं भी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का हिस्सा रहेंगी। जिले में कुल 63 परियोजनाओं पर 365.5083 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इनमें 26 परियोजनाओं का लोकार्पण 136.1536 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा, जबकि 37 नई परियोजनाओं का शिलान्यास 229.3547 करोड़ रुपये की लागत से होगा। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय परिसर का भी करेंगे निरीक्षण विधानसभा क्षेत्रवार सबसे अधिक परियोजनाएं मुरादाबाद नगर विधानसभा क्षेत्र में हैं। यहां 24 परियोजनाओं पर 237.88 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इनमें 13 परियोजनाओं का लोकार्पण और 11 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है। कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र में 27 परियोजनाओं पर 105.74 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि मुरादाबाद देहात विधानसभा क्षेत्र में 12 परियोजनाओं पर 21.88 करोड़ रुपये की योजनाएं शामिल हैं। बार मेमोरियल भवन का लोकार्पण भी प्रस्तावित मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बार मेमोरियल भवन का लोकार्पण भी प्रस्तावित है। इसके साथ ही वह विकास कार्यों की समीक्षा बैठक करेंगे और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ अलग से बैठक कर सड़क एवं अन्य निर्माण परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी लेंगे। माना जा रहा है कि बैठक में लंबित परियोजनाओं और आगामी विकास योजनाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए जा सकते हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने जनसभा स्थल का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। वीवीआईपी मूवमेंट को देखते हुए यातायात व्यवस्था और पार्किंग की भी अलग से योजना बनाई जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री रात्रि विश्राम मुरादाबाद में करेंगे। इसके बाद अगले दिन उनका रामपुर जाने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिले में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी उत्साह का माहौल है। विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के माध्यम से जिले को बुनियादी ढांचे, शहरी विकास और जनसुविधाओं के क्षेत्र में नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। मुख्यमंत्री के आगमन के मद्देनजर शनिवार को मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह, जिलाधिकारी डा. राजेंद्र पैंसिया, एसएसपी सतपाल अंतिल, उपाध्यक्ष एमडीए अनुभव सिंह और सीडीओ मृणाली अविनाश जोशी सिंह ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया और तैयारियों को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ गहन बैठक कर अंतिम रूपरेखा तय की तैयारियों को दिया जा रहा अंतिम रूप मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को ऐतिहासिक और सुरक्षित बनाने के लिए जिले के शीर्ष अधिकारियों ने पूरी ताकत झोंक दी है। मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह और जिलाधिकारी डा. राजेंद्र पैंसिया के नेतृत्व में हुई समीक्षा बैठक में हर एक बिंदु पर बारीकी से चर्चा की गई। एसएसपी ने सुरक्षा का अभेद्य खाका खींचा, जबकि सीडीओ मृणाली अविनाश जोशी सिंह ने विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास से जुड़ी सभी फाइलों और व्यवस्थाओं को परखा। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि 29 जून के कार्यक्रम में किसी भी स्तर पर कोई प्रशासनिक या सुरक्षा संबंधी चूक नहीं होनी चाहिए। सीएम की राह चमकाने उतरे चार ब्लॉकों के सफाई कर्मी मुख्यमंत्री के 29 जून को प्रस्तावित मुरादाबाद दौरे से पहले प्रशासन ने सफाई व्यवस्था को लेकर पूरी ताकत झोंक दी है। कांठ रोड पर डेंटल कॉलेज से लेकर इस्लामनगर तक सड़क और उसके आसपास का इलाका चमकाने के लिए छजलैट, मुरादाबाद, भगतपुर टांडा और डिलारी विकास खंडों के सफाई कर्मचारियों को लगाया गया है। सुबह से देर शाम तक सड़क किनारे जमा कूड़ा हटाया जा रहा है, नालियों की सफाई, झाड़ियों की कटाई और डिवाइडर व फुटपाथों की सफाई का काम तेजी से चल रहा है। अधिकारी लगातार मौके पर निगरानी कर रहे हैं ताकि मुख्यमंत्री के काफिले के गुजरने से पहले पूरा मार्ग साफ-सुथरा और व्यवस्थित नजर आए। प्रशासन की इस कवायद से साफ है कि सीएम के दौरे को लेकर कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जा रही है और पूरे मार्ग को चमकाने की तैयारी युद्धस्तर पर जारी है।

भीषण गर्मी में होगी सीएम योगी की रैली, प्रशासन ने कूलर-पंखों से की विशेष व्यवस्था

 हाथरस सीएम योगी आदित्यनाथ की जनसभा रविवार की दोपहर साढ़े ग्यारह बजे से शुरू होगी। मौसम विभाग की मानें तो इस वक्त गर्मी का पारा 44 के पार होगा। ऐसे में जनसभा को सफल बनाने में भाजपाइयों से लेकर प्रशासन की टेंशन बढ़ गई है। सभा को करीब 20 कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों को लाने का लक्ष्य दिया गया है। गर्मी से कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए ओआरएस युक्त पानी और 200 कूलर और करीब एक हजार से अधिक से पंखों का इंतजाम किया गया है। जनसभा में हर ब्लाक से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सहायक और आशा कार्यकर्ताओं को ले जाने के लिए बसों को ब्लाक स्तर पर लगा दिया गया है। हर ब्लाक से लाभार्थियों को भेजने के लिए विकास भवन के सभागार में कंट्रोल रूम खोल दिया गया है। विकास भवन के सभागार में डीएम अतुल वत्स के निर्देश पर कंट्रोल रूम खोल दिया गया जिसकी प्रभारी एसडीएम लवगीत कौर और उनके सहायक के रूप में जिला कार्यक्रम अधिकारी धीरेंद्र उपाध्याय की ड्यूटी लगाई गई है। करीब एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों को लैप टाप के साथ बैठाया गया है। हर कर्मचारी को जिले के ब्लाकों का दायित्व सौंपा गया है। सूत्रों का कहना है कि करीब 15 से 20 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, समूह की महिलाएं और आशा कार्यकर्ताओं को बुलाया गया है। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं से लाभांवित होने वाले 39 लाभार्थियों को मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सम्मानित करेंगे। पूरे सभा मंच के आसपास 200 कर्मी सफाई को लगा दिए हैं।

अयोध्या राम मंदिर विवाद पर देवरिया से योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान

देवरिया  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को निशाना बनाया है। अयोध्या के दौर पर आए अरविंद केजरीवल ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच करने वाली एसआईटी पर सवाल उठाए हैं। सीएम योगी ने कहा है कि, जब इन्हें कुछ नहीं मिला तो रामभक्तों पर आक्षेप कर रहे हैं,अयोध्या धाम को बदनाम कर रहे हैं। सीएम योगी ने देवरिया में एक जनसभा में यह बात कही। दिल्ली को बर्बादी के अलावा कुछ नहीं दिया सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, 'एक दिल्ली से सज्जन वहां आए हैं, अयोध्या। दिल्ली की जनता ने उन्हें 15 वर्ष अवसर दिया,लेकिन दिल्ली को उन्होंने बर्बादी,भ्रष्टाचार के सिवा कुछ नहीं दिया, मैं उनसे पूछना चाहूंगा, डबल इंजन की सरकार ने 9 वर्ष में अयोध्या को जो सवांरा है, देखें इस मॉडल को। फिर अपने कारनामों पर पश्चाताप करो। यह न्याय अयोध्या के साथ जो डबल इंजन की सरकार ने किया, अगर यही न्याय आम आदमी पार्टी दिल्ली के साथ करती तो दिल्ली भी चमकती, जैसे आज अयोध्या चमक रही है।' जन आस्था के साथ खिलवाड़ न हो सीएम योगी ने कहा कि, मैंने 19 जून को अयोध्या के दौरे पर कहा था, जन आस्था के साथ खिलवाड़ न हो। अयोध्या हम सबकी आस्था की प्रतीक है। अयोध्या पर आक्षेप मत करो, श्रीराम की मर्यादा का पालन करना सीखो। मैंने कहा था कि एसआईटी की रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी। एसआइटी रिपोर्ट आई, कार्रवाई प्रारंभ हो गई है। उन्होंने कहा कि, जन आस्था के साथ जो खिलवाड़ करेगा, उसके साथ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम करेंगे। आज मोहर्रम है, कहीं किसी का अता पता नहीं है, कोई शस्त्र नहीं निकल रहा, उत्सव के माहौल में कोई उपद्रव नहीं कर सकता, अगर करेगा तो सात पीढ़ियों तक भुगतेगा। आक्षेप लगाने वालों की मंशा अच्छी नहीं योगी ने कहा कि, जो लोग आज आक्षेप कर रहे हैं, इनकी मंशा अच्छी नहीं है। ये वे लोग हैं जो लोग भगवान राम को नकार चुके थे, कहते थे कि राम हुए ही नहीं। ये लोग अयोध्या को नकारते रहे। दूसरा पक्ष वह है जो जय श्रीराम पर लाठी गोली चलाते थे, तुम बताओगे हमें आस्था। रामनवमी पर दंगा करवाते थे, कावड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगाते थे। कांग्रेस ने देश को लूटा ही नहीं था, बल्कि नोचा था। सरकार ने पहले दिन कहा था कि दूध का दूध पानी का पानी होगा। मैं फिर कहता हूं कि रामभक्तों की अग्निपरीक्षा मत लो, उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ मत करो, प्रमाण है तो एसआईटी को सबूत पेश करो।  

SIT रिपोर्ट के बाद एक्शन: राम मंदिर मामले में 8 गिरफ्तार, सीएम योगी ने विपक्ष पर साधा निशाना

लखनऊ अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले में एआईआर के बाद एक फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंच से चेतावानी दी है। आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने पहले दिन कहा कि दूध का दूध और पानी का पानी सभी के सामने आएगा। लेकिन मैं फिर से अपील करूंगा कि राम भक्तों की अग्नि परीक्षा मत लो, उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ करना बंद कीजिए। अगर तथ्य या प्रमाण नहीं है तो आरोप-प्रत्यारोप बंद करो और प्रमाण हैं तो SIT के सामने पेश करो। यूपी के देवरिया पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने संबोधन करते हुए अयोध्या राम मंदिर मामले पर अपनी बातें रखीं। सीएम योगी ने कहा कि एसआईटी की पहली रिपोर्ट आते ही कार्रवाई शुरू हो गई है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी कर के रहेंगे। सनातन आस्था के साथ जो भी खिलवाड़ करेगा वह भुगतेगा किसी को बख्शा नहीं जाएगा। जो लोग गोली चलाते थे आज वे कहते हैं कि आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ योगी ने इस दौरान जमकर हमला भी बोला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक पक्ष कहता था कि राम हैं ही नहीं यानी अयोध्या को भी ये लोग नकारना चाहते थे। लगातार न्यायालय में मुकदमा लड़ते रहे, वकीलों की फौज राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के खिलाफ खड़ी करते रहे और दूसरा पक्ष वो है जो जय श्रीराम बोलने पर लाठी और गोली चलाते थे। भगवान राम का नाम लेने पर जो लोग गोली चलाते थे आज वे कहते हैं कि आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ। अरे तुम हमें आस्था बताओगे? राम नवमी पर दंगा करवाते थे, श्री कृष्ण जन्मोत्सव को प्रतिबंधित करते थे, कांवड़ यात्रा को नहीं निकलने देते थे, दुर्गा पूजा में दंगा करवाते थे… याद कीजिए कांग्रेस ने देश को लूटा ही नहीं था, नोंचा था। बेइमानी और भ्रष्टाचार के जो कीर्तिमान स्थापित किए थे और वे लोग आज अयोध्या पर आक्षेप लगा रहे हैं? ये स्वीकार्य नहीं। एफआईआर के बाद 8 आरोपियों की हो चुकी हैं गिरफ्तारी आपको बता दें कि एसआईटी की ओर से 23 जून को सरकार को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट में कठोर कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जिसके आधार पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद सभी नामजद आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में बृहस्पतिवार को रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव तथा मनीष कुमार यादव नामक व्यक्तियों और कुछ अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी है।

आउटसोर्स नौकरी का इंतजार बढ़ा, यूपी में अगस्त के बाद ही शुरू होंगी नई भर्तियां

लखनऊ  उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के माध्यम से सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग कार्मिक के रूप में काम करने की राह देख रहे युवाओं को अगस्त के बाद ही कोई मौका मिलेगा आउटसोर्स सेवा निगम का पोर्टल तैयार करने के लिए उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम्स कारपोरेशन लि. (यूपीडेस्को) ने अगस्त तक का लिया है। पोर्टल तैयार हो जाने के बाद ही निगम आउटसोर्स के माध्यम से भर्तियां करेगा। पिछले वर्ष 20 सितंबर को आउटसोर्स सेवा निगम के गठन के लिए शासनादेश जारी किया गया था।जिसमें आउटसोर्सिंग की भर्तियों के लिए चार श्रेणिया बनाई गई हैं। श्रेणी एक के पदों के लिए 40 हजार रुपये, श्रेणी दो के पदों 25 हजार रुपये, श्रेणी तीन के पदों के लिए 22 हजार रुपये और श्रेणी चार के आउटसोर्स कार्मिकों के लिए 20 हजार रुपये मासिक मानदेय निर्धारित किया गया है। कंपनी अधिनियम के तहत आउटसोर्स सेवा निगम का गठन किया जा चुका है। बोर्ड आफ डायरेक्टर्स का चयन किया जा चुका है। इसके साथ ही निगम के प्रबंध निदेशक और कार्यकारी निदेशक की तैनाती भी की जा चुकी है। निगम के लिए पिकप भवन में कार्यालय बनाया जा रहा है। इतना सबकुछ हो जाने के बाद भी पोर्टल नहीं बन पाने की वजह से आउटसोर्स की भर्तियां निगम के माध्यम से नहीं हो पा रही हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक निगम का पोर्टल तैयार करने के लिए यूपीडेस्को ने अगस्त तक का समय लिया है।पोर्टल बन जाने के बाद ही निगम भर्ती की दिशा में आगे बढ़ेगा। सितंंबर से निगम आउटसोर्स के माध्यम से भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने की स्थिति में आ जाएगा।  

बेंगलुरु में “उत्तर प्रदेश ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग 2026” के तहत रोडशो में बिजनेस लीडर्स को संबोधित किया सीएम योगी ने

बेंगलुरु मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत के लिए सेफ्टी, स्टेबिलिटी व स्पीड का थ्री-एस मॉडल बन चुका है। उद्योग के लिए ये तीनों आयाम सबसे महत्वपूर्ण हैं। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर, बेमिसाल कनेक्टिविटी, पारदर्शी प्रशासन और संस्थाओं का बेहतर नेटवर्क नए उत्तर प्रदेश की पहचान है। स्किल्ड टैलेंट, टेक्नोलॉजी और इन्वेस्टमेंट-फ्रेंडली पॉलिसी, कुल मिलाकर एक संपूर्ण इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम आज नए भारत के नए यूपी में मौजूद है। मुख्यमंत्री बुधवार को बेंगलुरु में “उत्तर प्रदेश ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग 2026”  के तहत रोडशो में बिजनेस लीडर्स को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पूरा दिन सभी इन्वेस्टर्स और अलग-अलग सेक्टर के इंडस्ट्री लीडर्स के साथ संवाद करने का अवसर मिला। हमने देखा कि कैसे बेंगलुरु एक गार्डन सिटी से विकसित होकर ग्लोबल टेक्नोलॉजी पावरहाउस बना। बेंगलुरु की ग्रोथ स्टोरी आपने देखी-सुनी है। नए भारत के नए उत्तर प्रदेश की जो कहानी आप यहां सुन रहे हैं, उसे आप उत्तर प्रदेश में जाकर स्वयं महसूस करेंगे, मैं आपको इसके लिए आमंत्रित करने आया हूं। पीएम मोदी के नेतृत्व में बने विकास के नए प्रतिमान सीएम ने कहा कि हमें गर्व है कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने विकास के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और निवेश के लिए सर्वश्रेष्ठ गंतव्य के रूप में स्थापित किया है। और, पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश को इस ग्रोथ स्टोरी में सहभागी बनने का सौभाग्य मिला है। पहले यूपी की छवि बहुत अच्छी नहीं थी। बिगड़ी कानून व्यवस्था, पॉलिसी पैरालिसिस, गवर्नेंस का अभाव और 'बीमारू राज्य' की पहचान थी हमारी। पलायन नियति बन चुका था। कृषि व एमएसएमई से लोगों का नाता टूट चुका था। यूपी में वह सब मिलेगा, जिसकी भारत को अपेक्षा मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में अब वह सब मिलेगा, जिसकी भारत को अपेक्षा है। बेहतर लॉ एंड ऑर्डर, वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर, देश के 60% एक्सप्रेसवे, 16,000 किमी रेल नेटवर्क और 4 लाख किमी सड़क नेटवर्क यूपी के पास है। वाराणसी-हल्दिया राष्ट्रीय जलमार्ग, दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल,  सात शहरों में मेट्रो, ईस्टर्न व वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन, 5 अंतरराष्ट्रीय व 11 घरेलू एयरपोर्ट के रूप में बेमिसाल कनेक्टिविटी यूपी की पहचान है। 5 नए एयरपोर्ट पर सरकार काम कर रही है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गत 15 जून से कमर्शियल फ्लाइट शुरू हो चुकी हैं। स्थिरता व सुरक्षा से बने टॉप-3 अर्थव्यवस्था सीएम ने कहा कि स्थिरता व सुरक्षा का परिणाम है कि यूपी अब बीमारू राज्य से निकलकर देश की टॉप-3 अर्थव्यवस्था बन चुका है। पिछले 6 साल से हम रेवेन्यू सरप्लस स्टेट हैं। 9 साल में अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय तीन गुना हुई। हमारे पास 36 सेक्टरल पॉलिसीज के साथ 75,000 एकड़ का लैंड बैंक उपलब्ध है। एक्सप्रेसवे के किनारे 27 स्थानों पर इंडस्ट्रियल व लॉजिस्टिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। बीडा के रूप में सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल सिटी विकसित हो रहा है। निवेशकों को मिलेगा स्किल्ड मैनपावर निवेशकों को स्किल्ड मैनपावर के प्रति आश्वस्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी हर साल 2 लाख स्टेम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग एंड मैथ) ग्रेजुएट्स तैयार करता है। 2 आईआईटी, एक आईआईएम, तीन स्टेट टेक्निकल यूनिवर्सिटी और तकनीकी-व्यावसायिक शिक्षा का बड़ा नेटवर्क युवाओं को हर क्षेत्र में दक्ष बना रहा है। हम उद्योग की जरूरत के अनुसार इमर्जिंग टेक्नोलॉजी में स्किल्ड मैनपावर तैयार कर रहे हैं। कृषि व उद्योग क्षेत्र में जबरदस्त सफलता कृषि व एमएसएमई क्षेत्र की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 9 साल में हमारी कृषि ग्रोथ रेट 8% से बढ़कर 18% हुई। पांच कृषि विश्वविद्यालयों व 89  किसान विकास केंद्रों के माध्यम से किसानों को ट्रेनिंग व मार्केट से जोड़ा गया है। यूपी के पास देश में सर्वाधिक 86% सिंचित कृषि भूमि है। राज्य में 96 लाख एमएसएमई यूनिट संचालित हैं, जिन्हें ओडीओपी (एक जिला-एक उत्पाद) योजना से जबरदस्त प्रोत्साहन मिला है। इस योजना के माध्यम से हर जिले का एक विशिष्ट उत्पाद ब्रांड बना है। पिछले 9 साल में 18,000 से अधिक बड़े औद्योगिक संस्थान यूपी में स्थापित किए गए। 9 साल पहले राज्य में मात्र 14,000 बड़े कारखाने थे, जिनकी संख्या आज 33,000 से अधिक हो चुकी है। निवेशकों को मिलेगी सुरक्षा, सुविधा व नीतिगत स्थिरता मुख्यमंत्री ने बिजनेस लीडर्स को आश्वस्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार हर निवेशक को सुरक्षा, सिंगल विंडो सुविधा और नीतिगत स्थिरता देगी। यूपी के बारे में आपने जो संभावनाएं सुनी हैं, उन्हें आप अपने निवेश से स्वयं महसूस करेंगे। मुझे विश्वास है कि आप सब यूपी की ग्रोथ स्टोरी में सहभागी बनकर विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाएंगे। मुख्यमंत्री ने रोडशो में उपस्थित सभी इंडस्ट्री लीडर्स व सीईओज का आभार भी प्रकट किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कमिश्नर दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव (उद्योग) आलोक कुमार, प्रमुख सचिव (आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स) आलोक कुमार, यीडा के सीईओ आर.के. सिंह तथा उद्योग जगत के लीडर्स व सीईओज उपस्थित थे।

शिक्षा से रोजगार तक बड़ा फोकस: सीएम योगी के मार्गदर्शन में आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की नई तस्वीर

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए लगातार संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) उन बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है, जिन्होंने अपने माता-पिता अथवा उनमें से किसी एक को खो दिया है। इसके साथ ही बालश्रम, भिक्षावृत्ति एवं वैश्यावृत्ति जैसी परिस्थितियों से मुक्त कराकर पुनर्वासित बच्चों को भी इस योजना के माध्यम से पारिवारिक वातावरण में बेहतर जीवन उपलब्ध कराया जा रहा है। आर्थिक सहायता से बच्चों को मिल रहा बेहतर भविष्य मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत पात्र बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह 2,500 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। वहीं, ऐसे युवक-युवतियां जिन्होंने माता-पिता दोनों अथवा उनमें से किसी एक को खो दिया है, उन्हें 18 से 23 वर्ष की आयु तक स्नातक डिग्री या डिप्लोमा पूरा करने के लिए प्रतिमाह 2,500 रुपए की सहायता दी जा रही है। योगी सरकार की इस पहल से बच्चों की शिक्षा और भविष्य सुरक्षित हो रहा है। वर्तमान समय में प्रदेशभर में कुल 1,03,611 बच्चे इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सहायता किसी संबल से कम नहीं है। योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर करना भी है। बाल संरक्षण को मिल रही नई मजबूती, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर योगी सरकार बाल संरक्षण और पुनर्वास को लेकर विशेष रूप से गंभीर नजर आ रही है। बालश्रम और भिक्षावृत्ति जैसी समस्याओं से मुक्त कराए गए बच्चों को परिवार आधारित वातावरण में पुनर्वासित कर मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनका सामाजिक विकास भी सुनिश्चित हो रहा है। योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो रही है। कई छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सरकार की मंशा है कि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रही है। वहीं बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत आने वाले समस्त पात्र बच्चों की प्राथमिकता के आधार पर पहचान कर उन्हें योजना का लाभ दिया जाए। इसके लिए जिले स्तर पर व्यापक सर्वेक्षण, सत्यापन एवं जन-जागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएं। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि पात्रता रखने वाला कोई भी बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहे। सी. इंदुमति, निदेशक, महिला कल्याण विभाग

तेज रफ्तार पर लगेगी लगाम! IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों संग यूपी परिवहन विभाग ने बनाई नई स्पीड पॉलिसी

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर कई अभियान चला रही है। सड़क हादसों को रोकना योगी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। इसी क्रम में आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञ और उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग मिलकर ‘उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी’ पर काम कर रहे हैं। इसके तहत हाईवे और एक्सप्रेसवे की तरह ही शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर भी वैज्ञानिक आधार पर गति सीमा निर्धारित करना है। इस पहल का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की रोकथाम कर लोगों को सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना है। पॉलिसी का फाइनल ड्राफ्ट जल्द ही प्रदेश सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। हाल में उत्तर प्रदेश के परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन की अध्यक्षता में स्टेट रोड सेफ्टी टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों द्वारा तैयार उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी के ड्राफ्ट पर विस्तृत चर्चा हुई। नीति का उद्देश्य वैज्ञानिक और एविडेंस-बेस्ड अप्रोच के माध्यम से सड़कों पर सुरक्षित गति सुनिश्चित करना और दुर्घटनाओं एवं मृत्यु दर को कम करना है। इसके तहत केवल राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे ही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों की व्यस्त सड़कों, बाजारों, स्कूल-कॉलेजों के आसपास के मार्गों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों के लिए भी उपयुक्त गति सीमा तय की जाएगी। इससे अनियंत्रित गति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी। प्रदेश सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा ड्राफ्ट आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों और परिवहन विभाग ने इस पॉलिसी के लिए प्रदेशभर में विस्तृत अध्ययन किया है। तैयार किए गए पॉलिसी ड्राफ्ट पर चर्चा के दौरान परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिन्हें शामिल करते हुए संशोधन किया जाएगा। इसके बाद परिवहन विभाग उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी को प्रदेश सरकार के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजेगा। मंजूरी मिलने के बाद यह पॉलिसी प्रदेश के विभिन्न विभागों के सहयोग से लागू की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कों की प्रकृति और यातायात घनत्व के अनुरूप गति सीमा तय होने से दुर्घटनाओं में कमी आएगी और लोगों की जान बचाने में मदद मिलेगी। वहीं विभाग सेफ सिस्टम अप्रोच के तहत सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित गति, सुरक्षित सड़क यात्री, सुरक्षित वाहन और पोस्ट-क्रैश केयर पर भी ध्यान दे रहा है। साथ ही सुरक्षित गति ऑडिट, प्रवर्तन व्यवस्था, व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, वाहन फिटनेस निरीक्षण, जनजागरूकता अभियान के जरिए भी सुरक्षित यातायात सुनिश्चित कर रहा है।