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सरकारी कार्यालयों, सामुदायिक सभागारों, ग्राम पंचायत भवनों और ग्राम सभा स्थलों पर लगेंगे पोस्टर

विकसित भारत की संकल्पना साकार करने के लिए सीएम योगी ने अफसरों को दिए निर्देश लखनऊ उत्तर प्रदेश में रोजगार को लेकर योगी सरकार की सोच जमीन पर उतरती दिख रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत “विकसित भारत जी राम जी” योजना के जरिए गांव-गांव रोजगार, प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर देने की ठोस पहल शुरू हो गई है। सरकार का लक्ष्य है कि हर परिवार तक काम की गारंटी पहुंचे और रोजगार की जानकारी गांव-गांव लोगों को चौपाल लगाकर दी जाए। सीएम योगी ने अफसरों को निर्देश दिए हैं कि विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। इस दिशा में प्रदेश भर में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत सरकारी कार्यालयों, पंचायत भवनों, सामुदायिक केंद्रों और ग्राम सभाओं में पोस्टर, बैनर और वाल पेंटिंग के जरिए लोगों को योजनाओं से जोड़ा जाएगा। साथ ही चौपालों पर संवाद के जरिए सीधे आम लोगों को रोजगार संबंधित योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाया जाएगा सीधा लाभ इस अभियान के तहत रोजगार एवं आजीविका गारंटी अधिनियम (VB-G RAM G) को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इसका मकसद सिर्फ योजना बनाना नहीं, बल्कि हर पात्र व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचाना है। इसके तहत चौपाल पर चर्चा के साथ घर-घर योजना की जानकारी दी जाएगी। गांव-गांव लगने वाली इन चौपालों में लोगों को रोजगार की योजनाओं, काम के अवसरों और अधिकारों के बारे में बताया जाएगा। अपनी जरूरतें और सुझाव सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे पोस्टर, बैनर और वाल पेंटिंग से योजना का प्रचार किया जाएगा। इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों, पंचायत भवनों, स्कूलों, सामुदायिक हॉल और सार्वजनिक स्थलों पर प्रचार सामग्री लगाई जाएगी। जिससे कोई भी व्यक्ति इसकी जानकारी से अछूता न रहने पाए। रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भी संदेश से संबंधित लोगो लगाए जाएंगे। सभी तक जानकारी पहुंचाने के लिए सार्वजनिक स्थलों पर प्रचार प्रसार का निर्णय लिया गया है। योगी सरकार का प्रयास है कि रोजगार से जुड़े फैसलों में आमजन की भागीदारी रहे। चौपालों के माध्यम से लोग अपनी जरूरतें और सुझाव सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में साबित होगा बड़ा कदम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अधिकारियों को स्पष्ट संदेश है कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब गांव मजबूत होंगे और हर हाथ को काम मिलेगा। इसी सोच के साथ प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि हर जरूरतमंद तक पहुंचें। यह अभियान न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाएगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देकर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।

गंगा, यमुना, गोमती, वरुणा और पांडु नदी का होगा कायाकल्प, डेढ़ सौ किलोमीटर सर्वे का काम पूरा

लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और कानपुर में किया गया व्यापक सर्वे नदियों में जीरो डिस्चार्ज की बनाई जा रही कार्ययोजना लखनऊ उत्तर प्रदेश में नदियों के संरक्षण को लेकर चल रही योगी सरकार की पहल अब राष्ट्रीय मॉडल बन चुकी है। पहली बार किसी राज्य ने नदी संरक्षण में हाई-टेक रिवर ड्रोन सर्वे सिस्टम का इतना व्यापक उपयोग किया है। इसका असर इतना प्रभावी रहा कि केंद्र सरकार ने यूपी के मॉडल को पूरे देश में लागू करने का फैसला किया है। गंगा, यमुना, गोमती, वरुणा और पांडु नदी के लगभग 150 किलोमीटर क्षेत्र का ड्रोन सर्वे पूरा कर राज्य स्वच्छ गंगा मिशन ने नदी पुनरुद्धार के प्रयासों में नई ऊर्जा भर दी है। लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और कानपुर जैसे प्रमुख शहरों में किए गए सर्वे ने नदियों की असल स्थिति, प्रदूषण स्रोतों और नालों के गिरने वाले बिंदुओं की स्पष्ट पहचान करना अब आसान कर दिया है। इन प्रयासों का पहला सबसे बड़ा लाभ कानपुर जिले को मिलने जा रहा है। ड्रोन सर्वे के बाद नदियों में जीरो डिस्चार्ज की कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसके क्रियान्वयन के बाद नदियों में जीरो डिस्चार्ज का दर्जा मिल जाएगा। गोमती नदी के कायाकल्प को मिलेगी नई दिशा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता हमेशा से यह रही है कि राज्य की नदियां पूरी तरह स्वच्छ बनें और स्थानीय लोगों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिले। इसी सोच के अनुरूप अब नालों की पहचान और प्रदूषण नियंत्रण आसान हो गया है। लखनऊ नगर के लिए ड्रोन सर्वे आधारित संपूर्ण पुनरुद्धार कार्य योजना तैयार की जा रही है, जिससे गोमती नदी के कायाकल्प को नई दिशा मिलेगी। नदियों के कायाकल्प के साथ गांव-गांव में स्वच्छता राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिन्दर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नदियों के संरक्षण को लेकर अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि न केवल नदियों का कायाकल्प हो रहा है, बल्कि इन प्रयासों से गांव-गांव में स्वच्छता, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। योगी सरकार की जनकल्याणकारी नीति और तकनीक के सशक्त उपयोग का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज नदी संरक्षण में देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। इसके साथ ही पूरा देश उत्तर प्रदेश के मॉडल को अपनाने जा रहा है।

देश के अन्य राज्यों को पीछे छोड़कर उत्तर प्रदेश विकास के क्षेत्र में बना अग्रणी राज्य

ODOP के क्षेत्र में 3 करोड़ से अधिक व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त हुआ ODOP योजना के तहत 5 लाख से अधिक युवाओं को बैंकों से जोड़ा गया यूपी में लगभग 96 लाख MSME इकाइयाँ हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं GST रजिस्ट्रेशन वाले हर व्यापारी को ₹5 लाख का सुरक्षा बीमा कवर दिया जा रहा है उत्तर प्रदेश में मनरेगा के तहत महिलाओं की भागीदारी 42% तक पहुंची  'नमो ड्रोन दीदी योजना' की पहल से महिलाओं का सशक्तीकरण    लखनऊ उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले साढ़े 8 वर्ष में तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए विकास की नई इबारत लिखी है। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की गणना पिछड़े राज्यों में होती थी। युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करने के लिए मजबूर थे। पिछली सरकारों में माफियाराज, भ्रष्टाचार, परिवारवाद और अराजकता का बोलबाला था। सीएम योगी ने अपने कुशल नेतृत्व में लॉ एंड ऑर्डर की व्यवस्था स्थापित की और राज्य में निवेश और उद्यमियों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया। उत्तर प्रदेश आज वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनने की राह पर है।   उत्तर प्रदेश विकास के क्षेत्र में बना अग्रणी राज्य  उत्तर प्रदेश, भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है। लेकिन अब ये सिर्फ संख्या में नहीं बल्कि विकास की दिशा में भी अगुआ बनने की राह पर है। पिछले साढ़े 8 वर्षों में राज्य ने तीन बड़े क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। पहला, एक जिला, एक उत्पाद(ODOP) के तहत युवाओं को रोजगार देना। दूसरा, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) का तेजी से विकास। तीसरा, कृषि-टेक्नोलॉजी-महिलाओं पर विशेष फोकस। इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य को “परंपरा से प्रगति” की राह पर चलने वाला मॉडल बनाया है। ओडीओपी से युवाओं को रोजगार ODOP कार्यक्रम 2018 में लॉन्च हुआ था, जिसका उद्देश्य प्रत्येक जिले की विशिष्ट पारंपरिक उत्पाद हस्तशिल्प, हस्तनिर्मित वस्तुएँ, कृषि-उत्पाद को उचित मूल्य दिलाकर बाजार तक ले जाना था। ODOP सेक्टर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। ODOP योजना के तहत 5 लाख से अधिक युवाओं को बैंकों से जोड़ा गया है जो स्वरोजगार की गारंटी देता है। ODOP योजना की सफलता के कारण उत्तर प्रदेश निर्यात का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। 2016-17 में राज्य का निर्यात लगभग ₹80,000 करोड़ था, जो बढ़कर ₹1.56 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। ODOP उत्पादों का हिस्सा राज्य के निर्यात का करीब 70% तक पहुंच चुका है। ये आंकड़े केवल संख्या नहीं, बल्कि सीएम योगी की मजबूत इच्छाशक्ति का संकेत हैं। इसने युवाओं को रोजगार के  लिए पलायन की सोच से बाहर निकाला है। आज गांव-शहर की इकाइया, मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और डिजिटली जुड़ी मार्केटिंग मॉडल युवाओं को स्वरोजगार और नए रोजगार के अवसर दे रही हैं। एमएसएमई-इकोसिस्टम से लघु उद्योगों का विकास  उत्तर प्रदेश में लघु एवं मध्यम उद्योग ने विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य में लगभग 96 लाख MSME इकाइयाँ हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं। सूक्ष्म इकाइयों से लेकर छोटी विनिर्माण इकाइयां जिसमें रेल-मेनेटल, कपड़ा, हैंडीक्राफ्ट, खाद्य-प्रोसेसिंग हैं, रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार हर 1 करोड़ निवेश से लगभग 8 रोजगार उत्पन्न हो सकते हैं। इस प्रकार लघु उद्योगों ने स्थानीय स्तर पर विकास की नींव रखी है। जहा बड़े उद्योग दूर-दराज होते हैं, वहीं एमएसएमई ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता को गति प्रदान की है।  सरकार प्रदेश के 11 जिलों में 15 नए MSME औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित कर रही है, जो छोटे और मझोले उद्योगों को भूमि और आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करेंगे। MSME उद्यमियों के लिए 1,000 दिनों तक किसी भी प्रकार की NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) की आवश्यकता नहीं है। वे अपना आवेदन जमा करके उत्पादन शुरू कर सकते हैं, जिससे उद्योग लगाना आसान हुआ है। सुरक्षा और खरीद प्रोत्साहन के तहत राज्य सरकार के विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) द्वारा राज्य के MSME से 25% खरीद अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा, GST रजिस्ट्रेशन वाले हर व्यापारी को ₹5 लाख का सुरक्षा बीमा कवर भी दिया गया है। कृषि-तकनीक ने अर्थव्यवस्था को दी नई दिशा  उत्तर प्रदेश में कृषि और टेक्नोलॉजी ने विकास को बुलेट ट्रेन की रफ्तार से आगे बढ़ाया है। कृषि-उत्पादन में बढ़ावा देने के लिए फूड-प्रोसेसिंग क्लस्टर, फल-फूल निर्यात मंडल, कोल्ड-चेन इंफ्रा जैसी परियोजनाएँ चल रही हैं। मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेश में डिजिटल एग्रीकल्चर इकोसिस्टम विकसित करने हेतु नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज और बाजार तक सीधी पहुंच प्रदान करना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है। सरकार कृषि में शोध और विज्ञान के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। यह प्रयास है कि किसानों का जुड़ाव आधुनिक तकनीकों और अनुसंधान से बढ़े, जिससे वर्तमान कृषि भूमि से तीन गुना तक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। उत्तर प्रदेश के विकास में महिलाओं की अहम भागीदारी महिलाओं की भागीदारी ने भी राज्य की अर्थव्यवस्था को नया आयाम दिया है। 2025 में मनरेगा के तहत महिलाओं की भागीदारी 42% तक पहुंच गई है। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सामाजिक परिवर्तन का संकेत है। टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से महिलाओं को ई-मोबाइल तकनीक, स्मार्ट कृषि जानकारी, डिजिटल मार्केटिंग जैसे उपकरण मिले हैं, जिससे ग्रामीण महिला उद्यमिता को मदद मिली है। 

सत्ता बरकरार, संदेश भी साफ: CM योगी बोले— बिहार-यूपी का अटूट बंधन

सोनभद्र  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश और बिहार के संबंध की तुलना भगवान राम और देवी सीता के पवित्र संबंध से करते हुए शनिवार को कहा कि दोनों राज्यों का रिश्ता भी ‘‘अटूट और सुदृढ़'' है। सोनभद्र में आयोजित ‘जनजातीय गौरव दिवस' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने 548 करोड़ रुपये की 432 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ऐतिहासिक जीत पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए योगी ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश और बिहार साझा संस्कृति, साझा विरासत और साझा संकल्प के प्रतीक हैं। प्रभु राम और माता जानकी के पवित्र संबंध की तरह दोनों राज्यों का रिश्ता भी अटूट और सुदृढ़ है।''  उन्होंने कहा, ‘‘वहां की जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेकर यह संदेश दिया है कि विकास, सुशासन और स्थिरता के लिए डबल इंजन की सरकार पर विश्वास लगातार बढ़ रहा है तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रहित व विकास की नीतियों को जनता का सशक्त समर्थन मिल रहा है।'' मुख्यमंत्री ने सोनभद्र की धरती को उत्तर प्रदेश की ऊर्जा राजधानी, प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध संसाधनों के अनोखे संगम की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित जनजातीय बहनों–भाइयों की भागीदारी बदलाव की आकांक्षा और विश्वास का प्रतीक है।  सीएम योगी की टिप्पणी इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि यह बिहार में राजग द्वारा महागठबंधन को हराकर सत्ता बरकरार रखने के एक दिन बाद आई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, योगी आदित्यनाथ ने 10 दिन के चुनाव अभियान में 30 रैलियां और एक रोड शो किया। उनका अभियान 16 अक्टूबर को शुरू हुआ था। अपने भाषणों में योगी ने उत्तर प्रदेश और बिहार में राजग सरकारों के विकास कार्यों को प्रमुखता से रखा, जबकि कांग्रेस-राजद गठबंधन पर ‘‘जंगल राज'', अपराध और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर हमला बोला।   

गजब दुस्साहस! मंत्री के काफिले को रोकने निकले तीन युवक, पुलिस ने एक को दबोचा

सोनभद्र सोनभद्र में गुरुवार की रात गजब दुस्साहस देखने को मिला है। योगी सरकार में समाज कल्याण राज्यमंत्री संजीव गोड़ के काफिले को ओवरटेकर कर रोकने की कोशिश की गई। स्कॉर्ट में तैनात जवानों ने टोका तो उनसे विवाद किया गया। इसके बाद मंत्री से भी विवाद कर लिया गया। मामले की जानकारी मिलने पर पहुंची पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। दो अन्य फरार हो गए हैं। हिरासत में लिए गए व्यक्ति के पूछताछ हो रही है। फिलहाल पुलिस या मंत्री यह नहीं बता पा रहे कि इस तरह से ओवरटेक कर गाड़ी क्यों रोकी गई और उन लोगों की मंशा क्या थी। मंत्री के साथ काफिले में मौजूद जिला पंचायत सदस्य जुगैल के पति संजीव तिवारी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर चोपन पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।   बताया जाता है कि राज्य मंत्री सजीव गोड़ गुरुवार की शाम राबर्ट्सगंज से डाला स्थित अपने आवास जा रहे थे। उनके साथ जिला पंचायत सदस्य पति जुगैल संजीव तिवारी भी गाड़ी में थे। लोढ़ी टोल प्लाजा के आगे बढ़े तो उनके काफिले के पीछे-पीछे एक वाहन भी चलता दिखाई दिया। सलखन के पास पहुंचने पर वाहन में सवार लोगों ने उनके काफिले को ओवरटेक करने की कोशिश की। स्कॉर्ट के लोगों ने इस पर टोका तो चलती गाड़ी से ही विवाद कर लिया। इसके बाद तेजी मंत्री के काफिले को ओवरटेक किया और सोन नदी पुल पर काफिले के आगे आकर खड़े हो गए। मंत्री की गाड़ी पहुंची तो वह लोग अपने वाहन से उतर कर काफिले के पास आ गए और कहासुनी करने लगे। इस पर पुलिस को मामले की जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही चोपन थाने के प्रभारी निरीक्षक कुमुद शेखर सिंह मौके पर पहुंच गए। पुलिस के पहुंचने पर दो लोग पैदल ही फरार हो गए। एक व्यक्ति को हिरासत में लेते हुए उनकी गाड़ी भी कब्जे में ले ली गई। चोपन थाने के प्रभारी निरीक्षक कुमुद शेखर सिंह ने बताया कि जिला पंचायत सदस्य पति जुगैल संजीव तिवारी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। पूछताछ जारी है। हिरासत में लिए गए व्यक्ति की पहचान अंकित मिश्रा निवासी दुद्धी के रूप में हुई है। फरार लोग शुभम सोनी और पंकज अग्रहरि हैं। वहीं राज्यमंत्री संजीव गोड़ का कहना है कि उनका किसी से कोई विवाद नहीं हैं। वे सभी से मिलते है और उनकी समस्याओं को सुनते हैं। कार सवार लोगों की क्या मंशा थी यह तो पुलिस की जांच के बाद ही पता चल पाएगा।  

गायों संग गोवर्धन पूजा: सीएम योगी ने गोशाला में की सेवा, कराया विशेष पूजन

गोरखपुर  सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर की गोशाला में गोवर्धन पूजा की। उन्होंने गायों की सेवा की और उन्हें गुड़-रोटी खिलाई। गोवर्धन पूजा के मौके पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व है। यह पूजा हमारी सांस्कृतिक परंपरा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और गौसंवर्धन की भावना का प्रतीक है। बुधवार की सुबह गोरखनाथ मंदिर स्थित गोशाला में पहुंचे सीएम योगी ने गायों की विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्धि का आधार सदैव भारतीय गोवंश रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से गोवर्धन योजना के तहत गाय के गोबर से बायो-कम्पोस्ट, कंप्रेस्ड बायोगैस और एथेनॉल उत्पादन के अभिनव कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। यह न केवल गौसंवर्धन का माध्यम हैं बल्कि ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भी नई दिशा दे रहे हैं। सीएम योगी ने बताया कि प्रदेश में लगभग 16 लाख गोवंश को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। इसके लिए सरकार तीन स्तरों पर योजनाएं संचालित कर रही है निराश्रित गोस्थल योजना, सहभागिता योजना और कुपोषित परिवार सहायता योजना। निराश्रित गोस्थल योजना के अंतर्गत प्रति गाय 1500 रु प्रतिमाह की सहायता दी जाती है। वहीं, सहभागिता योजना में ऐसे किसानों को चार गायें उपलब्ध कराई जाती हैं जो गौसंवर्धन से जुड़ना चाहते हैं, उन्हें सरकार 6000 रुपए की सहायता राशि भी प्रदान करती है। इसके अलावा कुपोषित माताओं और बच्चों को भी गाय उपलब्ध कराई जाती है, साथ ही 1500 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है ताकि वे गाय के दूध से पोषण प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं से न केवल गोवंश संरक्षण को बढ़ावा मिला है, बल्कि कुपोषण से सुपोषण की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। सीएम योगी ने कहा कि गोवर्धन योजना के तहत बायो गैस और एथेनॉल उत्पादन से गोबर का भी मूल्य किसानों को मिल रहा है। इससे प्रदेश को नेट जीरो कार्बन एमिशन के लक्ष्य की ओर बढ़ाने और पेट्रोल-डीजल पर खर्च होने वाले धन की बचत में मदद मिल रही है।  

रामलला के अपमान पर CM योगी ने किया हमला, सपा पर जमकर बरसे अयोध्या में

अयोध्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अयोध्या में समाजवादी पार्टी (सपा) पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने न केवल रामलला को कैद करके रखा, बल्कि रामभक्तों पर गोली चलवाई और अयोध्या की पहचान मिटाने की कोशिश की। सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम को 500 सालों तक अपमान सहना पड़ा, लेकिन सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं। सीएम योगी ने कहा, "सपा ने अयोध्या के साथ अन्याय किया। राम मंदिर निर्माण में रोड़े अटकाए गए और रामभक्तों पर गोलीबारी की गई। यह वही लोग हैं जिन्होंने हमारी आस्था को खंडित करने की कोशिश की। अयोध्या की पहचान को मिटाने का प्रयास किया गया, लेकिन सत्य की हमेशा जीत होती है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि रामलला को 500 साल तक तिरस्कार और अपमान का सामना करना पड़ा, लेकिन अब अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार है, जो देश की आस्था और संस्कृति का प्रतीक है। सीएम योगी ने अपने संबोधन में सपा की पूर्ववर्ती सरकारों पर अयोध्या के विकास को बाधित करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "जब सपा की सरकार थी, तब अयोध्या की उपेक्षा की गई। मंदिर निर्माण में बाधाएं डाली गईं, लेकिन आज अयोध्या विश्व पटल पर अपनी पहचान बना रही है। यह न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का केंद्र भी है।"  

गरीब परिवारों का घर का सपना हुआ साकार, सीएम योगी ने गोरखपुर में दीपावली से पहले दिया खास तोहफा

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपावली से पहले गोरखपुर में गरीबों को अनमोल उपहार सौंपा। पाम पैराडाइज, देवरिया बाईपास स्थित हाई-राइज बिल्डिंग में 160 परिवारों को ईडब्ल्यूएस/एलआईजी फ्लैट्स की चाबियां भेंट कीं। इनमें 80 फ्लैट्स आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और 80 निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लिए हैं। साथ ही, गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की 118 करोड़ रुपए की 50 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। कार्यक्रम में सीएम ने पौधारोपण भी किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि हर परिवार की एक तमन्ना होती है कि उसका अपना एक घर हो, सर ढकने को छत मिले। आज 160 परिवारों को यह दीपावली का शुभ उपहार मिल रहा है। कार्तिक मास के शुभ मुहूर्त में यह उपलब्धि और भी खास है।  उन्होंने कहा कि एक परिवार में औसतन 5-6 सदस्य होने पर करीब 700-800 लोग सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। यह किसी भी व्यक्ति के लिए केवल आवास ही नहीं, बल्कि जीवन की महत्वपूर्ण घटना होती है। सीएम योगी ने कहा कि आवास वितरण पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ। जीडीए की हाउसिंग स्कीम में 40 विस्थापित परिवारों को प्राथमिकता दी गई। शेष 120 परिवारों का चयन लॉटरी से हुआ। 9,000 से अधिक आवेदनों में से ये सौभाग्यशाली हैं। विकास प्राधिकरण को चाहिए कि बाकी जरूरतमंदों के लिए आवास प्रक्रिया तेज करे। ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स 35 वर्ग मीटर के हैं, जिनकी बाजार कीमत 13-15 लाख रुपये है, लेकिन सब्सिडी से मात्र 5.40 लाख रुपये में उपलब्ध हैं। एलआईजी फ्लैट्स 41 वर्ग मीटर के हैं, बाजार मूल्य 19-20 लाख के मुकाबले 10.80 लाख रुपये में। उन्होंने कहा कि जब सरकार और जनप्रतिनिधि ईमानदार होंगे तो गरीबों को अपना घर मिलने में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकेशन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस आवास के पास रामगढ़ ताल, जू और खोराबार के बेहतरीन स्थान हैं। यहीं पर कुछ दूरी पर सांसद रवि किशन का आवास भी है। हाई-राइज बिल्डिंग में सभी आधुनिक सुविधाएं हैं। उन्होंने कहा कि विकास प्राधिकरणों को चाहिए कि हाई-राइज़ बिल्डिंग के रखरखाव के लिए आवासीय समितियां गठित हों, जिससे लिफ्ट और अन्य व्यवस्थाओं का नियमित मेंटेनेंस हो सके। उन्होंने पूर्व योजनाओं गोरख एंक्लेव, राप्ती नगर और पत्रकारपुरम का भी उल्लेख किया। हर तबके-गरीब, स्ट्रीट वेंडर, श्रमिक, पत्रकार, अधिवक्ता, चिकित्सक, शिक्षक और व्यापारियों के लिए भी समय-समय पर विशेष योजनाएं लाई जाएंगी। सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी के 11 वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर 4 करोड़ गरीबों को फ्री आवास उपलब्ध कराए गए हैं। उत्तर प्रदेश में 60 लाख से अधिक गरीबों को आवास मिल चुके हैं। अच्छी नियत से अच्छे कार्य होते हैं। जनता अच्छी सरकार चुनती है, तो विकास गरीब तक पहुंचता है। सीएम योगी ने कहा कि खोराबार स्कीम जल्द आगे बढ़ेगी। सीएम योगी ने कहा कि पिछले वर्ष प्रयागराज में माफियाओं से कब्जाई गई जमीन पर गरीबों के लिए 76 फ्लैट बनाए गए थे। इसी तरह लखनऊ में भी कब्जाई जमीन को मुक्त कर गरीबों को आवास दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में माफियाओं की हवेलियों की जगह गरीबों के लिए मकान खड़े होंगे।

ग्रामीण इलाकों से मिल रहे सबसे ज्यादा फिडबैक, अबतक 9.5 लाख ग्रामीणों ने दिये सुझाव

शहरी क्षेत्रों से आए लगभग 3 लाख सुझाव, शिक्षा, कृषि और विकास पर जनता दे रही खुलकर अपने सुझाव फीडबैक देने के मामले में महाराजगंज, संभल और सोनभद्र सबसे आगे, इटावा और फिरोजाबाद से सबसे कम फीडबैक लखनऊ उत्तर प्रदेश को 2047 तक विकसित राज्य बनाने की दिशा में जारी योगी सरकार का 'समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047 अभियान' नई ऊंचाइयां छू रहा है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में करीब 300 नोडल अधिकारी और प्रबुद्धजन विभिन्न वर्गों के लोगों से संवाद कर न सिर्फ बीते 8 वर्षों की उपलब्धियां साझा कर रहे हैं, बल्कि जनता से भविष्य की योजनाओं पर सुझाव भी ले रहे हैं। अभियान में रविवार तक करीब 12.5 लाख सुझाव प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से लगभग 9.5 लाख ग्रामीण क्षेत्रों से और करीब 3 लाख शहरी क्षेत्रों से आए हैं। युवा, महिला, किसान, छात्र और वरिष्ठ नागरिक सभी वर्ग इसमें उत्साहपूर्वक भागीदारी कर रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा शिक्षा और कृषि पर आम जनमानस की राय एवं सुझाव प्राप्त करने के लिए विकसित पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक कुल 12.5 लाख फीडबैक प्राप्त हुए हैं। फीडबैक में सबसे ज्यादा राय शिक्षा क्षेत्र पर आई। लोग चाहते हैं कि सरकारी स्कूलों को और मज़बूत किया जाए और शिक्षा को डिजिटल तरीके से आगे बढ़ाया जाए। कृषि क्षेत्र पर भी बड़ी संख्या में सुझाव मिले हैं, जिसमें किसानों को और सुविधाएं देने और बंद पड़ी चीनी मिलों को चालू करने जैसी बातें प्रमुख रहीं। फीडबैक देने में महाराजगंज, संभल, सोनभद्र, कानपुर देहात और गोरखपुर सबसे आगे हैं। वहीं इटावा, फिरोजाबाद, ललितपुर, महोबा और संतकबीर नगर में सबसे कम भागीदारी रही है। जनता के सुझाव महाराजगंज के नागरिकों ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाने और बंद पड़ी गन्ना मिलों को फिर से चालू कराने की मांग की है। गाजियाबाद की सुषमा ने बच्चों की पढ़ाई को रोचक और खेल-कौशल आधारित बनाने का सुझाव दिया, ताकि मानसिक और शारीरिक विकास साथ-साथ हो सके। लखनऊ के रणजीत पटेल ने 112 पुलिस की तर्ज पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मोबाइल वैन शुरू करने की मांग रखी। उन्होंने शिक्षा में सरकारी स्कूलों को बढ़ावा देने और बेरोजगारी दूर करने के लिए सेवानिवृत्ति आयु घटाने का सुझाव दिया। मऊ की वंदना सिंह ने कॉलोनियों में सड़क और नाली की समुचित व्यवस्था की आवश्यकता बताई और निर्माण कार्य में गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। सुझाव के आधार पर सरकार तैयार करेगी विजन डॉक्युमेंट सरकार इन सुझावों का विश्लेषण कर 'विकसित उत्तर प्रदेश 2047' का विजन डॉक्युमेंट तैयार करेगी। इसमें आम जनता की राय सीधे तौर पर शामिल होगी, ताकि विकास योजनाएं ज़मीनी जरूरतों से जुड़कर आगे बढ़ सकें। सर्वाधिक अच्छे सुझावों को जनपद और प्रदेश स्तर पर पुरस्कृत भी किया जाएगा। 

मिशन शक्ति 5.0 : नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन सुनिश्चित करने के साथ ही समाज में स्थायी बदलाव लाने का हो रहा ठोस प्रयास

नवरात्रि के अवसर पर सार्वजनिक स्थलों और बाजारों में भी चलाए जा रहे जागरूकता अभियान विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए अबतक 3 लाख से अधिक लोगों तक बनाई पहुंच योगी सरकार ने बदली समाज की मानसिकता, महिला और बच्चों की सुरक्षा सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी जनसंख्या अनुपात, जन्म/मृत्यु दर, लिंगानुपात, स्कूल ड्रॉपआउट, बाल विवाह पर लोगों को किया जा रहा जागरूक लैंगिक शोषण, संस्थागत प्रसव, साक्षरता दर और महिलाओं व बच्चों के प्रति होने वाली हिंसा पर हो रही चर्चा लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 22 सितम्बर 2025 से शुरू किया गया “मिशन शक्ति 5.0” अब सिर्फ एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में जनआंदोलन का रूप ले चुका है। यह 90 दिनों का विशेष अभियान महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन सुनिश्चित करने के साथ ही समाज में स्थायी बदलाव लाने के लिए ठोस प्रयास कर रहा है। उत्तर प्रदेश में मिशन शक्ति 5.0 न सिर्फ महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा और सम्मान को मजबूत कर रहा है, बल्कि समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत कर रहा है। इसे अब एक पूर्ण जनआंदोलन कहा जा सकता है, जिसने हर वर्ग के लोगों को अभियान का हिस्सा बना लिया है। समाज की सोच और व्यवहार में बदलाव का संदेश भी दे रहा मिशन शक्ति- 5.0 अभियान अभियान की खासियत यह है कि यह केवल योजनाओं की श्रृंखला नहीं बल्कि समाज की सोच और व्यवहार में बदलाव का संदेश भी है। इसके तहत साइक्लोथॉन, घर-घर जागरूकता अभियान और सोशल मीडिया कैम्पेन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें लोगों की सहभागिता अभूतपूर्व रही है। जिलाधिकारी स्तर से लेकर ग्राम प्रधान तक के नेतृत्व में आयोजित ये गतिविधियाँ यह स्पष्ट कर रही हैं कि महिला और बच्चों की सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी है। साइक्लोथॉन में बड़ी संख्या में शामिल हो रहे महिलाएं, बच्चियां और युवा सीएम योगी के निर्देश पर प्रदेश भर में आयोजित साइक्लोथॉन में बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चियां और युवा शामिल हुए। इसमें महिलाओं और बच्चों से जुड़े महत्वपूर्ण संकेतकों जैसे जनसंख्या अनुपात, जन्म/मृत्यु दर, लिंगानुपात, स्कूल ड्रॉपआउट, बाल विवाह, लैंगिक शोषण, संस्थागत प्रसव, साक्षरता दर और महिलाओं व बच्चों के प्रति होने वाली हिंसा पर चर्चा की जा रही है। इन संकेतकों को आम जन के बीच लाकर सुधार की दिशा में कदम उठाने का संदेश भी दिया जा रहा है।   नवरात्रि के अवसर पर सार्वजनिक स्थलों और बाजारों में भी चलाए जा रहे जागरूकता अभियान नवरात्रि के अवसर पर सार्वजनिक स्थलों और बाजारों में मोबाइल वैन, कैनोपी और स्टॉल लगाकर जागरूकता फैलायी जा रही है। इन स्थलों पर लोगों को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेंटर, 181 महिला हेल्पलाइन, पति की मृत्युपरांत निराश्रित पेंशन योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। इसका उद्देश्य केवल योजनाओं के प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं, बल्कि आमजन को यह समझाना था कि सरकारी योजनाओं की सफलता समाज की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर है। विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए अबतक 3 लाख से अधिक लोगों तक बनाई पहुंच बीते 22 सितम्बर से अब तक अभियान के तहत चलाए गए विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से 3 लाख से अधिक लोगों तक पहुँच सुनिश्चित की जा चुकी है। इसमें बड़ी संख्या में बच्चियां, महिलाएं और बुजुर्ग महिलाएं शामिल हुई हैं। समाज की सक्रिय भागीदारी ने मिशन शक्ति 5.0 को केवल सरकारी आयोजन से आगे बढ़ाकर सामाजिक जनआंदोलन बना दिया है। अभियान का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है- नारी और नौनिहाल सुरक्षित, तो प्रदेश की प्रगति निश्चित। सीएम योगी के नेतृत्व में मिशन शक्ति 5.0 ने अब तक यह साबित करने में सफल रहा है कि जब समाज स्वयं सक्रिय होता है और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भाग लेता है, तभी बदलाव वास्तविक और स्थायी बन सकता है। महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव लीना जौहरी ने कहा कि मिशन शक्ति 5.0 केवल कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं बल्कि सोच और व्यवहार में स्थायी बदलाव का प्रयास है। हमारा लक्ष्य है कि हर महिला और बच्चा बिना भय और भेदभाव के, पूरी गरिमा के साथ जीवन जी सके और अपनी बात समाज और सरकार तक पहुँचा सके। महिला कल्याण निदेशक संदीप कौर ने बताया कि विभाग ने मिशन शक्ति 5.0 की गतिविधियों को इस तरह संयोजित किया है कि यह केंद्र और ब्लॉक स्तर से लेकर ग्राम स्तर तक सभी गतिविधियों को योजना बद्ध रूप से जनसामान्य तक पहुँचाने वाला अभियान बने। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जागरूकता की यह धारा हर घर तक पहुँचे और लाभार्थियों की सरकारी योजनाओं तक पहुँच सुनिश्चित हो।