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छत्तीसगढ़ में पुलिस व्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव, दुर्ग और बिलासपुर में कमिश्नरेट सिस्टम की तैयारी

दुर्ग. छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा संकेत दिया है. राजधानी रायपुर के बाद अब बिलासपुर और दुर्ग में भी पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने की तैयारी है. राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने भिलाई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन शहरों में बढ़ती आबादी, शहरी विस्तार और अपराध नियंत्रण की जरूरत होगी, वहां चरणबद्ध तरीके से यह व्यवस्था लागू की जाएगी. सरकार इसे शहरी पुलिसिंग को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम मान रही है. गृहमंत्री ने कहा कि कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने से पुलिस को अधिक प्रशासनिक और कार्यकारी अधिकार मिलेंगे. इससे अपराध पर त्वरित नियंत्रण, निर्णय प्रक्रिया में तेजी और जवाबदेही तय करने में सुविधा होगी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार इस मॉडल को जरूरत के आधार पर अन्य शहरों में भी विस्तार दे सकती है. हालांकि लागू करने की समयसीमा पर उन्होंने कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की, लेकिन इसे प्राथमिकता में शामिल बताया. कमिश्नरेट प्रणाली क्या है कमिश्नरेट प्रणाली में पुलिस आयुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कई कार्यकारी अधिकार मिलते हैं. वर्तमान पारंपरिक व्यवस्था में ये अधिकार जिला दंडाधिकारी के पास होते हैं. नई प्रणाली में मजिस्ट्रियल शक्तियां पुलिस आयुक्त को हस्तांतरित हो जाती हैं, जिससे धारा 144 लागू करने, लाइसेंस जारी करने और भीड़ नियंत्रण जैसे फैसले तेजी से लिए जा सकते हैं. बड़े और तेजी से विकसित हो रहे शहरों में इसे प्रभावी मॉडल माना जाता है. रायपुर के बाद दो बड़े शहर राजधानी रायपुर में पहले ही कमिश्नरेट प्रणाली लागू की जा चुकी है. अब बिलासपुर और दुर्ग को भी इसमें शामिल करने की घोषणा की गई है. बिलासपुर न्यायिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है, जबकि दुर्ग और भिलाई औद्योगिक क्षेत्र के रूप में तेजी से विकसित हो रहे हैं. इन शहरों में बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण को देख सरकार ने यह निर्णय लिया है. पुलिस को मिलेंगे अतिरिक्त अधिकार गृहमंत्री के मुताबिक इस प्रणाली से पुलिस को कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में स्वतंत्र और त्वरित निर्णय लेने का अधिकार मिलेगा. अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और संगठित अपराध पर निगरानी में मजबूती आएगी. आम नागरिकों को भी शिकायतों के समाधान में तेजी का लाभ मिलेगा. इससे प्रशासनिक समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है.

रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम की संभावना, जानिए कैसे होगा कानून व्यवस्था का बेहतर नियंत्रण

रायपुर  कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम लागू करने की तैयारी है। सीएम विष्णुदेव साय के बाद राज्य के गृहमंत्री और डेप्युटी सीएम विजय शर्मा ने भी कमिश्नरी सिस्टम को लेकर अहम जानकारी दी है। विजय शर्मा ने कहा कि हम कमिश्नरी प्रणाली लेकर आ रहे हैं, जिससे पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित होगी और पुलिस त्वरित निर्णय ले सकेगी। जीरो पॉइंट पर निर्णय लेने के लिए प्रैक्टिस चल रही है। क्या है कमिश्नरी सिस्टम पुलिस कमिश्नरी सिस्टम एक प्रशासनिक व्यवस्था है। इस व्यवस्था के अंतर्गत पुलिस आयुक्त के पास कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से संबंधित सभी शक्तियां होती हैं। ज्यादा शक्तियां होने से पुलिस को तेजी से निर्णय ले सकती है। इस सिस्टम के तहत पुलिस आयुक्त के पास जिला मजिस्ट्रेट जैसी शक्तियां हो जाती हैं। कई जगहों पर लागू है यह सिस्टम पुलिस कमिश्नरी सिस्टम देश के कई राज्यों में बड़े शहरों में लागू है। जिले का एसपी पुलिस का मुखिया होता है। कानून व्यवस्था को कंट्रोल करना एसपी की अहम जिम्मेदारी होती है। लेकिन यह सिस्टम लागू होने के बाद एसपी, एसएसपी की जगह पुलिस कमिश्नर होता है। पुलिस कमिश्नर किस रैंक के अधिकारी को बनाया जाएगा यह फैसला राज्य सरकार करती है। राज्य सरकार डीआईजी से लेकर एडीजी स्तर तक के अधिकारी को यह जिम्मेदारी दे सकती है। जिस अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जाती है वह अनुभवी अफसर होते हैं। राज्य सरकार उसके अधिकारों को लेकर नोटिफिकेशन जारी करती है। कौन-कौन से अधिकार देने हैं यह राज्य सरकार तय करती है। यह जरुरी नहीं है कि सारे अधिकार डिस्ट्रिक मैजिस्ट्रेट के जैसे हों। क्या बदलाव होंगे कमिश्नरी बन जाने से सबसे बड़ा फर्क यह पड़का है कि जिला पुलिस का मुखिया एक अनुभवी और ऊंचे रैंक वाला अधिकारी होता है। बहुत सारे काम उसकी मंसा के अनुरुप होते हैं। पुलिसिंग व्यवस्था प्रभावी बनती है। जरुरत के मुताबिक पुलिस फोर्स मिल सकती है। इसका फायदा आम जनता को भी मिलता है। छोटे मोटे दंड वाले अपराधों की तफ्तीस का अधिकार हेड कांस्टेबल को मिल जाता है। जिससे अपराध को नियंत्रण पर में मदद मिलती है। अभी ऐसे मसलों का निपटारा एसएआई या एसआई रैंक के अधिकारी करते हैं।