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रांची समेत कई जिलों में उपभोक्ता फोरम खाली, ऑनलाइन सुनवाई बनी सहारा

 रांची  झारखंड में अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे उपभोक्ताओं को न्याय मिलने में लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। वर्तमान में झारखंड उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में करीब छह हजार मामले लंबित हैं। विडंबना यह है कि पूरे राज्य के मामलों के निष्पादन का जिम्मा केवल अध्यक्ष बसंत कुमार गोस्वामी के कंधों पर है। रांची, देवघर, बोकारो और धनबाद जैसे महत्वपूर्ण जिलों के फोरम में सदस्यों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। क्यों अटकी हैं नियुक्तियां? जानकारी के अनुसार, रांची फोरम में जनवरी 2025 से ही एक भी अधिकारी मौजूद नहीं है। हालांकि इन पदों पर नियुक्ति राज्य सरकार को करनी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नया कानून बनाने का निर्देश दिया है। ऑनलाइन सुनवाई बना सहारा कोर्ट के आदेशानुसार, नए नियमों के गठन के बाद ही नियुक्तियां संभव हो पाएंगी, जिसके कारण वर्तमान में सरकार के हाथ बंधे हुए हैं। पदों के अभाव और बढ़ते बोझ के बीच अध्यक्ष बसंत कुमार गोस्वामी ऑनलाइन माध्यम से मामलों का निपटारा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आयोग के पास सबसे अधिक मामले गाड़ी इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस और बैंक लोन से जुड़े आते हैं। उपभोक्ताओं को त्वरित न्याय देने के लिए ऑनलाइन सुनवाई को प्राथमिकता दी जा रही है। घर बैठे ऐसे दर्ज करें शिकायत उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए आयोग ने हर जिले को ऑनलाइन प्रणाली से जोड़ दिया है। अब शिकायतकर्ता को कार्यालय के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। शिकायत दर्ज करने के लिए तीन प्रमुख विकल्प उपलब्ध हैं:         CP Grams (सीओपी ग्राम): सबसे पहले यहां शिकायत दर्ज करनी चाहिए।         हेल्पलाइन नंबर 1915: यदि पहले स्तर पर समाधान न मिले तो इस नंबर पर संपर्क करें।         ई-जागृति पोर्टल: उपभोक्ता सीधे इस पोर्टल के माध्यम से भी अपनी कानूनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। हालिया सफलताएं: उपभोक्ताओं को मिला हक संसाधनों की कमी के बावजूद आयोग ने इस वर्ष कई महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं:         हजरत अली मामला: दुर्घटना के एक मामले में बीमा कंपनी की आनाकानी के बाद आयोग ने पीड़ित को 2 लाख 96 हजार रुपये का भुगतान सुनिश्चित कराया।         महावीर महतो केस: उपभोक्ता को 9 लाख रुपये का हर्जाना दिलवाया गया।         मोहन कुमार केस: ऑटो चोरी होने के बाद बीमा राशि नहीं मिल रही थी, आयोग ने सुनवाई कर 3 लाख रुपये से अधिक की राशि दिलवाई।     सीमित साधनों में काम करना पड़ रहा है। रांची जिला उपभोक्ता फोरम में कोई अधिकारी नहीं है। हमारे यहां भी सदस्य नहीं है। अकेले ही काम करना पड़ रहा है। इसलिए, हमने आनलाइन सेवा शुरू की और लोग इसका लाभ उठा रहे हैं -बसंत कुमार गोस्वामी, अध्यक्ष, झारखंड उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग  

विद्युत विभाग को झटका, बस्ती उपभोक्ता आयोग ने 3 दिन में कनेक्शन जोड़ने का दिया आदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक उपभोक्ता को उपभोक्ता आयोग से बड़ी राहत मिली है। बस्ती जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा, सदस्य अजय प्रकाश सिंह की पीठ ने विद्युत विभाग के एक मामले में आदेश देते हुए कहा है कि बिना उपभोक्ता की सहमति से स्मार्ट मीटर नहीं लगाया जा सकता है। न्यायाधीश ने मैनेजिंग डायरेक्टर उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन को पत्र लिख कर उपभोक्ता आयोग में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने को कहा है। न्यायालय के समक्ष रामगोपाल बनाम उपखंड अधिकारी विद्युत का मामला सुनवाई के लिए प्रस्तुत हुआ। इस मामले में परिवाद दाखिल करते समय ही रामगोपाल की तरफ से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 38 उप धारा 8 के तहत स्थगन प्रार्थना पत्र दिया गया था। आयोग ने अपने शक्तियों का प्रयोग कर स्थगन आदेश जारी किया था। दौरान मुकदमा उपभोक्ता का कनेक्शन न काटे जाने का भी आदेश दिया गया था। परंतु 27 मार्च को मनमाने तरीके से कनेक्शन काट दिया गया। अदालत में उपस्थित होकर विद्युत विभाग की तरफ से कहा गया कि परिवादी के घर पर स्मार्ट मीटर लगाया गया था। बैलेंस नहीं होने पर स्मार्ट मीटर में बिजली स्वतः कट जाती है। तीन दिनों में कनेक्शन जोड़कर कोर्ट को सूचित करने का आदेश न्यायालय ने दोनों पक्ष की सुनने के बाद कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47 की उप धारा 5 में जो व्यवस्था दी गई है। उसके अनुसार उपभोक्ता की सहमति के बिना उसके परिसर में स्मार्ट मीटर नहीं लगाया जा सकता है। आयोग ने तीन दिनों में विद्युत कनेक्शन जोड़कर अदालत को सूचित करने का आदेश दिया है। सोमवार को नियामक ने प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं का जारी किया था गाइडलाइन बता दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने सोमवार को कानपुर में महत्वपूर्ण गाइडलाइन की है। नियामक आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य है, लेकिन मीटर को प्रीपेड करने से पहले उपभोक्ता की सहमति जरूरी है। आयोग ने यह भी कहा है कि अगर उपभोक्ता प्रीपेड मीटर नहीं लगवाना चाहता है तो उसका स्मार्ट मीटर पोस्टपेड ही रहने दिया जाए। इसके लिए उन्होंने भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के मीटरिंग रेग्युलेशन में एक अप्रैल 2026 को हुए संशोधन का हवाला दिया। नियामक आयोग सोमवार को बृजेंद्र स्वरूप पार्क स्थित द स्पोर्ट्स हब (टीएसएच) में बिजली कंपनियों की टैरिफ दरों में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर जनसुनवाई कर रहा था। आयोग ने कहा कि सभी डिस्कॉम की जनसुनवाई पूरी होने के बाद दरों में बदलाव के प्रस्ताव पर फैसला लिया जाएगा।