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सोने और चांदी को छोड़े, यह मेटल बन सकता है दोगुना, एक्‍सपर्ट का खुलासा

नई दिल्‍ली पिछले कुछ सालों में सोना और चांदी ने निवेशकों को कमाल का रिटर्न दिया है, लेकिन अब एक नए मेटल का उदय हो रहा है. एक जानकार का कहना है कि इसकी कीमत आने वाले समय में डबल होने वाली हैं. एक्‍सपर्ट का कहना है कि AI और विद्युतीकरण की असीमित डिमांड के कारण दुनिया एक विशाल कमोडिटी सुपरसाइकिल के कगार पर खड़ी है, जिस कारण कॉपर मेटल की कीमतों में तगड़ी उछाल आ सकती है.   इवानहो माइंस के संस्थापक और सह-अध्यक्ष रॉबर्ट फ्रीडलैंड के अनुसार, उत्पादन लागत में वृद्धि और अभूतपूर्व मांग के चलते तांबे की कीमतें और भी बढ़ने वाली हैं. जनवरी 2026 में सऊदी अरब में आयोजित फ्यूचर मिनरल्स फोरम 2026 में बोलते हुए, खनन क्षेत्र के दिग्गज ने लाल धातु (तांबे) के लिए बेहद आशावादी तस्वीर पेश की है. जहां पिछले पांच वर्षों में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 53 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर रही हैं, वहीं फ्रीडलैंड ने बताया कि इसी अवधि के दौरान तांबे की कीमत अभी कम तेजी के बाद भी सर्वकालिक उच्च स्तर 13,400 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई है, लेकिन आगे और भी तेजी की संभावना है.  क्‍यों आएगी कॉपर में तेजी?  कमोडिटी की कीमतों में इस उछाल का एक बड़ा कारण AI डेटा सेंटर्स का तेजी से विस्तार है. उन्होंने बताया कि 2026 के अंत तक, ग्‍लोबल डेटा सेंटर्स उतनी ही बिजली की खपत करेंगे जितनी जापान, जो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. फ्रीडलैंड ने शिकागो में माइक्रोसॉफ्ट के एक हालिया 'बेबी डेटा सेंटर' का उदाहरण दिया, जिसके लिए अकेले 20 लाख किलोग्राम तांबे की आवश्यकता थी. उन्होंने कहा कि टेस्ला के हर सर्वर को सोना, लोहा, गैलियम, एंटीमनी, टंगस्टन, चांदी, कई रेयर अर्थ मिनरल्‍स, इंडियम, टैंटलम, पैलेडियम, बेरियम, नाइओबियम और टाइटेनियम की आवश्यकता होती है. उन्‍होंने कहा कि अगर ग्रीन एनर्जी चेंजेज या एआई सेंटर्स के सपनों को इग्‍नोर करें तो भी कॉपर जैसे मेटल की भारी कमी है.  बहुत बड़े लेवल पर तांबे की आवश्‍यकता फ्रीडलैंड ने कहा कि अपनी वर्तमान जीवनशैली को बनाए रखने के लिए, दुनिया को ठीक उसी तरह चलाने के लिए, जैसा वह चलती आ रही है, हमें अगले 18 वर्षों में 70 करोड़ मीट्रिक टन तांबा और निकालना होगा. इस विशाल आंकड़े को समझने के लिए, यह ठीक उतनी ही मात्रा है, जितना तांबा मानव जाति ने गुफाओं से बाहर आने के बाद से 10,000 वर्षों में निकाला है. 40 फीसदी हिसा तो यहां खत्‍म हो जाएगा फ्रीडलैंड ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की इस विशाल मांग को पूरा करने के लिए 2050 तक हर साल छह नए टॉप कैटेगरी की तांबा खदानों को चालू करना होगा. उस नए उत्पादन का 40 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से ग्रिड अपग्रेड, इलेक्ट्रिकसिटी और डेटा केंद्रों द्वारा उपयोग किया जाएगा. क्‍यों डबल हो सकती है कॉपर की कीमत?  उन्होंने कहा कि 1900 से लेकर अब तक, तांबे की एक यूनिट के उत्पादन के लिए आवश्यक ऊर्जा 16 गुना बढ़ गई है और तांबे की एक यूनिट बनाने के लिए आवश्यक पानी की मात्रा दोगुनी हो गई है. उन्होंने आगे कहा कि इसलिए यह बिल्कुल स्पष्ट है कि भविष्य की खनन जरूरतों को पूरा करने के लिए तांबे की कीमत दोगुनी होनी चाहिए.

सोना-चांदी को चुनौती देगा तांबा, एक्सपर्ट के अनुसार ये धातु बना सकती है करोड़पति

 नई दिल्ली     सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rates) में आए उछाल ने इस साल 2025 में सभी को चौंकाया है. इनकी रफ्तार अभी भी लगातार जारी है और साल खत्म होने से पहले हर रोज दोनों कीमती धातुएं रिकॉर्ड तोड़ती हुई नजर आ रही हैं. लेकिन Gold-Silver नहीं, हकीकत में एक दूसरी धातु इस बाजार की किंग (King) बनने की ओर बढ़ रही है. जी हां, तांबे की कीमत में भारी उछाल आने वाला है, ये हम नहीं कह रहे बल्कि एक्सपर्ट खुद इसके बारे में तमाम दावे कर रहे हैं और इसके साथ ही Copper Price में बूम आने के पीछे के बड़े कारण भी बता रहे हैं.  तांबा करने वाला है कमाल! तांबे को अक्सर एक स्थिर औद्योगिक धातु के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन अब इसे अगले बड़े व्यापारिक स्रोत के रूप में पेश किया जा रहा है. इसकी उपयोगिता बढ़ने के साथ ही इसकी कीमतों में उछाल आने वाला है. बीते कारोबारी दिन सोमवार को एक्सपर्ट RKB Ventures के फाउंडर राकेश बंसल ने तर्क दिया कि सप्लाई में बाधाएं और AI, विद्युतीकरण, EVs और एनर्जी ट्रांजिशन से बढ़ी डिमांड तांबे को एक नए दौर में धकेलने वाली साबित हो सकती है. उन्होंने कहा कि Copper Price में भारी उछाल आने वाला है, आपूर्ति में कमी और कई वर्षों तक इसकी कीमतों में तेजी दिखने की संभावना है.  लगातार कमी, कीमतों में लगाएगी आग रॉयटर्स की एक रिपोर्ट की मानें, तो तांबे के बाजार (Copper Market) में इस साल 1,24,000 टन और अगले साल 2026 में 1,50,000 टन की कमी होने की आशंका है. यही सबसे बड़ा कारण है कि इस धातु की कीमतों में आग लगने वाली है. बंसल ने बिजनेस टुडे के साथ खास बातचीत में अपनी बात पर जोर देते हुए इसकी कीमतों में रैली की बात कही और इसे बिजली के उपयोग में संरचनात्मक वृद्धि से जोड़ा, साथ ही वायरिंग, ग्रिड और इंडस्ट्रियल मैन्यफैक्चरिंग में तांबे की बड़ी भूमिका को उजागर किया.  एक्सपर्ट ने कहा कि एल्युमीनियम और तांबा दोनों में तेजी आई है और इनमें आने वाले दिनों में अधिक उछाल देखने को मिलेगा. इलेक्ट्रिफिकेशन से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का डेवलपमेंट तेजी से हो रहा है. भारत में भी कई एआई डेटा सेंटर स्थापित हो रहे हैं और कॉपर के बिना यह तेजी संभव नहीं है. इसकी आपूर्ति में लगातार कमी आ रही है. बंसल के मुताबिक, भारत में तांबे का एकमात्र प्रमुख उत्पादक हिंदुस्तान कॉपर (Hindustan Copper) है. 'Crorepati बनाने की अब तांबे की बारी' सोना-चांदी ने 2025 में निवेशकों पर पैसों की बरसात की है और इसके रिटर्न से वे मालामाल हो गए हैं. राकेश बंसल का कहना है कि अब तांबे की बारी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'तांबा नया King है, जो धमाका करने वाला है! आपूर्ति की कमी + AI डेटा सेंटर + EVs + ग्रीन ऊर्जा में उछाल = तांबे की कीमतें अकल्पनीय रूप से बढ़ने वाली हैं. अब तांबे की बारी है करोड़पति बनाने की.' उन्होंने आगे लिखा कि AI से परे देखें तो तांबे के बिना बिजली का बुनियादी ढांचा भी संभव नहीं है. सोने और चांदी की तरह तांबा भी एक सुरक्षित निवेश ऑप्शन है, क्योंकि इसकी मांग वास्तविक है. इलेक्ट्रिक वाहनों में भी तांबे की जरूरत है, लेकिन आपूर्ति सीमित है. ग्लोबल मार्केट में तांबे का धमाल  रॉयटर्स ने अपनी 12 दिसंबर की एक रिपोर्ट में बताया था कि एआई को ताकत देने वाले डेटा सेंटर्स से बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के कारण तांबा 12,000 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के करीब पहुंच रहा है. इसमें यह भी कहा गया है कि तांबे की कीमतें इस साल अब तक 35% बढ़ी हैं और 2009 के बाद से सबसे बड़ी वृद्धि की ओर हैं. इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म मैक्वेरी का अनुमान है कि 2026 में वैश्विक तांबे की डिमांड 27 मिलियन टन होगी, जो 2024 की तुलना में 2.7% अधिक है. इसमें चीन (China) में मांग में 3.7% की बढ़ोतरी शामिल है.