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राजस्थान पुलिस की चेतावनी: एक लापरवाही से हैक हो सकता है बैंकिंग डेटा और पर्सनल चैट

जयपुर आज के डिजिटल दौर में वॉट्सऐप (WhatsApp) हमारी जिंदगी का एक बेहद जरूरी हिस्सा बन चुका है. लेकिन इसी के साथ वॉट्सऐप पर डिजिटल फ्रॉड और हैकिंग का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है. इसे देखते हुए राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने आम नागरिकों को ठगी से बचाने के लिए एक बेहद जरूरी और महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है. हैकर्स उड़ा सकते हैं आपकी पर्सनल फोटो और बैंकिंग डेटा साइबर क्राइम ADG वी.के. सिंह ने शुक्रवार को बताया कि हमारी एक छोटी सी लापरवाही या अवेयरनेस की कमी का फायदा उठाकर हैकर्स पर्सनल चैट, प्राइवेट तस्वीरें, वीडियो और बैंक अकाउंट की खुफिया डिटेल्स चोरी कर सकते हैं. साइबर ठगों के इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए एक्सपर्ट्स ने वॉट्सऐप पर कुछ खास प्राइवेसी और सिक्योरिटी सेटिंग्स को तुरंत चालू करने की सलाह दी है. साइबर पुलिस की इन गाइडलाइंस का तुरंत करें पालन सबसे पहले वॉट्सऐप के Settings > Account > Two-Step Verification में जाकर एक सीक्रेट पिन (PIN) जरूर सेट करें. इससे अगर कोई आपका सिम कार्ड क्लोन भी कर लेगा, तो भी बिना पिन के आपका व्हाट्सएप नहीं खोल पाएगा. फ्रॉड करने वाले लोग अक्सर वॉट्सऐप पर वायरस या मालवेयर वाली APK और PDF फाइलें भेजते हैं. अगर फोन में मीडिया ऑटो-डाउनलोड चालू है, तो ये फाइलें खुद डाउनलोड होकर बैकग्राउंड में आपका बैंकिंग डेटा चुरा सकती हैं. इसलिए Storage and Data सेटिंग्स में जाकर ऑटो-डाउनलोड को पूरी तरह बंद कर दें. अपनी प्रोफाइल फोटो, लास्ट सीन, स्टेटस और ग्रुप सेटिंग्स को हमेशा केवल 'My Contacts' पर ही सेट रखें. इससे कोई अनजान व्यक्ति आपकी फोटो का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगा और न ही आपको किसी फ्रॉड ग्रुप में जोड़ सकेगा. वॉट्सऐप की प्राइवेसी सेटिंग्स में जाकर 'Silence Unknown Callers' फीचर को ऑन करें ताकि इंटरनेशनल स्कैम कॉल्स और स्पैम कॉल्स से बचा जा सके. इसके अलावा 'Protect IP Address in Calls' को भी ऑन रखें, जिससे आपकी सही लोकेशन किसी को पता नहीं चलेगी.  समय-समय पर अपने वॉट्सऐप में जाकर चेक करें कि आपका अकाउंट किसी अनजान कंप्यूटर या लैपटॉप पर तो नहीं चल रहा है. कोई भी संदिग्ध डिवाइस दिखने पर तुरंत लॉगआउट करें. फ्रॉड होने पर यहां करें शिकायत अगर आपके साथ किसी भी तरह की डिजिटल ठगी या साइबर फ्रॉड हो जाता है, तो बिना देर किए अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराएं. इसके अलावा आप सरकार के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर जाकर या तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

करमाटांड़ में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, फर्जी सिम और साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा

 जामताड़ा झारखंड के जामताड़ा में साइबर अपराधियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है. पुलिस अधीक्षक शंभू कुमार सिंह के प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि साइबर थाना प्रभारी राजेश मंडल के नेतृत्व में विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया. छापेमारी दल ने करमाटांड़ थाना क्षेत्र के ग्राम बरमुंडी और अन्य स्थानों पर छापेमारी कर साइबर अपराध करते हुए चार अपराधियों को गिरफ्तार किया. वहीं अलग कार्रवाई में फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले एक अन्य आरोपी मुजाहिद अंसारी को कालाझरिया स्थित पेट्रोल पंप के पास से गिरफ्तार किया गया. इस मामले में क्रमशः साइबर अपराध थाना कांड संख्या 27/2026 एवं 28/2026 दर्ज किया गया है. दोनों मामलों में भारतीय न्याय संहिता 2023, आईटी एक्ट तथा टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है. गिरफ्तार आरोपी रिजवान अंसारी, बसीर अंसारी, सकलैन अंसारी, सफाउद्दीन अंसारी शामिल हैं. ये सभी आरोपी करमाटांड़ थाना क्षेत्र के बरमुंडी गांव का है. वहीं मुजाहिद अंसारी कर्माटांड़ थाना क्षेत्र के मटटांड़ गांव का रहने वाला है. ऐसे करते थे साइबर ठगी एसपी ने बताया कि आरोपी गूगल से क्रेडिट और डेबिट कार्ड धारकों का मोबाइल नंबर निकालते थे. इसके बाद ग्राहकों को कॉल कर उनका बैंक खाता या कार्ड बंद होने की बात कहकर मोबाइल में स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करवाते थे. फिर कार्ड डिटेल और गोपनीय जानकारी हासिल कर साइबर ठगी की घटना को अंजाम देते थे. वहीं गिरफ्तार एक अन्य आरोपी मुजाहिद अंसारी फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराकर साइबर अपराधियों की मदद करता था. पहले भी दर्ज है मामला गिरफ्तार आरोपी रिजवान अंसारी पूर्व में भी साइबर अपराध थाना जामताड़ा में मामला दर्ज है. बताया कि प्रारंभिक जांच में साइबर अपराधियों का कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र, गुजरात एवं पश्चिम बंगाल तक फैला होने की जानकारी मिली है. पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है. जप्त किए गए सामान     05 मोबाइल फोन     06 सिम कार्ड     03 एटीएम कार्ड     01 पैन कार्ड     01 आधार कार्ड     01 मोटरसाइकिल  

खाते में 551 करोड़ दिखते ही मचा हड़कंप, यूपी में ऐप ग्लिच या साइबर साजिश की जांच शुरू

सीतापुर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक साधारण परिवार के साथ ऐसा वाकया हुआ कि उनकी रातों की नींद उड़ गई। मछरेहटा इलाके में परिवार के लोग उस वक्त खुशी से झूम उठे जब उन्होंने अपने 'जियो पेमेंट बैंक ऐप' (Jio Payment Bank App) के खाते में 5.5 अरब (551 करोड़) रुपये से अधिक की राशि देखी। पहले तो उन्हें लगा कि उनकी किस्मत खुल गई है, लेकिन जल्द ही यह खुशी भारी चिंता और घबराहट में बदल गई। इतनी बड़ी रकम कहां से आई, किसने भेजी और क्यों, इन सवालों ने उन्हें परेशान कर दिया। अंततः, उन्होंने पुलिस से संपर्क कर सुरक्षा की गुहार लगाई है। साइबर क्राइम पुलिस जांच में जुट गई है। ऐप में अरबों की रकम, पर खाते में नहीं मछरेहटा थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शुरुआती पड़ताल की। थाना प्रभारी (एसओ) ने बताया कि जांच में एक बेहद अजीब बात सामने आई है। पीड़ितों के बैंक खाते में वास्तव में एक रुपया भी नहीं आया है; अरबों की यह भारी-भरकम राशि सिर्फ मोबाइल ऐप पर ही दिखाई दे रही है। यह ऐप की कोई तकनीकी खराबी (Glitch) है या कोई साइबर धोखाधड़ी की साजिश, इसकी जांच अब साइबर क्राइम सेल (Cyber Crime Cell) को सौंपी गई है। दस्तावेज लेने वाले युवक पर संदेह पीड़ितों ने पुलिस को दी गई तहरीर में एक स्थानीय युवक, सर्वेश, पर संदेह जाहिर करते हुए शिकायत की है। बारेपारा गांव की रूपा और उनके भतीजे गजराज ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले सर्वेश नाम के युवक को अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज दिए थे। गजराज के मुताबिक, पत्नी की मृत्यु के बाद 'मृतक आश्रित लाभ', पिता मेढ़ई की 'पेंशन' और 'किसान सम्मान निधि' के आवेदन के लिए ये दस्तावेज दिए गए थे। पेंशन की जगह दिखा अरबों का बैलेंस सर्वेश ने हाल ही में उन्हें बताया था कि पेंशन का काम हो गया है। इसके बाद जब गजराज ने अपना जियो पेमेंट बैंक ऐप चेक किया, तो वह सन्न रह गया। खाते में ₹5,51,00,00,000/- (5.51 अरब) रुपये से अधिक का बैलेंस दिखा रहा था। गजराज ने बताया कि पहले वह बहुत खुश हुआ, लेकिन बाद में इतनी बड़ी रकम देखकर घबरा गया। उसे अनहोनी की आशंका सताने लगी। उसने सर्वेश से अपना खाता बंद कराने को भी कहा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस की सतर्कता और साइबर सेल की भूमिका 5.5 अरब रुपये आने की चर्चा पूरे इलाके में होने लगी । पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि मोबाइल ऐप में अरबों की राशि कैसे दिख रही थी और क्या सर्वेश नाम के युवक ने दस्तावेजों का कोई गलत इस्तेमाल किया है। साइबर एक्सपर्ट्स इस मामले के डिजिटल पहलुओं को खंगाल रहे हैं ताकि इस रहस्य से पर्दा उठ सके।

ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर झांसा, युवक से करीब 2 लाख की साइबर ठगी

 रांची  शहर में साइबर ठगी के दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं। एक मामले में लिंक ओपन करते ही युवक के दो बैंक खातों से 1.93 लाख रुपये की निकासी कर ली गई, जबकि दूसरे मामले में ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करीब दो लाख रुपये की ठगी कर ली गई। दोनों मामलों में साइबर अपराध थाना में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पहला मामला ओरमांझी निवासी बबन वर्मा से जुड़ा है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके मोबाइल नंबर पर आरटीओ के नाम से एक लिंक आया था। गलती से लिंक ओपन करते ही उनके एक्सिस बैंक और पंजाब नेशनल बैंक खाते से कुल 1 लाख 93 हजार रुपये की अवैध निकासी कर ली गई। वहीं दूसरा मामला गुमला निवासी चंदन कुमार से संबंधित है, जो वर्तमान में सीआरपीएफ झारखंड सेक्टर कार्यालय, धुर्वा में कार्यरत हैं। चंदन कुमार ने पुलिस को बताया कि उन्हें टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से ऑनलाइन ट्रेडिंग का ऑफर दिया गया था। इसके बाद उन्हें एक व्हाट्सएप नंबर से जोड़कर मोटे मुनाफे का लालच दिया गया। पीड़ित के अनुसार उन्होंने पहले 50 हजार रुपये भेजे। बाद में अधिक मुनाफा दिखाकर अलग-अलग चरणों में 70 हजार और फिर 80 हजार रुपये जमा कराए गए। आरोपितों ने ट्रेडिंग फीस और प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर रुपये लिए, लेकिन रकम वापस नहीं की। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं।

राजस्थान पुलिस की बड़ी कार्रवाई, डिजिटल अरेस्ट और निवेश फ्रॉड गैंग के 3 आरोपी गिरफ्तार

कोटा राजस्थान के कोटा ग्रामीण पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए “ऑपरेशन म्यूल हंटर” के तहत ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. जिसमें पिछले 10 दिनों में 4 प्रकरण दर्ज कर 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह से जुड़े बैंक खातों में देशभर में करीब 70 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के लेन-देन के प्रमाण मिले हैं. डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर बिछाया जाल  पुलिस अधीक्षक सुजीत शंकर के मुताबिक, यह गिरोह ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग, शेयर मार्केट निवेश, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन टास्क पूरा करने के नाम पर लोगों को झांसे में लेकर ठगी करता था.आरोपी नवनीत विजयवर्गीय कोटा के महावीर नगर का रहने वाला है जबकि सलमान अहमद तलवंडी क्षेत्र का रहने वाला है वही एक नाबालिग को भी निरूद्ध किया गया है . आरोपी भोले-भाले लोगों को लालच देकर उनके बैंक खाते और सिम कार्ड हासिल करते थे, जिन्हें बाद में साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किया जाता था. पेंशन के बहाने 58 करोड़ का 'खूनी' लिंक जांच में सामने आया कि अलग-अलग मामलों में करोड़ों रुपये की ठगी की गई. एक मामले में पेंशन चालू करवाने के बहाने सिम और बैंक डिटेल लेकर करीब 58 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से लिंक मिला. वहीं अन्य मामलों में 1.69 करोड़, 71 लाख और करीब 9.71 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन सामने आए हैं. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 3 मोबाइल फोन और 3 सिम कार्ड जब्त किए हैं. गिरफ्तार आरोपियों में कोटा शहर और ग्रामीण क्षेत्र के युवक शामिल हैं, जो व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए देशभर के साइबर गिरोहों से जुड़े हुए थे.  साइबर सेल ने किया खुलासा इस कार्रवाई में सुल्तानपुर, इटावा, दीगोद और रामगंजमंडी थाना पुलिस सहित साइबर सेल की विशेष टीमों ने संयुक्त रूप से काम किया. पुलिस का कहना है कि अभियान लगातार जारी रहेगा और साइबर ठगों के पूरे नेटवर्क को खत्म किया जाएगा.

एटीएस अधिकारी बनकर साइबर शातिरों ने दंपती को डराया, लगातार कॉल पर रखकर ठगा

 मुजफ्फरपुर बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित भगवानपुर स्थित एलएन मिश्रा बिजनेस मैनेजमेंट कॉलेज के रिटायर कर्मचारी हरेंद्र कुमार व उनकी पत्नी कांति देवी को लगातार 17 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर साइबर शातिरों ने करीब 19 लाख रुपये ठग लिए। 26 मार्च की शाम साढ़े चार बजे से लेकर 11 अप्रैल तक उनको कॉल पर रखा। शातिर लगातार 24 घंटे कॉल पर रहा। इस दौरान मुश्किल से दो घंटे भी दंपती सोए नहीं पाते थे। इस संबंध में हरेंद्र ने साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया है कि एंटी टेरेरिस्ट स्क्वैड (एटीएस) अधिकारी बनकर साइबर शातिरों ने उन्हें 26 मार्च को पहली बार व्हाट्सअप कॉल की। उसने आधार नंबर बताते हुए झांसा दिया कि आपके इस आधार से एक सिम निकाली गई है। इसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधि में की गई है। इसी आधार से केनरा बैंक में एक खाता खोला गया है, जिसमें आतंकी गतिविधि के लिए लेनदेन किए गए हैं। इस तरह एटीएस अधिकारी बनकर गिरफ्तारी की बात बताकर डराने धमकाने लगा। लगातार कॉल पर रखा और इस दौरान वीडियो कॉलिंग भी की। इसके लिए अलग-अलग दो मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल साइबर शातिरों ने किया। 25 मार्च से पांच अप्रैल तक हरेंद्र के मोबाइल पर कॉल की गई। वहीं, उनकी पत्नी के मोबाइल नंबर पर पांच से 11 अप्रैल तक लगातार व्हाटसअप कॉल की गई। इस दौरान उसने कहा कि एक आवेदन दीजिए कि केस की जांच कर मुझे माफ कर दिया जाए। तब हरेंद्र ने यह आवेदन भी दिया। उसने कहा कि इसके लिए रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार बैंक खाते में रुपये भेजने होंगे। डर के कारण हरेंद्र कुमार ने आरटीजीएस के माध्यम से साइबर शातिरों को रुपये भेजे। बीते 30 मार्च को हरेंद्र बैंक गए। केरला के कोची शहर में किकोरा एक्सपोर्ट लि. के खाते में 5.60 लाख रुपये लिए। 31 मार्च और एक अप्रैल को बैंक में क्लोजिंग के कारण लेनदेन बंद रहने पर पुन: दो अप्रैल को हरेंद्र को लाइन पर रखकर बैंक ले गया। मुम्बई के गोरेगांव स्थित जेटी शूकर प्रा.लि. के खाते में 7.10 लाख और कर्नाटक के अमीन रोड लाइन एंड इंटरप्राइजेज के खाते में 6.15 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए डालवाए। 18.85 लाख रुपये भेजने के बाद भी केस से निजात दिलाने के नाम पर और रुपये की मांग करने लगा तब हरेंद्र को साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट का आभास हुआ। उन्होंने कॉल काटने के बाद रिश्तेदारों से संपर्क किया और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा बेटों ने बंधाया ढांढ़स ठगी के बाद जब सारी कहानी पुत्रों को बताई तो उन्होंने हरेंद्र और उनकी पत्नी को ढांढ़स बंधाया। उन्हें डर था कि शोक व खौफ में कहीं उनके माता-पिता आत्महत्या न कर लें। बेटों ने कहा, रुपये चला गया तो फिर आ जाएंगे। 17 दिनों तक जान जोखिम में, लगता था कुछ कर लेंगे रिटायर कर्मी हरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें दो पुत्र है। एक इलाहाबाद और एक कोलकाता में बैंक में पोस्टेड है। सभी अपने परिवार के साथ उसी शहर में रहते हैं। वह पति-पत्नी सदर थाना के भगवानपुर यादव नगर के निकट श्रीकृष्ण बिहार कॉलोनी स्थित आवास में रहते हैं। बताया कि 17 दिनों के डिजिटल अरेस्ट के दौरान जान जोखिम में पड़ी रही। साइबर शातिरों के पास उनका केवल आधार कार्ड ही नहीं था। वह पूरे परिवार का ब्योरा लिए हुए थे। इस दौरान किसी रिश्तेदार की कॉल भी आई तो केवल खैरियत वगैर तक ही बात करने दिया। साइबर डीएसपी बोले डिजिटल अरेस्ट की एफआईआर दर्ज कर इंस्पेक्टर आशुतोष प्रसाद को जांच की जिम्मेवारी सौंपी गई है। बैंक खातों का डिटेल लिया जा रहा है। आशंका है कि फर्जी कंपनी के नाम म्यूल एकाउंट खोलकर ठगी की गई है। -हिमांशु कुमार, साइबर डीएसपी

पीएम को धमकी और आपत्तिजनक पोस्ट मामले में आरोपी गिरफ्तार, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद

 बक्सर बिहार के बक्सर जिले में साइबर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिस पर अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए की वेबसाइट पर आपत्तिजनक पोस्ट करने और भारत के प्रधानमंत्री को जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी के घर से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद किए हैं। गुप्त सूचना पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई जिले में गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस उपाधीक्षक सह साइबर थानाध्यक्ष के नेतृत्व में कार्रवाई की गई। साइबर थाना अध्यक्ष की टीम ने सिमरी थाना क्षेत्र के आशा पादरी गांव से अमन कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया है। इसकी पुष्टि पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने शनिवार को की। सीआईए वेबसाइट पर आपत्तिजनक पोस्ट का आरोप जानकारी के अनुसार, 8 अप्रैल को सिमरी थाना अध्यक्ष को सूचना मिली थी कि अमन कुमार तिवारी ने सीआईए की वेबसाइट पर एक आपत्तिजनक पोस्ट किया है, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री को जान से मारने की धमकी दी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों के निर्देश पर साइबर थाना टीम का गठन किया गया। छापेमारी में मिले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और संदिग्ध सामग्री टीम ने आरोपी के घर आशा पादरी गांव में छापेमारी की, जहां तलाशी के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद हुए। बरामद सामान में लैपटॉप, मोबाइल फोन, पेनड्राइव और अन्य संदिग्ध सामग्री शामिल है। जांच में सामने आया कि आरोपी के मोबाइल में कई वीपीएन और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े ऐप मिले हैं। लैपटॉप में टोर ब्राउज़र इंस्टॉल पाया गया, जिसका उपयोग डार्क वेब एक्सेस करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा फर्जी पहचान पत्र भी बरामद हुआ है। पुलिस के अनुसार, आरोपी के पास से निम्न सामान बरामद किए गए हैं, लैपटॉप 01, मोबाइल 02, पेनड्राइव 02, विभिन्न बैंकों के डेबिट कार्ड 09, फर्जी पहचान पत्र 01। इस पूरे मामले की जांच पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य के निर्देश पर की गई। पुलिस उपाधीक्षक सह साइबर थानाध्यक्ष अविनाश कुमार कश्यप के नेतृत्व में टीम गठित की गई थी। टीम में अंचल निरीक्षक ब्रह्मपुर ओम प्रकाश कुमार, साइबर थाना के कई पुलिस अधिकारी, सिमरी थाना पुलिस और डीआईयू बक्सर के अधिकारी शामिल रहे।  

ठगी का शिकार हुआ छात्र बना मास्टरमाइंड, 9 राज्यों में फैलाया जाल

 पटना पटना साइबर पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। उसने नौ राज्यों के लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले तीन साइबर ठग को गिरफ्तार किया है। आरोपित प्लेब्वॉय बनाने और धनी एप द्वारा लोन दिलाने के नाम पर झांसा देकर लोगों को अपना शिकार बनाते थे। चार महीने से पटना में बैठ दिल्ली, यूपी, केरल समेत नौ राज्यों के लोगों से ठगी कर रहे थे। आरोपितों की पहचान नवादा के वारिसलीगंज निवासी गुलशन कुमार व शुभम राज और इसी जिले के शाहपुर के रहने वाले विक्की कुमार के रूप में हुई है। उनके पास से एक लैपटॉप, 11 मोबाइल फोन और दस्तावेज आदि बरामद हुए हैं। डीएसपी व साइबर थाना प्रभारी नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि अन्य राज्यों की साइबर पुलिस को सूचना मिली थी की पटना के साइबर ठग प्लेब्वॉय बनाने और धनी एप द्वारा लोन दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी कर रहे हैं। साइबर पुलिस ने जानकारी जुटाई तो पता चला कि बेऊर स्थित एक अपार्टमेंट से गिरोह का संचालन हो रहा है। इसके बाद पुलिस ने बुधवार को शिव नगर स्थित ममता कुंज अपार्टमेंट में छापा मारा। वहां से गुलशन कुमार, शुभम राज और विक्की कुमार पकड़े गए। उनके पास से मोबाइल और लैपटॉप आदि बरामद हुए। जालसजों में दो स्नातक और एक इंटर का है छात्र गुलशन कुमार, शुभम राज ने स्नातक तक पढ़ाई की है। वहीं विक्की कुमार इंटर का छात्र है। गुलशन गिरोह का मास्टर माइंड है। साइबर पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क कर यह जानकारी जुटा रही है कि इन ठगों ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है खुद हुआ शिकार तो बन गया ठगी का मास्टरमाइंड नौ राज्यों में साइबर ठगी के लिए करोड़ों रुपये उगाहने वाले गैंग के सरगना की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। गिरोह का मास्टरमाइंड गुलशन कुमार कभी खुद साइबर ठगी का शिकार हुआ था। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि वह पटना में आकर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान उसके साथ साइबर ठगी हुई। एक बार पैसे गंवाने के बाद उसने खुद ही साइबर ठगी का मायाजाल बुनना शुरू कर दिया। एपीके फाइल भेज बनाते थे शिकार पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि उन्होंने खुद को छात्र बताकर बेऊर में फ्लैट लिया था। वे सोशल मीडिया पर प्लेब्वॉय बनाने और धनी एप द्वारा आसानी से लोन दिलाने का विज्ञापन देते थे। विज्ञापन देखकर जो भी प्लेब्वॉय बनने या लोन लेने की इच्छा जताता था उनसे वे प्रोसेसिंग फीस व अन्य बहाने से रुपये अपने खाते में मंगाते थे। इसके बाद लोगों से संपर्क खत्म कर लेते थे। यही नहीं गिरोह के सदस्य प्लेब्वॉय और लोन संबंधी एपीके फाइल लोगों के फेसबुक, टेलीग्राम और व्हाट्स एप पर भी भेजते थे। एपीके फाइल पर क्लिक करते ही मोबाइल फोन हैक हो जाता था। बाद में वे उनका बैंक खाता खाली कर देते थे। टेलीग्राम एप से सीखी ठगी, फिर दोस्तों को जोड़ा उसने टेलीग्राम एप पर साइबर ठगी के वीडियो देखने शुरू कर दिए। वीडियो देखने के बाद उसे लगा कि साइबर ठगी कर आसानी से रुपये बनाए जा सकते हैं। आरोपितों ने पुलिस को बताया कि टेलीग्राम पर हर प्रकार की साइबर ठगी के वीडियो अपलोड हैं। उन वीडियो को देखने के बाद उन्हें ठगी के अलग-अलग तरीका के बारे में पता चला।

साइबर अपराध का खुलासा: बस्ती से 300 लड़कियों के अंतरंग वीडियो विदेशों में फैलने का आरोप

बस्ती  प्यार, भरोसा और शादी के सपनों के नाम पर रची गई यह साजिश इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली है. आरोप है कि बस्ती के एक शातिर युवक और उसका गिरोह 300 से ज्यादा लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाता रहा, फिर उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया गया. यही नहीं, इन वीडियो को हथियार बनाकर कई लड़कियों को जबरन देश और विदेशों में देह व्यापार के लिए भेजा गया. मामला सामने आते ही पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया है, जबकि पीड़िताओं की संख्या और नेटवर्क का दायरा जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. बस्ती के कलवारी थाना क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता बस्ती शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में काम करती थी. जनवरी 2022 में उसकी मुलाकात अजफरुल हक उर्फ प्रिंस से हुई. खुद को हिंदू बताने वाले इस युवक ने पहले हमदर्दी दिखाई, फिर बेहतर नौकरी दिलाने का झांसा दिया. बातों-बातों में मोबाइल नंबर लिया गया और इसके बाद शुरू हुआ भावनात्मक जाल. पीड़िता के मुताबिक युवक न सिर्फ खुद को हिंदू बताता था, बल्कि भरोसा दिलाने के लिए हाथ में कलावा भी पहनता था, ताकि किसी तरह का शक न हो. धीरे-धीरे बातचीत प्यार में बदली और फिर एक दिन युवक ने भरोसा जीतकर उसके साथ दुष्कर्म किया. इसके बाद शादी का झांसा देकर लगातार उसका शारीरिक शोषण किया जाता रहा. जब शिकायत करने पहुंची तो गैंगरेप का आरोप पीड़िता का आरोप है कि जब वह अपनी आपबीती लेकर आरोपी के घर पहुंची और शादी की बात की, तो वहां हालात और भयावह हो गए. युवक ने अपने भाई और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. यही नहीं, विरोध करने पर उसे और उसके परिवार को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकियां दी गईं. पीड़िता का दावा है कि अगर वह आरोपी के पास नहीं जाती थी तो उसके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता, यहां तक कि उसके भाई को किडनैप करने की धमकी दी गई. हालात ऐसे बना दिए गए कि वह मजबूरी में बार-बार आरोपी के संपर्क में रहने को विवश हो गई. आपत्तिजनक वीडियो बने हथियार जांच में सामने आया है कि आरोपी और उसका गिरोह लड़कियों के निजी पलों के आपत्तिजनक वीडियो और फोटो बना लेता था. बाद में इन्हीं वीडियो के जरिए पीड़िताओं को ब्लैकमेल किया जाता. वीडियो वायरल करने, परिवार को बदनाम करने और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियों से लड़कियों को तोड़ दिया जाता था. पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में दावा किया है कि आरोपी और उसका भाई इसी तरीके से करीब 300 लड़कियों को प्रेम जाल में फंसा चुके हैं. इन सभी के वीडियो बनाकर उन्हें अलग-अलग राज्यों और नेपाल जैसे देशों तक देह व्यापार के लिए भेजा गया. हिस्ट्रीशीटर निकला मुख्य आरोपी पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर सामने आया कि अजफरुल हक उर्फ प्रिंस पहले से ही थाने का हिस्ट्रीशीटर अपराधी है. उस पर पहले भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. पीड़िता का यह भी आरोप है कि आरोपी के काले कारनामों में उसके घरवाले भी पूरी तरह शामिल थे और उन्होंने भी उसे देह व्यापार के दलदल में धकेलने की कोशिश की. पीड़िता का कहना है कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि संगठित अपराध है, जिसमें कई लोग शामिल हैं और इसका नेटवर्क बस्ती तक सीमित नहीं है. 300 लड़कियों का दावा, जांच एजेंसियों के लिए चुनौती पीड़िता के इस दावे के बाद पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया है. अगर यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला राज्य के सबसे बड़े लव जिहाद और सेक्स ट्रैफिकिंग रैकेट में से एक बन सकता है. पुलिस फिलहाल पीड़िता के बयान, डिजिटल सबूतों और कॉल डिटेल्स के आधार पर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. 8 आरोपियों पर FIR, एक गिरफ्तार मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली पुलिस ने मुख्य आरोपी अजफरुल हक उर्फ प्रिंस समेत 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. इनमें आरोपी के परिजन और सहयोगी भी शामिल हैं. मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश के लिए दबिशें दी जा रही हैं. डिप्टी एसपी सत्येंद्र भूषण तिवारी ने बताया कि महिला की शिकायत के आधार पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. विवेचना के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस गिरोह का संबंध किसी अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से तो नहीं है. नेपाल और अन्य राज्यों तक फैले तार सूत्रों के अनुसार, पुलिस को शुरुआती जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ पीड़िताओं को नेपाल और देश के अन्य राज्यों में भेजा गया. इसके लिए एजेंट, ठिकाने और संपर्क सूत्रों का इस्तेमाल किया गया. मोबाइल डेटा और सोशल मीडिया अकाउंट्स की फोरेंसिक जांच की जा रही है. फिलहाल, गिरफ्तारी के साथ इस काले खेल की परतें खुलनी शुरू हुई हैं. आने वाले दिनों में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, यह साफ होगा कि यह आंकड़ा 300 तक सीमित है या इसके पीछे इससे भी बड़ा और खतरनाक नेटवर्क छिपा है.

2025 में झारखंड पुलिस का अभियान: नक्सल और साइबर अपराध पर मजबूत कार्रवाई

रांची झारखंड पुलिस ने वर्ष 2025 के जनवरी से सितंबर माह तक नक्सल विरोधी अभियानों और साइबर अपराध नियंत्रण में जबरदस्त सफलता हासिल की है। आईजी अभियान माइकल राज एस ने पुलिस मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि नक्सल विरोधी अभियान में कुल 157 हथियार बरामद हुए हैं। इनमें 58 हथियार पुलिस से लूटे गए थे जिसे बरामद करने में कामयाबी मिली है। आईजी ने कहा कि जनवरी से सितंबर तक नक्सलियों के कब्जे से 11,950 गोलियां, 18,884 डेटोनेटर, 394.5 किलोग्राम विस्फोटक और 39.53 लाख रुपए की लेवी राशि जब्त की गई है। इसके अलावा नक्सलियों द्वारा लगाए गए 228 आईईडी विस्फोटकों को नष्ट किया गया और 37 नक्सली बंकर ध्वस्त किए गए। इस अभियान में कुल 266 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस-नक्सली मुठभेड़ों में 32 नक्सली मारे गए, जिनमें दो सेंट्रल कमिटी के बड़े सदस्य विवेक उर्फ प्रयाग मांझी और अनुज उर्फ सहदेव सोरेन शामिल है। इन पर एक करोड़ रुपये का इनाम भी था। साथ ही 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर साहेब राम मांझी उर्फ राहुल भी मुठभेड़ में मारा गया। माइकल ने साइबर अपराध के मामलों में भी बड़ी कार्रवाई का ब्यौरा दिया। अगस्त और सितंबर के बीच साइबर अपराध के 128 मामलों में 105 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से 139 मोबाइल फोन, 166 सिम काडर्, 60 एटीएम कार्ड और 2.81 लाख रुपए नकद बरामद हुए। माइकल ने बताया कि साल 2025 के पहले 9 महीनों में कुल 12,651 वारंट निष्पादित किए गए और 4,186 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान 413 वाहनों, 136 हथियारों और 1221 गोलियों को भी जब्त किया गया। अमन साहू गिरोह के सक्रिय अपराधी सुनिल कुमार उफर् मयंक सिंह को अजरबैजान से भारत प्रत्यर्पित कर लाया गया, जिससे पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इसके अलावा रांची में कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर अवैध हथियार व रसायन जब्त किए गए। रामगढ़ डकैती मामले में चार आरोपियों को चार अवैध हथियारों के साथ पकड़ा गया। खूंटी में 838.33 किलोग्राम डोडा जब्त किया गया। वहीं, रांची में जाली नोट के कारोबार में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया जिनके पास 3.25 लाख रुपये के जाली नोट पाए गए। आईजी अभियान माईकल राज एस ने जनता से सहयोग की अपील की और आश्वस्त किया कि पुलिस अपराधियों के खिलाफ कड़ी कारर्वाई करने में पीछे नहीं हटेगी।