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‘झारभूमि लाइवस्टॉक’ के गठन से ग्रामीण आजीविका और पशुपालन को मिलेगी नई ताकत

 पिपरवार सीसीएल के पिपरवार सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन और कृषि आधारित आजीविका को संगठित स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 300 किसानों और महिला पशुपालकों की नई उत्पादक कंपनी “झारभूमि लाइवस्टॉक फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड” का विधिवत गठन कर लिया गया है। कंपनी का पंजीकरण शुक्रवार को पूरा होने के साथ ही क्षेत्र के किसानों और पशुपालकों में उत्साह का माहौल है। कंपनी गठन से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य छोटे और मध्यम किसानों, दुग्ध उत्पादकों तथा महिला स्वयं सहायता समूहों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है, ताकि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, चारा प्रबंधन और कृषि उत्पादों के विपणन को संगठित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। बताया गया कि कंपनी के गठन से किसानों को बाजार तक सीधी पहुंच, उचित मूल्य, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ एकीकृत रूप से मिल सकेगा। विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और स्वरोजगार को मजबूती देने पर भी कंपनी का फोकस रहेगा। कंपनी के गठन के साथ ही उसका निगमित प्रमाण पत्र, स्थायी खाता संख्या और कर कटौती खाता संख्या भी जारी कर दी गई है। संस्था से जुड़े पदाधिकारियों ने सभी सदस्य किसानों और महिला पशुपालकों को नई यात्रा के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सामूहिक प्रयास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी और पशुपालन आधारित रोजगार को मजबूती प्राप्त होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की सामूहिक भागीदारी से बनी इस कंपनी को आत्मनिर्भर कृषि और पशुपालन मॉडल की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

डेयरी सेक्टर में बदलाव,आईटी लैब से गाय-भैंस की जल्दी प्रेग्नेंसी टेस्टिंग

लखनऊ यूपी में करीब और 190.20 लाख गोवंश 330.10 लाख भैंस हैं। इसमें प्रजनन योग्य 89.36 लाख गाय और 153.12 लाख भैंस हैं। इसमें करीब एक लाख गाय भैंस में समय से गर्भ धारण नहीं करने की समस्या पाई जाती है। अभी तक पशुओं के गर्भवती होने की जांच तीन माह में हो पाती हैं। यदि कोई गाय या भैंस गर्भ नहीं धारण की है तो तीन से चार माह बाद ही उसे दोबारा गर्भ धारण कराया जाता है। इस अंतर को कम करने की तैयारी है। इसके लिए प्रदेश में आईटी इनैबल्ड पशु गर्भपरीक्षण प्रयोगशाला बनाई जा रही है। इन प्रयोगशाला में किट के जरिये 28 दिन में ही जांच हो सकेगी। यदि कोई गाय भैस गर्भवती नहीं हुई है तो किसान माहभर बाद ही उसे दोबारा सीमेन चढ़वा सकेगा। साथ ही पशु चिकित्सक से संपर्क करके उसका उपचार भी करा सकेगा। इसकी शुरुआत बुंदेलखंड, पूर्वांचल, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पांच ब्लॉकों से की जा रही है। यानी हर क्षेत्र में एक-एक ब्लॉक का चयन किया जा रहा है। कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए अतिहिमीकृत वीर्य द्वारा कृत्रिम गर्भाधान को बढावा दिए जाने की नीति बनाई गई है। सभी पशु अस्पतालों में हिमीकृत बीज रखने के लिए अलग अत्याधुनिक लैब भी बनाई जा रही है। इसी तरह विदेशी नस्ल के सांडों के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान कराकर संकर नस्ल तैयार कर दूध की मात्रा बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। किसानों को दी जाएंगी गाय गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि कई गौशाला में अच्छी नस्ल की गायें हैं। इन गायों का उपचार कराया गया है। कुछ गर्भवती भी हैं। इन्हें किसानों को दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि बुदेलखंड में यह प्रयोग काफी सफल रहा है।