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दत्तात्रेय होसबाले ने कहा- भारत का ईरान युद्ध पर स्टैंड सही, संघ की सोच शांति की है, भारतीयता-हिंदुत्व मानसिकता नहीं जीवनशैली

पानीपत हरियाणा में चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के आखिरी दिन  सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच ईरान को लेकर भारत के स्टैंड पर कहा कि भारत हित में सरकार सही कर रही है, ऐसा विश्वास है कि सरकार का स्टैंड सही है। उन्होंने कहा कि संघ पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंधों पर जोर देता है। बांग्लादेश और नेपाल में सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद नई सरकारें बनी हैं। दोनों देशों में शांति-स्थिरता और उनका भारत के साथ अच्छा संबंध पूरे एशिया के विकास और सुरक्षा के लिए जरूरी है। हालांकि, उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर भी चिंता जताई। होसबाले ने कहा- भारतीयता क्या है, हिंदुत्व क्या है, इसकी एक स्पष्ट अवधारणा होनी चाहिए। यह केवल एक मानसिकता नहीं बल्कि एक जीवनशैली है। हरियाणा में भी RSS का बड़ा केंद्र विकसित करने की तैयारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) उत्तर भारत के लिए हरियाणा में बड़ा केंद्र विकसित करने की तैयारी में है। इसका प्रस्ताव हरियाणा के पानीपत में चल रही अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में रखा जाएगा। पानीपत के पट्टीकल्याणा में बना माधव दृष्टि साधना केंद्र करीब 25 एकड़ में फैला है। इसे नागपुर मुख्यालय की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। रणनीतिक दृष्टि से अनुकूल होने के कारण संघ यहां से कई उत्तर भारतीय राज्यों को एक साथ साधने की तैयारी में है। दिल्ली से निकटता और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण माधव सृष्टि को और अधिक अपग्रेड किया जाएगा। 8 साल पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने पट्टीकल्याणा में सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र की आधारशिला रखी थी। RSS की 3 दिवसीय सभा की अहम बातें संघ ने अपने तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में आखिरी दिन कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव और सुझाव रखे। इनमें आरएसएस के दायित्व परिवर्तन भी शामिल रहा। आरएसएस के शताब्दी वर्ष (2025-26) की वार्षिक रिपोर्ट पेश की गई। यहां केरल और तमिलनाडु समेत दक्षिण के राज्यों और पूर्वोत्तर में संघ की गतिविधियों और सामने आई चुनौतियों का जिक्र किया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि एक वर्ष में देश में संघ की 88,949 शाखाएं लगाई गईं। जो पिछले साल से 5,820 ज्यादा हैं। गुरु तेग बहादुर व संत शिरोमणि रविदास जयंती से मैसेज सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी पर्व पर कई कार्यक्रम किए गए। वहीं संत शिरोमणि रविदास जी की 650वीं जयंती पर इस साल कार्यक्रम हो रहे हैं। यह समरता का संदेश है। 3 दिन में 32 संगठनों ने दिए सुझाव माधव सृष्टि में चल रहे तीन दिवसीय सभा के अंतिम दिन आरएसएस के सरसंघ चालक का संबोधन होगा। इससे पहले दो दिन में आरएसएस की विचारधारा से जुड़े 32 संगठनों ने सुझाव रखे। 1487 पदाधिकारियों ने यहां भाग लिया। संघ में बदलाव और अगले साल की योजना पर सहमति लेंगे बता दें कि संघ प्रमुख मोहन भागवत संघ के स्ट्रक्चरल बदलावों के साथ ही अगले एक साल तक होने वाले कार्यों को लेकर आज सभा से स्वीकृति लेंगे। उन राज्यों पर ध्यान, जिनमें BJP नहीं जीती आरएसएस प्रतिनिधि सभा के पहले दिन चर्चा के केंद्र में वो राज्य रहे, जिनमें BJP या तो कभी सत्ता में नहीं रही, या दमदार उपस्थिति नहीं है। संघ के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया कि आगले दो वर्षों में मुख्य ध्यान चार राज्यों- केरल, तमिलनाडु, पंजाब और पश्चिम बंगाल पर केंद्रित रहेगा। इन राज्यों में संघ अपने कार्य विस्तार के लिए माइक्रो-मैनेजमेंट और नए सांगठनिक स्ट्रक्चर पर जोर दे रहा है। पंजाब में राष्ट्रीय सिख संगत को एक्टिव करेंगे आरएसएस पंजाब को एक चुनौती के रूप में ले रही है। वहां कभी भाजपा अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती है। असल में पंजाब की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों में कट्टर हिंदुत्व की विचारधारा का सिखों के साथ तालमेल बैठना आसान नहीं। इसलिए पंजाब में राष्ट्रीय सिख संगत को नए सिरे से एक्टिव किया जाएगा। संघ यह मैसेज देना चाहता है कि सिखों और हिंदुओं का रिश्ता 'नख-मांस' जैसा है। पंजाब में अगले साल के शुरु में चुनाव होने हैं। पंजाब को लेकर आरएसएस की 4 रणनीति     राष्ट्रीय सिख संगत का मिशन 'डोर-टू-डोर': सिखों से सीधा संवाद स्थापित करने के लिए 'राष्ट्रीय सिख संगत' दल को फिर से सक्रिय किया जा रहा है। यह दल पंजाब के गांवों में घर-घर जाकर संपर्क साधेगा और भ्रांतियों को दूर कर राष्ट्रवादी विचारों का प्रसार करेगा।     सामाजिक समरसता और ममता संगम: पंजाब के विभिन्न जिलों में मातृशक्ति के विशेष 'ममता संगम' सम्मेलन आयोजित किए हैं। इन सम्मेलनों के दौरान जो सुझाव या चुनौतियां आईं, उनके आधार पर आगे की तैयारी होगी।     नशे के खिलाफ युद्ध स्तर पर मुहिम: पंजाब की सबसे बड़ी समस्या 'ड्रग्स' को लेकर संघ ने अपनी चिंता जताई है। बैठक में तय हुआ कि संघ अपने स्वयंसेवकों के माध्यम से गांव-गांव में नशा मुक्ति अभियान छेड़ेगा, ताकि युवाओं को विनाश से बचाया जा सके।     'पंच प्रभुदन' और प्रवासियों से संपर्क: पंजाब से भारी संख्या में युवा विदेशों की ओर पलायन कर रहे हैं। संघ 'पंच प्रभुदन' कार्यक्रम के तहत विदेशों में बसे पंजाबी और सिख समुदाय से संपर्क साधेगा, ताकि उन्हें अपनी मिट्टी और संस्कृति से दोबारा जोड़ा जा सके।

हिंदू धर्म मानव धर्म है, हर पंथ को अपनाने की आज़ादी: दत्तात्रेय होसबाले

गोरखपुर गोरखपुर में आयोजित हिंदू सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है. खोराबार के मालवीय नगर में संबोधन के दौरान उन्होंने हिंदू धर्म को मानव धर्म बताते हुए कहा कि भारत में हर व्यक्ति अपने-अपने पंथ का पालन कर सकता है. 'हिंदू धर्म का अर्थ मानव धर्म' दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि जब हम हिंदू धर्म कहते हैं तो उसका अर्थ मानव धर्म होता है. दुनिया के किसी भी देश के लोग यहां आकर अपने विश्वास और परंपराओं के अनुसार जीवन जी सकते हैं. उन्होंने कहा कि अगर नमाज पढ़ने वाले हमारे मुस्लिम भाई पर्यावरण की दृष्टि से नदी की पूजा कर लें तो इसमें क्या बिगड़ जाता है.  गोरखपुर के खोराबार स्थित खेल मैदान में बोलते हुए उन्‍होंने अपनी बात के समर्थन में सऊदी अरब और रुस का उदाहरण दिया। उन्‍होंने कहा, सऊदी अरब में मुसलमान भाइयों ने जमीन देकर मंदिर बनवाया है। रूस में चर्च के लोगों ने मंदिर बनवाने के लिए जगह दी है। अब हमको भी भारत में यह समझाना होगा। होसबाले ने कहा, अंग्रेजों ने यहां फूट डालो, राज करो की राजनीति की। लेकिन अब हमारे एकजुट होने का समय आ गया है। हिंदू जागेगा तो विश्व जागेगा। मानव का विश्वास जागेगा। हमें बच्चों को हनुमान चालीसा, गीता सिखाने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा, हम कहते हैं कि हम लोगों को विश्व गुरु बनना है। लेकिन अगर हम ही गिरे हुए हैं तो हम दूसरे गिरे हुए आदमी को कैसे खड़ा करेंगे? हम जब खड़े होते हैं, तभी हम गिरे हुए आदमी को उठा सकते हैं। इस सम्मेलन में गोरखपुर और आसपास के जिलों से करीब 5 हजार लोग पहुंचे थे। ‘सूर्य नमस्कार से मुस्लिमों को क्या दिक्कत?’ योग और सूर्य नमस्कार का जिक्र करते हुए दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि इसे संकीर्ण धार्मिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘सूर्य नमस्कार एक वैज्ञानिक और स्वास्थ्य-उन्मुख अभ्यास है. इससे किसी को कोई नुकसान नहीं होता है, और इसे करने से कुछ भी नहीं खोता है. सूर्य नमस्कार से मुस्लिमों का क्या बिगड़ जाएगा? नमाज पढ़ने वाले प्राणायाम करेंगे तो गलत है क्या? नहीं है. हम ये नहीं कहेंगे कि तुम ये करो तो वो पूजा छोड़ दो, नमाज़ छोड़ दो. ये तो हम नहीं कहेंगे.’ दत्तात्रेय होसबाले के बयान को प्वाइंटर्स में समझिए     नमाज़ पढ़ने वाले मुस्लिम बंधु पर्यावरण की दृष्टि से नदी की पूजा करें तो क्या गलत है.     नमाज पढ़ने वाले मुस्लिम लोग सूर्य नमस्कार करें तो क्या गलत है.     नमाज पढ़ने वाले प्राणायाम करेंगे तो गलत है क्या? नहीं है.     हम ये नहीं कहेंगे कि तुम ये करो तो वो पूजा छोड़ दो, नमाज़ छोड़ दो. ये तो हम नहीं कहेंगे ‘राष्ट्र निर्माण केवल चरित्र निर्माण से ही संभव’ सांस्कृतिक एकता पर जोर देते हुए दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारतीय संस्कृति धार्मिक सीमाओं से परे सह-अस्तित्व और प्रकृति के प्रति सम्मान को बढ़ावा देती है. उन्होंने जोर देकर कहा कि आरएसएस समाज के सभी वर्गों के बीच आपसी सम्मान और सद्भाव में विश्वास करता है. ‘हिंदू-हिंदुत्व’, ‘राष्ट्र-राष्ट्रीयता’, और ‘भारत-भारतीयता’ जैसे विषयों पर बोलते हुए दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल चरित्र निर्माण से ही संभव है. ‘पूजा के तरीके अलग पर धर्म एक है’ दत्तात्रेय होसबाले ने कहा, ‘भारतीय सांस्कृतिक जड़ें एक हैं. पूजा के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन धर्म एक है- सनातन. धर्म जीवन जीने की कला है.’ उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के अनुयायियों की जिम्मेदारी है कि वे न केवल अपने लिए बल्कि दुनिया भर में मानवता के कल्याण के लिए मानवीय मूल्यों को बनाए रखें. उन्होंने कहा, ‘हमारे पूर्वजों ने हिंदू धर्म को मानव धर्म बताया है. किसी भी देश के लोग इसका पालन कर सकते हैं. 21 जून को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का उत्सव इसका एक स्पष्ट उदाहरण है.’ 'कोई सूर्य नमस्कार करता है तो इसमें गलत क्या' होसबाले ने कहा कि अगर कोई सूर्य नमस्कार करता है या प्राणायाम करता है तो इसमें गलत क्या है. उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ किसी से यह नहीं कहता कि वह अपनी पूजा, नमाज या धार्मिक परंपराएं छोड़ दे. संघ का कहना सिर्फ इतना है कि मानव धर्म और हिंदू धर्म को समझा जाए.  उन्होंने कहा कि यही वह हिंदू धर्म है, जिसके लिए हमारे पूर्वजों ने हजारों वर्षों तक संघर्ष किया और तमाम आक्रांताओं के सामने भी टिके रहे. इस हिंदू सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.