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ठंड से बचना पड़ा भारी: कांग्रेस नेता की अलाव से लगी आग में दर्दनाक मौत

भानुप्रतापपुर पूर्व जनपद सदस्य और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पुसऊ राम दुग्गा की जलने से मौत हो गई. आशंका जताई जा रही है कि उन्हें हार्टअटैक आया होगा, जिसके बाद तड़पने से पास में जल रहे अलाव से बिस्तर में आग लगी गई, जिससे बिस्तर में ही उनकी मौत हो गई. जानकारी के अनुसार, पुसऊ राम दुग्गा को बीती रात सीने में दर्द महसूस होने पर उन्होंने परिजनों से मालिश करवाई थी. रात में ठंड से बचाव के लिए बिस्तर के समीप अलाव जलाया गया था. देर रात अचानक घर में सामान जलने की आवाज आने पर अन्य कमरों में सो रहे परिजन मृतक के कमरे में पहुंचे. सामने जो नजारा देखने को मिला उससे सबके होश उड़ गए. पुसऊ राम पूरी तरह से जल चुके थे, और मौत भी हो चुकी थी. परिजनों ने कमरे में लगी आग को आनन-फानन में बुझाया, और उसके बाद शव को कमरे से बाहर निकालकर भानुप्रतापपुर पुलिस को सूचना दी. मौत का कारण पोस्टमार्टम के बाद ही पता चल सकेगा. पुसऊ राम दुग्गा के परिजनों के अलावा जिले में कांग्रेस के नेता-कार्यकर्ताओं में शोक का माहौल है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता की मौत पर भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मंडावी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पुसऊ राम दुग्गा की मौत कांग्रेस पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है.

हॉस्टल में छात्र ने की आत्महत्या, छठी कक्षा के सुनील की मौत ने उठाए कई सवाल

जगदलपुर दंतेवाड़ा जिले के बारसूर थाना क्षेत्र में स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां कक्षा 6 के एक 11 वर्षीय छात्र ने अपने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार, मृतक छात्र सुनील पोड़ियामी, जो कि गाटम, दंतेवाड़ा का रहने वाला था, गुरुवार की सुबह अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया। उसके साथ रहने वाले अन्य छात्रों ने उसे पंखे से लटका हुआ देखा तो तत्काल रस्सी काटकर उसे बचाने का प्रयास किया और बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल ले गए। हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आरके बर्मन ने बताया कि फिलहाल छात्र के पास से कोई भी सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस हॉस्टल के अन्य छात्रों से पूछताछ कर रही है ताकि घटना के पीछे के कारणों का पता लगाया जा सके। साथ ही, मृतक छात्र के परिजनों को भी सूचित कर दिया गया है और उनसे भी घटना के संबंध में जानकारी ली जा रही है। छात्रों में भय का माहौल: इस दुखद घटना के बाद से हॉस्टल में छात्रों के बीच भय और दहशत का माहौल है। सभी छात्र सहमे हुए हैं और इस घटना से आहत हैं। स्कूल प्रशासन ने भी छात्रों को ढांढस बंधाने और किसी भी तरह की परेशानी से निपटने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। सुनील पोड़ियामी ने किस अज्ञात कारण से यह खौफनाक कदम उठाया, यह अभी एक पहेली बनी हुई है। पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है।

सिरप सेवन से मौत मामले में केंद्रीय मंत्री ने उठाई जांच की मांग

जयपुर राजस्थान में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत वितरित की जा रही खांसी की दवा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बीते दिनों Dextromethorphan Hydrobromide Syrup लेने के बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने और कई बच्चों की मौत के मामले सामने आए। परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्चों की हालत यह दवा लेने के बाद ही खराब हुई। इसके बाद राज्य सरकार ने संबंधित कंपनी कायसन फार्मा की दवाओं की जांच करवाई, लेकिन रिपोर्ट में कंपनी को क्लीन चिट दे दी गई।  शेखावत ने कही ‘पूरी जांच’ की बात रविवार को जब केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से इस मामले में प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि दवाओं के मानकीकरण को लेकर भारत सहित पूरी दुनिया में एक निश्चित प्रोटोकॉल निर्धारित है। किसी भी दवा को मानव उपभोग के लिए अनुमति देने से पहले उसे कठोर परीक्षण प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत में अंतरराष्ट्रीय मानकों से भी अधिक सख्त परीक्षण प्रणाली अपनाई जाती है। फिर भी यदि किसी तकनीकी कारण, रासायनिक प्रतिक्रिया या किसी अन्य वजह से ऐसी घटनाएं होती हैं, तो इसकी पूरी जांच होनी चाहिए। दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए। शेखावत ने यह भी जोड़ा कि भारत में दवाओं की लाइसेंसिंग, प्रत्येक बैच की पहचान और टेस्टिंग को लेकर सुव्यवस्थित और सख्त नियम बने हुए हैं और यदि कहीं चूक हुई है तो कार्रवाई तय है।   भरतपुर, सीकर और चूरू से आईं शिकायतें गौरतलब है कि बीते दिनों भरतपुर, सीकर और अन्य जिलों से मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना में दी जा रही Dextromethorphan HBr Syrup IP 13.5mg/5ml की गुणवत्ता पर सवाल उठे। पहली शिकायत 28 सितंबर 2025 को भरतपुर से आई, जिसमें बैच नंबर KL-25/147 की दवा का जिक्र था। इसके अगले दिन, 29 सितंबर को सीकर से बैच नंबर KL-25/148 को लेकर शिकायत मिली। शनिवार को चूरू से जयपुर रेफर किए गए छह वर्षीय बच्चे की मौत भी इसी सिरप के सेवन के बाद हुई, जिससे विवाद और गहरा गया।   सरकार की कार्रवाई पर उठे सवाल राज्य सरकार द्वारा कैसन फार्मा की दवा की जांच रिपोर्ट में कोई खामी न मिलने पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को न्याय मिल सके।