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पटना में नशे के कफ सिरप का बड़ा नेटवर्क उजागर, 40 हजार बोतलें जब्त

पटना पटना शहर के चार इलाकों में गुरुवार रात पुलिस ने छापेमारी कर एक करोड़ 80 लाख का प्रतिबंधित कफ सिरप बरामद किया। यह कफ सिरप चोरी-छिपे प्रदेश के कई इलाकों में सप्लाई की जाती थी। मामले में एक ऑटो चालक और पटना सिटी में एक मकान मालिक को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कुल 40 हजार बोतल कफ सिरप जब्त किया है। वहीं तीन धंधेबाज मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए, जिनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। ऑटो में लाई जा रही थी प्रतिबंधित कफ सिरप की खेप सिटी एसपी (पूर्वी) परिचय कुमार ने बताया कि चित्रगुप्त नगर थाना को सूचना मिली थी कि एक ऑटो से प्रतिबंधित कफ सिरप ले जाया जा रहा है। इसके बाद चित्रगुप्तनगर और बहादुरपुर थाने की पुलिस ने घेराबंदी कर ऑटो को पकड़ा। बहादुरपुर से ऑटो चालक सुरेश महतो को गिरफ्तार किया गया। ऑटो से पांच कार्टन कोडीन कफ सिरप बरामद किया गया। पूछताछ में चालक ने बताया कि वह रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र के खेमनीचक से कफ सिरप ला रहा था। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने खेमनीचक और दीदारगंज में छापेमारी की, जहां से 119 कार्टन कोडीनयुक्त कफ सिरप बरामद किया गया। इनमें कुल 16,130 बोतलें थीं। पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी ने खुलासा किया है कि इस अवैध धंधे में मनजीत कुमार, नीरज कुमार, रवि समेत अन्य लोग शामिल हैं, जो कफ सिरप के परिवहन, भंडारण और बिक्री का काम करते हैं। पुलिस अब इन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। पकड़े गए आरोपियों के दूसरे लिंकेज खंगाले जा रहे हैं। पूर्णिया में भी 1035 लीटर कोडिनयुक्त कफ सिरप बरामद वहीं दूसरी तरफ पूर्णिया के जलालगढ़ पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध नशीले पदार्थ के कारोबार का खुलासा किया है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 1035 लीटर कोडिनयुक्त कफ सिरप बरामद किया है। मौके से दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया जबकि दो मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। गुप्त सूचना पर पुलिस का ऐक्शन पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित टीम ने अनुमंडल पदाधिकारी सदर पूर्णिया द्वारा प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी की मौजूदगी में यह कार्रवाई की। अभियान का नेतृत्व जलालगढ़ थानाध्यक्ष दीपक कुमार ने किया। जानकारी के अनुसार पुलिस को गुप्त सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने छापेमारी कर भारी मात्रा में कोडिनयुक्त कफ सिरप बरामद किया। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

दुखद हादसा: नागपुर AIIMS में बच्चा नहीं बच सका, कफ सिरप ने की किडनियों को नुकसान

 बैतूल  कथित जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप से जुड़ा मामला लगातार भयावह होता जा रहा है। पहले ही बच्चों सहित 12 से अधिक लोगों की जान लेने के आरोपों से घिरे इस सिरप ने अब बैतूल जिले के चार वर्षीय हर्ष यदुवंशी की भी जिंदगी छीन ली। 120 दिन तक नागपुर एम्स में चले लंबे इलाज के बाद मासूम ने बीती रात अंतिम सांस ली। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद जब हर्ष का शव उसके गांव टीकाबरी (बोरदेही) पहुंचा तो पूरा गांव गमगीन हो उठा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं ग्रामीणों में जिम्मेदारों के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है। एक साधारण सर्दी-जुकाम से शुरू हुआ दर्दनाक सफर हर्ष यदुवंशी (4 वर्ष) पिता गोकुल यदुवंशी, जो की  ग्राम टिकाबर्री, तहसील आमला, जिला बैतूल का रहने वाला था। परिजनों के अनुसार सितंबर 2025 में हर्ष को सर्दी-जुकाम और बुखार की शिकायत हुई थी। 26 सितंबर को छिंदवाड़ा के परासिया क्षेत्र के एक निजी चिकित्सक डॉ. एस.एस. ठाकुर से उसका इलाज कराया गया। आरोप है कि इसी दौरान उसे कोल्ड्रिफ कफ सिरप दिया गया। दवा लेने के कुछ समय बाद ही बच्चे की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। उल्टी, कमजोरी और पेशाब की दिक्कत के बाद उसे पहले स्थानीय अस्पताल, फिर बड़े मेडिकल सेंटर ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे नागपुर रेफर किया गया, जहां अक्टूबर से एम्स में उसका इलाज चल रहा था। डॉक्टरों ने परिजनों को बताया था कि बच्चे की दोनों किडनियां गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी हैं। 120 दिन तक डायलिसिस और गहन उपचार के बावजूद आखिरकार मासूम जिंदगी की जंग हार गया। शिकायत के बाद भी धीमी रही कार्रवाई हर्ष के चाचा श्याम देवा यदुवंशी ने पहले ही प्रशासन को लिखित शिकायत देकर आशंका जताई थी कि बच्चे की किडनी फेल होने के पीछे संदिग्ध कफ सिरप हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया था कि डॉक्टर को दवा के संभावित दुष्परिणामों की जानकारी होने के बावजूद सिरप दिया गया। 22 नवंबर 2025 को एसडीओपी ने परासिया थाने में दर्ज जहरीले कफ सिरप प्रकरण में इस शिकायत को शामिल करने के निर्देश दिए थे। पुलिस द्वारा न्यायालय में पेश केस डायरी में क्रमांक 39 पर हर्ष का मामला दर्ज बताया गया है। साथ ही श्रीसन फार्मा निर्मित कोल्ड्रिफ सिरप की जब्त बोतल का उल्लेख भी है। गिरफ्तारी हुई, पर सवाल अब भी बाकी अब तक इस मामले में 9 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें दवा कंपनी से जुड़े लोग, केमिकल सप्लायर, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव और मेडिकल स्टोर संचालक शामिल हैं। कुंडीपुरा पुलिस ने भी अलग प्रकरण में दो और गिरफ्तारियां की हैं, लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है। परासिया के स्टेशन रोड स्थित उस निजी क्लीनिक पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जहां इलाज के बाद कई बच्चों में किडनी फेल होने के मामले सामने आए थे? पीड़ित पक्ष के वकील संजय पटोरिया का कहना है कि पुलिस डायरी में डॉ. एस.एस. ठाकुर और डॉ. अमित ठाकुर (पिता-पुत्र) के नाम दर्ज हैं, फिर भी क्लीनिक न तो सील किया गया और न ही उनके खिलाफ वैसी सख्ती दिखाई गई जैसी अन्य आरोपियों पर की गई। गांव में मातम, परिजनों की एक ही मांग “दोषियों को सजा” हर्ष की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। गांव में मातम पसरा है। परिजन बार-बार एक ही सवाल पूछ रहे हैं “अगर समय पर कार्रवाई होती, तो क्या हमारा बच्चा बच सकता था?” परिवार ने सरकार से आर्थिक मदद, निष्पक्ष जांच और सभी जिम्मेदारों चाहे वे डॉक्टर हों, दवा निर्माता या सप्लाई चेन से जुड़े लोग, सभी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे बड़े सवाल यह मामला केवल एक दवा या एक डॉक्टर तक सीमित नहीं रह गया है। यह दवा गुणवत्ता जांच, लाइसेंसिंग, निजी क्लीनिकों की निगरानी और मेडिकल स्टोर्स की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जब तक जांच पूरी नहीं होती और जिम्मेदारों को सजा नहीं मिलती, तब तक लोगों के मन से यह डर खत्म होना मुश्किल है कि एक साधारण सर्दी-जुकाम की दवा भी जानलेवा साबित हो सकती है।  

80 लाख की प्रतिबंधित कफ सिरप के साथ 6 गिरफ्तार

पटना. मालसलामी थाना पुलिस ने प्रतिबंधित कोडीन सिरप के चल रहे अवैध धंधे से जुड़े एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए लगभग अस्सी लाख रुपये के सिरप जब्त करते हुए छह तस्करों को गिरफ्तार किया। छोटी नगला और दीदारगंज चेकपोस्ट के समीप की गई छापेमारी में जब्त छह वाहनों में से तीन पर डाक पार्सल लिखा था। एक टाटा 407 वाहन पर लदे तेज पत्ता के बीच से भी कफ सिरप बरामद किया गया। इन सभी वाहनों से 289 कार्टन में रखे 4485 लीटर सिरप पुलिस ने जब्त किया।  कटिहार, पटना और पटना सिटी में होनी थी सप्लाई  डीएसपी द्वितीय डॉ. गौरव कुमार ने शुक्रवार को बताया कि हिमाचल प्रदेश से मंगाई गई प्रतिबंधित कफ सिरप की बडी खेप कटिहार, पटना और पटना सिटी क्षेत्र में सप्लाई देने की तैयारी थी। पकड़े गए छह बदमाशों में मुख्य सरगना पटना के कदमकुआं थाना अन्तर्गत काजीपुर नया टोला निवासी 34 वर्षीय सूर्यप्रकाश उर्फ गन्नी भी शामिल है।  इसने पटना में सप्लाई देने के लिए एक सौ कार्टन कफ सिरप मंगाया था। गिरफ्तार तस्करों में वैशाली का दो, कटिहार का दो, सहरसा का एक बदमाश है। इस संबंध में डीएसपी द्वितीय डा. गौरव कुमार ने बताया कि वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार एवं नगर पुलिस अधीक्षक पटना पूर्वी की निगरानी में गठित की गयी मालसलामी थाना की पुलिस ने पूरे नेटवर्क का बेनकाब किया है।  गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी उन्होंने बताया कि पकड़े गए बदमाश वैशाली के मुकेश कुमार का पूर्व से आपराधिक रिकॉर्ड है। उन्होंने बताया कि गुरुवार की रात करीब साढ़े आठ बजे छोटी नगला में छापेमारी कर वाहनों के साथ मुकेश और गुड्डू को गिरफ्तार किया गया।  पूछताछ में उन्होंने गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी दी। दूसरी छापेमारी दीदारगंज चेकपोस्ट के समीप की गयी। वहां से अन्य बदमाशों की गिरफ्तारी वाहन व कफ सीरप के साथ हुई। इनकी हुई गिरफ्तारी पटना के कदमकुआं थाना अन्तर्गत काजीपुर नया टोला निवासी स्व. प्रकाश प्रसाद सिंह का पुत्र 34 वर्षीय सूर्यप्रकाश उर्फ गन्नी, वैशाली के राघोपुर स्थित मोहनपुर थाना निवास सीताराम राय का 35 वर्षीय पुत्र मुकेश कुमार, इसी जगह निवासी जगदेव राय का 27 वर्षीय पुत्र गुड्डू कुमार शामिल है। इसके अलावा कटिहार के रोहतारा स्थित चूरबी घाट थाना निवासी अब्दुल बारी का 26 वर्षीय पुत्र मोहम्मद रहीम, इसी थाना क्षेत्र निवासी मोहम्मद जलालुद्दीन का 24 वर्षीय पुत्र मोहम्मद सगीर, सहरसा के कहरा स्थित भटहारा थाना क्षेत्र निवासी फूलेश्वर प्रसाद यादव का 29 वर्षीय पुत्र मिथिलेश कुमार शामिल है। बंगाल से जुड़ा हो सकता है नेटवर्क डीएसपी गौरव कुमार ने बताया कि पूछताछ में कफ सीरप के तस्करों ने कई अहम जानकारी दी है। बंगाल में होने वाले चुनाव को लेकर नशे के इन सौदागरों का नेटवर्क वहां से जुड़ा सकता है। सभी बिंदुओं पर बारीकी से छानबीन करते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

कोडीन कफ सिरप केस का 50 हजार का इनामी हरियाणा से गिरफ्तार

चंडीगढ़. कोडीनयुक्त सीरप और नशीली दवाएं बेचने के आरोपित 50 हजार के इनामी विनोद अग्रवाल को क्राइम ब्रांच और कलक्टरगंज थाना पुलिस ने हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले से गिरफ्तार किया है। उस पर उत्तर प्रदेश, हिमाचल समेत 12 राज्यों में 65 से ज्यादा फर्जी फर्में बनाकर बिक्री करने का आरोप है। क्राइम ब्रांच विनोद अग्रवाल के बेटे समेत अन्य आरोपितों की तलाश में संभावित स्थानों पर दबिश दे रही है। औषधि लाइसेंस की आड़ में एनडीपीएस श्रेणी से संबंधित कोडीनयुक्त सीरप व नशीली दवाएं खरीदने और बेचने वाली फर्मों के खिलाफ औषधि निरीक्षक ने दो माह के भीतर कलक्टरगंज थाने में चार, रायपुरवा, कल्याणपुर, हनुमंत विहार थाने में एक-एक मुकदमे कराए थे। इसमें अग्रवाल ब्रदर्स के संचालक फीलखाना के पटकापुर में रहने वाले विनोद अग्रवाल, उनका बेटा शिवम अग्रवाल, अनमोल गुप्ता, मंजू शर्मा, अभिषेक शर्मा व वेदप्रकाश शिवहरे, सुमित केसरवानी आरोपित हैं। प्रकरण की जांच एसआइटी कर रही है। हालांकि पहले थानों से भी विवेचना की जा रही थी, जिसे एक सप्ताह पहले क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। पुलिस की जांच में पता चला कि आरोपितों ने उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, हिमाचल, ओडिशा, असम, मिजोरम राज्यों के जिलों में 200 से अधिक फर्में बनाकर लगभग 12 लाख शीशियां कोडीनयुक्त सीरप व नशीली दवाओं की बिक्री होना दिखाया था। कलक्टरगंज थानाध्यक्ष विनय तिवारी ने बताया कि आरोपित विनोद अग्रवाल की अग्रवाल ब्रदर्स से जुड़ी लगभग 65 फर्में फर्जी बताई जा रही हैं। उस पर 50 हजार का इनाम घोषित था। 

कफ सिरप कांड पर यूपी सरकार सख्त: मंत्री सुरेश खन्ना बोले– किसी कीमत पर नहीं बचेंगे दोषी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कोडिंग युक्त कफ सिरप मामले को लेकर सरकार की गंभीरता के बारे में बात की उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में बक्शा नहीं जाएगा… साथ ही उन्होंने कफ़ सिरप मामले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्ति है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव आरोपियों को बचाना चाहते हैं और जिस तरह से अखिलेश यादव का फोटो आरोपी के साथ सामने आया है उस पर अखिलेश यादव को देश को यह बताना चाहिए कि उनका इनके साथ क्या संबंध है देश यह जवाब चाहता है। अखिलेश यादव लगातार सरकार के ऊपर इसलिए हमला बोलते हैं कि उनके पास कोई मुद्दा नहीं बचा है सरकार ने कफ सिरप मामले में गंभीर धाराओं में आरोपियों के साथ-साथ 140 फर्म के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है।

कफ सिरप केस पर बहस खत्म, हाईकोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रखा, आरोपियों की याचिका—मामला हो रद्द

प्रयागराज प्रदेश के चर्चित कफ सिरप मामले में दर्ज एफआईआर को खारिज करने की मांग वाली अर्जी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित किया है। शुक्रवार को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने दोनों तरफ के वकीलों की दलील सुनने के बाद फैसला रिजर्व कर लिया है। वाराणसी के शुभम जायसवाल सहित 40 आरोपियों ने अपने खिलाफ प्रदेश के विभिन्न जिलों में दर्ज केस को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा रखी है। कोडीनयुक्त कफ सिरप कांड की जांच में यूपी एसटीएफ ने लखनऊ आलम बाग के पास से सहारनपुर से दो अभियुक्त अभिषेक शर्मा और शुभम शर्मा को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में 25 हजार रुपये के इनामी शुभम जायसवाल का पूरा नेटवर्क सामने आया है। दोनों ने एसटीएफ को बताया कि दोनों विशाल और विभोर राणा के लिए काम करते थे। विशाल और विभोर का शुभम जायसवाल के साथ व्यापारिक संबंध था। तीनों मिलकर कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी करते थे। माल वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर और आगरा समेत अन्य जगहों से फर्जी ई वे बिल बनाकर बंगाल के अलावा अन्य जगहों पर भेजा जाता था। विशाल और विभोर के नेटवर्क के जरिये सिरप देश के कई राज्यों में पहुंचाया जाता था। इसी बीच शुभम ने अपने पिता भोला जायसवाल के नाम पर रांची में एबॉट कंपनी की सुपर स्टॉकिस्ट हासिल कर ली और इन दोनों से किनारा कर लिया। इसके बाद लाइसेंस और दस्तावेज की आड़ में वह बड़े पैमाने पर कफ सिरप की सप्लाई को कानूनी शिपमेंट की तरह दिखाता था। सुपर सुपर स्टॉकिस्ट के बाद शुभम की सप्लाई चेन पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई थी। सहारनपुर में पकड़े गए दोनों अभियुक्तों ने पूछताछ में बताया कि सिरप की कई खेप रांची से सीधे यूपी और हरियाणा रूट पर भेजी भेजी गई। गाजियाबाद में कोडीन सिरप का बनाया था गोदाम ड्रग विभाग की जांच में सामने आया है कि शुभम ने अपनी फर्म शैली ट्रेडर्स के नाम पर हिमाचल की फर्म से सिरप मंगाने के बाद उसे गाजियाबाद के गोदाम में रखता था। फर्जी फर्मों के कागज तैयार कर उसे आगरा, लखनऊ और वाराणसी तक सप्लाई करता था। वाराणसी से कोडीन सिरप की बड़ी खेप सोनभद्र के रास्ते झारखंड और पश्चिम बंगाल जाती थी। इसके बाद बांग्लादेश और नेपाल तक जाती थी।

यूपी में अभूतपूर्व घोटाला! कफ सिरप रैकेट में 700+ फर्जी कंपनियां, अरबों के लेन-देन का ईडी ने किया खुलासा

लखनऊ  ईडी की तीन प्रदेशों में 40 घंटे से अधिक की छापेमारी में कफ सिरप की काली कमाई का पूरा खेल सामने आ गया। अब तब मिले साक्ष्यों के मुताबिक 220 संचालकों के नाम से 700 से अधिक फर्में बनाई गईं। इनसे अरबों रुपये की कमाई की गई। सबसे दिलचस्प यह रहा कि इसमें अधिकतर फर्में सिर्फ कागजों पर ही रहीं। फर्मों में अधिकृत कई और लोग भी सिर्फ दस्तावेजों में ही पाए गए। ईडी सूत्रों का दावा है कि अभी कई और फर्मों को लेकर साक्ष्य जुटाए जा रहे है। ईडी सामने आए साक्ष्यों के आधार पर जल्दी ही सम्पत्ति जब्त करने की कार्रवाई शुरू करेगी। यूपी, गुजरात और झारखंड में 25 से अधिक ठिकानों पर हुई जांच में जिस तरह से फर्जीवाड़ा सामने आए, उससे ईडी के अफसर भी हैरत में पड़ गए है। ईडी अपनी जांच में यूपी के अंदर ऐसा फर्जीवाड़ा पहली बार मिलने की बात कह रही है। एक अधिकारी के मुताबिक जिस तरह से कदम-कदम पर फर्जीवाड़ा किया गया, उसने पूरे सिस्टम की भी पोल खोल दी है। फेंसेडिल सिरप बनाने वाली एक कम्पनी के कई अफसरों को इस बारे में पता था लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी। एसटीएफ के एएसपी लाल प्रताप सिंह ने अपनी जांच में कहा था कि एक दवा कंपनी के कई अधिकारी भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे।   ईडी की जांच से ही शुभम, आलोक, अमित पर शिकंजा कसा एसटीएफ की पिछले साल जांच पूरी होने के बाद भी मास्टर माइंड शुभम जायसवाल, पूर्व सांसद के करीबी आलोक सिंह, अमित टाटा ने खुद को बचाने के लिए कई हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए थे। एसटीएफ ने जब अमित व आलोक को गिरफ्तार किया तो भी इन लोगों को कोई परेशानी नहीं हुई। कोर्ट में ये आरोपी निश्चिंत दिखे थे लेकिन जैसे ही ईडी ने आलोक, अमित और शुभम के ठिकानों पर छापा मारकर साक्ष्य जुटाने शुरू किए, इनके खेमे में खलबली मच गई। खातों से भी मिल रहे संदिग्ध लेन-देन, कई और नाम सामने आएंगे ईडी सूत्रों का दावा है कि दुबई में छिपे मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल, आलोक सिंह, अमित टाटा के अलावा शुभम के पिता भोला प्रसाद जायसवाल के बैंक खातों में कई बड़े लेन-देन मिले हैं। इनमें से कुछ लेन-देन का पूरा ब्योरा नहीं मिल पाया है। फर्मों के नाम से खुले खातों में भी कुछ लेन-देन ऐसे हैं जिनका आगे का ब्योरा नहीं मिल रहा है। रांची और धनबाद में भी कुछ फर्मों से रकम का आदान-प्रदान हुआ है। इन सबको लेकर अभी ब्योरा जुटाया जा रहा है। इसी आधार पर कहा जा रहा है कि अभी कई और नाम के साथ ही कुछ और फर्जी फर्में सामने आएंगी। जीएसटी विभाग से भी इन फर्मो को लेकर सूची मिलने वाली है। इससे भी ईडी जांच का दायरा आगे और बढ़ाएगी।  

कफ सिरप पीने के बाद महिला की तबीयत बिगड़ी, कोटा में जांच शुरू

कोटा  राजस्थान के कोटा जिले में कफ सिरप पीने के बाद एक महिला की मौत के बाद ड्रग कंट्रोलर की ओर से बड़ा ऐक्शन सामने आया है। ड्रग कंट्रोलर ने मेडिकल स्टोर और गोदाम पर छापा मारा। छापेमारी में 500 से अधिक कफ सिरप की बोतलों को जप्त किया गया है। इन बोतलों के सैंपल को जांच के लिए लेबोरेटरी में भेजा गया है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पूरी कार्रवाई ड्रग कंट्रोलर देवेंद्र गर्ग के नेतृत्व में की गई है। अधिकारी मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई है। जांच में सामने आया है कि कफ सिरप के इन बोतलों को अहमदाबाद से मंगवाया गया था। जांच रिपोर्ट का भी इंतजार है। पुलिस ने भी महिला की डेड बॉडी का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया है। पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। परिजनों की तरफ से दी गई शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है। अंनतपुरा थाने के एसआई रोहित कुमार ने बताया कि महिला की डेड बॉडी का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्ट कराया गया है ताकि संदेह दूर किया जा सके। परिजनों के बयान लिए गए हैं। परिजनों ने बताया कि खांसी होने पर सिरप पीने के बाद कमला देवी की तबीयत बिगड़ गई। महिला को मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। परिजनों ने जो शिकायत दी है उस पर जांच की जा रही है। महिला की पोस्टमार्ट रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि अनंतपुरा थाना क्षेत्र के अजय आहूजा नगर की 57 वर्षीय कमला देवी अपने घर पर दीपावली की साफ-सफाई कर रही थीं। इसी दौरान वह खांसी जुकाम की चपेट में आ गईं। खासी होने पर उसके बेटे ने किसी मेडिकल स्टोर से कफ सिरप की बोतल लाकर दे दी। इसको पीने के बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उनको मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान महिला की हार्टबीट लगातार कम होती गई। आखिर में उनकी मौत हो गई।

कफ सिरप की बिक्री पर बैन, बच्चों की मौत से दहशत में मेडिकल स्टोर वाले

इंदौर  शहर में जेनेरिक कफ सिरप की बिक्री में भारी गिरावट आई है। बच्चों की मौत की खबरों के बाद लोगों ने इन दवाओं से दूरी बना ली है। इस वजह से कई आम कफ सिरप की मांग लगभग खत्म हो गई है। इंदौर केमिस्ट एसोसिएशन के मुताबिक, जेनेरिक कफ सिरप की मांग बहुत कम हो गई है। वहीं, मौसमी सर्दी-खांसी के कारण ब्रांडेड कफ सिरप की बिक्री में थोड़ी कमी आई है। कई माता-पिता अब दवाइयों की जगह घरेलू नुस्खे अपना रहे हैं। बोतलों पर लग रही वार्निंग राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने इन दवाओं पर एक खास चेतावनी लगाना अनिवार्य कर दिया है। इस चेतावनी में लिखा है, 'चार साल से कम उम्र के बच्चों को न दें।' FDA ने 4 अक्टूबर को एक पत्र जारी कर यह भी कहा है कि इन दवाओं को डॉक्टर के पर्चे के बिना नहीं बेचा जा सकता। माल वापस कर रहे दुकानदार दवा बाजार के एक थोक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'छोटे दुकानदार कम मांग के कारण बिना बिका माल वापस कर रहे हैं। डॉक्टर भी जब तक बहुत जरूरी न हो, कफ सिरप नहीं लिख रहे हैं।' बिना पर्चे के नहीं मिल रही कफ सिरप केमिस्ट भी डॉक्टर के पर्चे के बिना कोई भी कफ सिरप नहीं बेच रहे हैं। अशोकनगर केमिस्ट एसोसिएशन के सचिव शरद गुप्ता ने कहा, 'हमने FDA के निर्देशों के अनुसार क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फेनिलेफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड वाले सभी सिरप पैक कर दिए हैं और अपने वितरकों को वापस भेज रहे हैं।'  

क्यों भारत के बच्चों के लिए खतरनाक हो रहा कफ सिरप? WHO ने बताया shocking सच

नई दिल्ली   भारत में कफ सिरप पीने के कारण 5 साल से कम उम्र के 17 बच्चों की मौत के मामले पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने विस्तृत जानकारी जारी की है। WHO ने मौतों का कारण सिरप में खतरनाक रूप से अधिक मात्रा में मौजूद टॉक्सिक केमिकल को बताया है, साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि भारत में दवा टेस्टिंग और उत्पादन में गंभीर चूकें पाई गई हैं। मौत का कारण: 500 गुना ज्यादा ज़हर बच्चों की मौत का मुख्य कारण कफ सिरप में मौजूद ज़हरीला केमिकल डाइएथिलीन ग्लाइकोल (Diethylene Glycol – DEG) था। खतरे का स्तर: यह ज़हरीला केमिकल सिरप में मानक सीमा से लगभग 500 गुना ज्यादा पाया गया था। नुकसान: स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि DEG एक गंभीर जहर है, जो बच्चों में किडनी फेल्योर, न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स (तंत्रिका संबंधी समस्याएँ) और अंततः मौत का कारण बन सकता है। सबसे पहले Coldrif सिरप में यह ज़हरीला केमिकल मिला था, जिसके बाद इसे बैन कर दिया गया। अब, Respifresh और RELIFE सिरप में भी यही ज़हरीला केमिकल पाया गया है। क्यों हुई भारत में कफ सिरप से मौतें? WHO ने अपनी रिपोर्ट में भारत में दवा उत्पादन प्रक्रिया में लापरवाही और नियमों के उल्लंघन को मौतों का बड़ा कारण बताया है।  टेस्टिंग में कमी: WHO ने कहा कि भारत में दवा के लिए ज़रूरी टेस्ट में कमी है। कानूनी चूक: कानून के मुताबिक, दवा के हर बैच का टेस्ट करना ज़रूरी है, लेकिन हाल ही में फैक्ट्री चेक में यह नियम अनदेखा पाया गया। Sresan Pharmaceutical (Coldrif सिरप) की फैक्ट्री बंद कर दी गई है और पुलिस मैनस्लॉटर (गैर इरादतन हत्या) की जाँच कर रही है। Shape Pharma और Rednex Pharmaceuticals की भी सिरप में मानक कमी पाई गई है और उन्हें उत्पादन तथा बिक्री रोकने का आदेश दिया गया है। वैश्विक स्तर पर चिंता WHO ने स्पष्ट किया है कि ये तीनों सिरप मुख्य रूप से केवल भारत में बेचे गए, और अभी तक इनका कोई आधिकारिक निर्यात (Export) नहीं हुआ है। हालांकि, WHO ने चेतावनी दी है कि कुछ सिरप अनौपचारिक रूप से (illegally) विदेशों में भी जा सकते हैं। यह घटना भारत के दवा उद्योग के लिए एक बड़ा झटका है। भारत दुनिया में दवा बनाने में तीसरे नंबर पर है और अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली 40% जेनरिक दवाइयाँ और कई अफ्रीकी देशों की 90% दवा भारत से आती है। इस घटना ने देश और दुनिया में दवा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।