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बेतला नेशनल पार्क में जानवर पानी को तरसे, जंगलों में लू और प्यास का कहर

 लातेहार बेतला नेशनल पार्क सहित पूरा पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) इस समय भीषण और जानलेवा गरमी की चपेट में है. कभी ठंडी बयार के लिए मशहूर रहने वाले पलामू टाइगर रिजर्व का पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. जंगलों में भी गर्म हवाएं चल रही है. जंगल सफारी के दौरान हीटवेव (लू ) का कहर का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए पर्यटकों का आगमन बैकफुट पर चला गया है. आसमान से बरसती आग ने इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवरों का जीना भी दूभर कर दिया है. भीषण तपिश और लू के थपेड़ों से जंगलों में हाहाकार मचा है, जिससे जंगली जानवर अत्यधिक बेचैन हैं. नवजात और नन्हें जंगली जानवरों की मौत की अपुष्ट खबरें मिल रही है. सदियों पुराने कई प्राकृतिक जलस्रोतों को सुख गए है. पानी की एक-एक बूंद के लिए जंगलों में त्राहि-त्राहि मची है. बेकाबू प्यास और भीषण बेचैनी से तड़पते जानवर अब रिजर्व की सुरक्षित सीमा को छोड़कर बाहरी रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं, जहां मौत के सौदागर (शिकारी) हाथ में फंदे और जहर लिए उनके इंतजार में बैठे शिकार कर रहे हैं. सूख गए प्राकृतिक जलस्रोत, कृत्रिम व्यवस्थाएं नाकाफी हिरण बंदर, लंगूर,गौर और जंगली सुअर पानी की तलाश में पागलों की तरह भटक रहे हैं. हालांकि वन विभाग ने कुछ जगहों पर टैंकरों के जरिए कृत्रिम वॉटर होल (जलपात्र) भरने का दावा किया है, लेकिन यह व्यवस्था ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रही है. कड़कड़ाती धूप में इन कृत्रिम गड्ढों का पानी भी कुछ ही घंटों में खौलने लगता है, जो जानवरों के पीने लायक नहीं बचता. जंगल में पानी न मिलने के कारण मजबूरन वन्यजीवों के झुंड रिजर्व से सटे ग्रामीण इलाकों, खेतों और रिहायशी बस्तियों की तरफ आ रहे हैं. जानकारी के अनुसार बाहरी इलाकों और बचे-खुचे पानी के गड्ढों के पास शिकारियों ने गुप्त फंदे (फांस) लगा दिये हैं. प्यास से बेहाल जानवर जैसे ही पानी पीने नीचे झुकते हैं, वे इन फंदों का शिकार हो जा रहे हैं. इसके अलावा, कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा पानी में जहरीले पदार्थ मिलाने की भी आशंका बनी हुई है, जिससे सामूहिक शिकार का खतरा मंडरा रहा है. रात भर गांवों के आसपास मंडराते हैं जानवर: ग्रामीण पीटीआर की सीमा से सटे गांवों के ग्रामीणों ने बताया कि ऐसी गर्मी पहले कभी नहीं देखी थी. पानी की तलाश में हिरण, बाइसन और जंगली सुअर रोज हमारे खेतों की तरफ आ रहे हैं. हाल ही में बाइसन ने एक को मार डाला है. रात को डर के मारे कोई घर से बाहर नहीं निकलता. जंगल के अंदर पानी बिल्कुल नहीं है. कुछ बाहरी लोग रात के समय पानी के गड्ढों के पास संदिग्ध हालत में घूमते देखे गए हैं, जो पक्के तौर पर शिकार के इरादे से आते हैं. हम अलर्ट पर हैं, टैंकरों से की जा रही पानी की सप्लाई: रेंजर रेंजर उमेश कुमार दुबे ने कहा कि तापमान अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है,स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए हैं. कृत्रिम वॉटर होल्स में टैंकरों के जरिए लगातार पानी भरा जा रहा है. इसके साथ ही कुछ चुनिंदा बोरवेल को सोलर पंप से जोड़ा गया है जिससे पानी की निरंतर आपूर्ति हो सके. वहीं शिकार की आशंका को देखते हुए हमारी एंटी-पोचिंग (शिकार विरोधी) टीम और वनकर्मियों की गश्त चौबीसों घंटे बढ़ा दी गई है. ग्रामीणों के साथ मिलकर इको-विकास समिति को सक्रिय किया गया है जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना मिल सके.

गर्मी में बढ़ा किडनी स्टोन का खतरा, डिहाइड्रेशन बन रहा बड़ा कारण

गर्मियों का मौसम आ गया है और देश के कई राज्यों-शहरों का तापमान 40-42 डिग्री से ऊपर जा चुका है. ऐसे में इस मौसम में कई लोगों को स्वास्थ्य समस्याएं भी होने लगती हैं लेकिन हमेशआ की तरह इस बार भी गर्मी का मौसम आते ही किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी के मामलों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है. डॉक्टरों का मानना है कि तापमान में बढ़ोतरी और लाइफस्टाइल की कुछ गलतियां सीधे तौर पर हमारी किडनी पर भारी पड़ रही हैं. दरअसल, जब बाहर का पारा बढ़ता है तो शरीर को ठंडा रखने के लिए हमें सामान्य से कहीं ज्यादा पानी की जरूरत होती है. अगर इसमें चूक हुई तो किडनी में मिनरल्स जमा होने लगते हैं जो बाद में दर्दनाक पथरी का रूप ले लेते हैं. इससे बचने के लिए क्या करें, इस बारे में जानना काफी जरूरी है. पसीना और डिहाइड्रेशन का कनेक्शन हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, तापमान बढ़ने पर शरीर में कैल्शियम का संतुलन बिगड़ता है जिससे स्टोन का रिस्क बढ़ता है इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. राजनाथ कश्यप के अनुसार, पसीने के माध्यम से शरीर का तरल पदार्थ निकल जाता है, जिससे यूरिन में कैल्शियम और ऑक्सालेट जैसे तत्वों का कंसंट्रेशन बढ़ जाता है. आसान शब्दों में समझें तो गर्मी में किडनी स्टोन होने का सबसे बड़ा कारण डिहाइड्रेशन है. जब हमें बहुत ज्यादा पसीना आता है तो शरीर का पानी कम हो जाता है. ऐसी स्थिति में किडनी कम यूरिन बनाती है जो काफी गाढ़ी होती है. यूरिन में कैल्शियम और ऑक्सालेट जैसे तत्व जब पानी की कमी के कारण बाहर नहीं निकल पाते तो वे आपस में जुड़कर क्रिस्टल बनाने लगते हैं. यही क्रिस्टल धीरे-धीरे बड़े होकर पथरी बन जाते हैं. खान-पान की इन गलतियों से बचें गर्मियों में लोग अक्सर कोल्ड ड्रिंक्स या ज्यादा नमक वाले स्नैक्स अधिक खा लेते हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ज्यादा नमक (सोडियम) यूरिन में कैल्शियम की मात्रा बढ़ा देता है, जो स्टोन का मुख्य कारण है. इसके अलावा, रेड मीट और ज्यादा शुगर वाली ड्रिंक्स भी इस खतरे को दोगुना कर देती हैं. अगर आप गर्मियों में एक्सरसाइज ज्यादा करते हैं और उस अनुपात में पानी नहीं पीते तो भी रिस्क बढ़ जाता है. बचाव के लिए क्या करें? मेयो क्लिनिक की रिसर्च के मुताबिक, किडनी स्टोन से बचने का सबसे आसान तरीका है कि आप दिन भर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं. नींबू पानी का सेवन भी बेहद फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें मौजूद साइट्रेट पथरी बनने की प्रक्रिया को रोकता है. साथ ही भोजन में नमक की मात्रा कम रखें और ताजी हरी सब्जियों को प्राथमिकता दें. अगर यूरिन का रंग गहरा पीला है, तो समझ लीजिए कि आपके शरीर को तुरंत पानी की जरूरत है.