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पूर्व छत्तीसगढ़ DGP विश्वरंजन का निधन, पटना के अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद आखिरी सांसें लीं

रायपुर  छत्तीसगढ़ पुलिस (Chhattisgarh Police) महकमे से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) विश्वरंजन का निधन हो गया है। कार्डियक (दिल से जुड़ी) समस्या के चलते पिछले करीब एक महीने से पटना के मेदांता अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। एक दिन पहले ही क्रिटिकल कंडीशन को देखते हुए उन्हें डायलिसिस पर रखा गया था। उनके निधन से पूरे छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक और पुलिस अमले में शोक की लहर दौड़ गई है। 1973 बैच के IPS, 4 साल तक संभाली CG पुलिस की कमान विश्वरंजन 1973 बैच के बेहद तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी थे। मध्य प्रदेश के विभाजन के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला था। जुलाई 2007 में उन्हें छत्तीसगढ़ का छठवां DGP बनाया गया था। जुलाई 2011 तक करीब 4 साल उन्होंने इस अहम जिम्मेदारी को संभाला। नक्सल प्रभावित (Naxal-hit) इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में उनका बड़ा रोल रहा। इससे पहले वह लंबे समय तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर रहे और एडिशनल डायरेक्टर जैसे अहम पदों पर भी सेवाएं दीं। पूर्व डीजीपी विश्वरंजन की तबीयत पिछले महीने अचानक बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि उन्हें गंभीर कार्डियक (हृदय) संबंधी समस्या हुई थी। इसी वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इलाज के दौरान उनकी हालत गंभीर बनी रही और उन्होंने अस्पताल में ही अंतिम सांस ली। छत्तीसगढ़ के छठवें डीजीपी रहे विश्वरंजन विश्वरंजन छत्तीसगढ़ के छठवें डीजीपी रहे हैं। 2007 में तत्कालीन डीजीपी ओपी राठौर के निधन के बाद राज्य सरकार ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी थी। वे लगभग चार वर्षों तक इस पद पर रहे और अपने कार्यकाल के दौरान पुलिस प्रशासन में कई अहम सुधार किए। उनके नेतृत्व में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। आईबी में भी रहे लंबे समय तक 1973 बैच के आईपीएस अधिकारी विश्वरंजन का प्रशासनिक अनुभव काफी व्यापक रहा है। मध्यप्रदेश के विभाजन के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला था, हालांकि 2007 से पहले वे कभी छत्तीसगढ़ में पदस्थ नहीं रहे थे। वे लंबे समय तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में प्रतिनियुक्ति पर रहे और एडिशनल डायरेक्टर जैसे अहम पद भी संभाले।

हिमाचल की IPS अधिकारी अदिति सिंह की छुट्टियों को लेकर DGP ने लिया फैसला, ड्यूटी जूनियर को दी

शिमला हिमाचल प्रदेश में एक अभूतपूर्व प्रशासनिक कदम उठाते हुए राज्य के डीजीपी अशोक तिवारी ने 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी अदिति सिंह की जिम्मेदारियां उनकी बार-बार की छुट्टियों के दौरान एक अधीनस्थ अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया है. 25 दिन की छुट्टी से प्रभावित हुआ कामकाज आदेश में कहा गया है कि धर्मशाला स्थित स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (SV&ACB) के नॉर्दर्न रेंज में एसपी के पद पर तैनात अदिति सिंह 8 जनवरी से 22 फरवरी के बीच कुल 25 दिनों की छुट्टी पर रहीं. इससे उनके कार्यालय के कामकाज पर असर पड़ा. एडिशनल एसपी को सौंपी गई जिम्मेदारी निर्देश के अनुसार, एडिशनल एसपी ब्रह्म दास भाटिया को अगली सूचना तक उनकी जिम्मेदारियां संभालने को कहा गया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि कार्य की निरंतरता बनाए रखने के लिए वह अदिति सिंह की मौजूदगी में भी उनसे जुड़े रहेंगे. पहले भी रहीं थीं मुख्यालय से अनुपस्थित डीजीपी के आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि अदिति सिंह दिसंबर में नैनीताल में आयोजित एक आधिकारिक मिड-करियर इंटरैक्शन प्रोग्राम के कारण भी मुख्यालय से अनुपस्थित रही थीं. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. कब-कब ली छुट्टी डीजीपी अशोक तिवारी के आदेश में अदिति सिंह द्वारा ली गई छुट्टियों का भी विस्तृत ब्योरा दिया गया है. आदेश के अनुसार, अदिति सिंह 8 जनवरी से 11 जनवरी तक क्रमशः दो दिन के आकस्मिक अवकाश और बीमार अवकाश पर रहीं. इसके बाद उन्होंने 12 जनवरी को एक दिन का आकस्मिक अवकाश लिया. फिर 16 जनवरी से 19 जनवरी के बीच उन्होंने तीन दिन का आकस्मिक अवकाश और एक दिन का बीमार अवकाश लिया. बाद में 8 फरवरी से 22 फरवरी तक वह 13 दिन के अर्जित अवकाश और दो दिन के बीमार अवकाश पर रहीं. आदेश में कहा गया है, 'यह देखा गया है कि अदिति सिंह, आईपीएस, पुलिस अधीक्षक, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी), नॉर्दर्न रेंज, धर्मशाला, बार-बार अवकाश पर जा रही हैं, जिसके कारण एसपी, एसवी एंड एसीबी, नॉर्दर्न रेंज, धर्मशाला के कार्यालय के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.'

डीजीपी ने भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों को प्रदान की नई रैंक

डीजीपी ने भारतीय पुलिस सेवा के पदोन्नत अधिकारियों को लगाई रैंक कहा, आपका कार्य व्यवहार बनेगा अन्य अधिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत भोपाल  मध्यप्रदेश शासन गृह विभाग द्वारा भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है। इसी अनुक्रम में गुरूवार को पुलिस मुख्यालय, भोपाल में डीजीपी श्री कैलाश मकवाणा ने पदोन्नत अधिकारियों को रैंक लगाई। इस दौरान डीजीपी श्री मकवाणा ने सभी पदोन्नत अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पदोन्नति आपकी समर्पित और निष्ठापूर्ण सेवा का प्रतिफल है। प्रदेश में कानून एवं शांति व्यवस्था बरकरार रखने में आपने उत्कृष्ट कार्य किया है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि भविष्य में भी आप प्रदेश की प्रगति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने में अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय देंगे। आप अपनी कार्यप्रणाली को ऐसा रखें कि वह अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बने। उन्होंने कहा कि समय पर पदोन्नति प्रदान की जाना सदैव सरकार की प्राथमिकता रही है, इसका परिपालन करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है।   डीजीपी ने पुलिस मुख्यालय में इन्हें लगाई रैंक :- डीजीपी श्री कैलाश मकवाणा ने पुलिस मुख्यालय में आईजी श्री निरंजन बी. वायंगणकर, श्री शियास ए., श्री ललित शाक्‍यवार, डीआईजी श्री राघवेन्‍द्र सिंह बेलवंशी, श्रीमती किरणलताकेरकटृाश्री रियाज इकबाल, श्री राहुल कुमार लोढा, श्री विवेक सिंहतथा वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक श्री हितेष चौधरी को रैंक लगाई।  इन अधिकारियों को किया गया पदोन्नत  :- उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश शासन गृह विभाग द्वारा 31दिसंबर 2025को जारी आदेशानुसार 1 जनवरी 2026से भारतीय पुलिस सेवा (मध्यप्रदेश कैडर) के 18अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है। इनमें श्री आशुतोष रॉय को एडीजीसे स्‍पेशलडीजी पद पर पदोन्नत किया गया है। श्री प्रमोद वर्मा को आईजी से एडीजी पद पर पदोन्‍नत किया गया है। श्री निरंजन बी. वायंगणकर, श्री शियास ए. तथा श्री ललित शाक्‍यवारको डीआईजी से आईजी के पद पर पदोन्नत किया गया है। इसी प्रकार श्री राकेश सगर, श्री राघवेन्‍द्र सिंह बेलवंशी, श्रीमती किरणलताकेरकटृा, श्री मनोज कुमार राय, श्री रियाज इकबाल, श्री राहुल कुमार लोढा, सुश्री सिमाला प्रसाद, श्री असित यादव, श्री मयंक अवस्‍थी, श्री विवेक सिंह, श्री कुमार प्रतीक, श्री शिवदयाल, श्री शैलेन्‍द्र सिंह चौहान डीआईजी के पद पर पदोन्नत किए गए हैं।  

Hariyana News: नवनियुक्त महानिदेशक अजय सिंघल ने कार्यभार संभाला

चंडीगढ़.  हरियाणा के नवनियुक्त पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने गुरुवार को पंचकूला में अपना कार्यभार संभाला। सेक्टर 6 स्थित हरियाणा पुलिस मुख्यालय में अजय सिंघल ने सलामी ली। इस अवसर पर डीजीपी ने कहा कि वे पुलिस वेलफेयर के लिए काम करेंगे। वे कोशिश करेंगे कि आगे से किसी पुलिस कर्मी की बेटी की शादी है तो उसको वेलफेयर से पांच लाख रुपये दिए जाएं। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के मेंटल हेल्थ के लिए कोशिश की जा रही है कि सप्ताह में एक छुट्टी दी जाए। भ्रष्टाचार के मामले में डीजीपी ने कहा कि वे सुनिश्चित करेंगे कि ऐसे भ्रष्टाचारी विभाग में ना रहें। जो भी ऐसे मामले में पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सिंघल ने कहा कि रोडसेफ्टी, महिला सुरक्षा पर विशेष फोकस होगा। हरियाणा में ऑपरेशन हॉटस्पॉट जारी रहेगा। विपक्ष के आपराधिक गतिविधियां बढ़ने के बयान पर डीजीपी ने कहा कि अगर ऐसी कोई दिक्कत होती तो हरियाणा की जीडीपी कैसे बढ़ती और हरियाणा के लोग इतने खुशहाल कैसे होते। उन्होंने कहा कि जो आतंक फैला रहा वो आतंकवादी है, मगर ये कानून के तहत धाराओं में तब्दील नहीं किया जा सकता है। उन्होंने रोहिंग्या शरणार्थियों को बड़ी चुनौती बताया कि इस पर काम जारी है, पुलिस अलर्ट मोड़ पर है। 

DGP ने आतंकवाद को बताया सनक, कहा- सीधे आम लोगों से मुकाबले की क्षमता नहीं

चंडीगढ़  दिल्ली ब्लास्ट पर हरियाणा के डीजीपी ओपी सिंह ने आतंकवाद को लेकर अपने एक्स अकाउंट पर एक लंबी चौड़ी पोस्ट की है, जिसमें उन्होंने आतंकवाद को सनक बताया है। उन्होंने पोस्ट में लिखा है कि आतंकियों की कोई औकात नहीं, वो आम लोगों को टारगेट करते हैं। डीजीपी ओपी  सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जन-सुरक्षा एक कभी न थमने वाला काम है।  ऊपर से ये ऑक्सीजन की तरह है। थोड़ा भी कम होने पर दम घुटने लगता है। खतरा हर तरफ से है। सनकी और चालक लोग शिकार में लगे रहते हैं। अपराध तंत्र भी उनको नाथने में लगा रहता है। वो कभी पहले धरे जाते हैं, कभी बाद में। उन्होंने लिखा कि आतंकवाद एक अलग ही लेवल का सनक है। सिरफिरे अपने औने-पौने मनवाने के फेर में लगे रहते हैं। सीधी लड़ाई की औकात नहीं है। सो, आम लोगों को टारगेट करते हैं। मकसद होता है दहशत फैलाना। इनको रोकने के लिए राज्य पुलिस से लेकर केंद्रीय एजेंसियों तक का एक व्यापक तंत्र है। दिन-रात काम करता है।  हमने NCR क्षेत्र के अपने एंटी-टेररिज्म तंत्र को और भी मजबूत किया: डीजीपी  डीजीपी ने कहा कि कल ही फरीदाबाद में मैंने एक अन्तर्राजीय बैठक की। केंद्रीय खुफिया एजेंसी, दिल्ली पुलिस और यूपी के एंटी-टेररिज्म में लगे पुलिस अधिकारी शामिल हुए। हमने सूचनाएं एवं स्टेटस अपडेट साझा किया। सुरक्षा एजेंसियां जब मिलकर काम करती है तो एक और एक ग्यारह होता है। हमने हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र के अपने एंटी-टेररिज्म तंत्र को और भी मजबूत किया है। ये सूचनाएं इकट्ठी करेगी, अनुसंधान करेगी और आंतकवादी गतिविधियों के संदिग्धों के खिलाफ लगातार अभियान चलाएगी। लेकिन आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में सबसे कारगर हथियार है अलर्ट आम नागरिक। जैसे ही कोई संदिग्ध आदमी, गतिविधि या वस्तु मिले, 112 पर फोन घुमायें या स्थानीय पुलिस को बतायें। इससे आतंकियों को छिपने की जगह नहीं मिलेगी, उन्हें प्लानिंग और ऑपरेशन के लिए स्पेस नहीं मिलेगा और समय रहते उनके मंसूबों को निष्फल किया जा सकेगा।  आतंकवादी को सिर्फ जहाज के टेक-ऑफ की ट्रेनिंगः ओपी सिंह ओपी सिंह ने कहा कि जैसे कि अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड टावर पर हमले से पहले अलकायदा के आतंकवादी सिर्फ जहाज के टेक-ऑफ की ट्रेनिंग ले रहे थे। ट्रेनर अगर इसे नोट करता कि इनकी रुचि लैंडिंग में नहीं है और स्थानीय पुलिस को बता देता तो उनकी कम से कम उनकी ये योजना सिरे नहीं चढ़ती। इजराइल के दुश्मन अरब देशों से घिरे होने के बावजूद उनकी पुलिस भारी संख्या में आतंकी हमले को विफल कर देती है। एक कारण ये भी है कि वहां के नागरिक सतर्क रहते हैं। कुछ भी संदिग्ध लगा तो फौरन पुलिस को खबर कर देते हैं।  लोगों से की अपील उन्होंने कहा कि  करनाल में कुछ दिनों पहले ही एक जागरूक होटलकर्मी ने संदिग्ध पहचान पत्र के आधार पर कमरे बुक कराने वाले के बारे में पुलिस को इत्तला दी। रात भर के सघन अंतर्ज़िला ऑपरेशन के बाद उसे धर दबोचा गया। पूछताछ के बाद मामला कुछ और निकला लेकिन एक सजग होटलकर्मी ने अपना काम तो कर ही दिया था। आप भी आतंकवाद के खिलाफ पुलिस के आंख और कान बनें। संदिग्ध व्यक्ति, गतिविधि और वस्तु के बारे में पुलिस को 112 पर फौरन बतायें।   

कांग्रेस विधायक की शिकायत पर पंजाब में SSF गाड़ियों की खरीद की होगी जांच, गवर्नर ने आदेश दिए

चंडीगढ़ पंजाब सरकार की तरफ से शुरू की गई सड़क सुरक्षा फोर्स के लिए इस्तेमाल करने के लिए खरीदी गईं 144 टोयोटा हिल्क्स वाहनों की खरीद की जांच होगी। पंजाब गवर्नर गुलाब चंद कटारिया के कार्यालय से मिले पत्र के बाद पंजाब सरकार के गृह विभाग ने इसकी जांच पंजाब पुलिस डीजीपी को सौंपी। जांच करने का पत्र 31 अक्टूबर 2025 को ही जारी कर दिया गया था। पंद्रह दिन में इसकी जांच पूरी कर रिपोर्ट शिकायतकर्ता को सौंपने के साथ साथ गवर्नर कार्यालय और गृह विभाग को भी दी जानी है। यानि कि जांच की रिपोर्ट 15 नवंबर 2025 को दी जानी है। यह पत्र अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सुखपाल सिंह खैहरा ने उठाया था मुद्दा, 14.50 रुपए गबन के आरोप पंजाब कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा की तरफ से तीन माह पहले इस मुद्दे को उठाया गया था, उनका कहना है कि 2024 में सड़क सुरक्षा बल के लिए थोक में 144 टोयोटा हिलक्स वाहन खरीदते समय टोयोटा कंपनी से छूट की सुविधा का लाभ नहीं उठाया? क्योंकि व्यक्तिगत ग्राहकों को उसी टोयोटा हिलक्स वाहन पर 10 लाख रुपए की छूट दी जाती है (बिल की प्रति नीचे संलग्न)! क्या आम आदमी पार्टी अगर सरकार ने व्यक्तिगत ग्राहकों को दी जाने वाली 10 लाख रुपए की छूट का लाभ उठाया होता तो सरकार को 144 टोयोटा हिलक्स की खरीद पर लगभग 14.50 करोड़ रुपए की बचत होती! खैहरा ने डायरेक्टर जरनल ऑफ पुलिस(डीजीपी) के पास शिकायत दर्ज कराई थी कि 144 टोयोटा हिलक्स वाहनों की इस संदिग्ध और संदिग्ध खरीद की जांच होनी चाहिए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या मुख्यमंत्री, उनके ओएसडी या किसी और को इस सौदे के जरिए उक्त छूट की नकद राशि मिली है? खैहरा ने यह बात लगातार उठाई थी कि मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक कल से हमारे आरोपों पर चुप्पी साधी हुई है। जिससे उक्त सौदे पर और संदेह पैदा हो रहा है। पंजाब के लोगों को सच्चाई जानने का अधिकार है ताकि दोषियों को सजा मिल सके। जनवरी 2024 में शुरू की गई थी सड़क सुरक्षा फोर्स पंजाब में सड़क सुरक्षा फोर्स योजना जनवरी 2024 में शुरू की गई थी। इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने 144 टोयटा हिल्क्स गाडियों को हरी झंडी देकर रवाना किया था। इस फोर्स को प्रदेश की सड़कों पर लगाया गया है ताकि सड़क हादसे में घायल हुए लोगों को तुरंत अस्पताल तक पहुंचाया जा सके। सरकार का दावा है कि इन वाहनों की सहायता से अब तक करीबन 40 हजार लोगों को सहायता मिली है।  

गैंगस्टर का असली चेहरा! जेल में काम करते हुए DGP ने दलजीत सिहाग को कहा चिरकुट

हिसार  जेलों में बंद होकर भी सोशल मीडिया पर अपनी जिंदगी को 'ग्लैमरस' दिखाने वाले गैंगस्टरों की 'माचो पर्सनालिटी' को खत्म करने के लिए हरियाणा पुलिस ने कमर कस ली है। पुलिस अब सलाखों के पीछे के सच्चे और नीरस जीवन को जनता के सामने लाने की तैयारी कर रही है। हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) ओ.पी. सिंह ने शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन गैंगस्टरों के मुखौटे को उतारा जाए और जनता को दिखाया जाए कि जेल के अंदर की जिंदगी कैसी होती है। डीजीपी सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा, "जेलों में सड़ने वाले चिरकुट रील्स से लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं।" 14 अक्टूबर को कार्यभार संभालने के बाद से डीजीपी ओपी सिंह ने हरियाणा के गिरोहों के खिलाफ चहुंमुखी हमला शुरू कर दिया है। वह एक तरफ गैंगस्टरों के ऑनलाइन आभा मंडल को खत्म कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आत्मसमर्पण करने और सुधरने के इच्छुक लोगों के लिए वापसी का रास्ता भी पेश कर रहे हैं। 5 नवंबर को पुलिस ने 'ऑपरेशन ट्रैकडाउन' शुरू किया, जो हालिया गोलीबारी से जुड़े भगोड़ों को पकड़ने के लिए 16 दिवसीय राज्यव्यापी कार्रवाई है। पहले ही दिन 32 गिरफ्तारियां की गईं। डीजीपी ने फरार अपराधियों की सख्त ट्रैकिंग, जमानत मामलों को फिर से खोलने, अपराध से जुड़ी संपत्ति जब्त करने और एसएचओ तथा डीएसपी के लिए व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने का आदेश दिया है। अधिकारियों को अपने "सबसे खराब पांच" और जिला व एसटीएफ इकाइयों को अपने "सबसे खराब 10" और "सबसे खराब 20" को पकड़ना होगा। डीजीपी का गुस्सा कुख्यात गैंगस्टर दलजीत सिहाग उर्फ सिसई के उस सोशल मीडिया पोस्ट से भड़का, जिसमें वह हरियाणा दिवस पर साफ सफेद कपड़ों में हाथ जोड़े दिख रहा था। इस पोस्ट से सहजता और प्रभाव का भ्रम पैदा हो रहा था। सिहाग झज्जर जेल में बंद है, जहां उसे टॉयलेट सफाई का काम सौंपा गया है। पुलिस जांच में पता चला कि 55 से अधिक मामलों का सामना कर रहे सिहाग ने 5,000 प्रति माह पर जींद निवासी 27 वर्षीय एक व्यक्ति को अपना सोशल मीडिया संभालने और अदालत में पेशी के दौरान वीडियो शूट करने के लिए रखा था। सोशल मीडिया हैंडलर को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब Meta, X (ट्विटर) और इंस्टाग्राम को "गैंग कल्चर" को बढ़ावा देने वाले अकाउंट्स का विवरण मांगने के लिए नोटिस भेजे गए हैं। डीजीपी सिंह अपनी रणनीति में सख्ती के साथ नरमी पर भी जोर दे रहे हैं। उन्होंने 'द इंडियन एक्सप्रेस' से कहा, "जो भी व्यक्ति वैध रास्ते पर लौटना चाहता है, उसे वापसी का रास्ता दें। लेकिन जो धमकी देते हैं, नुकसान पहुंचाते हैं या जबरन वसूली करते हैं, उन्हें मुंहतोड़ जवाब दें। एक गणतंत्र में, केवल कानून का शासन ही चलेगा।"

चुनावी सुरक्षा पुख्ता: 1650 अर्द्धसैनिक बल मैदान में, DGP ने दिया सख्त संदेश

पटना बिहार में कल यानी 6 नवंबर को पहले चरण का मतदान होगा। पहले चरण में 18 जिलों में 121 सीटों पर वोटिंग होगी। चुनावों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किेए गए। बिहार DGP विनय कुमार ने बयान जारी करते हुए कहा है कि 1650 अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी। 35,000 महिला पुलिस कर्मियों को तैनात किया जाएगा। बूथों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। घोड़े दस्तों से पैट्रोलिंग करवाई जाएगी। असमाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी रहेगी। संवेदनशील क्षेत्रों पर भी नजर रहेगी। मैदान में 1314 प्रत्याशी बता दें कि पहले चरण के चुनाव में 1314 उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे। NDA के घटक जदयू ने 57, भाजपा ने 48, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 13 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) ने 02 प्रत्याशी चुनावी अखाड़े में उतारे हैं। एक अन्य सीट मढ़ौरा में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) प्रत्याशी भोजपुरी फिल्म अभिनेत्री सीमा सिंह का नामांकन रद्द हो गया था। राजग ने इस सीट पर निर्दलीय अंकित कुमार को समर्थन दिया है। वहीं महागठबंधन के घटक राजद ने 71, कांग्रेस ने 24, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा माले) ने 14, भाकपा ने पांच, माकपा और आईआईपी ने तीन-तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये है। ' पहले चरण के मतदान के लिए 45,341 बूथ स्थापित प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने प्रथम चरण में 118 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारे हैं। इन 121 विधानसभा क्षेत्रों में पहले चरण के मतदान में 45341 मतदान केंद्र पर तीन करोड़ 75 लाख 13 हजार 302 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर 122 महिला और 1192 पुरुष प्रत्याशी समेत कुल 1314 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला 6 नवंबर को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में बंद कर देंगे। गौरतलब हो कि मतदाताओं में एक करोड़ 98 लाख 35 हजार 325 पुरुष, एक करोड़ 76 लाख 77 हजार 219 महिला और 758 थर्ड जेंडर शामिल हैं। पहले चरण के चुनाव में सबसे अधिक 20 उम्मीदवार कुढ़नी और मुजफ्फरपुर में वहीं भोरे, अलौली और परबत्ता में सबसे कम पांच प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे हैं। जानकारी हो कि बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए दो चरण में 06 नवंबर और 11 नवंबर को मतदान कराया जाना है। 14 नवंबर को मतगणना होगी और चुनाव की प्रक्रिया 16 नवंबर तक पूरी हो जायेगी। बिहार विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है।

हरियाणा पुलिस के जवानों के लिए नए DGP ओपी सिंह का भावुक संदेश, पढ़कर हर कोई भावुक हो जाएगा

हरियाणा हरियाणा के नवनियुक्त पुलिस महानिदेशक (DGP) ओपी सिंह ने पुलिसकर्मियों को मोटिवेट करने के लिए एक लेटर जारी किया है। इस लेटर में डीजीपी ने कतील शिफाई का एक शेर भी लिखा है- "वो मेरा दोस्त है सारे जहाँ को है मालूम, दया करे वो किसी से तो शर्म आए मुझे।"  उन्होंने पत्र लिखा कि गौरवशाली हरियाणा पुलिस के प्रिय साथियों, हमारे देश का एक गौरवशाली अतीत रहा है। प्राचीन काल में नदी घाटी सभ्यता होने के कारण हम सबसे समृद्ध थे। इसी कारण सीमा पार से हम पर बड़े हमले हुए। हमने सदियों गुलामी झेली। आज़ादी कुछ ही दशकों की बात है। इस थोड़े समय में हम गरीबी, बीमारी और अशिक्षा से काफ़ी हद तक उबरने में सफल हुए हैं। देश और प्रांत निर्वाध तरक्की करे, इसके लिए सुरक्षा बलों के हमारे हज़ारों साथियों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। अकेले हरियाणा में अब तक हमारे चौरासी साथी वीरगति को प्राप्त हुए हैं। मैं उनके सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। हिंसा और छलावा प्रकृति के स्वभाव में है। सभ्य जीवन इसके विरुद्ध अपराध तंत्र का सतत संघर्ष है। प्रजातंत्र का आश्वासन है कि शेर और बकरी एक ही घाट में पानी पियें और शेर को अपनी ताक़त का गुमान ना हो और ना ही बकरी को अपने कमज़ोरी का मलाल। ये सुनिश्चित करने की ज़िम्मेवारी पुलिस को मिली है।

शत्रुजीत कपूर की विदाई के बाद ओपी सिंह को हरियाणा DGP का चार्ज

हरियाणा आईपीएस अधिकारी वाई पूरन सिंह की खुदकुशी मामले में हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर को रातोंरात छुट्टी पर भेज दिया गया है। वहीं उनकी जगह पर एडीजीपी रैंक के सीनियर आईपीएस अधिकारी ओपी सिंह को कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक बनाया गया है। ओपी सिंह दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के जीजा हैं। वह हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन और एफएसएल मधुबन के निदेशक का कार्यभार संभाल रहे थे। पुलिस ने इस मामले में डीजीपी समेत उन सभी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है जिनके नाम सुसाइड नोट में लिखे थे। गौरतलब है कि वाई.पूरन कुमार 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी थे और रोहतक के पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में इंस्पेक्टर जनरल (आईजी) के पद पर तैनात थे। उन्होंने 7 अक्टूबर को कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी। उनके आठ पन्नों के सुसाइड नोट में 13 वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल थे, जिन पर उन्होंने उत्पीड़न और करियर को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए थे। इनमें सबसे अधिक आरोप डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक एसपी पर थे। इस मामले में पूर्व रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारनिया को शनिवार को पद से हटा दिया गया था और उनकी जगह सुरिंदर सिंह भोरिया को रोहतक का नया एसपी नियुक्त किया गया है। फिलहाल बिजारनिया को कोई नया पद नहीं दिया गया है। डीजीपी शत्रुजीत कपूर को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजा गया है। इसके अलावा, चंडीगढ़ पुलिस ने वाई. पूरन कुमार की पत्नी से उनका लैपटॉप भी जांच के लिए मांगा है।