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छत्तीसगढ़ ने धान खरीद में ‘डेटा-संचालित मॉडल’ से एआई तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल किया

रायपुर  छत्तीसगढ़ में धान खरीद व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) द्वारा अपनाई गई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि तकनीक का सही दिशा में उपयोग किया जाए, तो न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाएं सुदृढ़ होती हैं, बल्कि सरकारी खजाने को भी बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विजन और मार्कफेड के चेयरमैन जितेंद्र कुमार शुक्ल (IAS) के नेतृत्व में इस तकनीकी पहल के माध्यम से राज्य ने बिना किसी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में कटौती किए, सिस्टम की कमियों को दूर कर लगभग ₹2,780 करोड़ की प्रत्यक्ष बचत सुनिश्चित की है। वित्तीय वर्ष 2025–26 की धान खरीद प्रक्रिया के समापन के बाद आए आंकड़े चौंकाने वाले और सुखद हैं। इस अवधि के दौरान राज्य में कुल 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई, जिस पर सरकार का कुल व्यय ₹43,720 करोड़ रहा। इसके विपरीत, यदि पिछले वित्तीय वर्ष 2024–25 के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो 149.24 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद पर लगभग ₹46,500 करोड़ खर्च हुए थे। आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन करने पर पता चलता है कि इस बार खरीद की मात्रा में करीब आठ लाख मीट्रिक टन की कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कमी उत्पादन घटने के कारण नहीं, बल्कि गैर-प्रामाणिक प्रविष्टियों, फर्जी पंजीकरण और अन्य सीमावर्ती राज्यों से लाये जाने वाले धान की अवैध रूप से ख़रीदारी पर कड़ाई से लगाए गए नियंत्रण का प्रत्यक्ष परिणाम है। चुनौतियां और तकनीकी समाधान: विगत वर्षों में धान खरीदी के दौरान फर्जी किसान पंजीकरण, रिकॉर्ड में हेराफेरी और भंडारण केंद्रों से धान की चोरी जैसी गंभीर चुनौतियां सामने आती रही थीं। विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, इस विशाल प्रक्रिया में यदि मात्र एक प्रतिशत की भी लीकेज या गड़बड़ी होती है, तो सरकारी खजाने को सालाना कई सौ करोड़ की चपत लगती है। इन्हीं गंभीर चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मार्कफेड ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम 'आईटीआई लिमिटेड' के साथ हाथ मिलाया। आईटीआई लिमिटेड ने इस परियोजना के लिए आवश्यक नेटवर्क प्रबंधन, अत्याधुनिक उपकरणों की स्थापना और निरंतर तकनीकी सहायता प्रदान कर इस मॉडल को धरातल पर उतारा। ये कैमरे संदिग्ध गतिविधियों को स्वतः पहचानने में सक्षम हैं। रायपुर में एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष के रूप में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्थापित किया गया है, जहां लाइव फीड के जरिए पूरे प्रदेश की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर यहीं से तत्काल आवश्यक निर्देश जारी किए जाते हैं। मार्कफेड के प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार शुक्ल ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि, “इस प्रणाली ने न केवल वित्तीय अनुशासन को मजबूत किया है, बल्कि वास्तविक किसानों के हक को भी सुरक्षित किया है। अब बिचौलियों के लिए व्यवस्था में सेंध लगाना लगभग मुश्किल हो गया है।” महज़ ₹48.92 करोड़ की कुल लागत से तैयार इस परियोजना ने निवेश के अनुपात में कई गुना अधिक प्रतिफल (Return on Investment) सुनिश्चित किया है। आईटीआई लिमिटेड के अनुसार, “यह परियोजना 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस (Minimum government, maximum governance)' का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। आज छत्तीसगढ़ का यह डेटा-संचालित मॉडल न केवल देश के अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मानक बन गया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि डिजिटल क्रांति कैसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है।” छत्तीसगढ़ का यह मॉडल यह स्पष्ट करता है कि पारदर्शी सुशासन के लिए तकनीक का अपनाना अनिवार्य है। ₹2,780 करोड़ की यह बचत न केवल वित्तीय सफलता है, बल्कि यह उन हजारों किसानों की जीत है जिन्हें अब बिना किसी बिचौलिए या परेशानी के उनकी फसल का सही दाम मिल रहा है। यह सफलता 'डिजिटल इंडिया' के सपने को ग्रामीण स्तर पर हकीकत में बदल रही है।

इस वर्ष समर्थन मूल्य पर 51 लाख 75 हजार मीट्रिक टन से अधिक हुई धान की खरीदी

गत वर्ष से 8 लाख 22 हजार मीट्रिक टन अधिक हुई धान की खरीदी : खाद्य मंत्री राजपूत इस वर्ष समर्थन मूल्य पर 51 लाख 75 हजार मीट्रिक टन से अधिक हुई धान की खरीदी प्रदेश में गत वर्ष खरीदी गई थी 43 लाख 52 हजार 905 मीट्रिक टन धान भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि धान उपार्जन के लिये निर्धारित तिथि 20 जनवरी तक गत वर्ष से 8 लाख 22 हजार मीट्रिक टन अधिक धान की खरीदी हुई है। इस वर्ष 7 लाख 62 हजार 629 किसानों से 51 लाख 75 हजार 4 मीट्रिक टन धान की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई है। उन्होंने बताया है कि गत वर्ष 43 लाख 52 हजार 905 मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रूपये प्रति क्विंटल है। किसानों को अभी तक 9485 करोड़ रूपये से अधिक राशि का भुगतान भी किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि धान विक्रय के लिये 8 लाख 59 हजार 822 किसानों ने पंजीयन कराया था। एक दिसम्बर से शुरू हुई धान खरीदी के लिये विभिन्न जिलों में 1436 केन्द्र बनाये गये थे। क्रय की गयी धान की 84 प्रतिशत मात्रा 43 लाख 55 हजार 879 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के मुताबिक इस वर्ष धान बेचने किसानों का उत्साह अलग ही नजर आ रहा है। प्रदेश में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रूपए प्रति क्विंटल है। अभी तक पिछले साल की तुलना में 1 लाख 29 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा धान की खरीदी की जा चुकी है। गत वर्ष 43 लाख 52 हजार 905 मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी।मध्यप्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि धान विक्रय के लिये 8 लाख 59 हजार 822 किसानों ने पंजीयन कराया है। एक दिसम्बर से शुरू हुई धान खरीदी के लिये विभिन्न जिलों में 1436 केन्द्र बनाये गये हैं। क्रय की गयी धान की 79 प्रतिशत मात्रा 39 लाख 19 हजार 277 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है।   

सिवनी ने धान खरीदी में पारदर्शिता में सफलता हासिल की, भोपाल टीम ने किया सत्यापित

लखनादौन  खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 के अंतर्गत सिवनी जिले में संचालित धान उपार्जन व्यवस्था अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। धान खरीदी की पारदर्शिता, गुणवत्ता नियंत्रण और सुचारु संचालन का आकलन करने भोपाल से आई विशेष जांच टीम ने जिले के विभिन्न उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण किया, जिसमें व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। भोपाल मुख्यालय से आर.बी. एसोसिएट्स ग्लोबल कनेक्ट प्राइवेट लिमिटेड की जांच एवं निरीक्षण टीम ने लखनादौन, धूमा, धनोरा और सिवनी सहित प्रमुख धान उपार्जन केंद्रों का भौतिक निरीक्षण किया। टीम ने समिति प्रबंधकों, वेयरहाउस प्रभारियों और स्व-सहायता समूह प्रतिनिधियों से प्रत्यक्ष संवाद कर जमीनी हकीकत की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि जिले में धान की खरीदी शासन द्वारा निर्धारित FAQ (फेयर एवरेज क्वालिटी) मानकों के अनुरूप की जा रही है। गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से लागू है, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए केवल मानक गुणवत्ता का धान ही संग्रहित किया जा रहा है। जांच टीम ने यह भी पुष्टि की कि सर्वेयरों की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से, मध्यप्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के दिशा-निर्देशों के अनुसार संपन्न की गई है। चयन में योग्यता और दक्षता को प्राथमिकता दी गई, जिससे किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप या सिफारिश की संभावना नहीं रही। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उपार्जन केंद्रों पर सुधारात्मक प्रबंध भी सुनिश्चित किए गए हैं। यदि धान गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो किसानों को लौटना नहीं पड़ता। केंद्रों पर पंखे और छरने (सिव्स) उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि किसान मौके पर ही धान की सफाई कर सकें। इससे उपार्जन प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और विवाद-रहित बनी है। आर.बी. एसोसिएट्स ग्लोबल कनेक्ट प्रा. लि. के फील्ड ऑफिसर रजनीश कुमार कौरव ने कहा ‘धान उपार्जन में पारदर्शिता और गुणवत्ता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सिवनी जिले में व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गई हैं और सभी अधिकारी शासन निर्देशों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं।’ 

रायपुर: धान खरीदी तिहार बना किसानों के लिए खुशहाली की वजह, पारदर्शी व्यवस्था से बढ़ा भरोसा

रायपुर : धान खरीदी तिहार किसानों के लिए खुशियों और राहत की सौगात ऑनलाइन टोकन, पारदर्शी व्यवस्था और समयबद्ध भुगतान से बढ़ा किसानों का भरोसा रायपुर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समर्थन मूल्य एवं कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत प्रदेशभर में किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। शासन की इस किसान-हितैषी व्यवस्था ने खेतों में महीनों की मेहनत करने वाले अन्नदाताओं को आर्थिक संबल और आत्मविश्वास प्रदान किया है। मौसम की अनिश्चितताओं और कठिन परिश्रम के बीच तैयार की गई फसल का उचित मूल्य समय पर मिलने से किसानों के चेहरे पर संतोष और भरोसे की मुस्कान दिखाई दे रही है। प्रदेश के सभी धान उपार्जन केंद्रों में खरीदी की प्रक्रिया तेज, सुव्यवस्थित और पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है। ऑनलाइन एवं ऑफलाइन टोकन व्यवस्था, सरल प्रक्रिया और समयबद्ध भुगतान ने किसानों को अनावश्यक प्रतीक्षा और असुविधा से मुक्त किया है। डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग से खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़े हैं। इसी क्रम में धान उपार्जन केंद्र पेंड्री पहुंचे किसान नरेश रात्रे ने 30.80 क्विंटल धान का विक्रय किया। उन्होंने बताया कि बीज, खाद, सिंचाई और श्रम पर आने वाली लागत के बाद जब उपज का उचित मूल्य समय पर मिल जाता है, तो किसान का मनोबल कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि केंद्र में नमी परीक्षण, तौल और टोकन वितरण की पूरी प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी और व्यवस्थित है। किसान रात्रे ने विशेष रूप से “तुंहर टोकन” मोबाइल ऐप की सराहना करते हुए कहा कि इस डिजिटल सुविधा ने भीड़, लंबी कतारों और अनावश्यक इंतजार की समस्या को समाप्त कर दिया है। घर बैठे ऑनलाइन टोकन बुक कर निर्धारित समय पर केंद्र पहुंचने से धान की खरीदी सुगमता से हो जाती है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की यह व्यवस्था किसानों की मेहनत को सही सम्मान देने वाली है। धान उपार्जन केंद्रों पर छांव, पेयजल, शौचालय सहित सभी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता से किसानों को सम्मानजनक और सुविधाजनक वातावरण मिल रहा है। प्रदेशभर में जिला प्रशासन द्वारा धान खरीदी केंद्रों की सतत निगरानी की जा रही है। बेहतर प्रबंधन, डिजिटल प्रणाली और प्रशासनिक सक्रियता के कारण राज्य में धान खरीदी कार्य पूर्ण पारदर्शिता, गति और सुगमता के साथ संपन्न हो रहा है, जिससे किसान वर्ग में संतोष और विश्वास का वातावरण निर्मित हुआ है।

रायपुर: डिजिटल व्यवस्था और धान के बेहतर मूल्य से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत

रायपुर : डिजिटल व्यवस्था और धान के सर्वाधिक मूल्य से किसान हो रहे समृद्ध किसान तुहंर टोकन ऐप से 24×7 टोकन काटने की सुविधा खेत में बोर कराकर सिंचाई का मिला साधन, अन्य फसलों की खेती से बढ़ी आमदनी रायपुर प्रदेश में धान खरीदी तिहार किसानों के लिए खुशहाली लेकर आया है। राज्य सरकार द्वारा धान का सर्वाधिक समर्थन मूल्य तथा पारदर्शी और तकनीक आधारित खरीदी व्यवस्था से किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। धान उपार्जन केन्द्रों में लागू डिजिटल टोकन प्रणाली एवं सरल प्रक्रियाओं ने धान विक्रय को सुगम, सरल और आसान बना दिया है। सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड अंतर्गत मेंड्राकला धान उपार्जन केन्द्र में धान विक्रय के लिए पहुंचे ग्राम पंचायत भिट्ठी कला के रहने वाले लघु किसान श्री श्याम लाल ने बताया कि उनके पास कुल 111.80 क्विंटल धान का रकबा है। उन्होंने बताया कि पहले उन्होंने धान उपार्जन समिति के माध्यम से टोकन कटवाया था, जहां किसानों की अधिक भीड़ के कारण समय अधिक लगा। इसके बाद उन्होंने किसान तुहंर टोकन ऐप का उपयोग कर घर बैठे ही 22.80 क्विंटल का अपना टोकन काटा लिया। किसान श्री श्याम लाल ने बताया कि डिजिटल टोकन सुविधा से टोकन काटना बेहद आसान हो गया है। अब समिति केन्द्र के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ते, जिससे समय, श्रम और खर्च की बचत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था किसानों को सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि धान उपार्जन केन्द्र पहुंचते ही नमी परीक्षण सहित सभी आवश्यक प्रक्रियाएं त्वरित रूप से पूर्ण की गईं तथा समय पर बारदाना उपलब्ध कराया गया। तौल की प्रक्रिया भी पूरी तरह सुव्यवस्थित रही और धान विक्रय में किसी प्रकार की समस्या नहीं आई। कृषक श्री श्याम लाल ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान का सर्वाधिक मूल्य दिया जा रहा है, जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष धान विक्रय से प्राप्त आय से उन्होंने खेत में बोर कराया, जिससे सिंचाई की साधन उपलब्ध हुआ। वर्तमान में वे खेती का विस्तार करते हुए गेहूं, दलहन, तिलहन एवं सब्जी की खेती भी कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है। कृषक श्री श्याम लाल ने धान खरीदी की पारदर्शी और किसान हितैषी व्यवस्था की सराहना करते हुए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि डिजिटल व्यवस्था ने किसानों के लिए धान विक्रय करना आसान बनाया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धान खरीद की रफ्तार और तेज करने के दिए निर्देश

धान खरीद में नया रिकॉर्ड: 4 लाख से अधिक किसानों से खरीदा गया 25 लाख मीट्रिक टन धान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धान खरीद की रफ्तार और तेज करने के दिए निर्देश 4743 क्रय केंद्रों के माध्यम से खरीद, डीबीटी से सीधे किसानों के खातों में भुगतान लखनऊ योगी सरकार ने वर्ष 2025-26 में धान खरीद के मोर्चे पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में गुरुवार तक चार लाख से अधिक किसानों से लगभग 25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद पूरी कर ली गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि धान खरीद की प्रक्रिया को और तेज किया जाए, ताकि एक भी पात्र किसान लाभ से वंचित न रहे। प्रदेश में धान खरीद के लिए अब तक 8,67,232 किसानों ने पंजीकरण करा लिया है। इनमें से 18 दिसंबर तक 4,08,740 किसानों से धान की खरीद पूरी हो चुकी है और उनके खातों में डीबीटी के माध्यम से भुगतान की प्रक्रिया भी तेजी से की जा रही है। 4743 धान क्रय केंद्र पर पारदर्शी खरीद योगी सरकार ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रदेशभर में 4743 धान क्रय केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों पर तौल, भुगतान और अन्य व्यवस्थाएं पूरी पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों को क्रय केंद्रों पर किसी भी प्रकार की असुविधा न होने पाए। तौल और भुगतान में कोई देरी न की जाए और सभी केंद्र तय मानकों के अनुसार संचालित हों। योगी सरकार का किसानों की ‘आर्थिक समृद्धि’ पर विशेष जोर धान खरीद अभियान के जरिए योगी सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है अन्नदाता किसानों की आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करना। एक ओर सरकार धान की निर्बाध खरीद कर रही है, तो दूसरी ओर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान किया जा रहा है। इस व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है और किसानों को समय पर पैसा मिल रहा है।

रायपुर: किसान हंसराज साहू की मेहनत से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा कदम, समर्थन मूल्य से मिली सफलता

रायपुर : समर्थन मूल्य से आत्मनिर्भरता तक: किसान हंसराज साहू की मेहनत ने बदली रफ्तार ई-स्कूटी बनी समृद्धि की पहचान रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियाँ आज गांवों में खुशहाली और आत्मनिर्भरता की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की पारदर्शी व्यवस्था ने किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी धमतरी जिले के ग्राम बोड़रा के किसान श्री हंसराज साहू की है। जिन्होंने सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आधुनिक सुविधाओं को भी अपनाया। श्री हंसराज साहू बताते हैं कि उन्होंने पिछले खरीफ सत्र में संबलपुर सहकारी समिति में समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय किया। धान बिक्री से प्राप्त राशि से उन्होंने एक ई-स्कूटी खरीदी, जो आज उनके लिए सुविधा, समय की बचत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गई है। साँय-साँय दौड़ती ई-स्कूटी से अब उन्हें धमतरी शहर, खेतों, रिश्तेदारों के घर और दैनिक कार्यों के लिए सुगम आवागमन की सुविधा मिल रही है। इससे न केवल ईंधन खर्च में कमी आई है, बल्कि समय की भी उल्लेखनीय बचत हो रही है। श्री साहू के पास कुल 2 एकड़ 25 डिस्मिल कृषि भूमि है, जिसमें वे पारंपरिक अनुभव और आधुनिक कृषि समझ के साथ धान की खेती करते हैं। इस वर्ष उन्होंने समर्थन मूल्य पर कुल 46 क्विंटल 40 किलोग्राम धान का विक्रय किया है। समय पर भुगतान और स्पष्ट प्रक्रिया से वे बेहद संतुष्ट हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष धान विक्रय से प्राप्त राशि का उपयोग वे अपने पुत्र के विवाह जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक कार्य में करेंगे, जिससे पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। श्री हंसराज साहू ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “तुहर टोकन” मोबाइल ऐप ने धान बेचने की प्रक्रिया को अत्यंत सरल, पारदर्शी और किसान-अनुकूल बना दिया है। पंजीयन से लेकर विक्रय तक अब किसानों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी नहीं होती। किसान हंसराज साहू की यह सफलता कथा इस बात का सशक्त प्रमाण है कि सरकार की दूरदर्शी नीतियाँ और डिजिटल नवाचार जब जमीन पर प्रभावी रूप से लागू होते हैं, तो किसान सशक्त बनते हैं और उनका जीवन स्तर निरंतर ऊँचाइयों की ओर बढ़ता है। यह कहानी प्रदेश के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा है कि वे सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ लेकर समृद्धि की राह पर आगे बढ़ें।

सरकार किसानों के साथ: टोकन सिस्टम में समय की बंदिश खत्म

रायपुर : धान खरीदी को आसान बनाने की दिशा में राज्य सरकार का निर्णायक कदम: धान विक्रय प्रक्रिया हुई सरल, अब दिन-रात कभी भी मिलेगा तूहर टोकन सरकार किसानों के साथ: टोकन सिस्टम में समय की बंदिश खत्म किसानों के लिए बड़ी सहूलियत: तूहर टोकन ऐप अब 24 घंटे उपलब्ध किसानों की सुविधा सर्वोपरि, टोकन व्यवस्था को बनाया गया सहज रायपुर प्रदेश के किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तूहर टोकन ऐप को अब 24×7 खोल दिया गया है। अब मोबाइल एप से टोकन काटने के लिए किसी निर्धारित समय की बाध्यता नहीं रहेगी। किसान दिन-रात किसी भी समय अपनी सुविधा के अनुसार टोकन बुक कर सकेंगे। अब किसान 13 जनवरी तक अगले 20 दिनों तक के लिए टोकन ले सकते हैं।इससे किसानों को धान विक्रय की योजना बनाने और टोकन प्राप्त करने में पर्याप्त समय मिलेगा तथा भीड़ और तकनीकी दबाव की समस्या से राहत मिलेगी। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा 2 एकड़ एवं 2 एकड़ से कम रकबा वाले किसान अब 31 जनवरी तक तूहर टोकन ऐप से टोकन ले सकेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर लघु किसनों के लिए यह सुविधा मुहैया कराई गई है l उल्लेखनीय है कि टोकन प्रत्येक सहकारी समिति को आबंटित सीमा के भीतर ही जारी किए जाएंगे। किसानों से आग्रह है कि वे समय रहते तूहर टोकन ऐप के माध्यम से टोकन प्राप्त करें और किसी भी असुविधा से बचें। *"किसानों की सुविधा और पारदर्शी व्यवस्था हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। तूहर टोकन ऐप को 24×7 खोलने और समय की बाध्यता समाप्त करने का निर्णय इसी सोच का परिणाम है। अब किसान बिना किसी दबाव के, अपनी सुविधा अनुसार टोकन बुक कर सकेंगे। 2 एकड़ एवं 2 एकड़ से कम रकबा वाले किसानों के लिये टोकन की अतिरिक्त समय सीमा और अवधि का विस्तार किसानों को वास्तविक राहत देगा। राज्य सरकार किसान हित में हर संभव कदम उठाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।"-

रायपुर: धान खरीदी केंद्रों में पारदर्शी व्यवस्था, किसान आसानी से बेच रहे हैं अपना धान

रायपुर : धान खरीदी केंद्र में सुगम और पारदर्शी व्यवस्था से किसान आसानी से बेच रहे धान टोकन तुंहर हाथ ऐप से श्री भोलाराम को घर बैठे टोकन की मिली सुविधा रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों का सीधा लाभ इस वर्ष कबीरधाम जिले में धान खरीदी व्यवस्था में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। टोकन तुंहर हाथ ऐप ने किसानों को घर बैठे ही सरलता से टोकन प्राप्त करने की सुविधा दी है, जिससे खरीदी केंद्रों में अनावश्यक भीड़, भागदौड़ और प्रतीक्षा जैसी समस्याएँ लगभग समाप्त हो गई हैं। केंद्रों में बारदाना उपलब्धता, तौल, भंडारण और भुगतान की सभी व्यवस्थाएँ इस बार पहले से कहीं अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और समयबद्ध हैं।       इन्हीं सुविधाओं का लाभ ग्राम छांटा के किसान श्री भोलाराम चंद्रवंशी को मिला है। 5.57 एकड़ भूमि वाले श्री भोलाराम चार एकड़ में धान और शेष में गन्ने की खेती करते हैं। इस सीजन उन्होंने 84.40 क्विंटल धान बेचा और बताते हैं कि पूरे खरीदी प्रक्रिया के दौरान उन्हें एक भी बार किसी प्रकार की समस्या या असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। तौल से लेकर भुगतान तक उनका संपूर्ण कार्य निर्धारित समय में और बिना किसी भागदौड़ के पूरा हो गया।      समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल मिलने से उनकी आमदनी में वृद्धि हुई है। वे बताते हैं कि उचित मूल्य से मिली यह आय उनके परिवार के सपनों को नई दिशा दे रही है। वर्तमान में वे अपने परिवार के लिए पक्का मकान बना रहे हैं और कहते हैं कि पहले जो सपने दूर लगते थे, वे अब सरकार की पारदर्शी और धान खरीदी व्यवस्था की बदौलत साकार हो रहे हैं। इस वर्ष धान खरीदी की सुचारू व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता है। किसान की समृद्धि ही प्रदेश की प्रगति का मार्ग है।

रायपुर : जालबांधा सहकारी समिति में नन्दलाल वर्मा ने 120 क्विंटल धान बेचा

रायपुर : जालबांधा सहकारी समिति में नन्दलाल वर्मा ने 120 क्विंटल धान बेचा ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से प्रक्रिया हुई सुगम, मुख्यमंत्री का किसानों ने जताया आभार रायपुर खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत  खैरागढ़ जिले के जालबांधा सहकारी समिति में ग्राम बघमर्रा के किसान नन्दलाल वर्मा ने शुक्रवार को 120 क्विंटल धान का उपार्जन कराया। पूरी प्रक्रिया के दौरान पंजीयन, तौल तथा रिकॉर्ड प्रविष्टि व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुई। धान तौल के बाद नन्दलाल वर्मा ने बताया कि ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से प्रतीक्षा समय कम हुआ है, जिससे किसानों को बिना भीड़भाड़ के अपनी उपज जमा करने की सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष तौल एवं भंडारण कार्य तेज गति से हो रहे हैं तथा किसान निर्धारित समय पर टोकन के अनुसार पहुंचकर अपना धान आसानी से विक्रय कर पा रहे हैं। फसल कटाई के सीजन में समिति में लगातार धान की आवक बनी हुई है। पारदर्शी तोल-माप एवं भुगतान व्यवस्था को लेकर किसानों में संतोष और भरोसा देखा जा रहा है। इसी क्रम में नन्दलाल वर्मा ने उपार्जन प्रणाली को अधिक सरल व पारदर्शी बनाने हेतु राज्य सरकार एवं मुख्यमंत्री का धन्यवाद भी व्यक्त किया।