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बाबा बागेश्वर ने खोली ‘पर्ची’, कहा- PM मोदी से पहले ही बंद कर दिया था ये काम; नया चुनाव मॉडल जरूरी

छतरपुर बाबा बागेश्‍वर धीरेंद्र कृष्‍ण शास्‍त्री ने कहा कि भारत को अब “एक देश, एक चुनाव” की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ना चाहिए. उनके अनुसार देश में बार-बार होने वाले चुनाव न केवल हजारों करोड़ रुपये खर्च करवा रहे हैं, बल्कि प्रशासनिक मशीनरी और सुरक्षा बलों को भी लंबे समय तक चुनावी ड्यूटी में उलझाए रखते हैं. उनका ऐसा बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है. बद्रीनाथ धाम में कठिन साधना पूरी करने के बाद अपने अनुयायियों को संबोधित करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस बार किसी धार्मिक विषय के बजाय देश की चुनावी व्यवस्था पर खुलकर अपनी राय रखी।  धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में “वन नेशन, वन इलेक्शन” को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस जारी है. बागेश्वर महाराज ने कहा कि यदि पंच, सरपंच, पार्षद, मेयर, विधायक और सांसद तक के चुनाव एक साथ कराए जाएं तो देश का समय, धन और संसाधन तीनों बच सकते हैं. उन्होंने इसे केवल राजनीतिक सुधार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से जुड़ा विषय बताया. उनके इस बयान ने समर्थकों के बीच उत्साह और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।  चुनावी खर्च पर उठाया बड़ा सवाल धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि देश में लगभग हर साल किसी न किसी स्तर पर चुनाव होते रहते हैं. लोकसभा, विधानसभा, नगर निकाय और पंचायत चुनावों की वजह से लगातार सरकारी संसाधन खर्च होते हैं. उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव कराने में हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जिनका उपयोग विकास कार्यों में किया जा सकता है।  पंच से सांसद तक एक साथ चुनाव की वकालत बागेश्वर महाराज का कहना है कि यदि सभी चुनाव एक साथ कराए जाएं तो उम्मीदवारों को भी राहत मिलेगी. एक ही चुनावी अभियान में गांव के पंच से लेकर सांसद तक के उम्मीदवार जनता के बीच जा सकेंगे. इससे चुनावी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और कम खर्चीली बन सकती है।  प्रशासन और सुरक्षा बलों पर भी पड़ता है दबाव उन्होंने कहा कि हर चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अमला चुनावी ड्यूटी में लग जाता है. इससे कई बार नियमित प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं. यदि चुनाव एक साथ हों तो सुरक्षा बलों और सरकारी मशीनरी पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव भी कम होगा।  PM मोदी के कहने से पहले ही बंद कर दिया था यह काम बागेश्वर बाबा के नाम से प्रसिद्ध धीरेंद्र शास्त्री ने सीना ठोककर दावा किया है कि, यदि देश में डीजल पेट्रोल बचाने में सबसे ज्यादा योगदान किसी का है तो वह मैं हूं। उन्होंने कहा कि, यदि कोई कहे तो मैं लिखकर देने को तैयार हूं कि एक महीने में एक लीटर डीजल भी नहीं फूंका। बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री अपने तर्क और बयानों के लिए भी पहचाने जाते हैं। वे अल्हड़ और देसी और चुटीले अंदाज में बोलने के लिए फेमस है। उनका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे दावा कर रहे हैं कि देश में यदि डीजल-पेट्रोल बचाने की बात आएगी तो सीना ठोक के कह सकता हूं कि सबसे ज्यादा मेरा योगदान हैं। वे पीएम मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का जिक्र करते हुए बात कर रहे थे। सीना ठोककर बोले, मैं लिखकर देने को तैयार हूं धीरेंद्र शास्त्री कथा के दौरान यह बात पंडाल में मौजूद लोगों से कर रहे थे। उन्होंने पीएम मोदी की डीजल-पेट्रोल बचाने की अपील का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कोई यदि कहे तो मैं लिखकर देने को तैयार हूं, एक महीने में मैंने एक लीटर भी डीजल नहीं फूंका। बद्रीनाथ में गुप्ता साधना के बाद कथा कर रहे आपको बता दें कि धीरेंद्र शास्त्री बीते 25 दिन से उत्तराखंड देवभूमि में साधना कर रहे हैं। भगवान बद्रीनाथ के धाम में नारायण पर्वत की गुप्ता में एकातिंक साधना में लीन थे। एक छोटी सी गुफा में बर्फीले पहाड़ों के बीच वे साधना में ली थे। दो दिन पहले ही वे साधना पूरी कर नीचे आए और फिर नारायण पर्वत की 13 किलोमीटर की दुर्गम परिक्रमा भी की है।  आर्थिक मजबूती से जोड़ा मुद्दा अपने संबोधन में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने देश की आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि दुनिया में डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और ऐसे समय में भारत को संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग करना चाहिए. उनके अनुसार चुनावी खर्च में कमी लाकर विकास और बुनियादी ढांचे पर ज्यादा निवेश किया जा सकता है।  क्यों चर्चा में है ‘एक देश, एक चुनाव’? देश में लंबे समय से यह बहस चल रही है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं या नहीं. समर्थकों का तर्क है कि इससे चुनावी खर्च कम होगा और प्रशासनिक संसाधनों की बचत होगी. वहीं आलोचकों का मानना है कि इससे संघीय ढांचे और क्षेत्रीय मुद्दों पर असर पड़ सकता है. बागेश्वर महाराज का बयान इस बहस को धार्मिक और सामाजिक मंच से भी नई ऊर्जा देता दिखाई दे रहा है। 

बागेश्वर धाम में कैंसर हॉस्पिटल के निर्माण के लिए पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का 8 देशों का दौरा, जुटाएंगे फंड

छतरपुर   बागेश्वर धाम में कैंसर हॉस्पिटल का निर्माण तेजी से चल रहा है. निर्माण कार्य और हॉस्पिटल के लिए संसाधन जुटाने के लिए बागेश्वर धाम के पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री लगातार प्रयास में जुटे हैं. फंड इकट्ठा करने और डॉक्टर्स की तैनाती के मकसद से पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री देश के कोने-कोने में कथाएं कर रहे हैं. इस दौरान कई उद्योगपति फंड देने की घोषणा कर रहे हैं. अस्पताल बनाने के लिए फंड की व्यवस्था कथा से मिलने वाली राशि और दानदाताओं के सहयोग से की जा रही है. मुंबई में बाबा बागेश्वर की कथा के दौरान मशहूर उद्योगपति रुइया ने भरोसा दिया है कि हॉस्पिटल बनाने की जिम्मेदारी उनका ग्रुप उठाएगा. फंड जुटाने के लिए कई देशों का दौरा करेंगे बाबा बागेश्वर हॉस्पिटल के लिए फंड जमा करने के लिए अब बाबा बागेश्वर कई देशों के दौरे पर निकलने की तैयारी कर रहे हैं. पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया "मैं बागेश्वर में हमारे बनने वाले कैंसर हॉस्पिटल के डेवलपमेंट में मदद करने के लिए 7 या 8 देशों के ट्रिप पर जा रहा हूं. हम अपने कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट में वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं देने की पूरी कोशिश करेंगे. इस मकसद के लिए, हम उन अलग-अलग डॉक्टरों से बात करेंगे जो इस नेक काम के लिए अपनी सर्विस देने को तैयार हैं." बुंदेलखंड का सबसे बड़ा कैंसर हॉस्पिटल बागेश्वर धाम में बुंदेलखंड का सबसे बड़ा कैंसर हॉस्पिटल बनाने का काम जोरों पर चल रहा है. हॉस्पिटल का शिलान्यास बीते साल 23 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. योजना के अनुसार प्रारंभ में 100 बेड का कैंसर अस्पताल शुरू होगा. इसे 25 एकड़ में बनाया जाएगा. इसका काम 4 चरणों में चलाने की योजना है. यहां गरीबों का फ्री इलाज होगा, दवाएं भी फ्री मिलेंगी. शुरुआत में हॉस्पिटल बनने की लागत करीब 200 करोड़ रुपये रखी गई है. इसका संचालन बागेश्वर धाम सेवा समिति के साथ ही मेदांता ग्रुप करेगा. बागेश्वर के कैंसर हॉस्पिटल में क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी योजना के अनुसार बागेश्वर धाम में बनने वाले मल्टी स्पेशियलिटी कैंसर हॉस्पिटल में फूड कोर्ट, धर्मशाला, एग्जीबिशन कॉम्प्लेक्स, फॉर्मेसी एंड शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और सोलर पार्किंग, यज्ञशाला, एंट्रेंस गेट आदि बनाए जाएंगे. हॉस्पिटल में मरीजों को एम्बुलेटरी केयर एरिया, जनरल वार्ड, पैथोलॉजी, सीटी स्कैन, एमआरआई, रेडियोथैरेपी एंड कीमोथैरेपी, ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू आदि की सुविधाएं मिलेंगी. मरीजों और अटेंडर के लिए खाने से लेकर रहने तक की सभी सुविधाएं रहेंगी. जर्मन कैंसर विशेषज्ञ डॉ. एंजेल ने डेरा डाला खास बात ये है कि हॉस्पिटल के निर्माण में जर्मन कैंसर विशेषज्ञ डॉ. एंजेल की तकनीकी सहायता कर रहे हैं. इसके अलावा और भी कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों सहयोग करने में जुटे हैं. योजना के अनुसार कैंसर हॉस्पिटल में पैरामेडिकल स्टाफ जैसे- रेडियोलॉजी समेत अन्य स्पेशलाइजेशन के लिए धाम के बच्चों को अलग-अलग मेडिकल इंस्टीट्यूट में एडमिशन दिलाया जाएगा. किसी को सर्जरी, किसी को कीमो तो किसी को रेडियोलॉजी की ट्रेनिंग दी जाएगी. 

बदल गया बागेश्वर धाम का शेड्यूल: पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताई 7 दिन की खास दिनचर्या

छतरपुर बागेश्वर धाम पर आने वाले श्रद्धालुओं को यह जानने के लिए उत्सुकता रहती थी कि कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का दरबार कब लगेगा। कब उनके दर्शन हो सकेंगे। तो आपको बता दें कि धाम पर अब सात दिन में पांच दिन दरबार लगाया जाएगा। जिसमें नई अर्जी, पुरानी पेशी सहित प्रेतराज का दरबार शामिल हैं। इसे लेकर धाम के कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नई व्यवस्था को लेकर सात दिन की नियमावली बताई है। धीरेंद्र शास्त्री ने शेयर किया वीडियो इस नियमावली के अनुसार ही धाम पर दरबार लगाया जाएगा और अन्य कार्य किए जाएंगे। इस लेकर शास्त्री जी ने एक वीडियो जारी किया है और उस वीडियो में उन्होंने सात दिन की नियमावली बनाई है। आपको बता दें कि धाम पर देशभर से श्रद्धालु रोजाना पहुंचते हैं और शनिवार मंगलवार को तो अत्यधिक भीड़ होती है। अब लोगों को यह जानकारी रहेगी कि वह कब कौन सा दरबार लगाएंगे। रविवार को वह किसी से नहीं मिलेंगे। इस दिन वह धाम की व्यवस्थाओं पर ध्यान देंगे।   यह है धाम की सात दिन की नियमावली सोमवार- नई अर्जी का दरबार लगाया जाएगा। मंगलवार- पुरानी पेशी का दरबार लगाया। बुधवार- नई अर्जी का दरबार लगेगा। जिनके पर्चा नहीं बने उनका दरबार लगेगा। गुरुवार- हर गुरुवार को बागेश्वर धाम पर रहेंगे और श्रद्धालुओं से मिलेंगे। शुक्रवार- नई अर्जी का दरबार लगाया जाएगा। लोगों की समस्याएं बालाजी तक पहुंच सकेंगी। शनिवार- प्रेतराज सरकार का दरबार लगाया जाएगा। रविवार- धाम की व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जाएगा। अन्नपूर्णा की व्यवस्था और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर ध्यान देंगे। इस दिन किसी से नहीं मिलेंगे।